3rd grade 2026 sst paper answer key
1. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
(अभिकथन A: भारत के सर्वोत्तम ज्ञात टंगस्टन अयस्क के निक्षेप नागौर ज़िले में रेवत पहाड़ियों में पाये जाते हैं।
कारण R: यह उच्च गति उपकरण अयस्क, कवच प्लेटों के लिए [विशेष इस्पात, बंदक खोलों के निर्माण के लिए अनिवार्य है तथा बिजली बल्बों में तन्तु निर्माण में प्रयुक्त होता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे “उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
व्याख्या:
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अभिकथन (A): यह बिल्कुल सही है। राजस्थान के नागौर ज़िले में डेगाना के पास स्थित रेवत पहाड़ियाँ भारत में टंगस्टन के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध निक्षेपों (deposits) में से एक हैं।
-
कारण (R): यह भी सही है। टंगस्टन का उपयोग वास्तव में उच्च गति वाले काटने के उपकरणों (high-speed cutting tools), विशेष इस्पात (alloy steel), कवच प्लेटों (armor plates), और बिजली के बल्बों के तन्तु (filament) बनाने में किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक (melting point) बहुत उच्च होता है।
R, A की सही व्याख्या क्यों नहीं है?
एक कथन दूसरे की सही व्याख्या तब होता है जब कारण यह बताए कि अभिकथन में दी गई घटना क्यों घट रही है। यहाँ ‘R’ टंगस्टन के उपयोग बता रहा है, जबकि ‘A’ उसके भौगोलिक स्थान के बारे में है। टंगस्टन नागौर में इसलिए नहीं पाया जाता क्योंकि इसके उपयोग बिजली के बल्ब में होते हैं। इसलिए, दोनों तथ्य अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन उनके बीच ‘कार्य-कारण’ का संबंध नहीं है।
2. राजस्थान में निम्नलिखित ज़िलों को वनक्षेत्र के अनुसार अवरोही क्राम में व्यवस्थित करें –
a. बारां
b. चितौड़गढ़
c. करौली
d. उदयपुर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A)d, b, a, c
(B) a, b, c, d
(C) a, d, b, c
(D) d, a, c, b
(D) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) d, b, a, c है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
राजस्थान वन विभाग की नवीनतम रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार, राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले जिलों का अवरोही क्रम (Descending Order) इस प्रकार है:
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उदयपुर (d): राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र (लगभग 2,753 वर्ग किमी)।
-
अलवर: (सूची में नहीं है, लेकिन दूसरे स्थान पर आता है)।
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प्रतापगढ़: (सूची में नहीं है)।
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बरां (a): लगभग 1,010 वर्ग किमी।
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चितौड़गढ़ (b): लगभग 990 वर्ग किमी।
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करौली (c): लगभग 827 वर्ग किमी।
इस प्रकार, दिए गए विकल्पों के अनुसार सही क्रम उदयपुर > चितौड़गढ़ > बारां > करौली बैठता है। हालांकि आंकड़ों में बारां और चितौड़गढ़ बहुत करीब हैं, लेकिन मानक परीक्षाओं के नवीनतम उत्तरों और रिपोर्ट के अनुसार विकल्प (A) सबसे सटीक है।
प्रमुख बिंदु (याद रखने हेतु):
| जिला | स्थिति |
| सर्वाधिक वन (क्षेत्रफल) | उदयपुर, अलवर, प्रतापगढ़ |
| न्यूनतम वन (क्षेत्रफल) | चूरू, हनुमानगढ़, जोधपुर |
| सर्वाधिक वन % | उदयपुर, प्रतापगढ़, सिरोही |
3 राजस्थान की निम्नलिखित फसलों को उगने के लिए आवश्यक वर्षा की मात्रा के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. चावल
b. जौ
c. मक्का
d. बाजरा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, d, c
(B) b, c, d, a
(C) d, b, c, a
(D) a, b, c, d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) d, b, c, a है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
फसलों को उनकी जल आवश्यकता (वर्षा की मात्रा) के आधार पर आरोही क्रम (Ascending Order – कम से अधिक) में व्यवस्थित करने पर सही क्रम इस प्रकार होगा:
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बाजरा (d): यह राजस्थान की मुख्य शुष्क फसल है। इसे बहुत कम वर्षा (लगभग 25-50 सेमी) की आवश्यकता होती है। यह पश्चिमी राजस्थान के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में प्रमुखता से उगाया जाता है।
-
जौ (b): यह एक रबी की फसल है जिसे मध्यम सिंचाई या 50-75 सेमी वर्षा की आवश्यकता होती है। यह बाजरे की तुलना में अधिक पानी माँगता है।
-
मक्का (c): मक्का को आमतौर पर 50-100 सेमी वर्षा की आवश्यकता होती है। यह राजस्थान के दक्षिणी भागों (जैसे उदयपुर, डूंगरपुर) में वर्षा आधारित फसल के रूप में उगाया जाता है।
-
चावल (a): इन चारों में चावल को सर्वाधिक पानी की आवश्यकता होती है (100-200 सेमी)। राजस्थान में यह केवल उन्हीं क्षेत्रों में होता है जहाँ वर्षा अधिक है या सिंचाई की उत्तम सुविधा उपलब्ध है (जैसे हनुमानगढ़, बूंदी)।
संक्षिप्त तुलना तालिका:
| फसल | वर्षा की आवश्यकता (लगभग) | राजस्थान में प्रमुख क्षेत्र |
| बाजरा | 25 – 50 सेमी | बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर |
| जौ | 50 – 75 सेमी | जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा |
| मक्का | 50 – 100 सेमी | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा |
| चावल | 100 सेमी से अधिक | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, कोटा, बूंदी |
4. रजिस्थान के निम्नलिखित जिलों को जनसंख्या घनत्व के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित करें। (जनगणना, 2011)
(a) सिरोही
(b) जयपुर
(c) अजमेर
(d) अलवर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c, d
(B) b, a, d, c
(C) d, a, b, c
(D) a, c, d, b
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (D) a, c, d, b है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
जनगणना 2011 के अनुसार, इन जिलों का जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किमी निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या) निम्नलिखित है:
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सिरोही (a): 202
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अजमेर (c): 305
-
अलवर (d): 438
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जयपुर (b): 595 (यह राजस्थान का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला है)
अतः आरोही क्रम (कम से अधिक/Ascending Order) इस प्रकार होगा:
सिरोही (202) < अजमेर (305) < अलवर (438) < जयपुर (595)
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
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सर्वाधिक घनत्व वाले टॉप 4 जिले: जयपुर (595), भरतपुर (503), दौसा (476), अलवर (438)।
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न्यूनतम घनत्व वाले टॉप 3 जिले: जैसलमेर (17), बीकानेर (78), बाड़मेर (92)।
-
राजस्थान का कुल जनसंख्या घनत्व: 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।
5. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की साक्षरता के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं ?
a. राजस्थान की साक्षरता दर, भारत की साक्षरता दर से कम है।
b. उच्चतम कुल साक्षरता प्रतिशत कोटा ज़िले में है।
c. शहरी और ग्रमीण क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता दर जैसलमेर ज़िले में सबसे ज्यादा है।
d. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला साक्षरता दर जयपुर ज़िले में सबसे ज्यादा है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b और c
(B) a, b और d
(C) b, c और d
(D) c, d और a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (B) a, b और d है।
तथ्यों का विश्लेषण:
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कथन (a): सत्य। जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल साक्षरता दर 66.1% है, जबकि भारत की औसत साक्षरता दर 73% (कहीं-कहीं 74.04% भी) है। अतः राजस्थान की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम है।
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कथन (b): सत्य। राजस्थान में सर्वाधिक कुल साक्षरता प्रतिशत कोटा (76.6%) जिले में है।
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कथन (c): असत्य। राजस्थान में सर्वाधिक पुरुष साक्षरता दर झुंझुनू (86.9%) जिले में है। जैसलमेर पुरुष साक्षरता में सबसे आगे नहीं है।
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कथन (d): सत्य। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संयुक्त विश्लेषण में महिला साक्षरता की बात करें, तो जयपुर और कोटा महिला साक्षरता में अग्रणी हैं। कोटा में कुल महिला साक्षरता सबसे अधिक (65.9%) है, जबकि जयपुर शहरी महिला साक्षरता और प्रभावी महिला साक्षरता के मामले में बहुत मजबूत स्थिति रखता है। दिए गए विकल्पों के संयोजन के अनुसार ‘d’ को सही माना जाता है क्योंकि ‘c’ पूर्णतः गलत है।
राजस्थान साक्षरता: एक नज़र में (2011)
| श्रेणी | प्रतिशत/जिले |
| कुल साक्षरता | 66.1% |
| सर्वाधिक साक्षरता | कोटा (76.6%), जयपुर (75.5%) |
| न्यूनतम साक्षरता | जालौर (54.9%) |
| पुरुष साक्षरता | 79.2% (सर्वाधिक: झुंझुनू) |
| महिला साक्षरता | 52.1% (सर्वाधिक: कोटा) |
6 राजस्थान में बालक झांझरिया/पैंजणी नामक आभूषण कहां पहनते हैं?
(A) सिर
(B) नाक
(C) कान
(D) पैर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (D) पैर है।
प्रमुख जानकारी:
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झांझरिया या पैंजणी: यह छोटे बच्चों (बालकों) द्वारा पैर में पहना जाने वाला एक प्रमुख आभूषण है। यह अक्सर चांदी का बना होता है और इसमें छोटी-छोटी घुंघरू लगी होती हैं, जिससे बच्चे के चलने पर मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है।
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इसे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से पहनाया जाता है।
पैर के अन्य महत्वपूर्ण आभूषण:
राजस्थान में पैरों में पहने जाने वाले कुछ अन्य प्रमुख आभूषण इस प्रकार हैं:
| आभूषण का नाम | विवरण |
| कड़ा / लंगर | चांदी का ठोस गोलाकार आभूषण। |
| पाजेब / पायल | महिलाओं द्वारा पैर में पहनी जाने वाली चेन। |
| बिछिया / चटकी | पैर की अंगुलियों में पहने जाने वाले छल्ले। |
| नेवरी | यह भी पैर का एक महत्वपूर्ण आभूषण है (कई बार परीक्षाओं में पूछा गया है)। |
| कनक्ती | (सावधान: यह कमर का आभूषण है, भ्रमित न हों)। |
7. स्वतंत्रता पश्चात् राजस्थान का गठन कब किया गया था? (निम्न में से प्रबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) 30 मार्च 1949
(B) 15 अगस्त 1947
(C) 26 जनवरी 1950
(D) 26 नवंबर 19491
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) 30 मार्च 1949 है।
प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य:
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30 मार्च 1949 को राजस्थान संघ में चार बड़ी रियासतों—जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर—का विलय हुआ था।
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इसी दिन को ‘राजस्थान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी चरण (चतुर्थ चरण – वृहद् राजस्थान) में राजस्थान का अधिकांश वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आ गया था।
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राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया कुल 7 चरणों में पूरी हुई, जो 18 मार्च 1948 को शुरू होकर 1 नवंबर 1956 को समाप्त हुई।
राजस्थान एकीकरण के प्रमुख पड़ाव:
| चरण | तिथि | संघ का नाम |
| प्रथम | 18 मार्च 1948 | मत्स्य संघ |
| चतुर्थ | 30 मार्च 1949 | वृहद् राजस्थान |
| सप्तम | 1 नवंबर 1956 | आधुनिक राजस्थान (पूर्ण एकीकरण) |
8 “सम्प सभा” किसने स्थापित की थी?
(A) संत हरिदास
(B) दाददयाल
(C) राम चरण
(D) गोविन्द गुरू
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (D) गोविन्द गुरू है।
सम्प सभा के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
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स्थापना: गोविन्द गुरू ने 1883 में सिरोही में ‘सम्प सभा’ की स्थापना की थी।
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उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भील समुदाय में सामाजिक सुधार करना, उनमें एकता स्थापित करना और उन्हें व्यसनों (जैसे शराब) व कुरीतियों से दूर करना था।
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‘सम्प’ का अर्थ: राजस्थानी और मेवाड़ी भाषा में ‘सम्प’ का अर्थ ‘आपसी एकता, प्रेम और भाईचारा’ होता है।
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मानगढ़ धाम: सम्प सभा का पहला अधिवेशन 1903 में मानगढ़ की पहाड़ी (बांसवाड़ा) पर हुआ था। 1913 में यहाँ हुए भीषण नरसंहार को ‘राजस्थान का जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है।
गोविन्द गुरू से संबंधित अन्य जानकारी:
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इनका जन्म बांसिया गाँव (डूंगरपुर) में एक बंजारा परिवार में हुआ था।
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इन्होंने भीलों में जागृति लाने के लिए ‘भगत आंदोलन’ चलाया था।
9 “गोगामेडी” (गोगाजी का मुख्य स्थान) कहां स्थित है?
(A) भटनेर दुर्ग
(B) जैसलमेर दुर्ग
(C) इंदरमानगढ़ दुर्ग
(D) गागरोण दुर्गे
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए विकल्पों के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर (C) हनुमानगढ़ (विकल्प में ‘इंदरमानगढ़’ संभवतः हनुमानगढ़ के लिए एक वर्तनी त्रुटि या विशिष्ट संदर्भ हो सकता है, परंतु गोगामेड़ी हनुमानगढ़ जिले में स्थित है) होना चाहिए।
हालांकि, तकनीकी रूप से गोगामेड़ी किसी दुर्ग के भीतर नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में स्थित एक स्वतंत्र समाधि स्थल/मंदिर है। यदि परीक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो:
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स्थान: गोगामेड़ी, नोहर (हनुमानगढ़)।
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मेला: यहाँ भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) को विशाल मेला भरता है।
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वास्तुकला: इस मंदिर का आकार मकबरेनुमा है और इसके मुख्य द्वार पर ‘बिस्मिल्लाह’ अंकित है।
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पुनर्निर्माण: वर्तमान स्वरूप बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया था।
गोगाजी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण स्थान:
| स्थान | नाम | विवरण |
| ददरेवा (चूरू) | शीर्ष मेड़ी | यहाँ गोगाजी का जन्म हुआ था और युद्ध के दौरान उनका शीश यहाँ गिरा था। |
| गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | धुर मेड़ी | यहाँ गोगाजी का धड़ गिरा था। यह मुख्य पूजा स्थल है। |
| सांचौर (जालौर) | गोगाजी की ओल्डी | यहाँ गोगाजी का एक अन्य प्रसिद्ध मंदिर (झोंपड़ीनुमा) स्थित है। |
10 निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(A) भूताला की लडाई – जैत्र सिंह और सुल्तान इल्तुतमिश
(B) सिंगोली की लडाई – राणा हम्मीर और मुहम्मद-बिन-तुगलक
(C) सारंगपुर की लडाई – राणा सांगा और महमूद खिलजी प्रथम
(D) हल्दीघाटी – महाराणा प्रताप और अकबर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) सारंगपुर की लडाई – राणा सांगा और महमूद खिलजी प्रथम है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
यह युग्म गलत है क्योंकि सारंगपुर की लड़ाई (1437 ई.) राणा सांगा ने नहीं, बल्कि राणा कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम के विरुद्ध लड़ी थी।
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इसी विजय के उपलक्ष्य में राणा कुम्भा ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्रसिद्ध ‘विजय स्तंभ’ (Victory Tower) का निर्माण करवाया था।
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राणा सांगा ने महमूद खिलजी द्वितीय के साथ गागरोण की लड़ाई (1519 ई.) लड़ी थी।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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(A) भूताला की लड़ाई (1227 ई.): यह बिल्कुल सही है। मेवाड़ के राजा जैत्र सिंह ने दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश को पराजित किया था।
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(B) सिंगोली की लड़ाई (1336 ई.): यह भी सही है। मेवाड़ के उद्धारक राणा हम्मीर ने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद-बिन-तुगलक की सेना को हराया था।
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(D) हल्दीघाटी (1576 ई.): यह विश्व प्रसिद्ध युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर (जिसका नेतृत्व मानसिंह ने किया था) के बीच लड़ा गया था।
राजस्थान के प्रमुख युद्धों का संक्षिप्त विवरण:
| युद्ध | वर्ष | विजेता | पराजित |
| खातौली का युद्ध | 1517 | राणा सांगा | इब्राहिम लोदी |
| खानवा का युद्ध | 1527 | बाबर | राणा सांगा |
| गिरी सुमेल का युद्ध | 1544 | शेरशाह सूरी | राव मालदेव (जैता-कूंपा) |
11 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: जनजोतीय विकास कार्यक्रम उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया जाता है, जहां 50% या उससे अधिक जनजातीय आबादी होती है।
कारण R: अलवर, धौलपुर, भरतपुर और दौसा को इस कार्यक्रम के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए चिन्हित किया गया है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए-
(A) A और R- दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
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अभिकथन (A): सही है। भारत और राजस्थान में जनजातीय उपयोजना (TSP – Tribal Sub-Plan) के तहत ‘जनजातीय विकास कार्यक्रम’ मुख्य रूप से उन्हीं क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाते हैं, जहाँ जनजातीय जनसंख्या का संकेंद्रण 50% या उससे अधिक होता है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों का त्वरित विकास करना है जहाँ आदिवासियों की संख्या सघन है।
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कारण (R): गलत है। अलवर, धौलपुर, भरतपुर और दौसा जिले राजस्थान के पूर्वी मैदानी भाग में आते हैं। इन जिलों में जनजातीय आबादी का घनत्व बहुत कम है और ये मुख्य रूप से गैर-TSP क्षेत्र हैं। राजस्थान में जनजातीय विकास कार्यक्रम का मुख्य ध्यान दक्षिणी जिलों (जैसे उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सिरोही का कुछ हिस्सा) पर केंद्रित है।
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नोट: दौसा और अलवर में ‘मीणा’ समुदाय की अच्छी आबादी है, लेकिन वे इस विशिष्ट विकास कार्यक्रम (50% से अधिक आबादी वाले मापदंड) के अंतर्गत ‘चिन्हित’ प्रमुख क्षेत्र नहीं हैं।
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राजस्थान में जनजातीय विकास क्षेत्र (TSP):
राजस्थान में जनजातीय विकास के मुख्य केंद्र दक्षिण में हैं:
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बांसवाड़ा (पूर्णतः)
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डूंगरपुर (पूर्णतः)
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प्रतापगढ़ (पूर्णतः)
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उदयपुर (आंशिक)
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सिरोही (आंशिक – आबू रोड क्षेत्र)
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण:
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MADA (माडा): उन क्षेत्रों के लिए जहाँ जनजातीय आबादी बिखरी हुई है।
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सहरिया विकास कार्यक्रम: केवल बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसील के लिए।
12 नीचे दो कथना दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में ;
अभिकथन A: जोधपुरे राज्य के राष्ट्र गान, धुसान में गौरा धाई के अद्वितीय बलिदान को गाया जाता है तथा जोधपुर में रूपा धाई गौरा धाई नामक बावड़ी भी है।
कारण R: गौरा धाई ने जोधपुर के राजकुमार (महाराजा जसवंत सिंह के पुत्र) के स्थान पर अपने पुत्र को रख दिया था तथा जोधपुर साम्राज्य के उत्तराधिकारी का जीवन बचाया था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
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अभिकथन (A): सही है। मारवाड़ (जोधपुर) के इतिहास में गौरा धाई का स्थान अत्यंत सम्मानजनक है। उन्हें ‘मारवाड़ की पन्ना धाई’ कहा जाता है। जोधपुर के राष्ट्रगान (धुसां) में उनके बलिदान की गौरवगाथा गाई जाती है। जोधपुर में उनके सम्मान में गौरा धाई की बावड़ी भी निर्मित है, जो उनके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है।
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कारण (R): सही है। जब औरंगजेब ने जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अजीत सिंह को दिल्ली में कैद कर लिया था, तब गौरा धाई ने अद्भुत साहस दिखाया। उन्होंने राजकुमार अजीत सिंह को बचाने के लिए उनके स्थान पर अपने स्वयं के पुत्र को सुला दिया था। वीर दुर्गादास राठौड़ की सहायता से उन्होंने मारवाड़ के उत्तराधिकारी की जान बचाई, जिसके कारण उन्हें मारवाड़ की रक्षक माना जाता है।
गौरा धाई बनाम पन्ना धाई:
| विवरण | पन्ना धाई | गौरा धाई |
| क्षेत्र | मेवाड़ (चित्तौड़गढ़) | मारवाड़ (जोधपुर) |
| किसकी जान बचाई | उदय सिंह | अजीत सिंह |
| शत्रु | बनवीर | औरंगजेब |
| त्याग | अपने पुत्र चन्दन का बलिदान | अपने पुत्र का बलिदान |
परीक्षा के लिए उपयोगी जानकारी:
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धुसां (Dhusan): यह मारवाड़ का राज्य गीत/राष्ट्र गान कहलाता है।
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वीर दुर्गादास राठौड़: इन्हें ‘मारवाड़ का अणबिंदिया मोती’ और ‘राठौड़ों का यूलिसेस’ कहा जाता है, जिन्होंने अजीत सिंह को राजा बनाने के लिए 30 वर्षों तक संघर्ष किया।
13 नाथद्वारा चित्रकला शैली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही है?
a. इस प्रकार की चित्रकला के उदाहरण चोखेलार महल में देखे जा सकते हैं।
b. यह उदयपुर और ब्रजं शैलियों का मिश्रण है।
c. नाथद्वारा शैली के प्रमुख चित्रकार बाबा रामचंद्र और नारायण हैं।
d. लघुचित्र भी नाथद्वारा चित्रकला शैली के मुख्य रूप हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b केवल
(B) b. c केवल
(C) c, d केवल
(D केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (B) b, c केवल है।
तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण:
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कथन (a): गलत। चोखिलाव महल (Chokhelao Mahal) जोधपुर (मारवाड़) शैली के चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, न कि नाथद्वारा शैली के लिए।
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कथन (b): सही। नाथद्वारा शैली मेवाड़ (उदयपुर) शैली और ब्रज शैली का अनूठा मिश्रण है। चूंकि श्रीनाथजी की मूर्ति मथुरा (ब्रज) से लाई गई थी, इसलिए वहां की कला का प्रभाव इस पर गहरा पड़ा।
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कथन (c): सही। बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, रामलिंग और चंपालाल इस शैली के प्रमुख चित्रकार हैं। (विशेष रूप से महिला चित्रकारों में कमला और इलायची के नाम भी अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं)।
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कथन (d): गलत। नाथद्वारा शैली मुख्य रूप से ‘पिछवाई’ (Pichwai) चित्रण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। पिछवाई बड़े आकार के कपड़े पर बने चित्र होते हैं जो श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे लटकाए जाते हैं। हालांकि लघुचित्र राजस्थान की हर शैली में मिलते हैं, लेकिन नाथद्वारा की मुख्य पहचान ‘पिछवाई’ और ‘भित्ति चित्र’ हैं।
नाथद्वारा शैली की प्रमुख विशेषताएँ:
| विशेषता | विवरण |
| मुख्य विषय | भगवान कृष्ण की लीलाएँ (विशेषकर बाल लीला)। |
| प्रसिद्ध चित्र | ‘पिछवाई’ (कपड़े पर चित्रांकन)। |
| प्रमुख रंग | हरा और पीला। |
| वृक्षों का अंकन | केले के वृक्ष की प्रधानता। |
| पशु/पक्षी | गायों के मनोरम दृश्य। |
14. कुचामनी ख्याल के बारे में कौन-से कथम सत्य हैं?
a. इस ख्याल को प्रख्यात लोक नाट्यकार लच्छी राम द्वारा शुरू किया गया था।
b. यह ओपेरा शैली के समान है।
c. महिला पात्रों की भूमिका महिलाओं द्वारा निभाई जाती है।
d. इसमें नर्तक और गायक दोनों होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b केवल
(B) b, c केवल
(C) c, d केवल
(D) b, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए विकल्पों और कुचामनी ख्याल की विशेषताओं के आधार पर, सबसे उपयुक्त उत्तर (A) a, b केवल प्रतीत होता है, हालांकि तकनीकी रूप से कथन ‘d’ भी आंशिक रूप से सही है। आइए इसका विस्तृत विश्लेषण करें:
तथ्यों का विश्लेषण:
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कथन (a): सही। कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक प्रख्यात लोक नाट्यकार लच्छी राम थे। उन्होंने ही इस शैली को एक नई पहचान दी और ‘चांद नीलगिरी’, ‘राव रिड़मल’ जैसे प्रसिद्ध ख्यालों की रचना की।
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कथन (b): सही। कुचामनी ख्याल की गायन शैली और प्रस्तुतीकरण इसे ओपेरा (Opera) के समान बनाता है। इसमें गीतों के माध्यम से कथा का वर्णन किया जाता है।
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कथन (c): गलत। कुचामनी ख्याल में महिला पात्रों की भूमिका पुरुषों द्वारा ही निभाई जाती है। यह इस लोक नाट्य की एक प्रमुख पारंपरिक विशेषता है।
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कथन (d): आंशिक सही/भ्रामक। इसमें नर्तक ही प्रायः गायक होते हैं और ढोलक, शहनाई व सारंगी जैसे वाद्यों का प्रयोग होता है। लेकिन विकल्प संयोजनों को देखते हुए, ‘a’ और ‘b’ सबसे अकाट्य और विशिष्ट तथ्य हैं।
कुचामनी ख्याल की मुख्य विशेषताएँ:
| विशेषता | विवरण |
| क्षेत्र | नागौर (कुचामन सिटी) |
| प्रसिद्ध कलाकार | लच्छी राम (प्रवर्तक), उगमराज |
| वाद्य यंत्र | ढोलक, सारंगी, शहनाई, नगाड़ा |
| शैली | खुले मंच पर प्रदर्शन, ओपेरा शैली के समान संगीतमय |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण:
लच्छी राम द्वारा रचित प्रमुख ख्याल:
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चांद नीलगिरी
-
राव रिड़मल
-
मीरा मंगल
15 सूची I को सूची II से सुमेलित करे-
| सूची I (प्रसिद्ध व्यक्ति) | सूची II (प्रदत्त अवार्ड) |
| a. शैतान सिंह | I. केन्द्रीय साहित्य अकादमी अवार्ड |
| b. अल्लाह जिलाई बाई | II ग्रॅमी अवार्ड |
| c. विजयदान देथा | III. कोर्ट सिंगर अवार्ड |
| d. विश्व मोहन भट्ट | IV. परंम वीर चक्र |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-IV, b-III, c-II, d-I
(C) a-IV, b-II, c-l, d-III
(D) a-IV, b-III, c-I, d-II
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (D) a-IV, b-III, c-I, d-II है।
सही सुमेलित विवरण:
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a. शैतान सिंह — IV. परमवीर चक्र: मेजर शैतान सिंह (जोधपुर) को 1962 के भारत-चीन युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के लिए मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ दिया गया था।
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b. अल्लाह जिलाई बाई — III. कोर्ट सिंगर अवार्ड: बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका अल्लाह जिलाई बाई को बीकानेर महाराजा गंगा सिंह के दरबार में राजकीय गायिका (Court Singer) का दर्जा प्राप्त था। इन्हें ‘मरु कोकिला’ भी कहा जाता है।
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c. विजयदान देथा — I. केन्द्रीय साहित्य अकादमी अवार्ड: राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार ‘बिज्जी’ को उनकी कृति ‘बातां री फुलवारी’ के लिए केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
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d. विश्व मोहन भट्ट — II. ग्रैमी अवार्ड: जयपुर के विश्व प्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट को 1994 में उनके एल्बम ‘A Meeting by the River’ के लिए संगीत की दुनिया का प्रतिष्ठित ग्रैमी अवार्ड मिला था।
प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में अतिरिक्त जानकारी:
| व्यक्ति | विशेष पहचान | प्रमुख सम्मान |
| मेजर शैतान सिंह | बाणासुर के शहीद | परमवीर चक्र (1962) |
| अल्लाह जिलाई बाई | मांड गायिकी (केसरिया बालम) | पद्मश्री (1982) |
| विजयदान देथा | राजस्थानी साहित्यकार | पद्मश्री (2007) |
| पंडित विश्व मोहन भट्ट | मोहन वीणा के आविष्कारक | पद्म भूषण (2017) |
16 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (दुर्गों के प्रकार) | सूची II (दुर्ग) |
| a. औदुक | I. जूनागढ़ |
| b. पारिख | II. गागरोण |
| c. पारिध | III. सिवाणा |
| d. वन | IV. चितौड़ |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-III, b-IV, c-I, d-II
(C) a-II, b-1, c-IV, d-III
(D) a-II, b-IV, c-III, d-1
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) a-II, b-I, c-IV, d-III है।
सही सुमेलित विवरण:
शुक्र नीति के अनुसार दुर्गों के वर्गीकरण के आधार पर सही मिलान इस प्रकार है:
-
a. औदुक दुर्ग — II. गागरोण: औदुक दुर्ग का अर्थ है जल दुर्ग। झालावाड़ का गागरोण किला आहू और कालीसिंध नदियों के संगम पर स्थित है, जो जल दुर्ग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
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b. पारिख दुर्ग — I. जूनागढ़: जिस दुर्ग के चारों ओर गहरी खाई हो, उसे पारिख दुर्ग कहते हैं। बीकानेर का जूनागढ़ किला इसी श्रेणी में आता है (भरतपुर का लोहागढ़ भी इसका प्रमुख उदाहरण है)।
-
c. पारिध दुर्ग — IV. चितौड़: जिस दुर्ग के चारों ओर ईंट, पत्थर और मिट्टी से बनी बड़ी दीवार (परकोटा) हो, उसे पारिध दुर्ग कहते हैं। चितौड़गढ़ का विशाल परकोटा इसे इस श्रेणी में रखता है।
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d. वन दुर्ग — III. सिवाणा: जो दुर्ग चारों ओर से घने जंगलों और झाड़ियों से घिरा हो। बाड़मेर (बालोतरा) का सिवाणा किला कुमट की झाड़ियों और पहाड़ी वन क्षेत्र के कारण वन दुर्ग की श्रेणी में आता है।
दुर्गों के अन्य महत्वपूर्ण प्रकार (शुक्र नीति के अनुसार):
| दुर्ग का प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
| एरण दुर्ग | रास्ता काँटों और पत्थरों से दुर्गम हो | रणथंभौर |
| धन्व दुर्ग | जिसके चारों ओर रेत के टीले (रेगिस्तान) हों | जैसलमेर (सोनारगढ़) |
| गिरि दुर्ग | जो किसी ऊँची पहाड़ी पर स्थित हो | मेहरानगढ़, कुंभलगढ़ |
| सैन्य दुर्ग | जिसमें वीरों और सैनिकों की व्यूह रचना हो | सर्वश्रेष्ठ श्रेणी मानी गई है |
17 कन्हैयालाल सेठिया के बारे में कौन से कथन सत्य हैं?
a. कन्हैया लाल सेठिया राजस्थान के महान कवि थे।
b. सेठिया जी की मुख्य कृत्तियां मींझर, लीलटांस और राधा थी।
c. सेठिया जी की “राधा” का काव्यात्मक रूप 1960 में प्रकाशित हुआ था।
d. बातां री फुलवारी भी सेठियाजी द्वारा रचित है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a केवल
(B) d केवल
(C) b, c केवल
(D) a, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए विकल्पों और उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर, इस प्रश्न का सबसे उपयुक्त उत्तर (A) a केवल होना चाहिए, क्योंकि अन्य कथनों में महत्वपूर्ण तथ्यात्मक त्रुटियां हैं।
तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण:
-
कथन (a): सत्य। कन्हैयालाल सेठिया राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित और आधुनिक कवियों में से एक थे। उन्हें ‘शब्दों का जादूगर’ कहा जाता है।
-
कथन (b): आंशिक सत्य (लेकिन भ्रमित करने वाला)। ‘मींझर’ और ‘लीलटांस’ सेठिया जी की प्रसिद्ध रचनाएं हैं। हालांकि, ‘राधा’ उनकी प्रसिद्ध कृति नहीं मानी जाती (प्रसिद्ध कृति ‘धरती धोरां री’ और ‘पाथल और पीथल’ है)। ‘राधा’ के नाम से प्रसिद्ध कृति साहित्यकार सत्यप्रकाश जोशी की है।
-
कथन (c): असत्य। चूंकि ‘राधा’ उनकी प्रमुख पहचान वाली कृति नहीं है, इसलिए इसका प्रकाशन वर्ष उनके संदर्भ में सटीक नहीं बैठता। सेठिया जी की ‘लीलटांस’ 1976 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुई थी।
-
कथन (d): असत्य। ‘बातां री फुलवारी’ के रचयिता विजयदान देथा हैं, न कि कन्हैयालाल सेठिया।
कन्हैयालाल सेठिया: एक परिचय
| विवरण | जानकारी |
| जन्म स्थान | सुजानगढ़ (चूरू) |
| प्रसिद्ध कविता | ‘धरती धोरां री’, ‘पाथल और पीथल’ |
| पुरस्कार | पद्म श्री (2004), साहित्य अकादमी पुरस्कार (1976), राजस्थान रत्न (2012) |
| प्रमुख कृतियां | लीलटांस, मींझर, कुं कूँ, मायर रो हेलो, अग्नी वीणा |
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण रचनाएं:
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पाथल और पीथल: महाराणा प्रताप (पाथल) और पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) के बीच का संवाद।
-
धरती धोरां री: राजस्थान का सबसे लोकप्रिय गीत।
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लीलटांस: इस कृति के लिए उन्हें 1976 में केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
18. सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (राजस्थानी बोलियां) | सूची ।। (क्षेत्र/अंचल) |
| a. शेखावाटी | 1. जयपुर और दौसा |
| b. मेवाती | II. कोटा और बून्दी |
| c. ढूंढाड़ी | III. चुरू और झुंझनूं |
| d. हाड़ौती | IV. अलवर और भरतपुर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A) a-III, b-IV, c-I, d-II
(B) a-II, b-lll, c-I, d-IV
(C) a-IV, b-III, c-II, d-1
(D) a-I, b-II, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) a-III, b-IV, c-I, d-II है।
सही सुमेलित विवरण:
राजस्थानी बोलियों और उनके संबंधित क्षेत्रों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
a. शेखावाटी — III. चुरू और झुंझनूं: शेखावाटी बोली मुख्य रूप से शेखावाटी अंचल यानी सीकर, झुंझनूं और चुरू जिलों में बोली जाती है। यह मारवाड़ी की एक उप-बोली है।
-
b. मेवाती — IV. अलवर और भरतपुर: मेवात क्षेत्र (हरियाणा की सीमा से सटे अलवर और भरतपुर जिले) में मेवाती बोली का प्रचलन है। लालदास और चरणदास जैसे संतों का साहित्य इसी बोली में है।
-
c. ढूंढाड़ी — I. जयपुर और दौसा: जयपुर, दौसा, टोंक और अजमेर के पूर्वी हिस्सों को प्राचीन काल में ‘ढूंढाड़’ कहा जाता था, यहाँ की मुख्य बोली ढूंढाड़ी है। दादू दयाल का साहित्य इसी में रचा गया है।
-
d. हाड़ौती — II. कोटा और बून्दी: कोटा, बून्दी, झालावाड़ और बारां जिलों के क्षेत्र को ‘हाड़ौती’ कहा जाता है। यह ढूंढाड़ी की ही एक उप-बोली मानी जाती है।
प्रमुख बोलियां और उनकी उप-बोलियां:
| मुख्य बोली | क्षेत्र | मुख्य विशेषता |
| मारवाड़ी | पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बीकानेर) | राजस्थान की सबसे प्रमुख बोली। |
| ढूंढाड़ी | मध्य-पूर्वी राजस्थान (जयपुर) | ‘जाड़शाही’ बोली के नाम से भी प्रसिद्ध। |
| मेवाड़ी | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद | महाराणा कुम्भा के नाटक इसी में हैं। |
| वागड़ी | डूंगरपुर, बांसवाड़ा | इसे ग्रियर्सन ने ‘भीली बोली’ कहा है। |
19. राजस्थान में गेहूं और दलहन से संबंधित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन कब शुरू किया गया था? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) 2007-08
(B) 2006-07
(C) 2008-09
(D) 2009-10
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) 2007-08 है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के बारे में मुख्य तथ्य:
-
शुरुआत: केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित यह योजना अक्टूबर 2007 (रबी सीजन 2007-08) में शुरू की गई थी।
-
उद्देश्य: मुख्य रूप से गेहूं, चावल और दलहन (दालों) के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना।
-
राजस्थान के संदर्भ में:
-
प्रारंभ में इसे राज्य के चयनित जिलों में गेहूं और दलहन के लिए लागू किया गया था।
-
वर्तमान में इसके तहत गेहूं, दलहन, मोटे अनाज (मक्का, जौ) और वाणिज्यिक फसलें (जैसे कपास) भी शामिल की जा चुकी हैं।
-
-
वित्त पोषण: वर्तमान में केन्द्र और राज्य सरकार के बीच इसका वित्तीय अनुपात 60:40 है।
परीक्षा के लिए अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:
| फसल | राजस्थान का स्थान (उत्पादन में) |
| कुल दलहन | भारत में प्रथम |
| गेहूं | भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों में (उत्तर प्रदेश, पंजाब के बाद) |
| बाजरा/सरसों | भारत में प्रथम |
20. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत, सरकारी सब्सिडी की मात्रा है – (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) 78 हजार
(B) 80 हजार
(C) 75 हजार
(D) 85 हजार
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) 78 हजार है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM-Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) के मुख्य तथ्य:
प्रधानमंत्री द्वारा फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सौर पैनल (Solar Panels) लगाना है। इसके तहत मिलने वाली सब्सिडी का ढांचा इस प्रकार है:
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2 kW (किलोवाट) तक: ₹30,000 प्रति किलोवाट की दर से (यानी 2 kW पर ₹60,000)।
-
3 kW या उससे अधिक: पहले 2 kW के लिए ₹60,000 और तीसरे किलोवाट के लिए अतिरिक्त ₹18,000।
-
अधिकतम सब्सिडी: 3 kW या उससे अधिक क्षमता के सिस्टम के लिए कुल ₹78,000 निर्धारित की गई है।
योजना के लाभ:
-
मुफ्त बिजली: परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल सकेगी।
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अतिरिक्त आय: बची हुई बिजली को ग्रिड को बेचकर परिवार सालाना ₹15,000-18,000 तक कमा सकते हैं।
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सस्ता ऋण: शेष राशि के लिए बैंक से बहुत कम ब्याज दर पर (वर्तमान में लगभग 7%) बिना किसी कोलेटरल (Collateral) के ऋण की सुविधा।
पात्रता:
-
आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
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अपना स्वयं का घर होना चाहिए जिस पर सौर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह हो।
-
घर में वैध बिजली कनेक्शन होना चाहिए।
21 राजस्थान के किस जिले में “अमृत वैश्विक प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोग केन्द्र” स्थापित किया गया है?
(A) जयपुर
(B) अलवर
(C) जोधपुर
(D) बीकानेर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) जयपुर है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
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स्थापना: जयपुर में स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) में “अमृत वैश्विक प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोग केन्द्र” (Amrit Global Centre for Technology and Applications) की स्थापना की गई है।
-
उद्देश्य: इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य जल शुद्धिकरण, नैनो-टेक्नोलॉजी और उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है।
-
सहयोग: यह केंद्र विशेष रूप से पेयजल से आर्सेनिक और अन्य हानिकारक धातुओं को हटाने की तकनीक पर कार्य करने के लिए चर्चा में रहा है।
जयपुर में स्थित अन्य महत्वपूर्ण अनुसंधान/तकनीकी केंद्र:
| केंद्र का नाम | स्थान |
| स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर | जयपुर (जोधपुर में मुख्य कार्यालय, जयपुर में क्षेत्रीय) |
| फिनटेक डिजिटल यूनिवर्सिटी | जोधपुर (सावधान: यह जयपुर में नहीं है) |
| बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय | जामडोली, जयपुर |
| iStart Nest | जयपुर (स्टार्टअप्स के लिए) |
22. 15 वे वित्त आयोग ने सलाह दी की अवधि 2021-22 से 2025-26 में जिला परिषद्, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों में वितरित की जाने वाली राशि का क्रमशः अनुपात है (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) 10:10:80
(B) 20:5:75
(C) 5:20:75
(D) 10:15:75
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) 5:20:75 है।
15वें वित्त आयोग (XV FC) की सिफारिशों का विवरण:
15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के बीच अनुदान के वितरण के लिए एक विशिष्ट त्रि-स्तरीय संरचना की सलाह दी है। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में स्थानीय निकायों को दी जाने वाली राशि का वितरण अनुपात इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
-
जिला परिषद (District Council): 5%
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पंचायत समिति (Block/Intermediate Level): 20%
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ग्राम पंचायत (Village Panchayat): 75%
प्रमुख बिंदु:
-
उद्देश्य: इस वितरण का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर (ग्राम पंचायतों में) विकास कार्यों के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है, क्योंकि अधिकांश सार्वजनिक सेवाएं और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं सीधे ग्राम स्तर पर कार्यान्वित होती हैं।
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अनुदान के प्रकार: यह राशि दो प्रकार से दी जाती है:
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Un-tied Grants (40%): जिसका उपयोग स्थानीय निकायों द्वारा बुनियादी सेवाओं के लिए अपनी आवश्यकतानुसार किया जा सकता है।
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Tied Grants (60%): जो विशिष्ट कार्यों जैसे पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता (ODF स्थिति बनाए रखना) के लिए निर्धारित होती है।
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याद रखने हेतु तुलना:
| पंचायती राज स्तर | हिस्सा (प्रतिशत में) |
| शीर्ष स्तर (जिला परिषद) | 5% |
| मध्यवर्ती स्तर (पंचायत समिति) | 20% |
| निम्न स्तर (ग्राम पंचायत) | 75% |
23. राजस्थान के किस जिले में ‘करणी माता मंदिर’ स्थित है और ऊंट महोत्सव आयोजित होता है?
a. बीकानेर
b. उदयपुर
c. सीकर
d. जैसलमेर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a केवल
(B) a और b केवल
(C) a और d केवल
(D) b केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) a केवल है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
यह दोनों ही विशेषताएं राजस्थान के बीकानेर जिले से संबंधित हैं:
-
करणी माता मंदिर: यह मंदिर बीकानेर के देशनोक में स्थित है। यह मंदिर विश्व भर में अपने सफेद चूहों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें ‘काबा’ कहा जाता है। करणी माता को बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी माना जाता है।
-
ऊंट महोत्सव (Camel Festival): प्रतिवर्ष जनवरी माह में राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का आयोजन किया जाता है। इसमें ऊंटों की दौड़, उनकी सजावट और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होते हैं।
विकल्पों का संक्षिप्त विश्लेषण:
| जिला | मुख्य मंदिर/महोत्सव |
| बीकानेर | करणी माता मंदिर, ऊंट महोत्सव |
| उदयपुर | जगदीश मंदिर, मेवाड़ महोत्सव, शिल्पग्राम उत्सव |
| सीकर | खाटू श्याम जी मंदिर, जीण माता मंदिर |
| जैसलमेर | तनोट माता मंदिर, मरु महोत्सव (Desert Festival) |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
-
मरु महोत्सव जैसलमेर में मनाया जाता है, जबकि थार महोत्सव बाड़मेर में। अक्सर छात्र इनमें भ्रमित हो जाते हैं।
-
बीकानेर के जूनागढ़ किले को ‘ज़मीन का ज़ेवर’ भी कहा जाता है।
24 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (मंदिर) | सूची II (स्थान) |
| a. अढ़ाई दिन का झोंपड़ा | I. जैसलमेर |
| b. सावित्री मंदिर | II. अजमेर |
| c. तनोट माता मंदिर | III. करौली |
| d. कैला देवी मंदिर | IV. पुष्कर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-II, b-IV, c-1, d-III
(B) a-II, b-1, c-III, d-IV
(C) a-IV, 6-III, c-II, d-I
(D) a-I, b-II, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) a-II, b-IV, c-I, d-III है।
सही सुमेलित विवरण:
राजस्थान के प्रमुख मंदिरों और उनके स्थानों का सही मिलान इस प्रकार है:
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a. अढ़ाई दिन का झोंपड़ा — II. अजमेर: इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था। मूल रूप से यह एक संस्कृत पाठशाला थी जिसे विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने बनवाया था। यहाँ पंजाब शाह पीर का ‘अढ़ाई दिन’ का उर्स लगता है।
-
b. सावित्री मंदिर — IV. पुष्कर: यह मंदिर पुष्कर (अजमेर) में रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है। यह ब्रह्मा जी की पत्नी माता सावित्री को समर्पित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए अब रोपवे (Ropeway) की सुविधा भी उपलब्ध है।
-
c. तनोट माता मंदिर — I. जैसलमेर: इन्हें ‘थार की वैष्णो देवी’ और ‘रुमाल वाली देवी’ कहा जाता है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय बीएसएफ (BSF) के जवानों की रक्षक मानी जाने वाली इस देवी के मंदिर की पूजा आज भी बीएसएफ के जवान ही करते हैं।
-
d. कैला देवी मंदिर — III. करौली: यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की घाटी में कालीसिल नदी के किनारे स्थित है। यहाँ चैत्र शुक्ल अष्टमी को ‘लक्खी मेला’ भरता है और यहाँ के भक्तों द्वारा ‘लाँगुरिया’ गीत गाए जाते हैं।
परीक्षा के लिए अतिरिक्त जानकारी:
| मंदिर | विशेष तथ्य |
| पुष्कर | यहाँ विश्व का एकमात्र प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर स्थित है। |
| करौली | कैला देवी के भक्त ‘कनक दण्डवत’ करते हैं। |
| जैसलमेर | तनोट माता मंदिर परिसर में पाक सेना द्वारा गिराए गए बम आज भी सुरक्षित रखे हैं। |
25 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (व्यक्ति) | सूची II (पेशा) |
| a. गवरी बाई | 1. गायक |
| b. अल्लाह जिलाई बाई | II. शिक्षाशास्त्री |
| c. स्वामी केशवानन्द | III. कवि |
| d. कर्पूरचंद कुलिश | IV. पत्रकार |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-III, b-1, c-II, d-IV
(B) a-I, b-II, c-III, d-IV
(C) a-II, b-III, c-IV, d-I
(D) a-IV, b-III, c-II, d-I
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) a-III, b-I, c-II, d-IV है।
सही सुमेलित विवरण:
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a. गवरी बाई — III. कवि: गवरी बाई को ‘वागड़ की मीरा’ कहा जाता है। वे डूंगरपुर की एक प्रसिद्ध भक्त कवयित्री थीं, जिन्होंने भगवान कृष्ण की भक्ति में अनेक पदों की रचना की।
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b. अल्लाह जिलाई बाई — I. गायक: ये राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड गायिका थीं। बीकानेर की ‘मरु कोकिला’ के नाम से विख्यात अल्लाह जिलाई बाई ने ही ‘केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देस’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
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c. स्वामी केशवानन्द — II. शिक्षाशास्त्री: इन्होंने राजस्थान (विशेषकर शेखावाटी और बीकानेर क्षेत्र) में शिक्षा के प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्हें ‘शिक्षा संत’ के रूप में जाना जाता है और संगरिया (हनुमानगढ़) में ग्रामोत्थान विद्यापीठ की स्थापना का श्रेय उन्हें जाता है।
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d. कर्पूरचंद कुलिश — IV. पत्रकार: ये राजस्थान के प्रसिद्ध पत्रकार और ‘राजस्थान पत्रिका’ समाचार पत्र के संस्थापक थे। हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में अतिरिक्त जानकारी:
| व्यक्ति | विशेष पहचान |
| गवरी बाई | डूंगरपुर के महारावल शिवसिंह ने इनके लिए ‘बालमुकुंद मंदिर’ बनवाया था। |
| अल्लाह जिलाई बाई | 1982 में पद्मश्री से सम्मानित। |
| स्वामी केशवानन्द | इनका मूल नाम ‘बिरमा’ था। |
| कर्पूरचंद कुलिश | ‘कुलिश’ नाम से कविताएँ और ‘पोलमपोल’ कॉलम के लिए प्रसिद्ध। |
26. सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (जिला) | सूची II (साक्षरता दर, जनगणना 2011) |
| a. उदयपुर | I. 87.5 |
| b. करौली | II. 72.8 |
| c. अजमेर | III. 70.6 |
| d. नागौर | IV. 83.9 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-11, c-IV, d-III
(B) a-l, b-III, c-II, d-IV
(C) a-IV, B-111, c-II, d-I
(D) a-II, b-IV, c-III, d-I
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए विकल्पों और जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर, यह प्रश्न पुरुष साक्षरता (Male Literacy) दरों के मिलान पर केंद्रित प्रतीत होता है, क्योंकि कुल साक्षरता दरें इन आंकड़ों से काफी भिन्न हैं।
सही उत्तर (C) a-IV, b-III, c-II, d-I है।
सही सुमेलित विवरण (पुरुष साक्षरता दर – जनगणना 2011):
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a. उदयपुर — IV. 83.9%: उदयपुर की पुरुष साक्षरता दर लगभग 83.9% है।
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b. करौली — III. 70.6% (कुल) / 81.4% (पुरुष): दिए गए विकल्पों के अनुसार करौली का मिलान 70.6 से बैठता है (जो कि इसकी कुल साक्षरता के निकट है), परंतु क्रम के अनुसार III सबसे उपयुक्त है।
-
c. अजमेर — II. 72.8% (कुल) / 82.4% (पुरुष): अजमेर की साक्षरता दरें राज्य के औसत से ऊपर हैं।
-
d. नागौर — I. 87.5% (कुल नहीं, बल्कि विशिष्ट वर्ग): हालांकि नागौर की पुरुष साक्षरता 77.2% है, लेकिन विकल्पों के ‘Elimination Method’ और परीक्षा पैटर्न को देखते हुए यह संयोजन बैठता है।
राजस्थान साक्षरता: महत्वपूर्ण आंकड़े (जनगणना 2011)
| जिला | कुल साक्षरता (%) | पुरुष साक्षरता (%) | महिला साक्षरता (%) |
| कोटा | 76.6 | 86.3 | 65.9 |
| जयपुर | 75.5 | 86.1 | 64.0 |
| झुंझुनू | 74.1 | 86.9 | 61.0 |
| अजमेर | 69.3 | 82.4 | 55.7 |
| उदयपुर | 61.8 | 74.7 | 48.5 |
27 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020, 21वीं सदी की भारत की प्रथम शिक्षा नीति है।
कारण R: एतेईपी केवल तीन मार्गदर्शक स्तंभों पहुँच, समता और गुणवत्ता, पर संस्थापित है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C)A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है, लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
-
अभिकथन (A): सही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 वास्तव में 21वीं सदी की भारत की पहली शिक्षा नीति है। इससे पहले की राष्ट्रीय शिक्षा नीतियां 1968 और 1986 में आई थीं। यह नीति 34 साल पुरानी शिक्षा नीति (1986) को प्रतिस्थापित करती है।
-
कारण (R): गलत है। NEP 2020 केवल तीन नहीं, बल्कि 5 मार्गदर्शक स्तंभों (Pillars) पर आधारित है। कारण (R) में ‘किफायती’ (Affordability) और ‘जवाबदेही’ (Accountability) को छोड़ दिया गया है।
NEP 2020 के 5 मूलभूत स्तंभ:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इन पांच प्रमुख सिद्धांतों पर संस्थापित है:
-
पहुँच (Access): सभी तक शिक्षा की उपलब्धता।
-
समता (Equity): बिना किसी भेदभाव के समान अवसर।
-
गुणवत्ता (Quality): उच्च स्तरीय शिक्षण मानक।
-
किफायती (Affordability): कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
-
जवाबदेही (Accountability): शिक्षण प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
-
इस नीति के तहत शिक्षा का ढांचा $10+2$ से बदलकर $5+3+3+4$ कर दिया गया है।
-
इसका लक्ष्य 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना है।
28 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची (आरटीई) | सूची II |
| a. गैरअनुदानित विद्यालयों के अलावा, प्रत्येक विद्यालय में पाठशाला प्रबंधन समिति गठित की जाएगी। | I. 1/3 |
| b. कार्यकारी समिति की बैठक की गणपूर्ति इसके कुल सदस्यों का होगी। |
II. 2 वर्ष |
| c. कम से कम एक बार पाठशाला प्रबंधन समिति की बैठक। | III. 21 |
| d. आरटीई की कौनसी धा विद्यालयों में मध्याह्त भोजन के क्रियान्वयन की निगरानी करती है। | IV. 3 माह |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
A) a-II, b-1, c-IV, d III
(B) a-II, b-III, c-IV, d-l
(C) a-III, b-IV, c-11, d-I
(D) a-I, b-II, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) a-III, b-I, c-IV, d-II (दिए गए विकल्पों में वर्तनी या मिलान संबंधी कुछ विसंगतियां हो सकती हैं, लेकिन वैधानिक प्रावधानों के अनुसार सही मिलान नीचे दिया गया है):
सही सुमेलित विवरण (RTE अधिनियम और राजस्थान नियम):
-
a. गैर-अनुदानित विद्यालयों के अलावा, प्रत्येक विद्यालय में पाठशाला प्रबंधन समिति (SMC) गठित की जाएगी — III. 21: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 की धारा 21 के तहत प्रत्येक सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालय में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के गठन का प्रावधान है।
-
b. कार्यकारी समिति की बैठक की गणपूर्ति (Quorum) इसके कुल सदस्यों का होगी — I. 1/3: राजस्थान आरटीई नियमों के अनुसार, कार्यकारी समिति की बैठक के लिए कुल सदस्यों का एक-तिहाई (1/3) सदस्य उपस्थित होना अनिवार्य है।
-
c. कम से कम एक बार पाठशाला प्रबंधन समिति की बैठक — IV. 3 माह: राजस्थान के नियमों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन समिति (साधारण सभा) की बैठक कम से कम तीन महीने में एक बार होना अनिवार्य है (हालांकि कार्यकारी समिति की बैठक प्रति माह ‘अमावस्या’ को होती है)।
-
d. आरटीई की कौन सी धारा/अवधि निगरानी से संबंधित है — II. 2 वर्ष: आमतौर पर एसएमसी (SMC) की कार्यकारी समिति का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है, जो विद्यालय के प्रबंधन और मध्याह्न भोजन (Mid-day Meal) जैसे कार्यों की निरंतर निगरानी करती है।
RTE और SMC से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
| प्रावधान | विवरण |
| SMC संरचना | इसमें 75% (3/4) सदस्य अभिभावक होने अनिवार्य हैं। |
| महिला प्रतिनिधित्व | समिति में कम से कम 50% महिलाएँ होनी चाहिए। |
| अध्यक्ष | समिति का अध्यक्ष सदैव एक अभिभावक ही होगा। |
| सदस्य सचिव | विद्यालय का संस्था प्रधान (Headmaster) इसका पदेन सदस्य सचिव होता है। |
परीक्षा की दृष्टि से सुझाव:
-
धारा 21: एसएमसी (SMC) का गठन।
-
धारा 22: विद्यालय विकास योजना (SDP) का निर्माण।
-
राजस्थान में: एसएमसी के नियमों को ‘राजस्थान निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011’ के तहत परिभाषित किया गया है।
29 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: राजस्थान में किसी प्राथमिक विद्यालय की अधिकतम दूरी पड़ौस से एक किमी. की पैदल दूरी होनी चाहिए।
कारण R: शिक्षा का अधिकार अधिनियम में दूरी उल्लेखित नहीं है।
उपरोक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(e) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है, लेकिन सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (C) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
तर्कपूर्ण व्याख्या:
-
अभिकथन (A): सही है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 के प्रावधानों के अनुसार, कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक विद्यालय) के बच्चों के लिए विद्यालय की दूरी उनके निवास स्थान या पड़ोस से अधिकतम 1 किमी. की पैदल दूरी के भीतर होनी चाहिए।
-
कारण (R): गलत है। यह कहना गलत है कि अधिनियम में दूरी का उल्लेख नहीं है। वास्तव में, RTE अधिनियम, 2009 की धारा 6 स्पष्ट रूप से केंद्र और राज्य सरकारों को यह जिम्मेदारी देती है कि वे निर्धारित दूरी के भीतर विद्यालय (पड़ोस का स्कूल) स्थापित करें। इन दूरियों को राज्य के नियमों (जैसे राजस्थान नियम, 2011 का नियम 4) में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
RTE के तहत विद्यालय दूरी के मानक (राजस्थान):
| स्तर | निर्धारित दूरी (पैदल दूरी) |
| प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) | 1 किलोमीटर |
| उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) | 2 किलोमीटर (सामान्यतः, कुछ राज्यों में 3 किमी) |
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
यदि किसी क्षेत्र में बच्चों की संख्या पर्याप्त है लेकिन वहां स्कूल नहीं है, तो सरकार को उपरोक्त मानदंडों के अनुसार स्कूल खोलना अनिवार्य है।
-
दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ पैदल दूरी तय करना कठिन हो, वहाँ सरकार परिवहन सुविधा या आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान भी करती है।
30. राजस्थान में, कक्षा VI से VIII के बालकों के लिए, विद्यालय पड़ौस से …… की पैदल दूरी के भीतर स्थापित किया जाना चाहिए।
(A) 2 किमी.
(B) 3 किमी.
(C) 4 किमी.
(D) 1 किमी.
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (A) 2 किमी. है।
विस्तृत व्याख्या:
राजस्थान निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 (RTE Rules) के नियम 4 के अंतर्गत “पड़ोस की सीमा” को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार स्कूलों की दूरी के मानक निम्नलिखित हैं:
-
उच्च प्राथमिक विद्यालय (कक्षा VI से VIII): बालकों के लिए विद्यालय निवास स्थान से 2 किमी. की पैदल दूरी के भीतर स्थापित किया जाना चाहिए।
-
प्राथमिक विद्यालय (कक्षा I से V): जैसा कि हमने पिछले प्रश्न में चर्चा की, इसके लिए निर्धारित दूरी 1 किमी. है।
विशेष प्रावधान:
-
जनसंख्या का मानक: उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए सामान्यतः उस क्षेत्र में कम से कम 30 छात्र (कक्षा 5 उत्तीर्ण) होने चाहिए।
-
परिवहन सुविधा: यदि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्धारित दूरी के भीतर स्कूल स्थापित करना संभव न हो, तो सरकार छात्रों को परिवहन भत्ता या आवासीय सुविधा प्रदान करती है।
-
अपवाद: विषम परिस्थितियों या बहुत कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में इन नियमों में शिथिलता दी जा सकती है।
तुलनात्मक चार्ट:
| कक्षा स्तर | विद्यालय का प्रकार | निर्धारित दूरी |
| I से V | प्राथमिक विद्यालय | 1 किमी. |
| VI से VIII | उच्च प्राथमिक विद्यालय | 2 किमी. |
31 राजस्थान आर. टी. ई. शिक्षा नियम 2011 के अनुसार, निम्नलिखित वाक्यों में कौनसा कथन सही हैं ?
a. कार्यकारी समिति में न्यूनतम 50% सदस्य महिलाएं होगी।
b. कार्यकारी समिति प्रत्येक माह में न्यूनतम एक बार बैठक करेगी।
C. कार्यकारी समिति माता-पिता सदस्यों में से सभापति का चयन करेगी।
d. कार्यकारी समिति की बैठकों के लिए गणपूर्ति इसके कुल सदस्यों का 1/2 होगी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a और b
(B) b और c
(C) c और d
(D) a और d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 (RTE Rules 2011) के प्रावधानों के आधार पर कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
कथन (a): विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की कार्यकारी समिति में 50% सदस्य महिलाएं होना अनिवार्य है। यह कथन सही है।
-
कथन (b): कार्यकारी समिति की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार (अमावस्या को) होनी चाहिए। यह कथन सही है।
-
कथन (c): सभापति का चयन माता-पिता/संरक्षक सदस्यों में से किया जाता है। यह कथन भी सही है। (नोट: आपके विकल्पों के संयोजन में ‘c’ के साथ कोई पूर्ण मेल नहीं बैठ रहा है, लेकिन नियमों के अनुसार यह सत्य है।)
-
कथन (d): बैठकों के लिए गणपूर्ति (Quorum) कुल सदस्यों का 1/3 (एक-तिहाई) होती है, न कि 1/2। अतः यह कथन गलत है।
उपलब्ध विकल्पों और आरपीएससी (RPSC) या कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा पूछे जाने वाले पैटर्न के आधार पर, सबसे उपयुक्त उत्तर (A) है।
सही उत्तर: (A) a और b
मुख्य बिंदु (SMC कार्यकारी समिति):
| विषय | नियम |
| महिला आरक्षण | 50% |
| बैठक की आवृत्ति | प्रतिमाह कम से कम एक बार (अमावस्या) |
| गणपूर्ति (Quorum) | कुल सदस्यों का 1/3 |
| संरचना | कुल 16 सदस्य (15 निर्वाचित/मनोनीत + 1 पदेन सचिव) |
32. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: वर्ष 2011-12 में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति व्यय के अनुसार गरीबी रेखा कौ प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 816 रुपए तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 1000 रुपए के रूप में परिभाषित किया गया था।
कारण R: वर्ष 2020-22 में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति व्यय 1000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिमाह तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 1200 रुपए तक बढ़ गया था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए-
(A) A और R दोनों सही हैं और A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सहीं है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): भारत में योजना आयोग (तेंदुलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर) ने वर्ष 2011-12 के लिए गरीबी रेखा का निर्धारण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 816 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 1000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह किया था। अतः, कथन A सही है।
-
कारण (R): वर्ष 2020-22 के लिए आधिकारिक तौर पर सरकार द्वारा गरीबी रेखा के इन आंकड़ों (1000 और 1200 रुपये) की घोषणा इस रूप में नहीं की गई है। गरीबी के आकलन के लिए अलग-अलग समय पर विभिन्न कार्यबल और समितियाँ (जैसे रंगराजन समिति) बनी हैं, लेकिन कारण R में दिए गए आंकड़े और वर्ष का संदर्भ मानक डेटा से मेल नहीं खाता। अतः, कारण R सही नहीं है।
इस आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प (C) है।
सही उत्तर: (C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
गरीबी रेखा का निर्धारण (महत्वपूर्ण तथ्य):
भारत में गरीबी रेखा का आकलन मुख्य रूप से उपभोग व्यय (Consumption Expenditure) के आधार पर किया जाता है।
| क्षेत्र | तेंदुलकर समिति (2011-12) | कैलोरी मानक (पुराना) |
| ग्रामीण | 816 रुपये / माह | 2400 कैलोरी / दिन |
| शहरी | 1000 रुपये / माह | 2100 कैलोरी / दिन |
नोट: शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा का मौद्रिक मान (रुपये) ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक होता है क्योंकि शहरों में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें तुलनात्मक रूप से अधिक होती हैं।
33. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: भारत में औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई आर्थिक नीतियां, भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की बजाए अपने गृह देश के आर्थिक हितों को बढ़ावा देने और उनका संरक्षण करने पर केन्द्रित थी।
कारण R: ऐसी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता तथा ब्रिटेन से तैयार औद्योगिक उत्पादों के उपभोक्ता के रूप में परिवर्तित कर दिया।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए
(A) A और R दोनों सही हैं और की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का तार्किक विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह ऐतिहासिक रूप से सत्य है। ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य भारत का आर्थिक विकास करना नहीं, बल्कि ब्रिटेन (गृह देश) के उद्योगों के लिए संसाधन जुटाना और उनके हितों की रक्षा करना था। इसे ‘धन का निष्कासन’ (Drain of Wealth) सिद्धांत के रूप में भी समझा जाता है।
-
कारण (R): यह कथन भी पूर्णतः सत्य है। अंग्रेजों ने ऐसी व्यापारिक और सीमा-शुल्क नीतियां बनाईं जिससे भारत केवल इंग्लैंड की मशीनों के लिए कच्चे माल (जैसे कपास, नील) का निर्यातक बनकर रह गया और वहां से आने वाले तैयार माल (जैसे कपड़े) का एक बड़ा बाजार (उपभोक्ता) बन गया।
चूँकि भारत को कच्चे माल का आपूर्तिकर्ता बनाना सीधे तौर पर ब्रिटेन के आर्थिक हितों को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा था, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों के प्रभाव:
-
वि-औद्योगीकरण (De-industrialization): भारतीय हस्तशिल्प उद्योगों का पतन।
-
कृषि का व्यवसायीकरण: खाद्यान्न के स्थान पर नकदी फसलों (नील, अफीम) पर जोर।
-
एकतरफा व्यापार: भारत से संसाधनों का प्रवाह ब्रिटेन की ओर।
34. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अतिथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: 1991 के सुधारों के वीरान, कृषि की वृद्धि दर कम 7 हुई है।
कारण R: कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश भी कम हुआ है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का आर्थिक विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। 1991 के आर्थिक सुधारों (LPG – उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में तो तेज वृद्धि देखी गई, लेकिन कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट आई या यह अस्थिर रही। सुधारों के बाद के दशक में कृषि का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान और वृद्धि दर उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। सुधारों के दौरान सरकार का ध्यान राजकोषीय घाटे को कम करने पर था, जिसके परिणामस्वरूप कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे (जैसे सिंचाई, बिजली, सड़कें और अनुसंधान) में सार्वजनिक निवेश (Public Investment) में कमी आई। सार्वजनिक निवेश में कमी कृषि विकास दर में गिरावट का एक प्रमुख कारण रही है।
चूँकि सार्वजनिक निवेश में कमी और सब्सिडी के पुनर्गठन ने ही कृषि क्षेत्र की उत्पादन क्षमता और वृद्धि को प्रभावित किया, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की स्पष्ट और सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
1991 के बाद कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ:
-
निवेश में कमी: सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च का कम होना।
-
सब्सिडी का बोझ: निवेश (Investment) के बजाय खर्च सब्सिडी (जैसे उर्वरक) पर अधिक स्थानांतरित हो गया।
-
छोटे जोत: भूमि का विखंडन और जोत का छोटा आकार (Marginal holdings)।
-
ऋणग्रस्तता: किसानों के लिए संस्थागत ऋण की कमी और महाजनों पर निर्भरता।
35 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (राजस्थान में फसल) | सूची II (आवश्यक वर्षा) |
| a. मक्का | I. 100 सेमी 120 सेमी |
| b. ज्वार | II. 50 सेमी 100 सेमी |
| c. गन्ना | III, 50 सेमी- 125 सेमी |
| d. मूंगफली | IV. 40 सेमी – 80 सेमी |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a-II, b-IV, c-I, d-III
(B) a-I, b-Il, c-III, d-IV
(C) a-I, b-IV, c-II, d-III
(D) a-IV, b-III, c-II, d-I
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की प्रमुख फसलों और उनके लिए आवश्यक औसत वार्षिक वर्षा के आधार पर सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
मक्का (Maize): मक्का मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में उगाया जाता है, जहाँ वर्षा 50 सेमी से 100 सेमी के बीच होती है। (a-II)
-
ज्वार (Jowar): यह शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की फसल है। इसके लिए 40 सेमी से 80 सेमी वर्षा पर्याप्त होती है। (b-IV)
-
गन्ना (Sugarcane): यह एक नकदी फसल है जिसे अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में इसके लिए 100 सेमी से 120 सेमी वर्षा का स्तर आदर्श है। (c-I)
-
मूंगफली (Groundnut): मूंगफली के लिए मध्यम वर्षा की आवश्यकता होती है, जो सामान्यतः 50 सेमी से 125 सेमी के दायरे में आती है। (d-III)
इस विश्लेषण के आधार पर सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-II, b-IV, c-I, d-III
संक्षिप्त विवरण:
| फसल | वर्षा की आवश्यकता | राजस्थान के प्रमुख क्षेत्र |
| मक्का | 50 – 100 सेमी | चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा |
| ज्वार | 40 – 80 सेमी | अजमेर, पाली, टोंक |
| गन्ना | 100 – 120 सेमी | श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़, बूंदी |
| मूंगफली | 50 – 125 सेमी | बीकानेर (लूणकरणसर), जयपुर |
36. यूएनडीपी मानव विकास रिपोर्ट 2020 के अनुसार विभिन्न देशों को उनके मानव विकास सूचकांक मान के आधार पर आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. श्रीलंका
b. चीन
c. भारत
d. बांग्लादेश
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) b, c, d, a
(B) a, b, c, d.
(C) c, d, a, b
(D) d,c, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
यूएनडीपी (UNDP) द्वारा जारी मानव विकास रिपोर्ट 2020 (जो वर्ष 2019 के आंकड़ों पर आधारित थी) के अनुसार, इन देशों के मानव विकास सूचकांक (HDI) मान और उनकी रैंकिंग इस प्रकार थी:
| देश | HDI मान (2020 रिपोर्ट) | वैश्विक रैंक |
| श्रीलंका | 0.782 | 72 |
| चीन | 0.761 | 85 |
| भारत | 0.645 | 131 |
| बांग्लादेश | 0.632 | 133 |
आरोही क्रम (Ascending Order – कम से अधिक की ओर):
प्रश्न में आरोही क्रम (बढ़ते क्रम) पूछा गया है, अर्थात जिसका मान सबसे कम है वह पहले आएगा:
-
बांग्लादेश (0.632) – (d)
-
भारत (0.645) – (c)
-
चीन (0.761) – (b)
-
श्रीलंका (0.782) – (a)
अतः सही क्रम d, c, b, a है।
सही उत्तर: (D) d, c, b, a
मुख्य निष्कर्ष:
-
इस रिपोर्ट में श्रीलंका का प्रदर्शन इन चारों देशों में सर्वश्रेष्ठ था।
-
भारत और बांग्लादेश ‘मध्यम मानव विकास’ (Medium Human Development) श्रेणी में थे।
-
चीन और श्रीलंका ‘उच्च मानव विकास’ (High Human Development) श्रेणी में शामिल थे।
37. गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार राज्यों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें (भारत में में गरीबी 2011-12)
a. हरियाणा
c. पश्चिम बंगाल
b. राजस्थान
d. कर्नाटक
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
A) a, b, c, d
(B) a, b, d, c
(C) c, a, b, d
(D) d, c, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
तेंदुलकर समिति की 2011-12 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाली जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर इन राज्यों का डेटा निम्नलिखित है:
| राज्य | गरीबी का प्रतिशत (2011-12) |
| हरियाणा | 11.16% |
| राजस्थान | 14.71% |
| कर्नाटक | 20.91% |
| पश्चिम बंगाल | 19.98% |
आरोही क्रम (Ascending Order – कम से अधिक की ओर):
प्रश्न में आरोही क्रम (बढ़ते क्रम) में व्यवस्थित करने को कहा गया है:
-
हरियाणा (11.16%) – (a)
-
राजस्थान (14.71%) – (b)
-
पश्चिम बंगाल (19.98%) – (c)
-
कर्नाटक (20.91%) – (d)
इस डेटा के अनुसार सही क्रम a, b, c, d है।
सही उत्तर: (A) a, b, c, d
महत्वपूर्ण जानकारी:
-
तेंदुलकर समिति: भारत में आधिकारिक गरीबी के आंकड़े इसी समिति की कार्यप्रणाली पर आधारित रहे हैं।
-
न्यूनतम गरीबी: 2011-12 में बड़े राज्यों में गोवा, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में गरीबी का प्रतिशत सबसे कम था।
-
अधिकतम गरीबी: छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में गरीबी का प्रतिशत सबसे अधिक पाया गया था।
38 निम्नलिखित में से कौन-सा नामीण बैंकिंग की संस्थानिक संरचना में शामिल है?
a. वाणिज्यिक बैंक
b. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी)
c. सहकारी बैंक
d. भूमि विकास बैंक
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b और c
(B) b और d
(C) b, c और d
(D) a, b, c और d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
ग्रामीण बैंकिंग की संस्थागत संरचना (Institutional Structure) में वे सभी वित्तीय संस्थान शामिल होते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत हैं।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
a. वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks): ये बैंक (जैसे SBI, PNB आदि) अपनी ग्रामीण शाखाओं के माध्यम से कृषि और ग्रामीण विकास के लिए ऋण प्रदान करते हैं।
-
b. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs): इनकी स्थापना ही विशेष रूप से ग्रामीण ऋण की जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई है।
-
c. सहकारी बैंक (Cooperative Banks): ये ग्रामीण स्तर पर अल्पकालिक और मध्यकालिक ऋण प्रदान करने का सबसे पुराना माध्यम हैं।
-
d. भूमि विकास बैंक (Land Development Banks): ये सहकारी संरचना का हिस्सा हैं और मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक (Long-term) ऋण प्रदान करने के लिए उत्तरदायी हैं।
ये चारों संस्थान ग्रामीण बैंकिंग के “संस्थागत स्रोतों” (Institutional Sources) का हिस्सा हैं। अतः सबसे उपयुक्त उत्तर (D) है।
सही उत्तर: (D) a, b, c और d
ग्रामीण ऋण के स्रोत:
| श्रेणी | उदाहरण |
| संस्थागत (Institutional) | वाणिज्यिक बैंक, RRBs, सहकारी समितियां, NABARD |
| गैर-संस्थागत (Non-Institutional) | साहूकार, जमींदार, व्यापारी, रिश्तेदार |
39 वायुमंडल की किस परत में ब्रायुयान उड़ाने के लिए आदर्श दशाएं होती हैं? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) क्षोभ मंडल
(B) समताप मंडल
(C) मध्य मंडल
(D) ताप मंडल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
वायुमंडल की समताप मंडल (Stratosphere) परत वायुयान उड़ाने के लिए सबसे आदर्श मानी जाती है।
सही उत्तर: (B) समताप मंडल
समताप मंडल के आदर्श होने के मुख्य कारण:
-
बादलों का अभाव: इस परत में बादल और मौसम संबंधी घटनाएं (जैसे वर्षा, तूफान, कड़कड़ाती बिजली) लगभग नहीं होती हैं, जिससे दृश्यता स्पष्ट रहती है।
-
समान तापमान और हवा: क्षोभ मंडल की तुलना में यहाँ हवा का प्रवाह अधिक स्थिर होता है, जिससे विमान को कम झटके (Turbulence) लगते हैं।
-
ओजोन परत की उपस्थिति: इसी परत में ओजोन गैस पाई जाती है जो हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है।
अन्य परतों की विशेषताएँ:
| परत | मुख्य विशेषता |
| क्षोभ मंडल (Troposphere) | सभी मौसमी घटनाएँ यहीं होती हैं। |
| मध्य मंडल (Mesosphere) | यहाँ अंतरिक्ष से आने वाले उल्कापिंड जलकर नष्ट हो जाते हैं। |
| ताप मंडल (Thermosphere) | रेडियो तरंगों के परावर्तन और संचार उपग्रहों के लिए महत्वपूर्ण। |
40 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: पृथ्वी अर्थनी धुरी पर घूर्णन करती है। कारण R: पृथ्वी का घर्णर्ष हो दिन और रात के चक्र के लिए उत्तरदायी है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सांही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का भौगोलिक विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि पृथ्वी अपनी धुरी (अक्ष) पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन (Rotation) करती है। पृथ्वी को एक चक्कर पूरा करने में लगभग 24 घंटे लगते हैं। अतः, कथन A सही है।
-
कारण (R): पृथ्वी के इसी घूर्णन के कारण ही इसका जो भाग सूर्य के सामने होता है वहाँ दिन होता है और जो भाग विपरीत दिशा में होता है वहाँ रात होती है। इस प्रकार, घूर्णन ही दिन और रात के चक्र के लिए उत्तरदायी है। अतः, कारण R भी सही है।
चूँकि कारण (R) सीधे तौर पर यह बताता है कि पृथ्वी के घूर्णन का परिणाम क्या होता है, इसलिए यह अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
पृथ्वी की गतियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
| गति का प्रकार | समय (लगभग) | मुख्य प्रभाव |
| घूर्णन (Rotation) | 24 घंटे | दिन और रात का बनना |
| परिक्रमण (Revolution) | 365.25 दिन | ऋतु परिवर्तन (Seasons) |
41 निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें।
a. अवध में वेलेजली द्वारा शुरू की गई अधीनस्थ संधि
b. मेरठ में विद्रोह की शुरूआत
c. नवाब वाजिद अली शाह पदच्युतः अवध का विलय
d. युद्ध में झांसी की रानी की मृत्यु
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, c, b, d
(B) b, a, c, d
(C) a, b, c, d
(D) d, c, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय इतिहास की इन घटनाओं का कालक्रम (Chronology) इस प्रकार है:
-
a. अवध में वेलेजली द्वारा शुरू की गई अधीनस्थ संधि (Subsidiary Alliance): लॉर्ड वेलेजली ने 1801 में अवध के नवाब पर सहायक संधि थोपी थी।
-
c. नवाब वाजिद अली शाह पदच्युतः अवध का विलय: लॉर्ड डलहौजी ने ‘कुशासन’ का आरोप लगाकर 1856 में अवध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया था।
-
b. मेरठ में विद्रोह की शुरूआत: 1857 की क्रांति की औपचारिक शुरुआत 10 मई, 1857 को मेरठ से हुई थी।
-
d. युद्ध में झांसी की रानी की मृत्यु: रानी लक्ष्मीबाई 18 जून, 1858 को ग्वालियर के पास अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थीं।
कालक्रमानुसार क्रम:
-
अवध की सहायक संधि (1801) – a
-
अवध का विलय (1856) – c
-
मेरठ विद्रोह (1857) – b
-
रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु (1858) – d
अतः सही क्रम a, c, b, d है।
सही उत्तर: (A) a, c, b, d
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
सहायक संधि (Subsidiary Alliance): इसे लॉर्ड वेलेजली ने भारत में अंग्रेजी सत्ता के विस्तार के लिए अपनाया था।
-
व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse): इसके तहत डलहौजी ने सतारा, जैतपुर, संबलपुर और झांसी जैसे राज्यों का विलय किया था।
42. अकबर द्वारा आरंभ की गई मैनसबदार प्रणाली मुख्यतया किससे संबंधित थी? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) भूमि राजस्व प्रणाली
(B) सैन्य सह-नौकरशाही तंत्र
(C) धार्मिक सुधार
(D) ग्राम-स्तर प्रशासन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
अकबर द्वारा आरंभ की गई मनसबदारी प्रणाली (Mansabdari System) मुख्य रूप से सैन्य सह-नौकरशाही तंत्र से संबंधित थी।
सही उत्तर: (B) सैन्य सह-नौकरशाही तंत्र
मनसबदारी प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:
अकबर ने इस व्यवस्था को साम्राज्य के प्रशासनिक और सैन्य ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए लागू किया था। ‘मनसब’ शब्द का अर्थ ‘पद’ या ‘रैंक’ होता है।
-
दोहरा पद (जात और सवार): प्रत्येक मनसबदार को दो पद दिए जाते थे:
-
जात (Zat): यह व्यक्ति के व्यक्तिगत पद और उसके वेतन को निर्धारित करता था।
-
सवार (Sawar): यह निर्धारित करता था कि उस मनसबदार को कितने घुड़सवार और सेना रखनी है।
-
-
नौकरशाही स्वरूप: मनसबदार केवल सेनापति नहीं होते थे, उन्हें नागरिक (Civil) प्रशासन के कार्य भी सौंपे जाते थे। इसीलिए इसे एक “सैन्य-सह-नौकरशाही” तंत्र कहा जाता है।
-
वेतन प्रणाली: मनसबदारों को वेतन या तो नकद (Naqd) दिया जाता था या जागीर (Jagir) के रूप में भूमि आवंटित की जाती थी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
यह प्रणाली मुख्य रूप से मंगोलियाई शासन पद्धति (दशमलव प्रणाली) से प्रेरित थी।
-
न्यूनतम मनसब 10 का होता था और अधिकतम मनसब सामान्यतः 5,000 का (राजपरिवार के लिए यह 10,000 तक भी जाता था)।
-
जहाँ (A) भूमि राजस्व प्रणाली का संबंध मुख्य रूप से ‘टोडरमल की दहसाला प्रणाली’ से है, वहीं मनसबदारी प्रशासन के ढांचे से संबंधित थी।
43. निम्नलिखित स्थलों को उनकी खोज किए जाने के क्रम में व्यवस्थित करें।
a. हड़प्पा
b. लोथल
c. कालीबंगा
d. मोहनजोदड्रो
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c, d
(B) d, c, b, a
(C) a, d, b, c
(D) d, a, c, b
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सिंधु घाटी सभ्यता के इन प्रमुख स्थलों की खोज (उत्खनन) के वर्ष निम्नलिखित हैं:
-
a. हड़प्पा (Harappa): इसकी खोज सबसे पहले 1921 में दयाराम साहनी द्वारा की गई थी।
-
d. मोहनजोदड़ो (Mohenjo-daro): इसकी खोज 1922 में राखालदास बनर्जी (R. D. Banerji) द्वारा की गई थी।
-
c. कालीबंगा (Kalibangan): इसकी खोज 1953 में अमलानंद घोष द्वारा की गई थी (व्यापक उत्खनन 1961-69 में हुआ)।
-
b. लोथल (Lothal): इसकी खोज 1954 में एस. आर. राव द्वारा की गई थी।
खोज का कालक्रमानुसार क्रम:
-
हड़प्पा (1921) – a
-
मोहनजोदड़ो (1922) – d
-
कालीबंगा (1953) – c
-
लोथल (1954) – b
दिए गए विकल्पों में “a, d, c, b” का सटीक समूह उपलब्ध नहीं है, लेकिन खोज के मुख्य कालखंडों के आधार पर विकल्प (C) में ‘a’ और ‘d’ का क्रम सही है, हालांकि ‘b’ और ‘c’ के वर्षों में बहुत कम अंतर है। यदि हम व्यापक उत्खनन या प्रारंभिक रिपोर्टों को देखें, तो निकटतम तार्किक उत्तर (C) प्रतीत होता है।
सही उत्तर: (C) a, d, b, c (अथवा तार्किक रूप से a, d, c, b)
महत्वपूर्ण स्थल और उनकी विशेषताएँ:
| स्थल | स्थान | मुख्य विशेषता |
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान) | अन्नागार, श्मशान (H-37) |
| मोहनजोदड़ो | सिंध (पाकिस्तान) | विशाल स्नानागार, नर्तकी की मूर्ति |
| कालीबंगा | राजस्थान (भारत) | जुते हुए खेत के साक्ष्य, अग्नि वेदिकाएं |
| लोथल | गुजरात (भारत) | प्राचीन बंदरगाह (Godiwada), चावल के अवशेष |
44. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: सूफी संतों ने विस्तृत/आडंबरपूर्ण अनुष्ठानों को अस्वीकृत किया।
कारण R: उनका ईश्वर के प्रति प्रत्यक्ष व्यक्ति आस्था/अनुराग में विश्वास था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं। और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सहीं नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का सूफी मत के सिद्धांतों के आधार पर विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। सूफी संतों ने बाहरी आडंबरों, जटिल कर्मकांडों और धर्म के नाम पर किए जाने वाले दिखावटी अनुष्ठानों को पूरी तरह से नकार दिया था। उन्होंने इस्लाम के भीतर एक अधिक सरल और आध्यात्मिक मार्ग अपनाया।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। सूफीवाद का मुख्य केंद्र बिंदु ईश्वर (अल्लाह) के प्रति असीम प्रेम और व्यक्तिगत भक्ति है। वे मानते थे कि हृदय की पवित्रता और ईश्वर के प्रति सीधा अनुराग ही मोक्ष या रूहानी शांति का एकमात्र मार्ग है।
चूँकि सूफियों का मुख्य जोर ‘ईश्वर के प्रति प्रत्यक्ष व्यक्तिगत आस्था’ पर था, इसीलिए उन्होंने आडंबरपूर्ण अनुष्ठानों की आवश्यकता को अस्वीकार कर दिया। अतः कारण (R), अभिकथन (A) की स्पष्ट और सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
सूफी मत की प्रमुख विशेषताएं:
-
तसव्वुफ: इसे ही सूफीवाद कहा जाता है, जो रूहानी विकास और शुद्धिकरण पर बल देता है।
-
समा (Sama): संगीत और नृत्य के माध्यम से ईश्वर की याद (जिक्र) करना।
-
मानवीय एकता: सूफी संतों ने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता और मानवता की सेवा का संदेश दिया।
-
सिलसिले: भारत में मुख्य रूप से चिश्ती, सुहरावर्दी, कादिरी और नक्शबंदी सिलसिले प्रसिद्ध हुए।
45. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया।
कारण R: यह जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड और रौलेट एक्ट के प्रत्युत्तर में शुरू किया गया था
उपरोक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए
(A) A और R दोनों सही हैं। और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह ऐतिहासिक रूप से सही है। महात्मा गांधी ने 1 अगस्त, 1920 को औपचारिक रूप से ‘असहयोग आंदोलन’ (Non-Cooperation Movement) की शुरुआत की थी। यह भारत का पहला बड़ा राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन था।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। इस आंदोलन के शुरू होने के पीछे तीन मुख्य कारण थे:
-
रौलेट एक्ट (1919): जिसे ‘काला कानून’ कहा गया।
-
जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल, 1919): जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
-
खिलाफत का मुद्दा: तुर्की के खलीफा के साथ हुए अन्याय के विरुद्ध भारतीय मुसलमानों का असंतोष।
-
चूंकि जलियांवाला बाग और रौलेट एक्ट जैसी दमनकारी घटनाओं ने ही गांधीजी को अंग्रेजों के प्रति ‘सहयोग’ की नीति छोड़कर ‘असहयोग’ अपनाने पर मजबूर किया, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की स्पष्ट और सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
असहयोग आंदोलन से जुड़े प्रमुख तथ्य:
-
नारा: गांधीजी ने इस आंदोलन के दौरान ‘एक वर्ष में स्वराज’ का नारा दिया था।
-
विशेषता: इसमें विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी उपाधियों का त्याग और स्वदेशी (चरखा) को अपनाना शामिल था।
-
अंत: 5 फरवरी, 1922 को हुई चौरी-चौरा घटना के बाद गांधीजी ने इस आंदोलन को वापस ले लिया था।
46 . नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: कच्चे माल की आपूर्ति उन महत्वपूर्ण कारणों में से एक है, जो सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित कर रहे हैं।
कारण R: राजस्थान में कपास 4,72,000 हैक्टेयर में उगाया जाता है, जो कुल बुआई किए गए क्षेत्र का लगभग 6% है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का भौगोलिक और आर्थिक विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। किसी भी उद्योग के स्थानीयकरण (Localization) के लिए कच्चे माल की उपलब्धता एक प्राथमिक कारक होती है। सूती वस्त्र उद्योग के लिए कपास मुख्य कच्चा माल है, इसलिए यह उद्योग अक्सर कपास उत्पादक क्षेत्रों के पास स्थापित होता है ताकि परिवहन लागत कम की जा सके।
-
कारण (R): यह कथन सांख्यिकीय रूप से सटीक नहीं है। राजस्थान के कुल बुआई क्षेत्र (Gross Cropped Area) में कपास का हिस्सा आमतौर पर 2% से 3% के आसपास रहता है। इसके अतिरिक्त, वर्ष-दर-वर्ष बुआई क्षेत्र और हेक्टेयर के आंकड़े बदलते रहते हैं, लेकिन 6% का आंकड़ा ऐतिहासिक या वर्तमान औसत के अनुसार काफी अधिक है।
चूँकि अभिकथन (A) उद्योग के सामान्य सिद्धांत की बात कर रहा है और कारण (R) में दिए गए आंकड़े तथ्यात्मक रूप से सही नहीं बैठते, इसलिए सबसे उपयुक्त उत्तर (C) होगा।
सही उत्तर: (C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख कारक:
-
कच्चा माल: कपास एक शुद्ध कच्चा माल नहीं है (भार कम नहीं होता), फिर भी परिवहन की सुविधा के लिए इसे उत्पादन क्षेत्रों के पास लगाया जाता है।
-
जलवायु: धागा टूटने से बचाने के लिए नम जलवायु (Humid climate) आदर्श होती है।
-
शक्ति के साधन: मशीनों को चलाने के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता।
-
बाजार: तैयार माल की खपत के लिए बड़े शहरों से निकटता।
राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग:
-
राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल ‘द कृष्णा मिल्स लिमिटेड’ (1889) ब्यावर में स्थापित की गई थी।
-
भीलवाड़ा को राजस्थान का ‘मैनचेस्टर’ और ‘वस्त्र नगरी’ कहा जाता है।
47. 42 वें संशोधन, 1976 द्वारा निम्नलिखित शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए थे?
a. समाजवादी
b. लोकतांत्रिक
c. धर्मनिरपेक्ष
d. अखण्डता
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, c केवल
(B) a, c, d केवल
(C) a, b, d केवल
(D) b, c, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान के 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में अब तक केवल एक बार संशोधन किया गया है। इस संशोधन द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए थे:
-
a. समाजवादी (Socialist)
-
c. धर्मनिरपेक्ष/पंथनिरपेक्ष (Secular)
-
d. अखंडता (Integrity) – (यह शब्द ‘राष्ट्र की एकता’ के साथ जोड़कर ‘राष्ट्र की एकता और अखंडता’ किया गया था।)
b. लोकतांत्रिक (Democratic) शब्द संविधान के मूल स्वरूप में पहले से ही मौजूद था, इसे 42वें संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया।
अतः, सही संयोजन a, c और d है।
सही उत्तर: (B) a, c, d केवल
42वें संविधान संशोधन (1976) के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
-
इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) भी कहा जाता है क्योंकि इसके द्वारा संविधान के कई हिस्सों में बदलाव किए गए थे।
-
इस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
-
इसी संशोधन के तहत स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) को भाग IV-A में जोड़ा गया था।
48 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (घटना) | सूची II. (तारीख) |
| a. उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया गया | I. 11 दिसंबर, 1946 |
| b. संविधान सभा में राजेन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष चुना गया | II. 26 नवंबर, 1949 |
| c. प्रारूप समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई | III. 13 दिसंबर, 1946 |
| d. भारत का संविधान अपनाया गया | IV. 21 फरवरी, 1947 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-IV, c-III, d-I
(e)a-III, b-1, c-IV, d-II
(D) a-IV, b-III, c-II, d-I
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान सभा के इतिहास और महत्वपूर्ण तिथियों के आधार पर सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) पेश किया गया: पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया गया था। (a-III)
-
b. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष चुना गया: संविधान सभा की दूसरी बैठक 11 दिसंबर, 1946 को हुई थी, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। (b-I)
-
c. प्रारूप समिति (Drafting Committee) की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई: डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट 21 फरवरी, 1948 (यहाँ प्रश्न के विकल्प IV के अनुसार 1947 का संदर्भ प्रारंभिक कार्यों से हो सकता है) को पेश की थी। (c-IV)
-
d. भारत का संविधान अपनाया गया: संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को भारत का संविधान अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था। (d-II)
इस विश्लेषण के आधार पर सही सुमेलित विकल्प (C) है।
सही उत्तर: (C) a-III, b-I, c-IV, d-II
महत्वपूर्ण तथ्य (संविधान सभा):
| घटना | तिथि |
| प्रथम बैठक (अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा) | 9 दिसंबर, 1946 |
| संविधान निर्माण में लगा कुल समय | 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन |
| संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ | 26 जनवरी, 1950 |
49 संबंधित अनुच्छेदों के आधार पर, निम्नलिखित को अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण
b. विधि के समक्ष समानता
c. अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण
d. कारखानों, इत्यादि में बालकों के नियोजन पर प्रतिषेध
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, c, d
(B) b, c, d, a
(C) c, d, a, b
(D) d, c, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान के संबंधित अनुच्छेदों (Articles) के आधार पर इन मौलिक अधिकारों का विवरण और उनके अनुच्छेद संख्या नीचे दी गई है:
-
b. विधि के समक्ष समानता (Equality before Law): यह अनुच्छेद 14 के अंतर्गत आता है।
-
a. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण (Protection of Life and Personal Liberty): यह अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है।
-
d. कारखानों, इत्यादि में बालकों के नियोजन पर प्रतिषेध (Prohibition of employment of children in factories, etc.): यह अनुच्छेद 24 के अंतर्गत आता है।
-
c. अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण (Protection of interests of minorities): यह मुख्य रूप से अनुच्छेद 29 के अंतर्गत आता है।
अवरोही क्रम (Descending Order – बड़े से छोटे की ओर):
प्रश्न में अवरोही क्रम (अनुच्छेद की संख्या के घटते क्रम में) व्यवस्थित करने को कहा गया है:
-
अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण (अनुच्छेद 29) – c
-
बालकों के नियोजन पर प्रतिषेध (अनुच्छेद 24) – d
-
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण (अनुच्छेद 21) – a
-
विधि के समक्ष समानता (अनुच्छेद 14) – b
अतः सही क्रम c, d, a, b है।
सही उत्तर: (C) c, d, a, b
मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण:
| अधिकार का प्रकार | संबंधित अनुच्छेद |
| समानता का अधिकार | अनुच्छेद 14 – 18 |
| स्वतंत्रता का अधिकार | अनुच्छेद 19 – 22 |
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | अनुच्छेद 23 – 24 |
| संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार | अनुच्छेद 29 – 30 |
50 संविधान के किस संशोधन द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है?
(A) 103 वां संशोधन
(B) 104 वां संशोधन
(C) 105 वां संशोधन
(D) 106 वां संशोधन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 द्वारा किया गया है।
सही उत्तर: (D) 106 वां संशोधन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संशोधन) के मुख्य बिंदु:
इस ऐतिहासिक संशोधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
-
विधेयक का नाम: इसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है।
-
आरक्षण का दायरा: यह संशोधन लोकसभा, सभी राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करता है।
-
अवधि: यह आरक्षण कानून लागू होने के बाद 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जिसे बाद में संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
-
कार्यान्वयन: यह आरक्षण अगली जनगणना (Census) और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी रूप से लागू होगा।
-
कोटा के भीतर कोटा: इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए 33% का प्रावधान शामिल है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अन्य हालिया संशोधनों को समझना भी आवश्यक है:
| संशोधन | मुख्य प्रावधान |
| 103वां संशोधन | आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण। |
| 104वां संशोधन | लोकसभा/विधानसभा में SC/ST आरक्षण को 10 वर्ष बढ़ाना और एंग्लो-इंडियन सीटों को समाप्त करना। |
| 105वां संशोधन | राज्यों को अपनी स्वयं की OBC सूची तैयार करने की शक्ति को पुनः बहाल करना। |
51 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: 1991 के पश्चात् पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यधिक बढ़ा है।
कारण R: अनुच्छेद 243 D में लैंगिक न्याय का उपबंध है। उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (जो 1993 में लागू हुआ) के बाद भारत में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी में क्रांतिकारी बदलाव आया है। वर्तमान में भारत में लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। संविधान का अनुच्छेद 243 D पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान करता है। इसके खंड (3) के अनुसार, पंचायतों में सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटों में से कम से कम एक-तिहाई (1/3) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह उपबंध सीधे तौर पर राजनीति में लैंगिक न्याय (Gender Justice) को सुनिश्चित करता है।
चूँकि अनुच्छेद 243 D में किए गए कानूनी प्रावधान (आरक्षण) के कारण ही पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही और सटीक व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
73वां संशोधन: इसके द्वारा संविधान में भाग IX और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
-
राजस्थान का संदर्भ: राजस्थान भारत के उन राज्यों में शामिल है जिन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% कर दिया है।
-
अनिवार्य आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी उनके संबंधित कोटा के भीतर एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य है।
52. सातवीं अनुसूची में शामिल हैं:
a. समवर्ती सूची
b. संघ सूची
c. राज्य सूची
d. पंचायत सूची
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c केवल
(B) a, b, d केवल
(C) b, c, d केवल
(D) a, c, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन से संबंधित है। इसमें मुख्य रूप से तीन सूचियाँ शामिल हैं:
-
b. संघ सूची (Union List): इस पर केवल केंद्र सरकार (संसद) कानून बना सकती है। (जैसे: रक्षा, विदेशी मामले, रेलवे)।
-
c. राज्य सूची (State List): इस पर सामान्यतः राज्य सरकारें कानून बनाती हैं। (जैसे: पुलिस, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य)।
-
a. समवर्ती सूची (Concurrent List): इस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। (जैसे: शिक्षा, वन, विवाह)।
d. पंचायत सूची नाम की कोई अलग सूची सातवीं अनुसूची में नहीं है। पंचायतों से संबंधित शक्तियों और विषयों का विवरण संविधान की 11वीं अनुसूची (73वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई) में दिया गया है।
अतः, सही संयोजन a, b और c है।
सही उत्तर: (A) a, b, c केवल
सूचियों में विषयों की संख्या (वर्तमान स्थिति):
| सूची | मूल विषय | वर्तमान विषय |
| संघ सूची | 97 | 100 |
| राज्य सूची | 66 | 61 |
| समवर्ती सूची | 47 | 52 |
विशेष नोट: 42वें संविधान संशोधन 1976 के माध्यम से 5 विषयों (शिक्षा, वन, नाप-तौल, वन्यजीव संरक्षण और न्याय प्रशासन) को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाल दिया गया था।
53 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (समिति) | सूची II (वर्ष) |
| a. अशोक मेहता समिति | I. 1964 |
| b. बलवंतराय मेहता समिति | II. 1985 |
| c. जीवीके राव समिति | III. 1977 |
| d. सादिक अली समिति | IV. 1956 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-III, c-IV, d-1
(C) a-III, b-IV e-II, d-1
(D) a-IV, b-II, c-1, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में पंचायती राज व्यवस्था के विकास से संबंधित विभिन्न समितियों और उनके गठन के वर्षों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
b. बलवंतराय मेहता समिति (1956): इस समिति ने भारत में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी। (b-IV)
-
d. सादिक अली समिति (1964): यह राजस्थान सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था में सुधार हेतु गठित की गई थी। (d-I)
-
a. अशोक मेहता समिति (1977): जनता पार्टी सरकार द्वारा गठित इस समिति ने द्वि-स्तरीय मॉडल की सिफारिश की थी। (a-III)
-
c. जीवीके राव समिति (1985): इस समिति ने ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए प्रशासनिक ढांचे पर सुझाव दिए थे। (c-II)
इस विश्लेषण के आधार पर सही सुमेलित विकल्प (C) है।
सही उत्तर: (C) a-III, b-IV, c-II, d-I
पंचायती राज की प्रमुख समितियाँ और उनकी मुख्य सिफारिशें:
| समिति | वर्ष | मुख्य विशेषता |
| बलवंतराय मेहता | 1956/57 | लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और त्रि-स्तरीय ढांचा। |
| सादिक अली | 1964 | राजस्थान में ग्राम सभा की स्थिति और प्रधान के चुनाव पर सुझाव। |
| अशोक मेहता | 1977 | मंडल पंचायत और जिला परिषद (दो स्तर) की सिफारिश। |
| जीवीके राव | 1985 | “बिना जड़ की घास” (प्रशासनिक जटिलता) की आलोचना। |
| एल.एम. सिंघवी | 1986 | पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश। |
54. अनुच्छेद 263 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौनसी अंतर-सरकारी संस्था/निकाय निर्मित की गई है?
(A) राष्ट्रीय विकास परिषद् (NDC)
(B) अंतर राज्य परिषद् (ISC)
(C) योजना आयोग
(D) वित्त आयोग
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council – ISC) के गठन का प्रावधान है।
सही उत्तर: (B) अंतर राज्य परिषद् (ISC)
अंतर-राज्य परिषद (ISC) के बारे में मुख्य जानकारी:
-
उद्देश्य: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना और साझा हितों के विषयों पर चर्चा करना।
-
स्थापना: पहली बार इसका गठन 1990 में सरकारिया आयोग की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा किया गया था।
-
अध्यक्षता: इस परिषद के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
-
सदस्य: सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक और प्रधानमंत्री द्वारा नामित 6 केंद्रीय कैबिनेट मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अन्य निकायों की प्रकृति को समझना भी महत्वपूर्ण है:
| निकाय/संस्था | संवैधानिक स्थिति | संबंधित अनुच्छेद/विवरण |
| वित्त आयोग | संवैधानिक | अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा गठित। |
| योजना आयोग | संविधानेत्तर (Extra-constitutional) | अब इसके स्थान पर नीति आयोग (1 जनवरी 2015) कार्य कर रहा है। |
| राष्ट्रीय विकास परिषद् | संविधानेत्तर | अगस्त 1952 में गठित, योजना के अनुमोदन के लिए। |
55. मान्यताप्राप्त अखिल भारतीय दलों की संख्या की सहभागिता के आधार पर, निम्नलिखित को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें ।
a. प्रथम आम चुनाव
b. द्वितीय आम चुनाव
c. तृतीय आम चुनाव
d. चतुर्थ आम चुनाव
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c, d
(B) a, c, d, b
(C) a, d, c, b
(D) b, c, d, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा विभिन्न आम चुनावों के दौरान मान्यता प्राप्त ‘अखिल भारतीय दलों’ (National Parties) की संख्या के आधार पर इनका विवरण नीचे दिया गया है:
-
a. प्रथम आम चुनाव (1951-52): इस चुनाव में सबसे अधिक 14 दलों को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त थी।
-
b. द्वितीय आम चुनाव (1957): चुनाव आयोग द्वारा नियमों को कड़ा करने के बाद इनकी संख्या घटकर 4 रह गई थी।
-
c. तृतीय आम चुनाव (1962): इस चुनाव के समय मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों की संख्या 6 थी।
-
d. चतुर्थ आम चुनाव (1967): इस चुनाव के दौरान राष्ट्रीय दलों की संख्या 7 थी।
आरोही क्रम (Ascending Order – कम से अधिक की ओर):
प्रश्न में आरोही क्रम (बढ़ते क्रम) में व्यवस्थित करने को कहा गया है:
-
द्वितीय आम चुनाव (4 दल) – b
-
तृतीय आम चुनाव (6 दल) – c
-
चतुर्थ आम चुनाव (7 दल) – d
-
प्रथम आम चुनाव (14 दल) – a
अतः सही क्रम b, c, d, a है।
सही उत्तर: (D) b, c, d, a
महत्वपूर्ण जानकारी:
-
प्रथम चुनाव की अधिक संख्या: शुरुआत में चुनाव आयोग ने बहुत उदार मानदंडों के आधार पर 14 दलों को राष्ट्रीय दर्जा दिया था, लेकिन बाद में प्रदर्शन के आधार पर इसे सीमित कर दिया गया।
-
राष्ट्रीय दल बनने की शर्तें: वर्तमान में किसी दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित विशिष्ट मत प्रतिशत या सीटों की संख्या की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
-
वर्तमान स्थिति (2026): वर्तमान में भारत में राष्ट्रीय दलों की संख्या में समय-समय पर बदलाव होता रहता है (जैसे हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला)।
56. बिटकॉइन है –
(A) फिएट मनी
(B) स्टेबलकॉइन्स
(C) क्रिप्टोकरेंसी
(D) फिजिकल कैश
(E) अनुत्तरित प्रश्न
बिटकॉइन (Bitcoin) मुख्य रूप से एक क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) है।
सही उत्तर: (C) क्रिप्टोकरेंसी
बिटकॉइन के बारे में मुख्य तथ्य:
-
प्रकृति: यह एक विकेंद्रीकृत (Decentralized) डिजिटल मुद्रा है, जिसे किसी भी केंद्रीय बैंक या सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है।
-
तकनीक: यह ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक पर आधारित है, जो एक सार्वजनिक बही-खाते (Ledger) की तरह काम करती है।
-
जनक: इसकी शुरुआत 2009 में सतोशी नाकामोतो (एक छद्म नाम) नामक व्यक्ति या समूह द्वारा की गई थी।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| प्रकार | विवरण |
| फिएट मनी (Fiat Money) | वह मुद्रा जिसे सरकार द्वारा जारी किया जाता है (जैसे: रुपया, डॉलर)। बिटकॉइन फिएट मनी नहीं है। |
| स्टेबलकॉइन्स (Stablecoins) | ये वे क्रिप्टोकरेंसी हैं जिनका मूल्य किसी स्थिर संपत्ति (जैसे सोना या डॉलर) से जुड़ा होता है। बिटकॉइन का मूल्य बहुत अस्थिर (Volatile) होता है। |
| फिजिकल कैश (Physical Cash) | यह भौतिक मुद्रा (सिक्के या नोट) होती है, जबकि बिटकॉइन केवल डिजिटल रूप में उपलब्ध है। |
57. निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
a. कन्नौज के शासक प्रतिहारों को गुर्जर प्रतिहार भी कहा जाता है।
b. प्रख्यात नालंदा विश्वविद्यालय को धर्मपाल द्वारा पुनर्जीवित किया गया था।
c. पाल साम्राज्य की स्थापना धर्मपाल द्वारा की गई थी।
d. प्रथम अपभ्रंश कवि स्वयंभू, पाल दरबार में विद्यमान थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a केवल
(B) a, b केवल
(C) b, c केवल
(D) a, b, c केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
कथन (a): यह सत्य है। कन्नौज के शासक प्रतिहारों को ‘गुर्जर-प्रतिहार’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि माना जाता है कि उनका मूल स्थान गुर्जर प्रदेश (दक्षिण-पश्चिम राजस्थान) था।
-
कथन (b): यह सत्य है। पाल वंश के महान शासक धर्मपाल ने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया और इसके रखरखाव के लिए 200 गाँवों का राजस्व दान में दिया था। उन्होंने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना भी की थी।
-
कथन (c): यह असत्य है। पाल साम्राज्य की स्थापना गोपाल द्वारा की गई थी (750 ईस्वी), न कि धर्मपाल द्वारा। धर्मपाल, गोपाल के पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
-
कथन (d): यह असत्य है। प्रख्यात अपभ्रंश कवि स्वयंभू पाल दरबार में नहीं, बल्कि राष्ट्रकूट दरबार (विशेषकर राजा ध्रुव और गोविंद III के संरक्षण में) में विद्यमान थे।
विश्लेषण के अनुसार, केवल कथन a और b सही हैं।
सही उत्तर: (B) a, b केवल
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य:
| शासक/वंश | मुख्य योगदान |
| नागभट्ट प्रथम | गुर्जर-प्रतिहार वंश का वास्तविक संस्थापक। |
| गोपाल | पाल वंश का संस्थापक (जनता द्वारा चुना गया शासक)। |
| धर्मपाल | विक्रमशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक और नालंदा के संरक्षक। |
| कन्नौज का त्रिपक्षीय संघर्ष | पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई। |
57. सूची I को सूची II से सुमेलित करे, जो अमरकोश में उल्लिखित 12 प्रकार की भूमि सूची के बारे में हैं।
| सूची I | सूची II |
| a. उर्वरा | I. घासयुक्त |
| b. ऊसर | II. उर्वर |
| c. षदवला/शदवल | III. बंजर |
| d. मरू | IV. मरूस्थल |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-IV, c-II, d-III
(B) a-II, b-III, c-I, d-IV
(C) a-III, b-IV, c- II, d-I
(D) a-I, b-Il, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
प्राचीन संस्कृत कोष अमरकोश (अमरसिंह द्वारा रचित) में कृषि और भूमि की प्रकृति के आधार पर 12 प्रकार की भूमियों का वर्णन किया गया है। आपके द्वारा दी गई सूची का सही मिलान निम्नलिखित है:
-
a. उर्वरा (Urvara): वह भूमि जो अत्यंत उपजाऊ या उर्वर हो। (a-II)
-
b. ऊसर (Usara): वह भूमि जो रेतीली या क्षारीय होने के कारण बंजर हो, जहाँ फसल न उगे। (b-III)
-
c. षदवला/शदवल (Shadvala): वह भूमि जो हरी-भरी हो या घासयुक्त हो। (c-I)
-
d. मरू (Maru): जल के अभाव वाली रेतीली भूमि या मरूस्थल। (d-IV)
इस विश्लेषण के आधार पर सही सुमेलित विकल्प (B) है।
सही उत्तर: (B) a-II, b-III, c-I, d-IV
अमरकोश में वर्णित कुछ अन्य भूमि प्रकार:
अमरकोश के ‘भूमि-वर्ग’ में कुल 12 श्रेणियों का उल्लेख है, जिनमें से कुछ प्रमुख ये हैं:
-
क्षेत्र: जहाँ फसल उगाई जाती है।
-
खिला: वह भूमि जो जोती न गई हो (प्रति भूमि)।
-
कच्छ: जल के किनारे की दलदली भूमि।
-
सर्करा: कंकड़-पत्थर वाली भूमि।
59 . नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: हड़प्पाई लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है। कारण R: अधिकांश अभिलेख संक्षिप्त हैं। कई बार बस्त्रोफेदन शैली में लिखे गए हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन पूर्णतः सही है। हड़प्पाई लिपि को आज तक कोई भी विद्वान संतोषजनक ढंग से पढ़ नहीं पाया है। यही कारण है कि इस सभ्यता को ‘आद्य-ऐतिहासिक’ (Proto-historic) काल में रखा जाता है।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। हड़प्पाई लिपि के न पढ़े जा पाने के कई कारण हैं:
-
संक्षिप्त अभिलेख: अधिकांश अभिलेख मोहरों पर हैं जो बहुत छोटे हैं (औसत 5-10 चिह्न), जिससे संदर्भ समझना कठिन होता है।
-
बस्त्रोफेदन (Boustrophedon) शैली: यह लिपि अक्सर दाईं से बाईं ओर और फिर अगली पंक्ति में बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी।
-
द्विभाषी लेख का अभाव: अभी तक कोई ऐसा लेख नहीं मिला है जो हड़प्पाई और किसी अन्य ज्ञात लिपि (जैसे मेसोपोटामिया की कीलाक्षर लिपि) में एक साथ लिखा हो।
-
चूँकि लेखों का संक्षिप्त होना और उनकी विशिष्ट लेखन शैली (बस्त्रोफेदन) ही लिपि को समझने में मुख्य बाधा उत्पन्न करते हैं, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
हड़प्पाई लिपि की मुख्य विशेषताएं:
-
भाव-चित्रात्मक (Logo-syllabic): यह वर्णमाला के बजाय प्रतीकों और चित्रों पर आधारित है।
-
चिह्नों की संख्या: इसमें कुल मूल चिह्नों की संख्या लगभग 375 से 400 के बीच मानी जाती है।
-
लेखन सामग्री: यह मुख्य रूप से सेलखड़ी (Steatite) की मोहरों, तांबे के औजारों और बर्तनों पर पाई गई है।
60. गदर पार्टी भारत में ब्रिटिश के विरूद्ध क्रांतिकारी संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध थी। कुछ प्रमुख गदर नेता थेः
a. रहमत अली शाह
c. अली जफर खान
d. मौलाना शौकत अली
b. सोहन सिंह भाखना
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b केवल
(B) b, c केवल
(C) c, d केवल
(D) d, a केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
गदर पार्टी (Ghadar Party) से संबंधित प्रमुख नेताओं का विवरण इस प्रकार है:
-
सोहन सिंह भाखना (b): ये गदर पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष थे। 1913 में अमेरिका के पोर्टलैंड में ‘पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन’ की स्थापना हुई थी, जिसे बाद में गदर पार्टी के नाम से जाना गया।
-
रहमत अली शाह (a): ये गदर आंदोलन के एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे जिन्होंने गदर पार्टी के संदेश को फैलाने और सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
अन्य नामों का विश्लेषण:
-
अली जफर खान: यह नाम गदर पार्टी के मुख्य नेतृत्व पटल पर प्रमुखता से नहीं आता है।
-
मौलाना शौकत अली: इनका संबंध मुख्य रूप से खिलाफत आंदोलन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से था, न कि गदर पार्टी के क्रांतिकारी सशस्त्र संघर्ष से।
अतः, दिए गए विकल्पों में से a और b ही गदर पार्टी के प्रमुख नेताओं के रूप में सही हैं।
सही उत्तर: (A) a, b केवल
गदर पार्टी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
-
स्थापना: 1913 (सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका)।
-
मुख्यालय: युगांतर आश्रम (San Francisco)।
-
प्रमुख अन्य नेता: लाला हरदयाल (प्रमुख रणनीतिकार), करतार सिंह सराभा, और भाई परमानंद।
-
उद्देश्य: भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के लिए सशस्त्र विद्रोह का आयोजन करना।
61 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (अधिगम सामग्री) | सूची II (प्रस्तुति) |
| a. ब्लैकबोर्ड | I. सारांश और समीक्षा |
| b. वृक्ष आरेख (चार्ट) | II. यथार्थपरक रीति से तथ्य प्रस्तुत करना |
| C. चित्र | III. प्रक्रियाओं का निरूपण करना |
| d. फिल्म | IV. किसी राजवंश का विकास |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-ll, b-lll, c-IV, d-I
(C) a-III, b-IV, c-I, d-II
(D) a-IV, b-1, c-II, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शिक्षण-अधिगम सामग्री (Teaching-Learning Materials) और उनके सर्वोत्तम उपयोग के आधार पर सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. ब्लैकबोर्ड (Blackboard): इसका मुख्य उपयोग पाठ के दौरान महत्वपूर्ण बिंदुओं को लिखने, सारांश और समीक्षा (Summary and Review) प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। (a-I)
-
b. वृक्ष आरेख/चार्ट (Tree Chart): यह आरेख पदानुक्रम (Hierarchy) को दर्शाने के लिए सर्वोत्तम है, जैसे किसी राजवंश का विकास या वंशवृक्ष दिखाना। (b-IV)
-
c. चित्र (Pictures): चित्रों का उपयोग किसी भी तथ्य को यथार्थपरक (Realistic) रीति से प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है ताकि छात्र उसे आसानी से विज़ुअलाइज़ कर सकें। (c-II)
-
d. फिल्म (Film): फिल्मों या वीडियो के माध्यम से जटिल प्रक्रियाओं का निरूपण (Demonstrating processes) प्रभावी ढंग से किया जाता है, क्योंकि इसमें गति और ध्वनि दोनों होते हैं। (d-III)
दिए गए विकल्पों के अनुसार, मिलान इस प्रकार होना चाहिए: a-I, b-IV, c-II, d-III। चूँकि आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में यह सटीक क्रम मौजूद नहीं है, लेकिन तार्किक रूप से (D) का प्रारूप (a-IV के स्थान पर a-I मानकर) या अन्य संयोजनों को देखने पर, सही संबंध उपर्युक्त विश्लेषण के अनुसार ही होगा। प्रश्न के विकल्पों में मुद्रण त्रुटि (Printing error) हो सकती है।
यदि हम सबसे करीबी मेल देखें जो शैक्षिक सिद्धांतों पर आधारित है:
-
a ↔ I
-
b ↔ IV
-
c ↔ II
-
d ↔ III
शिक्षण सामग्री के लाभ:
-
दृश्य सामग्री (Visual Aids): जैसे चार्ट और ब्लैकबोर्ड, जो अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त बनाते हैं।
-
दृश्य-श्रव्य सामग्री (Audio-Visual Aids): जैसे फिल्म, जो छात्रों के ध्यान को अधिक समय तक केंद्रित रखती है।
62 सूची I को सूची II से सुमेलित करे
| सूची । (पाठ्यचर्या क्रियाकलाप) | सूची II (अर्थ) |
| a. समन्वय | I. शिक्षण की विभिन्न शाखाओं से ज्ञान का एकीकरण |
| b. सहसंबंध | II. अधिगम विभिन्न समय में विस्तृत होता है। |
| c. घूर्णित पाठ्यचर्या | III. समाज विज्ञान विषय का अन्य विद्यालय विषयों से सहसंबंध |
| d. एकीभवन | IV. किसी विषय के विभिन्न भाग अन्तरसंबंधित होते हैं। |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-lll, c-IV, d-I
(C) a-III, b-IV, c-I, d-II
(D) a-IV, b-1, c-II, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
पाठ्यचर्या (Curriculum) के सिद्धांतों और शिक्षण विधियों के आधार पर सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. समन्वय (Coordination): इसका अर्थ है किसी एक ही विषय के विभिन्न अंगों या भागों को इस प्रकार व्यवस्थित करना कि वे परस्पर जुड़े रहें। अतः (a-IV)।
-
b. सहसंबंध (Correlation): जब एक विषय (जैसे समाज विज्ञान) को दूसरे विद्यालयी विषयों (जैसे भूगोल या साहित्य) के साथ जोड़कर पढ़ाया जाता है, तो उसे सहसंबंध कहते हैं। अतः (b-III)।
-
c. घूर्णित पाठ्यचर्या (Spiral/Rotational Curriculum): इस सिद्धांत के अनुसार, विषयों को एक बार में खत्म करने के बजाय समय-समय पर दोहराया जाता है और उनका विस्तार किया जाता है। अतः (c-II)।
-
d. एकीभवन (Integration): इसमें शिक्षण की विभिन्न शाखाओं और विषयों के ज्ञान को एक सूत्र में पिरोकर एक एकीकृत इकाई के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अतः (d-I)।
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ IV
-
b ↔ III
-
c ↔ II
-
d ↔ I
दिए गए विकल्पों में से किसी में भी यह सटीक संयोजन पूर्णतः उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यदि विकल्पों के तर्क को देखें, तो (D) में c-II और d-III का तालमेल दिया गया है, लेकिन ‘a’ और ‘b’ के मिलान में विसंगति है। तार्किक रूप से ऊपर दिया गया मिलान ही शैक्षिक सिद्धांतों के अनुसार सही है।
पाठ्यचर्या के प्रमुख सिद्धांत:
-
लचीलेपन का सिद्धांत: विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव संभव होना।
-
क्रियाशीलता का सिद्धांत: करके सीखने (Learning by doing) पर बल देना।
-
एकीकरण (Integration): ज्ञान को खंडों में बाँटने के बजाय समग्र रूप में प्रस्तुत करना।
63. सर्वप्रथम किसने सूक्ष्म अध्यापन शब्द प्रस्तुत किया था?
(A) ए. डब्ल्यू. ड्वाइट एलेन
(B) सी.सी. वुड
(C) एन. फ्लांडर्स
(D) ई. सी. राग्ग
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ए. डब्ल्यू. ड्वाइट एलेन (A.W. Dwight Allen) ने किया था।
सही उत्तर: (A) ए. डब्ल्यू. ड्वाइट एलेन
सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
-
उद्देश्य: यह शिक्षक-प्रशिक्षण की एक तकनीक है जिसका उद्देश्य छात्र-अध्यापकों में विशिष्ट शिक्षण कौशल (जैसे- प्रस्तावना कौशल, व्याख्या कौशल, प्रश्नोत्तर कौशल) विकसित करना है।
-
इतिहास: इसकी शुरुआत 1963 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (Stanford University) में ड्वाइट एलेन और उनके सहयोगियों (रॉबर्ट बुश तथा कीथ एचिसन) द्वारा की गई थी।
-
प्रक्रिया: इसे ‘स्केल्ड डाउन टीचिंग’ (Scaled-down teaching) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कक्षा का आकार (5-10 छात्र) और समय (5-10 मिनट) दोनों को कम कर दिया जाता है।
भारतीय संदर्भ में सूक्ष्म शिक्षण:
-
भारत में इसे डी. डी. तिवारी ने 1967 में ‘सीपीआई’ (CPI), इलाहाबाद में शुरू किया था।
-
NCERT द्वारा तैयार किए गए भारतीय सूक्ष्म शिक्षण चक्र की कुल अवधि 36 मिनट होती है।
64 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (शिक्षण उपकरण) | सूची II (अधिगम संरचना) |
| a. रेडियो | I. संकल्पना |
| b. रेखा आरेखण | II. शृंखला |
| c. शैक्षणिक भ्रमण | III. संकेत सिद्धांत् |
| d. टीवी | IV. विभेद/भेदभाव |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a-l, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-III, c-IV, d-1
(C) a-III, b-IV, c-II, d-I
(D) a-IV, b-1, c-III, d-II
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शिक्षण उपकरणों और गने (Gagne) के अधिगम स्तरों या सामान्य अधिगम संरचनाओं के बीच तार्किक संबंध के आधार पर सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. रेडियो (Radio): रेडियो एक श्रव्य उपकरण है। गने के अधिगम सोपानिकी के अनुसार, संकेत अधिगम (Signal Learning) प्रारंभिक स्तर है जहाँ ध्वनियों या संकेतों के माध्यम से सीखना शुरू होता है। (a-III)
-
b. रेखा आरेखण (Line Drawing): रेखाचित्रों या आरेखों का उपयोग अक्सर विभिन्न आकृतियों या वस्तुओं के बीच विभेद/भेदभाव (Discrimination) स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। (b-IV)
-
c. शैक्षणिक भ्रमण (Educational Excursion): वास्तविक परिस्थितियों में जाकर सीखने से छात्र विभिन्न घटनाओं को एक शृंखला (Chain) या क्रमबद्ध रूप में समझते हैं। (c-II)
-
d. टीवी (TV): टेलीविजन एक दृश्य-श्रव्य माध्यम है जो जटिल संकल्पनाओं (Concepts) को प्रभावी ढंग से समझाने और मस्तिष्क में चित्र बनाने में मदद करता है। (d-I)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ III
-
b ↔ IV
-
c ↔ II
-
d ↔ I
अतः सही सुमेलित विकल्प (C) है।
सही उत्तर: (C) a-III, b-IV, c-II, d-I
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
रॉबर्ट गने की अधिगम सोपानिकी: इन्होंने अधिगम के 8 प्रकार बताए हैं, जिनमें ‘संकेत अधिगम’ सबसे सरल और ‘समस्या समाधान’ सबसे जटिल स्तर है।
-
दृश्य-श्रव्य सामग्री का महत्व: एडगर डेल के ‘अनुभव शंकु’ (Cone of Experience) के अनुसार, शैक्षणिक भ्रमण और टीवी जैसे माध्यमों से प्राप्त अधिगम अधिक स्थायी होता है।
65 अध्याय नियोजन के ब्लूम के मूल्यांकन के आधार पर निम्नलिखित को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. शिक्षण उपकरपा
b. शिक्षक क्रियाकलाप
c. विषयवस्तु
d. विद्यार्थी क्रियाकलाप
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, c, d
(B) b, c, a, d
(C) c, b, d, a
(D) c, a, d, b
(E) अनुत्तरित प्रश्न
बेंजामिन ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण और पाठ योजना (Lesson Planning) के तार्किक क्रम के आधार पर, इन चरणों को विषय की प्रस्तुति से लेकर उसके क्रियान्वयन तक के आरोही क्रम (प्रारंभिक से अंतिम) में इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है:
-
c. विषयवस्तु (Content): पाठ योजना की शुरुआत हमेशा ‘क्या पढ़ाना है’ यानी विषयवस्तु के चयन से होती है।
-
b. शिक्षक क्रियाकलाप (Teacher Activities): विषयवस्तु तय होने के बाद शिक्षक यह योजना बनाता है कि वह उसे कैसे प्रस्तुत करेगा (व्याख्यान, प्रदर्शन आदि)।
-
d. विद्यार्थी क्रियाकलाप (Student Activities): शिक्षक की क्रिया के बाद छात्रों की सहभागिता (प्रश्न पूछना, अभ्यास करना) सुनिश्चित की जाती है।
-
a. शिक्षण उपकरण (Teaching Aids): अंत में, शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों और सहायक सामग्रियों का उपयोग उनके विशिष्ट उद्देश्यों के अनुसार किया जाता है।
तार्किक क्रम:
-
विषयवस्तु (c)
-
शिक्षक क्रियाकलाप (b)
-
विद्यार्थी क्रियाकलाप (d)
-
शिक्षण उपकरण (a)
अतः सही क्रम c, b, d, a है।
सही उत्तर: (C) c, b, d, a
ब्लूम का मूल्यांकन दृष्टिकोण:
ब्लूम ने मूल्यांकन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर इसे ‘शिक्षण-अधिगम’ प्रक्रिया का अभिन्न अंग माना है। उनके अनुसार एक सफल पाठ योजना में उद्देश्य, अधिगम अनुभव और मूल्यांकन के बीच गहरा संबंध होता है।
66. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: मारिया मोन्टेसरी शिक्षण मॉडल बाल शिक्षा में बहुत प्रभावी है।
कारण R: मोन्टेसरी विधि प्रेक्षण और प्रयोग करने की बालक और शिक्षक, दोनों की स्वतंत्रता, आजादी की महत्ता पर बल देती है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नही हैं।’
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मारिया मोन्टेसरी के शैक्षिक दर्शन और मॉडल के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। मारिया मोन्टेसरी द्वारा विकसित शिक्षण मॉडल विशेष रूप से प्रारंभिक बाल शिक्षा (Early Childhood Education) में विश्व स्तर पर अत्यंत प्रभावी और लोकप्रिय माना जाता है। यह बच्चों के संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। मोन्टेसरी विधि का मूल आधार ‘स्वतंत्रता’ (Liberty) है। इसमें बालक को अपनी रुचि के अनुसार सीखने की आजादी दी जाती है और शिक्षक एक ‘निदेशक’ (Directress) की भूमिका में बालक के स्वाभाविक विकास का प्रेक्षण (Observation) करता है। स्वतंत्रता का यह वातावरण ही इस विधि को प्रभावी बनाता है।
चूँकि बालक और शिक्षक की यही ‘स्वतंत्रता’ और ‘स्वाभाविक प्रेक्षण’ की विशेषता मोन्टेसरी मॉडल की सफलता और प्रभावशीलता का मुख्य कारण है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही और सटीक व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
मोन्टेसरी शिक्षा पद्धति की मुख्य विशेषताएँ:
-
स्व-शिक्षा (Auto-education): बालक स्वयं की गति और रुचि से सीखता है।
-
तैयार वातावरण (Prepared Environment): कक्षा को बच्चों की शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।
-
ज्ञानेंद्रियों का प्रशिक्षण: इस पद्धति में बालक की ज्ञानेंद्रियों (Senses) के अभ्यास पर विशेष बल दिया जाता है।
-
शिक्षक की भूमिका: शिक्षक यहाँ ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेक्षक (Observer) होता है।
67. अधिगम के सिद्धांतों के विकास को उनके उद्भव होने केअनुसार बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
a. शास्त्रीय अनुबंधन
b. प्रयास और त्रुटि अधिगम
c. अंतर्दृष्टिपूर्ण अधिगम
d. प्रचालक अनुबंधन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
A) b, d, c, a
(B) b, a, c, d
(C) b, c, a, d
(D) b, c, d, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
अधिगम (Learning) के सिद्धांतों के विकास को उनके प्रतिपादन वर्ष और मनोवैज्ञानिकों के योगदान के आधार पर बढ़ते क्रम (Chronological Order) में व्यवस्थित करने पर निम्न विवरण प्राप्त होता है:
-
b. प्रयास और त्रुटि अधिगम (Trial and Error Learning): एडवर्ड एल. थार्नडाइक ने 1898 (Animal Intelligence) में अपने प्रयोगों के आधार पर इसे प्रतिपादित किया था। यह अधिगम के शुरुआती वैज्ञानिक सिद्धांतों में से एक है।
-
a. शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): इवान पावलव ने 1904 के आसपास (पाचन क्रिया पर उनके नोबेल पुरस्कार कार्य के दौरान) इस सिद्धांत को विकसित किया था।
-
c. अंतर्दृष्टिपूर्ण अधिगम (Insightful Learning): वोल्फगैंग कोहलर ने 1917 (The Mentality of Apes) में सुल्तान नामक चिंपैंजी पर प्रयोग कर ‘गेस्टाल्टवाद’ के अंतर्गत यह सिद्धांत दिया था।
-
d. प्रचालक/क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning): बी.एफ. स्किनर ने 1938 (The Behavior of Organisms) में इस सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जो व्यवहारवाद का एक उन्नत चरण था।
विकास का सही क्रम:
-
प्रयास और त्रुटि (1898) – b
-
शास्त्रीय अनुबंधन (1904) – a
-
अंतर्दृष्टिपूर्ण अधिगम (1917) – c
-
प्रचालक अनुबंधन (1938) – d
अतः सही क्रम b, a, c, d है।
सही उत्तर: (B) b, a, c, d
अधिगम सिद्धांतों का संक्षिप्त सारांश:
| सिद्धांत | प्रतिपादक | मुख्य तत्व |
| प्रयास और त्रुटि | थार्नडाइक | उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R Bond), बिल्ली पर प्रयोग। |
| शास्त्रीय अनुबंधन | पावलव | स्वाभाविक और अस्वाभाविक उद्दीपक, कुत्ते पर प्रयोग। |
| अंतर्दृष्टि अधिगम | कोहलर | सूझ का सिद्धांत, ‘पूर्ण से अंश’ की ओर। |
| प्रचालक अनुबंधन | स्किनर | पुनर्बलन (Reinforcement) का महत्व, चूहे/कबूतर पर प्रयोग। |
68. प्रसुप्ति काल (किसी घटना के घटित होने और तत्पश्चात् उसकै पुनः स्मरण की बीच की समयावधि) कब से बढ़ता है ? (निम्न में से “सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) जन्म से 4 वर्ष तक
(B) । वर्ष से 7 वर्ष तक
(C) जन्म से 6 वर्ष तक
(D) जन्म से 10 वर्ष तक
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मनोविज्ञान और विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental Psychology) के अनुसार, स्मृति के विकास और किसी घटना को याद रखने की क्षमता (Retention) का विस्तार शैशवावस्था से बाल्यावस्था की ओर बढ़ने पर होता है।
सही उत्तर: (C) जन्म से 6 वर्ष तक
मनोवैज्ञानिक आधार और विश्लेषण:
स्मृति का प्रसुप्ति काल (Latency Period) वह समय अंतराल है जिसके दौरान मस्तिष्क सूचना को संचित रखता है और बाद में उसे पुनः स्मरण (Recall) कर पाता है।
-
शैशवावस्था (0-2 वर्ष): इस अवस्था में बच्चों की स्मृति बहुत अल्पकालिक होती है। वे घटनाओं को कुछ घंटों या दिनों तक ही याद रख पाते हैं।
-
पूर्व-बाल्यावस्था (2-6 वर्ष): जैसे-जैसे मस्तिष्क का विकास (विशेषकर हिप्पोकैम्पस) होता है, प्रसुप्ति काल तेजी से बढ़ता है। 6 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते बच्चा कई महीनों पुरानी घटनाओं को याद रखने और उन्हें भाषा के माध्यम से व्यक्त करने में सक्षम हो जाता है।
-
महत्व: 6 वर्ष की आयु को अक्सर “स्मृति के विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव” माना जाता है, जहाँ से दीर्घकालिक स्मृति (Long-term memory) अधिक सुदृढ़ होने लगती है।
प्रसुप्ति काल को प्रभावित करने वाले कारक:
-
मस्तिष्क की परिपक्वता: तंत्रिका तंत्र का विकास सूचनाओं को अधिक समय तक रोकने में मदद करता है।
-
भाषा का विकास: शब्दों के माध्यम से अनुभवों को ‘कोड’ करना याद रखने में आसानी पैदा करता है।
-
पुनरावृत्ति: किसी घटना या कार्य का बार-बार दोहराया जाना प्रसुप्ति काल को बढ़ाता है।
69. नवजातों के रोने के बारे में निम्नलिखित में से कौनसे सत्य हैं?
a. रोने का माता-पिता के लिए कोई अर्थ नहीं है।
b. रोने और संप्रेषण के बारे में कोई शोध साक्ष्य नहीं है।
c. रोना बालक द्वारा सम्प्रेषण करने की प्रथम विधि है।
d. नवजात तापमान परिवर्तन, अकस्मात् शोर अथवा किसी पीड़ाजनक अनुप्रेरण के प्रत्युत्तर में हो सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a और b केवल
(B) a और c केवल
(C) b और c केवल
(D) c और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
विकासात्मक मनोविज्ञान (Developmental Psychology) और बाल विकास के सिद्धांतों के आधार पर नवजात शिशुओं के रोने का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
कथन (a): यह असत्य है। नवजात का रोना माता-पिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण संकेत होता है। यह उन्हें बच्चे की जरूरतों (जैसे भूख, नींद, या असुविधा) को समझने में मदद करता है।
-
कथन (b): यह असत्य है। मनोविज्ञान और चिकित्सा विज्ञान में शिशुओं के रोने और संप्रेषण (Communication) के बीच संबंधों पर व्यापक शोध उपलब्ध हैं। शोध बताते हैं कि विभिन्न प्रकार के रोने के अलग-अलग अर्थ होते हैं।
-
कथन (c): यह सत्य है। भाषा के विकास से पहले, रोना ही वह प्रथम विधि या माध्यम है जिसके द्वारा एक नवजात अपनी भावनाओं, आवश्यकताओं और संकट को दूसरों तक पहुँचाता है (इसे ‘Pre-verbal communication’ कहा जाता है)।
-
कथन (d): यह सत्य है। नवजात शिशु का तंत्रिका तंत्र बहुत संवेदनशील होता है। वे तापमान में बदलाव (बहुत ठंड या गर्मी), अचानक शोर या किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप रोते हैं।
अतः, दिए गए कथनों में से केवल c और d सही हैं।
सही उत्तर: (D) c और d केवल
नवजात के रोने के मुख्य कारण:
-
जैविक आवश्यकताएं: भूख लगना, प्यास लगना या गीलापन महसूस करना।
-
पर्यावरणीय कारक: अत्यधिक प्रकाश, शोर या असहज तापमान।
-
भावनात्मक आवश्यकता: माता-पिता का सानिध्य या सुरक्षा की भावना की चाह।
-
शारीरिक कष्ट: पेट में दर्द (Colic) या किसी बीमारी के लक्षण।
70. अभ्यासगतता के बारे में निम्नलिखित में से कौनसे सत्य हैं?
a. यह पुनरावृत्ति अनुप्रेरण के कारण, प्रत्युत्तर की शक्ति में क्रमिक वृद्धि / सुधार को संदर्भित करता है।
b. यह पुनरावृत्तिक अनुप्रेरण के कारण प्रत्युत्तर की शक्ति में क्रमिक कमी/गिरावट को संदर्भित करता है
c. परिवेश में एक नवीन अनुप्रेरण परिवर्तन, उच्चतर के अभ्यागत प्रत्युत्तर में फलित होता है जिसे पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) कहते हैं।
d. परिवेश में नवीन अनुप्रेरण – परिवर्तन से अभ्यासगत्तता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a और b केवल
(B) b और c केवल
(C) a और c केवल
(D) c और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मनोविज्ञान (Psychology) में अभ्यासगतता (Habituation) अधिगम का सबसे सरल रूप है। इसका विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
कथन (a): यह असत्य है। उद्दीपक (Stimulus) की पुनरावृत्ति से प्रत्युत्तर की शक्ति में वृद्धि को ‘संवेदीकरण’ (Sensitization) कहा जाता है, न कि अभ्यासगतता।
-
कथन (b): यह सत्य है। अभ्यासगतता वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही उद्दीपक या अनुप्रेरण के बार-बार प्रस्तुत किए जाने पर जीव उसके प्रति अपना प्रत्युत्तर (Response) कम कर देता है। जैसे- घड़ी की टिक-टिक की आवाज पर शुरुआत में ध्यान जाता है, लेकिन बाद में हम उसे सुनना बंद कर देते हैं।
-
कथन (c): यह सत्य है। यदि परिवेश में कोई नया या अलग उद्दीपक (Novel Stimulus) आता है, तो जीव का ध्यान फिर से बढ़ जाता है। इसे ‘पुनर्प्राप्ति’ (Recovery) या ‘वि-अभ्यासगतता’ (Dishabituation) कहा जाता है।
-
कथन (d): यह असत्य है। नवीन अनुप्रेरण या परिवर्तन का अभ्यासगतता पर गहरा प्रभाव पड़ता है और यह ध्यान को पुनः सक्रिय कर देता है।
अतः, दिए गए कथनों में से b और c सही हैं।
सही उत्तर: (B) b और c केवल
अभ्यासगतता के मुख्य बिंदु:
-
अनुकूलन: यह जीव को अनावश्यक सूचनाओं को अनदेखा करने और महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
-
अधिगम की प्रकृति: यह एक ‘गैर-सहयोगी अधिगम’ (Non-associative learning) है क्योंकि इसमें दो उद्दीपकों के बीच कोई संबंध नहीं बनाया जाता।
-
उदाहरण: सड़क के किनारे रहने वाले लोगों का धीरे-धीरे वाहनों के शोर के प्रति अभ्यस्त हो जाना।
71. …… डेटा के प्रसंस्करण के लिए उत्तरदायी होता है और ये प्रसंस्करण के लिए डेटा स्टोरेज यूनिट (इकाई) से प्राप्त करता है।
(A) एरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल. यू.)
(B) कंट्रोल यूनिट (सी. यू.)
(C) प्राइमरी स्टोरेज
(D) सैकन्डरी स्टोरेज
(E) अनुत्तरित प्रश्न
रिक्त स्थान के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प एरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) है।
सही उत्तर: (A) एरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल. यू.)
तकनीकी स्पष्टीकरण:
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) के भीतर कार्यों का विभाजन इस प्रकार होता है:
-
ALU (एरिथमेटिक लॉजिक यूनिट): यह CPU का वह भाग है जो वास्तविक डेटा प्रसंस्करण (Data Processing) के लिए उत्तरदायी होता है। यह सभी गणितीय गणनाएं (जैसे जोड़, घटाव) और तार्किक निर्णय (जैसे तुलना करना) करता है। यह प्रोसेसिंग के लिए आवश्यक डेटा को स्टोरेज यूनिट (रजिस्टर या मेमोरी) से प्राप्त करता है।
-
CU (कंट्रोल यूनिट): यह प्रसंस्करण नहीं करता, बल्कि कंप्यूटर के अन्य भागों को ‘निर्देश’ देता है कि क्या करना है। यह एक ट्रैफिक पुलिस की तरह कार्य करता है।
-
स्टोरेज यूनिट (Primary/Secondary): इनका कार्य डेटा को केवल स्टोर करना होता है, प्रोसेस करना नहीं।
मुख्य अवयवों का तुलनात्मक विवरण:
| इकाई | मुख्य कार्य |
| ALU | गणनाएं और तार्किक प्रसंस्करण (Processing) करना। |
| Control Unit | निर्देशों को डिकोड करना और उपकरणों को नियंत्रित करना। |
| Storage Unit | डेटा और निर्देशों को सहेज कर रखना। |
72 यूआरएल का पूरा नाम है :-
(निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर्स
(B) यूनीवर्सल रिसोर्सेज लोकेटर्स
(C) यूनीफार्म रिजर्व लोकेशन
(D) यूनीफॉर्म रिसर्च लोकेशन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
URL का पूरा नाम यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (Uniform Resource Locator) है।
सही उत्तर: (A) यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर्स
URL के बारे में मुख्य जानकारी:
URL इंटरनेट पर मौजूद किसी भी फ़ाइल, वेबसाइट या संसाधन का एक विशिष्ट पता (Unique Address) होता है। जिस तरह हमारे घर का एक पता होता है, वैसे ही इंटरनेट पर हर पेज का एक URL होता है।
URL के मुख्य भाग:
एक मानक URL आमतौर पर तीन मुख्य भागों से मिलकर बना होता है:
-
प्रोटोकॉल (Protocol): यह बताता है कि डेटा कैसे स्थानांतरित होगा (जैसे:
http://याhttps://)। -
डोमेन नाम (Domain Name): यह उस सर्वर या वेबसाइट का नाम है (जैसे:
www.google.com)। -
पाथ (Path): यह वेबसाइट के भीतर किसी विशिष्ट पेज या फ़ाइल का स्थान बताता है (जैसे:
/images/logo.png)।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
विकल्प (B), (C) और (D) में प्रयुक्त शब्द ‘Universal’, ‘Reserve’ या ‘Research’ तकनीकी रूप से गलत हैं। शुद्ध मानक शब्दावली में ‘Uniform’ और ‘Locator’ का ही प्रयोग किया जाता है।
73 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: ट्रोजन हॉर्स एक मेलवेयर है।
कारण R. ट्रोजन हॉर्स एक स्व-प्रतिकृति करने वाला मेलवेयर है।
उपरोक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
कंप्यूटर सुरक्षा और मेलवेयर (Malware) के सिद्धांतों के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन बिल्कुल सही है। ट्रोजन हॉर्स (Trojan Horse) एक प्रकार का मेलवेयर या दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है जो स्वयं को एक वैध और उपयोगी प्रोग्राम के रूप में प्रस्तुत करके उपयोगकर्ता को धोखा देता है।
-
कारण (R): यह कथन गलत है। ट्रोजन हॉर्स की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह स्व-प्रतिकृति (Self-replicating) नहीं करता है। कंप्यूटर वायरस या ‘वर्म’ (Worm) के विपरीत, ट्रोजन खुद की कॉपियाँ बनाकर दूसरे कंप्यूटरों में नहीं फैलता; इसे फैलने के लिए उपयोगकर्ता द्वारा इसे डाउनलोड करने या निष्पादित (Execute) करने की आवश्यकता होती है।
चूँकि अभिकथन सही है और कारण गलत है, इसलिए सही विकल्प (C) होगा।
सही उत्तर: (C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
ट्रोजन हॉर्स के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:
-
भ्रामक रूप: यह अक्सर गेम, स्क्रीनसेवर या किसी उपयोगी उपयोगिता (Utility) के रूप में दिखाई देता है।
-
कार्य: एक बार सक्रिय होने पर, यह हमलावर को आपके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस दे सकता है, डेटा चुरा सकता है या अन्य मेलवेयर इंस्टॉल कर सकता है।
-
नाम का आधार: इसका नाम प्राचीन यूनानी कथा के लकड़ी के घोड़े (‘Trojan Horse’) के नाम पर रखा गया है, जिसका उपयोग धोखे से अभेद्य किले में प्रवेश करने के लिए किया गया था।
मेलवेयर के प्रकारों में अंतर:
| प्रकार | स्व-प्रतिकृति (Self-replicating) | मुख्य विशेषता |
| वायरस (Virus) | हाँ | किसी फाइल के साथ जुड़कर फैलता है। |
| वर्म (Worm) | हाँ | बिना मानवीय हस्तक्षेप के नेटवर्क पर फैलता है। |
| ट्रोजन (Trojan) | नहीं | वैध सॉफ़्टवेयर का मुखौटा पहनकर धोखा देता है। |
74. यदि पासवर्ड निम्नलिखित से मिलकर बने हो तो उन्हें हैक करना कठिन है।
a. छोटे अक्षर
b. विशेष प्रतीक/कैरेक्टर
c. बड़े अक्षर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b और c
(B) a, c केवल
(C) b, c केवल
(D) b, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
साइबर सुरक्षा के सिद्धांतों के अनुसार, एक मजबूत पासवर्ड (Strong Password) वह होता है जिसे आसानी से अनुमानित (Guess) न किया जा सके और जिसे ‘ब्रूट फ़ोर्स अटैक’ (Brute Force Attack) जैसे तरीकों से हैक करना कठिन हो।
हैक करना तब सबसे कठिन होता है जब पासवर्ड में विविधता (Complexity) हो। इसमें निम्नलिखित का मिश्रण होना चाहिए:
-
a. छोटे अक्षर (Lowercase letters): जैसे
a, b, c... -
c. बड़े अक्षर (Uppercase letters): जैसे
A, B, C... -
b. विशेष प्रतीक/कैरेक्टर (Special symbols): जैसे
@, #, $, %, &... -
अंक (Numbers): जैसे
1, 2, 3...(हालांकि यह विकल्प में अलग से नहीं है, पर a, b और c का मेल सबसे मजबूत है)।
दिए गए विकल्पों के आधार पर, a, b और c का संयोजन पासवर्ड की जटिलता को सबसे अधिक बढ़ाता है, जिससे उसे क्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
सही उत्तर: (A) a, b और c
एक सुरक्षित पासवर्ड के लिए सुझाव:
-
लंबाई: पासवर्ड कम से कम 12-16 वर्णों (Characters) का होना चाहिए।
-
अनुमान न लगाने योग्य: अपना नाम, जन्म तिथि या ‘123456’ जैसे शब्दों का प्रयोग न करें।
-
पासफ़्रेज़ (Passphrase): याद रखने में आसान बनाने के लिए किसी वाक्य के पहले अक्षरों और प्रतीकों का मेल बनाएँ (जैसे:
M@k3It$tr0ng!)।
75 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (कंप्यूटर जनरेशन) | सूची ।। (टेकनोलोजी) |
| a. फस्ट जनरेशन कंप्यूटर | I. VLSI/माइक्रोप्रोसेसर |
| b. सेकंड जनरेशन कंप्यूटर | II. इंटीग्रेटेड सर्किट /एकीकृत परिपथ |
| c. थर्ड जनरेशन कंप्यूटर | III. ट्रांजिस्टर |
| d. फोथ जनरेशन कंप्यूटर | IV. वैक्यूम ट्यूब/निर्वात नली |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-III, b-IV, c-II, d-1
(B) a-l, b-ll, c-III, d-IV
(C) a-II, b-III, c-IV, d-I
(Da-IV. b-III, c-ll, d-1
(E) अनुत्तरित प्रश्न
कंप्यूटर की विभिन्न पीढ़ियों (Generations) और उनमें प्रयुक्त मुख्य तकनीकी अवयवों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. फर्स्ट जनरेशन कंप्यूटर (1940-1956): इसमें वैक्यूम ट्यूब (निर्वात नली) का उपयोग किया गया था। ये आकार में बहुत बड़े और अधिक गर्मी उत्पन्न करने वाले थे। (a-IV)
-
b. सेकंड जनरेशन कंप्यूटर (1956-1963): वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग शुरू हुआ, जिससे कंप्यूटर छोटे और तेज़ हो गए। (b-III)
-
c. थर्ड जनरेशन कंप्यूटर (1964-1971): इसमें इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) यानी एकीकृत परिपथ का उपयोग किया गया, जिससे कार्यक्षमता में भारी वृद्धि हुई। (c-II)
-
d. फोर्थ जनरेशन कंप्यूटर (1971-वर्तमान): इसमें VLSI (Very Large Scale Integration) और माइक्रोप्रोसेसर तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे पर्सनल कंप्यूटर (PC) का जन्म हुआ। (d-I)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ IV
-
b ↔ III
-
c ↔ II
-
d ↔ I
अतः सही सुमेलित विकल्प (D) है।
सही उत्तर: (D) a-IV, b-III, c-II, d-I
कंप्यूटर की पीढ़ियों का सारांश:
| पीढ़ी | मुख्य तकनीक | उदाहरण |
| पहली | वैक्यूम ट्यूब | ENIAC, EDVAC |
| दूसरी | ट्रांजिस्टर | IBM 1620, CDC 1604 |
| तीसरी | IC (इंटीग्रेटेड सर्किट) | IBM-360 सीरीज |
| चौथी | माइक्रोप्रोसेसर (VLSI) | Apple II, PC |
| पाँचवीं | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI/ULSI) | रोबोटिक्स, सुपरकंप्यूटर |
76. राजस्थान के जिल्लों को क्षेत्रफल के घटते क्रम में व्यवस्थित करें?
a. अजमेर
b. बीकानेर
c. बाड़मेर
d. जैसलमेर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) d, b, a, c
(B) a, b, c, d
(C) a, d, b, c
(D) d, c, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के जिलों को उनके क्षेत्रफल (Area) के घटते क्रम (Descending Order) में व्यवस्थित करने के लिए उनके अनुमानित क्षेत्रफल का विवरण नीचे दिया गया है:
-
जैसलमेर (d): 38,401 वर्ग किमी (राजस्थान का सबसे बड़ा जिला)
-
बाड़मेर (c): 28,387 वर्ग किमी
-
बीकानेर (b): 27,244 वर्ग किमी
-
अजमेर (a): 8,481 वर्ग किमी (विभाजन से पूर्व का क्षेत्रफल)
घटता क्रम (बड़े से छोटा):
सबसे बड़ा जैसलमेर है, उसके बाद बाड़मेर, फिर बीकानेर और अंत में अजमेर।
अतः क्रम होगा: d, c, b, a
सही उत्तर: (D) d, c, b, a
राजस्थान के क्षेत्रफल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
-
सबसे बड़ा जिला: जैसलमेर (38,401 वर्ग किमी), जो राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 11.22% है।
-
सबसे छोटा जिला: पहले धौलपुर था, लेकिन नए जिलों के गठन के बाद वर्तमान में दूदू को सबसे छोटा जिला माना जाता है।
-
राज्य का कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किमी।
77 माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की कुल ऊर्जा क्षमता लगभग क्या है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) 2600 MW
(B) 2700 MW
(C) 2800 MW
(D) 2900 MW
(E) अनुत्तरित प्रश्न
माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की कुल ऊर्जा क्षमता 2800 मेगावाट (MW) है।
सही उत्तर: (C) 2800 MW
परियोजना के मुख्य विवरण:
यह राजस्थान की दूसरी बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना है। इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
-
इकाइयों की संख्या: इस परियोजना में 700-700 MW की कुल 4 इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं ($700 \times 4 = 2800$ MW)।
-
रिएक्टर का प्रकार: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (Pressurized Heavy Water Reactors – PHWR) का उपयोग किया जाएगा।
-
स्थान: यह राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है।
-
निर्माणकर्ता: इसका कार्यान्वयन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जा रहा है।
राजस्थान में परमाणु ऊर्जा की स्थिति:
राजस्थान परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का एक अग्रणी राज्य है:
-
रावतभाटा (चित्तौड़गढ़): राजस्थान का पहला और भारत का दूसरा परमाणु बिजली घर।
-
माही बांसवाड़ा: यह नई परियोजना राज्य में बिजली की कमी को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
78 राजस्थान में कौनसा क्षेत्र/अंचल उच्चतम वर्षा प्राप्त करता है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) माउंट आबू
(B) ब्रिजराजनगर
(C) जयपुर
(D) कोटा
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्र के संदर्भ में विश्लेषण नीचे दिया गया है:
राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान माउंट आबू (सिरोही) है, जहाँ औसतन 150 सेमी से अधिक वर्षा होती है। अरावली पर्वतमाला की ऊँचाई और इसकी स्थिति के कारण यहाँ मानसून की दोनों शाखाओं (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) से पर्याप्त नमी प्राप्त होती है।
सही उत्तर: (A) माउंट आबू
राजस्थान की वर्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
-
सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़ (यहाँ औसतन 100 सेमी वर्षा होती है)।
-
न्यूनतम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर (यहाँ औसतन 10 सेमी से भी कम वर्षा होती है)।
-
वर्षा का वितरण: राजस्थान में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा लगातार घटती जाती है।
-
मानसून का प्रवेश: राजस्थान में मानसून का प्रवेश सामान्यतः झालावाड़ और बांसवाड़ा के रास्ते होता है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
| स्थान | वर्षा की स्थिति |
| कोटा | यह हाड़ौती अंचल का हिस्सा है और यहाँ अच्छी वर्षा होती है, लेकिन माउंट आबू की तुलना में कम है। |
| जयपुर | यह अर्ध-शुष्क और आर्द्र जलवायु के बीच स्थित है, यहाँ औसत वर्षा 50-60 सेमी होती है। |
79 लुगदी और काग़ज की छपाई और रंगाई में कौनसा वन उत्पाद प्रयुक्त होता है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) धूड़ी
(B) कत्था
(C) तेन्दु
(D) सण
(E) अनुत्तरित प्रश्न
लुगदी और काग़ज उद्योग के साथ-साथ छपाई और रंगाई में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख वन उत्पाद कत्था (Kattha) है।
सही उत्तर: (B) कत्था
कत्था के बारे में मुख्य जानकारी:
-
स्रोत: कत्था खैर (Acacia catechu) वृक्ष की लकड़ी से प्राप्त किया जाता है। खैर के पेड़ के तने के अंदरूनी भाग (Heartwood) को काटकर और पानी में उबालकर कत्था निकाला जाता है।
-
उपयोग: * इसका उपयोग पारंपरिक रूप से पान में किया जाता है।
-
औद्योगिक स्तर पर इसका प्रयोग काग़ज की छपाई, कपड़ा रंगाई (Dyeing) और चमड़े के शोधन (Tanning) में भारी मात्रा में होता है।
-
-
राजस्थान में स्थिति: राजस्थान के दक्षिणी जिलों विशेषकर उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ में खैर के वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
तेन्दु (C) : इसके पत्तों का उपयोग मुख्य रूप से बीड़ी बनाने में किया जाता है। इसे ‘वागड़ का चीकू’ भी कहा जाता है।
-
सण (D) : यह एक रेशेदार फसल है जिसका उपयोग रस्सी, बोरे और मोटे कपड़े बनाने में होता है।
-
धूड़ी (A) : यह विकल्प इस संदर्भ में प्रासंगिक नहीं है।
80. 2011 की जनगणना के अनुसार, किस ज़िले में अधिकतम पुरुष और महिला, साक्षरता दर हैं? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) बूंदी
(B) बारां
(C) अलवर
(D) जयपुर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पुरुष और महिला साक्षरता की स्थिति नीचे दी गई है:
दिए गए विकल्पों में से जयपुर (D) वह जिला है जहाँ अधिकतम पुरुष और महिला साक्षरता दर पाई जाती है।
सही उत्तर: (D) जयपुर
साक्षरता के विस्तृत आंकड़े (जनगणना 2011):
| साक्षरता श्रेणी | राजस्थान में प्रथम स्थान (जिला) | साक्षरता दर (%) |
| कुल साक्षरता | कोटा | 76.6% |
| पुरुष साक्षरता | झुंझुनू | 86.9% |
| महिला साक्षरता | कोटा | 65.9% |
विकल्पों का विश्लेषण:
दिए गए विकल्पों (बूंदी, बारां, अलवर, जयपुर) में से जयपुर की साक्षरता दर सबसे प्रभावशाली है:
-
जयपुर की कुल साक्षरता: 75.5% (राज्य में कोटा के बाद दूसरे स्थान पर)।
-
जयपुर में पुरुष साक्षरता (लगभग 86%) और महिला साक्षरता (लगभग 64%) दोनों ही अन्य तीनों विकल्पों (बूंदी, बारां, अलवर) की तुलना में अधिक हैं।
राजस्थान साक्षरता के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
-
राज्य की कुल साक्षरता दर: 66.1%
-
न्यूनतम साक्षरता वाला जिला: जालौर (54.9%)
-
न्यूनतम महिला साक्षरता: जालौर (38.5%)
-
न्यूनतम पुरुष साक्षरता: प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा (69.5%)
81 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: मरुस्थली मिट्टी पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है तथा यह कम उपजाऊ होती है।
कारण R: यह मिट्टी केवल मूंगफली और कपास की कृषि के लिए अनुकूल है। 1
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही है, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की मिट्टी और कृषि जलवायु के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन पूर्णतः सही है। मरुस्थली मिट्टी (जिसे रेतीली या बलुई मिट्टी भी कहा कहते हैं) मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान के जिलों जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर आदि में पाई जाती है। इसमें जैविक अंश (Humus) और नाइट्रोजन की कमी होती है, जिसके कारण यह प्राकृतिक रूप से कम उपजाऊ होती है।
-
कारण (R): यह कथन गलत है। मरुस्थली मिट्टी मूंगफली और कपास के लिए बहुत अनुकूल नहीं मानी जाती है। मूंगफली के लिए हल्की दोमट और कपास के लिए काली या गहरी मध्यम दोमट मिट्टी (जो हाड़ौती क्षेत्र में पाई जाती है) श्रेष्ठ होती है। मरुस्थली मिट्टी मुख्य रूप से बाजरा, मोठ, ग्वार और कम पानी वाली फसलों के लिए अनुकूल है। सिंचाई की सुविधा (जैसे इंदिरा गांधी नहर) मिलने पर इसमें गेहूं और सरसों भी उगाई जाती है।
चूँकि अभिकथन सही है लेकिन कारण तथ्यात्मक रूप से गलत है, इसलिए सही विकल्प (C) होगा।
सही उत्तर: (C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
मरुस्थली मिट्टी की विशेषताएँ:
-
कणों का आकार: इस मिट्टी के कण मोटे होते हैं, जिससे इसकी जल धारण क्षमता (Water holding capacity) बहुत कम होती है।
-
लवणता: कई क्षेत्रों में इस मिट्टी में खारेपन या लवणता की अधिकता पाई जाती है।
-
विस्तार: यह अरावली के पश्चिम के लगभग 12 जिलों में फैली हुई है।
82 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एका अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसक्ने कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: अरावेली के पहाड़ियों में भौम जल नियमन, नियंत्रण और प्रबंधन की कार्यनीतियों के लागू करने की अत्यधिक आवश्यकता है।
कारण R: भौम जल के लिए गुत्यात्मक पुनर्भरण हेतु कम संभावना के कारण यह क्षेत्र जल संकट की सभेद्यता से ग्रसित है । उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नही है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की भू-वैज्ञानिक और जल संसाधनों की स्थिति के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। अरावली पहाड़ियों का क्षेत्र राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण जल-विभाजक (Water-divide) है। यहाँ जनसंख्या घनत्व और शहरीकरण बढ़ने के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे यहाँ जल नियमन, नियंत्रण और प्रबंधन की रणनीतियों को लागू करना अनिवार्य हो गया है।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। अरावली क्षेत्र मुख्य रूप से कठोर चट्टानों (जैसे क्वार्टजाइट, शिस्ट और ग्रेनाइट) से बना है। इन कठोर चट्टानों में छिद्रों की कमी होती है, जिसके कारण वर्षा का जल जमीन के अंदर आसानी से नहीं जा पाता। इसे तकनीकी भाषा में ‘कम गत्यात्मक पुनर्भरण’ (Low Dynamic Recharge) क्षमता कहा जाता है। कम पुनर्भरण और अधिक दोहन के कारण यह क्षेत्र जल संकट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (Vulnerable) हो गया है।
चूँकि अरावली की कठोर चट्टानी संरचना के कारण भूजल रिचार्ज कम होता है (R), इसीलिए वहां जल प्रबंधन और नियमन की अत्यधिक आवश्यकता है (A)। अतः कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अरावली में जल संकट के मुख्य कारण:
-
कठोर चट्टानी ढाल: ढालू और कठोर सतह होने के कारण वर्षा का जल तेजी से बह जाता है (Run-off) और भूमि में रिस नहीं पाता।
-
अत्यधिक खनन: अरावली में अनियंत्रित खनन ने प्राकृतिक जल सोतों और जलभृतों (Aquifers) को नुकसान पहुँचाया है।
-
वनोन्मूलन: जंगलों की कटाई से मृदा अपरदन बढ़ा है और जल संचयन की प्राकृतिक क्षमता घटी है।
83. कौन-सी नदियां लूनी नदी की सहायक नदियां हैं?
a. बांडी
b. जोजड़ी
c. माही
d. सूकड़ी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b और c
(B) a, b और d
(C) b, c और d
(D) a, c और d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
लूनी नदी (Luni River) राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र की मुख्य नदी है। इसकी सहायक नदियों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
a. बांडी (Bandi): यह लूनी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है, जो पाली जिले में बहती है।
-
b. जोजड़ी (Jojari): यह लूनी की एकमात्र ऐसी सहायक नदी है जो अरावली की पहाड़ियों से नहीं निकलती (यह नागौर की पहाड़ियों से निकलती है) और यह लूनी में दाईं ओर से मिलने वाली एकमात्र नदी है।
-
d. सूकड़ी (Sukri): यह भी लूनी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जिस पर जालौर में बांकली बांध बना हुआ है।
माही (c) के बारे में: माही नदी एक स्वतंत्र नदी तंत्र है जो मध्य प्रदेश से निकलकर राजस्थान के दक्षिण (बांसवाड़ा, डूंगरपुर) में बहती हुई गुजरात में खंभात की खाड़ी में गिरती है। इसका लूनी नदी से कोई संबंध नहीं है।
अतः, लूनी की सहायक नदियां a, b और d हैं।
सही उत्तर: (B) a, b और d
लूनी नदी की अन्य प्रमुख सहायक नदियां:
-
मिठड़ी
-
लीलीड़ी
-
जवाई (सबसे लंबी सहायक नदी)
-
सागी
-
गुहिया
84 राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठार क्षेत्र के बारे में कौनसे कथन सत्य हैं?
a. इसे हाड़ौती पठार भी कहा जाता है।
b. यह राजस्थान की अरावली पर्वतमाला के दक्षिणी पूर्वी भाग में विस्तृत है।
c. चंबल इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।
d. यह राजस्थान का सबसे बड़ा क्षेत्र है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a और b केवल
(B) b (B) b और केवल
(C) c और d केवल
(D) a और c केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठार क्षेत्र (हाड़ौती के पठार) के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
कथन (a): यह सत्य है। राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग को स्थानीय भाषा और भौगोलिक दृष्टि से ‘हाड़ौती का पठार’ कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं।
-
कथन (b): यह सत्य है। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से अरावली पर्वतमाला के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और मालवा के पठार का ही एक उत्तरी विस्तार माना जाता है।
-
कथन (c): यह सत्य है। चंबल इस क्षेत्र की मुख्य नदी है। इसकी सहायक नदियाँ जैसे काली सिंध, पार्वती और परवन भी इसी अंचल में बहती हैं।
-
कथन (d): यह असत्य है। राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक क्षेत्र ‘उत्तर-पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश’ (थार का मरुस्थल) है, जो राज्य के लगभग 61.11% भाग पर विस्तृत है। दक्षिण-पूर्वी पठार केवल लगभग 6.89% भाग पर फैला है।
विश्लेषण के आधार पर:
कथन a, b और c तीनों सत्य हैं। लेकिन आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में ‘a, b और c’ का एक साथ कोई विकल्प नहीं है। दिए गए विकल्पों में से सबसे व्यापक और सही मेल (D) a और c केवल प्रतीत होता है, क्योंकि ये दोनों निर्विवाद रूप से इस क्षेत्र की सबसे प्रमुख विशेषताएँ हैं।
सही उत्तर: (D) a और c केवल (उपलब्ध विकल्पों के आधार पर)
हाड़ौती पठार की अन्य विशेषताएँ:
-
मिट्टी: यहाँ मुख्य रूप से मध्यम काली (Vertisols) मिट्टी पाई जाती है, जो कपास और सोयाबीन की खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ है।
-
जलवायु: यह राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला भौतिक प्रदेश है (अति-आर्द्र जलवायु)।
-
चट्टानें: यहाँ विन्ध्यन कगार भूमि और दक्कन लावा पठार की चट्टानें पाई जाती हैं।
85 सूची। को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (नदी) | सूची II (स्रोत) |
| a. चंबल | I. जयपुर ज़िले की बैराठ पहाड़ियां |
| b. लूनी | II. महू के दक्षिण में मानपुर |
| c. बनास | III. अरावली शृंखला में पुष्कर घाटी |
| d. बाणगंगा | IV खमनौर पहाड़ियों में वेरो का मठ |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
( A) a-II, b-III, c-IV, d-I
(B) a-1, b-Il, c-III, d-IV
(C) a-III, b-II, c-IV, d-I
(D) a-II, b-IV, c-I, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की नदियों और उनके उद्गम स्थलों (Sources) का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. चंबल (Chambal): इस नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के महू के दक्षिण में मानपुर के समीप विंध्याचल पर्वतमाला की जानापाव पहाड़ियों से होता है। (a-II)
-
b. लूनी (Luni): यह नदी अजमेर के पास अरावली शृंखला में पुष्कर घाटी (नाग पहाड़) से निकलती है। (b-III)
-
c. बनास (Banas): इस नदी का उद्गम राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ के पास खमनौर की पहाड़ियों में स्थित वेरो का मठ से होता है। (c-IV)
-
d. बाणगंगा (Banganga): यह नदी जयपुर जिले की बैराठ पहाड़ियों से निकलती है। (इसे ‘अर्जुन की गंगा’ भी कहा जाता है)। (d-I)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ II
-
b ↔ III
-
c ↔ IV
-
d ↔ I
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-II, b-III, c-IV, d-I
नदियों के बारे में कुछ अतिरिक्त तथ्य:
-
चंबल: राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है, जो सर्वाधिक सतही जल वाली नदी भी है।
-
लूनी: इसे “मरुस्थल की गंगा” कहा जाता है और बालोतरा (बाड़मेर) के बाद इसका पानी खारा हो जाता है।
-
बनास: यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी है (लगभग 512 किमी)।
-
बाणगंगा: इसे ‘रुण्डित सरिता’ भी कहा जाता है क्योंकि वर्तमान में यह मुख्य नदी (यमुना) तक पहुँचने से पहले ही मैदानों में विलुप्त हो जाती है।
86 सूची। को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (क्षेत्र/अंचल) | सूची II (पर्यटक स्थल) |
| a. जयपुर | I. मेहरानगढ़ दुर्ग |
| b. जोधपुर | II. गलियाकोट दरगाह |
| c. माउंट आबू | III. दिलवाड़ा मंदिर |
| d. डूंगरपुर | IV. जंतर मंतर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :-
(A) a-l, b-II, c-IV, d-III
( B) a-IV, b-1, c-III, d-II
(C) a-II, b-1, c-III, d-IV
(D) a-IV, b-II, c-III, d-I
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रों और उनके प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
a. जयपुर (Jaipur): यहाँ प्रसिद्ध खगोलीय वेधशाला जंतर मंतर स्थित है, जिसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। (a-IV)
-
b. जोधपुर (Jodhpur): इस शहर में चिड़ियाटूँक पहाड़ी पर विशाल मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित है, जिसे ‘मयूरध्वजगढ़’ भी कहा जाता है। (b-I)
-
c. माउंट आबू (Mount Abu): यह राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है और यहाँ जैन धर्म के प्रसिद्ध दिलवाड़ा मंदिर (देवलवाड़ा) स्थित हैं। (c-III)
-
d. डूंगरपुर (Dungarpur): यहाँ माही नदी के किनारे बोहरा संप्रदाय की प्रसिद्ध गलियाकोट दरगाह (सैयद फखरुद्दीन की मज़ार) स्थित है। (d-II)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ IV
-
b ↔ I
-
c ↔ III
-
d ↔ II
अतः सही सुमेलित विकल्प (B) है।
सही उत्तर: (B) a-IV, b-I, c-III, d-II
पर्यटक स्थलों के बारे में रोचक तथ्य:
-
जंतर मंतर: इसे 2010 में यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
-
मेहरानगढ़: इस दुर्ग की नींव करणी माता ने रखी थी और इसके भीतर मोती महल, फूल महल प्रसिद्ध हैं।
-
दिलवाड़ा मंदिर: ये मंदिर अपनी बारीक संगमरमर की नक्काशी के लिए पूरे विश्व में विख्यात हैं।
-
गलियाकोट: इसे ‘उर्स’ के समय लगने वाले मेले के लिए जाना जाता है, जहाँ देश-विदेश से जायरीन आते हैं।
87. सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (झील) | सूची II (ज़िला) |
| a. पिछोला झील | 1. जयपुर |
| b. सांभर झील | II. बीकानेर |
| c. आनासागर झील | III. अजमेर |
| d. कोलायत झील | IV. उदयपुर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-1, c-IV, d-III
(C) a-IV, b-1, c-II, d-III
(D) a – IV, b-I, c-III, d-II
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की प्रमुख झीलों और उनके संबंधित जिलों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. पिछोला झील (Pichola Lake): यह मीठे पानी की प्रसिद्ध झील उदयपुर जिले में स्थित है। इसका निर्माण राणा लाखा के काल में एक पिच्छू नामक बंजारे ने करवाया था। (a-IV)
-
b. सांभर झील (Sambhar Lake): यह भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील है, जो मुख्य रूप से जयपुर जिले (वर्तमान में जयपुर ग्रामीण और डीडवाना-कुचामन की सीमाओं को भी स्पर्श करती है) में स्थित है। (b-I)
-
c. आनासागर झील (Ana Sagar Lake): इस कृत्रिम झील का निर्माण अजमेर में अर्णोराज (आनाजी) चौहान ने करवाया था। (c-III)
-
d. कोलायत झील (Kolayat Lake): यह बीकानेर जिले में स्थित एक पवित्र झील है, जहाँ कपिल मुनि का आश्रम स्थित है। (d-II)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ IV
-
b ↔ I
-
c ↔ III
-
d ↔ II
अतः सही सुमेलित विकल्प (D) है।
सही उत्तर: (D) a-IV, b-I, c-III, d-II
झीलों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
-
पिछोला झील: इस झील में ‘जग निवास’ (Lake Palace) और ‘जग मंदिर’ महल स्थित हैं।
-
सांभर झील: यहाँ भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8.7% उत्पादित होता है।
-
कोलायत झील: यहाँ कार्तिक पूर्णिमा को दीपदान की परंपरा है और यह सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि की तपोस्थली है।
88. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: 1799 AD में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा हवा महल बनवाया गया था।
कारण R: यह रानियों के लिए बनवाया गया था ताकि वे महल के अंदर बैठकर शहर के मेलों, त्यौहारों और जुलूसों/ सवारियों को देख सकें।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं हैं।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
जयपुर के ऐतिहासिक स्मारक हवा महल के संदर्भ में इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन पूर्णतः सही है। हवा महल का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने 1799 AD में करवाया था। इसके वास्तुकार लालचंद उस्ता थे।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। हवा महल की विशिष्ट संरचना (जिसमें 953 छोटी खिड़कियाँ या झरोखे हैं) का मुख्य उद्देश्य राजपरिवार की महिलाओं को पर्दा प्रथा का पालन करते हुए बिना किसी के देखे, बाहर की हलचल, तीज-गणगौर की सवारियों, मेलों और जुलूसों को देखने की सुविधा प्रदान करना था।
चूँकि रानियों को बाहरी दृश्य दिखाने की आवश्यकता ही इस अनोखी संरचना के निर्माण का मुख्य कारण थी, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
हवा महल की प्रमुख विशेषताएँ:
-
आकृति: यह भगवान कृष्ण के मुकुट के समान दिखाई देता है।
-
मंजिलें: यह एक पाँच मंजिला इमारत है, जिनके नाम क्रमशः शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर हैं।
-
बिना नींव की इमारत: यह दुनिया की सबसे ऊँची इमारतों में से एक मानी जाती है जो बिना किसी ठोस नींव के समतल जमीन पर खड़ी है।
-
वैज्ञानिक आधार: झरोखों के माध्यम से हवा के दबाव (Venturi effect) के कारण यह महल गर्मियों में भी अंदर से ठंडा रहता है।
89. राजस्थान के निम्नलिखित त्यौहारों को हिन्दू कैलेंडर में उनके मनाये जाने के क्रम के अनुसार व्यवस्थित करें (चैत्र माह से शुरू करते हुए)
a. गणगौर
b. तीज
C. अक्षय तृत्तीया
d. होली
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, c, d
(B) d, a, c, b
(C) b, c, a, d
(D) a, c, b, d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह से होती है। इन त्यौहारों का सही क्रम (चैत्र से फाल्गुन तक) नीचे दिया गया है:
-
a. गणगौर: यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। (क्रम में प्रथम)
-
c. अक्षय तृतीया (आखा तीज): यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। (क्रम में द्वितीय)
-
b. तीज (छोटी तीज): यह श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। (क्रम में तृतीय)
-
d. होली: यह फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। (यह हिन्दू कैलेंडर का अंतिम मुख्य त्यौहार है)
व्यवस्थित क्रम:
चैत्र से शुरू करते हुए सही क्रम होगा: गणगौर (a) $\rightarrow$ अक्षय तृतीया (c) $\rightarrow$ तीज (b) $\rightarrow$ होली (d)।
सही उत्तर: (D) a, c, b, d
त्यौहारों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
-
गणगौर: यह राजस्थान का सबसे लंबा चलने वाला त्यौहार है, जिसमें शिव-पार्वती (ईसर-गणगौर) की पूजा होती है।
-
अक्षय तृतीया: इसे राजस्थान में ‘अबूझ सावा’ माना जाता है, इस दिन सर्वाधिक बाल विवाह (ऐतिहासिक रूप से) होते थे।
-
तीज: जयपुर की तीज की सवारी विश्व प्रसिद्ध है। “तीज त्यौहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर” लोकोक्ति के अनुसार त्यौहारों का चक्र तीज से शुरू होकर गणगौर पर समाप्त होता है, लेकिन कैलेंडर वर्ष चैत्र (गणगौर) से शुरू होता है।
90. निम्नलिखित प्रमुख सभ्यताओं को उनके प्रथम प्रमुख उत्खन्न/अन्वेषण के अनुसार आरंभिक से अद्यतन के क्रम में व्यवस्थित करें।
a. बागौर
b. कालीबंगा
c. गिलूण्ड
d. आहड़
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) b, d, c, a
(B) d, b, a, c
(C) d, c, b, a
(D) a, b, c, d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की इन प्रमुख सभ्यताओं के प्रथम उत्खनन या अन्वेषण (Excavation/Exploration) के वर्षों का विवरण नीचे दिया गया है:
-
b. कालीबंगा (हनुमानगढ़): इसकी खोज सर्वप्रथम 1952 में अमलानंद घोष द्वारा की गई थी।
-
d. आहड़ (उदयपुर): इसका प्रथम उत्खनन 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास के नेतृत्व में किया गया था।
-
c. गिलूण्ड (राजसमंद): इस सभ्यता का प्रथम उत्खनन 1959-60 में बी.बी. लाल (B.B. Lal) द्वारा किया गया था।
-
a. बागौर (भीलवाड़ा): इसका उत्खनन कार्य 1967 से 1970 के बीच वी.एन. मिश्र (V.N. Misra) द्वारा किया गया था।
आरंभिक से अद्यतन (Chronological Order) का क्रम:
-
कालीबंगा (1952)
-
आहड़ (1953)
-
गिलूण्ड (1959-60)
-
बागौर (1967)
अतः सही क्रम b, d, c, a है।
सही उत्तर: (A) b, d, c, a
सभ्यताओं के बारे में मुख्य बिंदु:
-
कालीबंगा: यहाँ से विश्व के प्राचीनतम ‘जुते हुए खेत’ के साक्ष्य मिले हैं।
-
आहड़: इसे ‘ताम्रवती नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है।
-
गिलूण्ड: यह आहड़ संस्कृति का ही एक प्रमुख केंद्र था, जहाँ पकी हुई ईंटों के साक्ष्य मिले हैं।
-
बागौर: कोठारी नदी के तट पर स्थित इस स्थल को ‘आदिम संस्कृति का संग्रहालय’ कहा जाता है।
91 निम्नलिखित राजपूत शासकों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें:
a. राणा सांगा
b. महाराणा कुम्भा
c. जैत्र सिंह
d. रतन सिंह
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) c, d, a, b
(B) d, a, b, c
(C) a, b, c, d
(D) c, d, b, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मेवाड़ (चित्तौड़गढ़) के इन प्रसिद्ध राजपूत शासकों का शासनकाल और उनका ऐतिहासिक क्रम नीचे दिया गया है:
-
c. जैत्र सिंह (1213–1253 ई.): ये मध्यकालीन मेवाड़ के एक शक्तिशाली शासक थे। इन्होंने इल्तुतमिश को ‘भूतला के युद्ध’ में पराजित किया था और चित्तौड़ को अपनी राजधानी बनाया था।
-
d. रतन सिंह (1302–1303 ई.): ये रावल शाखा के अंतिम शासक थे। इनके समय में 1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया था, जिसके बाद रानी पद्मिनी ने जौहर किया था।
-
b. महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.): ये मेवाड़ के कला और स्थापत्य के स्वर्ण युग के शासक माने जाते हैं। इन्होंने ‘विजय स्तंभ’ का निर्माण करवाया और कई दुर्गों (जैसे कुम्भलगढ़) को बनवाया।
-
a. राणा सांगा (1509–1527 ई.): इन्हें ‘हिंदुपत’ कहा जाता है। इन्होंने खानवा के युद्ध (1527 ई.) में बाबर का सामना किया था।
कालक्रमानुसार सही क्रम:
सबसे पहले जैत्र सिंह, फिर रतन सिंह, उनके बाद महाराणा कुम्भा और अंत में राणा सांगा।
अतः सही क्रम c, d, b, a है।
सही उत्तर: (D) c, d, b, a
शासकों से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियां:
| शासक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जैत्र सिंह | दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध सफल संघर्ष और चित्तौड़ का उत्कर्ष। |
| रतन सिंह | चित्तौड़ का प्रथम साका (1303 ई.)। |
| महाराणा कुम्भा | ‘अभिनव भरताचार्य’ की उपाधि और 32 दुर्गों का निर्माता। |
| राणा सांगा | भारतीय इतिहास के सबसे शक्तिशाली हिंदू राजाओं में से एक, शरीर पर 80 घाव। |
92. राजस्थान के “घुड़ला” लोक नृत्य के बारे में कौनसे कथन सत्य हैं?
a. यह जोधपुर का प्रख्यात लोक नृत्य है।
b. यह नृत्य केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है।
c. इस नृत्य में नृतक अपने सिरों पर घड़ों में प्रज्वलित दीप लेकर नृत्य करते हैं।
d. नृतक यौद्धा के समान वेशभूषा पहनते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, d केवल
(B) b, c केवल
(C) c, d केवल
(D) a, c केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के “घुड़ला” लोक नृत्य के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
कथन (a): यह सत्य है। घुड़ला नृत्य मुख्य रूप से जोधपुर (मारवाड़) क्षेत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध लोक नृत्य है।
-
कथन (b): यह असत्य है। यह नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है।
-
कथन (c): यह सत्य है। इस नृत्य की मुख्य विशेषता यह है कि महिलाएं अपने सिर पर एक छिद्रित मटका (जिसमें छेद होते हैं) रखती हैं, जिसके भीतर एक प्रज्वलित दीपक रखा होता है।
-
कथन (d): यह असत्य है। नृतक योद्धा की वेशभूषा नहीं पहनते, बल्कि महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी पोशाक पहनती हैं। योद्धा की वेशभूषा वाला नृत्य ‘कच्छी घोड़ी’ (शेखावाटी) है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
यह नृत्य जोधपुर के राव सातल की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने अजमेर के सूबेदार मल्लू खां के सेनापति घुड़ले खां को पराजित कर 140 कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। घुड़ले खां का सिर काटकर पूरे शहर में घुमाया गया था, जिसका प्रतीक यह छिद्रित मटका है।
अतः, कथन a और c सत्य हैं।
सही उत्तर: (D) a, c केवल
घुड़ला नृत्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
-
समय: यह नृत्य चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतला अष्टमी) से चैत्र शुक्ल तृतीया (गणगौर) तक किया जाता है।
-
संरक्षण: इस नृत्य को ‘रूपायन संस्थान’ (बोरुन्दा, जोधपुर) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
93 सूची। को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (युद्ध) | सूची II (वर्ष) |
| a. सारंगपुर | 1. 1227 |
| b. भूताला | II. 1527 |
| c. खातौली | III. 1517 |
| d. खानवा | IV. 1437 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-l, b-II, c-III, d-IV
(B) a-IV, b-1, c-III, d-II
(C) a-l, b-IV, c-II, d-III
(D) a-IV, b-III, c-II, d-1
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के इतिहास में प्रसिद्ध युद्धों और उनके घटित होने वाले वर्षों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. सारंगपुर का युद्ध (1437 ई.): यह युद्ध मेवाड़ के महाराणा कुम्भा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के बीच हुआ था। इस विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने चित्तौड़गढ़ में ‘विजय स्तंभ’ का निर्माण करवाया था। (a-IV)
-
b. भूताला का युद्ध (1227 ई.): यह युद्ध मेवाड़ के शासक जैत्र सिंह और दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश की सेना के बीच हुआ था, जिसमें जैत्र सिंह की विजय हुई थी। (b-I)
-
c. खातौली का युद्ध (1517 ई.): यह युद्ध राणा सांगा और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच हुआ था, जिसमें सांगा विजयी रहे थे। (c-III)
-
d. खानवा का युद्ध (1527 ई.): यह भारत के इतिहास का एक निर्णायक युद्ध था जो राणा सांगा और मुगल शासक बाबर के बीच लड़ा गया था। (d-II)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ IV
-
b ↔ I
-
c ↔ III
-
d ↔ II
अतः सही सुमेलित विकल्प (B) है।
सही उत्तर: (B) a-IV, b-I, c-III, d-II
युद्धों के बारे में संक्षिप्त जानकारी:
| युद्ध | विजेता | मुख्य परिणाम |
| सारंगपुर | महाराणा कुम्भा | मालवा पर मेवाड़ का प्रभाव स्थापित हुआ। |
| भूताला | जैत्र सिंह | नागदा के विनाश के बाद चित्तौड़ राजधानी बनी। |
| खातौली | राणा सांगा | लोदी साम्राज्य की शक्ति का ह्रास हुआ। |
| खानवा | बाबर | भारत में मुगल साम्राज्य की जड़ें मजबूत हुईं। |
94 उदयपुर क्षेत्र में कौनसी बोली प्रचलित है?
(A) ढूंढाड़ी
(C) शेखावाटी
(B) मेवाड़ी
(D) हाड़ौती
(E) अनुत्तरित प्रश्न
उदयपुर क्षेत्र में मेवाड़ी (Mewadi) बोली प्रचलित है।
सही उत्तर: (B) मेवाड़ी
मेवाड़ी बोली के बारे में मुख्य जानकारी:
मेवाड़ी, मारवाड़ी की एक प्रमुख उप-बोली है और यह राजस्थान के ‘मेवाड़’ अंचल की मुख्य भाषा है।
-
क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और भीलवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
-
विशेषता: इस बोली में ‘सा’ के स्थान पर ‘हा’ का प्रयोग अधिक होता है। साथ ही, मेवाड़ी साहित्य भी काफी समृद्ध है, विशेषकर कुम्भा के कुछ नाटकों में इसका प्रभाव देखने को मिलता है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
-
(A) ढूंढाड़ी: यह मुख्य रूप से जयपुर, दौसा और टोंक क्षेत्र में बोली जाती है।
-
(C) शेखावाटी: यह सीकर, झुंझुनू और चूरू (शेखावाटी क्षेत्र) की प्रमुख बोली है।
-
(D) हाड़ौती: यह कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ (हाड़ौती अंचल) में बोली जाती है।
95. “सेनाणी” कविता किसने लिखी थी?
(A) कन्हैया लाल सेठिया
(B) जय नारायण व्यास
(C) हीरालाल शास्त्री
(D) मेघराज मुकुल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
“सेनाणी” कविता मेघराज मुकुल द्वारा लिखी गई है।
सही उत्तर: (D) मेघराज मुकुल
“सेनाणी” कविता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
यह राजस्थानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली कविताओं में से एक है। यह कविता मेवाड़ के सलुम्बर के राव रतन सिंह चुण्डावत और उनकी रानी हाड़ी रानी (सहूल कंवर) के बलिदान की अमर गाथा पर आधारित है।
-
प्रसिद्ध पंक्तियाँ: इस कविता की ये पंक्तियाँ राजस्थान के घर-घर में प्रसिद्ध हैं:
“चूण्डावत माँगी सैणाणी, सिर काट दे दियो क्षत्राणी”
(अर्थात: जब चूण्डावत ने निशानी मांगी, तो क्षत्राणी ने अपना सिर काटकर दे दिया।)
-
ऐतिहासिक संदर्भ: जब राव रतन सिंह युद्ध पर जा रहे थे और अपनी नई नवेली दुल्हन के मोह में बार-बार पीछे देख रहे थे, तब रानी ने उन्हें मोहमुक्त करने और उनके कर्तव्य पथ पर अग्रसर करने के लिए अपना सिर काटकर निशानी के तौर पर भेज दिया था।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
-
कन्हैया लाल सेठिया (A): ये “पातल और पीथल” तथा “धरती धोरा री” जैसी महान रचनाओं के लिए जाने जाते हैं।
-
जय नारायण व्यास (B): राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी, जिन्हें “शेर-ए-राजस्थान” कहा जाता है।
-
हीरालाल शास्त्री (C): राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री और ‘बनस्थली विद्यापीठ’ के संस्थापक।
96. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: सभी राजस्थानी बोलियों में मारवाड़ी (मारवाड़ में प्रचलित बोली) सबसे महत्वपूर्ण है। कई बार, इसे राजस्थानी का पर्याय समझा जाता है।
कारण R: ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से, मारवाड़ का राजस्थान में महत्वपूर्ण स्थान है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थानी भाषा और मारवाड़ के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। मारवाड़ी राजस्थान की सबसे समृद्ध और विस्तृत बोली है। इसका साहित्य (विशेषकर डिंगल काव्य) अत्यंत विशाल है। पश्चिमी राजस्थान के एक बड़े भू-भाग में बोले जाने और साहित्यिक प्रधानता के कारण, अक्सर बाहरी लोग या विद्वान ‘मारवाड़ी’ को ही ‘राजस्थानी’ भाषा का पर्याय मान लेते हैं।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। ऐतिहासिक रूप से मारवाड़ (जोधपुर रियासत) राजस्थान की सबसे बड़ी और शक्तिशाली रियासतों में से एक रही है। भौगोलिक दृष्टि से भी मारवाड़ का क्षेत्र (थार का मरुस्थल और मध्य राजस्थान) राज्य के एक बड़े हिस्से को कवर करता है। इसी व्यापक प्रभाव के कारण मारवाड़ी बोली को इतनी प्रमुखता और पहचान मिली है।
चूँकि मारवाड़ के इसी ऐतिहासिक और भौगोलिक प्रभुत्व (R) ने इसकी बोली को पूरे राजस्थान की प्रतिनिधि बोली (A) बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
मारवाड़ी बोली के बारे में मुख्य तथ्य:
-
साहित्यिक रूप: मारवाड़ी के साहित्यिक रूप को ‘डिंगल’ कहा जाता है, जिसमें चारण कवियों ने वीर रस की महान रचनाएँ की हैं।
-
विस्तार: यह मुख्य रूप से जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, पाली और नागौर के क्षेत्रों में बोली जाती है।
-
मानक बोली: राजस्थानी की सभी बोलियों में मारवाड़ी को ही ‘मानक’ (Standard) बोली का दर्जा प्राप्त है।
97 राजस्थान साहित्य कालावधि की, आरंभ से अद्यतन तक, विशेषताओं को व्यवस्थित करें:
a. इस काल में साहित्य में नवीन चेतना विकसित हुई, जो आधुनिक काल की शुरूआत की द्योतक है।
b. इस काल की कृतियां शृंगार अथवा रीति और नीति की रचनाओं पर केन्द्रित थी।
c. इस काल में नायकों के वीरोचित कृत्यों की कथाएं काव्यात्मक रूप में रची गई थी।
d. इस काल में संतों द्वारा भक्ति आंदोलन का सूत्रपात किया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) d, c, a, b
(B) c, d, b, a
(C) a, b, c, d
(D) b, c, d, a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थानी साहित्य के इतिहास को मुख्य रूप से चार चरणों में विभाजित किया जाता है। इन कालखंडों की विशेषताओं का सही क्रम (आरंभ से अद्यतन तक) नीचे दिया गया है:
-
वीरगाथा काल (आरंभिक काल – 11वीं से 14वीं शताब्दी): इस काल में युद्धों की प्रधानता थी, इसलिए नायकों के वीरोचित कृत्यों की कथाएं काव्यात्मक रूप में रची गईं (जैसे: पृथ्वीराज रासो)। (कथन c)
-
भक्ति काल (पूर्व मध्यकाल – 14वीं से 16वीं शताब्दी): इस काल में मीराबाई, दादू दयाल और जांभोजी जैसे संतों द्वारा भक्ति आंदोलन का सूत्रपात किया गया। (कथन d)
-
श्रृंगार, रीति और नीति काल (उत्तर मध्यकाल – 16वीं से 19वीं शताब्दी): इस काल की कृतियां मुख्य रूप से शृंगार अथवा रीति और नीति की रचनाओं पर केंद्रित थीं। (कथन b)
-
आधुनिक काल (19वीं शताब्दी से वर्तमान): इस काल में साहित्य में नवीन चेतना (राष्ट्रवाद, सामाजिक सुधार) विकसित हुई, जो आधुनिक युग की शुरुआत की द्योतक है। (कथन a)
व्यवस्थित क्रम:
आरंभ से अद्यतन तक का सही क्रम है: c, d, b, a
सही उत्तर: (B) c, d, b, a
राजस्थानी साहित्य की समय-सीमा एक नज़र में:
| कालखंड | मुख्य विशेषता | प्रमुख कवि/रचना |
| आरंभिक काल | वीर रस की प्रधानता | चंदबरदाई, श्रीधर व्यास |
| पूर्व मध्यकाल | भक्ति एवं आध्यात्म | मीराबाई, दादू दयाल |
| उत्तर मध्यकाल | नीति एवं श्रृंगार | दुरसा आढ़ा, कवि वृन्द |
| आधुनिक काल | जन-चेतना एवं यथार्थ | सूर्यमल्ल मिश्रण, कन्हैयालाल सेठिया |
98 राजस्थान में किस स्थान पर “सास-बहु मंदिर” स्थित है?
a. नागदा
b. जयपुर
c. जोधपुर
d. लक्ष्मणगढ़
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a केवल
(B) a और b केवल
(C) b और c केवल
(D) d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में प्रसिद्ध “सास-बहू मंदिर” (जिसे मूल रूप से सहस्त्रबाहु मंदिर कहा जाता है) नागदा में स्थित है।
सही उत्तर: (A) a केवल
मंदिर के बारे में मुख्य जानकारी:
-
स्थान: यह उदयपुर जिले के नागदा गाँव में स्थित है, जो कभी मेवाड़ की प्राचीन राजधानी हुआ करती थी।
-
नाम का रहस्य: मूल नाम ‘सहस्त्रबाहु’ (हजार भुजाओं वाले भगवान विष्णु) था, लेकिन समय के साथ बोलचाल की भाषा में यह ‘सास-बहू’ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
-
स्थापत्य शैली: यह मंदिर 10वीं शताब्दी का है और अपनी अद्भुत महा-मारू (गुर्जर-प्रतिहार) वास्तुकला और दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है।
संरचना का विवरण:
यह दो मंदिरों का एक जोड़ा है:
-
बड़ा मंदिर (सास का मंदिर): यह अधिक बड़ा और अलंकृत है।
-
छोटा मंदिर (बहू का मंदिर): यह आकार में थोड़ा छोटा है लेकिन इसकी सुंदरता भी बेजोड़ है।
ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं और वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं।
99 किस संवैधानिक संशोधन द्वारा, ग्रामीण स्व-शासन निकायों को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ था?
(A) 42 वां संवैधानिक संशोधन
(B) 73 वां संवैधानिक संशोधन
(C) 44 वां संवैधानिक संशोधन
(D) 74 वां संवैधानिक संशोधन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में ग्रामीण स्व-शासन निकायों (पंचायती राज संस्थानों) को 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था।
सही उत्तर: (B) 73 वां संवैधानिक संशोधन
73वें संवैधानिक संशोधन (1992) की मुख्य विशेषताएं:
-
संवैधानिक दर्जा: इस संशोधन के माध्यम से संविधान में एक नया भाग-9 और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
-
पंचायती राज व्यवस्था: इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए त्रि-स्तरीय (Three-tier) पंचायती राज व्यवस्था का प्रावधान किया गया:
-
ग्राम स्तर पर – ग्राम पंचायत
-
खंड (ब्लॉक) स्तर पर – पंचायत समिति
-
जिला स्तर पर – जिला परिषद
-
-
11वीं अनुसूची: इसमें पंचायतों के कार्यों से संबंधित 29 विषय शामिल किए गए।
-
आरक्षण: महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की गईं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
(A) 42वां संशोधन (1976): इसे ‘लघु संविधान’ कहा जाता है। इसने प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े।
-
(C) 44वां संशोधन (1978): इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया।
-
(D) 74वां संशोधन (1992): इसके द्वारा शहरी स्व-शासन निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया गया और 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।
100 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (व्यक्ति) | सूची II (खेल) |
| a. कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ | I. भाला फेंक |
| b. अवनि लेखरा | II. निशाने बाजी |
| c. देवेन्द्र झाझड़िया | III. पोलो |
| d. मेजर दलपत सिंह शेखावत | IV. पैरा शूटिंग |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-II, b-IV, c-I, d-III
(B) a-III, b-II, c-I, d-IV
(C) a-IV, b-III, c-II, d-I
(D) a-l, b-II, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के इन प्रसिद्ध खिलाड़ियों और उनके खेलों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore): इन्होंने 2004 के एथेंस ओलंपिक में निशानेबाजी (Shooting) के ‘डबल ट्रैप’ इवेंट में रजत पदक जीता था। (a-II)
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b. अवनि लेखरा (Avani Lekhara): ये राजस्थान की प्रसिद्ध पैरा शूटिंग (Para Shooting) खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है। (b-IV)
-
c. देवेन्द्र झाझड़िया (Devendra Jhajharia): ये पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले महान भाला फेंक (Javelin Throw) खिलाड़ी हैं। (c-I)
-
d. मेजर दलपत सिंह शेखावत (Major Dalpat Singh Shekhawat): इन्हें ‘हैफा का नायक’ (Hero of Haifa) कहा जाता है, जो अपनी घुड़सवारी और पोलो (Polo) कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। (d-III)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ II
-
b ↔ IV
-
c ↔ I
-
d ↔ III
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-II, b-IV, c-I, d-III
खिलाड़ियों से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धियां:
| खिलाड़ी | मुख्य उपलब्धि |
| राज्यवर्धन सिंह राठौड़ | भारत के प्रथम व्यक्तिगत ओलंपिक रजत पदक विजेता। |
| अवनि लेखरा | एक ही पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला। |
| देवेन्द्र झाझड़िया | पद्म भूषण से सम्मानित होने वाले देश के पहले पैरा-एथलीट। |
| मेजर दलपत सिंह | प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हैफा की लड़ाई में वीरता का प्रदर्शन। |
101 राजस्थान के किस ज़िले में ताम्र खनिज ज्यादातर पाये जाते हैं?
a. झुंझनूं
b. उदयपुर
c. जयपुर
d. अजमेर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a केवल
(B) a, b और d केवल
(C) b और केवल
(D) d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में ताम्र (तांबा) खनिज की उपलब्धता के आधार पर जिलों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
a. झुंझुनूं: यह राजस्थान का सबसे प्रमुख तांबा उत्पादक जिला है। यहाँ की खेतड़ी-सिंघाना बेल्ट भारत की सबसे बड़ी तांबा खदानों में से एक है। इसी कारण खेतड़ी को ‘ताम्र नगरी’ भी कहा जाता है।
-
b. उदयपुर: उदयपुर जिला भी तांबा उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की देबारी, सलूम्बर और अंजनी खदानें तांबे के भंडार के लिए जानी जाती हैं।
-
d. अजमेर: अजमेर के हनोतिया और सावर क्षेत्रों में भी तांबे के भंडार पाए जाते हैं।
जयपुर (c) में तांबे के भंडार इन अन्य जिलों की तुलना में नगण्य या बहुत कम हैं।
दिए गए विकल्पों और राजस्थान की खनिज सांख्यिकी के अनुसार, झुंझुनूं, उदयपुर और अजमेर तीनों ही तांबा खनिज के लिए प्रसिद्ध हैं। अतः सबसे उपयुक्त विकल्प (B) है।
सही उत्तर: (B) a, b और d केवल
राजस्थान में तांबा खनिज के मुख्य क्षेत्र:
| जिला | प्रमुख खनन क्षेत्र |
| झुंझुनूं | खेतड़ी, सिंघाना, कोलिहान, चाँदमारी |
| उदयपुर | देबारी, सलूम्बर, अंजनी, बीदासर |
| अल्वर | खो-दरीबा (यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है) |
| अजमेर | हनोतिया, सावर |
| भीलवाड़ा | पुर-बनेड़ा बेल्ट |
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL): खेतड़ी (झुंझुनूं) में सार्वजनिक क्षेत्र का एक बड़ा संयंत्र स्थापित है।
-
भंडारण: राजस्थान, भारत में तांबा अयस्क के भंडारण की दृष्टि से प्रथम स्थान पर है।
102 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: राजस्थान में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली विद्यमान है।
कारण R: 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 प्रत्येक राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली का प्रावधान करता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और भारतीय संविधान के प्रावधानों के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। राजस्थान में पंचायती राज की त्रि-स्तरीय प्रणाली लागू है, जिसमें ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, खंड (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद कार्य करती है। ऐतिहासिक रूप से, राजस्थान देश का पहला राज्य था जिसने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर से इस व्यवस्था की शुरुआत की थी।
-
कारण (R): यह कथन सही है। 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने पूरे देश में एक समान ढांचा प्रदान करने के लिए प्रत्येक राज्य (जिनकी जनसंख्या 20 लाख से अधिक है) में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली का अनिवार्य प्रावधान किया है।
चूँकि 73वें संशोधन के संवैधानिक अधिदेश (Mandate) के कारण ही राजस्थान सहित पूरे भारत में इस त्रि-स्तरीय ढांचे को कानूनी और संवैधानिक मजबूती मिली है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
राजस्थान पंचायती राज संरचना:
| स्तर | प्रशासनिक इकाई | राजनीतिक प्रमुख | प्रशासनिक प्रमुख |
| उच्च स्तर | जिला परिषद | जिला प्रमुख | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) |
| मध्यवर्ती स्तर | पंचायत समिति | प्रधान | विकास अधिकारी (BDO) |
| निम्न स्तर | ग्राम पंचायत | सरपंच | ग्राम विकास अधिकारी (VDO) |
103 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: पालनहार योजना कठिन परिस्थितियों में फंसे बालकों की सहायता करने हेतु राजस्थान सरकार की नकद हस्तांतरण योजना है। यह योजना केवल अनुसूचित जाति अनाथों के लिए है।
कारण R: पालनहार योजना में सभी जातीयों के अनाथ सम्मिलित हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है, लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना ‘पालनहार योजना’ के संदर्भ में इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह कथन गलत है। हालाँकि यह सही है कि पालनहार योजना कठिन परिस्थितियों में फँसे बालकों की सहायता हेतु एक नकद हस्तांतरण योजना है, लेकिन यह कहना कि “यह योजना केवल अनुसूचित जाति (SC) अनाथों के लिए है” तथ्यात्मक रूप से गलत है। शुरुआत में यह केवल SC के लिए हो सकती थी, लेकिन वर्तमान में इसका दायरा बहुत विस्तृत है।
-
कारण (R): यह कथन सही है। पालनहार योजना का लाभ अब सभी जातियों के अनाथ बच्चों को दिया जाता है। इसके अलावा, इसमें अन्य श्रेणियों के बच्चे भी शामिल हैं, जैसे – न्यायिक प्रक्रिया से मृत्युदंड/आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता के बच्चे, एड्स पीड़ित माता-पिता के बच्चे, कुष्ठ रोग से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, और विशेष योग्यजन माता-पिता के बच्चे आदि।
चूँकि अभिकथन (A) में दी गई “केवल अनुसूचित जाति” वाली शर्त गलत है और कारण (R) में दी गई जानकारी सही है, इसलिए सही विकल्प (D) होगा।
सही उत्तर: (D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
पालनहार योजना की मुख्य विशेषताएँ:
-
उद्देश्य: अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था उनके किसी निकटतम रिश्तेदार (पालनहार) के माध्यम से सुनिश्चित करना।
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सहायता राशि: * 0-6 वर्ष के आंगनवाड़ी जाने वाले बच्चों के लिए: ₹1,500 प्रतिमाह (अनाथ श्रेणी हेतु)।
-
6-18 वर्ष के विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए: ₹2,500 प्रतिमाह (अनाथ श्रेणी हेतु)।
-
-
अतिरिक्त सहायता: वस्त्र, स्वेटर, जूते आदि के लिए ₹2,000 वार्षिक अतिरिक्त दिए जाते हैं।
-
शर्त: बच्चे का विद्यालय जाना अनिवार्य है।
104 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: “राज्य, 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बालकों को निः शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा।
कारण R: अनुच्छेद 21 (अ) शिक्षा के अधिकार से संबंधित है।
उपरोक्त कथन के आलोक मैं, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए-
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है, लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान के प्रावधानों और मौलिक अधिकारों के संदर्भ में इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। भारतीय संविधान के अनुसार, राज्य का यह कर्तव्य है कि वह 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करे। यह प्रावधान बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक कानूनी अधिकार के रूप में स्थापित है।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। शिक्षा के इस अधिकार को 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 21-A (या 21-अ) के रूप में जोड़ा गया था। यह अनुच्छेद घोषणा करता है कि शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है।
चूँकि अनुच्छेद 21-A ही वह संवैधानिक आधार है जो 6 से 14 वर्ष के बालकों को मुफ्त शिक्षा की गारंटी (अभिकथन A) देता है, इसलिए कारण (R), अभिकथन (A) की बिल्कुल सही व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
शिक्षा के अधिकार (RTE) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
-
संवैधानिक संशोधन: 86वां संशोधन, 2002।
-
अधिनियम: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 में पारित हुआ और 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ।
-
मार्गदर्शक सिद्धांत: इसके तहत स्कूलों में बुनियादी ढांचा, शिक्षकों की उपलब्धता और निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है।
-
राज्य की जिम्मेदारी: यह अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी राज्य और स्थानीय निकायों पर डालता है।
105 निम्नलिखित वाक्यों में कौनसा कथन सही हैं?
a. जयपुर में बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय है।
b. जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय है।
c. जयपुर में इंदिरा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय है।
d. अलवर में अंबेडकर दिव्यांग विश्वविद्यालय है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a और b केवल
(B) a और c केवल
(C) b और d केवल
(D) c और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए स्थापित विश्वविद्यालयों के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
कथन (a): यह सत्य है। बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय राजस्थान का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय है, जो जामडोली, जयपुर में स्थापित किया गया है।
-
कथन (b): यह सत्य है। राज्य बजट 2023-24 में की गई घोषणा के अनुसार, जोधपुर में महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है।
-
कथन (c): यह असत्य है। जयपुर में इंदिरा गांधी के नाम से कोई दिव्यांग विश्वविद्यालय नहीं है; वहाँ ‘बाबा आम्टे’ के नाम से विश्वविद्यालय है।
-
कथन (d): यह असत्य है। अलवर में अंबेडकर दिव्यांग विश्वविद्यालय नहीं है। (नोट: डॉ. बी.आर. अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर में स्थित है, लेकिन वह दिव्यांग विश्वविद्यालय नहीं है)।
अतः, कथन a और b सही हैं।
सही उत्तर: (A) a और b केवल
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
उद्देश्य: इन विश्वविद्यालयों का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।
-
सुविधाएँ: यहाँ दिव्यांगों के लिए फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षण पद्धतियों की व्यवस्था की गई है।
106 राजस्थान में चार शहरों का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में विकास हेतु किया गया था।
a. जयपुर, कोदा
b. उदयपुर, अजमेर
C. जैसलमेर, बाड़मेर
d. अलवर, बीकानेर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a और b
(B) a और c
(C) b और d
(D) b और c
(E) अनुत्तरित प्रश्न
केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) के तहत राजस्थान के चार शहरों का चयन किया गया था। इनका विवरण इस प्रकार है:
-
जयपुर
-
कोटा (प्रश्न में ‘कोदा’ लिखा गया है, जो ‘कोटा’ का वर्तनी सुधार है)
-
उदयपुर
-
अजमेर
विकल्पों का विश्लेषण:
-
कथन (a): जयपुर और कोटा (कोदा) शामिल हैं।
-
कथन (b): उदयपुर और अजमेर शामिल हैं।
-
कथन (c) और (d): जैसलमेर, बाड़मेर, अलवर और बीकानेर इस मिशन के केंद्र सरकार वाले चरण में शामिल नहीं थे।
अतः कथन a और b में दिए गए चारों शहर स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा हैं।
सही उत्तर: (A) a और b
स्मार्ट सिटी मिशन के बारे में मुख्य जानकारी:
-
लक्ष्य: इन शहरों में बुनियादी ढांचा, स्वच्छ और टिकाऊ वातावरण तथा ‘स्मार्ट समाधान’ के माध्यम से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
-
रैंकिंग: राजस्थान इन चार शहरों के विकास और फंड के उपयोग के मामले में अक्सर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है।
-
राज्य स्मार्ट सिटी योजना: केंद्र के मिशन के बाद, राजस्थान सरकार ने अपने स्तर पर 6 और शहरों (जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर, चित्तौड़गढ़ और आबूरोड) को राज्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकसित करने की घोषणा की थी।
107 नए नेशनल हाईवे नंबर के अनुसार और राजस्थान से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को सुमेलित करें।
| नए नेशनल हाईवे नंबर | शुरू होता है । खत्म होता है |
| a. NH 11 | 1. मियाजलार से रेवाडी |
| b. NH 709 | II. रोहतक से राजगढ़ |
| c. NH 919 | III. पलवल से रेवाड़ी |
| d. NH 23 | IV. कोठुम से धौलपुर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-l, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-III, c-IV, d-I
(C) a-II, b-1, c-III-d-IV
(D) a-l, b-IV, c-II, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों की नई क्रमांकन प्रणाली (Renumbering System) के आधार पर राजस्थान से गुजरने वाले इन राजमार्गों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
-
a. NH 11 (नई संख्या): यह राजमार्ग हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू होकर राजस्थान के झुंझुनूं, सीकर, बीकानेर और जैसलमेर होते हुए मियाजलार (भारत-पाक सीमा के पास) तक जाता है। (a-I)
-
b. NH 709: यह हरियाणा के रोहतक से शुरू होकर भिवानी होते हुए राजस्थान के राजगढ़ (चुरू) तक आता है। (b-II)
-
c. NH 919 (पुरानी संख्या 71B): यह राजमार्ग हरियाणा के पलवल से सोहना और धारूहेड़ा होते हुए रेवाड़ी तक जाता है। इसका एक बहुत छोटा हिस्सा (लगभग 5 किमी) राजस्थान के अलवर जिले से गुजरता है। (c-III)
-
d. NH 23: यह राजमार्ग पूरी तरह राजस्थान में स्थित है, जो कोठुम (NH 21 जंक्शन) से शुरू होकर लालसोट, करौली और बाड़ी होते हुए धौलपुर तक जाता है। (d-IV)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
-
a ↔ I
-
b ↔ II
-
c ↔ III
-
d ↔ IV
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-I, b-II, c-III, d-IV
राजमार्गों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
-
NH 11: यह अब राजस्थान के शेखावाटी और मरुस्थलीय क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक प्रमुख गलियारा है।
-
NH 919: यह राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग माना जाता है (सिर्फ अलवर जिले में प्रवेश करता है)।
-
NH 23: यह पूर्वी राजस्थान के जिलों (दौसा, करौली, धौलपुर) के लिए जीवनरेखा का कार्य करता है।
108 नीचे दो कथन दिए गए हैंः एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: अटल पेंशन योजना (APY) असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर केन्द्रित पेंशन योजना है। कारण R: उपरोक्त पेंशन योजना संगठित और असंगठित, दोनों क्षेत्रों पर संकेन्द्रित है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C)A सही, है लेकिन R सही नहीं हैं।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संदर्भ में अटल पेंशन योजना (APY) का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। अटल पेंशन योजना (APY) मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) के कामगारों (जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर, घरेलू कामगार आदि) को वृद्धावस्था में सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
-
कारण (R): यह कथन गलत है। यह योजना संगठित क्षेत्र के उन कर्मचारियों पर केंद्रित नहीं है जो पहले से ही वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (जैसे EPF या NPS) के अंतर्गत कवर किए गए हैं। इसका प्राथमिक लक्ष्य केवल असंगठित क्षेत्र है ताकि उन्हें एक निश्चित मासिक आय सुनिश्चित की जा सके।
चूँकि अभिकथन (A) सही है और कारण (R) तथ्यात्मक रूप से गलत है, इसलिए सही विकल्प (C) होगा।
सही उत्तर: (C) A सही है, लेकिन R सही नहीं है।
अटल पेंशन योजना (APY) की मुख्य बातें:
-
पात्रता: 18 से 40 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक।
-
पेंशन राशि: योगदान के आधार पर, 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की निश्चित मासिक पेंशन।
-
प्रशासन: इसका संचालन PFRDA (पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण) द्वारा किया जाता है।
-
लाभ: अभिदाता की मृत्यु के बाद पति/पत्नी को समान पेंशन और दोनों की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को संचित निधि (Nominee corpus) वापस दी जाती है।
109 राजस्थान के किन जिलों में ऐस्बेस्टॉस के महत्तम भंडार पाये जाते हैं ? .
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
a. उदयपुर, डूंगरपुर
c. जयपुर, अलवर
b. गंगानगर, नागौर
d. जोधपुर, अजमेर
(A) a और b
(B) b और c
(C) c और d
(D)a और d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में ऐस्बेस्टॉस (Asbestos) के उत्पादन और भंडारों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
ऐस्बेस्टॉस का प्रकार: राजस्थान में मुख्य रूप से एम्फीबोल (Amphibole) किस्म का ऐस्बेस्टॉस पाया जाता है।
-
उदयपुर: यह राजस्थान में ऐस्बेस्टॉस का सर्वाधिक भंडार वाला जिला है। यहाँ के ऋषभदेव, खेरवाड़ा और सलूम्बर क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादक स्थल हैं। (a)
-
डूंगरपुर: उदयपुर के बाद डूंगरपुर दूसरा सबसे महत्वपूर्ण जिला है, जहाँ जखोल और मटुआ क्षेत्रों में इसके व्यापक भंडार मिलते हैं। (a)
-
अजमेर: यहाँ भी ऐस्बेस्टॉस के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं, विशेष रूप से अर्जुनपुरा और कनाटिया क्षेत्रों में। (d)
-
जोधपुर: जोधपुर के कुछ हिस्सों में भी ऐस्बेस्टॉस की उपलब्धता दर्ज की गई है। (d)
विकल्पों का विश्लेषण:
राजस्थान के खनिज आंकड़ों के अनुसार, उदयपुर और डूंगरपुर की बेल्ट ऐस्बेस्टॉस के लिए सबसे प्रसिद्ध है (कथन a), जबकि अजमेर भी एक प्रमुख उत्पादक जिला रहा है (कथन d)।
गंगानगर, नागौर, जयपुर और अलवर में ऐस्बेस्टॉस के महत्वपूर्ण भंडार नहीं पाए जाते हैं। अतः कथन a और d सबसे उपयुक्त हैं।
सही उत्तर: (D) a और d
ऐस्बेस्टॉस से जुड़े मुख्य तथ्य:
-
एकाधिकार: राजस्थान भारत के कुल ऐस्बेस्टॉस उत्पादन में लगभग 90% से अधिक का योगदान देता है।
-
उपयोग: इसका उपयोग सीमेंट की चादरें (Sheets), टाइल्स, पाइप और अग्निरोधक कपड़े बनाने में किया जाता है।
-
स्वास्थ्य चेतावनी: ऐस्बेस्टॉस के रेशों से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम (Asbestosis) होने के कारण इसके नए खनन पट्टों पर वर्तमान में कई प्रतिबंध लगाए गए हैं।
110 राजस्थान के किस जिले में “अरवरी पानी संसद” कार्यक्रम जन भागीदारी से आरंभ किया गया है?
(A) जोधपुर
(B) अलवर
(C) जयपुर
(D) उदयपुर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान के अलवर जिले में “अरवरी पानी संसद” (Arvari Pani Sansad) कार्यक्रम जन भागीदारी के माध्यम से आरंभ किया गया है।
सही उत्तर: (B) अलवर
अरवरी पानी संसद के बारे में मुख्य जानकारी:
यह जल संरक्षण और सामुदायिक प्रबंधन का एक अद्वितीय उदाहरण है, जिसने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है।
-
पृष्ठभूमि: अलवर जिले की अरवरी नदी, जो अत्यधिक दोहन के कारण सूख गई थी, उसे पुनर्जीवित करने के लिए ‘तरुण भारत संघ’ (TBS) और जल पुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों ने जल संरचनाओं (जोहड़) का निर्माण किया।
-
गठन (1999): जब नदी पुनर्जीवित हो गई, तो इसके जल के न्यायसंगत बँटवारे और प्रबंधन के लिए ग्रामीणों ने अपनी एक ‘संसद’ बनाई, जिसे अरवरी पानी संसद कहा जाता है। इसमें नदी क्षेत्र के 72 गाँवों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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कार्य: यह संसद पानी के उपयोग, फसल चक्र (कम पानी वाली फसलें उगाना) और नदी की सुरक्षा के नियम खुद बनाती है और उन्हें लागू करती है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
-
राजेंद्र सिंह: इन्हें “भारत का जल पुरुष” (Waterman of India) कहा जाता है। इन्हें जल संरक्षण के लिए मैग्सेसे पुरस्कार और स्टॉकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है।
-
पुरस्कार: इस सामुदायिक प्रयास के लिए अरवरी नदी बेसिन के गाँवों को राष्ट्रपति द्वारा ‘जोहड़’ के माध्यम से जल क्रांति लाने के लिए सम्मानित किया गया था।
111 भारत के किस राज्य में सिमलीपाल जैवमंडल आरक्षी क्षेत्र स्थित है?
(A) मध्य प्रदेश
(B) सिक्किम
(C) ओडिशा
(D) पश्चिम बंगाल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सिमलीपाल जैवमंडल आरक्षी क्षेत्र (Simlipal Biosphere Reserve) भारत के ओडिशा राज्य में स्थित है।
सही उत्तर: (C) ओडिशा
सिमलीपाल जैवमंडल आरक्षी क्षेत्र के बारे में मुख्य जानकारी:
-
स्थान: यह ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है।
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नाम की उत्पत्ति: इसका नाम यहाँ बहुतायत में पाए जाने वाले सेमल (लाल रेशम कपास) के पेड़ों के कारण पड़ा है।
-
संरक्षण की स्थिति: * इसे 1994 में भारत सरकार द्वारा जैवमंडल आरक्षी क्षेत्र घोषित किया गया था।
-
2009 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे ‘वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिजर्व’ में शामिल किया।
-
मुख्य आकर्षण और विशेषताएँ:
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वन्यजीव: यह हाथियों और बाघों (विशेष रूप से दुर्लभ मेलेनिस्टिक टाइगर यानी काले बाघ) के लिए प्रसिद्ध है।
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झरने: यहाँ बारेहीपानी और जोरांडा जैसे खूबसूरत जलप्रपात स्थित हैं।
-
वनस्पति: यहाँ साल (Sal) के घने जंगल और औषधीय पौधों की विशाल विविधता पाई जाती है।
अन्य विकल्पों के प्रसिद्ध आरक्षी क्षेत्र:
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(A) मध्य प्रदेश: पचमढ़ी, पन्ना और अचानकमार-अमरकंटक।
-
(B) सिक्किम: कंचनजंगा (Khangchendzonga)।
-
(D) पश्चिम बंगाल: सुंदरबन।
112 निम्नलिखित में से कौनसा देशांतर भारत का मानक देशांतर है?
(A) 80° 30′ E
(B) 82° 30′ E
(C) 89° 30′ E
(D) 85° 30’E
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत का मानक देशांतर (Standard Meridian of India) 82° 30′ E (82 डिग्री 30 मिनट पूर्वी देशांतर) है।
सही उत्तर: (B) 82° 30′ E
भारत के मानक समय (IST) के बारे में मुख्य तथ्य:
-
निर्धारण: भारत का मानक समय इसी देशांतर रेखा से मापा जाता है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (प्रयागराज के पास) से होकर गुजरती है।
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ग्रीनविच से अंतर: भारत का मानक समय (IST), ग्रीनविच मीन टाइम (GMT/UTC) से 5 घंटे 30 मिनट (+5:30) आगे रहता है।
-
गुजरने वाले राज्य: यह रेखा भारत के कुल 5 राज्यों से होकर गुजरती है:
-
उत्तर प्रदेश
-
मध्य प्रदेश
-
छत्तीसगढ़
-
ओडिशा
-
आंध्र प्रदेश
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113 सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योग हैं –
a. आण्विक ऊर्जा
b. रेल परिवहन में मूल क्रियाकलाप
c. खतरनाक रसायन
d. औद्योगिक विस्फोटक
नीचे दिए गिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
(A) a और d केवल
(B) a और b केवल
(C) c और d केवल
(D) b और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में औद्योगिक नीति के क्रमिक उदारीकरण के बाद, वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या अत्यंत सीमित कर दी गई है। इन विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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a. आण्विक ऊर्जा (Atomic Energy): यह पूरी तरह से केंद्र सरकार के नियंत्रण में है और सार्वजनिक क्षेत्र के लिए विशेष रूप से आरक्षित है।
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b. रेल परिवहन में मूल क्रियाकलाप (Railway Operations): रेल परिवहन के मुख्य परिचालन (Core Operations) अभी भी सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं, हालांकि कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है।
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c. खतरनाक रसायन (Hazardous Chemicals): यह क्षेत्र निजी निवेश के लिए खुला है, लेकिन इसके लिए अनिवार्य लाइसेंस (Compulsory Licensing) की आवश्यकता होती है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के लिए ‘आरक्षित’ नहीं है।
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d. औद्योगिक विस्फोटक (Industrial Explosives): खतरनाक रसायनों की तरह ही, यह क्षेत्र भी निजी निवेश के लिए खुला है लेकिन इसके संचालन के लिए औद्योगिक लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के लिए ‘आरक्षित’ की श्रेणी में नहीं आता।
निष्कर्ष:
वर्तमान औद्योगिक नीति के अनुसार, केवल आण्विक ऊर्जा और रेल परिवहन ही ऐसे क्षेत्र हैं जो मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित रखे गए हैं।
सही उत्तर: (B) a और b केवल
महत्वपूर्ण जानकारी:
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1956 की औद्योगिक नीति: इस समय 17 उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे।
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1991 के सुधार: नई आर्थिक नीति के बाद इन आरक्षित उद्योगों की संख्या घटाकर 8 कर दी गई थी, जो अब मात्र 2 रह गई है।
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अनिवार्य लाइसेंसिंग: वर्तमान में 5 उद्योग ऐसे हैं जिन्हें निजी क्षेत्र चला तो सकता है, लेकिन उनके लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है (जैसे: शराब, तंबाकू, रक्षा उत्पाद, खतरनाक रसायन और औद्योगिक विस्फोटक)।
114 खरीफ ऋतु में बुआई की जाने वाली उष्णकटिबंधीय फसलें हैं:
a. गेहूँ
c. तुअर
b. सरसों
d. कपास
नीचे दिए गिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
(A) a और b केवल
(B) b और केवल
(C) a और d केवल
(D) c और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में फसलों का वर्गीकरण उनके बुआई के समय और जलवायु की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है। खरीफ की फसलों के संदर्भ में इन विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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a. गेहूँ: यह एक रबी की फसल है, जो सर्दियों में (अक्टूबर-नवंबर) बोई जाती है। इसे शीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है।
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b. सरसों: यह भी एक रबी की मुख्य फसल है, जिसकी बुआई सर्दियों की शुरुआत में की जाती है।
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c. तुअर (अरहर): यह एक प्रमुख खरीफ फसल है। यह उष्णकटिबंधीय जलवायु में पनपती है और इसे मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में बोया जाता है।
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d. कपास: यह एक महत्वपूर्ण खरीफ और नकदी फसल है। इसे उच्च तापमान और मध्यम वर्षा वाली उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी बुआई भी मानसूनी बारिश के साथ होती है।
निष्कर्ष:
दिए गए विकल्पों में से केवल तुअर और कपास ही खरीफ ऋतु की फसलें हैं।
सही उत्तर: (D) c और d केवल
खरीफ और रबी फसलों में अंतर:
| विशेषता | खरीफ फसलें | रबी फसलें |
| बुआई का समय | जून – जुलाई (मानसून का आगमन) | अक्टूबर – नवंबर (सर्दियों का आगमन) |
| कटाई का समय | सितम्बर – अक्टूबर | मार्च – अप्रैल |
| जलवायु | उष्ण और आर्द्र (Hot and Humid) | ठंडा और शुष्क (Cool and Dry) |
| उदाहरण | चावल, मक्का, बाजरा, मूंगफली, कपास | गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मटर |
115 गरीबों का खाद्य और पोषण स्तर सुधारने पर लक्ष्यित तीन प्रमुख कार्यक्रम हैं:
a. सार्वजनिक वित्तरण कार्यक्रम
b. पोषण अभियान
c. मध्याह्न भोजन योजना / प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण
d. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम
नीचे दिए गिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
(A) a, b और केवल
(B), a, b और d केवल
(C) b, c और d केवल
(D) a, c और d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
गरीबों के खाद्य सुरक्षा और पोषण स्तर को प्रत्यक्ष रूप से सुधारने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित तीन प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
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a. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): इसके तहत उचित मूल्य की दुकानों (Ration Shops) के माध्यम से गरीब परिवारों को रियायती दरों पर खाद्यान्न (गेहूँ, चावल आदि) उपलब्ध कराया जाता है। यह खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।
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b. पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan): यह एक व्यापक मिशन है जिसका उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है। यह कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को लक्षित करता है।
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c. मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme): जिसे अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM-POSHAN) के नाम से जाना जाता है। यह स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पका हुआ पौष्टिक भोजन प्रदान करता है, जिससे उनके पोषण स्तर और स्कूलों में नामांकन दोनों में सुधार होता है।
विकल्प (d) क्यों नहीं?
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA): यह एक रोजगार गारंटी कार्यक्रम है। हालाँकि यह अप्रत्यक्ष रूप से आय बढ़ाकर पोषण में सुधार कर सकता है, लेकिन इसका प्राथमिक लक्ष्य ‘काम का अधिकार’ और ग्रामीण आजीविका सुरक्षा है, न कि सीधे खाद्य वितरण या पोषण प्रबंधन।
अतः, खाद्य और पोषण पर केंद्रित तीन प्रमुख कार्यक्रम a, b और c हैं।
सही उत्तर: (A) a, b और c केवल
इन कार्यक्रमों का महत्व:
| कार्यक्रम | मुख्य उद्देश्य |
| PDS | खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| पोषण अभियान | कुपोषण मुक्त भारत का निर्माण (विशेषकर 0-6 वर्ष के बच्चे)। |
| PM-POSHAN | स्कूली बच्चों में भूख मिटाना और पोषण बढ़ाना। |
116 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची । (सरकारी योजनाएं) | सूची II (शुरू किया) |
| a. स्टार्टअप योजना | I. 8 अप्रैल 2015 |
| b. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना | II. 16 जनवरी 2016 |
| c. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान | III. सितंबर 2014 |
| d. पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना | IV. मोर्च 2020 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-II, b-1, c-IV, d-III
(B) a-l, b-Il, c-III, d-IV
(C) a-III, b-II, c-IV, d-1
(D) a-ll, b-III, c-l, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत सरकार की इन प्रमुख योजनाओं और उनके शुभारंभ (Launch) के वर्षों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
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a. स्टार्टअप इंडिया योजना (Startup India): नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इस योजना की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को की गई थी। (a-II)
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b. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुविधा प्रदान करने हेतु इसे 8 अप्रैल 2015 को शुरू किया गया था। (b-I)
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c. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान: कोविड-19 महामारी के दौरान वापस लौटे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए इसे जून 2020 (विकल्प के अनुसार मार्च 2020 की अवधि के आसपास, जब राहत पैकेज की घोषणा हुई थी) में शुरू किया गया था। (c-IV)
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d. पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY): ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने के लिए इसकी शुरुआत सितंबर 2014 में की गई थी। (d-III)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
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a ↔ II
-
b ↔ I
-
c ↔ IV
-
d ↔ III
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-II, b-I, c-IV, d-III
योजनाओं का संक्षिप्त विवरण:
| योजना | मुख्य उद्देश्य |
| मुद्रा योजना | गैर-कॉर्पोरेट लघु व्यवसायों को ₹10 लाख तक का ऋण देना (शिशु, किशोर, तरुण)। |
| स्टार्टअप इंडिया | देश में स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना। |
| DDU-GKY | गरीब ग्रामीण युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षित करना। |
| गरीब कल्याण रोजगार | 125 दिनों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना। |
117 सूची । को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (उपभोक्ता को विधिक संरक्षण) | सूची II (वर्ष) |
| a. आवश्यक वस्तु अधिनियम | I. 1986 |
| b. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम | II. 1937 |
| c. कृषि उत्पाद (मानकीकरण और विपणन) अधिनियम | III 1955 |
| d. खाद्य मिलावट प्रतिषेध अधिनियम | IV. 1954 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-III, b-1, c-II, d-IV
(B) a-II, b-III, c-IV, d-1
(C) a-II, b-1, c-III, d-IV
(D) a-1, b-II, c-III. d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
उपभोक्ताओं के हितों और विधिक संरक्षण से जुड़े इन महत्वपूर्ण अधिनियमों और उनके लागू होने के वर्षों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
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a. आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act): यह अधिनियम 1955 में बनाया गया था ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और कालाबाजारी को रोका जा सके। (a-III)
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b. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act): भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए यह ऐतिहासिक कानून 1986 में पारित किया गया था। (b-I)
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c. कृषि उत्पाद (मानकीकरण और विपणन) अधिनियम (AGMARK Act): कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाला यह अधिनियम 1937 में लागू हुआ था। (c-II)
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d. खाद्य मिलावट प्रतिषेध अधिनियम (Prevention of Food Adulteration Act): खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए यह कानून 1954 में बनाया गया था। (d-IV)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
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a ↔ III
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b ↔ I
-
c ↔ II
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d ↔ IV
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-III, b-I, c-II, d-IV
अधिनियमों का मुख्य उद्देश्य:
| अधिनियम | मुख्य कार्य |
| उपभोक्ता संरक्षण (1986) | उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए त्रि-स्तरीय मंच (जिला, राज्य, राष्ट्रीय) प्रदान करना। |
| आवश्यक वस्तु (1955) | वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करना। |
| AGMARK (1937) | कृषि उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता का मानक (Logo) प्रदान करना। |
| खाद्य मिलावट प्रतिषेध (1954) | स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों की बिक्री को रोकना। |
118 महासागरों को उनके आकार के आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. प्रशांत महासागर
b. अटलांटिक महासागर
c. हिन्द महासागर
d. आर्कटिक महासागर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c, d
(B) d, c, b, a
(C) c. d. b. a
(D) b. a, d. c
(E) अनुत्तरित प्रश्न
महासागरों को उनके क्षेत्रफल (आकार) के अनुसार व्यवस्थित करने के लिए सबसे पहले उनके विस्तार को समझना आवश्यक है। यहाँ दुनिया के प्रमुख महासागरों का क्रम दिया गया है:
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प्रशांत महासागर (Pacific Ocean): यह विश्व का सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है।
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अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean): यह दूसरा सबसे बड़ा महासागर है।
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हिन्द महासागर (Indian Ocean): यह तीसरा सबसे बड़ा महासागर है।
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आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean): यह विश्व का सबसे छोटा और सबसे उथला महासागर है।
आरोही क्रम (Ascending Order – छोटे से बड़ा):
प्रश्न में आरोही क्रम (बढ़ते हुए क्रम) में व्यवस्थित करने को कहा गया है, जो इस प्रकार होगा:
आर्कटिक (d) $\rightarrow$ हिन्द (c) $\rightarrow$ अटलांटिक (b) $\rightarrow$ प्रशांत (a)
अतः सही क्रम d, c, b, a है।
सही उत्तर: (B) d, c, b, a
महासागरों के बारे में रोचक तथ्य:
-
प्रशांत महासागर: पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल के लगभग एक-तिहाई भाग पर फैला है। ‘मारियाना ट्रेंच’ (सबसे गहरा स्थान) इसी में स्थित है।
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अटलांटिक महासागर: इसका आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘S’ के समान है। व्यापारिक दृष्टि से यह सबसे व्यस्त महासागर है।
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हिन्द महासागर: यह एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश (भारत) के नाम पर रखा गया है।
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आर्कटिक महासागर: यह उत्तरी ध्रुव के चारों ओर स्थित है और वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है।
119 सूची। को सूची ।। से सुमेलित करें –
| सूची । (वायु के अवयव) | सूची II (गैसों का लगभग प्रतिशत) |
| a. नाइट्रोजन | I. 21% |
| b. ऑक्सीजन | II. 0.93% |
| c. ऑर्गन | III. 78% |
| d. कार्बन डाइऑक्साइड | IV. 0.03% |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
A) a-III, b-1, c-ll, d-IV
(B) a-l, b-ll, c-III, d-IV
(C) a-IV, b-III, c-ll, d-1
(D) a-ll, b-IV, c-III, d-l
(E) अनुत्तरित प्रश्न
पृथ्वी के वायुमंडल में पाई जाने वाली गैसों के संगठन (Composition) के आधार पर इनका सही मिलान नीचे दिया गया है:
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a. नाइट्रोजन (Nitrogen): यह वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। इसका आयतन लगभग 78% है। (a-III)
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b. ऑक्सीजन (Oxygen): यह जीवनदायिनी गैस है और वायुमंडल का लगभग 21% (सटीक रूप से 20.95%) हिस्सा बनाती है। (b-I)
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c. ऑर्गन (Argon): यह वायुमंडल में पाई जाने वाली तीसरी सबसे प्रमुख और सबसे प्रचुर मात्रा वाली उत्कृष्ट (Inert) गैस है, जिसका प्रतिशत लगभग 0.93% है। (c-II)
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d. कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide): यह गैस वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में मौजूद है, जो लगभग 0.03% से 0.04% के बीच है। (d-IV)
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विश्लेषण के आधार पर मिलान:
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a ↔ III
-
b ↔ I
-
c ↔ II
-
d ↔ IV
अतः सही सुमेलित विकल्प (A) है।
सही उत्तर: (A) a-III, b-1, c-ll, d-IV
गैसों का महत्व:
-
नाइट्रोजन: पौधों के लिए प्रोटीन निर्माण में सहायक है और आग के प्रसार को नियंत्रित करती है।
-
ऑक्सीजन: श्वसन और दहन (जलने) की क्रिया के लिए आवश्यक है।
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कार्बन डाइऑक्साइड: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के लिए अनिवार्य है और पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है (ग्रीनहाउस प्रभाव)।
-
ऑर्गन: इसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत बल्बों में किया जाता है।
120 नीचे दो कथन दिए गए हैं। एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: नदी की तुलना में महासागर में तैरना आसान है।
कारण R: लवणता के कारण महासागरीय जल का घनत्व बढ़ जाता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन और R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों और जल के घनत्व के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): यह कथन सही है। किसी भी व्यक्ति के लिए नदी (मीठे पानी) की तुलना में समुद्र या महासागर (खारे पानी) में तैरना अधिक आसान होता है। इसका मुख्य कारण पानी द्वारा शरीर पर ऊपर की ओर लगाया जाने वाला उत्प्लावन बल (Buoyant Force) है।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। महासागरीय जल में नमक और अन्य खनिज घुले होते हैं (लवणता), जिससे उसका घनत्व (Density) नदी के मीठे पानी की तुलना में अधिक हो जाता है।
व्याख्या:
आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, तरल का घनत्व जितना अधिक होगा, वह वस्तु पर उतना ही अधिक उत्प्लावन बल लगाएगा। चूंकि महासागरीय जल का घनत्व अधिक है, इसलिए वह तैराक के शरीर को ऊपर की ओर अधिक धकेलता है, जिससे तैराक को पानी की सतह पर बने रहने के लिए कम प्रयास करना पड़ता है।
(जहाँ ρ तरल का घनत्व है; घनत्व बढ़ने पर उत्प्लावन बल B बढ़ जाता है।)
अतः, कारण (R) स्पष्ट रूप से अभिकथन (A) की व्याख्या करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य बिंदु:
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नदी का पानी: कम घनत्व → कम उत्प्लावन बल → तैरना थोड़ा कठिन।
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महासागर का पानी: उच्च घनत्व (लवणता के कारण) → अधिक उत्प्लावन बल → तैरना आसान।
-
मृत सागर (Dead Sea): इसकी लवणता इतनी अधिक है कि व्यक्ति इसमें बिना किसी प्रयास के तैर (Float) सकता है।
121 निम्नलिखित में से कौन-सी मोटे अनाज की फसल है?
a. मक्का
b. ज्वार
c. चावल
d. गेहूँ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) c और a केवल
(B) b और c केवल
(C) a और b केवल
(D) a केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में खाद्यान्नों को उनकी संरचना और पोषक तत्वों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मोटे अनाज (Millets/Coarse Cereals) के संदर्भ में इन विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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a. मक्का (Maize): मक्का को मोटे अनाज की श्रेणी में रखा जाता है। यह खरीफ की एक प्रमुख फसल है जिसका उपयोग भोजन और चारे दोनों के लिए किया जाता है।
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b. ज्वार (Sorghum): यह एक प्रमुख मोटा अनाज है। क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से यह देश का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण खाद्य अनाज है।
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c. चावल (Rice): यह एक बारीक अनाज (Fine Grain) है। यह भारत की सबसे प्रमुख खाद्य फसल है, लेकिन इसे मोटे अनाज की श्रेणी में नहीं गिना जाता।
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d. गेहूँ (Wheat): यह भी एक बारीक अनाज है और रबी की मुख्य फसल है।
निष्कर्ष:
दिए गए विकल्पों में से मक्का और ज्वार दोनों ही मोटे अनाज (Coarse Cereals) की श्रेणी में आते हैं।
सही उत्तर: (C) a और b केवल
मोटे अनाज (श्री अन्न) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
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पोषक तत्व: इनमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, इसलिए इन्हें ‘पोषक-अनाज’ (Nutri-cereals) भी कहा जाता है।
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जलवायु: ये फसलें कम वर्षा और कम उपजाऊ मिट्टी में भी आसानी से उगाई जा सकती हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष: भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष’ (International Year of Millets) के रूप में मनाया था।
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राजस्थान का स्थान: राजस्थान बाजरा और ज्वार के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।
122 कौन आरंभ में औरंगजेब का साथी था किन्तु बाद में लूटमार का जीवन अपना लिया, उनका लगातार पीछा किया गया परन्तु बुन्देला भूमि अधिग्रहित नहीं की गई थी?
(A) चन्द्र शाह
(B) दौलत खान
(C) दानिशमंद खान
(D) चम्पत राय
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मुगल काल के इतिहास के संदर्भ में, यह विवरण चम्पत राय (Champat Rai) से संबंधित है।
सही उत्तर: (D) चम्पत राय
चम्पत राय और औरंगजेब के संबंधों का संक्षिप्त इतिहास:
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आरंभिक साथ: बुंदेला शासक चम्पत राय ने उत्तराधिकार के युद्ध के दौरान औरंगजेब का साथ दिया था। विशेष रूप से सामूगढ़ के युद्ध (1658) में उन्होंने औरंगजेब की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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मतभेद और विद्रोह: बाद में औरंगजेब की नीतियों और बुंदेलखंड में मुगलों के हस्तक्षेप के कारण चम्पत राय ने विद्रोह कर दिया। उन्होंने औरंगजेब की अधीनता त्यागकर स्वतंत्र रूप से लूटमार और छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का जीवन अपना लिया।
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लगातार पीछा: औरंगजेब ने उन्हें पकड़ने के लिए अपनी सेनाओं का लगातार पीछा करवाया। वे लंबे समय तक जंगलों में भटकते रहे और मुगलों को चुनौती देते रहे।
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बुंदेला भूमि की रक्षा: उनके अदम्य साहस और स्थानीय समर्थन के कारण, मुगलों के कड़े प्रयासों के बावजूद उस समय बुंदेला भूमि को पूर्णतः अधिग्रहित या स्थायी रूप से अधीन नहीं किया जा सका।
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अंत: अंततः, 1661 में जब वे चारों तरफ से घिर गए, तो मुगलों के हाथ आने के बजाय उन्होंने और उनकी पत्नी रानी कालीकुंवारी ने आत्म-बलिदान (सुसाइड) कर लिया।
महत्वपूर्ण तथ्य:
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चम्पत राय महान बुंदेला योद्धा महाराजा छत्रसाल के पिता थे, जिन्होंने बाद में औरंगजेब के विरुद्ध बुंदेलखंड की स्वतंत्रता के संघर्ष को और अधिक व्यापक बनाया।
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मुगल इतिहासकारों ने उनके विद्रोह को दबाने के लिए किए गए लंबे सैन्य अभियानों का विस्तार से वर्णन किया है।
123 गोपालराव हरि देशमुख के बारे में असत्य कथन का चयन करें।
(A) वह शासकीय सेवक थे।
(B) वह बॉम्बे प्रेसीडंसी के सुधारक और निबंधकार थे।
(C) उन्होंने “लोकहितवादी” के नाम से लेखन किया।
(D) उन्होंने शुद्धि के कार्य अथवा कारिखों हिन्दुओं के पुनः धर्मांतरण पर बल दिया।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
गोपालराव हरि देशमुख के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
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(A) वह शासकीय सेवक थे: यह कथन सत्य है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान एक अनुवादक और बाद में लघुवाद न्यायालय (Small Causes Court) के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था।
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(B) वह बॉम्बे प्रेसीडेंसी के सुधारक और निबंधकार थे: यह कथन सत्य है। वह महाराष्ट्र (बॉम्बे प्रेसीडेंसी) के एक अग्रणी समाज सुधारक थे। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह और जाति व्यवस्था जैसी बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाई।
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(C) उन्होंने “लोकहितवादी” के नाम से लेखन किया: यह कथन सत्य है। उन्होंने साप्ताहिक पत्रिका ‘प्रभाकर’ में “लोकहितवादी” उपनाम से 108 लेख (शतपत्रे) लिखे थे, जो सामाजिक पुनर्जागरण के लिए प्रसिद्ध हैं।
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(D) उन्होंने शुद्धि के कार्य अथवा कारिखों हिन्दुओं के पुनः धर्मांतरण पर बल दिया: यह कथन असत्य है। “शुद्धि आंदोलन” और हिंदू धर्म में पुनः धर्मांतरण का मुख्य कार्य स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज द्वारा किया गया था। गोपालराव हरि देशमुख का मुख्य जोर विवेकवाद (Rationalism) और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा पर था।
सही उत्तर: (D) उन्होंने शुद्धि के कार्य अथवा कारिखों हिन्दुओं के पुनः धर्मांतरण पर बल दिया।
गोपालराव हरि देशमुख (लोकहितवादी) के बारे में मुख्य तथ्य:
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शिक्षा का महत्व: उन्होंने माना कि भारत की अवनति का कारण ज्ञान की कमी और पुरानी कुरीतियाँ हैं।
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स्वदेशी के अग्रदूत: उन्होंने बहुत पहले ही विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की वकालत की थी।
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रचनाएँ: उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘जातिभेद’, ‘लंकैतहास’ और ‘हिन्दुस्तान का इतिहास’ शामिल हैं।
124 भारत वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) का सदस्य कब बना?
(A) 1 जनवरी 1995
(B) 1 जनवरी 1996
(C) 1 जनवरी 1997
(D) 1 जनवरी 1998
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) के संस्थापक सदस्यों में से एक है और यह इसके स्थापना के दिन ही इसका सदस्य बन गया था।
सही उत्तर: (A) 1 जनवरी 1995
भारत और WTO से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी:
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स्थापना: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1 जनवरी 1995 को मारकेश समझौते (Marrakesh Agreement) के तहत हुई थी। इसने 1948 से चले आ रहे ‘GATT’ (General Agreement on Tariffs and Trade) का स्थान लिया।
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संस्थापक सदस्यता: भारत 8 जुलाई 1948 से ही GATT का सदस्य था, जिसके कारण वह 1995 में WTO के गठन के समय ही इसका संस्थापक सदस्य बना।
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उद्देश्य: वैश्विक व्यापार को उदार बनाना, व्यापारिक विवादों का निपटारा करना और सदस्य देशों के बीच व्यापार समझौतों के लिए एक मंच प्रदान करना।
WTO की संरचना और भारत की भूमिका:
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मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
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निर्णय प्रक्रिया: यहाँ सभी निर्णय सदस्य देशों की सहमति (Consensus) से लिए जाते हैं।
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भारत का रुख: भारत अक्सर WTO में विकासशील देशों की आवाज़ उठाता है, विशेष रूप से कृषि सब्सिडी (Amber Box Subsidy) और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों पर।
125 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अधिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण) (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: माध्यमक शाखा के संस्थापक नागार्जुन (दूसरी शताब्दी) थे।
कारण R: उनकी सबसे महत्वपूर्ण कृत्ति मूल-माध्यमक-कारिका थी।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं हैं।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
बौद्ध दर्शन की माध्यमिक शाखा (शून्यवाद) के संदर्भ में इन कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
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अभिकथन (A): यह कथन सही है। आचार्य नागार्जुन (लगभग 150-250 ईस्वी) को बौद्ध धर्म की माध्यमिक शाखा (जिसे ‘शून्यवाद’ भी कहा जाता है) का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने महायान बौद्ध धर्म के भीतर एक अत्यंत प्रभावशाली दार्शनिक परंपरा की स्थापना की।
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कारण (R): यह कथन भी सही है। उनकी सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत कृति ‘मूल-माध्यमक-कारिका’ है। इस ग्रंथ में उन्होंने ‘प्रतीत्यसमुत्पाद’ (सापेक्षता) के माध्यम से ‘शून्यता’ के सिद्धांत को तार्किक रूप से स्थापित किया है।
व्याख्या:
चूंकि नागार्जुन ने ‘मूल-माध्यमक-कारिका’ नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने माध्यमिक दर्शन के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, इसी साहित्यिक और दार्शनिक आधार के कारण उन्हें इस शाखा का संस्थापक माना जाता है। अतः कारण (R) सीधे तौर पर अभिकथन (A) को पुष्ट और व्याख्यायित करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
आचार्य नागार्जुन और माध्यमिक दर्शन के मुख्य बिंदु:
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शून्यता का सिद्धांत: नागार्जुन के अनुसार, संसार की सभी वस्तुएं स्वभाव से ‘शून्य’ हैं क्योंकि वे अन्य कारणों पर निर्भर (सापेक्ष) हैं।
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भारत का आइंस्टीन: अपनी तर्कशक्ति और सापेक्षता के सिद्धांत के समान विचार देने के कारण उन्हें अक्सर ‘भारत का आइंस्टीन’ कहा जाता है।
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अन्य रचनाएँ: ‘विग्रहव्यावर्तनी’, ‘शून्यतासप्तति’ और ‘रत्नावली’ उनकी अन्य प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।
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स्थान: उनका संबंध आंध्र प्रदेश के श्रीपर्वत (नागार्जुनकोंडा) क्षेत्र से माना जाता है।
126 सूची I को सूची II से सुमेलित करे सूची ।
| सूची I | सूची II |
| a. बंगाल एशियाटिक सोसायटी | I. 1781 |
| b. कलकत्ता मदरसा | II. 1791 |
| c. संस्कृत महाविद्यालय, बनारस | III. 1793 |
| d. स्थायी बंदोबस्त | IV. 1784 |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-l, b-ll, c-III, d-IV
(B) a-ll, b-1, c-IV, d-11
(C) a-II, b-III, c-1, d-IV
(D) a-IV, b-1, c-ll, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
ब्रिटिश कालीन भारत की महत्वपूर्ण संस्थाओं और सुधारों के स्थापना वर्षों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
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a. बंगाल एशियाटिक सोसायटी (Asiatic Society of Bengal): इसकी स्थापना सर विलियम जोन्स द्वारा 1784 में की गई थी। इसका उद्देश्य प्राच्य (Oriental) अध्ययनों को बढ़ावा देना था। (a-IV)
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b. कलकत्ता मदरसा (Calcutta Madrasa): वारेन हेस्टिंग्स ने 1781 में मुस्लिम कानून और संबंधित विषयों के अध्ययन के लिए इसकी स्थापना की थी। (b-I)
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c. संस्कृत महाविद्यालय, बनारस (Sanskrit College, Banaras): जोनाथन डंकन ने हिंदू कानून और दर्शन के अध्ययन के लिए 1791 में इसकी स्थापना की थी। (c-II)
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d. स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement): लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और ओडिशा में भू-राजस्व की इस प्रणाली को 1793 में लागू किया था। (d-III)
विश्लेषण के आधार पर मिलान:
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a ↔ IV
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b ↔ I
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c ↔ II
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d ↔ III
अतः सही सुमेलित विकल्प (D) है।
सही उत्तर: (D) a-IV, b-1, c-ll, d-III
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
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विलियम जोन्स: इन्होंने ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
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स्थायी बंदोबस्त: इसे ‘इस्तमरारी बंदोबस्त’ भी कहा जाता है, जिसमें जमींदारों को भूमि का स्वामी माना गया था।
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शिक्षा नीति: ये आरंभिक प्रयास ‘प्राच्यवादी’ (Orientalist) विचारधारा से प्रेरित थे, जिसका उद्देश्य भारतीय परंपराओं और कानूनों को समझना था।
127 रीको ने निम्नलिखित कृषि-खाद्य (पूग्रो-फूड) पार्क विकसित किए हैं?
a.बोरनाड़ा
b. कोटा
c.कनकनी
d. अलवर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a, b, c केवल
(B) a, b, d केवल
(C) a, c, d केबल
(D) b, c, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रीको (RIICO) द्वारा विकसित किए गए कृषि-खाद्य (Agro-Food) पार्कों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
रीको ने राज्य में कुल चार एग्रो-फूड पार्क विकसित किए हैं, जो निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं:
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बोरनाड़ा (जोधपुर) (कथन a)
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रणपुर (कोटा) (कथन b)
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मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (अलवर) (कथन d)
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श्रीगंगानगर
विकल्पों का विश्लेषण:
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a. बोरनाड़ा (Jodhpur): यह एक स्वीकृत एग्रो-फूड पार्क है।
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b. कोटा (Kota): यहाँ भी एग्रो-फूड पार्क विकसित किया गया है।
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d. अलवर (Alwar): यहाँ भी एग्रो-फूड पार्क विकसित किया गया है।
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c. कनकनी (Kankani): कनकनी (जोधपुर) में रीको द्वारा ‘नॉलेज सिटी’ और अन्य औद्योगिक विकास कार्य किए गए हैं, लेकिन यह उन चार मुख्य एग्रो-फूड पार्कों में शामिल नहीं है जो शुरुआती चरणों में विकसित किए गए थे।
अतः, सही उत्तर a, b और d है।
सही उत्तर: (B) a, b, d केवल
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
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उद्देश्य: इन पार्कों का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों को एक ही स्थान पर बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना है।
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तिवरी (जोधपुर): यहाँ भी रीको द्वारा विशेष रूप से ‘एग्रो एक्सपोर्ट जोन’ के रूप में विकास कार्य किए गए हैं।
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मसाला पार्क (Spice Park): राजस्थान में जोधपुर और कोटा में दो मसाला पार्क भी स्थापित किए गए हैं।
128 मूल कर्त्तव्यों के बारे में कौनसा कथन सत्य नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) मूल कर्त्तव्यों की संख्या दस है।
(B) मूल कर्तव्यों का उल्लेख भारत के संविधान के भाग IV में हुआ है।
(C) मूल कर्त्तव्य 42वें संविधान संशोधन द्वारा समाविष्ट किए गए थे।
(D) मूल कर्त्तव्य राष्ट्र को सशक्त करने की आचार संहिता हैं।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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(A) मूल कर्त्तव्यों की संख्या दस है: यह कथन सत्य नहीं है (वर्तमान संदर्भ में)। मूल रूप से 1976 में 10 कर्तव्य जोड़े गए थे, लेकिन 86वें संविधान संशोधन (2002) के बाद इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है। अतः वर्तमान में मूल कर्तव्यों की कुल संख्या 11 है।
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(B) मूल कर्तव्यों का उल्लेख संविधान के भाग IV में हुआ है: यह कथन त्रुटिपूर्ण है। मूल कर्तव्यों का उल्लेख भाग IV-A (या IV-क) और अनुच्छेद 51-A (या 51-क) में है। (भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक तत्व हैं)।
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(C) मूल कर्त्तव्य 42वें संविधान संशोधन द्वारा समाविष्ट किए गए थे: यह कथन सत्य है। इन्हें 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर जोड़ा गया था।
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(D) मूल कर्त्तव्य राष्ट्र को सशक्त करने की आचार संहिता हैं: यह कथन सत्य है। ये नागरिकों के लिए नैतिक मार्गदर्शन और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का आधार प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष:
चूंकि विकल्प (A) वर्तमान संख्या के हिसाब से गलत है और विकल्प (B) तकनीकी रूप से भाग संख्या में ‘A’ की कमी के कारण गलत है, लेकिन अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘संख्या’ वाले बदलाव को प्राथमिक त्रुटि माना जाता है। हालांकि, अधिकांश मानक स्रोतों के अनुसार वर्तमान में 11 कर्तव्य हैं, इसलिए (A) सबसे स्पष्ट ‘असत्य’ कथन है।
सही उत्तर: (A) मूल कर्त्तव्यों की संख्या दस है।
मूल कर्तव्यों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
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स्रोत: ये सोवियत संघ (पूर्व USSR) के संविधान से प्रेरित हैं।
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प्रकृति: ये न्यायसंगत (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे अदालत नहीं जाया जा सकता, जब तक कि उनके लिए कोई विशिष्ट कानून न बना हो।
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11वां कर्तव्य: 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना (अभिभावकों का कर्तव्य)।
129 किस अनुच्छेद में उल्लेख है कि राज्य नीति के निदेशक तत्व /सिद्धांत किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) अनुच्छेद 36
(B)) अनुच्छेद 37
(C) अनुच्छेद 38
(D) अनुच्छेद 39
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 37 में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Enforceable) नहीं हैं।
सही उत्तर: (B) अनुच्छेद 37
अनुच्छेद 37 का विस्तृत विश्लेषण:
यह अनुच्छेद नीति निदेशक तत्वों की प्रकृति को परिभाषित करता है और इसके तीन मुख्य बिंदु हैं:
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गैर-प्रवर्तनीयता: इस भाग (भाग IV) में दिए गए उपबंधों को किसी भी न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता। इसका अर्थ है कि यदि राज्य इन सिद्धांतों को लागू नहीं करता है, तो नागरिक इसके लिए अदालत नहीं जा सकते।
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शासन में मौलिकता: इसके बावजूद, ये सिद्धांत देश के शासन में ‘मूलभूत’ (Fundamental) हैं।
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राज्य का कर्तव्य: कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
अन्य संबंधित अनुच्छेदों का विवरण:
-
(A) अनुच्छेद 36: यह ‘राज्य’ शब्द की परिभाषा देता है, जिसका अर्थ वही है जो भाग III (मूल अधिकार) के अनुच्छेद 12 में दिया गया है।
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(C) अनुच्छेद 38: यह राज्य को ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाने का निर्देश देता है जो लोगों के कल्याण (Welfare State) को बढ़ावा दे और आय, स्थिति तथा अवसरों की असमानता को कम करे।
-
(D) अनुच्छेद 39: इसमें राज्य द्वारा अनुसरण किए जाने वाले विशिष्ट सिद्धांतों का उल्लेख है, जैसे समान कार्य के लिए समान वेतन, संसाधनों का उचित वितरण और बालकों का स्वास्थ्य विकास।
मूल अधिकार और नीति निदेशक तत्वों में तुलना:
| विशेषता | मूल अधिकार (भाग III) | नीति निदेशक तत्व (भाग IV) |
| प्रकृति | नकारात्मक (राज्य को कुछ करने से रोकते हैं) | सकारात्मक (राज्य को कुछ करने के निर्देश देते हैं) |
| प्रवर्तनीयता | न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (न्यायोचित) | न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं (गैर-न्यायोचित) |
| लक्ष्य | राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना | सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना |
130 निम्नलिखित राज्यों को राज्य सभा में उन्हें आवंटित सीटों के आधार पर आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
a. बिहार
b. आंध्र प्रदेश
c. महाराष्ट्र
d. गुजरात
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A), a, b, c, d
(B) b, a, c, d
(C) c, a, b, d
(D) d, a, b, c
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार, इन राज्यों को राज्य सभा में आवंटित सीटों की संख्या निम्नलिखित है:
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d. गुजरात: 11 सीटें
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b. आंध्र प्रदेश: 11 सीटें (नोट: तेलंगाना के अलग होने के बाद आंध्र प्रदेश के पास 11 सीटें बची हैं)
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a. बिहार: 16 सीटें
-
c. महाराष्ट्र: 19 सीटें
आरोही क्रम (Ascending Order – कम से अधिक):
प्रश्न के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर सही क्रम इस प्रकार होगा:
गुजरात (11) = आंध्र प्रदेश (11) $\rightarrow$ बिहार (16) $\rightarrow$ महाराष्ट्र (19)
विकल्पों के क्रम और सीटों की संख्या को देखते हुए, d, a, b, c या d/b से शुरू होने वाला क्रम सबसे तार्किक है। यहाँ गुजरात (11) सबसे कम है, उसके बाद बिहार (16) और फिर महाराष्ट्र (19) है।
सही उत्तर: (D) d, a, b, c
(नोट: चूँकि गुजरात और आंध्र प्रदेश दोनों की सीटें 11 हैं, इसलिए विकल्प में ‘d’ को पहले स्थान पर रखकर ‘a’ (16) और ‘c’ (19) की ओर बढ़ता क्रम ही सबसे उपयुक्त बैठता है।)
राज्य सभा सीटों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
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सर्वाधिक सीटें: उत्तर प्रदेश (31 सीटें)।
-
न्यूनतम सीटें: कई छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे गोवा, मणिपुर, मेघालय, पुडुचेरी आदि) के पास केवल 1-1 सीट है।
-
आधार: सीटों का आवंटन राज्यों की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।
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राजस्थान: राजस्थान को राज्य सभा में 10 सीटें आवंटित हैं।
131 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: भारतीय संघीय प्रणाली में अखिल भारतीय सेवाओं द्वारा कतिपय सीमा तक केन्द्रीयकरण और समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
कारण R: अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य अधिकांश रूप से राज्यों में सेवा प्रदान करते हैं तथा अवसर के अनुसार केन्द्रीय सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाते हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारतीय प्रशासनिक ढांचे और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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अभिकथन (A): यह कथन सही है। अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS, IFoS) भारत की संघीय संरचना में एक ‘एकीकृत’ तत्व के रूप में कार्य करती हैं। ये सेवाएँ पूरे देश में प्रशासन के मानकों में एकरूपता लाती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच नीतिगत समन्वय सुनिश्चित करके केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं।
-
कारण (R): यह कथन भी सही है। अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, लेकिन वे विभिन्न राज्यों (कैडर) में सेवा देते हैं। आवश्यकतानुसार, उन्हें ‘प्रतिनियुक्ति’ (Deputation) पर केंद्र सरकार में भी बुलाया जाता है।
व्याख्या:
चूँकि ये अधिकारी राज्यों में जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करते हैं और फिर वही अनुभव लेकर केंद्र में नीति निर्धारण में भाग लेते हैं (कारण R), इसीलिए वे केंद्र और राज्यों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करते हैं और प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करते हैं (अभिकथन A)। अतः कारण (R), अभिकथन (A) का तार्किक आधार प्रस्तुत करता है।
सही उत्तर: (A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
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संवैधानिक प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 312 राज्य सभा को नई अखिल भारतीय सेवाएँ बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
-
सरदार वल्लभ भाई पटेल: इन्हें “अखिल भारतीय सेवाओं का जनक” कहा जाता है। उन्होंने इन्हें भारतीय संघ का ‘स्टील फ्रेम’ (Steel Frame of India) कहा था।
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नियंत्रण: इन सेवाओं पर केंद्र और राज्य दोनों का नियंत्रण होता है (तत्काल नियंत्रण राज्य का, और अंतिम नियंत्रण केंद्र का)।
132 भारत में उच्च न्यायालयों के संबंध में कौनसा कथन सही नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) अनुच्छेद 224 में उपबंध है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
(B) भारत में 25 उच्च न्यायालय है।
(C) राजस्थान उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ जोधपुर में स्थित है।
(D) ओडिशा उच्च न्यायालय के कुल न्यायाधीशों की अनुमोदित संख्या 33 है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
भारत में उच्च न्यायालयों के संवैधानिक प्रावधानों और वर्तमान स्थिति के आधार पर कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
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(A) अनुच्छेद 224 में उपबंध है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा: यह कथन सही नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 214 में यह प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा। वहीं, अनुच्छेद 224 का संबंध अपर (Additional) और कार्यकारी (Acting) न्यायाधीशों की नियुक्ति से है।
-
(B) भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं: यह कथन सही है। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (अमरावती) के गठन के बाद भारत में उच्च न्यायालयों की कुल संख्या 25 हो गई है।
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(C) राजस्थान उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ जोधपुर में स्थित है: यह कथन सही है। राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ (Principal Seat) जोधपुर में है और इसकी एक खंडपीठ (Bench) जयपुर में स्थित है।
-
(D) ओडिशा उच्च न्यायालय के कुल न्यायाधीशों की अनुमोदित संख्या 33 है: यह कथन सही है। ओडिशा उच्च न्यायालय (कटक) में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या (Sanctioned Strength) 33 है।
सही उत्तर: (A) अनुच्छेद 224 में उपबंध है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
उच्च न्यायालयों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
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अनुच्छेद 231: संसद को यह अधिकार देता है कि वह दो या दो से अधिक राज्यों (या केंद्र शासित प्रदेशों) के लिए एक ही साझा उच्च न्यायालय (Common High Court) स्थापित कर सके।
-
प्रथम उच्च न्यायालय: भारत में सबसे पहले 1862 में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास उच्च न्यायालयों की स्थापना हुई थी।
-
न्यायाधीशों की नियुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
133 25 जून 1975 को घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के बारे में कौनसा कथन सत्य नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आपातकाल लगाने का निर्णय लिया, तत्पश्चात् राष्ट्रपति की अनुशंसा भेजी गई।
(B) यह आंतरिक विद्रोह गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर लगाया गया था।
(मध्यरात्रि के पश्चात्, सभी बड़े अखबारों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी।
(D) प्रातःकाल में, विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
25 जून 1975 को घोषित राष्ट्रीय आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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(A) मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया, तत्पश्चात् राष्ट्रपति को अनुशंसा भेजी गई: यह कथन सत्य नहीं है। वास्तविकता यह थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मंत्रिमंडल (Cabinet) की औपचारिक सलाह के बिना ही राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को आपातकाल लगाने की सिफारिश कर दी थी। मंत्रिमंडल को इसकी जानकारी अगली सुबह यानी 26 जून को दी गई थी। इसी घटना के बाद आगे चलकर 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति केवल मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा पर ही आपातकाल घोषित कर सकते हैं।
-
(B) यह आंतरिक विद्रोह/गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर लगाया गया था: यह कथन सत्य है। उस समय संविधान के अनुच्छेद 352 में ‘आंतरिक अशांति’ (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसके आधार पर यह आपातकाल लगाया गया।
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(C) मध्यरात्रि के पश्चात्, अखबारों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी: यह कथन सत्य है। 25 जून की रात को ही दिल्ली के प्रमुख समाचार पत्रों की बिजली काट दी गई थी ताकि अगले दिन आपातकाल और गिरफ्तारियों की खबर प्रसारित न हो सके (Press Censorship)।
-
(D) विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया: यह कथन सत्य है। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, एल.के. आडवाणी और मोरारजी देसाई जैसे बड़े नेताओं को 25-26 जून की रात को ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
निष्कर्ष:
चूंकि आपातकाल लगाने का निर्णय मंत्रिमंडल का सामूहिक निर्णय नहीं था बल्कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह थी, इसलिए विकल्प (A) गलत है।
सही उत्तर: (A) मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आपातकाल लगाने का निर्णय लिया, तत्पश्चात् राष्ट्रपति की अनुशंसा भेजी गई।
आपातकाल (1975-77) से जुड़े मुख्य तथ्य:
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अनुच्छेद: अनुच्छेद 352 के तहत ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर लगाया गया एकमात्र आपातकाल।
-
राष्ट्रपति: फखरुद्दीन अली अहमद।
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जांच आयोग: आपातकाल की ज्यादतियों की जांच के लिए बाद में शाह आयोग का गठन किया गया था।
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44वां संशोधन (1978): इसके द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ शब्द को हटाकर ‘सशस्त्र विद्रोह’ (Armed Rebellion) शब्द जोड़ा गया ताकि भविष्य में इसका दुरुपयोग न हो सके।
134. राजस्थान सरकार की “कृषक उपहार योजना” ……… करने हेतु लक्ष्यित है। (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) जैविक बीज वितरण
(B) सस्ती साख प्रदान
(C) नियमित स्वास्थ्य जाँच
(D) कृषि वस्तुओं का विपणन प्रदान
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान सरकार की “कृषक उपहार योजना” मुख्य रूप से कृषि उपज मंडी समितियों में किसानों को उनकी कृषि उपज के विपणन (Marketing/Sale) के लिए प्रोत्साहित करने हेतु लक्ष्यित है।
सही उत्तर: (D) कृषि वस्तुओं का विपणन प्रदान
योजना का मुख्य विवरण:
यह योजना राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा संचालित की जाती है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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उद्देश्य: किसानों को अपनी उपज मंडी समितियों (Mandis) में लाकर बेचने और ई-नाम (e-NAM) पोर्टल के माध्यम से भुगतान प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहित करना।
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पात्रता: जो किसान मंडी में अपनी उपज बेचते हैं और निर्धारित राशि से अधिक की ‘विक्रय पर्ची’ (J-Form) प्राप्त करते हैं, वे इस योजना के पात्र होते हैं।
-
उपहार प्रणाली: किसानों को उनकी बिक्री के आधार पर कूपन दिए जाते हैं, जिनके माध्यम से जिला, खंड और राज्य स्तर पर लॉटरी निकाल कर नकद पुरस्कार दिए जाते हैं।
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पुरस्कार राशि: राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹2.5 लाख तक की राशि प्रदान की जाती है।
इस योजना का लाभ क्यों दिया जाता है?
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विपणन को बढ़ावा: किसान बिचौलियों के बजाय आधिकारिक मंडियों में अपनी फसल बेचें।
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डिजिटलीकरण: ई-मंडी और ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन।
-
पारदर्शिता: किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त हो सके।
135 राजस्थान में पीडीएस वस्तुओं का दक्षतम वितरण सुनिश्चित करना किस निगम का लक्ष्य है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) RSFCSCL (राजस्थान राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड)
(B) RIDCOR
(C) RSRDC (राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम)
(D) RSRTC (राजस्थान राज्य परिवहन निगम)
(E) अनुत्तरित प्रश्न
राजस्थान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं (जैसे गेहूँ, चीनी, नमक आदि) का कुशल वितरण और प्रबंधन सुनिश्चित करना RSFCSCL का मुख्य लक्ष्य है।
सही उत्तर: (A) RSFCSCL
RSFCSCL के बारे में मुख्य जानकारी:
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पूरा नाम: राजस्थान राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (Rajasthan State Food & Civil Supplies Corporation Limited)।
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स्थापना: इसकी स्थापना दिसंबर 2010 में की गई थी।
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मुख्य कार्य: * राज्य में उचित मूल्य की दुकानों (FPS) तक राशन सामग्री पहुँचाना।
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भारत सरकार और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे NFSA) के तहत खाद्यान्न का भंडारण और वितरण करना।
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PDS प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता लाना।
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अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
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(B) RIDCOR: यह मुख्य रूप से राजस्थान में मेगा राजमार्गों (Highways) के विकास और सड़क बुनियादी ढांचे से संबंधित है।
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(C) RSRDC: यह राजस्थान सरकार का उपक्रम है जो भवनों, पुलों और सड़कों के निर्माण और विकास का कार्य करता है।
-
(D) RSRTC: यह राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम है, जो राज्य में बस सेवाओं का संचालन करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
राजस्थान में वर्तमान में PDS वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए PoS (Point of Sale) मशीनों और बायोमेट्रिक सत्यापन का उपयोग किया जा रहा है, जिसे RSFCSCL और खाद्य विभाग मिलकर प्रबंधित करते हैं।
136 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (महासागर धारा) | सूची (महासागर) |
| a. हम्बोल्ट धारा | I. उत्तरी अटलांटिक महासागर |
| b. गल्फ धारा | II. दक्षिणी अटलांटिक महासागर |
| c. अगुलहास धारा | III दक्षिणी प्रशांत महासागर |
| d. बेंगुएला धारा | IV. हिन्द महासागर |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-l, b-ll, c-lll. d-IV
(B) a-III, b-1, c-IV, d-II
(C) a-IV. b-III, c-ll, d-l
(D) a-ll, b-IV, c-1, d-III
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर (B) a-III, b-I, c-IV, d-II है।
यहाँ महासागरीय धाराओं और उनके संबंधित महासागरों का सही सुमेल है:
सही मिलान की व्याख्या
| सूची I (महासागर धारा) | सूची II (महासागर) | विवरण |
| a. हम्बोल्ट धारा | III. दक्षिणी प्रशांत महासागर | इसे पेरू धारा भी कहते हैं। यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ बहती है। |
| b. गल्फ धारा | I. उत्तरी अटलांटिक महासागर | यह एक गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर चलती है। |
| c. अगुलहास धारा | IV. हिन्द महासागर | यह अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी तट के साथ बहने वाली एक गर्म जलधारा है। |
| d. बेंगुएला धारा | II. दक्षिणी अटलांटिक महासागर | यह अफ्रीका के पश्चिमी तट के साथ उत्तर की ओर बहने वाली ठंडी धारा है। |
137 सत्य कथन/कथनों का चयन करें:
a. अरूमोलिवर्मन के शासनकाल में चोल शक्ति अपने उत्कर्ष पर पहुंची थी।
b. राजेन्द्र I ने श्रीलंका के राजा महेन्द्र V के विरूद्ध सैन्य विजय प्राप्त की थी।
c. राजेन्द्र I ने गंगईकॉडचोलपुरम में नवीन राजधानी निर्मित की थी।
d. राज राजा -I चोल सम्राज्य का संस्थापक था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a केवल
(B) a, b केवल
(C) a, b, c केवल
(D) d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
कथन (a): अरूमोलिवर्मन (राजराजा I) के शासनकाल में चोल शक्ति का अत्यधिक विस्तार हुआ और वह अपने उत्कर्ष की ओर बढ़ी। राजराजा I को ही अरूमोलिवर्मन के नाम से जाना जाता था।
-
कथन (b): राजेन्द्र I ने श्रीलंका पर पूर्ण विजय प्राप्त की थी और वहां के राजा महेन्द्र V को बंदी बनाया था। (राजराजा I ने उत्तरी श्रीलंका जीता था, जबकि राजेन्द्र I ने पूरे द्वीप पर अधिकार किया)।
-
कथन (c): राजेन्द्र I ने अपनी उत्तर भारतीय विजय (गंगा अभियान) के उपलक्ष्य में ‘गंगईकॉडचोलपुरम’ नामक नवीन राजधानी का निर्माण करवाया था।
-
कथन (d): यह कथन गलत है। चोल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक विजयालय था, न कि राजराजा I।
अतः कथन a, b और c सही हैं।
सही विकल्प है:
(C) a, b, c केवल
138 निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें।
a. भारत में कैबिनेट मिशन का आगमन
b. अंतरिम सरकार का पुनर्गठन
C. प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस
d. वायसराय के रूप में लिनलिथगों के स्थान पर वेवेल का आगमन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) d, c, b, a
(B) a, b, c, d
(C) d, a, b, c
(D) d, a, c, b
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए ऐतिहासिक घटनाक्रम का सही कालक्रम इस प्रकार है:
-
वायसराय के रूप में लिनलिथगो के स्थान पर वेवेल का आगमन (d): लॉर्ड वेवेल अक्टूबर 1943 में भारत के वायसराय बनकर आए थे।
-
भारत में कैबिनेट मिशन का आगमन (a): कैबिनेट मिशन 24 मार्च 1946 को दिल्ली पहुँचा था।
-
प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (c): मुस्लिम लीग द्वारा 16 अगस्त 1946 को ‘Direct Action Day’ (प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस) की घोषणा की गई थी।
-
अंतरिम सरकार का पुनर्गठन (b): जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन 2 सितंबर 1946 को हुआ था, लेकिन इसका पुनर्गठन अक्टूबर 1946 में हुआ जब मुस्लिम लीग भी इसमें शामिल हुई।
कालक्रम का सारांश:
-
(d) लॉर्ड वेवेल का आगमन: 1943
-
(a) कैबिनेट मिशन: मार्च 1946
-
(c) प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस: अगस्त 1946
-
(b) अंतरिम सरकार का पुनर्गठन: अक्टूबर 1946
अतः सही क्रम d, a, c, b है।
सही विकल्प:
(D) d, a, c, b
139 छोटे राजनीतिक दलों की स्थापना को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें।
a. एम.एन. रॉय द्वारा स्थापित रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी
b. बी. आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित इंडीपेन्डेन्ट लेबर पार्टी
c. जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित सोशलिस्ट पार्टी
d. एम. एम. मालवीय द्वारा स्थापित हिन्दू महासभा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) b, d, a, c
(B) c, a, b, a
(C) d, c, b, a
(D) a, b, c, d
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए राजनीतिक दलों की स्थापना का सही कालक्रम नीचे दिया गया है:
-
हिन्दू महासभा (d): मदन मोहन मालवीय और अन्य नेताओं ने इसकी स्थापना 1915 में की थी (हालांकि इसके शुरुआती प्रयास 1906-1909 के बीच भी हुए थे, लेकिन अखिल भारतीय स्वरूप 1915 में आया)।
-
इन्डीपेन्डेन्ट लेबर पार्टी (b): बी. आर. अंबेडकर ने इस दल की स्थापना 1936 में की थी।
-
रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी (a): एम.एन. रॉय ने 1940 में इस पार्टी का गठन किया था।
-
सोशलिस्ट पार्टी (c): जयप्रकाश नारायण, अच्युत पटवर्धन और अन्य ने मिलकर 1948 में सोशलिस्ट पार्टी (स्वतंत्र दल के रूप में) की स्थापना की थी। (नोट: कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी 1934 में बनी थी, लेकिन प्रश्न में केवल सोशलिस्ट पार्टी का संदर्भ 1948 से जुड़ता है)।
तुलनात्मक सारणी
| दल का नाम | संस्थापक | स्थापना वर्ष |
| हिन्दू महासभा | एम. एम. मालवीय | 1915 |
| इन्डीपेन्डेन्ट लेबर पार्टी | बी. आर. अंबेडकर | 1936 |
| रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी | एम.एन. रॉय | 1940 |
| सोशलिस्ट पार्टी | जयप्रकाश नारायण | 1948 |
सही क्रम: d, b, a, c
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प पूरी तरह सटीक मेल नहीं खा रहा है, क्योंकि विकल्प (A) में ‘b’ से शुरुआत है। हालांकि, यदि विकल्पों की बनावट को देखें तो (A) के करीब पहुँचा जा सकता था यदि वहां d पहले होता। लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सही क्रम d, b, a, c ही होगा।
यदि हमें इन विकल्पों में से ही चुनना हो, तो अक्सर इस तरह के प्रश्नों में ‘अनुत्तरित प्रश्न’ (E) या बोनस अंक की स्थिति बनती है। परंतु ऐतिहासिक कालक्रम ऊपर दिया गया है।
140 भारत के निम्नलिखित राष्ट्रपति को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें।
a. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
b. डॉ. सवर्पल्ली राधाकृष्णन
c. डॉ. ज़ाकिर हुसैन
d. वी.वी. गिरी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) b, a, d, c
(B) a, b, c, d
(C) b, c, d, a
(D) a, d. c. b
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही विकल्प: (B) a, b, c, d
भारत के राष्ट्रपतियों का सही कालक्रम उनके कार्यकाल के अनुसार नीचे दिया गया है:
-
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (a): भारत के प्रथम राष्ट्रपति। इनका कार्यकाल 1950 से 1962 तक रहा।
-
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (b): भारत के दूसरे राष्ट्रपति। इनका कार्यकाल 1962 से 1967 तक रहा।
-
डॉ. ज़ाकिर हुसैन (c): भारत के तीसरे राष्ट्रपति। इनका कार्यकाल 1967 से 1969 तक रहा (पद पर रहते हुए इनका निधन हो गया था)।
-
वी.वी. गिरी (d): भारत के चौथे राष्ट्रपति। इनका कार्यकाल 1969 से 1974 तक रहा।
कार्यकाल सारणी
| नाम | कार्यकाल | क्रम |
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद | 1950 – 1962 | प्रथम |
| डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन | 1962 – 1967 | द्वितीय |
| डॉ. ज़ाकिर हुसैन | 1967 – 1969 | तृतीय |
| वी.वी. गिरी | 1969 – 1974 | चतुर्थ |
सही क्रम: a, b, c, d
सही विकल्प: (B) a, b, c, d
141 निम्नलिखित में से कौनसी डाल्टन योजना की सीमा नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) औसत बालक और कत्र्तव्य त्यागी के लिए अर्चित नहीं।
B) प्रत्येक बालक को अपनी गति से कार्य करने की अनुमति होती है।
(C) विशुद्ध बौद्धिक योजना।
(D) योजना अत्यंत महंगी है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
डाल्टन योजना (Dalton Plan) की सीमाओं और विशेषताओं के आधार पर सही विश्लेषण नीचे दिया गया है:
डाल्टन योजना की मुख्य सीमाएँ (Demerits) यह हैं कि यह एक विशुद्ध बौद्धिक योजना है, यह काफी महंगी है (पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं की आवश्यकता के कारण), और यह उन छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं है जो औसत बुद्धि के हैं या काम से जी चुराते हैं (कत्र्तव्य त्यागी)।
विकल्पों का विश्लेषण:
-
(A) औसत बालक और कत्र्तव्य त्यागी के लिए अर्चित नहीं: यह एक सीमा है।
-
(B) प्रत्येक बालक को अपनी गति से कार्य करने की अनुमति होती है: यह डाल्टन योजना की एक प्रमुख विशेषता या गुण (Merit) है, न कि सीमा। डाल्टन योजना ‘स्व-गति’ (Self-pacing) के सिद्धांत पर आधारित है।
-
(C) विशुद्ध बौद्धिक योजना: यह एक सीमा मानी जाती है क्योंकि यह सामाजिक और शारीरिक विकास पर कम ध्यान देती है।
-
(D) योजना अत्यंत महंगी है: यह भी एक व्यावहारिक सीमा है।
अतः, विकल्प (B) इस योजना की सीमा नहीं है, बल्कि इसका एक सकारात्मक पक्ष है।
सही विकल्प:
(B) प्रत्येक बालक को अपनी गति से कार्य करने की अनुमति होती है।
142 सामाजिक अध्ययन शिक्षण रणनीतियों से संबंधित मुद्दे क्या हैं?
a. समुचित शिक्षण युक्तियों का चयन
b. डाटा का संकलन
c. समुचित सम्प्रेषण रणनीतियों का चयन
d. समुचित अनुदेशन सहायिकियों का चयन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c केवल
(B) a, c, d केवल
(C) b, c, d केवल
(D) a, b, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सामाजिक अध्ययन शिक्षण (Social Studies Teaching) में रणनीतियों का चयन करते समय शिक्षक को कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहलुओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
दिए गए कथनों का विश्लेषण:
-
a. समुचित शिक्षण युक्तियों का चयन: यह एक मुख्य मुद्दा है क्योंकि सामाजिक अध्ययन की प्रकृति विविधतापूर्ण होती है। सही शिक्षण विधि (जैसे कहानी कथन, परियोजना, या समस्या समाधान) का चुनाव करना छात्र की समझ के लिए अनिवार्य है।
-
b. डाटा का संकलन: हालांकि डेटा संकलन शोध का हिस्सा है, लेकिन इसे सामान्यतः शिक्षण ‘रणनीति’ (Strategy) के प्रमुख मुद्दों में नहीं गिना जाता। यह सामग्री तैयार करने का एक चरण हो सकता है, लेकिन शिक्षण प्रक्रिया की सक्रिय रणनीति नहीं।
-
c. समुचित सम्प्रेषण रणनीतियों का चयन: प्रभावी शिक्षण के लिए संवाद और सम्प्रेषण (Communication) बहुत महत्वपूर्ण है। शिक्षक को यह तय करना होता है कि सूचनाओं का आदान-प्रदान कैसे किया जाए ताकि छात्र रुचि लें।
-
d. समुचित अनुदेशन सहायिकियों का चयन: शिक्षण-अधिगम सामग्री (Instructional Aids) जैसे मानचित्र, चार्ट, मॉडल और डिजिटल टूल्स का सही चयन शिक्षण को प्रभावी और जीवंत बनाता है। यह रणनीति का एक अभिन्न हिस्सा है।
निष्कर्ष:
कथन a, c, और d सीधे तौर पर शिक्षण रणनीतियों और उनके क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दे हैं।
सही विकल्प: (B) a, c, d केवल
143 मौखिक परीक्षणों की सीमाएं क्या हैं ?
a. यह समय अधिक लेती है।
b. यह व्यक्तिगत परीक्षण के लिए प्रयुक्त हो सकती है।
c. यह आत्मनिष्ठ हो सकती है।
d. यह गहन परीक्षण का अवसर प्रदान करती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b केवल
(B) b, c केवल
(C) a, c केवल
(D) a, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
मौखिक परीक्षणों (Oral Tests) की सीमाओं (Limitations) का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
-
a. यह समय अधिक लेती है: यह एक प्रमुख सीमा है। चूँकि शिक्षक को प्रत्येक छात्र से व्यक्तिगत रूप से प्रश्न पूछने होते हैं, इसलिए इसमें लिखित परीक्षा की तुलना में बहुत अधिक समय लगता है।
-
b. यह व्यक्तिगत परीक्षण के लिए प्रयुक्त हो सकती है: यह मौखिक परीक्षण की एक विशेषता या गुण (Merit) है, सीमा नहीं। इसके माध्यम से छात्र के व्यक्तिगत गुणों और अभिव्यक्ति का आकलन किया जा सकता है।
-
c. यह आत्मनिष्ठ (Subjective) हो सकती है: यह एक गंभीर सीमा है। मौखिक परीक्षा में परीक्षक का व्यक्तिगत पक्षपात, छात्र के प्रति धारणा या उस समय का मूड अंकों को प्रभावित कर सकता है, जिससे वस्तुनिष्ठता की कमी हो जाती है।
-
d. यह गहन परीक्षण का अवसर प्रदान करती है: यह भी एक गुण (Merit) है। मौखिक रूप से शिक्षक छात्र के ज्ञान की गहराई को समझने के लिए पूरक प्रश्न पूछ सकता है।
निष्कर्ष:
दिए गए विकल्पों में से केवल a और c ही मौखिक परीक्षण की ‘सीमाएं’ या ‘दोष’ हैं।
सही विकल्प:
(C) a, c केवल
144 सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विधियां कौनसी हैं?
a. नियत कार्य विधि
b. कहानी कथन विधि
c. डाल्टन योजना
d. पृथक् कक्षा दोहरान विधि
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a, b, c केवल
(B) b, c, d केवल
(C) a, b, d केवल
(D) a, c, d केवल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सामाजिक विज्ञान (Social Science) के शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिक और प्रयोगात्मक विधियों का उपयोग किया जाता है। दिए गए विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
a. नियत कार्य विधि (Assignment Method): यह विधि सामाजिक विज्ञान में बहुत प्रचलित है। इसमें छात्रों को विशिष्ट कार्य (जैसे किसी ऐतिहासिक स्थल पर रिपोर्ट तैयार करना या मानचित्र कार्य) सौंपे जाते हैं, जिससे उनमें स्वाध्याय की आदत विकसित होती है।
-
b. कहानी कथन विधि (Storytelling Method): इतिहास और नागरिक शास्त्र जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए यह सबसे प्राचीन और प्रभावी विधि है। यह छात्रों की कल्पनाशीलता को बढ़ाती है और तथ्यों को रोचक बनाती है।
-
c. डाल्टन योजना (Dalton Plan): हेलन पार्कहर्स्ट द्वारा विकसित यह विधि ‘प्रयोगशाला विधि’ पर आधारित है। सामाजिक विज्ञान के संदर्भ में, छात्र एक ‘सोशल साइंस लैब’ में अपनी गति से कार्य करते हैं, जिससे यह एक आधुनिक शिक्षण विधि मानी जाती है।
-
d. पृथक् कक्षा दोहरान विधि (Separate Class Revision Method): शिक्षण शास्त्र (Pedagogy) के अंतर्गत इसे एक मानक ‘शिक्षण विधि’ के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। यह केवल परीक्षा की तैयारी या पुनरावृत्ति का एक सामान्य तरीका हो सकता है, लेकिन यह सामाजिक विज्ञान शिक्षण की कोई मौलिक रणनीति नहीं है।
निष्कर्ष:
कथन a, b और c सामाजिक विज्ञान शिक्षण की स्थापित और महत्वपूर्ण विधियाँ हैं।
सही विकल्प: (A) a, b, c केवल
145 निम्नलिखित में से कौनसा नैदानिक परीक्षणों का उद्देश्य नहीं है?
(निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) विशिष्ट अधिगम कमियों की पहचान करना
(B) अनुदेशनं कठिनाईयों का आंकलन करना
(C) योग्यता का मापन करना
(D) कम उपलब्धि के कारणों और कमजोरियों को चिह्नांकित करना
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शिक्षा शास्त्र (Pedagogy) के अंतर्गत नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Test) का मुख्य उद्देश्य छात्र की सीखने संबंधी समस्याओं को गहराई से समझना और उनका समाधान करना होता है।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(A) विशिष्ट अधिगम कमियों की पहचान करना: यह नैदानिक परीक्षण का प्राथमिक उद्देश्य है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि छात्र विषय के किस विशिष्ट भाग को नहीं समझ पा रहा है।
-
(B) अनुदेशन कठिनाइयों का आंकलन करना: यह भी एक उद्देश्य है। शिक्षक इसके माध्यम से यह जान पाता है कि उसकी शिक्षण विधि (Instructional methods) छात्र के लिए कितनी प्रभावी है और कहाँ सुधार की आवश्यकता है।
-
(C) योग्यता का मापन करना: यह नैदानिक परीक्षण का उद्देश्य नहीं है। योग्यता का मापन (Measuring Aptitude or Proficiency) सामान्यतः ‘उपलब्धि परीक्षण’ (Achievement Test) या ‘प्रवीणता परीक्षण’ (Proficiency Test) के माध्यम से किया जाता है। निदान का काम केवल कमियों को ढूंढना है, न कि रैंक देना या योग्यता मापना।
-
(D) कम उपलब्धि के कारणों और कमजोरियों को चिह्नांकित करना: यह नैदानिक परीक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है, ताकि उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) प्रदान किया जा सके।
निष्कर्ष:
चूंकि विकल्प (C) उपलब्धि या योग्यता के स्तर को मापने से संबंधित है, यह नैदानिक परीक्षण की श्रेणी में नहीं आता।
सही विकल्प:
(C) योग्यता का मापन करना
नैदानिक और उपचारात्मक शिक्षण का चक्र
नैदानिक परीक्षण हमेशा उपचारात्मक शिक्षण का आधार बनता है। इसे आप इस प्रक्रिया से समझ सकते हैं:
146 अंतिम/अंत्य व्यवहार ……. का दूसरा नाम है।
(A) व्यवहारमूलक उद्देश्य
(B) व्यवहारमूलक कथन/विवरण
(C) व्यवहारमूलक परिकल्पना
(D) व्यवहारमूलक अनुदेश
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शिक्षा शास्त्र और अनुदेशात्मक तकनीकी (Instructional Technology) के अंतर्गत, अंतिम व्यवहार (Terminal Behavior) का संबंध उस अपेक्षित परिवर्तन से है जो शिक्षण प्रक्रिया के अंत में छात्र में दिखाई देता है।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण:
-
अंतिम व्यवहार (Terminal Behavior): यह वह व्यवहार है जो एक शिक्षार्थी किसी निर्देश या शिक्षण सत्र के पूरा होने के बाद प्रदर्शित करने में सक्षम होता है।
-
व्यवहारमूलक उद्देश्य (Behavioral Objectives): आर.एफ. मेगर (Robert Mager) के अनुसार, शैक्षिक उद्देश्यों को जब मापने योग्य और स्पष्ट व्यवहार के रूप में लिखा जाता है, तो उन्हें ‘व्यवहारमूलक उद्देश्य’ कहा जाता है। चूंकि ये उद्देश्य बताते हैं कि अंत में छात्र क्या करने योग्य हो जाएगा, इसलिए ‘अंतिम व्यवहार’ को व्यवहारमूलक उद्देश्य का ही दूसरा नाम माना जाता है।
निष्कर्ष:
शिक्षण के अंत में प्राप्त होने वाले व्यवहार को ही ‘व्यवहारमूलक उद्देश्य’ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
सही विकल्प:
(A) व्यवहारमूलक उद्देश्य
शिक्षण उद्देश्यों के वर्गीकरण का क्रम
147 नवीन अंतिम/अंत्य व्यवहारों को अर्जित करने से पूर्व विद्यार्थी द्वारा अर्जित किए जाने वाले व्यवहारों को क्या कहा जाता है?
(निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)।
(A) मनोवृत्ति
(B) प्रवेशन/ आरंभिक व्यवहार
(C) अभिवृत्ति
(D) अभिप्रेरणा
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शिक्षा शास्त्र और अनुदेशात्मक तकनीकी (Instructional Technology) में अधिगम प्रक्रिया को दो मुख्य व्यवहारों के बीच की कड़ी माना जाता है: आरंभिक व्यवहार और अंतिम व्यवहार।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
प्रवेशन/आरंभिक व्यवहार (Entry/Entering Behavior): यह उन कौशलों, ज्ञान और क्षमताओं को दर्शाता है जो एक विद्यार्थी किसी नई शिक्षण इकाई या पाठ को शुरू करने से पहले से जानता है। नवीन ‘अंतिम व्यवहारों’ को सीखने के लिए इन पूर्व-अर्जित व्यवहारों का होना आवश्यक है। इसे ‘पूर्व ज्ञान’ भी कहा जाता है।
-
अंतिम व्यवहार (Terminal Behavior): यह वह व्यवहार है जो विद्यार्थी शिक्षण प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद प्राप्त करता है (जैसा कि आपने पिछले प्रश्न में पूछा था)।
-
मनोवृत्ति (Attitude) और अभिवृत्ति (Aptitude): ये मानसिक प्रवृत्तियों और क्षमताओं से संबंधित हैं, न कि अर्जित व्यवहार के विशिष्ट क्रम से।
-
अभिप्रेरणा (Motivation): यह सीखने की इच्छा पैदा करने वाला आंतरिक या बाह्य बल है।
निष्कर्ष:
किसी भी नए अधिगम को शुरू करने के लिए जो आधारभूत व्यवहार विद्यार्थी के पास पहले से होते हैं, उन्हें ‘प्रवेशन व्यवहार’ या ‘आरंभिक व्यवहार’ कहा जाता है।
सही विकल्प:
(B) प्रवेशन/ आरंभिक व्यवहार
148 नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;
अभिकथन A: स्टोलुरोव के अनुसार, प्रभावी शिक्षण और अधिगम के लिए अनुदेशन प्रयोजनों में विषयवस्तु, अंतिम लब्धि का न्यूनतम स्तर और अधिकतम समय मात्रा सम्मिलित होने चाहिए।
कारण R: अभिवृत्ति स्तर जैसे प्रवेशन/आरंभिक व्यवहार और पूर्ववर्ती प्रासंगिक ज्ञान भी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए –
(A) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(D) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
दिए गए अभिकथन और कारण का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अभिकथन (A): लॉरेंस स्टोलुरोव (Stolurow) के अनुसार, अनुदेशन (Instruction) की योजना बनाते समय विषयवस्तु का स्वरूप, छात्र द्वारा प्राप्त की जाने वाली अंतिम लब्धि (Terminal behavior) का स्तर और समय की सीमा का निर्धारण करना आवश्यक है। यह कथन शिक्षण-अधिगम की रणनीतिक योजना के संबंध में पूर्णतः सही है।
-
कारण (R): यह सर्वविदित तथ्य है कि प्रवेशन व्यवहार (Entry Behavior), जिसमें छात्र की अभिवृत्ति और उसका पूर्व ज्ञान सम्मिलित होता है, अधिगम की प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करता है। यदि छात्र का आधार (Base) मजबूत नहीं है, तो प्रभावी शिक्षण संभव नहीं है। यह कथन भी स्वतंत्र रूप से सही है।
व्याख्या का विश्लेषण: यहाँ अभिकथन (A) अनुदेशन के उद्देश्यों और घटकों (Content, Mastery, Time) की बात कर रहा है, जबकि कारण (R) छात्र की पूर्व तैयारी और प्रवेशन व्यवहार की बात कर रहा है। यद्यपि ये दोनों शिक्षण प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) में वर्णित स्टोलुरोव के विशिष्ट घटकों (न्यूनतम स्तर और समय मात्रा) का तार्किक आधार या ‘व्याख्या’ नहीं प्रस्तुत करता।
अतः, दोनों कथन व्यक्तिगत रूप से सही हैं, लेकिन उनके बीच ‘कार्य-कारण’ का सीधा संबंध नहीं है।
सही विकल्प: (B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
149 सूची 1 को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (बाल विकास की विधियां) | सूची II (समुचित व्याख्या) |
| a. संरचनात्मक प्रेक्षण | 1. शरीरक्रियात्मक प्रक्रिया और व्यवहार के बीच संबंध मापन की विधि |
| b. नैदानिक साक्षात्कार | II. किसी प्रयोगशाला में व्यवहार का प्रेक्षण, जहां सभी प्रतिभागियों के लिए शर्ते/दशाएं समान होती हैं। |
| c. मनोशरीरक्रियात्मक विधि | III. सुनम्य साक्षात्कार प्रक्रिया जिसमें अन्वेषक प्रतिभागी के विचारों की पूर्ण जानकारी प्राप्त करता है। |
| d. नृजातिवर्णन | IV. सघन जमीनी भ्रमण से प्रतिभागियों द्वारा संस्कृति प्रेक्षण करना, शोधकर्ता संस्कृति के विशिष्ट मूल्यों और सामाजिक प्रक्रियाओं को परिलक्षित करने का प्रयास करता है। |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
(A) a-l, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-III, c-I, d-IV
(C) a-IV, b-III, c-I, d-I
(D) a-III, b-IV, c-l, d-II
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सूची I (बाल विकास की विधियां) और सूची II (व्याख्या) का सही मिलान इस प्रकार है:
-
a. संरचनात्मक प्रेक्षण (Structured Observation): इसमें किसी प्रयोगशाला या नियंत्रित वातावरण में व्यवहार का प्रेक्षण किया जाता है, जहाँ सभी प्रतिभागियों के लिए परिस्थितियाँ एक समान रखी जाती हैं। अतः (a) का मिलान (II) से होगा।
-
b. नैदानिक साक्षात्कार (Clinical Interview): यह एक लचीली या सुनम्य प्रक्रिया है जिसमें साक्षात्कारकर्ता प्रतिभागी के विचारों और दृष्टिकोणों की गहराई से जानकारी प्राप्त करता है। अतः (b) का मिलान (III) से होगा।
-
c. मनोशरीरक्रियात्मक विधि (Psychophysiological Method): यह विधि शारीरिक प्रतिक्रियाओं (जैसे हृदय गति, मस्तिष्क की तरंगें) और मनोवैज्ञानिक व्यवहार के बीच के संबंधों को मापती है। अतः (c) का मिलान (I) से होगा।
-
d. नृजातिवर्णन (Ethnography): इसमें शोधकर्ता किसी विशिष्ट संस्कृति या समूह के बीच रहकर (सघन जमीनी भ्रमण) उनके मूल्यों और सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। अतः (d) का मिलान (IV) से होगा।
सही मिलान सारणी
| सूची I (विधि) | सूची II (व्याख्या) |
| a. संरचनात्मक प्रेक्षण | II. प्रयोगशाला में समान परिस्थितियों में प्रेक्षण |
| b. नैदानिक साक्षात्कार | III. विचारों की जानकारी हेतु सुनम्य प्रक्रिया |
| c. मनोशरीरक्रियात्मक विधि | I. शारीरिक प्रक्रिया और व्यवहार का मापन |
| d. नृजातिवर्णन | IV. संस्कृति का सघन सहभागी प्रेक्षण |
सही विकल्प : (B) a-II, b-III, c-I, d-IV
150 सूची I को सूची II से सुमेलित करे –
| सूची I (शोध अभिकल्पना) | सूची II (बाल विकास में प्रयुक्त इसकी शक्ति) |
| a. सह-संबंध अभिकल्पना | I. कारण और प्रभाव संबंध के बारे में निष्कर्ष की अनुमति देता है। |
| b. प्रयोगशाला अनुप्रयोग | II. चरों के बीच संबंधों के अध्ययन की अनुमति देता है। |
| c. क्षेत्र अनुप्रयोग | III. वास्तविक जगत दशाओं के अध्ययन की अनुमति देता है, जिन्हें प्रयोगात्मक रूप से बदला नहीं जा सकता है। |
| d. प्राकृतिक अथवा अर्ध-अनुप्रयोग | IV. प्रयोगात्मक निष्कर्षों को वास्तविक जगत/विश्व को साथ सामान्यीकरण की अनुमति देता है। |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(A) a-I, b-II, c-III, d-IV
(B) a-II, b-lll, c-I, d-IV
(C) a-II, b-1, c-IV, d-III
(D) a-II, b-1, c-III, d-IV
(E) अनुत्तरित प्रश्न
शोध अभिकल्पना (Research Design) और उनकी शक्तियों का सही मिलान नीचे दिया गया है:
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a. सह-संबंध अभिकल्पना (Correlational Design): यह अभिकल्पना शोधकर्ता को दो या दो से अधिक चरों (Variables) के बीच संबंधों की प्रकृति और तीव्रता को समझने में मदद करती है। अतः (a) का मिलान (II) से होगा।
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b. प्रयोगशाला अनुप्रयोग (Laboratory Experiment): प्रयोगशाला में चरों पर पूर्ण नियंत्रण होता है, जिससे शोधकर्ता यह स्पष्ट कर पाता है कि एक चर का दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। यह ‘कारण और प्रभाव’ (Cause and Effect) निष्कर्ष निकालने की अनुमति देता है। अतः (b) का मिलान (I) से होगा।
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c. क्षेत्र अनुप्रयोग (Field Experiment): जब प्रयोगशाला के निष्कर्षों को वास्तविक दुनिया (Real world) की परिस्थितियों में परखा जाता है, तो इससे शोध के परिणामों का ‘सामान्यीकरण’ (Generalization) बढ़ जाता है। अतः (c) का मिलान (IV) से होगा।
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d. प्राकृतिक अथवा अर्ध-अनुप्रयोग (Natural or Quasi-Experiment): यह उन परिस्थितियों के अध्ययन के लिए उपयोग किया जाता है जहाँ शोधकर्ता चरों में हेरफेर नहीं कर सकता (जैसे प्राकृतिक आपदाएँ या पहले से बने समूह), लेकिन वास्तविक जगत की दशाओं का अध्ययन आवश्यक होता है। अतः (d) का मिलान (III) से होगा।
सही मिलान सारणी
| सूची I (शोध अभिकल्पना) | सूची II (शक्ति) |
| a. सह-संबंध अभिकल्पना | II. चरों के बीच संबंधों के अध्ययन की अनुमति |
| b. प्रयोगशाला अनुप्रयोग | I. कारण और प्रभाव संबंध का निष्कर्ष |
| c. क्षेत्र अनुप्रयोग | IV. वास्तविक जगत के साथ सामान्यीकरण |
| d. प्राकृतिक/अर्ध-अनुप्रयोग | III. वास्तविक जगत दशाओं का अध्ययन |
सही विकल्प:
(C) a-II, b-I, c-IV, d-III