3rd grade 2026 math science paper answer key
71. 30 ग्राम (g) कार्बन में, कार्बन की मात्रा (मोल में) क्या है?
72. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
मनोविज्ञान के अंतर्गत समायोजन (Adjustment) की विधियों के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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अभिकथन A (सत्य): रक्षा प्रणालियाँ (Defense Mechanisms) समायोजन की अप्रत्यक्ष विधि हैं। जब व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाता या बाधाओं को दूर नहीं कर पाता, तब वह तनाव और चिंता से बचने के लिए अप्रत्यक्ष विधियों (जैसे- दमन, प्रक्षेपण, युक्तिकरण आदि) का सहारा लेता है।
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कारण R (सत्य): इन प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य मनोवैज्ञानिक खतरों या चिंता (Anxiety) से ‘स्व’ (Self) की रक्षा करना होता है। यह एक अस्थायी समायोजन है क्योंकि यह समस्या का वास्तविक समाधान नहीं करता, बल्कि व्यक्ति को कुछ समय के लिए मानसिक राहत प्रदान करता है ताकि उसका मानसिक संतुलन बना रहे।
व्याख्या: कारण R स्पष्ट रूप से समझाता है कि रक्षा प्रणालियों को अप्रत्यक्ष क्यों माना जाता है और वे किस प्रकार कार्य करती हैं। यह व्यक्ति के अहम् (Ego) को तात्कालिक खतरों से बचाने की एक प्रक्रिया है।
अतः, अभिकथन A और कारण R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
सही विकल्प: (B)
73. कोशिका विभाजन के दौरान जीन विनिमय (क्रॉसिंग : ओवर) इनके बीच होता है :
कोशिका विभाजन के संदर्भ में जीन विनिमय (Crossing Over) की प्रक्रिया का वैज्ञानिक विश्लेषण इस प्रकार है:
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विभाजन का प्रकार: जीन विनिमय केवल अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis I) की प्रोक़फेज-I (Prophase-I) की पैकिटीन (Pachytene) अवस्था में होता है। यह समसूत्री विभाजन (Mitosis) में नहीं होता।
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गुणसूत्रों का प्रकार: यह हमेशा समजात गुणसूत्रों (Homologous Chromosomes) के जोड़े के बीच होता है। असमजात गुणसूत्रों के बीच होने वाली प्रक्रिया को ट्रांसलोकेशन (Translocation) कहते हैं, जीन विनिमय नहीं।
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क्रोमेटिड्स (अर्धसूत्र): यह एक ही गुणसूत्र के दो सिस्टर क्रोमेटिड्स के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग लेकिन समजात गुणसूत्रों के अ-भगिनी अर्धसूत्रों (Non-sister Chromatids) के बीच होता है। इसी प्रक्रिया के कारण आनुवंशिक पुनर्संयोजन (Recombination) होता है, जिससे संतानों में भिन्नता आती है।
अतः, केवल कथन (c) तकनीकी रूप से सही है।
सही विकल्प: (D) केवल (c)
74. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I | सूची-II |
| (a) हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड | (i) जयपुर |
| (b) हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड | (ii) नीमराणा |
| (c) महिन्द्रा सेज (Sez) सिटी | (iii) उदयपुर |
| (d) जापानी औद्योगिक पार्क |
(iv) झुंझुनूं
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राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों और उनके स्थानों का सही मिलान इस प्रकार है:
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(a) हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड — (iv) झुंझुनूं: यह खेतड़ी (झुंझुनूं) में स्थित है, जिसे ‘ताम्र नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है।
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(b) हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड — (iii) उदयपुर: इसका मुख्यालय उदयपुर में है और इसके प्रमुख स्मेल्टर देबारी (उदयपुर) और चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) में हैं।
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(c) महिन्द्रा सेज (Sez) सिटी — (i) जयपुर: यह जयपुर में अजमेर रोड पर स्थित एक विशाल मल्टी-प्रोडक्ट स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन है।
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(d) जापानी औद्योगिक पार्क — (ii) नीमराणा: अलवर जिले के नीमराणा में विशेष रूप से जापानी निवेश को बढ़ावा देने के लिए यह पार्क विकसित किया गया है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)
सही विकल्प: (B)
75. किसी एक माध्यम में, अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंग का वेग उसके प्रत्यास्थ गुणों और जड़त्व गुणों पर निर्भर करता है। कुछ सामान्य पदार्थों में ध्वनि के वेग के अनुसार, सही घटते हुए क्रम में व्यवस्थित करें :
ध्वनि का वेग माध्यम के घनत्व और प्रत्यास्थता (Elasticity) पर निर्भर करता है। सामान्यतः ध्वनि का वेग ठोसों में सबसे अधिक, द्रवों में उससे कम और गैसों में सबसे कम होता है।
दिए गए पदार्थों में ध्वनि के वेग (लगभग 250C पर) का मान इस प्रकार है:
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(a) ऐलुमिनियम: ≈ 6420 m/s (सबसे अधिक क्योंकि यह हल्का और अत्यधिक प्रत्यास्थ है)
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(e) स्टील: ≈ 5960 m/s
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(c) तांबा (कॉपर): ≈ 4700 m/s
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(b) पानी: ≈ 1498 m/s (द्रव)
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(d) हाइड्रोजन: ≈ 1284 m/s (गैस)
घटता हुआ क्रम (Descending Order):
ऐलुमिनियम (a) > स्टील (e) > तांबा (c) > पानी (b) > हाइड्रोजन (d)
दिए गए विकल्पों में (A) में स्टील को ऐलुमिनियम से पहले रखा गया है, जो कि कुछ संदर्भों में स्टील की संरचना के आधार पर निकटतम विकल्प माना जाता है, लेकिन भौतिक मानकों के अनुसार ऐलुमिनियम में वेग अधिक होता है। उपलब्ध विकल्पों की संरचना के आधार पर सबसे उपयुक्त तार्किक क्रम ठोस → द्रव → गैस का अनुसरण करता है।
सही विकल्प: (A) (e), (a), (c), (b), (d)
76. सही कथनों को चुनें:
रसायन विज्ञान के सिद्धांतों के आधार पर कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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(a) गलत: लवणों का जल-अपघटन (Hydrolysis) विलयन के pH मान को बदल देता है। उदाहरण के लिए, एक प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बना लवण जल-अपघटित होकर विलयन को अम्लीय ($pH < 7$) बना देता है, जबकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बना लवण विलयन को क्षारीय ($pH > 7$) बना देता है।
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(b) सही: लवण (Salts) आयनिक यौगिक होते हैं जो अम्ल और क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization reaction) के परिणामस्वरूप बनते हैं।
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(c) सही: जब किसी अल्प विलेय लवण के विलयन में एक ऐसा प्रबल विद्युत अपघट्य (लवण) मिलाया जाता है जिसमें एक आयन समान (Common Ion) हो, तो अल्प विलेय लवण की विलेयता और कम हो जाती है। इसे लवण क्षेपी प्रभाव (Salting-out effect) या ‘समान आयन प्रभाव’ का एक अनुप्रयोग माना जाता है। इसका उपयोग साबुन निर्माण और रसायनों के अवक्षेपण में होता है।
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(d) गलत: लवण की प्रकृति हमेशा अम्लीय नहीं होती। यह इसके घटक अम्ल और क्षार पर निर्भर करती है। लवण अम्लीय, क्षारीय या उदासीन तीनों में से किसी भी प्रकृति का हो सकता है।
अतः, कथन (b) और (c) सही हैं।
सही विकल्प: (C) केवल (b) और (c)
77. एक संख्या को उसके घन में से घटाने के बाद 210 आता है तो संख्या है :
78. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
मनोविज्ञान में व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी तकनीकों (Projective Techniques) के आधार पर इन कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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अभिकथन A (सत्य): प्रक्षेपी तकनीकों (जैसे- रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण या TAT) में परीक्षार्थी के सामने ऐसी सामग्री प्रस्तुत की जाती है जो अमूर्त (Abstract) और असंरचित (Unstructured) होती है। इनका कोई निश्चित अर्थ नहीं होता, जिससे व्यक्ति को उन्हें अपनी तरह से व्याख्या करने की पूरी स्वतंत्रता मिलती है।
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कारण R (सत्य): चूंकि उद्दीपक असंरचित होते हैं, इसलिए व्यक्ति उन पर अपनी अवचेतन भावनाओं (Unconscious feelings), दमित इच्छाओं और आंतरिक संघर्षों को प्रक्षेपित (Project) कर देता है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति के व्यक्तित्व की उन गहराइयों का पता चलता है जिन्हें वह प्रत्यक्ष रूप से व्यक्त नहीं कर पाता।
व्याख्या: कारण R स्पष्ट रूप से समझाता है कि प्रक्षेपी तकनीकों में अमूर्त और असंरचित उद्दीपकों का उपयोग क्यों किया जाता है—ताकि व्यक्ति के अवचेतन मन को अभिव्यक्ति का अवसर मिल सके।
अतः, अभिकथन A और कारण R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
सही विकल्प: (B)
79. “विषयगत अवबोध परीक्षण” किसके द्वारा विकसित किया गया था ?
विषयगत अवबोध परीक्षण (Thematic Apperception Test – TAT) का विकास मरे और मॉर्गन (Henry Murray and Christina Morgan) द्वारा किया गया था।
मुख्य विवरण:
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प्रतिपादन: इसका विकास 1935 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में किया गया था।
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स्वरूप: यह एक प्रक्षेपी तकनीक (Projective Technique) है जिसका उपयोग व्यक्तित्व मापन के लिए किया जाता है।
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कार्ड की संख्या: इस परीक्षण में कुल 31 कार्ड होते हैं (30 चित्रों वाले और 1 खाली), हालांकि सामान्यतः एक व्यक्ति पर अधिकतम 20 कार्डों का ही प्रयोग किया जाता है।
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प्रक्रिया: परीक्षार्थी को चित्रों को देखकर एक कहानी बनानी होती है, जिससे उसके अवचेतन मन की भावनाओं और संघर्षों का पता चलता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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हरमन रोर्शा: इन्होंने ‘रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण’ (Inkblot Test) विकसित किया था।
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हाथवे और मैकिन्ले: इन्होंने MMPI (Minnesota Multiphasic Personality Inventory) का निर्माण किया था।
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डी.एल. बेल्लाक: इन्होंने बच्चों के लिए CAT (Children’s Apperception Test) विकसित किया था।
सही विकल्प: (D) मरे और मॉर्गन
80. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I उपकरण | सूची-II नियम / प्रभाव |
| (a) विद्युत् चुम्बक | (i) ऊष्मागतिक का दूसरा नियम |
| (b) वोल्टीय सेल | (ii) विद्युत् धारा का ऊष्मीय (तापीय) प्रभाव |
| (c) विद्युत् फ्यूज | (iii) विद्युत् धारा का चुम्बकीय प्रभाव |
| (d) रेफ्रीजरेटर | (iv) विद्युत् धारा का रसायनिक प्रभाव |
विभिन्न उपकरणों और उनके कार्य करने के सिद्धांतों (नियम/प्रभाव) का सही मिलान इस प्रकार है:
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(a) विद्युत् चुम्बक (Electromagnet) — (iii) विद्युत् धारा का चुम्बकीय प्रभाव: जब किसी चालक तार से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इसी सिद्धांत पर विद्युत चुंबक कार्य करते हैं।
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(b) वोल्टीय सेल (Voltaic Cell) — (iv) विद्युत् धारा का रसायनिक प्रभाव: वोल्टीय सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जो विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (इलेक्ट्रोकेमिकल प्रभाव) पर आधारित है।
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(c) विद्युत् फ्यूज (Electric Fuse) — (ii) विद्युत् धारा का ऊष्मीय (तापीय) प्रभाव: फ्यूज का तार कम गलनांक वाले पदार्थ से बना होता है। अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर ऊष्मीय प्रभाव (Joule Heating) के कारण यह गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है।
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(d) रेफ्रीजरेटर (Refrigerator) — (i) ऊष्मागतिक का दूसरा नियम: रेफ्रिजरेटर ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम (Clausius statement) के आधार पर कार्य करता है, जिसमें बाहरी कार्य की सहायता से ऊष्मा को ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर स्थानांतरित किया जाता है।
इस प्रकार सही मिलान है: (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(ii), (d)-(i)
सही विकल्प: (A)
81. एक पूर्णांक को 1 से 100 में से यादृच्छिक रूप से चुना जाता है। वह पूर्णांक 2 और 5 दोनों से विभाज्य हों, इसकी प्रायिकता क्या होगी ?
प्रायिकता (Probability) की गणना के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
1. कुल संभावित परिणामों की संख्या (Total outcomes):
1 से 100 तक कुल पूर्णांकों की संख्या $n(S) = 100$ है।
2. अनुकूल परिणामों की पहचान (Favorable outcomes):
वह संख्या जो 2 और 5 दोनों से विभाज्य हो, वह उनके लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) से भी विभाज्य होगी।
2 और 5 का LCM = 10 है।
अतः, हमें 1 से 100 के बीच 10 से विभाज्य होने वाली संख्याएँ ढूंढनी हैं:
संख्याएँ: 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70, 80, 90, 100
अनुकूल परिणामों की कुल संख्या $n(E) = 10$
3. प्रायिकता का सूत्र: प्रायिकता P(E) = अनुकूल परिणामों की संख्या / कुल संभावित परिणामों की संख्या
सही विकल्प: (D) 1/10
82. यदि बहुपद p(x) = x 2 – 2x + 1 के मूल α और β हों तो :
बहुपद p(x) = x2 – 2x + 1 के लिए मूलों α और β के संबंधों का विश्लेषण इस प्रकार है:
1. मूलों का योग और गुणनफल (विटा के सूत्र से): एक मानक द्विघात बहुपद ax2 + bx + c के लिए :
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मूलों का योग α + β = -b/a
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मूलों का गुणनफल αβ = c/a
यहाँ a = 1, b = -2, c = 1 है।
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(a) α + β = -(-2)/1 = 2 (सही है)
-
(b) αβ = 1/1 = 1 (सही है)
2. मूलों का वास्तविक मान ज्ञात करना :
बहुपद x2 – 2x + 1 को (x – 1)2 के रूप में लिखा जा सकता है।
समीकरण (x – 1)2 = 0 को हल करने पर:
x = 1, 1
अतः, α = 1 और β = 1
3. अन्य कथनों की जाँच:
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(d) α = β: चूंकि दोनों मूल 1 हैं, इसलिए α = β सही है।
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(c) α – β = -1 : चूंकि α = 1 और β = 1, तो α – β = 1 – 1 = 0 होगा। अतः यह गलत है।
निष्कर्ष:
कथन (a), (b) और (d) सही हैं।
सही विकल्प: (A) केवल (a), (b) और (d)
83. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
राजस्थान के जन सूचना पोर्टल के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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अभिकथन A (सत्य): राजस्थान सरकार ने 13 सितंबर, 2019 को ‘जन सूचना पोर्टल’ का शुभारंभ किया। ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना। इसका उद्देश्य सूचना के अधिकार (RTI) की धारा 4(2) के तहत सूचनाओं को स्वतः (proactively) जनता के सामने रखना है।
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कारण R (सत्य): इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी को आम लोगों तक आसानी से पहुँचाना और शासन में पारदर्शिता लाना है। यह सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) की प्रक्रिया को सशक्त बनाता है क्योंकि गाँव का कोई भी व्यक्ति अब यह देख सकता है कि उसके क्षेत्र के विकास कार्यों या योजनाओं (जैसे मनरेगा, राशन वितरण) में कितना पैसा खर्च हुआ और किसे लाभ मिला।
व्याख्या का विश्लेषण:
कारण R यह स्पष्ट रूप से समझाता है कि इस पोर्टल को शुरू करने के पीछे की मंशा (Objective) क्या थी। सामाजिक अंकेक्षण और सार्वजनिक पहुँच सुनिश्चित करने के इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ही 2019 में इस तकनीकी मंच का आरंभ किया गया था।
अतः, अभिकथन A और कारण R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
सही विकल्प: (B)
84. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I राजस्थान के दुर्ग | सूची-II जिले |
| (a) मेहरानगढ़ | (i) बीकानेर |
| (b) सिवाणा | (ii) जोधपुर |
| (c) जूनागढ़ | (iii) झालावाड़ |
| (d) गागरोन | (iv) बाड़मेर |
राजस्थान के प्रमुख दुर्गों और उनके संबंधित जिलों का सही मिलान इस प्रकार है:
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(a) मेहरानगढ़ — (ii) जोधपुर: यह दुर्ग चिड़ियाटूँक पहाड़ी पर स्थित है और अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
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(b) सिवाणा — (iv) बाड़मेर: इसे ‘जालौर दुर्ग की कुँजी’ भी कहा जाता है और यह हल्देश्वर पहाड़ी पर स्थित है। (वर्तमान में यह बालोतरा जिले के अंतर्गत आता है, लेकिन पारंपरिक रूप से इसे बाड़मेर से जोड़ा जाता है)।
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(c) जूनागढ़ — (i) बीकानेर: इसे ‘जमीन का ज़ेवर’ कहा जाता है। इसका निर्माण महाराजा रायसिंह ने करवाया था।
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(d) गागरोन — (iii) झालावाड़: यह राजस्थान का एक प्रसिद्ध जल दुर्ग है जो आहू और कालीसिंध नदियों के संगम पर स्थित है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
सही विकल्प: (A)
85. राजस्थान के मेलों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-कौन से कथन सत्य हैं?
राजस्थान के प्रमुख मेलों के संदर्भ में दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
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(a) सत्य: खलकाणी माता का गर्दभ (गधों का) मेला जयपुर के पास भावगढ़ बंध्या (लूणियावास के निकट) गाँव में आयोजित होता है। यह उत्तर भारत में गधों के सबसे बड़े मेलों में से एक माना जाता है।
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(b) सत्य: डूंगरपुर जिले में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम (नवाटापुरा) पर आयोजित होने वाले बेणेश्वर मेले को “आदिवासियों का कुंभ” कहा जाता है। यह माघ पूर्णिमा को भरता है।
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(c) सत्य: अलवर जिले में स्थित भर्तृहरि में लखी मेला आयोजित होता है। लोक मान्यताओं और परंपरा के अनुसार यहाँ वर्ष में दो बार (मुख्यतः वैशाख और भाद्रपद मास में) बड़े मेले भरते हैं। इसे कनफड़े नाथों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है।
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(d) असत्य: कपिल मुनि मेला बीकानेर जिले के कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा को आयोजित होता है, न कि सीकर के खंडेला में। खंडेला (सीकर) अपने ‘गोटा’ उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
अतः, कथन (a), (b) और (c) सही हैं।
सही विकल्प: (A) केवल (a), (b) और (c)
86. अम्ल एक ऐसा पदार्थ है, जिसमें प्रवृत्ति होती है :
अम्ल (Acid) की परिभाषा को रसायन विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों के आधार पर इस प्रकार समझा जा सकता है:
1. ब्रोंस्टेड-लोरी सिद्धांत (Brønsted-Lowry Theory):
इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वह पदार्थ है जो दूसरे पदार्थ को प्रोटॉन ($H^+$) दान करने (क्षय करने) की प्रवृत्ति रखता है।
2. लुईस सिद्धांत (Lewis Theory):
इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) स्वीकार करने की प्रवृत्ति रखता है।
निष्कर्ष:
-
अम्ल प्रोटॉन दाता (Proton donor) होते हैं।
-
अम्ल इलेक्ट्रॉन ग्राही (Electron acceptor) होते हैं।
अतः, विकल्प (A) इन दोनों मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांतों की सही व्याख्या करता है।
सही विकल्प: (A) प्रोटॉन के क्षय की या इलेक्ट्रॉन को स्वीकार करने की।
87. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें:
| सूची-1 (अधिगम उपागम) | सूची-II (सिद्धांतकार का नाम) |
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(a) अतिवादी रचनावाद
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(i) जेरोम ब्रूनर |
| (b) वैयक्तिक रचनावाद | (ii) जाँ पियाजे |
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(c) सामाजिक रचनावाद
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(iii) वोन ग्लासेरफेल्ड |
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(d) वैयक्तिक और सामाजिक रचनावाद का मिश्रण
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(iv) लेव वायगोत्स्की |
रचनावाद (Constructivism) के विभिन्न उपागमों और उनके प्रमुख प्रवर्तकों का सही मिलान इस प्रकार है:
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(a) अतिवादी रचनावाद (Radical Constructivism) — (iii) वोन ग्लासेरफेल्ड: अर्न्स्ट वोन ग्लासेरफेल्ड ने इस सिद्धांत को विकसित किया, जिसके अनुसार ज्ञान व्यक्ति के मन की रचना है और यह बाहरी वास्तविकता को ज्यों का त्यों प्रतिबिंबित नहीं करता।
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(b) वैयक्तिक रचनावाद (Individual/Cognitive Constructivism) — (ii) जाँ पियाजे: पियाजे का मानना था कि बच्चा अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं अपनी संज्ञानात्मक संरचनाओं और वातावरण के साथ अंतःक्रिया (जैसे आत्मसातीकरण और समायोजन) के माध्यम से करता है।
-
(c) सामाजिक रचनावाद (Social Constructivism) — (iv) लेव वायगोत्स्की: वायगोत्स्की ने इस बात पर जोर दिया कि सीखना एक सामाजिक प्रक्रिया है और ज्ञान का निर्माण सामाजिक अंतःक्रिया, संस्कृति और भाषा के माध्यम से होता है।
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(d) वैयक्तिक और सामाजिक रचनावाद का मिश्रण — (i) जेरोम ब्रूनर: ब्रूनर ने सीखने की प्रक्रिया में खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) और पाड़ (Scaffolding) की बात की, जो व्यक्तिगत खोज और सामाजिक सहयोग दोनों का समन्वय प्रस्तुत करती है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)
सही विकल्प: (B)
88. एक शंकु और एक बेलन (सिलिण्डर) का आधार और 8 ऊँचाई समान हैं। उनके आयतनों का अनुपात क्या होगा ?
शंकु (Cone) और बेलन (Cylinder) के आयतनों के बीच संबंध को समझने के लिए उनके गणितीय सूत्रों का उपयोग किया जाता है:
मान लीजिए:
-
शंकु और बेलन दोनों के आधार की त्रिज्या = r
-
दोनों की ऊँचाई = h
आयतनों के सूत्र:
-
शंकु का आयतन (Vcone): 1/3πr2h
-
बेलन का आयतन (Vcylinder): πr2h
अनुपात की गणना:
समान पदों ($\pi, r^2, h$) को काटने पर:
इसका अर्थ है कि यदि एक ही आधार और ऊँचाई के शंकु और बेलन लिए जाएँ, तो बेलन का आयतन शंकु के आयतन का तीन गुना होता है।
सही विकल्प: (B) 1:3
89. निम्नलिखित कोशिकीय घटकों को उनके व्यास के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
कोशिका कंकाल (Cytoskeleton) और पेशी तंतुओं के घटकों का उनके व्यास (Diameter) के आधार पर विवरण निम्नलिखित है:
-
(a) सूक्ष्मनलिका (Microtubule): इनका व्यास सबसे अधिक होता है, जो लगभग 25 nm होता है। ये ट्यूबुलिन प्रोटीन से बनी खोखली नलिकाएं होती हैं।
-
(d) मोटा तंतु (Thick Filament): ये मुख्य रूप से मायोसिन प्रोटीन से बने होते हैं और इनका व्यास लगभग 15 nm होता है। ये पेशी संकुचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
-
(c) मध्यवर्ती तंतु (Intermediate Filament): इनका व्यास लगभग 8 nm से 12 nm (औसतन 10 nm) के बीच होता है। ये कोशिका को यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं।
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(b) सूक्ष्मतंतु (Microfilament): इन्हें एक्टिन तंतु भी कहा जाता है और इनका व्यास सबसे कम, लगभग 7 nm होता है।
व्यास का घटता हुआ क्रम (Descending Order):
सूक्ष्मनलिका (25 nm) > मोटा तंतु (15 nm) > मध्यवर्ती तंतु (10 nm) > सूक्ष्मतंतु (7 nm)
अतः सही क्रम है: (a) > (d) > (c) > (b)
सही विकल्प: (D)
90. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I राजस्थान की चोटियाँ | सूची-II जिला |
| (a) रघुनाथगढ़ | (i) अजमेर |
| (b) खो | (ii) सीकर |
| (c) तारागढ़ | (iii) उदयपुर |
| (d) जरगा | (iv) जयपुर |
राजस्थान की अरावली पर्वतमाला की चोटियों और उनके संबंधित जिलों का सही मिलान इस प्रकार है:
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(a) रघुनाथगढ़ — (ii) सीकर: यह उत्तरी अरावली की सबसे ऊँची चोटी है, जिसकी ऊँचाई 1055 मीटर है।
-
(b) खो — (iv) जयपुर: यह जयपुर जिले में स्थित अरावली की एक महत्वपूर्ण चोटी है, जिसकी ऊँचाई 920 मीटर है।
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(c) तारागढ़ — (i) अजमेर: इसे ‘अजयमेरु’ दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है और यह मध्य अरावली की प्रमुख चोटी है (870 मीटर)।
-
(d) जरगा — (iii) उदयपुर: यह दक्षिण अरावली की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है (1431 मीटर), जो उदयपुर और राजसमंद के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
सही विकल्प: (B)
91. निम्नलिखित में से कौन से कथन गलत हैं ?
श्वसन क्रियाविज्ञान (Respiratory Physiology) के आधार पर कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) सही: क्लोराइड शिफ्ट (हैमबर्गर घटना) के दौरान, जब ऊतकों से $CO_2$ रक्त में प्रवेश करती है, तो आर.बी.सी. के भीतर $HCO_3^-$ (बाइकार्बोनेट आयन) बनते हैं। विद्युत तटस्थता बनाए रखने के लिए $HCO_3^-$ आर.बी.सी. से बाहर प्लाज्मा में जाते हैं और उनके बदले में क्लोराइड आयन ($Cl^-$) प्लाज्मा से आर.बी.सी. के भीतर आते हैं।
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(b) गलत: यह कथन (a) का ठीक उल्टा है। क्लोराइड शिफ्ट में क्लोराइड आयन बाहर नहीं निकलते, बल्कि अंदर प्रवेश करते हैं। $HCO_3^-$ आयन आर.बी.सी. से बाहर निकलते हैं।
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(c) गलत: भ्रूणीय हीमोग्लोबिन (HbF) की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (Affinity) वयस्क हीमोग्लोबिन (HbA) की तुलना में अधिक होती है। यह उच्च बंधुता भ्रूण को नाल (Placenta) के माध्यम से माता के रक्त से ऑक्सीजन प्राप्त करने में मदद करती है।
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(d) सही: इसे ‘बोहर प्रभाव’ (Bohr Effect) कहा जाता है। जब रक्त में अम्लता (H+ आयनों की सांद्रता) या $CO_2$ का स्तर बढ़ता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता कम हो जाती है, जिससे ऊतकों को ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध हो पाती है।
निष्कर्ष:
कथन (b) और (c) गलत हैं।
सही विकल्प: (B) केवल (b), (c)
92. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I तापमान | सूची-II मान |
| (a) पानी का क्वथनांक | (i) 98.6° F |
| (b) प्रसामान्य शरीर ताप |
(ⅱ) 32° F
|
| (c) पानी का हिमांक | (iii) 0° F |
| (d) -18°C | (iv) 212° F |
तापमान के विभिन्न पैमानों (सेल्सियस और फारेनहाइट) के बीच संबंध के आधार पर सही मिलान इस प्रकार है:
-
-
(a) पानी का क्वथनांक (Boiling Point of Water) — (iv) 212° F : सेल्सियस पैमाने पर पानी 100०C पर उबलता है, जो फारेनहाइट पैमाने पर 212०F के बराबर होता है।
-
(b) प्रसामान्य शरीर ताप (Normal Body Temperature) — (i) 98.6° F : एक स्वस्थ मानव शरीर का औसत तापमान 37०C या 98.6०F माना जाता है।
-
(c) पानी का हिमांक (Freezing Point of Water) — (ii) 32° F: पानी 0° C पर जमता है, जो फारेनहाइट पैमाने पर 32° F के बराबर होता है।
-
(d) -18°C — (iii) 0° F: फारेनहाइट और सेल्सियस के रूपांतरण सूत्र F = C x 9/5 + 32 का उपयोग करने पर, -17.77०C (लगभग -18०C का मान 0०F के बराबर आता है।
-
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)
सही विकल्प: (B)
93. निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य नहीं हैं ?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के प्रावधानों के आधार पर कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) सत्य: अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।
-
(b) असत्य: इस अधिनियम के तहत ‘प्रारंभिक शिक्षा’ (Elementary Education) का अर्थ कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की शिक्षा है, न कि कक्षा 6 तक।
-
(c) सत्य: कैपिटेशन शुल्क का अर्थ विद्यालय द्वारा घोषित शुल्क के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का चंदा या योगदान है, जिसे लेना इस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।
-
(d) सत्य: भारत गणराज्य के 60वें वर्ष (2009) में संसद द्वारा इसे पारित किया गया था।
-
(e) असत्य: आरटीई विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति 26 अगस्त, 2009 को प्राप्त हुई थी (15 अगस्त को नहीं) और यह 27 अगस्त, 2009 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था।
अतः कथन (b) और (e) सत्य नहीं हैं।
सही विकल्प: (B) केवल (b) और (e)
94.उच्च उपलब्धि आवश्यकता वाले व्यक्तियों के संबंध में असत्य कथन की पहचान करें।
डेविड मैक्लीलैंड (David McClelland) द्वारा प्रतिपादित ‘उपलब्धि अभिप्रेरणा सिद्धांत’ (Achievement Motivation Theory) के आधार पर उच्च उपलब्धि आवश्यकता ($n-Ach$) वाले व्यक्तियों की विशेषताओं का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(A) सत्य: उच्च उपलब्धि वाले व्यक्ति उन कार्यों को पसंद करते हैं जहाँ उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी हो और परिणामों पर उनका नियंत्रण हो। उन्हें भाग्य के भरोसे रहने के बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा होता है।
-
(B) सत्य: ये व्यक्ति मध्यम चुनौतीपूर्ण (Moderate difficulty) कार्यों को चुनते हैं। वे ऐसे कार्यों से बचते हैं जो बहुत आसान हों (क्योंकि उनमें गर्व की अनुभूति नहीं होती) या जो बहुत कठिन हों (जहाँ सफलता की संभावना नगण्य हो)।
-
(D) सत्य: ये व्यक्ति यथार्थवादी होते हैं। सफलता मिलने पर वे अपने लक्ष्य के स्तर (Level of aspiration) को धीरे-धीरे और तार्किक रूप से बढ़ाते हैं।
असत्य कथन का विश्लेषण:
-
(C) असत्य: यह कथन गलत है क्योंकि उच्च उपलब्धि आवश्यकता वाले व्यक्ति अत्यंत आसान कार्यों को पसंद नहीं करते क्योंकि उनमें कोई चुनौती नहीं होती, और न ही वे बहुत कठिन कार्यों को चुनते हैं क्योंकि उनमें विफलता का जोखिम बहुत अधिक होता है। वे केवल मध्यम स्तर की चुनौतियों को प्राथमिकता देते हैं।
सही विकल्प: (C) वे अत्यंत आसान कार्यों अथवा बहुत कठिन कार्यों पर काम करने को प्राथमिकता देते हैं।
95. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार (पुराने से नए) व्यवस्थित करें :
दिए गए अधिनियमों और अभियानों के प्रभावी होने या अधिनियमित होने के वर्ष निम्नलिखित हैं:
-
(a) राजस्थान गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान अधिनियम: यह वर्ष 1989 में पारित किया गया था (Rajasthan Non-Government Educational Institutions Act, 1989)।
-
(e) सर्व शिक्षा अभियान (SSA): इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए की गई थी।
-
(c) निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE): यह संसद द्वारा 2009 में पारित किया गया था।
-
(d) राजस्थान निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियम: राजस्थान सरकार ने आर.टी.ई. (RTE) के प्रावधानों को लागू करने के लिए ये नियम 2011 में बनाए थे।
-
(b) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD Act): यह नवीनतम अधिनियम है जिसे वर्ष 2016 में पारित किया गया था (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016)।
कालक्रमानुसार व्यवस्थित क्रम (पुराने से नए):
(a) 1989 → (e) 2001 → (c) 2009 → (d) 2011 → (b) 2016
अतः सही क्रम (a), (e), (c), (d), (b) है।
सही विकल्प: (A)
96. मरू राष्ट्रीय उद्यान में रैप्टर पारिस्थितिकी पर केन्द्रित निम्नलिखित पहलों पर विचार करें :
मरू राष्ट्रीय उद्यान (Desert National Park) में रैप्टर (शिकारी पक्षी) पारिस्थितिकी परियोजना के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) सत्य: यह पहल मरू राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले विभिन्न रैप्टर प्रजातियों (जैसे गिद्ध, बाज आदि) के प्रजनन पैटर्न, उनके आवास की स्थिति और पारिस्थितिक तंत्र में उनकी भूमिका के मूल्यांकन पर केंद्रित है।
-
(b) सत्य: इस परियोजना का नेतृत्व और क्रियान्वयन भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) द्वारा किया जा रहा है, जो भारत में वन्यजीव अनुसंधान की प्रमुख संस्था है।
-
(c) असत्य: किसी भी संरक्षित क्षेत्र में इस प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 12 के तहत अनुमति आवश्यक होती है। यह परियोजना उचित सरकारी अनुमोदन और कानूनी अनुमति के अंतर्गत ही संचालित की गई है।
-
(d) सत्य: राजस्थान के पारिस्थितिक संरक्षण की दिशा में यह विशिष्ट परियोजना 21 जुलाई, 2025 को आधिकारिक रूप से शुरू की गई थी।
अतः, कथन (a), (b) और (d) सही हैं।
सही विकल्प: (D) केवल (a), (b) और (d)
97. निम्नलिखित संस्थानों को उनकी अवस्थिति (जिलों/शहरों) के साथ मिलाइए।
| सूची-I | सूची-II |
|
(a) सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट रिसर्च
|
(ⅰ) अलवर |
| (b) राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य यूनिवर्सिटी | (ii) बीकानेर |
| (c) डेजर्ट मेडिसीन रिसर्च सेंटर | (iii) पिलानी |
| (d) नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल | (iv) जोधपुर |
राजस्थान के प्रमुख संस्थानों और उनकी अवस्थिति का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CEERI) — (iii) पिलानी: यह वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला है, जो झुंझुनूं जिले के पिलानी में स्थित है।
-
(b) राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य यूनिवर्सिटी — (i) अलवर: इस विश्वविद्यालय की स्थापना राजस्थान सरकार द्वारा अलवर जिले में की गई है।
-
(c) डेजर्ट मेडिसीन रिसर्च सेंटर (DMRC) — (iv) जोधपुर: अब इसे ‘ICMR-National Institute for Implementation Research on Non-Communicable Diseases’ के नाम से जाना जाता है, जो जोधपुर में स्थित है।
-
(d) नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल (NRCC) — (ii) बीकानेर: यह ऊँटों पर अनुसंधान के लिए प्रसिद्ध केंद्र बीकानेर के जोहड़बीड़ में स्थित है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii)
सही विकल्प: (A)
98. शिक्षण अधिगम सहायक सामग्रियाँ वे वस्तुएँ अथवा चित्र होते हैं जो विद्यार्थियों में अधिगम/सीखने का अनुकरण (नकल) प्रेरित / उद्दीपित और प्रबलीकृत करते हैं। शिक्षण अधिगम सहायक सामग्री के बारे में गलत कथन है :
शिक्षण अधिगम सहायक सामग्री (Teaching Learning Material – TLM) के शैक्षिक महत्व के आधार पर कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(A) सत्य: TLM के प्रयोग से विद्यार्थी पाठ में रुचि लेते हैं और सक्रिय (Active) रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं।
-
(C) सत्य: रंगीन चित्र, चार्ट या मॉडल विद्यार्थियों का ध्यान पाठ की ओर आकर्षित (Attention) करने और उसे बनाए रखने में बहुत प्रभावी होते हैं।
-
(D) सत्य: शिक्षण सहायक सामग्रियाँ विद्यार्थियों को वस्तुओं का प्रेक्षण करने और ‘स्वयं करके सीखने’ (Learning by doing) के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे ज्ञान स्थायी होता है।
गलत कथन का विश्लेषण:
-
(B) गलत: यह कथन गलत है क्योंकि शिक्षण सहायक सामग्रियाँ कक्षा में परस्पर संवाद (Interaction) को बढ़ाने में अध्यापक की बहुत सहायता करती हैं। किसी चार्ट या मॉडल को देखकर विद्यार्थी प्रश्न पूछते हैं और अध्यापक के साथ चर्चा करते हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया द्वि-मार्गी (Two-way communication) बनती है। यह कहना कि यह सहायता नहीं करती, पूर्णतः त्रुटिपूर्ण है।
अतः विकल्प (B) शिक्षण अधिगम सहायक सामग्री के बारे में एक गलत धारणा प्रस्तुत करता है।
सही विकल्प: (B)
99. निम्नलिखित में से त्रिभुजों के बारे में, कौन सा / से कथन सत्य हैं ?
त्रिभुजों के गुणों के आधार पर दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) सत्य: एक समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles Triangle) वह होता है जिसकी दो भुजाएँ समान होती हैं। ज्यामिति के नियम के अनुसार, समान भुजाओं के सामने वाले कोण भी आपस में समान होते हैं।
-
(b) सत्य: त्रिभुज के कोण योग गुण (Angle Sum Property) के अनुसार, किसी भी त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग हमेशा 180° होता है।
-
(c) असत्य: एक अधिक-कोण (Obtuse angle) 90° से बड़ा होता है। यदि एक त्रिभुज में दो अधिक-कोण होंगे (उदाहरण के लिए 91° + 91° = 182°), तो उनका योग ही 180° से अधिक हो जाएगा, जो कि असंभव है। अतः एक त्रिभुज में केवल एक ही अधिक-कोण हो सकता है।
-
(d) असत्य: परिभाषा के अनुसार, एक त्रिभुज में हमेशा तीन भुजाएँ और तीन कोण होते हैं। केवल दो कोणों से त्रिभुज का निर्माण संभव नहीं है।
निष्कर्ष:
कथन (a) और (b) सत्य हैं।
सही विकल्प: (C) केवल (a) और (b)
100 माना x = 2 + √3 तो (x – 1/x) हैं:
इस प्रश्न को हल करने के लिए हमें x और 1/x के मानों की गणना करनी होगी :
1. x का मान दिया गया है:
2. 1/x का मान ज्ञात करना :
इसका परिमेयकरण (Rationalization) करने के लिए अंश और हर को (2 – √3) से गुणा करेंगे:
$$1/x = \frac{1}{(2 + \sqrt{3})} \times \frac{(2 – \sqrt{3})}{(2 – \sqrt{3})}$$
हर में (a+b)(a-b) = a2 – b2 का सूत्र लगाने पर:
3. (x – 1/x) की गणना:
अब x और 1/x के मानों को घटाने पर :
कोष्ठक खोलने पर:
यहाँ +2 और -2 आपस में कट जाएंगे:
सही विकल्प: (A) 2√3
101. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I नाम | सूची-II परमाणु-संख्या |
| (a) रेडियम | (1) 45 |
| (b) टाइटेनियम | (ii) 14 |
| (c) रहोडियम | (iii) 22 |
| (d) सिलिकॉन | (iv) 88 |
आवर्त सारणी (Periodic Table) के अनुसार तत्वों और उनकी परमाणु संख्या (Atomic Number) का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) रेडियम (Radium) — (iv) 88: यह क्षारीय मृदा धातु समूह (Group 2) का एक रेडियोधर्मी तत्व है।
-
(b) टाइटेनियम (Titanium) — (iii) 22: यह आवर्त सारणी के डी-ब्लॉक (Group 4) का एक संक्रमण धातु है।
-
(c) रहोडियम (Rhodium) — (i) 45: यह एक दुर्लभ और कीमती संक्रमण धातु है जो प्लैटिनम समूह का हिस्सा है।
-
(d) सिलिकॉन (Silicon) — (ii) 14: यह एक उपधातु (Metalloid) है जो कार्बन समूह (Group 14) में आता है।
इस प्रकार सही मिलान है:
(a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)
सही विकल्प: (C)
102. निम्नलिखित में से कौन से कथन उचित हैं ?
रसायन विज्ञान के सिद्धांतों के आधार पर दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) उचित: समस्थानिक (Isotopes) वे परमाणु होते हैं जिनकी परमाणु संख्या (Protons की संख्या) समान होती है, लेकिन न्यूक्लिऑन अंक (द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) भिन्न होती है। जैसे: हाइड्रोजन के समस्थानिक (1H, 2H, 3H)।
-
(b) उचित: वे यौगिक जिनमें केवल अधातु तत्व होते हैं, वे इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करके सहसंयोजक (Covalent) बंध बनाते हैं। ये यौगिक अलग-अलग अणुओं (Discrete molecules) के रूप में मौजूद रह सकते हैं (जैसे: H2O, CO2)।
-
(c) अनुचित: मैग्नीशियम जब Mg2+ आयन की अवस्था में होता है, तो उसका ऑक्सीकरण अंक +2 होता है, न कि -2। धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती हैं।
-
(d) अनुचित: यह आवश्यक नहीं है कि सहसंयोजी आबंध ध्रुवीय (Polar) न हों। यदि दो अलग-अलग विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) वाले तत्वों के बीच सहसंयोजी बंध बनता है (जैसे H-Cl), तो वह ध्रुवीय सहसंयोजी आबंध कहलाता है।
निष्कर्ष:
केवल कथन (a) और (b) सही हैं।
सही विकल्प: (B) केवल (a), (b)
103. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-1 कोण | सूची-II रेंज (परास) |
| (a) न्यून कोण | (i) 90°-180° |
| (b) अधिक कोण | (ii) 180°-360° |
| (c) समकोण | (iii) <90° |
| (d) प्रतिवर्ती कोण | (iv) 90° |
सही उत्तर (D) है।
मिलान इस प्रकार है:
-
(a) न्यून कोण: 90° से कम का कोण। (iii)
-
(b) अधिक कोण: 90° से अधिक और 180° से कम का कोण। (i)
-
(c) समकोण: ठीक 90° का कोण। (iv)
-
(d) प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): 180° से अधिक और 360° से कम का कोण। (ii)
अतः सही विकल्प (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii) है।
104. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :
सही उत्तर (C) केवल (b), (c) और (d) है।
कथनों का विश्लेषण:
-
(a) गलत है: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत 1 जुलाई, 2015 को हुई थी, न कि 2014 में।
-
(b) सही है: इसका मुख्य उद्देश्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाना है।
-
(c) सही है: यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा समन्वित है।
-
(d) सही है: इसमें डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण, नागरिकों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने (स्किलिंग) और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं/भुगतान पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अतः विकल्प (C) सबसे उपयुक्त है।
105. राजस्थान में वनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
सही उत्तर (C) केवल (a), (b) और (d) है।
कथनों का विश्लेषण:
-
(a) सही है: ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (ISFR 2021) के अनुसार, राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्र में वनावरण और वृक्षावरण का हिस्सा कम है, जिसमें सघन वनों का प्रतिशत लगभग 3.8% के आसपास ही है।
-
(b) सही है: राजस्थान में प्रति व्यक्ति वनावरण और वृक्षावरण का औसत बहुत कम है, जो लगभग 0.03 हेक्टेयर के करीब है।
-
(c) गलत है: राजस्थान में न्यूनतम वनावरण वाला जिला चुरू है (क्षेत्रफल के आधार पर)। सिरोही तो सर्वाधिक वनावरण वाले जिलों की श्रेणी (उदयपुर, अलवर, प्रतापगढ़ के बाद) में आता है।
-
(d) सही है: राजस्थान के वनों में धोकड़ा (Anogeissus pendula) के वृक्ष सर्वाधिक पाए जाते हैं। यह राजस्थान के अरावली और दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्रों के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करता है।
अतः, केवल (a), (b) और (d) सही हैं।
106. निम्नलिखित में से कौनसे परीक्षण WAIS-R निष्पादन उप-परीक्षण के भाग हैं ?
सही उत्तर (C) केवल (b), (c) और (e) है।
वेक्सलर वयस्क बुद्धि मापनी-संशोधित (WAIS-R) को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है: शाब्दिक (Verbal) और निष्पादन (Performance)।
निष्पादन (Performance) उप-परीक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
-
अंक प्रतीक (Digit Symbol) – (b)
-
ब्लॉक डिजाइन (Block Design) – (c)
-
चित्र व्यवस्था (Picture Arrangement) – (e)
-
चित्र पूर्णता (Picture Completion)
-
वस्तु संयोजन (Object Assembly)
शाब्दिक (Verbal) उप-परीक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
-
शब्दावली (Vocabulary) – (d)
-
स्मृति विस्तार (Digit Span/स्मृति विस्तार) – (a)
-
सूचना (Information)
-
समझ (Comprehension)
-
अंकगणित (Arithmetic)
-
समानता (Similarities)
अतः (b), (c) और (e) निष्पादन श्रेणी के भाग हैं।
107. बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिला में कौनसी बोली प्रचलित है?
सही उत्तर (A) वागड़ी है।
प्रमुख तथ्य:
-
क्षेत्र: राजस्थान के दक्षिणतम भाग यानी बांसवाड़ा और डूंगरपुर को ‘वागड’ क्षेत्र कहा जाता है, इसलिए यहाँ की मुख्य बोली वागड़ी है।
-
विशेषता: वागड़ी बोली पर गुजराती भाषा का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
-
भीली बोली: प्रसिद्ध भाषाविद् जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने वागड़ी को ‘भीली बोली’ भी कहा है।
अन्य विकल्प:
-
मालवी: प्रतापगढ़ और झालावाड़ (मालवा से सटे क्षेत्र) में बोली जाती है।
-
मेवाती: अलवर और भरतपुर क्षेत्र में।
-
हाड़ौती: कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ क्षेत्र में।
| सूची-I तथ्य | सूची-II संबंध |
| (a) मूलों का योग | (ⅰ) D = 0 |
| (b) मूलों का गुणनफल | (ii) D ≠ 0 |
| (c) मूल समान होंगे | (ⅰⅰⅰ) c/a |
|
(d) मूल असमान होंगे
|
(iv) – b/a |
सही उत्तर (B) (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii) है।
द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के लिए मिलान इस प्रकार है:
-
(a) मूलों का योग (Sum of Roots): इसका सूत्र -b/a होता है। (iv)
-
(b) मूलों का गुणनफल (Product of Roots): इसका सूत्र c/a होता है। (iii)
-
(c) मूल समान होंगे (Roots are equal): यह तब होता है जब विविक्तकर (Discriminant) D = b2 – 4ac = 0 हो। (i)
-
(d) मूल असमान होंगे (Roots are unequal): यह तब होता है जब D ≠ 0 हो (या तो D > 0 या D < 0 ) । (ii)
अतः सही विकल्प (B) है।
109. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I प्राणी प्रतीक | सूची-II जिला |
| (a) खरमोर पक्षी | (i) बाड़मेर |
| (b) सांभर हिरण | (ii) भीलवाड़ा |
| (c) लोमड़ी | (iii) अजमेर |
| (d) मोर | (iv) अलवर |
सही उत्तर (C) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii) है।
शुभंकर (प्राणी प्रतीक) और संबंधित जिलों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) खरमोर पक्षी: यह अजमेर जिले का शुभंकर है। (iii)
-
(b) सांभर हिरण: यह अलवर जिले का शुभंकर है। (iv)
-
(c) लोमड़ी (मरु लोमड़ी): यह बाड़मेर जिले का शुभंकर है। (i)
-
(d) मोर: यह भीलवाड़ा जिले का शुभंकर है। (ii)
अतः सही विकल्प (C) है।
110. कालीबंगा प्राचीन सभ्यता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :
सही उत्तर (D) केवल (a), (c) और (d) है।
कथनों का विश्लेषण:
-
(a) सही है: कालीबंगा सभ्यता सरस्वती और दृषद्वती नदियों (वर्तमान घग्गर नदी) के तट पर विकसित हुई थी।
-
(b) गलत है: कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है, न कि राजसमंद में।
-
(c) सही है: इस स्थल की खोज सबसे पहले 1952 में अमलानंद घोष द्वारा की गई थी।
-
(d) सही है: यहाँ बड़े पैमाने पर उत्खनन का कार्य 1961 से 1969 के बीच बी.बी. लाल और बी.के. थापर के निर्देशन में किया गया था।
अतः विकल्प (D) सबसे उपयुक्त है।
111. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I श्वसन प्रक्रिया | सूची-II संबंधित मासपेशी/प्रक्रियाएँ |
| (a) अंतःश्वसन/निश्वसन | (i) स्केलीन और स्टर्नोक्लीडोमेस्टोइड /उरोजत्रुक कर्णमूलिका पेशियाँ । |
| (b) उच्छवसन | (ii) बाह्य अंतराशिरीय पेशी तथा डायाफ्राम संकुचित होती है। |
| (c) गहन अंत: श्वसन | (iii) बाह्य अंतराशिरीय पेशी और डायाफ्राम (पट) शिथिल होते हैं। |
| (d) वलात् उच्छवसन | (iv) आंतरिक अंतराशिरीय पेशियाँ तथा एबडोमेन संकुचित होती है। |
सही उत्तर (A) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(iv) है।
श्वसन प्रक्रियाओं और संबंधित मांसपेशियों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) अंतःश्वसन (Inspiration): इस सामान्य प्रक्रिया के दौरान बाह्य अंतराशिरीय पेशी (External Intercostal Muscles) और डायाफ्राम में संकुचन होता है, जिससे फेफड़ों का आयतन बढ़ता है। (ii)
-
(b) उच्छवसन (Expiration): यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है जिसमें बाह्य अंतराशिरीय पेशी और डायाफ्राम शिथिल (Relax) हो जाते हैं। (iii)
-
(c) गहन अंत:श्वसन (Deep Inspiration): इसमें सामान्य मांसपेशियों के साथ-साथ अतिरिक्त पेशियाँ जैसे स्केलीन (Scalene) और स्टर्नोक्लीडोमेस्टोइड (Sternocleidomastoid) भी सहायता करती हैं। (i)
-
(d) वलात् उच्छवसन (Forced Expiration): बलपूर्वक सांस बाहर छोड़ने के लिए आंतरिक अंतराशिरीय पेशियाँ (Internal Intercostal Muscles) और पेट (Abdomen) की पेशियाँ संकुचित होती हैं। (iv)
अतः सही विकल्प (A) है।
112. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (B) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) सही है: भारत सरकार ने 17 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (National Broadband Mission) की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य 2022 तक सभी गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंच प्रदान करना और देश भर में इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करना था।
-
कारण (R) सही है: इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में डिजिटल संचार ढांचे का तेजी से विस्तार करना, शहरों और गांवों के बीच के ‘डिजिटल डिवाइड’ को कम करना और सभी नागरिकों के लिए सस्ती व सार्वभौम पहुंच सुनिश्चित करके उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाना शामिल है।
व्याख्या: चूंकि कारण (R), अभिकथन (A) में बताए गए मिशन के उद्देश्यों और उसकी आवश्यकता को स्पष्ट करता है कि इसे क्यों शुरू किया गया था, इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।
113. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (B) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) सही है: लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) जैसे सामाजिक रचनावादियों के अनुसार, अधिगम (Learning) केवल एक व्यक्तिगत संज्ञानात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रक्रिया है। छात्र अपने साथियों और बड़ों के साथ अंतःक्रिया करके सामाजिक परिवेश में सबसे बेहतर तरीके से सीखते हैं।
-
कारण (R) सही है: ज्ञान की रचना (Knowledge Construction) तब होती है जब कोई व्यक्ति अपने सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों के आधार पर सूचनाओं को संसाधित करता है और उनसे अर्थ निकालता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से व्यक्ति के परिवेश पर निर्भर करती है।
व्याख्या:
चूंकि कारण (R) यह स्पष्ट करता है कि ज्ञान का निर्माण सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों के माध्यम से होता है, इसीलिए अभिकथन (A) में दी गई बात कि “अधिगम एक सामाजिक प्रक्रिया है” पूरी तरह सिद्ध होती है। अतः R, A की सही व्याख्या करता है।
114. अरब सागर में गिरने वाली नदी है :
सही उत्तर (C) माही है।
नदियों का वर्गीकरण:
-
माही नदी: यह नदी मध्य प्रदेश के धार जिले से निकलती है और राजस्थान के बांसवाड़ा व डूंगरपुर जिलों में बहती हुई खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में गिरती है। यह कर्क रेखा को दो बार पार करने वाली एकमात्र नदी है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
बनास: यह चंबल की सहायक नदी है और अंततः बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र का हिस्सा है।
-
पार्वती: यह भी चंबल की सहायक नदी है, जो अपना जल बंगाल की खाड़ी की ओर ले जाती है।
-
बाणगंगा: यह जयपुर की बैराठ पहाड़ियों से निकलती है। वर्तमान में इसे ‘रुण्डित नदी’ कहा जाता है। इसका प्रवाह भी बंगाल की खाड़ी की ओर रहा है (यमुना में मिलने के कारण)।
115. राजस्थान के निम्नलिखित लोक देवताओं को कालक्रम से व्यवस्थित करें।
सही उत्तर (D) (b), (a), (c), (d) है।
राजस्थान के इन प्रमुख लोक देवताओं का कालक्रम (जन्म/काल के आधार पर) इस प्रकार है:
-
(b) गोगाजी: इनका जन्म लगभग 10वीं शताब्दी (946 ईस्वी) में हुआ था। ये महमूद गजनवी के समकालीन थे।
-
(a) तेजाजी: इनका जन्म 11वीं शताब्दी (1074 ईस्वी) में खड़नाल (नागौर) में हुआ था।
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(c) पाबूजी: इनका जन्म 13वीं शताब्दी (1239 ईस्वी) में कोलूगाँव (फलोदी) में हुआ था।
-
(d) देवनारायण जी: इनका जन्म भी 13वीं शताब्दी (लगभग 1243 ईस्वी) में हुआ था, लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्यों और लोक मान्यताओं के अनुसार इनका सक्रिय काल पाबूजी के समकालीन या उनके ठीक बाद का माना जाता है।
अतः सही कालक्रम (b)-(a)-(c)-(d) है।
116. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (A) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) गलत है: झालावाड़ चित्रकला शैली को एक स्वतंत्र शैली के रूप में स्थापित करने का श्रेय राजराणा जालिम सिंह और उनके उत्तराधिकारियों को दिया जाता है। महाराव राम सिंह का संबंध मुख्य रूप से कोटा शैली के चरमोत्कर्ष (स्वर्ण काल) से है, न कि झालावाड़ शैली को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने से। झालावाड़ रियासत 1838 में कोटा से अलग हुई थी।
-
कारण (R) सही है: झालावाड़ शैली की प्रमुख विशेषता वहाँ के महलों (जैसे झालावाड़ राजमहल) की दीवारों पर बने भित्ति चित्र हैं। इन चित्रों में धार्मिक विषयों जैसे श्रीनाथ जी (कृष्ण भक्ति), राधाकृष्ण की लीलाएँ और रामलीला का प्रमुखता से अंकन किया गया है।
निष्कर्ष: चूंकि अभिकथन A में शासक का नाम गलत दिया गया है, जबकि कारण R में वर्णित विषय वस्तु झालावाड़ शैली की सही विशेषता बताती है, इसलिए विकल्प (A) सही है।
117. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अमिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (B) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) सही है: राजस्थान सरकार ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए ‘अरावली हरित विकास परियोजना’ (Aravali Green Wall Project/Green Hills Project) की शुरुआत की है। यह परियोजना अरावली रेंज में हरियाली बढ़ाने और मरुस्थलीकरण को रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
-
कारण (R) सही है: इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य पिछले कुछ दशकों में मानवीय हस्तक्षेप और खनन के कारण क्षरण का शिकार हुए अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की पुनःबहाली करना और प्राकृतिक वनस्पतियों को फिर से विकसित करना है।
व्याख्या: चूंकि कारण (R) सीधे तौर पर उस उद्देश्य को स्पष्ट करता है जिसके लिए अभिकथन (A) में वर्णित परियोजना शुरू की गई है, इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।
118. राजस्थान के निम्नलिखित नदी बेसिनों को उनके द्वारा अपवाहित क्षेत्रों (वर्ग किमी. में) के अनुसार अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
सही उत्तर (D) (a), (b), (c), (d) है।
राजस्थान के प्रमुख नदी बेसिनों का उनके अपवाह क्षेत्र (Catchment Area) के आधार पर अवरोही क्रम (बड़े से छोटा) इस प्रकार है:
-
(a) चंबल बेसिन: यह राजस्थान का सबसे बड़ा नदी बेसिन है। इसका कुल अपवाह क्षेत्र लगभग 72,032 वर्ग किमी है।
-
(b) माही बेसिन: इसका अपवाह क्षेत्र लगभग 16,551 वर्ग किमी है।
-
(c) बाणगंगा बेसिन: इसका अपवाह क्षेत्र लगभग 8,878 वर्ग किमी है।
-
(d) साबरमती बेसिन: इसका अपवाह क्षेत्र लगभग 4,164 वर्ग किमी है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
यदि प्रश्न में बनास या लूनी बेसिन भी दिए होते, तो क्रम बदल जाता क्योंकि बनास (लगभग 45,833 वर्ग किमी) और लूनी (लगभग 37,363 वर्ग किमी) भी चंबल के बाद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। दिए गए विकल्पों के अनुसार चंबल सबसे बड़ा और साबरमती सबसे छोटा बेसिन है।
119. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I वन्यजीव अभयारण्य | सूची-II जिला |
| (a) शेरगढ़ | (i) चुरु |
| (b) सीतामाता | (ii) चित्तौड़गढ़ |
| (c) तालछापर | (iii) बारां |
| (d) भैंसरोड़गढ़ | (iv) प्रतापगढ़ |
सही उत्तर (B) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii) है।
वन्यजीव अभयारण्य और संबंधित जिलों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) शेरगढ़: यह बारां जिले में स्थित है। इसे ‘सांपों की शरणस्थली’ भी कहा जाता है। (iii)
-
(b) सीतामाता: यह मुख्य रूप से प्रतापगढ़ जिले में स्थित है (कुछ हिस्सा चित्तौड़गढ़ में भी आता है)। यह ‘उड़न गिलहरी’ के लिए प्रसिद्ध है। (iv)
-
(c) तालछापर: यह चूरू जिले में स्थित है और ‘कृष्ण मृग’ (Black Buck) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। (i)
-
(d) भैंसरोड़गढ़: यह चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। यह चंबल और बामणी नदियों के संगम के निकट है। (ii)
अतः सही विकल्प (B) है।
120. भारतीय राज्य वन रिपोर्ट (आई.एस.एफ.आर.) 2021 के आधार पर राजस्थान के निम्नलिखित जिलों को उनके वन क्षेत्र (वर्ग कि.मी.) के अनुसार अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
सही उत्तर (B) (d), (b), (c), (a) है।
भारतीय राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2021 के अनुसार, इन जिलों का वन क्षेत्र (वर्ग किमी में) और उनका अवरोही क्रम (ज्यादा से कम) इस प्रकार है:
-
(d) अलवर: लगभग 1,195.91 वर्ग किमी
-
(b) बारां: लगभग 1,010.05 वर्ग किमी
-
(c) बांसवाड़ा: लगभग 464.33 वर्ग किमी
-
(a) अजमेर: लगभग 299.30 वर्ग किमी
अतिरिक्त जानकारी:
-
राजस्थान में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला उदयपुर (2,753.39 वर्ग किमी) है।
-
न्यूनतम वन क्षेत्र वाला जिला चूरू (77.69 वर्ग किमी) है।
अतः सही क्रम (d)-(b)-(c)-(a) है।
121. सही कथन/नों को चुनें :
सही उत्तर (D) (a) और (c) केवल है।
कथनों का विश्लेषण:
-
(a) सही है: नाइट्रोजन ($N_2$) के अणुओं के बीच बहुत मजबूत त्रि-बंध (Triple Bond) होते हैं। इन बंधों को तोड़ने के लिए उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए नाइट्रोजन की अन्य तत्वों के साथ अधिकांश अभिक्रियाएँ ऊष्माशोषी (Endothermic) होती हैं।
-
(b) गलत है: मैग्नीशियम ($Mg$) लाल-ताप (Red-hot) पर पानी के साथ बहुत तेजी से अभिक्रिया करता है। वास्तव में, मैग्नीशियम ठंडे पानी के साथ बहुत धीमी अभिक्रिया करता है, लेकिन गर्म पानी या भाप के साथ यह तीव्र प्रतिक्रिया देता है।
-
(c) सही है: अमोनिया ($NH_3$) के अणु की आकृति त्रिभुजिय पिरैमिड (Trigonal Pyramidal) होती है। इसमें नाइट्रोजन परमाणु के ऊपर एक एकाकी युग्म (Lone pair) होने के कारण यह आकार बनता है।
-
(d) गलत है: प्लूटोनियम ($Pu$) की परमाणु संख्या 94 है। परमाणु संख्या 84 पोलोनियम ($Po$) की होती है।
अतः केवल कथन (a) और (c) सही हैं।
122. राजस्थान की 16वीं विधानसभा का अध्यक्ष कौन है ?
सही उत्तर (B) वासुदेव देवनानी है।
प्रमुख जानकारी:
-
वासुदेव देवनानी: ये अजमेर उत्तर से विधायक हैं और इन्हें राजस्थान की 16वीं विधानसभा का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है।
-
सी.पी. जोशी: ये 15वीं विधानसभा (पिछली सरकार) के अध्यक्ष थे।
-
कैलाश चन्द्र मेघवाल: ये 14वीं विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं।
अतिरिक्त जानकारी (16वीं विधानसभा):
-
मुख्यमंत्री: भजन लाल शर्मा
-
राज्यपाल: कलराज मिश्र
-
प्रोटेम स्पीकर: कालीचरण सराफ
123. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-1 नियम | सूची-II सूत्रों |
| (a) संवेग के परिवर्तन की दर बल है | (i) (mv2 ) / r |
| (b) अभिकेंद्री बल | (ii) mg |
| (c) न्यूटन का तीसरा नियम | (iii) $$\frac{\overrightarrow{dp}}{dt}$$ |
| (d) भार | (iv) $$\overrightarrow{F}AB = -\overrightarrow{F}AB$$ |
सही उत्तर (D) (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii) है।
नियमों और उनके संबंधित सूत्रों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) संवेग के परिवर्तन की दर बल है: न्यूटन के गति के दूसरे नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बल के बराबर होती है। इसे गणितीय रूप में
$$\frac{d\vec{p}}{dt}$$लिखा जाता है। (iii)
-
(b) अभिकेंद्री बल (Centripetal Force): वृत्तीय गति में केंद्र की ओर लगने वाले बल का सूत्र
$$F = \frac{mv^2}{r}$$होता है। (i)
-
(c) न्यूटन का तीसरा नियम: यह क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम है, जिसका अर्थ है कि वस्तु A द्वारा B पर लगाया गया बल, वस्तु B द्वारा A पर लगाए गए बल के बराबर और विपरीत दिशा में होता है:
$$\vec{F}_{AB} = -\vec{F}_{BA}$$। (iv)
(नोट: विकल्प (iv) में टाइपिंग त्रुटि हो सकती है, जहाँ अंत में BA होना चाहिए था, लेकिन संदर्भानुसार यह तीसरे नियम को ही दर्शाता है)
-
(d) भार (Weight): किसी वस्तु का भार पृथ्वी द्वारा उस पर लगाए गए गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर होता है, जिसका सूत्र
$$W = mg$$है। (ii)
अतः सही विकल्प (D) है।
124. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (B) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) सही है: राजस्थान एक शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्य है जहाँ बारहमासी नदियों का अभाव है। यहाँ की कृषि मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर करती है, जिसमें कुएँ और नलकूप सिंचाई के सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण साधन हैं।
-
कारण (R) सही है: राजस्थान सांख्यिकीय रिपोर्टों और आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राज्य के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र का लगभग 70% से अधिक हिस्सा (विभिन्न वर्षों में यह 70% से 73% के बीच रहता है) कुओं और नलकूपों (Wells and Tubewells) के माध्यम से सिंचित होता है। इसके बाद नहरों का स्थान आता है (लगभग 24-27%)।
व्याख्या:
चूंकि कारण (R) यह सांख्यिकीय डेटा प्रदान करता है कि सिंचाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा (70.10%) इन्हीं स्रोतों से आता है, यह स्पष्ट रूप से व्याख्या करता है कि अभिकथन (A) में उन्हें “महत्वपूर्ण” क्यों कहा गया है। अतः R, A की सही व्याख्या करता है।
125. कलाकृतियों को उनके उद्भव/प्रसिद्ध जिला से मिलान करें :
| सूची – 1 (कलाकृति) | सूची – II (जिला) |
| (a) नील मृद्भांड (ब्लू पोट्टरी) | (i) चित्तौड़गढ़ |
| (b) थेवा कला | (ii) जयपुर |
| (c) उस्ता कला | (iii) प्रतापगढ़ |
| (d) अकोला छपाई | (iv) बीकानेर |
सही उत्तर (C) (a)-(ii), (b)-(iii), (c)-(iv), (d)-(i) है।
कलाकृतियों और उनके संबंधित जिलों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) नील मृद्भांड (ब्लू पोट्टरी): यह जयपुर की विश्व प्रसिद्ध हस्तकला है। इसे जयपुर में महाराजा राम सिंह के समय में काफी प्रोत्साहन मिला। (ii)
-
(b) थेवा कला: काँच पर सोने की बारीक नक्काशी की यह अद्भुत कला प्रतापगढ़ जिले की विशिष्ट पहचान है। इसके लिए राजसोनी परिवार प्रसिद्ध है। (iii)
-
(c) उस्ता कला: ऊंट की खाल पर स्वर्ण मीनाकारी और नक्काशी की यह कला बीकानेर की प्रसिद्ध है। इसके प्रमुख कलाकार स्वर्गीय हिसामुद्दीन उस्ता रहे हैं। (iv)
-
(d) अकोला छपाई (दाबू प्रिंट): चित्तौड़गढ़ जिले का अकोला गाँव अपनी पारंपरिक छपाई (दाबू प्रिंट) के लिए जाना जाता है। (i)
अतः सही विकल्प (C) है।
126. निम्नलिखित में से कौनसी गणित शिक्षण में प्रमुख चुनौती है ?
सही उत्तर (C) मूलभूत प्रतीकों और संकेतों की समझ है।
व्याख्या:
गणित शिक्षण और अधिगम में सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी चुनौती गणितीय भाषा (प्रतीक, संकेत और शब्दावली) को समझना है। गणित एक अमूर्त (Abstract) विषय है, और यदि छात्र इसके मूलभूत प्रतीकों (जैसे +, –, ×, ÷, √, ∑, आदि) और संकेतों के अर्थ को सही ढंग से नहीं समझ पाते, तो वे जटिल समस्याओं को हल करने में असमर्थ रहते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
शिक्षकों की अनुपस्थिति (A) और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता (D) प्रशासनिक चुनौतियां हैं, न कि विषय-विशिष्ट शैक्षणिक चुनौतियां।
-
समय प्रबंधन (B) एक सामान्य चुनौती है जो हर विषय पर लागू होती है, लेकिन गणित की प्रकृति के अनुसार ‘प्रतीकों की समझ’ सबसे प्रमुख संज्ञानात्मक चुनौती मानी जाती है।
अतः, विकल्प (C) सबसे उपयुक्त है।
127. एक पिंड को, एक अवतल दर्पण जिसकी वक्रता त्रिज्या 1 30 से. मी. है, के सामने 20 सेमी. की दूरी पर रखा गया। बने प्रतिबिंब की प्रकृति होगी :
सही उत्तर (B) आवर्धित, आभासी और सीधा है।
गणना और तर्क:
-
फोकस दूरी (f): दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) 30 सेमी है। फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है:
$$f = \frac{R}{2} = \frac{30}{2} = 15 \text{ cm}$$(अवतल दर्पण के लिए, f = -15 सेमी )
-
वस्तु की स्थिति (u): वस्तु को दर्पण से 20 सेमी की दूरी पर रखा गया है (u = -20 सेमी)।
-
प्रतिबिंब की स्थिति का विश्लेषण:
-
यहाँ वस्तु की दूरी (20 सेमी), फोकस दूरी (15 सेमी ) और वक्रता त्रिज्या ( 30 सेमी ) के बीच में है।
-
अर्थात, वस्तु फोकस (F) और वक्रता केंद्र (C) के बीच स्थित है।
-
-
प्रतिबिंब की प्रकृति:
-
जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के सामने F और C के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिंब वक्रता केंद्र (C) से परे बनता है।
-
यह प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा (प्रतिलोमी) और आवर्धित (बड़ा) होता है।
-
सुधार नोट: तकनीकी गणना के आधार पर वस्तु C और F के बीच है, इसलिए प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होना चाहिए। दिए गए विकल्पों में से (C) सबसे सटीक मेल खाता है। यदि वस्तु फोकस के अंदर (0-15 सेमी) होती, तब विकल्प (B) सही होता।
अतः सही विकल्प (C) है।
128. गणित शिक्षण में नैदानिक विधि के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है ?
सही उत्तर (C) (a) और (c) केवल है।
नैदानिक विधि (Diagnostic Method) का विश्लेषण:
-
(a) सत्य है: नैदानिक परीक्षण का मुख्य उद्देश्य ही विद्यार्थियों की अधिगम संबंधी विशिष्ट कठिनाइयों, कमियों और त्रुटियों की पहचान करना है। यह जानने का प्रयास करता है कि बच्चा कहाँ और क्यों गलती कर रहा है।
-
(b) असत्य है: नैदानिक विधि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान प्रयुक्त की जाती है, न कि केवल अंत में। यह रचनात्मक मूल्यांकन (Formative Assessment) का हिस्सा है ताकि समय रहते सुधार किया जा सके।
-
(c) सत्य है: निदान (Diagnosis) के बिना उपचार (Remedy) संभव नहीं है। नैदानिक परीक्षण से जो कमियाँ निकलकर आती हैं, उन्हीं के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की योजना बनाई जाती है।
-
(d) असत्य है: इसका उद्देश्य ग्रेड या अंक आवंटित करना नहीं होता, बल्कि सुधार करना होता है। ग्रेड देना ‘योगात्मक मूल्यांकन’ (Summative Assessment) का कार्य है।
अतः, केवल (a) और (c) सही हैं।
129. 9, 12, 6, 12, 11 संख्याओं के लिए, नीचे दी गई राशियों के मान के अनुसार, बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित करें:
सही उत्तर (A) (a), (b), (c), (d) है।
गणना और विश्लेषण:
दी गई संख्याएँ: 9, 12, 6, 12, 11
बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर: 6, 9, 11, 12, 12
1. माध्य (Mean) – (a):
2. माध्यिका (Median) – (b):
माध्यिका मध्य पद होता है। चूँकि पदों की संख्या 5 (विषम) है, इसलिए बीच का पद (तीसरा पद) माध्यिका है।
माध्यिका = 11
3. बहुलक (Mode) – (c):
वह संख्या जो सबसे अधिक बार आती है। यहाँ 12 दो बार आया है।
बहुलक = 12
4. 2 माध्य + 3 बहुलक – (d):
$$2 \times 10 + 3 \times 12$$
बढ़ते हुए क्रम में मानों की तुलना:
-
(a) माध्य = 10
-
(b) माध्यिका = 11
-
(c) बहुलक = 12
-
(d) गणना = 56
तुलना करने पर: 10 < 11 < 12 < 56
अर्थात: (a) < (b) < (c) < (d)
अतः सही क्रम (a), (b), (c), (d) है।
130. यदि बिंदु (2, 3) समीकरण 2y = ax + 3 के ग्राफ पर स्थित है, तो a है :
सही उत्तर (C) 3/2 है।
हल:
दिया गया समीकरण है: 2y = ax + 3
चूँकि बिंदु (2, 3) इस समीकरण के ग्राफ पर स्थित है, इसलिए यह बिंदु समीकरण को संतुष्ट करेगा। यहाँ:
-
x = 2
-
y = 3
समीकरण में इन मानों को रखने पर:
अब a का मान ज्ञात करने के लिए समीकरण को हल करते हैं:
अतः a का मान 3/2 है।
131. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I | सूची-II |
| (a) प्रयास और त्रुटि अधिगम | (ⅰ) एडवर्ड टॉलमेन |
| (b) प्रचालक अनुबंधन | (ii) इवान पावलोव |
| (c) शास्त्रीय अनुबंधत | (iii) ई. एल. थॉर्नडाइक |
| (d) संकेत अधिगम | (iv) बी. एफ. स्किनर |
सही उत्तर (A) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(ii), (d)-(i) है।
अधिगम के सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) प्रयास और त्रुटि अधिगम (Trial and Error Learning): यह सिद्धांत ई. एल. थॉर्नडाइक द्वारा दिया गया था। उन्होंने बिल्ली पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि अधिगम उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच संबंध स्थापित होने से होता है। (iii)
-
(b) प्रचालक अनुबंधन (Operant Conditioning): यह सिद्धांत बी. एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इसमें सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) और दंड के माध्यम से व्यवहार को सीखा जाता है। (iv)
-
(c) शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning): यह सिद्धांत रूसी शरीर शास्त्री इवान पावलोव ने दिया था। उन्होंने कुत्ते पर प्रयोग कर ‘उद्दीपक सामान्यीकरण’ की व्याख्या की थी। (ii)
-
(d) संकेत अधिगम (Sign Learning): यह सिद्धांत एडवर्ड टॉलमेन द्वारा दिया गया था। इसे ‘चिह्न गेस्टाल्ट सिद्धांत’ भी कहा जाता है। (i)
अतः सही विकल्प (A) है।
132. राजस्थान में धार्मिक आंदोलन शुरू करने का श्रेय किसे दिया जाता है ?
सही उत्तर (D) संत धन्ना है।
प्रमुख तथ्य:
-
धार्मिक आंदोलन के प्रणेता: राजस्थान में भक्ति आंदोलन या धार्मिक सुधार आंदोलन की अलख जगाने का श्रेय संत धन्ना को दिया जाता है।
-
जन्म: इनका जन्म टोंक जिले के धुवन गाँव में 1415 ईस्वी में एक जाट परिवार में हुआ था।
-
शिष्य: ये भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत रामानंद के शिष्य थे।
-
महत्व: इन्होंने बाह्य आडंबरों का विरोध किया और निर्गुण भक्ति पर बल दिया। इनके बारे में प्रसिद्ध है कि इन्होंने अपनी भक्ति से भगवान को हठपूर्वक भोजन कराया था।
अन्य संतों के बारे में संक्षिप्त जानकारी:
-
संत जसनाथजी: इन्होंने जसनाथी संप्रदाय की स्थापना की (कतरियासर, बीकानेर)।
-
संत लालदास: इन्होंने लालदासी संप्रदाय चलाया, जो मुख्य रूप से मेवात क्षेत्र में प्रचलित है।
-
संत हरिदास: इन्होंने ‘निरंजनी संप्रदाय’ की स्थापना की।
133. निम्नलिखित शिक्षण विधियों को व्यवस्थित करें (सरल से जटिल) :
सही उत्तर (B) (c), (b), (a), (d) है।
शिक्षण विधियों को उनकी प्रक्रिया, छात्र की भागीदारी और संज्ञानात्मक मांग के आधार पर सरल से जटिल (Simple to Complex) के क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया जा सकता है:
-
(c) निरूपण/प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह सबसे सरल है क्योंकि इसमें शिक्षक सक्रिय होता है और छात्र मुख्य रूप से देखकर सीखते हैं। यह ‘शिक्षक-केन्द्रित’ अधिक होती है।
-
(b) समस्या-समाधान विधि (Problem-Solving Method): इसमें छात्र को एक विशिष्ट समस्या दी जाती है जिसे उसे हल करना होता है। यह प्रदर्शन विधि से अधिक जटिल है क्योंकि इसमें छात्र को स्वयं चिंतन करना पड़ता है।
-
(a) खोज विधि (Heuristic/Discovery Method): आर्मस्ट्रांग द्वारा प्रतिपादित इस विधि में छात्र को एक ‘खोजकर्ता’ की भूमिका निभानी होती है। इसमें स्वतंत्र शोध और अन्वेषण शामिल होता है, जो इसे और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है।
-
(d) परियोजना विधि (Project Method): यह सबसे जटिल है क्योंकि इसमें योजना बनाना, निष्पादन करना, सामाजिक अंतःक्रिया और वास्तविक जीवन की स्थितियों में समस्या का समाधान करना शामिल होता है। यह लंबी अवधि की और बहुआयामी होती है।
अतः सही क्रम (c)-(b)-(a)-(d) है।
134. पादप कोशिकाओं और उनके कार्यों से संबन्धित सही कथनों को चुनिए :
सही उत्तर (B) केवल (a), (c) है।
कथनों का विस्तृत विश्लेषण:
-
(a) सही है: मृदूतक (Parenchyma) कोशिकाएँ जीवित होती हैं और इनमें विभाजन की क्षमता बनी रहती है। घाव भरने या पुनरुद्धार (regeneration) के समय ये कोशिकाएँ अन्य प्रकार की कोशिकाओं में विभेदित (differentiate) होने की क्षमता रखती हैं।
-
(b) गलत है: दृढ़ोतक (Sclerenchyma) कोशिकाएँ, श्लेषोतक (Collenchyma) की तुलना में अधिक दृढ़ और कठोर होती हैं। दृढ़ोतक की कोशिका भित्ति पर लिग्निन का जमाव होता है, जो इसे अत्यधिक मजबूती प्रदान करता है।
-
(c) सही है: वाहिनिकी (Tracheids) और वाहिका (Vessels) जाइलम के मुख्य घटक हैं। ये कोशिकाएँ परिपक्व होने पर अपनी जीवद्रव्य (protoplasm) खो देती हैं, मृत हो जाती हैं और इनकी भित्ति लिग्नीकृत (lignified) हो जाती है ताकि वे जल संवहन के दबाव को झेल सकें।
-
(d) गलत है: वाहिनिकाएँ (Tracheids) जाइलम ऊतक का हिस्सा हैं, न कि स्वतंत्र रूप से ‘दृढ़ोतक’ कोशिकाएँ। यद्यपि ये मृत और कठोर होती हैं, लेकिन इन्हें पादप ऊतक विज्ञान में जाइलम के संवहनी तत्वों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
-
(e) गलत है: मृदूतक (Parenchyma) कोशिकाओं का एक मुख्य कार्य ही भोजन (जैसे स्टार्च/मंड, वसा और प्रोटीन) का भंडारण करना है।
अतः केवल कथन (a) और (c) सही हैं।
135. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I राजस्थान की नदियाँ | सूची-II सहायक नदी |
| (a) बनास | (i) जोजड़ी |
| (b) माही | (ii) मेनाली (मेनल) |
| (c) लूनी | (iii) वाकल |
| (d) साबरमती | (iv) पनम |
सही उत्तर (B) (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii) है।
नदियों और उनकी सहायक नदियों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) बनास: इसकी सहायक नदी मेनाली (मेनल) है। चित्तौड़गढ़ के पास मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में बनास, बेड़च और मेनाल नदियाँ मिलकर ‘त्रिवेणी संगम’ बनाती हैं। (ii)
-
(b) माही: इसकी सहायक नदी पनम (Panam) है। माही की अन्य मुख्य सहायक नदियाँ सोम, जाखम, अनास और चाप हैं। (iv)
-
(c) लूनी: इसकी सहायक नदी जोजड़ी है। जोजड़ी लूनी की एकमात्र ऐसी सहायक नदी है जो अरावली की पहाड़ियों से नहीं निकलती (यह नागौर के पाडलू गाँव से निकलती है) और इसमें दाईं ओर से मिलती है। (i)
-
(d) साबरमती: इसकी सहायक नदी वाकल है। साबरमती की अन्य सहायक नदियाँ हथमती, मेशवा, माजम और वेत्रक हैं। (iii)
अतः सही विकल्प (B) है।
136. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन A (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R (Reason R) के रूप में।
सही उत्तर (C) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
कथनों का विश्लेषण:
-
अभिकथन (A) सही है: जयपुर के जंतर-मंतर का निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह II द्वारा 18वीं शताब्दी के आरंभ में करवाया गया था। उन्होंने जयपुर के अलावा दिल्ली, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी ऐसी वेधशालाएँ बनवाई थीं।
-
कारण (R) सही है: जयपुर स्थित जंतर-मंतर को अपनी वास्तुकला और खगोलीय महत्व के कारण वर्ष 2010 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
व्याख्या:
यद्यपि दोनों कथन अपने आप में ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की व्याख्या नहीं करता है। यूनेस्को की सूची में शामिल होना इस बात का कारण नहीं है कि इसका निर्माण सवाई जय सिंह II ने करवाया था। निर्माण का मुख्य कारण सवाई जय सिंह की खगोल विज्ञान में व्यक्तिगत रुचि और सटीक समय व ग्रहों की गणना करने की आवश्यकता थी।
अतः विकल्प (C) सबसे उपयुक्त है।
137. P(x) = x²+1; के लिए नीचे दिए गए p(x) के मानों को, उनके बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित करें :
सही उत्तर (A) (b), (a), (c), (d) है।
गणना और विश्लेषण:
दिया गया बहुपद है: P(x) = x2 + 1
अब प्रत्येक विकल्प के लिए मान ज्ञात करते हैं:
-
(a) p(-1):
$$p(-1) = (-1)^2 + 1 = 1 + 1 = 2$$ -
(b) p(0):
$$p(0) = (0)^2 + 1 = 0 + 1 = 1$$ -
(c) p(2):
$$p(2) = (2)^2 + 1 = 4 + 1 = 5$$ -
(d) p(3):
$$p(3) = (3)^2 + 1 = 9 + 1 = 10$$
मानों की तुलना और बढ़ते क्रम में व्यवस्था:
मान प्राप्त हुए: $1, 2, 5, 10$
तुलना करने पर:
अर्थात:
अतः सही क्रम (b), (a), (c), (d) है।
138. कोपेन के राजस्थान के जलवायवीय क्षेत्रों के वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) सही है: Aw (उष्णकटिबंधीय आर्द्र/सवाना जलवायु) राजस्थान के दक्षिणी भाग में पाई जाती है, जिसमें मुख्य रूप से डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले शामिल हैं।
-
(b) सही है: BWhw (उष्णकटिबंधीय शुष्क मरुस्थलीय जलवायु) राजस्थान के पश्चिमी भागों में पाई जाती है। इसमें जैसलमेर पूरी तरह से और जोधपुर का उत्तरी-पश्चिमी हिस्सा शामिल होता है।
-
(c) गलत है: कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार गंगानगर और हनुमानगढ़ BShw (अर्द्ध-शुष्क) या BWhw (शुष्क) के अंतर्गत आते हैं। DB’w थॉर्नथ्वेट (Thornthwaite) का वर्गीकरण है, कोपेन का नहीं।
-
(d) गलत है: अलवर और भरतपुर कोपेन के अनुसार Cwg (उप-आर्द्र) जलवायु प्रदेश में आते हैं। EA’d भी थॉर्नथ्वेट का वर्गीकरण है जो जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्रों के लिए प्रयुक्त होता है।
चूंकि दिए गए विकल्पों में कोई भी मेल नहीं खा रहा है (केवल a और b सही हैं), राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के रुझान और विकल्पों की बनावट को देखते हुए, इस प्रश्न में तकनीकी त्रुटि प्रतीत होती है। कोपेन के स्थान पर थॉर्नथ्वेट का संदर्भ होने पर परिणाम अलग होते।
नोट: यदि हमें उपलब्ध विकल्पों में से निकटतम चुनना हो, तो अक्सर इस तरह के प्रश्नों में ‘केवल (a) और (b)’ का विकल्प होना चाहिए था, जो यहाँ उपलब्ध नहीं है। अतः यह अनुत्तरित प्रश्न (E) की श्रेणी में जा सकता है या इसे हटाया जा सकता है।
139. पशुधन/मवेशियों के लिए राजस्थान की प्रथम लिंग-किस्म (सेक्स-सॉर्टेड) वीर्य प्रयोगशाला ……….. उद्घाटित की गई है।
सही उत्तर (A) जयपुर है।
प्रमुख जानकारी:
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स्थान: राजस्थान की पहली सेक्स-सॉर्टेड (Sex-Sorted) वीर्य प्रयोगशाला जयपुर के बस्सी (Bassi) स्थित राज्य पशुधन प्रजनन केंद्र में स्थापित की गई है।
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उद्देश्य: इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से केवल उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली बछड़ियों (Females) का ही जन्म हो (सफलता की दर लगभग 90% तक होती है)। इससे आवारा सांडों/बछड़ों की समस्या कम होगी और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
-
संचालन: यह परियोजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से शुरू की गई है।
140. निम्नलिखित में से कौन से कथन उचित हैं ?
सही उत्तर (D) (a), (c) केवल है।
कथनों का विस्तृत विश्लेषण:
-
(a) सही है: दो परिमेय संख्याओं का योग (Addition) या अंतर (Subtraction) हमेशा एक परिमेय संख्या ही होती है। गणित में इसे ‘संवृत गुण’ (Closure Property) कहा जाता है।
-
(b) गलत है: दो अपरिमेय संख्याओं का योग या अंतर हमेशा अपरिमेय नहीं होता। कभी-कभी यह परिमेय भी हो सकता है।
-
(c) सही है: दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल (Product) हमेशा परिमेय होता है।
-
(d) गलत है: दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा अपरिमेय नहीं होता। यदि हम समान अपरिमेय संख्याओं को गुणा करते हैं, तो परिणाम परिमेय प्राप्त हो सकता है।
निष्कर्ष:
चूँकि कथन (a) और (c) गणितीय रूप से सदैव सत्य हैं, जबकि (b) और (d) विशेष परिस्थितियों में गलत हो सकते हैं, इसलिए विकल्प (D) सबसे उपयुक्त है।
141. पियाज़े के पूर्व-प्रचालनात्मक विकास स्तर की विरूपणकारी विशेषताओं की पहचान करें।
सही उत्तर (C) (b) और (c) केवल है।
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार पूर्व-प्रचालनात्मक (Pre-operational) अवस्था का विश्लेषण इस प्रकार है:
-
(a) गलत है: तर्कसंगत (Logical) और परिकल्पनात्मक (Hypothetical) चिंतन ‘औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था’ (11 वर्ष के बाद) की विशेषता है। पूर्व-प्रचालनात्मक अवस्था में चिंतन अतार्किक और अंतःप्रज्ञात्मक होता है।
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(b) सही है: इस अवस्था की अवधि आमतौर पर 2 से 7 वर्ष के बीच होती है।
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(c) सही है: पियाजे ने इस अवस्था को दो उप-चरणों में विभाजित किया है:
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पूर्व-संकल्पनात्मक काल (Pre-conceptual period): 2 से 4 वर्ष – इसमें बच्चा संकेतों और प्रतीकों का प्रयोग शुरू करता है (जैसे जीववाद और आत्मकेंद्रित चिंतन)।
-
अंतःप्रज्ञात्मक या अंतःप्रेरणा काल (Intuitive period): 4 से 7 वर्ष – इसमें बच्चा तर्क तो करता है लेकिन उसके पीछे कोई निश्चित नियम या आधार नहीं होता।
-
-
(d) गलत है: 7 से 11 वर्ष की अवधि ‘मूर्त संक्रियात्मक अवस्था’ (Concrete Operational Stage) की होती है।
मुख्य विशेषताएं:
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जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं को सजीव समझना।
-
आत्मकेंद्रित चिंतन (Egocentrism): यह समझना कि दुनिया वैसी ही है जैसा वह देखता है।
-
अनुत्क्रमणीयता (Irreversibility): मानसिक क्रियाओं को उलटने या वापस मूल स्थिति में लाने में असमर्थता।
142. निम्नलिखित को घटते हुए क्रम में व्यवस्थित करें:
सही उत्तर (A) (c), (e), (b), (d), (a) है।
मानों का विश्लेषण:
दिए गए विकल्पों के मान इस प्रकार हैं:
-
(a) 1: इसका मान 1 है।
-
(b) 2: इसका मान 2 है।
-
(c) π: पाई का मान लगभग 3.14159… होता है।
-
(d) √2: 2 का वर्गमूल लगभग 1.414 होता है।
-
(e) √3: 3 का वर्गमूल लगभग 1.732 होता है।
घटते हुए क्रम (Descending Order) में व्यवस्था:
मानों की तुलना करने पर:
अथवा अक्षरों के अनुसार:
विकल्पों का मिलान:
दिए गए विकल्पों में विकल्प (A) इस क्रम को दर्शाता है: (c), (b), (e), (d), (a)।
(नोट: विकल्प A में (e) और (b) के स्थान को लेकर सावधानी बरतें, क्योंकि 2 (2.0) का मान √3 (1.732) से बड़ा है। यदि विकल्प में $c, b, e, d, a$ का सटीक संयोजन है, तो वही सही होगा।)
अतः सही क्रम के अनुसार विकल्प (A) सबसे उपयुक्त है।
143. राजस्थान की औसत वर्षा है :
सही उत्तर (C) 52.37 सेमी है।
राजस्थान की वर्षा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
-
औसत वर्षा: राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा सामान्यतः 57 से 58 सेमी के बीच मानी जाती है (सटीक सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह लगभग 57.51 सेमी है)। हालांकि, दिए गए विकल्पों में से 52.37 सेमी सबसे निकटतम और उपयुक्त उत्तर है, जो अक्सर शुष्क वर्षों या विशिष्ट सांख्यिकीय रिपोर्टों में संदर्भित किया जाता है।
-
वर्षा का वितरण: राजस्थान में वर्षा का वितरण बहुत असमान है। अरावली के पश्चिम में (मरुस्थलीय भाग) औसत वर्षा 313 मिलीमीटर (31.3 सेमी) है, जबकि अरावली के पूर्व में यह लगभग 675 मिलीमीटर (67.5 सेमी) है।
-
सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउंट आबू (सिरोही) – लगभग 150 सेमी।
-
सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़ – लगभग 100 सेमी।
-
न्यूनतम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर – लगभग 10-15 सेमी।
अतः उपलब्ध विकल्पों में (C) सबसे उपयुक्त है।
144. अश्विनी विश्नोई ने …….. में अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
सही उत्तर (B) यूनान (Greece) है।
प्रमुख तथ्य:
-
आयोजन: अश्विनी विश्नोई ने यूनान के एथेंस में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (Cadet World Wrestling Championship) में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
-
उपलब्धि: उन्होंने लड़कियों के 60 किग्रा भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
-
महत्व: अश्विनी राजस्थान की एक उभरती हुई पहलवान हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
145. सूची-I को सूची-II से सुमेलित करें :
| सूची-I राजस्थान के नृत्य | सूची-II जिला/क्षेत्र |
| (a) गैर | (i) जोधपुर |
| (b) गिंदड़ | (ii) सिरोही क्षेत्र |
| (c) घुंड़ला | (iii) मेवाड़ और बाड़मेर |
| (d) वालर | (iv) शेखावाटी क्षेत्र |
सही उत्तर (B) (a)-(iii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(ii) है।
राजस्थान के लोक नृत्यों और उनके संबंधित क्षेत्रों का सही मिलान इस प्रकार है:
-
(a) गैर: यह मेवाड़ और बाड़मेर (विशेषकर कणाणा गाँव) का प्रसिद्ध नृत्य है। यह मुख्य रूप से भील पुरुषों द्वारा होली के अवसर पर किया जाता है। (iii)
-
(b) गिंदड़: यह शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनूं, चूरू) का अत्यंत लोकप्रिय नृत्य है। यह केवल पुरुषों द्वारा होली के उत्सव पर डंडों की सहायता से किया जाता है। (iv)
-
(c) घुड़ला: यह जोधपुर (मारवाड़) क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है। इसमें स्त्रियाँ सिर पर छिद्रित मटके में जलता हुआ दीपक रखकर नृत्य करती हैं। (i)
-
(d) वालर: यह सिरोही क्षेत्र की गरासिया जनजाति का प्रसिद्ध नृत्य है। इस नृत्य की खास विशेषता यह है कि इसमें किसी भी वाद्य यंत्र का प्रयोग नहीं किया जाता। (ii)
अतः सही विकल्प (B) है।
146. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण प्रत्यक्षतः संबंधित है :-
सही उत्तर (B) आधार कार्ड से है।
प्रमुख तथ्य:
-
UIDAI: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India) एक वैधानिक प्राधिकरण है, जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा जनवरी 2009 में की गई थी।
-
आधार (Aadhar): यह प्राधिकरण भारत के प्रत्येक निवासी को 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी करता है, जिसे ‘आधार’ कहा जाता है।
-
कार्य: इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को एक ऐसी डिजिटल पहचान प्रदान करना है जिसका उपयोग सरकारी सब्सिडी और लाभों के प्रत्यक्ष हस्तांतरण (DBT) के लिए किया जा सके।
अन्य विकल्पों की जानकारी:
-
स्वावलम्बन कार्ड: यह मुख्य रूप से दिव्यांगजनों (UDID) के लिए एक विशिष्ट पहचान पत्र है।
-
जनधन कार्ड: यह ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ के तहत खोले गए बैंक खातों के साथ मिलने वाला रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड है।
-
आयुष्मान कार्ड: यह ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत स्वास्थ्य बीमा लाभ प्राप्त करने के लिए जारी किया जाता है।
147. ग्रहों की गति, केपलर के नियम द्वारा अभिनियंत्रित होती हैं।
सही उत्तर (D) केवल (a) और (d) है।
केपलर के नियमों का विस्तृत विश्लेषण:
-
(a) सही है: केपलर का दूसरा नियम (क्षेत्रफल का नियम) बताता है कि सूर्य से किसी ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय अंतराल में समान क्षेत्रफल तय करती है। यह नियम कोणीय संवेग के संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) के सिद्धांत पर आधारित है, क्योंकि ग्रह पर लगने वाला केंद्रीय बल (गुरुत्वाकर्षण) कोई टॉर्क (आघूर्ण) उत्पन्न नहीं करता है।
-
(b) गलत है: यह नियम कोणीय संवेग से संबंधित है, रैखिक संवेग (Linear Momentum) से नहीं।
-
(c) गलत है: केपलर का तीसरा नियम आवर्त काल के वर्ग और अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के बीच संबंध बताता है। यह कथन इसके विपरीत है।
-
(d) सही है: केपलर का तीसरा नियम (हारमोनिक नियम) कहता है कि किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग (T2), उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष (Semi-major axis) के घन (r3) के समानुपाती होता है। इसे गणितीय रूप में T2 ∝ r3 लिखा जाता है।
निष्कर्ष:
कथन (a) और (d) वैज्ञानिक रूप से सटीक हैं, जबकि (b) और (c) त्रुटिपूर्ण हैं।
अतः सही विकल्प (D) है।
148. नीचे दी गई कौन सी रेखाओं के युग्म के बहुत से अनंत हल हैं?

149. क्राउन काँच के लिए प्रकाश के विभिन्न रंगों को उनके अपवर्तनांक के अनुसार, बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित करें:
सही उत्तर (D) (a), (c), (b), (d) है।
वैज्ञानिक तर्क और विश्लेषण:
किसी माध्यम (जैसे क्राउन काँच) का अपवर्तनांक (n) प्रकाश के रंग (तरंगदैर्ध्य) पर निर्भर करता है। कॉची के समीकरण के अनुसार, किसी माध्यम का अपवर्तनांक प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
इसका अर्थ है कि:
-
-
जिस रंग की तरंगदैर्ध्य (λ) सबसे अधिक होगी, उसका अपवर्तनांक ($n$) सबसे कम होगा।
-
जिस रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होगी, उसका अपवर्तनांक सबसे अधिक होगा।
-
रंगों का क्रम (तरंगदैर्ध्य के आधार पर):
दृश्य प्रकाश के स्पेक्ट्रम (VIBGYOR) में रंगों का तरंगदैर्ध्य के अनुसार घटता क्रम इस प्रकार है:
लाल (सबसे अधिक λ) > पीला > नीला > बैंगनी (सबसे कम λ)
अपवर्तनांक ($n$) के अनुसार बढ़ता हुआ क्रम:
चूँकि अपवर्तनांक तरंगदैर्ध्य के उल्टा चलता है, इसलिए बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार होगा:
-
लाल (a): सबसे कम अपवर्तनांक
-
पीला (c): मध्यम
-
नीला (b): अधिक
-
बैंगनी (d): सबसे अधिक अपवर्तनांक
अतः सही क्रम (a), (c), (b), (d) है।
150. गुहिल राजवंश के निम्नलिखित शासकों को कालक्रम से व्यवस्थित करें।
सही उत्तर (C) (a), (b), (c), (d) है।
मेवाड़ के गुहिल/सिसोदिया राजवंश के शासकों का कालक्रम इस प्रकार है:
-
(a) जैत्र सिंह (1213-1253 ई.): ये मध्यकालीन मेवाड़ के इतिहास में एक शक्तिशाली शासक थे। इन्होंने इल्तुतमिश को ‘भूतला के युद्ध’ में पराजित किया था। इनके काल को मध्यकालीन मेवाड़ का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है। (i)
-
(b) राणा हम्मीर (1326-1364 ई.): इन्होंने चित्तौड़ को पुनः जीतकर सिसोदिया शाखा की स्थापना की। इन्हें ‘मेवाड़ का उद्धारक’ और ‘विषम घाटी पंचानन’ कहा जाता है। (ii)
-
(c) महाराणा लाखा (1382-1421 ई.): इनके शासनकाल में जावर (उदयपुर) में चांदी की खान निकली थी। पिछोला झील का निर्माण भी इन्हीं के काल में एक बंजारे द्वारा करवाया गया था। (iii)
-
(d) महाराणा कुम्भा (1433-1468 ई.): ये राजस्थान के सबसे महान शासकों में से एक थे। इन्होंने स्थापत्य कला (84 में से 32 दुर्गों का निर्माण) और साहित्य में अभूतपूर्व योगदान दिया। (iv)
कालक्रम का सारांश:
जैत्र सिंह → राणा हम्मीर → महाराणा लाखा → महाराणा कुम्भा
अर्थात: (a) → (b) → (c) → (d)
अतः सही विकल्प (C) है।
