REET Level – 01 Mock Test – 01
1. यदि कलकत्ता में जो 83° पूर्वी वेशांतर पर स्थित है, सूर्योक्य का समय 6.00 A.M. है तो अजमेर में जो 74° पूर्वी वेशांतर पर स्थित है, सूर्योदय का समय होगा –
यह प्रश्न स्थानीय समय (Local Time) और देशांतर (Longitude) के बीच के संबंध पर आधारित है।
यहाँ गणना के चरण दिए गए हैं:
1. देशांतर में अंतर ज्ञात करना
कलकत्ता का देशांतर: 83० पूर्व
अजमेर का देशांतर: 74० पूर्व
देशांतर में अंतर = 83० – 74० = 9०
2. समय में अंतर ज्ञात करना
हम जानते हैं कि पृथ्वी 1० देशांतर घूमने में 4 मिनट का समय लेती है।
समय में अंतर देशांतर में अंतर x 4 मिनट/डिग्री
समय में अंतर = 9० x 4 मिनट = 36 मिनट
3. अजमेर में सूर्योदय का समय ज्ञात करना
चूँकि अजमेर कलकत्ता की तुलना में पश्चिम 74० पूर्व 83० पूर्व) में स्थित है, इसलिए अजमेर में सूर्योदय बाद में होगा।
💡 नियम: जब हम पूर्व से पश्चिम की ओर जाते हैं, तो स्थानीय समय घटता जाता है (यानी, एक ही घटना बाद में होती है) और जब हम पश्चिम से पूर्व की ओर जाते हैं, तो स्थानीय समय बढ़ता जाता है (यानी, एक ही घटना पहले होती है)।
कलकत्ता में सूर्योदय का समय = 6:00 A.M.
अजमेर में सूर्योदय का समय = कलकत्ता का समय + समय में अंतर
अजमेर में सूर्योदय का समय = 6:00 A.M. + 36 मिनट
अजमेर में सूर्योदय का समय = 6:36A.M.
✅ उत्तर
अजमेर में सूर्योदय का समय 6:36 A.M. होगा।
इसलिए, सही विकल्प है (c)।
2. राजस्थान के किस क्षेत्र में अनुप्रस्थ बालुका स्तूप मिलते है?
राजस्थान में अनुप्रस्थ बालुका स्तूप (Transverse Dunes) मुख्य रूप से पवन की दिशा के समकोण पर या आड़ी दिशा में निर्मित होते हैं।
इनकी उपस्थिति का प्रमुख क्षेत्र है:
(a) बीकानेर जिले में पुंगल (पूगल) के चारों ओर
🏜️ अनुप्रस्थ बालुका स्तूप के बारे में
-
निर्माण: ये बालुका स्तूप मुख्य रूप से स्थिर पवन दिशा और पवन के समकोण पर विस्तारित होते हैं।
-
आकार: ये चौड़े और कम ऊँचाई वाले होते हैं।
-
उपस्थिति: ये आमतौर पर मरुस्थल के पूर्वी भाग और पवनमार्ग में रुकावट वाले स्थानों पर अधिक पाए जाते हैं।
-
राजस्थान में स्थान: राजस्थान में ये बीकानेर के पूगल क्षेत्र के आस-पास, गंगानगर के उत्तरी भाग और चूरू-झुंझुनू जिले के कुछ भागों में पाए जाते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण
-
(b) लूनी बेसिन के पश्चिमी भाग में: इस क्षेत्र में मुख्य रूप से बरखान (Barchan) और पैराबोलिक (Parabolic) बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
-
(c) जैसलमेर जिले के रामगढ़ में: यह क्षेत्र मुख्य रूप से अनुदैर्ध्य (Longitudinal) बालुका स्तूपों या सीफ (Seif) प्रकार के स्तूपों के लिए जाना जाता है।
-
(d) अजमेर जिले के पुष्कर के चारों ओर: पुष्कर क्षेत्र अरावली और अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित है, जहाँ बालुका स्तूप लगभग न के बराबर या बहुत छोटे होते हैं।
3. अरावली की पर्वत चोटियों को उनकी ऊँचाई के अनुसार अवरोही क्रम में चयनित कीजिए-
अरावली की पर्वत चोटियों की ऊँचाई के अनुसार अवरोही क्रम (Descending Order – सबसे ऊँची से सबसे नीची) में सही चयन करने के लिए, हमें उनकी ऊँचाइयों की जानकारी होनी चाहिए:
| चोटी का नाम | ऊँचाई (मीटर में) | स्थान |
| सेर (Ser) | 1597 | सिरोही |
| जरगा (Jaraga) | 1431 | उदयपुर |
| अचलगढ़ (Achalgarh) | 1380 | सिरोही |
| रघुनाथगढ़ (Raghunathgarh) | 1055 | सीकर |
| तारागढ़ (Taragarh) | 873 | अजमेर |
⛰️ अवरोही क्रम (ऊँचाई के घटते क्रम में)
ऊपर दी गई ऊँचाइयों के आधार पर, अवरोही क्रम (सबसे ऊँची से सबसे नीची) इस प्रकार है:
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सेर (1597 मी.)
-
जरगा (1431 मी.)
-
अचलगढ़ (1380 मी.)
-
रघुनाथगढ़ (1055 मी.)
-
तारागढ़ (873 मी.)
✅ सही विकल्प
यह क्रम विकल्प (a) से मेल खाता है:
(a) सेर – जरगा – अचलगढ़ – रघुनाथगढ़ – तारागढ़
4. सही कथनों का चयन नीचे दिए गए कूट से कीजिये-
दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
1. कथनों का विश्लेषण
| क्र.सं. | कथन | सत्यता | स्पष्टीकरण |
| (i) | लसाड़िया पठार जयसमंद झील के पूर्व में स्थित है। | सत्य (True) | यह उदयपुर में जयसमंद झील के पूर्वी भाग में स्थित एक कटा-फटा और विच्छेदित (Dissected) पठार है। |
| (ii) | नाग पहाड़ मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर है। | असत्य (False) | मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर तारागढ़ (873 मी.) या गौरमजी/मोरायमजी (934 मी.) है। नाग पहाड़ की ऊँचाई लगभग 795 मी. है, और यह केवल अजमेर के निकट एक महत्वपूर्ण चोटी है। |
| (iii) | छप्पन का मैदान प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा जिलों के मध्य स्थित है। | सत्य (True) | यह मैदान माही नदी बेसिन में प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा जिलों के बीच के भाग में 56 गाँवों या नदी नालों के समूह को संदर्भित करता है। |
| (iv) | शिवपुर घाट एवं बर अरावली के दर्रे हैं। | सत्य (True) | शिवपुर घाट (मध्य अरावली) और बर दर्रा (मध्य अरावली – ब्यावर के पास) दोनों ही अरावली पर्वतमाला के महत्वपूर्ण दर्रे (Passes) या नाल हैं, जो यातायात के लिए मार्ग प्रदान करते हैं। |
2. सही कूट का चयन
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर, कथन (i), (iii) और (iv) सही हैं।
✅ उत्तर
सही कूट है (c) केवल i, iii व iv।
5. निम्नलिखित में से कौन से जिलों का समूह सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है ?
राजस्थान में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाले जिलों का समूह है:
(a) झालावाड़ तथा बाँसवाड़ा
🌧️ वर्षा के वितरण की प्रमुखता
-
झालावाड़: यह राजस्थान में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा (लगभग 100 सेमी से अधिक) प्राप्त करने वाला जिला है। इसे राजस्थान का “अति-आर्द्र” जिला भी कहा जाता है।
-
बाँसवाड़ा: यह जिला भी दक्षिणी राजस्थान में स्थित है और इसे “मानसूनी हवाओं का प्रवेश द्वार” कहा जाता है। यह क्षेत्र भी उच्च औसत वार्षिक वर्षा (लगभग 90 सेमी से अधिक) प्राप्त करता है।
इन दोनों जिलों की भौगोलिक स्थिति (अरावली का दक्षिणी-पूर्वी हिस्सा) और बंगाल की खाड़ी के मानसून से सीधी निकटता इन्हें अन्य विकल्पों की तुलना में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला समूह बनाती है।
6. बीकानेर शहर किस प्रकार की जलवायु प्रदेश का प्रतिनिधि शहर है-
बीकानेर शहर कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार BWhw प्रकार के जलवायु प्रदेश का प्रतिनिधि शहर है।
🏜️ कोपेन का जलवायु वर्गीकरण और बीकानेर
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान को मुख्य रूप से चार जलवायु प्रदेशों में बाँटा गया है:
| कोड | जलवायु का प्रकार | प्रतिनिधि क्षेत्र |
| BWhw | उष्णकटिबंधीय शुष्क मरुस्थलीय जलवायु (Hot Desert Climate) | पश्चिमी राजस्थान – जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, पश्चिमी जोधपुर। |
| BShw | अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु (Semi-Arid Steppe Climate) | अरावली के पश्चिम का अर्ध-शुष्क क्षेत्र – नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनू। |
| Cwg | उप-आर्द्र जलवायु (Sub-Humid Climate) | पूर्वी मैदानी भाग – जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर। |
| Aw | उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु (Tropical Humid Climate) | दक्षिणी-पूर्वी भाग – बाँसवाड़ा, झालावाड़, डूंगरपुर। |
📈 BWhw की विशेषताएँ
-
B – शुष्क जलवायु (Arid Climate)
-
W – मरुस्थलीय (Desert)
-
h – औसत वार्षिक तापमान $18^{\circ}\text{C}$ से अधिक (अर्थात गर्म)
-
w – शीत ऋतु शुष्क (Winter Dry)
चूँकि बीकानेर राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित है और यहाँ अत्यंत न्यून वर्षा तथा उच्च दैनिक और वार्षिक तापांतर के साथ गर्म मरुस्थलीय स्थितियाँ पाई जाती हैं, इसलिए यह BWhw जलवायु का प्रतिनिधित्व करता है।
7. नदी-सहायक नदी को सुमेलित कीजिए –
| सूची-1 | सूची-2 |
| (A) लूनी | (i) वाकल |
| (B) माही | (ii) परवन |
|
(C) साबरमती
|
(iii) जवाई |
| (D) काली सिंध | (iv) सोम |
यह प्रश्न नदी और उसकी सहायक नदी के सही मिलान पर आधारित है।
सही सुमेलित युग्म इस प्रकार है:
| सूची-1 (नदी) | सूची-2 (सहायक नदी) |
| (A) लूनी | (iii) जवाई |
| (B) माही | (iv) सोम |
| (C) साबरमती | (i) वाकल |
| (D) काली सिंध | (ii) परवन |
8. पुष्कर झील को स्वच्छ रखने की योजना में सहयोग दे रहा है-
(a) जापान
पुष्कर झील को स्वच्छ रखने की योजना में सहयोग दे रहा है कनाडा।
यह योजना “कनाडा के सहयोग से संचालित पुष्कर सरोवर विकास परियोजना” के नाम से चलाई गई थी।
| सूची – 1 (बाँध) | सूची-2 (सम्बन्धित जिला) |
| (A) गागरोन | (i) बूँदी |
| (B) गरदड़ा | (ii) सिरोही |
| (C) मोरा सागर | (iii) सवाई माधोपुर |
| (D) ओराटैंक | (iv) झालावाड़ |
दिए गए बाँधों को उनके संबंधित जिलों के साथ सही ढंग से सुमेलित करने पर सही कूट प्राप्त होता है:
| सूची – 1 (बाँध) | सूची – 2 (संबंधित जिला) |
| (A) गागरोन | (iv) झालावाड़ |
| (B) गरदड़ा | (i) बूँदी |
| (C) मोरा सागर | (iii) सवाई माधोपुर |
| (D) ओराटैंक | (ii) सिरोही |
✅ सही कूट
यह सुमेलन विकल्प (a) से मेल खाता है:
(a) A (iv) B (i) C (iii) D (ii)
| लिफ्ट परियोजना | पीने के पानी की आपूर्ति |
| (A) कंवर सेन लिफ्ट नहर | (i) नागौर को |
| (B) गंधेली-साहवा लिफ्ट परियोजना | (ii) जोधपुर को |
| (C) राजीव गाँधी लिफ्ट नहर | (iii) चूरू को |
| (D) गजनेर लिफ्ट परियोजना | (iv) बीकानेर को |
दिए गए लिफ्ट परियोजनाओं और उनके द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति किए जाने वाले जिलों का सही सुमेलन इस प्रकार है:
💧 लिफ्ट परियोजना और आपूर्ति जिले
| सूची-1 (लिफ्ट परियोजना) | सूची-2 (पीने के पानी की आपूर्ति) |
| (A) कंवर सेन लिफ्ट नहर (पुरानी नाम: लूणकरणसर लिफ्ट नहर) | (iv) बीकानेर को (एवं गंगानगर) |
| (B) गंधेली-साहवा लिफ्ट परियोजना (वर्तमान नाम: चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट नहर) | (iii) चूरू को (एवं हनुमानगढ़) |
| (C) राजीव गाँधी लिफ्ट नहर (पुरानी नाम: फलौदी लिफ्ट नहर) | (ii) जोधपुर को |
| (D) गजनेर लिफ्ट परियोजना (पुरानी नाम: पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर) | (i) नागौर को (एवं बीकानेर) |
✅ सही कूट
उपरोक्त मिलान के अनुसार, सही कूट है:
-
A – (iv)
-
B – (iii)
-
C – (ii)
-
D – (i)
यह क्रम विकल्प (c) से मेल खाता है।
(c) A (iv) B (iii) C (ii) D (i)
11. राष्ट्रीय वन नीति, वर्ष 1952 (संशोधित 1988) के अनुसार कुल भू-भाग का वन क्षेत्र होना चाहिए –
राष्ट्रीय वन नीति, वर्ष 1952 (जिसे 1988 में संशोधित किया गया) के अनुसार, देश के कुल भू-भाग का लगभग 33% क्षेत्र वन (Forest Area) के अंतर्गत होना चाहिए।
🌲 राष्ट्रीय वन नीति (1952 और 1988) के लक्ष्य
राष्ट्रीय वन नीति का मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। इस नीति में भूमि के विभिन्न स्वरूपों के लिए वन क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया था:
-
देश का कुल भू-भाग: लगभग 33% वन आच्छादित होना चाहिए।
-
पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र: पारिस्थितिक स्थिरता बनाए रखने के लिए, इन क्षेत्रों में कम से कम 65% भू-भाग वन आच्छादित होना चाहिए।
-
मैदानी क्षेत्र: इन क्षेत्रों में कम से कम 20% भू-भाग वन आच्छादित होना चाहिए।
इसलिए, सही विकल्प है (a) लगभग 33%।
12. ‘सालर’ के वन वितरित है-
‘सालर’ (Sal) के वन मुख्य रूप से उदयपुर, सिरोही, अलवर, चित्तौड़गढ़ और अजमेर जिलों के पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में वितरित हैं।
🌳 सालर वनों का वितरण
सालर (Anogeissus pendula) के वन राजस्थान के शुष्क पतझड़ वनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये वन राज्य के लगभग 5.8% वन क्षेत्र में पाए जाते हैं।
इन वनों के वितरण के प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:
-
दक्षिणी अरावली: उदयपुर और सिरोही (आंशिक)।
-
उत्तरी और मध्य अरावली: अलवर (मुख्य रूप से), अजमेर, जयपुर, दौसा और सीकर।
-
पूर्वी भाग: चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, करौली, बूंदी और बाराँ के कुछ भाग।
दिए गए विकल्पों में से, विकल्प (d) सालर वनों के वितरण के सबसे सही और प्रमुख क्षेत्रों को दर्शाता है।
(d) अलवर, उदयपुर, सिरोही एवं अजमेर जिलों में
13. राजस्थान में निम्नलिखित में से किस वन्यजीव पारिस्थितिक स्थलों पर वर्तमान में जैव विविधता एवं जी पूल संरक्षण का कार्य प्रगति पर है?
राजस्थान में वर्तमान में जिन वन्यजीव पारिस्थितिक स्थलों पर जैव विविधता एवं जी पूल संरक्षण (Biodiversity and Gene Pool Conservation) का कार्य प्रगति पर है, वे मुख्य रूप से वे स्थल हैं जिन्हें बायोलॉजिकल पार्क या गहन संरक्षण प्रबंधन के तहत विकसित किया जा रहा है।
सही समूह है:
(b) नाहरगढ़, सज्जनगढ़, सरिस्का, माउण्ट आबू
🌳 जैव विविधता एवं जी पूल संरक्षण के केंद्र
ये स्थल विशेष रूप से वन्यजीव प्रबंधन और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण एवं प्रजनन पर केंद्रित हैं, जो जैव विविधता और जी पूल संरक्षण के लक्ष्य को पूरा करते हैं:
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नाहरगढ़ (Nahargarh): जयपुर में स्थित यह क्षेत्र बायोलॉजिकल पार्क के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ जंगली जानवरों का प्रजनन और जीन संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।
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सज्जनगढ़ (Sajjangarh): उदयपुर में स्थित यह भी एक बायोलॉजिकल पार्क है। यहाँ स्थानीय और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों के आनुवंशिक पूल को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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सरिस्का (Sariska): यह एक प्रमुख बाघ अभयारण्य है। यहाँ बाघों के जी पूल संरक्षण (Tiger Gene Pool Conservation) और उनके पुनर्वसन का कार्य चल रहा है, जो कि जी पूल संरक्षण का एक प्रमुख उदाहरण है।
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माउण्ट आबू (Mount Abu): यह क्षेत्र दुर्लभ वनस्पति और वन्यजीवों (जैसे जंगली मुर्गी) के लिए जाना जाता है। यहाँ भी जैव विविधता के विशेष घटकों के संरक्षण पर कार्य हो रहा है।
अन्य विकल्प भी संरक्षण क्षेत्र हैं, लेकिन नाहरगढ़ और सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क सीधे तौर पर “जी पूल संरक्षण” और प्रजनन के कार्य को प्रमुखता से दर्शाते हैं।
सही उत्तर है (c) बस्सी – जयपुर। यह युग्म असंगत है।
🏞️ संरक्षित क्षेत्र और जिले
| संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) | जिला | संगतता (Compatibility) |
| (a) रामगढ़-विषधारी | बूंदी | संगत (अब यह राजस्थान का चौथा बाघ अभयारण्य है) |
| (b) केसरबाग | धौलपुर | संगत (यह धौलपुर का एक वन्यजीव अभयारण्य है) |
| (c) बस्सी | जयपुर | असंगत (बस्सी वन्यजीव अभयारण्य चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है) |
| (d) सवाई मानसिंह | सवाई माधोपुर | संगत (रणथंभौर के पास स्थित एक वन्यजीव अभयारण्य) |
बस्सी वन्यजीव अभयारण्य चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है, न कि जयपुर में।
15. कृषि विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार ‘रेवेरिता’ (रेवरिना) मृदा पायी जाती है-
कृषि विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार ‘रेवेरिता’ (Revérina) मृदा मुख्य रूप से गंगानगर जिले में पाई जाती है।
🌾 ‘रेवेरिता’ (रेवरिना) मृदा के बारे में
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उत्पत्ति और क्षेत्र: ‘रेवेरिता’ मिट्टी घग्गर नदी के बहाव क्षेत्र में विकसित हुई है। यह नदी बेसिन की जलोढ़ और दोमट मिट्टी है।
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प्रमुख क्षेत्र: यह मिट्टी राजस्थान के उत्तरी भाग, विशेषकर गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में पाई जाती है।
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अन्य नाम: इसे स्थानीय रूप से नहरी सिंचित क्षेत्र की मिट्टी भी कहा जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र नहरों द्वारा सिंचित है।
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कृषि महत्व: यह मिट्टी कृषि के लिए उपयोगी मानी जाती है और इसमें गेहूं, कपास, चावल और सरसों जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
16. राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र पर निम्न में से कौनसी मृदा पायी जाती है?
राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र पर (a) एरिडोसोल्स एवं एंटीसोल्स मृदाएँ पाई जाती हैं।
🏜️ राजस्थान में मृदा वर्गीकरण (Soil Classification in Rajasthan)
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सर्वाधिक क्षेत्र: राजस्थान के पश्चिमी भाग में (जो राज्य का सबसे बड़ा क्षेत्र है) शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु के कारण एरिडोसोल्स (Aridisols) और एंटीसोल्स (Entisols) मृदाएँ प्रमुखता से पाई जाती हैं।
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एंटीसोल्स: ये मृदाएँ कम विकसित या नई मिट्टी होती हैं और लगभग 30% क्षेत्र को कवर करती हैं, विशेष रूप से पश्चिमी और उत्तरी भागों में।
-
एरिडोसोल्स: ये मृदाएँ शुष्क क्षेत्रों की विशिष्ट मिट्टी होती हैं और पश्चिमी राजस्थान के लगभग 20% क्षेत्र पर पाई जाती हैं।
-
-
संयुक्त रूप से, ये दोनों मृदा वर्ग (एरिडोसोल्स और एंटीसोल्स) राज्य के आधे से अधिक (50% से अधिक) भौगोलिक क्षेत्र को कवर करते हैं।
अन्य मृदाओं का वितरण
| मृदा वर्ग (Soil Order) | प्रमुख वितरण क्षेत्र |
| इनसेप्टिसोल्स (Inceptisols) | अरावली पर्वतमाला और उसके आस-पास के क्षेत्र (अर्ध-शुष्क से आर्द्र क्षेत्र)। |
| वर्टीसोल्स (Vertisols) | दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान (हाड़ौती क्षेत्र: कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में, जहाँ काली मिट्टी पाई जाती है। |
| अल्फीसोल्स (Alfisols) | जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर जैसे पूर्वी मैदानों में (जलोढ़ और लाल-पीली मिट्टी)। |
17. राजस्थान में अमेरिकन कपास का उत्पादन किस जिले में होता है-
राजस्थान में अमेरिकन कपास (नरमा) का उत्पादन मुख्य रूप से (a) गंगानगर जिले में होता है।
🧵 कपास उत्पादन क्षेत्र
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प्रमुख क्षेत्र: राजस्थान का उत्तरी भाग, जो नहर सिंचित क्षेत्र है।
-
शीर्ष उत्पादक जिले: गंगानगर और पड़ोसी हनुमानगढ़ जिले।
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कपास का प्रकार: यह लंबी रेशे वाली (Long Staple) और उच्च गुणवत्ता वाली कपास होती है, जिसे स्थानीय रूप से नरमा कहा जाता है।
-
सिंचाई: इन क्षेत्रों में इंदिरा गांधी नहर और गंगनहर से प्रचुर मात्रा में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जो अमेरिकन कपास की खेती के लिए आवश्यक है।
अमेरिकन कपास (नरमा) का उत्पादन क्षेत्र
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उत्पादन की मुख्य पेटी: राजस्थान का उत्तरी भाग, जो नहर सिंचित क्षेत्र है (विशेष रूप से इंदिरा गांधी नहर और गंगनहर से सिंचित)।
-
प्रमुख जिले: गंगानगर और हनुमानगढ़।
-
कपास का प्रकार: यह लंबी रेशे वाली (Long Staple) और उच्च गुणवत्ता वाली कपास होती है, जिसे राजस्थान में स्थानीय रूप से नरमा कहा जाता है।
-
अन्य क्षेत्र: आंशिक रूप से कोटा, बूंदी और झालावाड़ (वर्टीसोल्स मिट्टी क्षेत्र) में भी कपास का उत्पादन होता है, लेकिन वहाँ देसी कपास अधिक होती है।
18. राजस्थान में मक्का के कुल उत्पादन का 55 प्रतिशत से अधिक उत्पादन किन जिलों में होता है-
राजस्थान में मक्का (Maize) का उत्पादन मुख्य रूप से राज्य के दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी भागों में होता है, जिसे ‘मेवाड़ क्षेत्र’ भी कहा जाता है। मक्का खरीफ की प्रमुख फसल है और यह लाल-काली मिट्टी तथा मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी होती है।
आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के कुल मक्का उत्पादन में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, और उदयपुर जिले प्रमुख योगदान देते हैं। ये तीनों जिले मिलकर राज्य के 55 प्रतिशत से अधिक उत्पादन का हिस्सा रखते हैं।
इसलिए, सही उत्तर है:
(a) उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
🌽 मक्का उत्पादन के प्रमुख तथ्य
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उत्पादक संभाग: उदयपुर संभाग (जिसमें उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, और प्रतापगढ़ जिले शामिल हैं) मक्का उत्पादन में अग्रणी है।
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प्रमुख क्षेत्र: यह फसल विशेष रूप से मेवाड़ क्षेत्र (भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर) और वागड़ क्षेत्र (बांसवाड़ा, डूंगरपुर) का मुख्य खाद्यान्न है।
-
उन्नत किस्में: मक्का की उन्नत किस्मों में माही कंचन और माही धवल प्रमुख हैं, जिनका विकास कृषि अनुसंधान केंद्र, बांसवाड़ा में किया गया है।
-
उपयोग: मक्का का उपयोग मानव उपभोग (मेवाड़ में मुख्य भोजन), पशु आहार, और औद्योगिक उद्देश्यों (स्टार्च) के लिए किया जाता है।
19. जल संरक्षण हेतु सिंचाई की उत्तम विधि है-
जल संरक्षण हेतु सिंचाई की उत्तम विधि (d) बूंद-बूंद सिंचाई एवं फव्वारों से है।
💧 जल-बचत सिंचाई तकनीकें
ये दोनों तकनीकें सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) कहलाती हैं और पारंपरिक विधियों (जैसे नहर या फ्लड इरिगेशन) की तुलना में जल की अत्यधिक बचत करती हैं:
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बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation):
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इस विधि को टपकन सिंचाई भी कहते हैं।
-
इसमें पानी को सीधे पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके पहुँचाया जाता है।
-
इससे पानी की 90% तक बचत होती है और यह वाष्पीकरण और सतही बहाव को कम करता है।
-
-
फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation):
-
इस विधि में पानी को वर्षा की तरह छिड़काव करके खेत में पहुँचाया जाता है।
-
यह उन क्षेत्रों के लिए उत्तम है जहाँ जमीन असमतल होती है और पानी की बचत 25% से 50% तक होती है।
-
20. राजस्थान की जनगणना 2011 के अनुसार, निम्नलिखित में से गलत कथन की पहचान करें-
राजस्थान की जनगणना 2011 के अनुसार, गलत कथन है:
(b) लिंगानुपात 1000 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष है।
🔍 सही तथ्य (जनगणना 2011, राजस्थान)
यहां दिए गए कथनों के संबंध में सही तथ्य प्रस्तुत हैं:
| कथन संख्या | विवरण | जनगणना 2011 का सही आँकड़ा |
| (a) | जनसंख्या वृद्धि दर | 21.31% (यह कथन सही है) |
| (b) | लिंगानुपात | 928 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष (यह कथन गलत है) |
| (c) | कुल साक्षरता | 66.11% (यह कथन सही है) |
| (d) | सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला | जयपुर (जयपुर जिले में राज्य की सर्वाधिक जनसंख्या रहती है। यह कथन सही है) |
अतः, कथन (b) गलत है क्योंकि राजस्थान का लिंगानुपात (Sex Ratio) 1000 नहीं, बल्कि 928 है।
21. राजस्थान के कौनसे जिले में जनसख्या का सबसे कम घनत्व पाया जाता है?
✅ जैसलमेर जिले में राजस्थान का सबसे कम जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।
🏜️ राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (जनगणना 2011)
जैसलमेर राजस्थान का वह जिला है जहां जनसंख्या घनत्व (Population Density) सबसे कम है।
-
सही विकल्प: (d) जैसलमेर
-
जनसंख्या घनत्व: जैसलमेर का जनसंख्या घनत्व मात्र 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
📉 न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले जिले
जनगणना 2011 के अनुसार, राजस्थान के तीन न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले जिले (जो सभी मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित हैं):
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जैसलमेर (17 व्यक्ति/किमी²)
-
बीकानेर (78 व्यक्ति/किमी²)
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बाड़मेर (92 व्यक्ति/किमी²)
22. डामोर जनजाति किन जिलों में सर्वाधिक निवास करती है ?
डामोर जनजाति सर्वाधिक डूंगरपुर-बाँसवाड़ा जिलों में निवास करती है।
🏕️ डामोर जनजाति का निवास क्षेत्र
-
सही विकल्प: (b) डूंगरपुर-बाँसवाड़ा
-
डामोर जनजाति मुख्य रूप से डूंगरपुर जिले की सीमलवाड़ा पंचायत समिति के क्षेत्र में पाई जाती है।
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इसके अलावा, ये बाँसवाड़ा जिले के कुछ हिस्सों में भी निवास करते हैं।
23. राजस्थान में कौनसा कोयला पाया जाता है-
राजस्थान में मुख्य रूप से लिग्नाइट कोयला पाया जाता है।
🔥 राजस्थान में कोयले का प्रकार
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सही विकल्प: (d) लिग्नाइट
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राजस्थान में उपलब्ध कोयला निम्न से मध्यम श्रेणी का लिग्नाइट (Lignite) प्रकार का है।
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लिग्नाइट को भूरा कोयला (Brown Coal) भी कहा जाता है, जिसमें कार्बन की मात्रा लगभग 40% से 55% तक होती है।
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यह कोयला मुख्य रूप से बाड़मेर, बीकानेर, और नागौर जिलों में पाया जाता है, जहाँ इसकी खदानें और ताप विद्युत परियोजनाएँ स्थित हैं (जैसे पलाना, बरसिंगसर, कपूरडी-जालीपा)।
24. हाल ही में सरकार द्वारा ‘उत्तम एप’ को निम्न में से किस उद्देश्य के लिए लॉन्च किया गया है-
‘उत्तम एप’ को कोयले की गुणवत्ता जाँच के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है।
(b) कोयले की गुणवत्ता जाँच
ℹ️ ‘उत्तम’ एप के बारे में
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उत्तम (UTTAM) का पूर्ण रूप Unlocking Transparency by Third Party Assessment of Mined Coal (उत्खनित कोयले का तीसरे पक्ष के मूल्यांकन द्वारा पारदर्शिता लाना) है।
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यह एप कोयले की गुणवत्ता की निगरानी और उसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।
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यह कोयला उपभोक्ताओं को थर्ड पार्टी सैंपलिंग (तीसरे पक्ष के नमूने) के मापदंडों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जिससे कोयला पारिस्थितिकी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती है।
25. ऊर्जा के गैर परम्परागत स्त्रोत है-
ऊर्जा के गैर-परम्परागत (Non-Conventional) स्रोत वे हैं जो अक्षय (Renewable) होते हैं और हाल ही में उपयोग में आए हैं।
आपके दिए गए विकल्पों में से, गैर-परम्परागत स्रोत हैं:
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(i) सौर ऊर्जा: (Solar Energy) – अक्षय
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(iii) पवन ऊर्जा: (Wind Energy) – अक्षय
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(iv) बायोमास ऊर्जा: (Biomass Energy) – अक्षय
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(v) बायोगैस: (Biogas) – अक्षय
🔎 विश्लेषण
| स्रोत | प्रकार | कारण |
| (i) सौर ऊर्जा | गैर-परम्परागत | यह सूर्य से प्राप्त होती है और अक्षय है। |
| (ii) प्राकृतिक ऊर्जा | अस्पष्ट/सामान्य | यह कोई विशिष्ट ऊर्जा स्रोत नहीं है। |
| (iii) पवन ऊर्जा | गैर-परम्परागत | यह हवा की गति से प्राप्त होती है और अक्षय है। |
| (iv) बायोमास ऊर्जा | गैर-परम्परागत | यह जैविक सामग्री से प्राप्त होती है और अक्षय है। |
| (v) बायोगैस | गैर-परम्परागत | यह बायोमास (गोबर आदि) से प्राप्त होती है और अक्षय है। |
| (vi) जल विद्युत शक्ति | परम्परागत | यह जल से प्राप्त होती है, हालाँकि यह अक्षय है, लेकिन यह पुराना और स्थापित स्रोत होने के कारण परम्परागत (Conventional) स्रोतों की श्रेणी में आती है (विशेषकर भारत में इसे अक्सर परम्परागत स्रोतों में गिना जाता है)। |
इसलिए, सबसे सही कूट वह होगा जिसमें (i), (iii), (iv), और (v) शामिल हैं।
सत्य कूट है:
(a) केवल i, iii, iv व v
26. सांगानेर हवाईअड्डे को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा कब दिया गया?
सांगानेर हवाईअड्डे (जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा) को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा 2005 में दिया गया था।
(b) 2005
✈️ सांगानेर हवाईअड्डा (जयपुर)
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स्थान: जयपुर, राजस्थान
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अंतर्राष्ट्रीय दर्जा: इस हवाईअड्डे को 29 दिसंबर 2005 को अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे का दर्जा दिया गया था।
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महत्व: यह राजस्थान का पहला अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा है।
27. सर्वप्रथम किस धातु का प्रयोग किया गया-
सर्वप्रथम जिस धातु का प्रयोग किया गया, वह है (d) ताँबा।
⛏️ धातु का सर्वप्रथम प्रयोग
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ताँबा (Copper): मानव द्वारा इस्तेमाल की गई पहली धातु ताँबा थी।
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अवधि: इसका उपयोग नवपाषाण युग के अंत में शुरू हुआ और इसने ताम्र युग (Chalcolithic Age) को जन्म दिया, जो लगभग 4500 ईसा पूर्व के आसपास शुरू हुआ।
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उपयोग: शुरुआती दौर में ताँबे का प्रयोग औजारों, हथियारों और बर्तनों को बनाने में किया गया था।
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अन्य धातुएँ:
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सोना और चाँदी का प्रयोग ताँबे के बाद गहनों और विनिमय (Barter) के लिए किया गया, लेकिन उनका उपयोग ताँबे जितना व्यापक नहीं था।
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लोहा का प्रयोग बहुत बाद में शुरू हुआ, जिसने लौह युग (Iron Age) को जन्म दिया।
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28. जैतारण का युद्ध (1544) किनके बीच हुआ ?
जैतारण का युद्ध (1544), जिसे सुमेल-गिरि का युद्ध भी कहा जाता है, (d) शेरशाह सूरी व मालदेव के बीच हुआ था।
⚔️ जैतारण का युद्ध (सुमेल-गिरि)
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वर्ष: 1544 ई.
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स्थान: जैतारण के निकट सुमेल गाँव (पाली, राजस्थान)।
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पक्ष:
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शेरशाह सूरी (सूरी साम्राज्य का संस्थापक)
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राव मालदेव (मारवाड़ का शासक)
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परिणाम: इस युद्ध में शेरशाह सूरी विजयी हुआ, जिससे थोड़े समय के लिए मारवाड़ पर सूरी वंश का नियंत्रण स्थापित हो गया।
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ऐतिहासिक टिप्पणी: युद्ध जीतने के बाद, शेरशाह सूरी ने कहा था, “मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता।” (इसका तात्पर्य है कि मारवाड़ की शुष्क भूमि पर विजय प्राप्त करने के लिए उसे अपनी सेना और शक्ति का अत्यधिक उपयोग करना पड़ा, जो इसके महत्व के अनुपात में बहुत अधिक था।)
29. उस स्मारक का नाम बताइए जिसे 1198 ई. में सुल्तान मुहम्मद गौरी ने एक मस्जिद में परिवर्तित करवाया था?
सही उत्तर है (b) अढ़ाई दिन का झोपड़ा।
🕌 अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (Adhai Din Ka Jhonpra)
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मूल संरचना: यह मूल रूप से एक संस्कृत विद्यालय (Sanskrit College) था, जिसका निर्माण चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (Vigraharaja IV – बीसलदेव) ने करवाया था।
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परिवर्तन: इसे 1192 ई. (या कुछ स्रोतों के अनुसार 1198 ई.) में सुल्तान मुहम्मद गौरी के आदेश पर, उसके गुलाम और सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा एक मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया था।
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स्थान: यह स्मारक अजमेर, राजस्थान में स्थित है।
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नामकरण: ऐसा माना जाता है कि इसका नाम ‘अढ़ाई दिन का झोंपड़ा’ इसलिए पड़ा क्योंकि या तो इसका निर्माण ढाई दिन में किया गया था या इस स्थान पर ढाई दिन का उर्स (मेला) आयोजित होता था।
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वास्तुकला: यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें मूल हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया है। इसकी मेहराबों पर कुरान के छंद खुदे हुए हैं।
30. विश्व की सबसे बड़ी तोप ‘जयबाण’ का निर्माण किसके द्वारा कराया गया ?
विश्व की सबसे बड़ी तोप ‘जयबाण’ का निर्माण (b) सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा कराया गया था।
🏰 जयबाण तोप के बारे में
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निर्माता: महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (जिन्होंने जयपुर शहर की स्थापना की थी)।
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निर्माण वर्ष: 1720 ई.
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स्थान: यह तोप जयपुर के जयगढ़ किले में रखी हुई है।
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विशेषता: यह तोप एशिया (और विश्व) में अब तक की पहियों पर रखी सबसे बड़ी तोपों में से एक मानी जाती है। इसका इस्तेमाल केवल एक बार परीक्षण के तौर पर किया गया था, और इसकी मारक क्षमता का गोला चाकसू (जयपुर) के पास गिरा था, जहाँ आज एक तालाब बन गया है।
31. सौलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में राजस्थान में नील का कारोबार अत्यंत विकसित था और नील हमारी सांस्कृतिक विरासत रही है और इस विरासत का गवाह रहा है-
सही उत्तर है (a) बयाना (भरतपुर)।
🌿 नील उत्पादन और बयाना
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ऐतिहासिक महत्व: सौलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में, बयाना (भरतपुर) भारत में नील (Indigo) के उत्पादन और व्यापार का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध केंद्र था।
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गुणवत्ता: यहाँ उत्पादित नील अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध था, जिसकी मांग यूरोप और एशिया के बाजारों में थी।
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व्यापारिक केंद्र: बयाना मुग़ल काल में एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर स्थित था, जिससे इसका कारोबार अत्यंत विकसित हुआ।
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सांस्कृतिक विरासत: इस प्रकार, बयाना सदियों से राजस्थान और भारत की नील उत्पादन की समृद्ध सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत का एक प्रमुख गवाह रहा है।
32. मटक, विछायत, चू-सराई क्या थी –
सही उत्तर है (a) राजस्थान में स्थानीय करों के नाम।
💰 स्थानीय करों का विवरण
ये सभी शब्द मध्यकाल में राजस्थान की रियासतों में प्रचलित विभिन्न प्रकार के करों (Taxes) के स्थानीय नाम थे, जिन्हें सामान्यतः लाग-बाग कहा जाता था:
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मटक (Matak): यह संभवतः सिरोही रियासत में भूमि से संबंधित एक कर था।
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विछायत (Vichhayat): यह कर अक्सर सामंतों या अधिकारियों के गाँव में ठहरने (विछायत/बिछावन) पर ग्रामीणों से वसूला जाता था।
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चू-सराई (Choo-Sarai): यह भी एक प्रकार का सराय कर या पथ कर हो सकता है, जो यात्रियों या व्यापारिक काफिलों से वसूला जाता था।
यह तीनों कर उस समय की जटिल लाग-बाग व्यवस्था का हिस्सा थे, जिसमें किसानों और व्यापारियों पर कई तरह के छोटे-बड़े कर लगाए जाते थे।
33. हम्मीर रासो के अनुसार रणथम्भौर किले का प्रारम्भिक नाम क्या था ?
सही उत्तर है (a) रणस्तम्भपुर।
🏰 रणथम्भौर किले का प्रारंभिक नाम
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हम्मीर रासो के अनुसार: ‘हम्मीर रासो’ (जोधराज द्वारा रचित) और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, रणथम्भौर किले का प्राचीन या प्रारंभिक नाम रणस्तम्भपुर था।
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अर्थ: यह नाम किले की भौगोलिक स्थिति को दर्शाता है:
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‘रण’ का अर्थ है वह क्षेत्र जो दिखाई देता है या जहाँ से युद्ध लड़ा जाता है।
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‘स्तम्भ’ का अर्थ है खंभा या स्थिरता, जो पहाड़ी की चोटी पर किले की दृढ़ता को दर्शाता है।
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‘पुर’ का अर्थ है नगर या किला।
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यह नाम बाद में अपभ्रंशित होकर रणथम्भौर बन गया।
34. जल दुर्ग कहाँ है?
जल दुर्ग (Water Fort) (a) कालीसिंध और आहू नदियों के संगम पर स्थित है।
🏰 गागरोन का जल दुर्ग
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नाम: यह प्रसिद्ध जल दुर्ग गागरोन का किला (Gagron Fort) है।
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स्थान: यह राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है।
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संगम: यह किला कालीसिंध (Kalisindh) और आहू (Ahu) नदियों के संगम (Doh) पर बना हुआ है, जिसके कारण यह जल दुर्ग या ओदक दुर्ग कहलाता है।
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विशेषता: यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जिसका कोई परकोटा (Base wall/Foundation) नहीं है, और यह सीधे नदी के ऊपर चट्टानों पर खड़ा है।
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यूनेस्को विश्व धरोहर: यह किला यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल राजस्थान के पहाड़ी किलों (Hill Forts of Rajasthan) में से एक है।
35. सुमेलित कीजिए –
| सूची-1 | सूची-2 |
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(A) कानन मेला
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(1) नागौर |
| (B) मूंडवा का मेला | (ii) बाड़मेर |
| (C) मरु मेला | (iii) जैसलमेर |
| (D) कपिल मुनि का मेला | (iv) बीकानेर |
सही सुमेलन विकल्प (c) A (ii) B (i) C (iii) D (iv) है।
🎪 मेलों का सुमेलन
यहां राजस्थान के प्रमुख मेलों और उनके स्थानों का सही सुमेलन दिया गया है:
| सूची-1 (मेला) | सूची-2 (स्थान) | सुमेलन |
| (A) कानन मेला | (ii) बाड़मेर | यह मेला बाड़मेर में आयोजित होता है। |
| (B) मूंडवा का मेला | (i) नागौर | यह मेला नागौर जिले में लगता है। |
| (C) मरु मेला | (iii) जैसलमेर | इसे डेजर्ट फेस्टिवल भी कहते हैं, जो जैसलमेर में आयोजित होता है। |
| (D) कपिल मुनि का मेला | (iv) बीकानेर | यह मेला बीकानेर के कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है। |
✅ कूट
इस प्रकार सही कूट है:
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A – (ii)
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B – (i)
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C – (iii)
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D – (iv)
36. मुसलमानों के किस त्यौहार के दिन ताजिए निकाले जाते है-
मुसलमानों के त्यौहार (d) मोहर्रम के दिन ताजिए निकाले जाते हैं।
🌙 मोहर्रम और ताजिया
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मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और यह एक मातम (शोक) का पर्व है, त्यौहार (Celebration) नहीं।
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यह इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में हुई शहादत की याद में मनाया जाता है।
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ताजिए (Tazia): ये बाँस और कागज़ से बनी हुई इमाम हुसैन के रौज़े (मकबरे) की प्रतिकृतियाँ होती हैं। मोहर्रम की दसवीं तारीख को इन्हें जुलूस के रूप में निकाला जाता है और फिर विसर्जित किया जाता है।
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यह जुलूस इमाम हुसैन के बलिदान और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है।
37. निम्न में से कौनसी मांड गायिका बीकानेर से सम्बन्धित नहीं है-
सही उत्तर है (c) बन्नो बेगम।
बन्नो बेगम का संबंध बीकानेर से नहीं, बल्कि जयपुर से है।
🎤 मांड गायिकी और उनका स्थान
राजस्थान की मांड गायिकी एक प्रसिद्ध लोक गायन शैली है, और इसके प्रमुख कलाकार अलग-अलग रियासतों से संबंधित थे:
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(a) गवरी देवी: ये बीकानेर से संबंधित थीं और इन्हें मांड गायिकी की ‘महारानी’ कहा जाता है।
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(b) हाजन अल्लाह जिल्लाई बाई: ये भी बीकानेर से संबंधित थीं और इन्होंने ही सबसे पहले “केसरिया बालम” को गाया था। इन्हें 1982 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
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(c) बन्नो बेगम: इनका संबंध जयपुर रियासत से था। ये बीकानेर से संबंधित मांड गायिका नहीं हैं।
38. मेवाड़ के अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य है-
मेवाड़ के अरावली क्षेत्र की भील जाति का लोकनाट्य है (b) गवरी।
🎭 गवरी लोकनाट्य (Gavari Folk Drama)
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सम्बन्धित जाति: यह मुख्य रूप से भील जनजाति द्वारा किया जाता है।
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क्षेत्र: यह राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़) में प्रसिद्ध है।
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समय: यह लोकनाट्य रक्षाबंधन के दूसरे दिन से शुरू होता है और लगभग सवा महीने (40 दिन) तक चलता है।
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विषय वस्तु: यह शिव (भोपा) और भस्मासुर की कथा पर आधारित होता है। यह एक धार्मिक लोकनाट्य है, जिसे भीलों का ‘मेरुनाट्य’ (सबसे प्राचीन/मुख्य नाट्य) भी कहा जाता है।
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विशेषता: यह एक दिन में आयोजित होने वाला लोकनाट्य है। इस दौरान, कलाकार मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते और शुद्धता का पालन करते हैं।
अन्य लोकनाट्य
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(a) गंधर्व: यह मेवाड़ में एक नाट्य शैली है, जिसका मंचन प्रायः जैनों द्वारा किया जाता है।
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(c) भवाई: यह नाट्य शैली गुजरात और राजस्थान में प्रसिद्ध है। इसके कलाकार नर्तक अपनी असाधारण शारीरिक कलाबाजियों के लिए जाने जाते हैं (जैसे सिर पर सात-आठ घड़े रखकर नाचना)।
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(d) रम्मत: यह बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकनाट्य है, जिसे खुले मंच पर ‘अखाड़ा’ बनाकर खेला जाता है।
39. राजस्थान के लोक नृत्य एवं उसके प्रचलन क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित में कौनसा युग्म सही नहीं है-
सही युग्म नहीं है (c) बमरसिया नृत्य – बीकानेर।
💃 लोक नृत्य और प्रचलन क्षेत्र
| नृत्य | प्रचलन क्षेत्र | सत्यता |
| (a) गींदड़ नृत्य | शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) | सही (यह होली के अवसर पर पुरुषों का सामूहिक नृत्य है।) |
| (b) ढोल नृत्य | जालौर | सही (यह विवाह के अवसर पर किया जाता है। इसे जय नारायण व्यास ने संरक्षण प्रदान किया।) |
| (c) बमरसिया नृत्य | बीकानेर | सही नहीं (यह नृत्य भरतपुर, अलवर (मेवात क्षेत्र) में किया जाता है।) |
| (d) डांडिया नृत्य | मारवाड़ (जोधपुर) | सही (यह मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा होली के बाद किया जाता है और गुजरात के डांडिया से प्रभावित है।) |
📝 बमरसिया नृत्य का सही क्षेत्र
बमरसिया नृत्य का प्रचलन क्षेत्र भरतपुर और अलवर (मेवात क्षेत्र) है।
-
‘बम’ का अर्थ होता है नगाड़ा।
-
‘रसिया’ लोकगीत हैं जो इस नृत्य के साथ गाए जाते हैं। यह फसल की कटाई की खुशी में किया जाने वाला नृत्य है।
40. बारात के स्वागत की रस्म को कहा जाता है?
बारात के स्वागत की रस्म को (a) सामेला कहा जाता है।
👰 विवाह की रस्में
| विकल्प | रस्म | विवरण |
| (a) सामेला | बारात का स्वागत | बारात के आगमन पर वधू पक्ष द्वारा दूल्हे और बारातियों के स्वागत की रस्म। इसे मिलनी या मधुपर्क भी कहते हैं। |
| (b) पहरावणी | उपहार देना | विवाह के बाद विदाई से पहले दूल्हा और बारातियों को वधू पक्ष द्वारा वस्त्र या अन्य उपहार (नेग) दिए जाने की रस्म। |
| (c) विदाई | प्रस्थान | विवाह संपन्न होने के बाद दुल्हन का अपने पति (दूल्हे) के साथ ससुराल के लिए प्रस्थान करना। |
| (d) घुड़चेड़ी | बारात के लिए प्रस्थान | विवाह से पहले दूल्हे का घोड़ी पर बैठकर बारात लेकर प्रस्थान करना। |
सही उत्तर सामेला है।
41. गवर्नर जनरल लॉर्ड बेंटिक ने निम्न स्थलों पर सती प्रथा रोकने के आदेश दिए। निम्न में से कौनसा युग्म सहीं नहीं है-
दिए गए विकल्पों में से, (c) डूंगरपुर, 1856 युग्म सही नहीं है।
🛑 सती प्रथा निषेध और राजस्थान
भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में कानून बनाकर सती प्रथा को अवैध घोषित किया था। राजस्थान की विभिन्न रियासतों ने इस कानून को अलग-अलग समय पर लागू किया।
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डूंगरपुर में सती प्रथा रोकने के आदेश बेंटिक के समय (1828-1835) के काफी बाद, 1856 में नहीं दिए गए थे।
सही युग्म (राजस्थान में सती प्रथा निषेध के आदेश):
| रियासत | निषेध का वर्ष |
| अलवर | 1830 |
| जयपुर | 1844 |
| जोधपुर | 1848 |
| डूंगरपुर | सती प्रथा को अवैध घोषित करने वाली यह रियासत शुरुआती रियासतों में से थी, लेकिन इसका सटीक निषेध आदेश वर्ष विकल्प में दिए गए 1856 के बजाय 1844 या उससे पहले (यानी बेंटिक के बाद) आया था। |
नोट: 1856 का वर्ष बेंटिक के गवर्नर जनरल कार्यकाल (1828-1835) के बहुत बाद का है। हालाँकि, यह प्रश्न बेंटिक के आदेशों के संदर्भ में रियासतों द्वारा बाद में अपनाए गए वर्षों को पूछ रहा है। फिर भी, 1856 की तारीख Doongarpur के लिए आमतौर पर मान्य ऐतिहासिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है।
42. जसनाथी संप्रदाय की उत्पत्ति राजस्थान के किस रियासती राज्य में हुई ?
जसनाथी संप्रदाय की उत्पत्ति राजस्थान के (c) बीकानेर रियासती राज्य में हुई।
🔥 जसनाथी संप्रदाय (JasNathi Sampraday)
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संस्थापक: इस संप्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने की थी।
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जन्म स्थान: संत जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में कतरियासर गांव में हुआ था।
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उत्पत्ति स्थल: कतरियासर गांव, जो बीकानेर रियासत (वर्तमान जिला) में स्थित है, जसनाथी संप्रदाय का प्रमुख केंद्र और उत्पत्ति स्थल है।
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प्रमुख विशेषता: इस संप्रदाय के अनुयायी 36 धार्मिक नियम (नियमाचार) का पालन करते हैं और अग्नि नृत्य (Fire Dance) इस संप्रदाय का प्रसिद्ध नृत्य है, जिसे जलते हुए अंगारों पर किया जाता है।
43. देवनारायण जी का मुख्य मंदिर कहाँ अवस्थित है-
देवनारायण जी का मुख्य मंदिर (b) आसींद में अवस्थित है।
🕌 देवनारायण जी के मुख्य मंदिर
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मुख्य मंदिर का स्थान: देवनारायण जी का मुख्य मंदिर आसींद में है, जो राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित है।
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अन्य प्रमुख स्थल: देवनारायण जी के अन्य प्रमुख पूजा स्थलों में देवधाम जोधपुरिया (निवाई, टोंक) और देवमाली (ब्यावर, अजमेर) भी शामिल हैं।
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महत्व: देवनारायण जी राजस्थान के प्रमुख लोक देवताओं में से एक हैं और इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
44. राजस्थान की प्रथम महिला सांसद कौन थी ?
राजस्थान की प्रथम महिला सांसद (c) शारदा भार्गव थीं।
👩⚖️ शारदा भार्गव के बारे में
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सदन: शारदा भार्गव राज्यसभा (Council of States) की सदस्य थीं।
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अवधि: उन्होंने 1952 में राज्यसभा के लिए चुने जाने पर यह गौरव प्राप्त किया।
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महत्व: वह स्वतंत्र भारत में राजस्थान राज्य से चुनी गई पहली महिला सांसद (राज्यसभा सदस्य) थीं।
नोट: यदि प्रश्न लोकसभा (House of the People) की प्रथम महिला सांसद के बारे में होता, तो वह गायत्री देवी (राजकुमारी) थीं, जो 1962 में जयपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गईं थीं।
45. पोत, हांकर, सरी आभूषण कहाँ पहना जाता है-
पोत, हांकर, और सरी आभूषण (c) गले में पहने जाते हैं।
💎 राजस्थान के प्रमुख गले के आभूषण
ये तीनों आभूषण विशेष रूप से राजस्थान में महिलाओं द्वारा गले में पहने जाते हैं:
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पोत (Poth): यह एक तरह का मनका (bead) या मोतियों का हार होता है, जिसे विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में पहना जाता है।
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हांकर (Hankar/Hansi): यह चाँदी या सोने से बना एक मोटी पट्टीनुमा या कड़ीनुमा आभूषण होता है जिसे गले में पहना जाता है।
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सरी (Sari): यह भी एक प्रकार का हल्का और छोटा हार होता है जो गले को सुशोभित करता है।
46. खोयतु वस्त्र संबंधित है-
खोयतु वस्त्र (b) भील जनजाति से संबंधित है।
👚 खोयतु वस्त्र (Khoytu Vastra)
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परिचय: खोयतु वस्त्र भील जनजाति के पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला एक पारंपरिक परिधान है।
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स्वरूप: यह एक प्रकार की तंग लंगोटी होती है, जिसे पुरुष कमर के नीचे पहनते हैं।
47. गोपाल, उवय, हुकमा, जीवन चित्रकला की किस शैली से सम्बन्धित थे-
गोपाल, उवय, हुकमा, और जीवन चित्रकला की (b) बीकानेर शैली से सम्बन्धित थे।
🎨 बीकानेर चित्रकला शैली के प्रमुख चित्रकार
बीकानेर शैली राजस्थानी चित्रकला की एक महत्त्वपूर्ण शैली है। यह शैली मुगल और दक्कनी कला से प्रभावित रही है।
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प्रमुख चित्रकार:
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उस्ता परिवार: इस शैली में उस्ता कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जो अपने चित्रों में अपना नाम और तिथि अंकित करने की परंपरा के लिए जाने जाते थे।
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अन्य कलाकार: गोपाल, उवय (उजाय), हुकमा, जीवन, मुकुंद, और अली रजा इस शैली के प्रमुख चित्रकार थे।
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48. किस चित्रशैली में मतिराम रचित, 19 वीं शताब्दी की हिन्दी साहित्यिक रचना ‘रसराज’ का चित्रण हेतु विषय के रूप में प्रयोग किया गया है-
सही उत्तर है (c) बूँदी।
🎨 ‘रसराज’ और बूँदी शैली
मतिराम (Matiram) द्वारा रचित ‘रसराज’ (Rasraj), जो कि 19वीं शताब्दी की एक महत्वपूर्ण हिन्दी साहित्यिक रचना है, को बूँदी चित्रशैली (Bundi School of Painting) में चित्रण के लिए प्रमुख विषय के रूप में प्रयोग किया गया है।
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‘रसराज’ एक श्रृंगार रस प्रधान ग्रंथ है, जिसमें नायक-नायिका भेद (classifications of heroes and heroines) और उनके विभिन्न मनोभावों (emotions) का वर्णन किया गया है।
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बूँदी शैली (Bundi style), जो राजस्थान की हाड़ौती चित्रकला शैली का हिस्सा है, अपनी रंगों की जीवंतता, प्रकृति के सुंदर चित्रण, और नायक-नायिका भेद के विषयों को कुशलतापूर्वक चित्रित करने के लिए प्रसिद्ध है। इस शैली के चित्रों में ‘रसराज’ में वर्णित प्रेम और सौंदर्य के भावों को विशेष रूप से दर्शाया गया है।
49. निम्न में से राजस्थान का कौनसा स्थान ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है-
सही उत्तर है (b) सवाईमाधोपुर।
⚫️ ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी के बर्तन)
राजस्थान में ब्लैक पॉटरी (Black Pottery) के लिए सवाईमाधोपुर (Sawai Madhopur) नामक स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
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विशेषता: इस पॉटरी को बनाने के बाद कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे मिट्टी का रंग काला हो जाता है। इसके बाद इन पर सफेद और चांदी के रंग से ज्यामितीय (Geometric) और पुष्पीय (Floral) डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
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अन्य प्रसिद्ध स्थान: कोटा में भी काली पॉटरी (ब्लैक पॉटरी) का काम होता है, लेकिन विकल्पों में से सवाईमाधोपुर मुख्य रूप से प्रसिद्ध है।
50. जिरोही, भाकना, गंदहा किस उद्योग के नाम है-
सही उत्तर है (a) जटपट्टी।
🧶 जटपट्टी उद्योग
जिरोही, भाकना, और गंदहा राजस्थान में पारंपरिक रूप से किए जाने वाले जटपट्टी उद्योग के विभिन्न नाम या प्रकार हैं।
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जटपट्टी क्या है?
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यह बकरी या ऊँट के बालों (ऊन) से बनाई गई एक मोटी, खुरदरी दरी या चटाई होती है।
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इसे अक्सर फर्श पर बिछाने के काम में लिया जाता है।
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प्रसिद्ध केंद्र: राजस्थान में टोंक जिले का जटपट्टी उद्योग विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
51. 1857 की क्रांति के समय कोटा में प्रमुख नेता जयदयाल तथा मेहराब खाँ क्रमशः कहाँ के निवासी थे-
सही उत्तर है (b) मथुरा, करौली।
⚔️ 1857 की क्रांति और कोटा
1857 की क्रांति के दौरान, कोटा में विद्रोह के दो प्रमुख नेता थे:
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जयदयाल भटनागर: ये मथुरा (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे, जो कोटा राज्य में वकील के पद पर कार्यरत थे।
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मेहराब खाँ: ये करौली (राजस्थान) के निवासी थे और कोटा राज्य की सेना में रिसालदार (Resaldar) के पद पर थे।
इन दोनों के नेतृत्व में, कोटा में 15 अक्टूबर 1857 को विद्रोह भड़क उठा था, जिसमें पॉलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन और उनके दो पुत्रों की हत्या कर दी गई थी।
52. ‘मेवाड़ पुकार’ किया है –
सही उत्तर है (a) मोती लाल तेजावत द्वारा तैयार एक माँग पत्र था, जो महाराणा मेवाड़ को प्रस्तुत किया गया था।
📜 मेवाड़ पुकार
‘मेवाड़ पुकार‘ भील नेता मोतीलाल तेजावत द्वारा तैयार किया गया एक 21 सूत्री माँग पत्र था।
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उद्देश्य: इस माँग पत्र में भीलों और गरासियों की समस्याओं, जैसे अवैध लाग-बाग (कर), बेगार (बंधुआ मजदूरी), तथा वन अधिकारों से संबंधित शिकायतों का निवारण करने की माँग की गई थी।
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प्रस्तुति: यह माँग पत्र 1921 में महाराणा मेवाड़ को प्रस्तुत किया गया था।
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आंदोलन: यह माँग पत्र एकी आंदोलन (या भौमट भील आंदोलन) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसका नेतृत्व मोतीलाल तेजावत कर रहे थे।
53. निम्न में से कौनसा स्थान 1920 के किसान आंदोलनों के दौरान शेखावाटी के पंचपाणे ठिकानों में से एक नहीं था?
सही उत्तर है (c) श्रीमाधोपुर।
🚩 शेखावाटी के पंचपाणे ठिकाने
शेखावाटी क्षेत्र के किसान आंदोलनों के दौरान, विशेषकर 1920 और 1930 के दशक में, पाँच प्रमुख जागीर ठिकानों को ‘पंचपाणे’ (अर्थात् ‘पाँच ठिकाने’) के नाम से जाना जाता था।
ये पाँच ठिकाने थे:
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बिसाऊ
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मण्डावा (विकल्प में शामिल)
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मलसीसर (विकल्प में शामिल)
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नवलगढ़
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डूंडलोद (विकल्प में शामिल)
श्रीमाधोपुर (Srimadhopur) इन पंचपाणे ठिकानों में शामिल नहीं था; यह जयपुर राज्य का एक बड़ा परगना (जिला) था, जहाँ भी किसान आंदोलन हुए थे, लेकिन यह पंचपाणे की विशिष्ट श्रेणी का हिस्सा नहीं था।
54. 1938 में स्थापित मेवाड़ प्रजामण्डल का प्रथम अध्यक्ष कौन था ?
सही उत्तर है (a) बलवंत सिंह मेहता।
🌟 मेवाड़ प्रजामण्डल का गठन
मेवाड़ प्रजामण्डल (Mewar Prajamandal) की स्थापना 24 अप्रैल 1938 को उदयपुर में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य मेवाड़ रियासत में उत्तरदायी शासन (Responsible Government) की स्थापना करना था।
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प्रथम अध्यक्ष: बलवंत सिंह मेहता को मेवाड़ प्रजामण्डल का प्रथम अध्यक्ष (First President) बनाया गया था।
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संस्थापक: हालाँकि, प्रजामण्डल के प्रमुख संस्थापक और प्रेरणास्रोत माणिक्य लाल वर्मा थे, जिन्हें कुछ ही समय बाद मेवाड़ राज्य से निर्वासित कर दिया गया था।
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उपाध्यक्ष: भूरेलाल बया प्रजामण्डल के प्रथम उपाध्यक्ष (Vice President) थे।
बलवंत सिंह मेहता के घर ‘साहित्य कुटीर’ में ही इस प्रजामण्डल की स्थापना हुई थी।
55. 1948 ई. में किनको मत्स्य संघ का राजप्रमुख बनाया गया था?
सही उत्तर है (c) महाराजा उद्यभानसिंह।
👑 मत्स्य संघ का राजप्रमुख
मत्स्य संघ राजस्थान के एकीकरण (Integration of Rajasthan) के प्रथम चरण में बनाया गया था।
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गठन: इसका गठन 18 मार्च 1948 को किया गया था।
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रियासतें: इसमें चार रियासतें (Four Princely States) शामिल थीं:
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अलवर
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भरतपुर
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धौलपुर
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करौली
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राजप्रमुख: धौलपुर रियासत के शासक महाराजा उदयभान सिंह (Maharaja Udaybhan Singh) को मत्स्य संघ का राजप्रमुख (Rajpramukh) बनाया गया था।
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राजधानी: अलवर को इसकी राजधानी (Capital) बनाया गया था।
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प्रधानमन्त्री: शोभाराम कुमावत (अलवर) को प्रधानमन्त्री (Prime Minister) बनाया गया था।
56. कौनसी ढूँढाड़ी की उपबोली नहीं है-
सही उत्तर है (d) राठी।
🗣️ ढूँढाड़ी की उपबोलियाँ
राठी ढूँढाड़ी की उपबोली नहीं है। यह मुख्यतः मेवाती भाषा की एक उपबोली है, जो अलवर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है।
ढूँढाड़ी भाषा (Dhundhari Language) मुख्य रूप से जयपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों (जैसे दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक) में बोली जाती है। इसकी प्रमुख उपबोलियाँ (Sub-dialects) निम्नलिखित हैं:
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(a) तोरावाटी: यह जयपुर के उत्तरी भाग में, विशेष रूप से सीकर (खंडेला) और झुंझुनू के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है।
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(b) राजावटी: यह जयपुर के पूर्वी भागों (जैसे दौसा की ओर) में बोली जाती है।
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(c) नागर चोल: यह सवाई माधोपुर के पश्चिमी भाग और टोंक जिले के दक्षिणी-पूर्वी भाग में बोली जाती है।
अन्य प्रमुख ढूँढाड़ी उपबोलियों में किशनगढ़ी और चौरासी भी शामिल हैं।
57. भवानी नाट्यशाला किस शहर में है-
भवानी नाट्यशाला झालावाड़ शहर में है।
तो, सही विकल्प है (c) झालावाड़।
🎭 भवानी नाट्यशाला के बारे में
भवानी नाट्यशाला राजस्थान के झालावाड़ शहर में स्थित एक ऐतिहासिक ओपेरा हाउस है। इसका निर्माण 1921 में झालावाड़ के महाराजा भवानी सिंह ने करवाया था। यह एक अनूठा थिएटर है क्योंकि इसमें भूमिगत मार्ग (underground passage) भी है, जिसका उपयोग शाही परिवार के सदस्यों द्वारा बिना किसी को दिखे थिएटर तक पहुंचने के लिए किया जाता था।
58. निम्नलिखित में से कौनसा ग्रंथ जालौर के शासकों की उपलब्धि के बारें में बताता है-
जालौर के शासकों की उपलब्धियों के बारे में बताने वाला ग्रंथ कान्हड़दे प्रबंध है।
सही विकल्प है (d) कान्हड़दे प्रबंध।
📜 कान्हड़दे प्रबंध के बारे में
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रचनाकार: इस ग्रंथ की रचना पद्मनाभ ने की थी।
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विषय: इसमें जालौर के शासक कान्हड़देव और उनके पुत्र वीरमदेव के जीवन, शौर्य और अलाउद्दीन खिलजी की सेना के साथ हुए उनके संघर्षों का विस्तृत वर्णन है। यह जालौर के इतिहास और उस समय की संस्कृति को जानने का एक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत है।
📚 अन्य ग्रंथों की जानकारी
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(a) पृथ्वीराज विजय: इसकी रचना जयानक ने की थी। इसमें अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान III की उपलब्धियों का वर्णन है।
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(b) हम्मीर महाकाव्य: इसकी रचना नयनचन्द्र सूरि ने की थी। इसमें रणथंभौर के शासक हम्मीर देव चौहान के जीवन और उपलब्धियों का वर्णन है।
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(c) प्रबंध चिंतामणि: इसकी रचना मेरुतुंग ने की थी। यह अनेक राजाओं के चरित्रों और कथाओं का संग्रह है, जिसमें गुजरात के शासकों और मालवा के शासक भोज का उल्लेख प्रमुख है, लेकिन यह विशेष रूप से जालौर के शासकों की उपलब्धियों पर केंद्रित नहीं है।
59. जयसिंह सूरी लेखक है –
जयसिंह सूरी लेखक हैं-
(a) हम्मीद मद मर्दन
📚 अन्य ग्रंथों के लेखक:
| ग्रंथ का नाम | लेखक |
| हम्मीर मद मर्दन | जयसिंह सूरी |
| हम्मीर महाकाव्य | नयनचन्द्र सूरि |
| हम्मीर हठ | चन्द्रशेखर |
| हम्मीर रासो | जोधराज / सारंगधर |
जयसिंह सूरी द्वारा रचित ‘हम्मीर मद मर्दन’ में रणथंभौर के शासक हम्मीर देव चौहान और दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश के बीच हुए संघर्षों का वर्णन है।
60. ‘प्रेम विनोद’ नामक ग्रंथ किसकी रचना है-
‘प्रेम विनोद’ नामक ग्रंथ छत्र कुंवारी की रचना है।
सही विकल्प है (c) छत्र कुंवारी।
📝 छत्र कुंवारी के बारे में
छत्र कुंवारी बूंदी राज्य के शासक महाराजा विश्वनाथ सिंह की रानी थीं। वह स्वयं एक विदुषी महिला थीं और उन्होंने ‘प्रेम विनोद’ के अतिरिक्त कई अन्य ग्रंथों की भी रचना की थी, जिनमें भक्ति और श्रृंगार रस की प्रधानता है।
61. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड किसे कहते है-
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard) को गोडावण कहते हैं।
सही विकल्प है (c) गोडावण।
🐦 गोडावण (Great Indian Bustard) के बारे में
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परिचय: गोडावण भारत के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक है।
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राज्य पक्षी: यह राजस्थान का राज्य पक्षी है।
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अन्य नाम: इसे स्थानीय रूप से सोन चिरैया या शर्मिला पक्षी भी कहा जाता है।
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संरक्षण: यह पक्षी अपनी घटती हुई संख्या के कारण गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में है, और इसके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
🦅 अन्य विकल्प:
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(a) कुरजां: यह डेमोइसेल क्रेन (Demoiselle Crane) को कहते हैं, जो एक प्रवासी पक्षी है।
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(d) चिंकारा: यह एक प्रकार का हिरण (Indian Gazelle) है, जिसे राजस्थान का राज्य पशु माना जाता है।
62. इन्दिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना के सम्बन्ध में सही कथन का चयन करें- REET Level – 01 Mock Test
इन्दिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना के सम्बन्ध में दिए गए सभी कथन (ये सभी) सही हैं।
सही विकल्प है (d) ये सभी।
💳 इन्दिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना की मुख्य विशेषताएँ
यह योजना राजस्थान सरकार द्वारा शहरी क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
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(a) शहरी क्षेत्र के जरूरतमंदों को ₹50 हजार तक का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करना: यह योजना शहरी क्षेत्र के स्ट्रीट वेंडर्स, छोटे व्यवसायी, और सेवा क्षेत्र के लोगों को उनके व्यवसाय के लिए ₹50,000 तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराती है।
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(b) 6 लाख लोगों को ये सुविधाएँ दी जायेगी: योजना का लक्ष्य राजस्थान के लगभग 6 लाख जरूरतमंद व्यक्तियों को लाभ पहुँचाना है।
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(c) बेरोजगार युवक जिनकी आयु 18 से 40 वर्ष है उन्हें आर्थिक सबल प्रदान करना: इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र के ऐसे बेरोजगार युवाओं को (जिनकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच है) आर्थिक सहायता देना भी है जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
इस योजना के तहत ऋण के लिए किसी गारंटी की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया आसान हो जाती है।
63. सबल ग्राम विकास योजना के अनुसार ‘संबल ग्राम’ एक गाँव है, जिसमें-
सबल ग्राम विकास योजना के अनुसार ‘सबल ग्राम’ वह गाँव है, जिसमें उस गाँव की कुल जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 40 प्रतिशत या उससे अधिक है।
सही विकल्प है (d) उस गाँव की कुल जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 40 प्रतिशत या उससे अधिक है।
🇮🇳 सबल ग्राम विकास योजना (Sabal Gram Vikas Yojana)
यह योजना मुख्य रूप से जनजातीय उप-योजना क्षेत्र (Tribal Sub-Plan – TSP Area) से बाहर, लेकिन उच्च जनजाति जनसंख्या वाले गाँवों में चलाई जाती है।
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उद्देश्य: इन गाँवों में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe – ST) के लोगों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना।
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पहचान: योजना के तहत, ‘सबल ग्राम’ के रूप में ऐसे गाँवों को चिन्हित किया जाता है जहाँ कुल जनसंख्या का 40% या उससे अधिक अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं।
64. राष्ट्रीय बेर अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है ?
राष्ट्रीय बेर अनुसंधान केन्द्र बीकानेर में स्थित है।
सही विकल्प है (c) बीकानेर।
🌳 राष्ट्रीय बेर अनुसंधान केन्द्र
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नाम: इस केन्द्र का पूरा नाम केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (Central Institute for Arid Horticulture – CIAH) है, जो बीकानेर के बीछवाल में स्थित है।
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कार्य: यह संस्थान मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगने वाले फलों, विशेष रूप से बेर (Jujube), अनार, और खजूर जैसी फसलों के सुधार, उत्पादन, और प्रबंधन पर शोध करता है।
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विशेषता: राजस्थान के शुष्क मौसम को देखते हुए, यह संस्थान बेर की उन्नत किस्मों को विकसित करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
65. राजस्थान राज्य में पहला द्रोणाचार्य पुरस्कार किसे प्राप्त हुआ?
राजस्थान राज्य में पहला द्रोणाचार्य पुरस्कार करण सिंह को प्राप्त हुआ।
सही विकल्प है (d) करण सिंह।
🏆 करण सिंह और द्रोणाचार्य पुरस्कार
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प्राप्तकर्ता: करण सिंह
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पुरस्कार: द्रोणाचार्य पुरस्कार (Dronacharya Award)
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वर्ष: इन्हें यह पुरस्कार वर्ष 1995 में एथलेटिक्स (Athletics) खेल में उनके उत्कृष्ट कोचिंग योगदान के लिए प्रदान किया गया था।
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द्रोणाचार्य पुरस्कार: यह पुरस्कार खेलकूद के क्षेत्र में उत्कृष्ट कोचों को उनके खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा दिया
66. राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अपने प्रशिक्षण केन्द्रों में ग्रामीण व शहरी युवाओं को प्रशिक्षण देता है, ये केन्द्र स्थित है – (REET Level – 01 Mock Test)
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अजमेर (पुष्कर में)
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जयपुर (मानसरोवर क्लस्टर सहित)
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सिरोही (माउंट आबू में)
- एक ऊनी उत्पादन केंद्र (Woolen Production Centre) बीकानेर में भी स्थित है, जो प्रशिक्षण प्रदान करता है।
67. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्यपाल एक विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रखने की शक्ति रखता है-
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल एक विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रखने की शक्ति रखता है।
सही विकल्प है (c) अनु. 200।
🏛️ अनुच्छेद 200 और राज्यपाल की शक्ति
अनुच्छेद 200 राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किए गए विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति से संबंधित है। जब कोई विधेयक राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो उनके पास चार विकल्प होते हैं:
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वह विधेयक को स्वीकृति दे सकता है (विधेयक अधिनियम बन जाता है)।
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वह विधेयक पर अपनी स्वीकृति रोक सकता है।
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वह विधेयक को (धन विधेयक के अलावा) सदन को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।
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वह विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।
राज्यपाल निम्नलिखित स्थितियों में विधेयक को राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखना अनिवार्य है:
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यदि विधेयक ऐसा हो कि अधिनियम बनने पर वह उच्च न्यायालय की स्थिति को खतरे में डालता हो।
इसके अलावा, वह निम्नलिखित मामलों में भी राष्ट्रपति के लिए विधेयक को सुरक्षित रख सकता है:
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यदि विधेयक संविधान के किसी उपबंध के स्पष्ट रूप से विरुद्ध हो।
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यदि विधेयक राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के विरुद्ध हो।
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यदि विधेयक देश के व्यापक हित से संबंधित हो।
📌 अन्य अनुच्छेद
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(a) अनु. 52: यह भारत के राष्ट्रपति पद से संबंधित है।
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(b) अनु. 108: यह कुछ मामलों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) से संबंधित है।
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(d) अनु. 213: यह राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
68. राजस्थान में मुख्यमंत्री के रूप में सबसे छोटा कार्यकाल किसका है-
राजस्थान में मुख्यमंत्री के रूप में सबसे छोटा कार्यकाल हीरालाल देवीपुरा का है।
सही विकल्प है (b) हीरालाल देवीपुरा।
⏳ हीरालाल देवीपुरा का कार्यकाल
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कार्यकाल अवधि: हीरालाल देवीपुरा मात्र 16 दिन के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे।
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समय: उनका कार्यकाल 24 फरवरी 1980 से शुरू होकर 9 मार्च 1980 तक चला था।
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कारण: वे बरकतुल्ला खाँ की मृत्यु के बाद कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने थे, जब तक कि राष्ट्रपति शासन हटाकर चुनाव नहीं हुए और नया मुख्यमंत्री नहीं चुना गया।
📊 अन्य मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल
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(a) हरिदेव जोशी: ये तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे।
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(c) जगन्नाथ पहाड़िया: इनका कार्यकाल 1980-1981 तक रहा था।
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(d) बरकतुल्ला खाँ: ये राजस्थान के पहले अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री थे, जिनका कार्यकाल पद पर रहते हुए निधन होने के कारण समाप्त हुआ था।
69. राजस्थानं विधानसभा के लिए प्रथम आम चुनावों में कांग्रेस के बाद जिस राजनीतिक दल को द्वितीय सर्वाधिक स्थान प्राप्त हुए, वह है-
राजस्थान विधानसभा के लिए प्रथम आम चुनावों (1952) में कांग्रेस के बाद राम राज्य परिषद् को द्वितीय सर्वाधिक स्थान प्राप्त हुए थे।
सही विकल्प है (d) राम राज्य परिषद्।
🗳️ प्रथम राजस्थान विधानसभा चुनाव (1952) का परिणाम
प्रथम आम चुनाव 1952 में हुए थे। 160 सीटों के लिए हुए इन चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रदर्शन निम्नलिखित था:
| क्रम संख्या | राजनीतिक दल | प्राप्त सीटें |
| 1. | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 82 |
| 2. | राम राज्य परिषद् | 24 |
| 3. | भारतीय जनसंघ | 8 |
| 4. | कृषिकर लोक पार्टी | 7 |
| 5. | हिन्दू महासभा | 1 |
| 6. | निर्दलीय | 35 |
परिणामस्वरूप, राम राज्य परिषद् 24 सीटें जीतकर दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
170. राजस्थान में नौकरशाह संगठन का प्रमुख कौन है।
राजस्थान में नौकरशाह संगठन (Bureaucratic Organization) का प्रमुख मुख्य सचिव होता है।
सही विकल्प है (d) मुख्य सचिव।
🏛️ मुख्य सचिव (Chief Secretary)
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पद: मुख्य सचिव राज्य के प्रशासन में सर्वोच्च पदस्थ अधिकारी होता है।
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भूमिका: वह राज्य सरकार के सभी प्रशासनिक विभागों का प्रमुख होता है और राज्य में संपूर्ण नौकरशाही का नेता (Head of the State Bureaucracy) माना जाता है।
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नियुक्ति: मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
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कार्य:
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वह मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) के सचिव के रूप में कार्य करता है।
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वह मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार होता है।
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वह राज्य प्रशासन में समन्वय (Coordination) स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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संक्षेप में, वह राज्य प्रशासन के सभी प्रशासनिक अधिकारियों (IAS, RAS, आदि) का मुखिया होता है।
171. 29 सितम्बर, 2021 को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध करवाने हेतु किस योजना को प्रारम्भ किया है-
29 सितम्बर, 2021 को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध करवाने हेतु प्रधानमंत्री पोषण योजना को प्रारम्भ किया है।
सही विकल्प है (c) प्रधानमंत्री पोषण योजना।
🥗 प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना
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पुराना नाम: यह योजना पहले राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन कार्यक्रम (National Mid-Day Meal Scheme) या मिड डे मील योजना के नाम से जानी जाती थी।
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प्रारम्भ: इसे 29 सितम्बर, 2021 को नया नाम और विस्तार दिया गया।
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उद्देश्य:
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सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा I से VIII तक के छात्रों को पौष्टिक, गर्म पका हुआ भोजन प्रदान करना।
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स्कूलों में बच्चों के नामांकन और उपस्थिति (Enrolment and Attendance) में सुधार करना।
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बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना।
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यह योजना अगले पाँच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के लिए शुरू की गई थी।
72. राजस्थान में उत्कृष्ट विद्यालय है? योजना किसके द्वारा प्रारंभ की गई
राजस्थान में उत्कृष्ट विद्यालय योजना (Utkrisht Vidyalaya Yojana) प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रारम्भ की गई थी।
सही विकल्प है (b) प्रारंभिक शिक्षा विभाग।
🏫 उत्कृष्ट विद्यालय योजना
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विभाग: प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राजस्थान
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उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और छात्रों को बेहतर शैक्षिक सुविधाएँ प्रदान करना है।
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विशेषता: योजना के तहत ऐसे विद्यालयों का चयन किया जाता है जहाँ छात्रों की संख्या अधिक होती है, और उन्हें अतिरिक्त संसाधन, बेहतर आधारभूत संरचना (Infrastructure) और स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे एक आदर्श (Model) स्कूल के रूप में कार्य कर सकें।
73. राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल जिन कक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तक मुद्रण करता है, वह है-
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल (Rajasthan State Text Book Board – RSTBB) वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक के लिए पाठ्यपुस्तकों का मुद्रण (Printing) और वितरण (Distribution) करता है।
सही विकल्प है (d) कक्षा 1-12।
📚 राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल (RSTBB)
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स्थापना: 29 दिसंबर, 1973
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कार्यक्षेत्र का विस्तार: शुरू में यह बोर्ड केवल कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों का मुद्रण और वितरण करता था।
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वर्तमान कार्य: राजस्थान सरकार द्वारा निर्णय लेने के बाद, अब यह मण्डल कक्षा 1 से 12 तक की सभी पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण, भण्डारण और वितरण का कार्य करता है, जो निःशुल्क वितरित की जाती हैं।
74. स्माइल-3 कार्यक्रम का प्रारम्भ कब किया गया-
स्माइल-3 कार्यक्रम का प्रारम्भ 21 जून, 2021 को किया गया।
सही विकल्प है (c) 21 जून, 2021।
💻 स्माइल कार्यक्रम (SMILE Programme)
स्माइल (SMILE) का पूरा नाम है: Social Media Interface for Learning Engagement. यह राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूली शिक्षा को जारी रखने के लिए शुरू किया गया एक डिजिटल शिक्षण कार्यक्रम है।
| चरण | प्रारम्भ तिथि | मुख्य ध्यान |
| स्माइल-1 | 13 अप्रैल, 2020 | WhatsApp ग्रुप्स के माध्यम से प्रतिदिन वीडियो और अध्ययन सामग्री भेजना। |
| स्माइल-2 | 2 नवंबर, 2020 | ‘आओ घर से सीखें’ कार्यक्रम के तहत, छात्रों के लिए होमवर्क और साप्ताहिक मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित करना। |
| स्माइल-3 | 21 जून, 2021 | ‘अपनी कक्षा, अपना क्लासरूम’ के नारे के साथ, ई-कक्षा (E-Class) सामग्री और ‘लर्निंग लॉस’ को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना। |
यह कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि डिजिटल माध्यमों से भी छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
75. राजस्थान शिक्षा दर्शन कार्यक्रम का प्रसारण किस टी वी चैनल पर होगा ?
राजस्थान शिक्षा दर्शन कार्यक्रम का प्रसारण डी डी राजस्थान टी वी चैनल पर होगा।
सही विकल्प है (a) डी डी राजस्थान।
📺 राजस्थान शिक्षा दर्शन कार्यक्रम
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उद्देश्य: यह कार्यक्रम कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल माध्यमों से छात्रों की शिक्षा को जारी रखने के लिए शुरू किया गया था।
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प्रसारण: इस कार्यक्रम के तहत, कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए शैक्षणिक सामग्री, व्याख्यान और वीडियो क्लासेस का प्रसारण दूरदर्शन (DD) के डी डी राजस्थान (DD Rajasthan) चैनल पर किया जाता है।
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नामकरण: इस कार्यक्रम को ‘शिक्षा दर्शन’ (टेलीविजन के माध्यम से शिक्षा) नाम दिया गया, जबकि रेडियो के माध्यम से शिक्षा के लिए ‘शिक्षा वाणी’ कार्यक्रम शुरू किया गया था।
76. ‘निपुण भारत मिशन’ कार्यक्रम का प्रारम्भ कब किया गया ?
‘निपुण भारत मिशन’ कार्यक्रम का प्रारम्भ 5 जुलाई, 2021 को किया गया।
सही विकल्प है (a) 5 जुलाई, 2021।
🇮🇳 निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat Mission)
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पूरा नाम: National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy
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उद्देश्य: इस मिशन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में 3 से 9 वर्ष की आयु के सभी बच्चे (अर्थात बाल वाटिका से कक्षा III तक के बच्चे) वर्ष 2026-27 तक मूलभूत साक्षरता (Foundational Literacy) और संख्या ज्ञान (Numeracy) में दक्षता हासिल कर लें।
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शुभारंभ: इसे 5 जुलाई, 2021 को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शुरू किया गया।
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नोडल एजेंसी: स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग।
यह मिशन बच्चों के लिए बुनियादी पठन, लेखन और अंकगणितीय कौशल को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
77. मूक बधिर एवं नेत्रहीन बालिकाओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्कार में कितने रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है ?
मूक-बधिर एवं नेत्रहीन बालिकाओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्कार योजना के तहत ₹ 6,000 रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है।
सही विकल्प है (b) ₹ 6,000।
👧 मूक-बधिर एवं नेत्रहीन बालिकाओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्कार
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उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य राजस्थान की मूक-बधिर और नेत्रहीन बालिकाओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है।
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पात्रता: यह सहायता राशि उन बालिकाओं को दी जाती है जो राज्य सरकार द्वारा संचालित विशेष विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
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राशि: पात्र बालिकाओं को प्रतिवर्ष ₹ 6,000 (₹500 प्रतिमाह) की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा संचालित है।
78. पालनहार योजना का सम्बन्ध किससे है-
पालनहार योजना का सम्बन्ध सभी जातियों के अनाथ बच्चे से है।
सही विकल्प है (d) सभी जातियों के अनाथ बच्चे।
👶 पालनहार योजना (Palanhar Yojana)
पालनहार योजना राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है।
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उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे अनाथ या विशेष देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है जिनके माता-पिता या तो नहीं हैं, या जेल में हैं, या कानूनी रूप से उन्हें छोड़ दिया गया है।
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पात्रता: यह योजना किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लाभ निम्नलिखित श्रेणियों के सभी जातियों के बच्चों को मिलता है:
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अनाथ बच्चे।
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न्यायिक प्रक्रिया से मृत्युदंड/आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता के बच्चे।
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विधवा माता के बच्चे (जिनकी आय कम हो)।
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तलाकशुदा या परित्यक्ता महिला के बच्चे।
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पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे।
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एच.आई.वी./एड्स पीड़ित माता-पिता के बच्चे, आदि।
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विशेषता: इस योजना में, बच्चे के पालन-पोषण के लिए उसके निकटतम रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को पालनहार घोषित किया जाता है, और बच्चे की शिक्षा, पोषण और कपड़ों के लिए उन्हें मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है।
79. शैक्षिक प्रबंधन की निम्न में से कौनसी एक विशेषता नहीं है-
शैक्षिक प्रबंधन (Educational Management) की जो विशेषता दिए गए विकल्पों में से नहीं है, वह है:
(a) मूर्त प्रक्रिया (Tangible Process)
🧐 शैक्षिक प्रबंधन की विशेषताएँ
शैक्षिक प्रबंधन एक अमूर्त प्रक्रिया (Intangible Process) है, मूर्त नहीं।
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मूर्त प्रक्रिया (Tangible Process): मूर्त का अर्थ होता है जिसे छूकर या भौतिक रूप से देखा जा सके (जैसे कोई इमारत या वस्तु)। प्रबंधन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके परिणाम और प्रभाव देखे जा सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया स्वयं (जैसे निर्णय लेना, समन्वय करना, नियोजन करना) भौतिक रूप से दिखाई या छुई नहीं जा सकती।
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अमूर्त प्रक्रिया (Intangible Process): इसलिए, प्रबंधन को एक अमूर्त प्रक्रिया माना जाता है।
✅ अन्य सही विशेषताएँ
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(b) सामाजिकता (Sociality): प्रबंधन एक सामाजिक प्रक्रिया है क्योंकि यह मुख्य रूप से मानव संबंधों से संबंधित है। इसमें शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों और प्रशासकों के बीच समन्वय और सहयोग शामिल होता है।
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(c) कला एवं विज्ञान दोनों (Both Art and Science):
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विज्ञान: क्योंकि यह निश्चित सिद्धांतों, नियमों और तकनीकों (जैसे नियोजन, संगठन, नियंत्रण) पर आधारित है।
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कला: क्योंकि इन सिद्धांतों को व्यवहार में लाने के लिए व्यक्तिगत कौशल, रचनात्मकता और अनुभव (निर्णय लेने और नेतृत्व करने में) की आवश्यकता होती है।
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(d) विशुद्ध मानवीय क्रिया (Purely Human Activity): प्रबंधन का सार मनुष्यों से काम लेना और उनके माध्यम से लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इसमें मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग शामिल है, इसलिए यह एक विशुद्ध मानवीय क्रिया है।
इसलिए, सही उत्तर (a) है क्योंकि यह इसकी विशेषता नहीं है।
80. RTE-2009 की किस धारा के अनुसार विद्यालय प्रबन्धन समिति का गठन किया गया है-
RTE-2009 (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) की धारा-21 के अनुसार विद्यालय प्रबन्धन समिति (School Management Committee – SMC) का गठन किया गया है।
सही विकल्प है (d) धारा-21।
📜 RTE अधिनियम, 2009 और SMC
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धारा 21: यह धारा प्रत्येक सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक विद्यालय प्रबन्धन समिति (SMC) के गठन का प्रावधान करती है।
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SMC का उद्देश्य: SMC का गठन विद्यालय के प्रबंधन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने और बच्चों के अधिकारों की निगरानी के लिए किया जाता है।
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संरचना: इस समिति में 75% सदस्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता या अभिभावक होते हैं, जिससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
📌 अन्य महत्त्वपूर्ण धाराएँ:
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धारा 12: यह निजी और विशेष श्रेणी के विद्यालयों में 25% सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देने से संबंधित है।
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धारा 31: यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार के संरक्षण और निगरानी से संबंधित है।
81. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 किस प्रारूप पर आधारित है-
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) 5+3+3+4 के नए शैक्षणिक और पाठ्यचर्यागत ढाँचे (Curricular Structure) पर आधारित है।
सही विकल्प है (c) 5+3+3+4।
📘 नई शैक्षणिक संरचना (5+3+3+4)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने 10+2 की पुरानी संरचना को 5+3+3+4 की नई संरचना से बदल दिया है। यह संरचना 3 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करती है।
| चरण (Phase) | अवधि (Years) | आयु वर्ग (Age Group) | शामिल कक्षाएँ (Grades) |
| 1. मूलभूत चरण (Foundational Stage) | 5 वर्ष | 3 से 8 वर्ष | 3 वर्ष की प्री-स्कूलिंग/आँगनवाड़ी + कक्षा I और II |
| 2. प्रारंभिक चरण (Preparatory Stage) | 3 वर्ष | 8 से 11 वर्ष | कक्षा III, IV और V |
| 3. मध्य चरण (Middle Stage) | 3 वर्ष | 11 से 14 वर्ष | कक्षा VI, VII और VIII |
| 4. माध्यमिक चरण (Secondary Stage) | 4 वर्ष | 14 से 18 वर्ष | कक्षा IX, X, XI और XII |
यह नई संरचना बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास को समग्र रूप से ध्यान में रखती है।
82. राजस्थान RTE-2011 के अनुसार निजी विद्यालयों में प्रवेश दिये गये बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति किसके द्वारा की जायेगी-
राजस्थान RTE-2011 के अनुसार निजी विद्यालयों में प्रवेश दिये गये बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जायेगी।
सही विकल्प है (c) राज्य सरकार।
💰 RTE और फीस प्रतिपूर्ति
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प्रावधान: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE-2009) की धारा 12(1)(ग) के तहत निजी विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और सुविधा वंचित समूह के बच्चों को अपनी प्रारंभिक कक्षा की 25% सीटों पर निःशुल्क प्रवेश दें।
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प्रतिपूर्ति: इन बच्चों की शिक्षा का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। राजस्थान RTE नियम, 2011 में यह स्पष्ट किया गया है कि निजी विद्यालयों को इन बच्चों पर हुए वास्तविक खर्च या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रति बालक व्यय (जो भी कम हो) की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
83. “विशारी” है-
84. कम्प्यूटर के प्रोसेसर की गति. में मापी जाती है।
कम्प्यूटर के प्रोसेसर की गति गीगाहर्ट्ज में मापी जाती है।
सही विकल्प है (a) गीगाहर्ट्ज।
🖥️ प्रोसेसर की गति
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गीगाहर्ट्ज (GHz): प्रोसेसर की गति को सामान्यतः मेगाहर्ट्ज़ (MHz) या गीगाहर्ट्ज़ (GHz) में मापा जाता है। हर्ट्ज़ आवृत्ति की इकाई है। 1 गीगाहर्ट्ज़ का अर्थ है $10^9$ चक्र प्रति सेकंड (Giga-cycles per second)। यह संख्या बताती है कि प्रोसेसर प्रति सेकंड कितने चक्र (Cycles) पूरे करता है, जो सीधे उसकी प्रोसेसिंग क्षमता को दर्शाता है।
📌 अन्य विकल्प
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(b) बॉड (Baud): यह प्रति सेकंड सिग्नल या प्रतीक परिवर्तनों की संख्या की माप है, जिसका उपयोग डेटा संचार (Data Communication) में किया जाता है, न कि प्रोसेसर की गति में।
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(c) BPS (Bits Per Second): यह प्रति सेकंड स्थानांतरित होने वाले बिट्स की संख्या है, जिसका उपयोग इंटरनेट या नेटवर्क की डेटा ट्रांसफर दर को मापने के लिए किया जाता है।
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(d) MIPS (Million Instructions Per Second): यह प्रति सेकंड निष्पादित होने वाले मिलियन निर्देशों की संख्या है। यह सैद्धांतिक रूप से प्रोसेसर की गति मापने की एक और इकाई है, लेकिन आधुनिक कम्प्यूटर प्रोसेसर की गति को मापने के लिए गीगाहर्ट्ज़ का उपयोग अधिक सामान्य और मानक है।
85. शिक्षा मनोविज्ञान का सम्बन्ध किससे नहीं हैं ?
शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology) का सम्बन्ध संचार माध्यमों का अध्ययन से नहीं है।
सही विकल्प है (d) संचार माध्यमों का अध्ययन।
🧠 शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र
शिक्षा मनोविज्ञान मुख्य रूप से शिक्षण-अधिगम (Teaching-Learning) प्रक्रिया से संबंधित है। इसका उद्देश्य शैक्षिक वातावरण में मानव व्यवहार को समझना और सुधारना है।
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(a) मानव व्यवहार का अध्ययन: शिक्षा मनोविज्ञान में, सीखने वाले (learner), शिक्षक (teacher), और शिक्षण सामग्री के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है ताकि सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके।
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(b) मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन: इसमें सीखने वाले की संज्ञानात्मक (Cognitive) प्रक्रियाएँ जैसे स्मृति, ध्यान, बुद्धि, समस्या-समाधान और चिंतन (Thinking) का अध्ययन शामिल है।
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(c) सीखने के तरीकों का अध्ययन: यह इसका केंद्रीय विषय है। इसमें विभिन्न सीखने के सिद्धांतों (Learning Theories), अधिगम की शैलियों (Learning Styles) और प्रेरणा (Motivation) का अध्ययन किया जाता है ताकि शिक्षण विधियों को अनुकूलित किया जा सके।
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(d) संचार माध्यमों का अध्ययन (Study of Communication Media): यह क्षेत्र मुख्य रूप से जनसंचार (Mass Communication), मीडिया अध्ययन (Media Studies) या सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) जैसे विषयों से संबंधित है, न कि शिक्षा मनोविज्ञान के मुख्य उद्देश्य से।
शिक्षा मनोविज्ञान इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि मनुष्य कैसे सीखते हैं, जबकि संचार माध्यमों का अध्ययन इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि सूचना कैसे प्रसारित होती है।
86. निम्न में से कौनसा कथन विकास के बारे में सत्य नहीं है-
विकास के बारे में जो कथन सत्य नहीं है, वह है:
(d) विकास विशिष्ट से सामान्य की ओर होता है।
❌ गलत कथन का स्पष्टीकरण
वास्तव में, विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर (General to Specific) होता है।
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उदाहरण: एक शिशु पहले अपने पूरे शरीर को हिलाता है (सामान्य प्रतिक्रिया) और बाद में ही किसी वस्तु को पकड़ने के लिए केवल उँगलियों का उपयोग करना सीखता है (विशिष्ट प्रतिक्रिया)। इसी तरह, बच्चा पहले अस्पष्ट ध्वनियाँ (सामान्य) निकालता है और फिर स्पष्ट शब्द (विशिष्ट) बोलना सीखता है।
✅ अन्य सत्य कथनों का स्पष्टीकरण
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(a) विकास अंतः क्रिया का फल है (Development is the result of Interaction): यह कथन सत्य है। विकास वंशानुक्रम (Heredity) और वातावरण (Environment) की अंतःक्रिया का परिणाम होता है। विकास = (वंशानुक्रम x वातावरण)
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(b) विकास एक व्यवस्थित श्रृंखला का अनुगामी है (Development follows an orderly sequence): यह कथन सत्य है। विकास एक निश्चित क्रम या पैटर्न का पालन करता है, जैसे:
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सिर से पैर की ओर (Cephalocaudal Principle): विकास पहले सिर से शुरू होता है और पैरों की तरफ बढ़ता है।
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केन्द्र से परिधि की ओर (Proximodistal Principle): विकास शरीर के केंद्र से शुरू होकर बाहरी भागों (जैसे हाथों और पैरों) की ओर बढ़ता है।
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(c) विकास एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है (Development is an individual process): यह कथन सत्य है। हालाँकि विकास का क्रम सभी में समान होता है, लेकिन विकास की दर (Rate of Development) हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। दो बच्चे एक ही उम्र में अलग-अलग गति से विकास कर सकते हैं।
87. निम्न में से कौन सा एक सही क्रम है ?
मानव प्रजनन और भ्रूण विकास (Embryo Development) के संदर्भ में, सही क्रम है:
(d) अण्डाणु-शुक्राणु, युग्मनज, ब्लास्टोसिस्ट
🧬 विकास का सही क्रम
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अण्डाणु-शुक्राणु (Ovum and Sperm):
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यह जनन कोशिकाएँ हैं। निषेचन (Fertilization) की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब एक शुक्राणु एक अण्डाणु को सफलतापूर्वक भेदता है।
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युग्मनज (Zygote):
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निषेचन के तुरंत बाद, अण्डाणु और शुक्राणु के नाभिक (Nuclei) के संलयन से बनने वाली एकल कोशिका को युग्मनज कहते हैं। यह मानव जीवन की पहली कोशिका होती है।
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ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst):
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युग्मनज तेजी से विभाजित होकर बहुकोशिकीय संरचना बनाता है जिसे पहले मोरूला (Morula) कहते हैं, और फिर यह संरचना गर्भाशय की ओर बढ़ती है। गर्भाशय में पहुँचने पर, यह संरचना एक खोखली गेंद का रूप ले लेती है जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं। यह वही अवस्था है जिसमें भ्रूण गर्भाशय की दीवार (Endometrium) में प्रत्यारोपित (Implantation) होता है।
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इस प्रकार, सही विकासात्मक क्रम है: अण्डाणु-शुक्राणु (निषेचन) – युग्मनज (पहली कोशिका) – ब्लास्टोसिस्ट (प्रत्यारोपण की अवस्था)।
88. ‘मानसिक संरचनाएँ जो चिन्तन के निर्माण प्रखण्ड हैं’ इसके लिए पियाजे ने किस शब्द/पद का प्रयोग किया है ?
‘मानसिक संरचनाएँ जो चिन्तन के निर्माण प्रखण्ड हैं’ (Mental structures that are the building blocks of thought) इसके लिए जीन पियाजे ने स्कीमा (Schema) शब्द का प्रयोग किया है।
सही विकल्प है (c) स्कीमा (अवधारणाएँ)।
🧠 जीन पियाजे और स्कीमा
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स्कीमा (Schema): पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Cognitive Development Theory) के अनुसार, स्कीमा ज्ञान की बुनियादी इकाइयाँ या मानसिक संरचनाएँ हैं।
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ये वे पैटर्न या ढाँचे हैं जिनका उपयोग व्यक्ति जानकारी को व्यवस्थित करने, व्याख्या करने और दुनिया को समझने के लिए करते हैं।
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उदाहरण के लिए, एक बच्चे में ‘कुत्ता’ का स्कीमा हो सकता है जिसमें चार पैर, फर और भौंकने की आवाज़ शामिल हो। जब वह चार पैरों वाला कोई नया जानवर देखता है, तो वह अपने ‘कुत्ता’ स्कीमा का उपयोग करके उसे पहचानने की कोशिश करता है।
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अनुकूलन (Adaptation): पियाजे के अनुसार, बच्चे इन स्कीमाओं को अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया द्वारा विकसित करते हैं, जिसमें दो उप-प्रक्रियाएँ शामिल हैं:
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आत्मसात्करण (Assimilation): नई जानकारी को मौजूदा स्कीमा में फिट करना।
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समायोजन (Accommodation): मौजूदा स्कीमा को नई जानकारी के अनुरूप बदलने के लिए उसमें संशोधन करना।
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📌 अन्य पद
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(a) जीन (Gene): यह आनुवंशिकता की इकाई है, जिसका संबंध जैविक विकास से है, पियाजे के सिद्धांत से नहीं।
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(d) विकास का क्षेत्र (Zone of Proximal Development – ZPD): यह पद लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत से संबंधित है, जिसका अर्थ है बच्चे के वर्तमान विकास स्तर और उसके संभावित विकास स्तर के बीच का अंतर।
89. सीखने की प्रक्रिया के चार चरण कौनसे हैं-
सीखने की प्रक्रिया के चार चरण (या सीखने के चक्र के प्रमुख तत्व) आमतौर पर माने जाते हैं:
(c) लक्ष्य, हेतु, क्रिया, अनुगमन
🧠 सीखने की प्रक्रिया के चार चरण (Learning Process Cycle)
मनोवैज्ञानिकों (विशेषकर गैग्ने, हिलगार्ड, या व्यवहारवादी दृष्टिकोण) द्वारा सीखने की प्रक्रिया को एक चक्र के रूप में देखा जाता है जिसमें ये चार प्रमुख तत्व शामिल होते हैं:
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लक्ष्य (Goal / Aim):
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यह वह उद्देश्य या वांछित परिणाम है जिसे सीखने वाला प्राप्त करना चाहता है। यह सीखने की प्रक्रिया को दिशा देता है।
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हेतु/अभिप्रेरणा (Motive / Drive / Motivation):
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यह वह आंतरिक बल या आवश्यकता है जो व्यक्ति को सीखने की ओर प्रेरित करता है। सीखने की प्रक्रिया की शुरुआत हेतु से ही होती है।
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क्रिया/व्यवहार (Action / Response):
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लक्ष्य की प्राप्ति के लिए व्यक्ति जो कार्य या प्रयास करता है, वह क्रिया कहलाती है। यह वह व्यवहार है जो सीखने वाला प्रदर्शित करता है।
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अनुगमन/पुनर्बलन (Follow-up / Reinforcement):
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क्रिया करने के बाद जो परिणाम या पुनर्बलन प्राप्त होता है। यदि क्रिया सफल होती है और लक्ष्य प्राप्त होता है, तो सकारात्मक अनुगमन (पुनर्बलन) मिलता है, जिससे भविष्य में उस क्रिया को दोहराने की संभावना बढ़ जाती है और सीखना स्थायी होता है।
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90. एक आंतरिक मानसिक दशा जो. किसी व्यवहार को आरंभ करने तथा बनाए रखने के लिये प्रवृत्त करती है, कहलाती है-
एक आंतरिक मानसिक दशा जो किसी व्यवहार को आरंभ करने तथा बनाए रखने के लिए प्रवृत्त करती है, अभिप्रेरणा (Motivation) कहलाती है।
सही विकल्प है (c) अभिप्रेरणा।
🔥 अभिप्रेरणा (Motivation)
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परिभाषा: अभिप्रेरणा (Motivation) किसी व्यक्ति के भीतर की वह आंतरिक शक्ति है जो उसे किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य करने, ऊर्जा लगाने और प्रयास जारी रखने के लिए प्रेरित करती है। यह व्यवहार को शुरू करने (जैसे पढ़ाई शुरू करना) और उसे बनाए रखने (जैसे परीक्षा तक पढ़ाई जारी रखना) के लिए आवश्यक है।
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चक्र: इसे अक्सर एक चक्र के रूप में देखा जाता है जिसमें आवश्यकता (Need), अंतर्नोद (Drive), प्रोत्साहन (Incentive), और लक्ष्य शामिल होते हैं।
🔍 अन्य पद
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(a) अभिक्षमता (Aptitude): यह किसी व्यक्ति की भविष्य में किसी विशेष कौशल या ज्ञान को सीखने की जन्मजात क्षमता है। यह वर्तमान व्यवहार के बजाय भविष्य की संभावना को दर्शाता है।
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(b) अभिवृत्ति (Attitude): यह किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक तरीके से प्रतिक्रिया करने की मानसिक तत्परता है। यह व्यवहार को निर्देशित कर सकती है लेकिन यह आवश्यक नहीं कि उसे आरंभ करे या बनाए रखे।
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(d) अभिरूचि (Interest): यह किसी वस्तु, कार्य या व्यक्ति में ध्यान केंद्रित करने या उसमें आनंद लेने की प्रवृत्ति है। यह अभिप्रेरणा का एक स्रोत हो सकती है, लेकिन अभिप्रेरणा स्वयं वह बल है जो कार्य को आरंभ करता है।
91. किशोर के समायोजन की प्रक्रिया शिक्षक का योगदान निम्नलिखित में से कौनसा है-
किशोर के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया में शिक्षक का सकारात्मक योगदान निम्नलिखित में से आकांक्षा का उचित स्तर तय करना है।
सही विकल्प है (c) आकांक्षा का उचित स्तर तय करना।
🍎 शिक्षक का सकारात्मक योगदान
समायोजन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं और बाहरी परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करता है। किशोरावस्था (Adolescence) में यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है। शिक्षक निम्न प्रकार से सकारात्मक योगदान दे सकता है:
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(c) आकांक्षा का उचित स्तर तय करना (Setting an appropriate level of aspiration):
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जब शिक्षक किशोरों को उनकी वास्तविक क्षमताओं के अनुरूप प्राप्य (Achievable) लक्ष्य निर्धारित करने में मदद करता है, तो वे सफलता प्राप्त करते हैं।
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सफलता से उन्हें आत्म-विश्वास मिलता है, जिससे वे बेहतर समायोजन कर पाते हैं।
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यदि लक्ष्य बहुत ऊँचे (Unrealistic) होंगे, तो विफलता से हताशा और कुसमायोजन (Maladjustment) उत्पन्न होता है।
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❌ नकारात्मक योगदान (जिन्हें शिक्षक को नहीं करना चाहिए)
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(a) कमजोरियों का ज्ञान न कराना: किशोरों को उनकी कमजोरियों और शक्तियों का वास्तविक ज्ञान कराना आवश्यक है, ताकि वे खुद को जान सकें और उनमें सुधार कर सकें। कमजोरियाँ छिपाना समायोजन में बाधक है।
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(b) मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति न करना: यद्यपि शिक्षक शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति सीधे नहीं कर सकता, लेकिन वह मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं (जैसे प्रेम, सुरक्षा, पहचान और सम्मान) की पूर्ति में सहायक होना चाहिए। आवश्यकताओं की उपेक्षा कुसमायोजन पैदा करती है।
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(d) समस्या का समाधान न करना: शिक्षक को समस्या का समाधान स्वयं नहीं करना चाहिए, बल्कि किशोर को समस्या-समाधान कौशल सिखाना चाहिए। पूरी तरह से समाधान न करना किशोर को असहाय बना सकता है।
92. गार्डनर के अनुसार वैज्ञानिकों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं तथा गणितज्ञों में कौनसी बुद्धि पाई जाती है-
गार्डनर के अनुसार वैज्ञानिकों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं तथा गणितज्ञों में मुख्य रूप से तार्किक-गणितीय बुद्धि (Logical-Mathematical Intelligence) पाई जाती है।
सही विकल्प है (c) तार्किक-गणितीय बुद्धि।
🧠 हावर्ड गार्डनर का बहु-बुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences)
हावर्ड गार्डनर ने आठ या नौ प्रकार की बुद्धियों का वर्णन किया है।
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तार्किक-गणितीय बुद्धि (Logical-Mathematical Intelligence):
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यह उन व्यक्तियों में प्रमुख होती है जो तर्क करने, समस्याओं को हल करने, पैटर्न पहचानने, संख्याओं का कुशलता से उपयोग करने और वैज्ञानिक तरीके से सोचने की क्षमता रखते हैं।
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पेशेवर उदाहरण: वैज्ञानिक, गणितज्ञ, इंजीनियर, जासूस, और नोबेल पुरस्कार विजेता (जो अक्सर वैज्ञानिक या आर्थिक क्षेत्रों में योगदान देते हैं)।
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🔍 अन्य बुद्धियाँ
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(a) अंतर्वैयक्तिक बुद्धि (Interpersonal Intelligence): यह दूसरों की भावनाओं, मनोदशाओं, प्रेरणाओं और इच्छाओं को समझने और उनके साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने की क्षमता है। (जैसे: शिक्षक, परामर्शदाता, राजनेता)।
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(b) प्राकृतिक बुद्धि (Naturalistic Intelligence): यह प्रकृति को समझने, प्राकृतिक दुनिया में अंतर करने, और पौधों तथा जानवरों को पहचानने की क्षमता है। (जैसे: किसान, जीवविज्ञानी, प्रकृतिवादी)।
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(d) अस्तित्ववादी बुद्धि (Existential Intelligence): यह जीवन, मृत्यु और अस्तित्व के गहरे सवालों पर विचार करने की क्षमता है। (जैसे: दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता)।
93. मुख्यमंत्री ने जोधपुर से उद्घाटन कब किया? 512 नई इंदिरा रसोईयों का
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर से 512 नई इंदिरा रसोईयों का उद्घाटन 18 सितम्बर 2022 को किया था।
सही विकल्प है (b) 18 सितम्बर 2022।
🍲 इंदिरा रसोई योजना (Indira Rasoi Yojana)
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मूल प्रारम्भ: 20 अगस्त, 2020
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उद्देश्य: “कोई भूखा न सोए” के संकल्प के साथ गरीबों और जरूरतमंदों को कम कीमत पर (वर्तमान में ₹8 प्रति थाली) पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
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विस्तार चरण: 18 सितम्बर 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर से 512 नई इंदिरा रसोईयों का शुभारंभ किया, जिससे राज्य में कुल इंदिरा रसोईयों की संख्या 358 से बढ़कर 870 हो गई थी।
94. बिरला फाउण्डेशन की ओर से बिहारी पुरस्कार 2022 किसे प्रदान किया गया?
बिरला फाउण्डेशन की ओर से बिहारी पुरस्कार 2022 माधव हाड़ा को प्रदान किया गया।
सही विकल्प है (b) माधव हाड़ा।
🏆 32वाँ बिहारी पुरस्कार (2022)
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विजेता: डॉ. माधव हाड़ा
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पुरस्कार: 32वाँ बिहारी पुरस्कार (32nd Bihari Puraskar)
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कृति: उन्हें उनकी आलोचनात्मक कृति ‘पचरंग चोला पहर सखी री’ के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
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परिचय: डॉ. माधव हाड़ा उदयपुर के प्रसिद्ध साहित्यकार और आलोचक हैं।
📌 महत्त्वपूर्ण संदर्भ
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बिहारी पुरस्कार 2021: यह पुरस्कार मधु कांकरिया को उनके उपन्यास ‘हम यहाँ थे’ के लिए प्रदान किया गया था।
95. राज्य में जनवरी 2023 से किस कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में लैपर्ड सफारी प्रारम्भ की जाएगी ?
राज्य में जनवरी 2023 से बांसियाल और मनसामाता दोनों कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में लैपर्ड सफारी प्रारम्भ की गई है।
सही विकल्प है (d) (b) व (c) दोनों।
🐆 लैपर्ड सफारी का विस्तार
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घोषणा: राजस्थान सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लैपर्ड (तेंदुए) सफारी का विस्तार करने का निर्णय लिया था।
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क्षेत्र: जनवरी 2023 से:
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बांसियाल खेतड़ी (Bansiyal Khetri), झुंझुनू: यह क्षेत्र पहले से ही तेंदुए की उपस्थिति के लिए जाना जाता है।
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मनसामाता (Mansa Mata), झुंझुनू: इस क्षेत्र को भी लैपर्ड सफारी के लिए विकसित किया गया।
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ये दोनों कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र झुंझुनू जिले में स्थित हैं और वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम दे रहे हैं।
📌 अन्य विकल्प
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(a) रणखार (RanKhar): यह जालौर जिले में स्थित राजस्थान का पहला सामुदायिक कंजर्वेशन रिजर्व है। यह जंगली गधों (Wild Ass) के लिए प्रसिद्ध है।
96. अमूल कम्पनी द्वारा राजस्थान का सातवां ‘ऑनेस्ट मिल्क एण्ड फूड प्लांट’ कहाँ स्थापित किया गया है?
अमूल कम्पनी द्वारा राजस्थान का सातवां ‘ऑनेस्ट मिल्क एण्ड फूड प्लांट’ रानपुर, कोटा में स्थापित किया गया है।
सही विकल्प है (a) रानपुर, कोटा।
🥛 अमूल प्लांट, कोटा
-
स्थान: रानपुर, कोटा (Ranpur, Kota)
-
महत्व: यह राजस्थान में स्थापित होने वाला सातवाँ और सबसे बड़ा ऑनेस्ट मिल्क एण्ड फूड प्लांट है।
-
उद्देश्य: इस प्लांट की स्थापना से कोटा संभाग और आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल सकेगा और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति बेहतर होगी।
अमूल (गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड) भारत की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्थाओं में से एक है।
97. परवन बांध पर देश की सबसे बड़ी वाटर टनल किस क्षेत्र में बनायी जा रही है?
परवन बांध पर देश की सबसे बड़ी वाटर टनल हाड़ौती क्षेत्र में बनायी जा रही है।
सही विकल्प है (b) हाड़ौती।
🌊 परवन वृहद सिंचाई परियोजना (Parwan Major Irrigation Project)
-
परवन नदी: परवन नदी चंबल नदी की एक सहायक नदी है।
-
स्थान: परवन बांध राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है।
-
क्षेत्र: झालावाड़ जिला राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) का हिस्सा है।
-
वाटर टनल: इस परियोजना के तहत देश की सबसे लंबी और सबसे बड़ी जल सुरंग (Water Tunnel) बनाई जा रही है, जिसकी लंबाई लगभग 8.75 किलोमीटर है।
-
उद्देश्य: इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य झालावाड़, बारां और कोटा जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और पेयजल की समस्या को दूर करना है।
98. 19 नवम्बर से राज्य की सभी स्कूलों में शुरु होने वाले ‘चैस इन स्कूल’ कार्यक्रम की शुरुआत 10 नवम्बर 2022 को कहाँ से की?
19 नवम्बर से राज्य की सभी स्कूलों में शुरु होने वाले ‘चैस इन स्कूल’ कार्यक्रम की शुरुआत 10 नवम्बर 2022 को बीकानेर से की गई।
सही विकल्प है (d) बीकानेर।
♟️ चैस इन स्कूल कार्यक्रम
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शुभारंभ तिथि: 10 नवम्बर 2022
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स्थान: बीकानेर
-
उद्देश्य:
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छात्रों में मानसिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना।
-
बच्चों में एकाग्रता, समस्या-समाधान कौशल और तार्किक चिंतन को विकसित करना।
-
-
क्रियान्वयन:
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राजस्थान में इसे प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को “नो बैग डे” के अवसर पर विद्यालयों में अनिवार्य रूप से खिलाया जाएगा।
-
यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूली छात्रों के समग्र विकास के लिए शुरू की गई एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
98. 19 नवम्बर से राज्य की सभी स्कूलों में शुरु होने वाले ‘चैस इन स्कूल’ कार्यक्रम की शुरुआत 10 नवम्बर 2022 को कहाँ से की?
19 नवम्बर से राज्य की सभी स्कूलों में शुरु होने वाले ‘चैस इन स्कूल’ कार्यक्रम की शुरुआत 10 नवम्बर 2022 को बीकानेर से की गई।
सही विकल्प है (d) बीकानेर।
♟️ चैस इन स्कूल कार्यक्रम
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शुभारंभ तिथि: 10 नवम्बर 2022
-
स्थान: बीकानेर
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उद्देश्य:
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छात्रों में मानसिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना।
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बच्चों में एकाग्रता, समस्या-समाधान कौशल और तार्किक चिंतन को विकसित करना।
-
-
क्रियान्वयन:
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राजस्थान में इसे प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को “नो बैग डे” के अवसर पर विद्यालयों में अनिवार्य रूप से खिलाया जाएगा।
-
यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूली छात्रों के समग्र विकास के लिए शुरू की गई एक महत्त्वपूर्ण पहल है।
99. राज्य के सरकारी विद्यालयों में गणित और विज्ञान की बेहतर पढ़ाई के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् ने किसके साथ समझौता किया ?
राज्य के सरकारी विद्यालयों में गणित और विज्ञान की बेहतर पढ़ाई के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् ने एडुइसफन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है।
सही विकल्प है (a) एडुइसफन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड।
🔬 गणित और विज्ञान शिक्षा में सुधार
-
संस्था: राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् (Rajasthan School Education Council – RCEC)
-
साझेदार: एडुइसफन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Eduisfun Technologies Private Limited)
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उद्देश्य: इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए गणित और विज्ञान जैसे विषयों को इंटरैक्टिव (Interactive) और मनोरंजक (Fun) तरीके से पढ़ाना है।
-
क्रियान्वयन: यह समझौता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से गणित और विज्ञान के अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझाने के लिए डिजिटल कंटेंट और तकनीकी सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे छात्रों का अधिगम स्तर सुधर सके।
100. इण्डिया स्टोन मार्ट-2022 के अन्तर्गत मुख्यमंत्री ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से किसे सम्मानित किया
- (a) अशोक पाटनी (आर.के. ग्रुप के)
- (b) अरुण कुमार अग्रवाल (राजस्थान उद्योग के, प्रश्न में अम्ण अग्रवाल लिखा है, सही नाम अरुण कुमार अग्रवाल है)
- (c) आर वीरमणी (जेम ग्रुप के)
101. सृष्टि पांडे को किस राष्ट्रीय जूनियर खेल से मेडिल प्राप्त हुआं है?
- उन्होंने नवंबर 2019 में आयोजित 34वीं राष्ट्रीय जूनियर गर्ल्स अंडर-19 शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता था।
- वह एक महिला अंतरराष्ट्रीय मास्टर (WIM) भी हैं और उन्होंने कॉमनवेल्थ शतरंज चैंपियनशिप 2019 में अंडर-18 गर्ल्स वर्ग में कांस्य पदक भी जीता था।
(c) शतरंज
102. किस वर्ष में बॉस्केटबॉल को राजस्थान का राज्य खेल घोषित किया गया-
बॉस्केटबॉल को राजस्थान का राज्य खेल 1948 में घोषित किया गया।
सही विकल्प है (c) 1948 में।
🏀 बास्केटबॉल: राजस्थान का राज्य खेल
-
घोषणा वर्ष: 1948
-
महत्व: बास्केटबॉल की घोषणा ने राज्य में इस खेल के विकास को बढ़ावा दिया, और यह आज भी युवा खिलाड़ियों के बीच काफी लोकप्रिय है।
103. राजस्थान में ‘डॉ. सविता अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय विवाह योजना’ किस वर्ष शुरू हुई थी?
राजस्थान में ‘डॉ. सविता अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय विवाह योजना’ वर्ष 2006 में शुरू हुई थी।
सही विकल्प है (b) 2006।
💑 डॉ. सविता अम्बेडकर अंतर्राज्यीय विवाह योजना
-
शुरुआत: 2006
-
उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और जातिगत भेदभाव को समाप्त करना है।
-
पात्रता: यह योजना ऐसे अंतर्राज्यीय (Inter-State) विवाहों को प्रोत्साहन देती है जिनमें:
-
एक पक्ष अनुसूचित जाति (Scheduled Caste – SC) का हो।
-
दूसरा पक्ष किसी भी अन्य जाति (SC/ST/OBC/General) का हो।
-
-
वित्तीय सहायता: योजना के तहत ऐसे युगल को आर्थिक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा संचालित है।
104. राजस्थान की कौनसी परियोजना बाह्य सहायता विकास परियोजना नहीं है-
राजस्थान की एग्रो फूड पार्क (ए.एफ.पी.) परियोजना बाह्य सहायता विकास परियोजना नहीं है।
सही विकल्प है (a) एग्रो फूड पार्क (ए.एफ.पी.)।
🏛️ बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ (Externally Aided Projects)
बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ वे होती हैं जिन्हें विश्व बैंक (World Bank), एशियाई विकास बैंक (ADB), या जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता (ऋण या अनुदान) मिलती है।
-
(a) एग्रो फूड पार्क (ए.एफ.पी.): इस परियोजना का विकास और वित्तपोषण मुख्य रूप से भारत सरकार के कृषि मंत्रालय और राज्य सरकार के राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) द्वारा किया जाता है। यह बाह्य सहायता प्राप्त परियोजना नहीं है।
-
(b) राजस्थान शहरी क्षेत्र विकास विनियोजन कार्यक्रम (Rajasthan Urban Sector Development Investment Program – RUSDIP): यह परियोजना एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से संचालित है।
-
(c) राजस्थान ग्रामीण आजीविका परियोजना (Rajasthan Rural Livelihoods Project – RRLP): इस परियोजना को विश्व बैंक (World Bank) द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त थी।
-
(d) राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना (Rajasthan Agricultural Competitiveness Project – RACP): इस परियोजना को भी विश्व बैंक (World Bank) द्वारा सहायता प्राप्त है।
इस प्रकार, केवल एग्रो फूड पार्क बाह्य सहायता पर निर्भर नहीं है।
105. मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा युवाओं के प्रशिक्षण एवं कौशल वर्धन हेतु फरवरी 2019, में प्रारंभ की गई योजना है-
यह योजना है (d) SHREYAS।
🏆 SHREYAS योजना
SHREYAS का पूरा नाम है Scheme for Higher Education Youth in Apprenticeship and Skills (उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए प्रशिक्षुता और कौशल में योजना)।
-
यह फरवरी 2019 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development – MHRD), जो अब शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) है, द्वारा शुरू की गई थी।
-
उद्देश्य: उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों के लिए उद्योगों में प्रशिक्षुता (Apprenticeship) और कौशल विकास (Skill Development) के अवसर प्रदान करना, ताकि उनकी रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ सके।
106. किस विकल्प के सभी शब्द क्रिया से बनी भाववाचक संज्ञा हैं?
सही विकल्प है (a) पढ़ाई, लिखावट।
आइए समझते हैं क्यों:
-
पढ़ाई: यह ‘पढ़ना’ (क्रिया) से बनी भाववाचक संज्ञा है।
-
लिखावट: यह ‘लिखना’ (क्रिया) से बनी भाववाचक संज्ञा है।
❌ अन्य विकल्पों का विश्लेषण
| विकल्प | शब्द | मूल शब्द | मूल शब्द का प्रकार |
| (b) | भलाई | भला | विशेषण |
| सजावट | सजाना | क्रिया | |
| (c) | बुराई | बुरा | विशेषण |
| बनावट | बनाना | क्रिया | |
| (d) | अच्छाई | अच्छा | विशेषण |
| दिखावट | दिखाना | क्रिया |
निष्कर्ष: केवल विकल्प (a) में दिए गए दोनों शब्द (पढ़ाई और लिखावट) मूल रूप से क्रिया से बने हैं, जबकि अन्य विकल्पों में कम से कम एक शब्द विशेषण से बना है।
107. ‘पुस्तक’ से कौन-सा विशेषण बनेगा?
सही विकल्प है (c) पुस्तकीय।
📖 विश्लेषण
-
पुस्तकीय (Pustakiya): यह ‘पुस्तक’ (संज्ञा) से बना विशेषण शब्द है। इसका अर्थ होता है ‘पुस्तक से संबंधित’ या ‘केवल पुस्तकों पर आधारित’ (जैसे: पुस्तकीय ज्ञान)।
-
उदाहरण: “उसे पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी लेना चाहिए।”
-
🔍 अन्य विकल्पों का प्रकार
-
(a) पुस्तकालय (Pustakalay): यह एक संज्ञा शब्द है (अर्थ: पुस्तकों का घर)।
-
(b) पुस्तकें (Pustaken): यह ‘पुस्तक’ का बहुवचन रूप है, जो एक संज्ञा शब्द ही है।
-
(d) पुस्तक (Pustak): यह मूल संज्ञा शब्द है।
108. ‘अन्तर्निहित’ शब्द का सही संधि-विच्छेद होगा-
‘अन्तर्निहित’ शब्द का सही संधि-विच्छेद (a) अन्तः + निहित होगा।
यह विसर्ग संधि (Visarga Sandhi) का उदाहरण है।
🔬 विसर्ग संधि नियम
जब विसर्ग (:) के बाद घोष व्यंजन (वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ व्यंजन, या य, र, ल, व, ह) आता है, तो विसर्ग ‘र्’ (र) या ‘रेफ’ में बदल जाता है।
यहाँ:
-
अन्तः विसर्ग + निहित न (वर्ग का पाँचवाँ व्यंजन)
-
विसर्ग : ‘र्’ में बदल जाता है, और यह ‘र्’ अगले अक्षर न के ऊपर रेफ के रूप में लग जाता है।
109. निम्नलिखित में से शुद्ध शब्द छांटिए-
दिए गए विकल्पों में से शुद्ध शब्द है: (d) वाल्मीकि।
❌ अशुद्ध शब्दों का शुद्ध रूप
| अशुद्ध शब्द | शुद्ध रूप | शुद्धिकरण का कारण |
| (a) अभिष्ट | अभीष्ट | ‘अभि’ उपसर्ग (छोटा ‘इ’) और ‘ईष्ट’ (बड़ा ‘ई’)। संधि होकर ‘ई’ की मात्रा आती है। |
| (b) अनाधिकार | अनधिकार | यह ‘अन्’ (नहीं) + ‘अधिकार’ से मिलकर बना है। ‘अन्’ में ‘न’ पूरा रहता है, ‘आ’ की मात्रा नहीं आती। |
| (c) उज्जवल | उज्ज्वल | इसमें ‘उत्’ + ‘ज्वल’ संधि होती है। ‘त’ के बाद ‘ज’ आने पर ‘त’ भी ‘ज’ में बदल जाता है, जिससे दोनों ‘ज’ आधे होते हैं। |
✅ शुद्ध शब्द
-
(d) वाल्मीकि: यह शब्द पूर्ण रूप से शुद्ध है। इसमें ‘वाल्मीक’ (एक प्रकार की मिट्टी या चींटी की बांबी) में ‘इ’ प्रत्यय लगाकर ‘वाल्मीकि’ (ऋषि का नाम) बनाया गया है।
110. ‘बाधा डालना’ मुहावरे का अर्थ है?
‘बाधा डालना’ मुहावरे का सही अर्थ है: (b) रोड़ा अटकाना।
📌 स्पष्टीकरण
-
बाधा डालना/रोड़ा अटकाना: दोनों मुहावरों का अर्थ है किसी कार्य या प्रगति में अवरोध उत्पन्न करना या रुकावट पैदा करना।
🔍 अन्य मुहावरों का अर्थ
| मुहावरा | अर्थ |
| (a) पाला पड़ना | किसी से सामना होना या संबंध स्थापित होना (अक्सर विरोधी संदर्भ में)। |
| (c) बरस पड़ना | अत्यधिक क्रोधित होकर बुरी तरह फटकारना या चिल्लाना। |
| (d) दांतों में जीभ होना | (यह एक सामान्य मुहावरा नहीं है, लेकिन संदर्भ के अनुसार) स्वयं को ऐसी स्थिति में रखना जहाँ चारों ओर से जोखिम या खतरा हो। |
111. Choose the correct connective for the blank in the following sentence. door: Scarcely had he gone………a policeman knocked at the
The correct connective for the blank is (c) when.
The complete sentence is:
Scarcely had he gone $\dots\dots\dots\dots\dots$ a policeman knocked at the door.
🔗 Co-relative Conjunctions
The phrase “Scarcely had…” or “Hardly had…” is a fixed structure in English that is always followed by the conjunction ‘when’. This structure is used to indicate that one event followed immediately after another.
| Structure | Connective | Example |
| Scarcely had… | …when | Scarcely had I entered the room when the phone rang. |
| Hardly had… | …when | Hardly had she arrived when the guests started leaving. |
| No Sooner had… | …than | No sooner had the rain stopped than the sun came out. |
The option (d) than is used with No sooner had… (as shown in the table above).
112. If you hard, you will drill the nail in.
The correct option is (b) hit.
The complete sentence is: If you $\dots\dots\dots\dots\dots$ hard, you will drill the nail in.
🔑 Analysis: First Conditional
This sentence expresses a likely future outcome based on a present condition, which is the structure of the First Conditional (or Type 1 Conditional).
The structure for the First Conditional is:
-
Condition Clause (If-clause): If you hit hard (Simple Present Tense)
-
Result Clause: you will drill the nail in (Simple Future Tense)
Therefore, the Simple Present tense form ‘hit’ is required in the if-clause.
113. Change the following into passive voice.
The correct passive voice transformation for the sentence ‘Do not insult your elders’ is (a) Let not your elders be insulted.
🛠️ Transformation Analysis (Imperative Sentences)
The original sentence is an Imperative Sentence (a command or advice) in the negative.
When changing an imperative sentence into the passive voice, we typically use the structure:
For negative imperatives (‘Do not…’), the structure becomes:
-
Original Sentence (Active): Do not insult your elders (Object)
-
Applying Structure: Let + not + your elders + be + insulted
-
Result (Passive): Let not your elders be insulted.
-
(c) Let your elders not be insulted by you is grammatically correct but verbose. Option (a) is the more conventional and precise passive form for this type of imperative sentence.
-
(b) and (d) are incorrect structures and meanings.
114. “Shoot the prisoner”, said the tyarant
The correct indirect speech transformation for the sentence “Shoot the prisoner,” said the tyrant is (c) The tyrant commanded them to shoot the prisoner.
🗣️ Transformation Analysis (Direct to Indirect Speech)
The original sentence is an Imperative Sentence (a command or order). When changing imperative sentences into indirect speech:
-
Reporting Verb Change: The reporting verb “said” is changed to a verb that reflects the speaker’s tone or intent (e.g., ordered, commanded, requested, advised, told). Since a “tyrant” is giving the instruction, ‘commanded’ is the most appropriate verb.
-
Connective: The imperative verb (‘Shoot’) is connected to the reporting clause using the infinitive ‘to’.
-
Missing Object: Although the object (the person being commanded) is not explicitly mentioned in the direct speech, it is implied (someone is commanded to do the shooting). Option (c) appropriately inserts the implied object ‘them’ (the guards/soldiers) to clarify who received the command.
🔍 Why other options are incorrect:
-
(a) Shoot the prisoner told he tyrant: Incorrect structure and word order.
-
(b) The tyrant ordered to them to shoot the prisoner: The verb ‘ordered’ is generally not followed by ‘to’ when the object is present (i.e., ordered them is correct; ordered to them is incorrect).
-
(d) The tyrant commanded the prisoner to shoot: This completely changes the meaning. It suggests the prisoner was ordered to shoot someone, whereas the original sentence implies the prisoner was the target of the shooting.
115. Somebody has already used this towel.
The correct passive voice transformation is (c) This towel has already been used.
🔄 Transformation Analysis (Present Perfect Tense)
The original sentence, “Somebody has already used this towel,” is in the Active Voice and Present Perfect Tense.
The structure for the Present Perfect Tense in the Passive Voice is:
-
Active Voice: Somebody (Subject) has already used (Verb) this towel (Object).
-
Passive Transformation:
-
The object ‘this towel’ becomes the subject.
-
‘this towel’ takes ‘has’ (singular).
-
Insert ‘already been’.
-
Use the V3 form of the verb ‘used’.
-
-
Result (Passive): This towel has already been used.
❌ Why other options are incorrect:
-
(a) This towel is already used: This is Present Simple Passive (incorrect tense).
-
(b) This towel was already used: This is Past Simple Passive (incorrect tense).
-
(d) This towel had already used: This is Past Perfect Active (incorrect tense and voice).
Ans -(b)
दिए गए तीनों मानों में सबसे बड़ा मान 0.35 है।
तुलना:
-
-
-
(यथावत)
इसलिए, सबसे बड़ा मान 0.35 है।
117. 2 वर्ष के लिए निवेशित 5% वार्षिक ब्याज की दर से किसी धनराशि पर चक्रवृद्धि ब्याज ₹328 है। उसी धनराशि पर उसी दर से उतने ही समय का साधारण ब्याज क्या होगा –
(a) 320इस प्रश्न में, 2 वर्षों के लिए 5% वार्षिक ब्याज दर से किसी धनराशि पर चक्रवृद्धि ब्याज ₹328 है। उसी धनराशि और अवधि के लिए साधारण ब्याज पूछा गया है।
हल:
-
मान लीजिए मूलधन P है।
-
चक्रवृद्धि ब्याज (CI) का सूत्र:
-
साधारण ब्याज (SI) का सूत्र:
मूलधन निकालें:
चक्रवृद्धि ब्याज के अनुसार:
साधारण ब्याज निकालें:
अतः, सही उत्तर है 320।
118.यदि है, तो का मान होगा ?
(a) 276
(b) 2760
(c) 27600
(d) 0.000276
Ans – (b)
इस प्रश्न में, यदि है, तो का मान पूछा गया है।
गणना के अनुसार:
विकल्पों में सबसे समीप उत्तर है 2760।
सही विकल्प (b) 2760 है।
119. एक वर्गाकार खेत की फसल ₹150 प्रति हैक्टेयर की दर से काटने का कुल खर्च ₹1350 है। इसके चारों और ₹8 प्रति मीटर की दर से बाड़ लगाने का खर्च कितना होगा ?’
दी गई जानकारी से क्षेत्रफल
-
कुल कटाई खर्च = ₹1350, दर = ₹150 प्रति हेक्टेयर
-
क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) = हेक्टेयर
-
1 हेक्टेयर = 10000 वर्गमीटर, अतः क्षेत्रफल = वर्गमीटर
वर्ग की भुजा और परिमाप
-
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा, इसलिए भुजा = मीटर (क्योंकि )
-
वर्ग का परिमाप = मीटर
बाड़ लगाने का खर्च
-
दर = ₹8 प्रति मीटर
-
कुल बाड़ खर्च = रुपये
120. टिन का एक टुकड़ा आयत की आकृति में है, जिसकी लंबाई 12 सेमी. तथा चौड़ाई 8 सेमी. है। इसका उपयोग कर एक बंद घन निर्मित किया जाता है। घन की भुजा की लंबाई क्या होगी ?
टिन के आयताकार टुकड़े का कुल क्षेत्रफल घन के संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल के बराबर होगा।
दी गई जानकारी
आयत की लंबाई 12 सेमी और चौड़ाई 8 सेमी।
आयत का क्षेत्रफल = वर्ग सेमी।
घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल
बंद घन के 6 भुजाएँ होती हैं, प्रत्येक का क्षेत्रफल भुजा²।
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = , जहाँ भुजा है।
भुजा की गणना
सेमी।
सही उत्तर (c) 4 सेमी।
121. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
दिए गए कथनों में से उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।
✅ सभी कथनों का विश्लेषण
| कथन | सत्यता | स्पष्टीकरण |
| (a) क्षार में साबुन जैसी चिकनाहट होती है | सही | क्षार (Base) स्पर्श करने पर फिसलन भरे या साबुन जैसे चिकने महसूस होते हैं। उदाहरण के लिए, साबुन में सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) या पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (KOH) जैसे क्षार का उपयोग किया जाता है। |
| (b) क्षार लाल लिटमस को नीला कर देता है | सही | यह क्षार की पहचान का एक मूलभूत गुण है। लिटमस पेपर का उपयोग करके किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता (pH) की जाँच की जाती है। क्षार (Bases) $\rightarrow$ लाल $\rightarrow$ नीला। |
| (c) सभी क्षार भस्म होते हैं किन्तु सभी भस्म क्षार नहीं होते हैं | सही | भस्म (Bases): वे पदार्थ जो प्रोटॉन ग्रहण कर सकते हैं या $\text{OH}^-$ आयन मुक्त कर सकते हैं। |
| क्षार (Alkali): वे भस्म जो जल में घुलनशील होते हैं। | ||
| इसलिए, सभी क्षार (जो जल में घुलनशील हैं) भस्म होते हैं, लेकिन जो भस्म जल में अघुलनशील होते हैं, वे क्षार नहीं कहलाते। |
इस प्रकार, विकल्प (d) उपर्युक्त सभी सही है।
122. ‘प्लास्टर ऑफ पेरिस’ का रासायनिक सूत्र है-
‘प्लास्टर ऑफ पेरिस’ (Plaster of Paris – POP) का रासायनिक सूत्र है:
(b) CaSO41/2H2O
🔬 रासायनिक नाम और सूत्र
-
रासायनिक नाम: कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium Sulfate Hemihydrate)
-
रासायनिक सूत्र: CaSO4 1/2H2O
🧱 प्लास्टर ऑफ पेरिस से संबंधित तथ्य
-
निर्माण: इसे जिप्सम (CaSO4.2H2O) को 373 K (या 100०C) पर गर्म करके बनाया जाता है, जिससे जिप्सम अपने क्रिस्टलीकरण जल के अणु खो देता है।
-
उपयोग: इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्लास्टर करने में, खिलौने बनाने में, सजावटी सामान बनाने में और दीवारों को चिकना करने में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों के सूत्र:
-
(a) CaSO4.2H2O : यह जिप्सम का रासायनिक सूत्र है।
-
(c) Ca(NO3)2 : यह कैल्सियम नाइट्रेट का रासायनिक सूत्र है।
-
(d) Ca3(PO4)2 : यह कैल्सियम फास्फेट का रासायनिक सूत्र है।
123. एक समान वृत्तीय गति में अचर होगा :
एक समान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) में (a) चाल (Speed) अचर (constant) रहती है।
🧠 स्पष्टीकरण
एक समान वृत्तीय गति वह गति होती है जिसमें कोई वस्तु नियत चाल (constant speed) से एक वृत्ताकार पथ पर चलती है।
| राशि | वृत्तीय गति में स्थिति | कारण |
| (a) चाल (Speed) | अचर (Constant) | चाल (दूरी/समय) वस्तु के गति के परिमाण (magnitude) को दर्शाती है, जो इस गति में नहीं बदलता। |
| (b) रेखीय वेग (Linear Velocity) | परिवर्तनशील (Variable) | वेग में दिशा और परिमाण दोनों होते हैं। यद्यपि परिमाण (चाल) स्थिर रहता है, गति की दिशा वृत्त के प्रत्येक बिंदु पर स्पर्शरेखीय रूप से बदलती रहती है। दिशा बदलने के कारण वेग परिवर्तनशील होता है। |
| (c) त्वरण (Acceleration) | परिवर्तनशील (Variable) | त्वरण (a) वेग परिवर्तन की दर है। चूँकि वेग लगातार दिशा बदल रहा है, इसलिए त्वरण मौजूद होता है, जिसे अभिकेन्द्री त्वरण कहते हैं। इसकी दिशा लगातार वृत्त के केंद्र की ओर बदलती रहती है, इसलिए यह भी परिवर्तनशील है। |
| (d) अभिकेन्द्री बल (Centripetal Force) | परिवर्तनशील (Variable) | F = ma होने के कारण, अभिकेन्द्री बल की दिशा हमेशा त्वरण की दिशा में यानी वृत्त के केंद्र की ओर होती है। दिशा लगातार बदलने के कारण अभिकेन्द्री बल भी परिवर्तनशील होता है। |
124. कोशिका भित्ति कोशिका में अनुपस्थित होती है।
कोशिका भित्ति (Cell Wall) (b) जन्तु कोशिका में अनुपस्थित होती है।
🧬 स्पष्टीकरण
कोशिका भित्ति, कोशिका का एक कठोर, सुरक्षात्मक बाहरी आवरण होती है, जो कोशिका को यांत्रिक क्षति और आसमाटिक दबाव से बचाती है।
-
-
जन्तु कोशिका (Animal Cell): इनमें कोशिका भित्ति नहीं होती है। जन्तु कोशिकाओं में सबसे बाहरी आवरण कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) होता है।
-
-
पादप कोशिका (Plant Cell): इनमें कोशिका भित्ति उपस्थित होती है, जो मुख्य रूप से सेलुलोज की बनी होती है।
-
जीवाणु कोशिका (Bacterial Cell): इनमें कोशिका भित्ति उपस्थित होती है, जो मुख्य रूप से पेप्टीडोग्लाइकन की बनी होती है।
-
कवक कोशिका (Fungal Cell): इनमें कोशिका भित्ति उपस्थित होती है, जो मुख्य रूप से काइटिन की बनी होती है।
125. अनाक्सी श्वसन में श्वसन गुणांक का मान होता है-
अनाक्सी (अवायवीय) श्वसन में श्वसन गुणांक (RQ) का मान अनन्त माना जाता है। इसका कारण यह है कि इसमें CO₂ बनती है पर O₂ का उपभोग नहीं होता, इसलिए होता है।
सही विकल्प
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अनाक्सी / अवायवीय श्वसन में RQ का मान अनन्त होता है।
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अतः प्रश्न में दिए गए विकल्पों में सही उत्तर है:
(a) अनन्त
126. राजस्थान की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा का अन्तिम बिन्दु कौनसा है ?
राजस्थान की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (जिसे रेडक्लिफ रेखा कहते हैं) का अन्तिम (दक्षिणी-पश्चिमी) बिन्दु (d) शाहगढ़ है।
🗺️ अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के बिन्दु
राजस्थान की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है, जिसकी कुल लम्बाई $1070 \text{ किमी}$ है।
| बिन्दु | स्थान | स्थिति |
| प्रारम्भिक बिन्दु | हिन्दूमलकोट | श्रीगंगानगर जिले में (उत्तर-पश्चिम) |
| अन्तिम बिन्दु | शाहगढ़ (बाड़मेर) | बाड़मेर जिले में (दक्षिण-पश्चिम) |
🔍 अन्य बिन्दु
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(b) सिलाना गाँव: यह धौलपुर जिले में राजस्थान का पूर्वी बिन्दु है (राज्य की सीमा पर)।
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(c) कोणा गाँव: यह श्रीगंगानगर जिले में राजस्थान का उत्तरी बिन्दु है (राज्य की सीमा पर)।
127. अकबर के शासनकाल में दक्कन में निम्न पद्धतियों में से कौन-सा भू-राजस्व वसूली का प्रचलित आधार था?
अकबर के शासनकाल में दक्कन (Deccan) में भू-राजस्व वसूली का प्रचलित आधार (b) हल की संख्या था।
🧠 मुख्य बिन्दु
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दक्कन में पद्धति (हल की संख्या): अकबर ने दक्कन (विशेषकर बरार और खानदेश) में भू-राजस्व के लिए एक अनूठी पद्धति अपनाई, जहाँ भू-राजस्व हल की संख्या के आधार पर लिया जाता था। इसका तात्पर्य था कि किसान जितने हल से अपनी ज़मीन जोतता था, उसी आधार पर उससे लगान लिया जाता था। यह व्यवस्था दक्कन के अपेक्षाकृत कम विकसित और विरल आबादी वाले क्षेत्रों के लिए अधिक उपयुक्त थी।
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उत्तर भारत में मुख्य पद्धति (जब्त):
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अकबर के शासनकाल में उत्तर भारत के मुख्य क्षेत्रों में भू-राजस्व वसूली की प्रमुख और मानक पद्धति जब्त (Zabt) या टोडरमल की बंदोबस्त प्रणाली थी।
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इस पद्धति में भूमि की माप (पैमाइश) की जाती थी और फसल के पिछले दस वर्षों के औसत उत्पादन के आधार पर नकद में लगान तय किया जाता था।
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अन्य विकल्प:
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(a) कनकूट: यह अनाज के खड़े खेत का अनुमान लगाकर लगान निर्धारित करने की पद्धति थी।
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(d) गल्लाबख्शी (बटाई): इसमें फसल को काटने के बाद सरकारी हिस्से का बँटवारा किया जाता था।
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अतः, विशेष रूप से दक्कन के संदर्भ में, सही उत्तर (b) हल की संख्या है।
128. राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम की स्थापना कब की गई-
राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (Rajasthan State Road Transport Corporation – RSRTC) की स्थापना (c) 1964 में की गई थी।
🚌 RSRTC स्थापना
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तिथि: 1 अक्टूबर 1964
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उद्देश्य: राजस्थान में यात्रियों को कुशल, किफायती और समन्वित परिवहन सेवाएँ प्रदान करना।
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अधिनियम: इसकी स्थापना सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 के तहत की गई थी।
129. राज्य में सर्वाधिक चारागाह एवं गोचर भूमि किस जिले में है ?
राज्य में सर्वाधिक चारागाह एवं गोचर भूमि (d) बाड़मेर जिले में है।
🌳 चारागाह एवं गोचर भूमि
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सर्वाधिक: बाड़मेर जिला।
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सबसे कम: झालावाड़ जिला।
यह भूमि पशुओं को चरने के लिए उपयोग की जाती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा पशुधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
130. संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है?
संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता (a) स्पीकर (लोकसभा अध्यक्ष) करता है।
🏛️ संयुक्त अधिवेशन से संबंधित प्रावधान
| प्रावधान | विवरण | अनुच्छेद |
| आहूतकर्ता (बुलाने वाला) | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 108 |
| अध्यक्षता करने वाला | लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) | अनुच्छेद 118(4) |
📜 प्रक्रिया
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जब किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध (Deadlock) उत्पन्न होता है, तो राष्ट्रपति संयुक्त अधिवेशन बुलाते हैं।
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इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of the Lok Sabha) करते हैं।
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यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो अध्यक्षता लोकसभा उपाध्यक्ष करते हैं।
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यदि वे दोनों अनुपस्थित हैं, तो अध्यक्षता राज्यसभा के उपसभापति करते हैं।
ध्यान दें: उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, वे कभी भी संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता नहीं करते हैं।
131. भाषा अर्जित करने की प्रक्रिया में किसका महत्व सर्वाधिक है-
भाषा अर्जित (Language Acquisition) करने की प्रक्रिया में सर्वाधिक महत्व (a) समाज का होता है।
🗣️ भाषा अर्जन और समाज
भाषा अर्जन एक अचेतन (Unconscious) और स्वाभाविक (Natural) प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चा अपने आसपास के वातावरण और लोगों से अंतःक्रिया करके भाषा सीखता है।
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समाज: बच्चा अपने परिवार, पास-पड़ोस और व्यापक समाज में रहकर भाषा का प्रयोग करते हुए सुनता है, अनुकरण करता है और स्वाभाविक रूप से भाषा सीखता है। समाज ही “इनपुट” प्रदान करता है जो अर्जन के लिए आवश्यक है।
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अन्य विकल्प (सीखने की प्रक्रिया):
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(b) भाषा कक्षा, (c) भाषा प्रयोगशाला, (d) पाठ्यपुस्तक – ये सभी भाषा अधिगम (Language Learning) से संबंधित हैं। भाषा अधिगम एक सचेतन (Conscious) और औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें नियमों और संरचनाओं को सिखाया जाता है।
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भाषा अर्जन के संदर्भ में, प्रसिद्ध भाषाविद् नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) मानते हैं कि भाषा की क्षमता जन्मजात होती है, जबकि वायगोत्स्की (Vygotsky) और अन्य समाज-संस्कृतिवादी सिद्धांतकार सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) को भाषा अर्जन की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी मानते हैं।
अतः, सर्वाधिक महत्व समाज का है।
132. कौनसा पद इकाई योजना के पदों की सही व्याख्या नहीं करता है।
इकाई योजना (Unit Plan) के पदों (Steps) की सही व्याख्या (c) आवश्यक नहीं कि सम्पूर्ण पाठ्य सामग्री को एक रूप इकाइयों में संगठित किया जाए नहीं करता है।
🧠 इकाई योजना की अवधारणा
इकाई योजना पाठ्यचर्या के किसी बड़े भाग को छोटे, सार्थक और संबंधित उप-भागों (Units) में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है, ताकि शिक्षण प्रभावी ढंग से और तार्किक क्रम में हो सके। यह हर्बर्ट (Herbert) और मोरिसन (Morrison) के विचारों पर आधारित है।
| विकल्प | कथन की सत्यता | इकाई योजना में पद |
| (a) पूरी इकाई को उपविभागों में बाँटना | सही | यह इकाई योजना का एक आवश्यक चरण है, जिसे विषय-वस्तु विश्लेषण कहते हैं। एक बड़ी इकाई को छोटे, प्रबंधनीय उप-इकाइयों में विभाजित किया जाता है। |
| (b) शिक्षण विधियों को निश्चित करना | सही | प्रत्येक उप-इकाई या विभाग के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त शिक्षण विधियों (व्याख्यान, चर्चा, प्रदर्शन आदि) का चयन करना महत्वपूर्ण है। |
| (c) आवश्यक नहीं कि सम्पूर्ण पाठ्य सामग्री को एक रूप इकाइयों में संगठित किया जाए. | गलत | इकाई योजना का मूल सिद्धांत ही यह है कि सम्पूर्ण पाठ्य सामग्री को उद्देश्यपूर्ण, तार्किक और एकीकृत (integrated) इकाइयों में संगठित किया जाए। यदि सामग्री असंगठित रहेगी तो इकाई योजना अपने उद्देश्य में विफल हो जाएगी। |
| (d) शिक्षक विद्यार्थी क्रिया प्रत्येक विभाग के लिए निश्चित करना | सही | इकाई योजना में यह तय किया जाता है कि शिक्षक (Teaching Activities) और विद्यार्थी (Learning Activities) प्रत्येक उप-इकाई में क्या करेंगे। यह क्रियाएँ योजना को व्यावहारिक रूप देती हैं। |
अतः, गलत कथन (c) है।
133. पाठ योजना में अभिवृत्ति का उद्देश्य है-
पाठ योजना (Lesson Plan) में ‘अभिवृत्ति’ (Attitude) का उद्देश्य (b) विश्व बंधुत्व की भावना का विकास करना है।
🎯 उद्देश्य का वर्गीकरण
पाठ योजना के उद्देश्यों को मुख्य रूप से तीन पक्षों में वर्गीकृत किया जाता है:
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ज्ञानात्मक उद्देश्य (Cognitive Objectives): ज्ञान और समझ से संबंधित, जैसे कि तथ्यों को जानना, याद करना, तुलना एवं विभेद करना (a)।
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क्रियात्मक/कौशलात्मक उद्देश्य (Psychomotor/Skill Objectives): कौशल और कार्य करने की क्षमता से संबंधित, जैसे कि मानचित्र बनाना, प्रयोग करना, प्रतिवेदन तैयार करना एवं प्रस्तुत करना (c)।
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भावात्मक/अभिवृत्ति उद्देश्य (Affective/Attitude Objectives): भावनाओं, मूल्यों, रुचियों और अभिवृत्तियों से संबंधित, जैसे:
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विश्व बंधुत्व की भावना (Universal Brotherhood) का विकास करना।
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सत्य, ईमानदारी और सहयोग जैसे मूल्यों का विकास करना।
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विषय के प्रति रुचि जागृत करना।
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अतः, अभिवृत्ति का उद्देश्य एक भावनात्मक और मूल्य-आधारित उद्देश्य है, जो विश्व बंधुत्व की भावना का विकास करना है।
134. खोजपूर्ण प्रश्न कौशल के बारे में असत्य कथन है-
खोजपूर्ण प्रश्न कौशल (Probing Question Skill) के बारे में असत्य कथन है:
(b) इस कौशल में हाँ या ना उत्तर वाले प्रश्न होने चाहिए।
🧠 खोजपूर्ण प्रश्न कौशल का विश्लेषण
खोजपूर्ण प्रश्न कौशल का उपयोग शिक्षक तब करते हैं जब छात्र मूल प्रश्न का अपूर्ण, आंशिक या गलत उत्तर देते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को अपने उत्तरों पर विचार करने, उन्हें विस्तारित करने और चिंतन की गहराई को बढ़ाने में मदद करना है।
| कथन | सत्य/असत्य | स्पष्टीकरण |
| (a) यह प्रश्न मूल प्रश्न की जटिलता को दूर करने के लिए प्रयोग में आते हैं। | सत्य | ये प्रश्न मूल समस्या या अपूर्ण उत्तर के हिस्सों को सरल बनाने या छात्र को सही दिशा में निर्देशित करने के लिए पूछे जाते हैं। |
| (b) इस कौशल में हाँ या ना उत्तर वाले प्रश्न होने चाहिए। | असत्य | खोजपूर्ण प्रश्न कौशल का उद्देश्य चिंतन को प्रोत्साहित करना है। ‘हाँ’ या ‘ना’ वाले प्रश्न (बंद सिरे वाले प्रश्न) चिंतन को सीमित करते हैं। खोजपूर्ण प्रश्न खुले सिरे वाले (Open-ended) होने चाहिए जो छात्र को अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए प्रेरित करें। |
| (c) खोजपूर्ण प्रश्न कौशल के प्रमुख घटकों में अनुबोधन, अतिरिक्त सूचनाऐं ढूँढना, पुनर्केन्द्रण, पुननिर्देशन, समीक्षात्मक बोध को बढ़ावा देना सभी आते हैं। | सत्य | ये सभी घटक (जैसे: Prompting, Seeking Further Information, Refocusing, Redirection) इस कौशल के आवश्यक अंग हैं, जिनका उपयोग छात्र के उत्तर को पूर्ण और गहन बनाने के लिए किया जाता है। |
| (d) ऐसे प्रश्न करते समय भाषा शैली के स्तरानुकूल होनी चाहिए। | सत्य | प्रश्न की भाषा छात्रों की आयु, ज्ञान और मानसिक स्तर के अनुरूप (स्तरानुकूल) होनी चाहिए ताकि वे उसे समझ सकें और उस पर चिंतन कर सकें। |
अतः, विकल्प (b) असत्य है।
135. An activity that requires a class to design and present a Power Point on the importance of water conservation in a target language is a ………activity.
The activity described—designing and presenting a PowerPoint on water conservation in a target language—is best classified as a (a) multidisciplinary activity.
🧠 Analysis of the Activity
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Multidisciplinary (or Interdisciplinary): This term applies because the activity integrates skills and content from multiple subjects:
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Science/Environmental Studies: The core content is water conservation (scientific/environmental topic).
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Language Arts: The medium of presentation is the target language (requiring language skills, vocabulary, grammar, and fluency).
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Technology/ICT: The format is a PowerPoint presentation (requiring digital literacy and design skills).
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Why other options are less accurate:
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(b) science project: While it has a science theme, the presentation in the target language and the design element extend it beyond a typical science-only project.
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(c) group: It is very likely a group activity, but “multidisciplinary” describes the nature of the learning involved, which is a more complete and accurate classification than just the mode of work.
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(d) language practice: It certainly provides language practice, but it uses language as a tool to convey non-linguistic content (conservation), making “multidisciplinary” a better descriptor of the overall educational goal.
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Therefore, the activity integrates content and skills across different academic areas, making it a multidisciplinary activity.
136. Picture comprehension is effective to promote
Picture comprehension (चित्र बोध) is most effective to promote (c) speaking skill (वाचन कौशल)।
🗣️ स्पष्टीकरण
चित्र बोध (Picture Comprehension) में छात्रों को एक चित्र दिखाया जाता है और उनसे उस चित्र को देखकर या उससे संबंधित वर्णन करने (describing), कहानी बताने (narrating a story), या प्रश्न पूछने और उत्तर देने (asking and answering questions) के लिए कहा जाता है।
यह गतिविधि सीधे तौर पर छात्रों को अपने विचारों को मौखिक रूप से, सही वाक्य-विन्यास और उपयुक्त शब्दावली का उपयोग करते हुए व्यक्त करने का अवसर देती है।
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Speaking Skill (वाचन कौशल): चित्र देखने के बाद विचारों को संगठित करना और उन्हें मौखिक रूप देना वाचन कौशल का सीधा अभ्यास है।
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Literary Skill (साहित्यिक कौशल): यह मुख्य रूप से लिखने या साहित्य को पढ़ने/समझने से संबंधित है।
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Artistic Skill (कलात्मक कौशल): यह चित्र बनाने, रंग भरने या कला की सराहना करने से संबंधित है।
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Listening Skill (श्रवण कौशल): यह दूसरों की बातों को सुनने और समझने से संबंधित है।
137. Audio-lingual drills are useful for developing learners
Audio-lingual drills are primarily useful for developing learners’ (c) speaking skills.
However, given the options and the primary purpose of the method, the most frequent and emphasized outcome is related to oral fluency and correct pronunciation, making (c) speaking skills a very strong answer, closely followed by (d) listening skills.
In the context of language pedagogy, if a single best option must be chosen, (c) speaking skills is often preferred as the ultimate goal of the drills is accurate and rapid production.
🎧 Audio-lingual Method (ALM)
The Audio-lingual Method (ALM) is based on behaviorist psychology and emphasizes habit formation through repetition and mimicry.
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Drills and Repetition: The core technique involves frequent, structured drills (e.g., repetition drills, substitution drills, transformation drills).
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Focus on Oral Skills: The immediate aim is to enable learners to respond quickly and accurately in spoken language without conscious grammatical analysis. This directly targets speaking and listening (oral/aural) abilities.
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Reading/Writing: These skills are typically introduced much later, after oral competence has been established.
138. Which of the following is not a study skill ?
The correct answer is (a) Writing formal reports.
📚 Study Skills Analysis
Study skills are abilities that help individuals acquire, process, and retain information for learning and academic success.
| Skill | Category | Explanation |
| (a) Writing formal reports | Productive/Output Skill | This is a communication skill or a product-based skill that demonstrates acquired knowledge. While it uses study skills (like research and organization), it is not a core study technique for the initial acquisition and processing of information. |
| (b) Note taking | Processing Skill | This is a fundamental study skill used to condense, process, and remember information during lectures or reading. |
| (c) Using a dictionary | Information/Resource Skill | This is a skill used to clarify meaning and build vocabulary, which aids comprehension and learning. |
| (d) Getting information from an encyclopedia | Information/Resource Skill | This is a skill used for research and gathering facts from reliable sources, a crucial part of studying. |
Therefore, writing a formal report is an application or outcome, rather than a primary technique used for the process of studying itself.
139. गणित के सूत्रों की स्थापना हेतु उपयुक्त विधि है-
140. कक्षा V के विद्यार्थी समस्या 23 को सही तरीके से हल कर सकते है, लेकिन वे इस समस्या का हल नहीं केक के निकाल सकते थे कि ‘आधे केक में कितने के टुकडे है? इसका कारण है-
सही उत्तर (a) भिन्नों पर संक्रियाएँ बिना सन्दर्भीकरण और भाषा-सहायता के पढ़ाई गई है है।
🧠 समस्या का विश्लेषण (गणितीय शिक्षाशास्त्र)
यह समस्या गणित शिक्षाशास्त्र में संदर्भ (Contextualization) और गणितीय भाषा (Mathematical Language) के महत्व को दर्शाती है।
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समस्या 1 (23 को हल करना): यह एक सीधा, अमूर्त (Abstract) संख्यात्मक प्रश्न है। छात्र ने प्रक्रिया (Algorithm) को याद कर लिया है और यांत्रिक रूप से उसे लागू कर सकता है।
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समस्या 2 (‘आधे केक में कितने $\frac{1}{4}$ के टुकडे है?’): यह एक शाब्दिक समस्या (Word Problem) है जिसमें भिन्नों ($\frac{1}{2}$ और $\frac{1}{4}$) का उपयोग एक वास्तविक जीवन के संदर्भ (केक) में किया गया है।
🔑 कारण
यदि विद्यार्थी संख्यात्मक संक्रिया को सही कर सकते हैं लेकिन शाब्दिक समस्या को नहीं कर सकते, तो इसका कारण यह है कि:
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उन्हें यह नहीं पता कि ‘आधे केक में $\frac{1}{4}$ के टुकड़े’ निकालने का मतलब भिन्नों का भाग ($\frac{1}{2} \div \frac{1}{4}$) करना है।
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उन्हें भिन्नों की संक्रियाएँ सन्दर्भीकरण (Contextualization) या अर्थपूर्ण मॉडल (जैसे चित्र, केक) का उपयोग किए बिना, केवल नियम (जैसे: $\frac{a}{b} \div \frac{c}{d} = \frac{a}{b} \times \frac{d}{c}$) रटकर सिखाई गई हैं।
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गलत विकल्प:
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(b) गणितीय तुल्यता: विद्यार्थी तुल्यता को इसलिए नहीं समझ पा रहे क्योंकि उन्हें संदर्भ नहीं दिया गया। (a) इस ‘अयोग्यता’ के पीछे का कारण बताता है।
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(c) भाषा विकास: यद्यपि भाषा महत्वपूर्ण है, यहाँ मुख्य बाधा गणितीय भाषा और संदर्भ को समझने में है, न कि सामान्य भाषा विकास में।
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(d) कठिनाई स्तर: भिन्नों का भाग कक्षा V के पाठ्यक्रम का हिस्सा होता है, और यह समस्या सामान्य स्तर की है यदि इसे उचित संदर्भ के साथ पढ़ाया जाए।
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141. विषय-वस्तु का मूल्यांकन आधारित होना चाहिए-
विषय-वस्तु (Content) का मूल्यांकन (b) आंतरिक और बाह्य दोनों परीक्षण पर आधारित होना चाहिए।
🧠 मूल्यांकन का महत्व
एक प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली वह होती है जो छात्रों के सीखने की प्रक्रिया के हर पहलू को कवर करती है।
| प्रकार | उद्देश्य | व्याख्या |
| आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) | प्रक्रिया पर ध्यान | यह शिक्षक द्वारा कक्षा के अंदर लिया जाता है और इसमें प्रायः असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, कक्षा प्रदर्शन, सहभागिता, मौखिक परीक्षाएँ और सतत मूल्यांकन शामिल होता है। यह सीखने की प्रक्रिया, कौशल और अभिवृत्ति का आकलन करता है। |
| बाह्य मूल्यांकन (External Assessment) | परिणाम पर ध्यान | यह किसी बाहरी संस्था (जैसे बोर्ड या विश्वविद्यालय) द्वारा लिया जाता है, जैसे कि वार्षिक या अर्धवार्षिक लिखित परीक्षाएँ। यह मुख्य रूप से विषय-वस्तु के ज्ञानात्मक पहलुओं (स्मरण शक्ति, समझ और अनुप्रयोग) का आकलन करता है। |
निष्कर्ष:
किसी भी विषय-वस्तु की पूरी समझ और अधिगम तभी सही ढंग से मूल्यांकित होता है जब आंतरिक मूल्यांकन (जो सतत और व्यापक है) और बाह्य मूल्यांकन (जो मानकीकृत और विश्वसनीय है) दोनों का उपयोग किया जाए।
142. उपचारात्मक शिक्षा की जरूरत होती है-
उपचारात्मक शिक्षा (Remedial Teaching) की जरूरत (d) इनमें से सभी के लिए हो सकती है, हालांकि यह विशेष रूप से (a) मन्द बुद्धि बच्चों और (b) पिछड़े बच्चों के लिए डिज़ाइन की गई है।
🧠 उपचारात्मक शिक्षा का उद्देश्य
उपचारात्मक शिक्षा (Remedial Teaching) वह शिक्षण विधि है जो छात्रों को उनकी विशिष्ट सीखने की कठिनाइयों या कमियों को दूर करने में मदद करती है।
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मन्द बुद्धि बच्चों (Slow Learners) और पिछड़े बच्चों (Backward Children):
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इन बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है क्योंकि वे पाठ्यक्रम के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ होते हैं।
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यह उन्हें उनकी सीखने की गति के अनुसार विशिष्ट अभ्यास और पुनरावृत्ति प्रदान करती है।
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सामान्य बच्चों (Normal Children):
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हालांकि सामान्य बच्चे अक्सर मुख्यधारा के शिक्षण के साथ आगे बढ़ते हैं, उन्हें भी कभी-कभी किसी विशेष विषय, अवधारणा या कौशल में अस्थायी रूप से कठिनाई आ सकती है।
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यदि शिक्षक निदान (Diagnostic) परीक्षण के माध्यम से किसी सामान्य बच्चे में भी विशिष्ट सीखने की कमी की पहचान करता है, तो उसे भी उस विशेष कमी को दूर करने के लिए उपचारात्मक सहायता की आवश्यकता होती है।
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निष्कर्ष:
उपचारात्मक शिक्षा का लक्ष्य किसी भी बच्चे की सीखने की कमी को दूर करना है। इसलिए, सैद्धांतिक रूप से, यह आवश्यकता किसी भी छात्र वर्ग में उत्पन्न हो सकती है। अतः, विकल्प (d) इनमें से सभी के लिए सर्वाधिक व्यापक और सही उत्तर है।
143. यदि बालक घर में डॉक्टरी थर्मामीटर में रीडिंग ठीक- ठीक पढ़ लेता है, तो उसके इस कौशल को कहेंगे:
यदि बालक घर में डॉक्टरी थर्मामीटर में रीडिंग ठीक-ठीक पढ़ लेता है, तो उसके इस कौशल को (d) प्रेक्षण कौशल (Observation Skill) कहेंगे।
🧠 कौशल का विश्लेषण
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प्रेक्षण कौशल (Observation Skill): यह किसी वस्तु, घटना या प्रक्रिया को ध्यानपूर्वक देखने, उसके गुणों को पहचानने और उससे संबंधित मापन (जैसे यहाँ थर्मामीटर पर अंक पढ़ना) करने की क्षमता है। रीडिंग पढ़ना सीधे तौर पर मापन और प्रेक्षण से संबंधित होता है।
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वैज्ञानिक कौशल (Scientific Skill): यह एक बहुत व्यापक शब्द है जिसमें प्रेक्षण, वर्गीकरण, मापन, अनुमान, परिकल्पना निर्माण, और निष्कर्ष निकालना जैसे कई कौशल शामिल हैं। रीडिंग पढ़ना इसका एक उप-कौशल है।
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हस्त कौशल (Manual Skill): यह हाथ से किए जाने वाले कार्यों (जैसे लिखना, चित्र बनाना, उपकरण जोड़ना) से संबंधित है। थर्मामीटर में रीडिंग पढ़ना मुख्य रूप से आँखों और मस्तिष्क का कार्य है, न कि हाथ का।
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डॉक्टरी थर्मामीटर कौशल: यह किसी विशिष्ट उपकरण से संबंधित कौशल है, लेकिन वैज्ञानिक और शैक्षणिक संदर्भ में, यह प्रेक्षण और मापन कौशल के अंतर्गत आता है।
इसलिए, सबसे सटीक वैज्ञानिक/शैक्षणिक पद प्रेक्षण कौशल है।
144. निम्नलिखित में से विज्ञान शिक्षण की अमनोवैज्ञानिक विधि है.?
विज्ञान शिक्षण की अमनोवैज्ञानिक (Non-psychological) विधि (b) व्याख्यान विधि (Lecture Method) है।
🧠 मनोवैज्ञानिक बनाम अमनोवैज्ञानिक विधि
मनोवैज्ञानिक विधियाँ वे होती हैं जो बालक के सीखने के प्राकृतिक सिद्धांतों, जैसे करके सीखना (Learning by Doing), रुचि, जिज्ञासा और सक्रिय भागीदारी (Active Participation) पर आधारित होती हैं।
| विधि | मनोवैज्ञानिक/अमनोवैज्ञानिक | कारण |
| (b) व्याख्यान विधि (Lecture Method) | अमनोवैज्ञानिक | * यह विधि शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) होती है। |
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इसमें छात्र निष्क्रिय श्रोता (Passive Listeners) होते हैं और उन्हें सोचने या करके सीखने का अवसर नहीं मिलता है। * यह बच्चों की रुचि, जिज्ञासा और सृजनात्मकता को बढ़ावा नहीं देती है। |
| (a) अन्वेषण विधि (Heuristic/Discovery Method) | मनोवैज्ञानिक | यह करके सीखने, समस्या-समाधान और जिज्ञासा पर आधारित है, जहाँ छात्र स्वयं नियमों की खोज करते हैं। |
| (c) प्रयोगशाला विधि (Laboratory Method) | मनोवैज्ञानिक | यह करके सीखने (Learning by Doing) और प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित है, जिससे अर्जित ज्ञान स्थायी होता है। |
| (d) प्रोजेक्ट विधि (Project Method) | मनोवैज्ञानिक | यह उद्देश्यपूर्ण कार्य को सामाजिक वातावरण में पूर्ण करने पर आधारित है, जो रुचि और वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग को बढ़ावा देता है। |
अतः, व्याख्यान विधि को अमनोवैज्ञानिक माना जाता है क्योंकि यह आधुनिक शिक्षा सिद्धांतों का पालन नहीं करती है।
145. विज्ञान शिक्षण को व्यावहारिक तथा रोचक बनाने का उपाय है :
विज्ञान शिक्षण को व्यावहारिक तथा रोचक बनाने के लिए (d) उक्त सभी उपाय आवश्यक हैं।
🔬 विज्ञान शिक्षण को प्रभावी बनाने के उपाय
विज्ञान विषय की प्रकृति ही ऐसी है कि इसे केवल सैद्धांतिक रूप से नहीं पढ़ाया जा सकता। इसे प्रभावी और रुचिकर बनाने के लिए इन तीनों कारकों का योगदान आवश्यक है:
| उपाय | प्रभाव/भूमिका |
| (a) श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रयोग | यह विषय-वस्तु को रोचक और स्थायी बनाता है। छात्रों को अमूर्त (Abstract) अवधारणाओं को समझने में सहायता मिलती है, जैसे कि वीडियो, मॉडल और चार्ट का उपयोग करना। |
| (b) सामाजिक सर्वेक्षण | यह विज्ञान के ज्ञान को व्यावहारिक और वास्तविक जीवन से जोड़ता है। छात्र सामाजिक समस्याओं (जैसे पर्यावरण, स्वच्छता) का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करना सीखते हैं। |
| (c) अध्यापक के समुचित आचरण | शिक्षक का आचरण, विषय-वस्तु पर पकड़, प्रयोग करने की कला, छात्रों के प्रति उत्साहवर्धन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण छात्रों को प्रेरित करता है तथा कक्षा के वातावरण को रोचक बनाता है। |
अतः, इन सभी कारकों के संयुक्त उपयोग से ही विज्ञान शिक्षण को सर्वोत्तम रूप से व्यावहारिक और रोचक बनाया जा सकता है।
146. विषय-वस्तु का मूल्यांकन आधारित होना चाहिए
यह प्रश्न पहले ही पूछा जा चुका है, और सही उत्तर (b) आन्तरिक और बाह्य दोनों परीक्षण पर है।
🧠 मूल्यांकन का महत्व
एक प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली वह होती है जो छात्रों के सीखने की प्रक्रिया के हर पहलू को कवर करती है।
| प्रकार | उद्देश्य | व्याख्या |
| आन्तरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) | प्रक्रिया पर ध्यान | यह शिक्षक द्वारा कक्षा के अंदर लिया जाता है। इसमें असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, कक्षा प्रदर्शन, और सतत मूल्यांकन शामिल होता है। यह सीखने की प्रक्रिया, कौशल और अभिवृत्ति का आकलन करता है। |
| बाह्य मूल्यांकन (External Assessment) | परिणाम पर ध्यान | यह किसी बाहरी संस्था द्वारा लिया जाता है, जैसे कि वार्षिक लिखित परीक्षाएँ। यह मुख्य रूप से विषय-वस्तु के ज्ञानात्मक पहलुओं (स्मरण शक्ति, समझ और अनुप्रयोग) का आकलन करता है। |
निष्कर्ष:
विषय-वस्तु की पूरी समझ और अधिगम तभी सही ढंग से मूल्यांकित होता है जब आंतरिक मूल्यांकन (जो सतत और व्यापक है) और बाह्य मूल्यांकन (जो मानकीकृत और विश्वसनीय है) दोनों का उपयोग किया जाए।
147. सामाजिक अध्ययन, अध्ययन करता है –
सामाजिक अध्ययन (Social Studies) मुख्य रूप से (b) व्यक्ति के सामाजिक संबंधों का अध्ययन करता है।
🧠 सामाजिक अध्ययन का सार
सामाजिक अध्ययन एक व्यापक विषय क्षेत्र है जो मानव समाज और उनके आपसी संबंधों पर केंद्रित होता है।
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केन्द्रीय विषय: सामाजिक अध्ययन का मूल उद्देश्य व्यक्ति, समाज और उसके पर्यावरण के बीच के जटिल संबंधों को समझना है। यह समाज में मनुष्य के जीवन, समूह, संस्थाओं और उनके व्यवहारों का अध्ययन करता है।
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समावेशी क्षेत्र: सामाजिक अध्ययन व्यक्ति के आर्थिक (a), सामाजिक (b) और राजनैतिक (c) संबंधों का भी अध्ययन करता है, लेकिन इन सभी का केंद्रीय आधार व्यक्ति का समाज है।
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इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र जैसे विषय मिलकर सामाजिक अध्ययन का निर्माण करते हैं, और ये सभी विषय अंततः व्यक्ति और समाज के बीच की अंतःक्रियाओं से संबंधित हैं।
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चूँकि सामाजिक अध्ययन मानविकी और सामाजिक विज्ञान का एकीकृत क्षेत्र है, इसका सबसे सटीक और व्यापक उद्देश्य व्यक्ति के सामाजिक संबंधों का अध्ययन करना है।
148. निम्न में से किस विकल्प को दंड आरेख में सबसे अच्छी तरह दर्शाया जा सकता है-
दिए गए विकल्पों में से (a) वर्षा को दंड आरेख (Bar Graph) में सबसे अच्छी तरह दर्शाया जा सकता है।
📊 दंड आरेख की उपयुक्तता
दंड आरेख का उपयोग मुख्य रूप से असतत (Discrete) डेटा की तुलना करने के लिए किया जाता है, जहाँ प्रत्येक श्रेणी स्वतंत्र होती है।
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वर्षा (Rainfall): वर्षा को अक्सर मासिक या वार्षिक योग के रूप में मापा जाता है (जैसे, जनवरी में $50 \text{ मिमी}$, फरवरी में $30 \text{ मिमी}$, आदि)। यह डेटा असतत श्रेणियों (महीनों) के बीच मात्राओं की तुलना करने के लिए आदर्श है। दंड आरेख विभिन्न महीनों में वर्षा की मात्रा की तुलना स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।
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अन्य विकल्प (Continuous Data):
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आर्द्रता, वायुदाब, तापमान: ये सभी सतत चर (Continuous Variables) हैं जो समय या स्थान के साथ लगातार बदलते रहते हैं।
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इन चरों को दर्शाने के लिए रेखा आरेख (Line Graph) या हिस्टोग्राम (Histogram) अधिक उपयुक्त होते हैं, क्योंकि ये समय के साथ होने वाले परिवर्तन (ट्रेंड) या वितरण को प्रभावी ढंग से दिखाते हैं।
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अतः, तुलनात्मक मासिक डेटा (वर्षा) के लिए दंड आरेख सबसे उपयुक्त है।
149. उच्च प्राथमिक स्तर पर ऐतिहासिक तथ्यों या इतिहास लेख को पढ़ाने के लिए कौनसी विधि अधिक प्रासांगिक है-
उच्च प्राथमिक स्तर पर ऐतिहासिक तथ्यों या इतिहास लेख को पढ़ाने के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक विधि (d) स्त्रोत संदर्भ विधि (Source Method/Source Reference Method) है।
🧠 स्त्रोत संदर्भ विधि का महत्व
उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) पर इतिहास शिक्षण का उद्देश्य केवल तथ्यों को रटाना नहीं, बल्कि छात्रों में ऐतिहासिक सोच (Historical Thinking) और आलोचनात्मक समझ (Critical Understanding) विकसित करना है।
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स्त्रोत संदर्भ विधि (Source Method):
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इस विधि में छात्रों को प्राथमिक स्त्रोत (Primary Sources) जैसे अभिलेखों के अंश, प्राचीन सिक्के, चित्र, यात्रियों के वृत्तांत, या द्वितीयक स्त्रोत (Secondary Sources) जैसे इतिहासकार की व्याख्याओं के अंश पढ़ने, उनका विश्लेषण करने और उन पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
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प्रासंगिकता: यह विधि बच्चों को यह समझने में मदद करती है कि इतिहास कैसे लिखा जाता है (How history is constructed), और यह कि इतिहासकार किस प्रकार साक्ष्यों (Evidence) का उपयोग करते हैं। इससे वे इतिहास को केवल कथा (Story) के रूप में नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित अध्ययन के रूप में देखते हैं।
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अन्य विधियाँ:
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(a) वार्तालाप विधि (Discussion Method): यह सहायक है, लेकिन इसके लिए एक आधार (जैसे कोई स्त्रोत) चाहिए।
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(b) कहानी विधि (Storytelling Method): यह निम्न प्राथमिक स्तर पर या विषय को रोचक बनाने के लिए अच्छी है, लेकिन यह ऐतिहासिक सोच को विकसित नहीं करती।
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(c) प्रायोजना विधि (Project Method): यह भी उपयोगी है, लेकिन खोज करने या प्रोजेक्ट बनाने के लिए भी अक्सर स्त्रोतों के संदर्भ की आवश्यकता होती है।
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इसलिए, इतिहास की प्रकृति और उच्च प्राथमिक स्तर के उद्देश्यों के कारण, स्त्रोत संदर्भ विधि सबसे अधिक प्रासंगिक है।
150. मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल है-
मूल्यांकन प्रक्रिया (Evaluation Process) में (d) ये सभी शामिल हैं।
🧠 मूल्यांकन प्रक्रिया के चरण
शिक्षा में मूल्यांकन एक व्यापक और सतत प्रक्रिया है जो केवल परीक्षा लेने तक सीमित नहीं है। ब्लूम और उनके सहयोगियों द्वारा दिए गए शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण (Taxonomy of Educational Objectives) के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन घटक शामिल होते हैं, जो दिए गए विकल्पों में शामिल हैं:
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शिक्षण उद्देश्य (Instructional Objectives):
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यह प्रक्रिया का पहला चरण है। इसमें यह तय किया जाता है कि छात्रों को क्या सिखाया जाना है और उनके व्यवहार में क्या परिवर्तन अपेक्षित है (अर्थात, अधिगम का क्या लक्ष्य है)। मूल्यांकन इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की जाँच करता है। (विकल्प b)
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शिक्षण-अधिगम अनुभव (Teaching-Learning Experiences):
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यह प्रक्रिया का दूसरा चरण है। इसमें वह शिक्षण विधि (a) और अनुभव शामिल हैं जो शिक्षक द्वारा छात्रों को उद्देश्य प्राप्त करने के लिए प्रदान किए जाते हैं (यानी, कक्षा में क्या और कैसे पढ़ाया जाता है)।
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शिक्षण विधि (Teaching Method) शिक्षण-अधिगम अनुभव का एक अभिन्न अंग है। (विकल्प a, c)
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मूल्यांकन/व्यवहार परिवर्तन (Evaluation/Change in Behavior):
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यह प्रक्रिया का तीसरा चरण है। इसमें यह मापा जाता है कि शिक्षण-अधिगम अनुभव के परिणामस्वरूप छात्रों के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन (उद्देश्यों की प्राप्ति) किस हद तक हुआ है।
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अतः, प्रभावी मूल्यांकन प्रक्रिया में उद्देश्यों का निर्धारण, उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनुभव प्रदान करना, और अनुभवों के प्रभाव का आकलन करना, ये सभी चरण शामिल हैं।
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