ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रियाएँ (Oxidation and reduction reactions)

ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रियाएँ

(Oxidation and reduction reactions)

1. संयोजन अभिक्रिया / संयुग्मन अभिक्रिया (Addition reaction) :-

 
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिक्रिया कारक आपस में क्रिया कारके एक उत्पाद का निर्माण करते है। संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
 
नोट:- प्रत्येक संयोजन अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिीक्रिया होती है लेकिन प्रत्येक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया नही होती है
 
जैसे 1. कोयले का दहन ।
C + O2 →  CO2
 
2. मैग्निशियम का दहन।
2Mg + O2 →  2MgO
 
3. हाइड्रोजन गैस का दहन।
2H2 + O2 → 2H2O
 

2. वियेजन / अपघटन अभिक्रिया :- 

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पाद का निर्माण करते है। वियोजन अभिक्रिया कहलाती है। प्रत्येक वियोजन अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है। लेकिन प्रत्येक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया वियोजन अभिक्रिया नही होती है। पदार्थों में अपघटनीय अभिक्रियाओं के लिए ताप, विद्युत, प्रकाश आदि उत्तरदायी होते है। इनके आधार पर ये अभिक्रियायें निम्न प्रकार कि होती है –
 

प्रकाशीय अपघटन अभिक्रिया :-

 
सिल्वर क्लोराइड को सूर्य के प्रकाश में रखने पर यह सिल्वर एवं क्लोरीन गैस में टूट जाता है।
2AgCl  → 2Ag+ Cl2
 

ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया :-

जब कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म किया जाता है तो यह ऊष्मा पाकर कैल्शियम ऑक्साइड एवं कार्बन डाई ऑक्साइड में टूट जाता है। CaCO3→ CaO + CO2

विद्युतीय अपघटन अभिक्रिया :-

जब जल का विद्युत अपघटन किया जाता है तो हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है।
 
2H2O → 2H2 + O2
 

3. विस्थापन अभिक्रिया :-

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित कर देता है। तो उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते है।
 
जैसे :- कॉपर सल्फेट के नीले रंग के विलयन में जब जिंक के टुकडे डालने पर कुछ समय पश्चात् कॉपर सल्फेट विलयन का नीला रंग विलुप्त होने लगता है। तथा कॉपर निक्षेपित होने लगता है, और विलयन में जिंक सल्फेट बनने लगता है।
 
CuSO + Zn →ZnSO4 + Cu
 
सक्रियता क्षेणी :- तत्वों कि क्रियाशीलता का अवरोही क्रम सक्रियता क्षेणी कहलाता है।
K> Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
 
सबसे अधिक क्रियाशील तत्व पौटेशियम एवं सबसे कम क्रियाशील तत्व सोना है।
 

4. द्विविस्थापन अभिक्रिया :-

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें आयनों का विनिमय होता है। द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
 
उदाहरण :- CuSO4 + 2NaOH→ Cu(OH)2 + Na2SO4
 
AgNO3 + KCI → AgCl + KNO3
 
उदासीनीकरण :- वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अम्ल व क्षार आपस में क्रिया करके लवण व जल का निर्माण करते है। उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
 
HCI + NaCl → NaOH + H₂O
 
नोट:- द्विविस्थापन एवं उदासीनीकरण अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया नहीं होती है।
 

5. ऑक्सीकरण / उपचयन :-

अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें निम्न पद सम्पन्न होते है। ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
 
1. ऑक्सीजन का जुडना – ऑक्सीजन का योग ऑक्सीकरण कहलाता है।
 
2 Mg + O2→ 2MgO
S2 + 2O2 → 2SO2
 
2. हाइड्रोजन का निकलना – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें से हाइड्रोजन बाहर निकलता है। ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
 
2H2S + O2 → 2H₂O + 2S
यहां पर H2S सल्फर में ऑक्सीकृत हो रहा है।
 
CH2CH2OH → CH2CHO + H2
 
3. ऋणविद्युती तत्वों का संयोजन – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऋणविद्युती तत्वों का संयोजन होता है ऑक्सीकरण कहलाती है।
Mg + Cl2 → 2MgCl
 
4. धनविद्युती तत्वों का निष्कासन – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें धनविद्युती तत्वों का निष्कासन होता है। ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
 
2KI + Cl2 → 2KCl + I2
H2S + CI2 →2HCl + S
 
5. इलेक्ट्रॉन का त्यागना – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें तत्व, अणु, परमाणु या आयन इलेक्ट्रॉन त्यागते है। ऑक्सीकरण कहलाती है।
 
Na → Na+ + e
Fe2+ → Fe3+ + e
 
 
6. ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी तत्व, अणु, परमाणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि होती है। ऑक्सीकरण आभिक्रिया कहलाती है।
Mg → Mg2++ e
 

6. अपचयन अभिक्रिया :-

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें निम्न पद सम्पन्न होते है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
 
1. ऑक्सीजन का हटना –  वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें से ऑक्सीजन बाहर निकलता है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
2KCIO3 → 2KCI + 3O2
2MgO  → 2Mg + O2
 
2. हाइड्रोजन की जुडना – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें हाइड्रोजन जुडता है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
 
C2H2 + H2 → C2H4
 
3. ऋणविद्युती तत्वों का हटना – वह रासायनिक अभिक्रिया जियमें ऋणविद्युती तत्व बाहर निकलते है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
 
2FeCl + H2 → 2FeCl + 2HCI
 
4. धनविद्युती तत्वों का जुडना – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें धनविद्युती तत्व जुडता है अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
Cl2 + Mg → MgCl
 
5. इलेक्ट्रॉन का जुडना – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें तत्व, अणु, परमाणु या आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
Cl2 + 2e → CI2
Mg2+ + 2e → Mg
 
6. ऑक्सीकरण अंक में कमी – वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी तत्व, अणु, परमाणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में कमी होती है। अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।
Al3+ + 3e → Al
 

7. रेडॉक्स अभिक्रिया :-

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक पदार्थ का ऑक्सीकरण एवं दूसरे का अपचयन होता है। रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती है।
H2SO4 + Zn → ZnSO4 + H2
 
नोट: प्रत्येक रासायनिक अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया होती है। लेकिन द्विविस्थापन एवं उदासीनीकरण अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया नही होती है।
 
ऑक्सीकारक :- वे पदार्थ जो दूसरे पदार्थों का ऑक्सीकरण करते है। ऑक्सीकारक कहलाते है। जैसे उपरोक्त अभिक्रिया में H2SO4
 
अपचायक :- वे पदार्थ जो दूसरे पदार्थों का अपचयन करते है। अपचायक कहलाते है। जैसे उपरोक्त अभिक्रिया में Zn।
 

ऑक्सीकरण अंक :- 

ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते समय निम्न नियमों का पालन करते है।
 
1. तत्वों में स्वतंत्र या असंयुक्त दशा में प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण- संख्या शून्य होती है। जैसे N,, Ca, Zn, H2O, H2SO4, I.
 
2. केवल एक परमाणु वाले आयनों में परमाणु का ऑक्सीकरण अंक उस आयन में स्थित आवेश का मान होता है।
 
जैसे Na में ऑक्सीकरण अंक +1 है।
 
3. यौगिकों के अंदर किसी तत्व का ऑक्सीकरण अंक धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।
 
4. सभी यौगिकों में फ्लुओरीन का ऑक्सीकरण अंक -1 होता है।
 
5. यौगिकों के सभी परमाणुओं का ऑक्सीकरण अंकों का बीजीय योग शुन्य होता है।
 
प्रश्नः-  Chloroauric acid (HAuCl4) में Au का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करो।
उत्तर – HAuCl4 = 0
(+1) + x + (-1 x 4) = 0
x = +4 -1
x = +3
Au का ऑक्सीकरण अंक = +3
 
प्रश्नः- H2SO4 में  S का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें।
 
उत्तर – H₂SO₄ = 0
+2 + x -8 = 0
x = +8 -2
x = +6
S का ऑक्सीकरण अंक  = +6
 

प्रश्न 1: श्वसन (Respiration) किस प्रकार की अभिक्रिया है?

(A) ऊष्माशोषी अभिक्रिया

(B) ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया

(C) संयोजन अभिक्रिया

(D) अपघटन अभिक्रिया

  • उत्तर: (B) ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया

  • व्याख्या: श्वसन के दौरान हमारे शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा (ATP के रूप में) प्राप्त होती है। जिस अभिक्रिया में ऊर्जा मुक्त होती है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 2: लोहे पर जंग लगना (Rusting) उदाहरण है:

(A) अपचयन का

(B) उपचयन (ऑक्सीकरण) का

(C) विस्थापन का

(D) इनमें से कोई नहीं

    • उत्तर: (B) उपचयन (ऑक्सीकरण) का

    • व्याख्या: जब लोहा नमी और ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो वह हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड बनाता है। चूँकि इसमें ऑक्सीजन का योग हो रहा है, इसलिए यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।

 

प्रश्न 3: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu यह अभिक्रिया किसका उदाहरण है?

(A) संयोजन अभिक्रिया

(B) द्वि-विस्थापन अभिक्रिया

(C) विस्थापन अभिक्रिया

(D) वियोजन अभिक्रिया

  • उत्तर: (C) विस्थापन अभिक्रिया

  • व्याख्या: यहाँ आयरन (Fe), कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील धातु है। इसलिए वह कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर स्वयं उसका स्थान ले लेता है।

प्रश्न 4: चिप्स की थैली में कौन-सी गैस भरी जाती है ताकि वे खराब न हों?

(A) ऑक्सीजन

(B) नाइट्रोजन

(C) हाइड्रोजन

(D) कार्बन डाइऑक्साइड

  • उत्तर: (B) नाइट्रोजन

  • व्याख्या: तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थ ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर ऑक्सीकृत (विकृतगंधिता) हो जाते हैं। नाइट्रोजन एक कम क्रियाशील गैस है जो चिप्स को ऑक्सीकरण से बचाती है।

प्रश्न 5: बिना बुझे चूने (CaO) पर पानी डालने पर क्या होता है?

(A) ऊष्मा अवशोषित होती है

(B) ऊष्मा मुक्त होती है

(C) कोई परिवर्तन नहीं होता

(D) चूना पत्थर बनता है

  • उत्तर: (B) ऊष्मा मुक्त होती है

  • व्याख्या: यह एक संयोजन और तीव्र ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इसमें कैल्शियम ऑक्साइड जल से क्रिया कर कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (Ca(OH)2) बनाता है।

6. FeCl3 का FeCl2 में परिवर्तन कहलाता है –

(अ) ऑक्सीकरण
(स) अपघटन
(ब) अपचयन
(द) संयुग्मन
 
सही विकल्प (ब) अपचयन है।
$$2FeCl_3 \rightarrow 2FeCl_2 + Cl_2$$

इसे अपचयन (Reduction) कहने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. विद्युत-ऋणी तत्व का निष्कासन: अपचयन की एक परिभाषा यह है कि किसी यौगिक से विद्युत-ऋणी तत्व (जैसे क्लोरीन) का बाहर निकलना अपचयन कहलाता है। यहाँ FeCl3 में तीन क्लोरीन परमाणु थे, जो घटकर FeCl2 में दो रह गए हैं।

  2. ऑक्सीकरण संख्या में कमी:

    • FeCl3 में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है।

    • FeCl2 में आयरन (Fe) की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है।

    • चूँकि +3 से +2 होना ऑक्सीकरण अंक में कमी को दर्शाता है, इसलिए यह अपचयन है।

  3. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना: आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के अनुसार, जब कोई परमाणु या आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उसे अपचयन कहते हैं:

    $$Fe^{3+} + e^- \rightarrow Fe^{2+}$$
 

7. एक पदार्थ दो छोटे सरल अणुओं में टूटता है तो अभिक्रिया होगी –

(अ) अपघटन
(ब) विस्थापन
(स) ऑक्सीकरण
(द) संयोजन
 
सही विकल्प (अ) अपघटन (Decomposition) है।

अपघटन अभिक्रिया

जब कोई जटिल पदार्थ सरल अणुओं में विभाजित होता है, तो उसे अपघटन या वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।

  • समीकरण का स्वरूप: इसे सामान्य रूप से इस प्रकार दर्शाया जाता है:

    $$AB \rightarrow A + B$$

    यहाँ AB एक जटिल अणु है जो A और B जैसे सरल अणुओं में टूट गया है।

  • उदाहरण: जब कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म किया जाता है, तो वह कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूट जाता है।

    $$CaCO_3 \overset{\Delta}{\rightarrow}  CaO + CO_2$$

8. इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले पदार्थ कहलाते है –

(अ) ऑक्सीकारक
(ब) अपचायक
(स) उत्प्रेरक
(द) इनमें से कोई नही।
 
सही विकल्प (ब) अपचायक (Reducing Agent) है।

विस्तृत व्याख्या (Concept Clarity)

  1. अपचायक (Reducing Agent):

    • वे पदार्थ जो स्वयं इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं, अपचायक कहलाते हैं।

    • इलेक्ट्रॉन त्यागने के कारण इनका स्वयं का ऑक्सीकरण हो जाता है।

    • चूँकि ये इलेक्ट्रॉन त्यागकर दूसरे पदार्थ को इलेक्ट्रॉन उपलब्ध कराते हैं (यानी दूसरे का अपचयन करते हैं), इसलिए इन्हें ‘अपचायक’ कहा जाता है।

    • उदाहरण: सभी धातुएँ (जैसे Na, Mg, Fe) अच्छे अपचायक होते हैं क्योंकि वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं।

      $$Na \rightarrow Na^+ + e^- $$ 
  2. ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent):

    • वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं।

    • इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के कारण इनका स्वयं का अपचयन हो जाता है।

    • ये दूसरे पदार्थ से इलेक्ट्रॉन छीन लेते हैं, इसलिए ‘ऑक्सीकारक’ कहलाते हैं।

 

9. दोनों दिशाओं मे होने वाली अभिक्रियायें कहलाती है

(अ) ऑक्सीकरण
(ब) अपचयन
(स) अनुत्क्रमणीय
(द) उत्क्रमणीय
 
सही विकल्प (द) उत्क्रमणीय (Reversible Reactions) है।

विस्तृत व्याख्या (In-depth Explanation)

  1. उत्क्रमणीय अभिक्रिया (Reversible Reaction):

    • ये वे अभिक्रियाएँ हैं जिनमें अभिकारक (Reactants) मिलकर उत्पाद बनाते हैं और साथ ही, विशेष परिस्थितियों में उत्पाद पुन: मिलकर अभिकारक बना लेते हैं।

    • इन्हें दर्शाने के लिए दोहरे तीर ( ⇌ ) का प्रयोग किया जाता है।

    • ये अभिक्रियाएँ कभी पूर्ण नहीं होतीं बल्कि एक साम्यावस्था (Equilibrium) प्राप्त कर लेती हैं।

    • उदाहरण: नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से अमोनिया का बनना।

      $$N_2 + 3H_2 \rightleftharpoons 2NH_3$$
  2. अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया (Irreversible Reaction):

    • ये अभिक्रियाएँ केवल एक ही दिशा (अग्र दिशा) में होती हैं।

    • इसमें अभिकारक पूरी तरह उत्पाद में बदल जाते हैं, लेकिन उत्पाद वापस अभिकारक नहीं बना सकते।

    • इन्हें एकल तीर (→) द्वारा दर्शाया जाता है।

    • उदाहरण: लकड़ी का जलना या लोहे पर जंग लगना।


तुलनात्मक चार्ट

विशेषता उत्क्रमणीय अभिक्रिया अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया
दिशा दोनों दिशाओं (अग्र व पश्च) में। केवल एक दिशा (अग्र) में।
पूर्णता यह कभी समाप्त नहीं होती। यह पूर्ण हो जाती है।
संकेत ⇌ (दोहरा तीर) → (एकल तीर)
पात्र बंद पात्र में संभव है। खुले या बंद दोनों पात्रों में संभव है।
 
 

10. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ऊष्मा –

(अ) निकलती है।
(ब) अवशोषित होती है।
(स) विलेय होती है।
(द) इनमें से कोई नही।
 
सही विकल्प – (अ) निकलती है

विस्तृत व्याख्या (Core Concept)

  1. परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पादों (Products) के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा (ऊर्जा) भी बाहर निकलती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहते हैं।

  2. ऊर्जा का स्तर: इन अभिक्रियाओं में अभिकारकों की कुल ऊर्जा, उत्पादों की ऊर्जा से अधिक होती है। यही अतिरिक्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में वातावरण में मुक्त हो जाती है, जिससे आसपास का तापमान बढ़ जाता है।

  3. समीकरण का स्वरूप: इसे रासायनिक समीकरण में उत्पाद की ओर ‘+’ चिह्न लगाकर दर्शाया जाता है:

    अभिकारक → उत्पाद + ऊष्मा

महत्वपूर्ण उदाहरण (परीक्षा की दृष्टि से)

  • प्राकृतिक गैस का दहन: जब मीथेन गैस जलती है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।

    $$CH_4 + 2O_2 \rightarrow CO_2 + 2H_2O + Δ $$
  • श्वसन (Respiration): हम जो भोजन करते हैं, उसका ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकरण होता है जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसीलिए श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

  • चूने की जल से क्रिया: बिना बुझे चूने (CaO) में पानी मिलाने पर पात्र बहुत गर्म हो जाता है।

11. निम्न में से कौन सदैव प्रकृति में सहज रूप में पाया जाता है-

(अ) सोना
(स) सोडियम
(ब) चांदी
(द) ताँबा

सही उत्तर (अ) सोना है।

प्रकृति में धातुओं की स्थिति उनकी अभिक्रियाशीलता (Reactivity) पर निर्भर करती है:

  • सोना (Gold): यह एक अत्यंत कम अभिक्रियाशील धातु है। यह हवा, पानी या ऑक्सीजन के साथ आसानी से क्रिया नहीं करता, इसलिए यह प्रकृति में अपनी शुद्ध या मुक्त अवस्था (Native state) में पाया जाता है।

  • चांदी और ताँबा: ये धातुएं मुक्त अवस्था में पाई तो जा सकती हैं, लेकिन अक्सर ये अपने सल्फाइड या ऑक्साइड अयस्कों के रूप में भी मिलती हैं।

  • सोडियम: यह बहुत अधिक अभिक्रियाशील धातु है, जो हवा या नमी के संपर्क में आते ही क्रिया कर लेती है। इसलिए यह कभी भी स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाई जाती।

 

12. निम्नलिखित में से कौन रासायनिक परिवर्तन प्रस्तुत करता है

(अ) पारदिक ऑक्साइड की ऊष्णता
(ब) आयोडीन का उदातीकरण
(स) अल्कोहॉल का वाष्पीकरण
(द) प्लैटिनम तार

सही उत्तर (अ) पारदिक ऑक्साइड की ऊष्णता (Heating of Mercuric Oxide) है।

यहाँ इसका कारण और अन्य विकल्पों का विश्लेषण दिया गया है:

रासायनिक परिवर्तन क्यों है?

जब पारदिक ऑक्साइड (Mercuric Oxide) को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर पारा (Mercury) और ऑक्सीजन गैस में बदल जाता है। यह एक रासायनिक अभिक्रिया है क्योंकि इसमें मूल पदार्थ के रासायनिक गुण बदल जाते हैं और नए पदार्थ बनते हैं।

$$ 2HgO \overset{\Delta }{\rightarrow} 2Hg + O_2$$

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (ब) आयोडीन का उदातीकरण (Sublimation): यह एक भौतिक परिवर्तन है। इसमें आयोडीन ठोस अवस्था से सीधे गैस में बदलता है, लेकिन उसके रासायनिक गुणों में कोई बदलाव नहीं होता। इसे ठंडा करके वापस ठोस बनाया जा सकता है।

  • (स) अल्कोहॉल का वाष्पीकरण (Evaporation): यह भी एक भौतिक परिवर्तन है। वाष्पीकरण में केवल पदार्थ की अवस्था (द्रव से गैस) बदलती है।

  • (द) प्लैटिनम तार: प्लैटिनम तार को गर्म करना भी एक भौतिक परिवर्तन है। तार गर्म होकर चमकने लगता है (लाल तप्त), लेकिन ठंडा होने पर वह वापस अपनी मूल स्थिति में आ जाता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता।

मुख्य अंतर: भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन

विशेषता भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
नया पदार्थ नहीं बनता बनता है
प्रकृति प्रायः उत्क्रमणीय (Reversible) प्रायः अनुत्क्रमणीय (Irreversible)
उदाहरण बर्फ का पिघलना लोहे पर जंग लगना

13. निम्न में से कौन भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है –

(अ) रसोई गैस का जलना
(ब) दूध का फट जाना
(स) जल में चीनी का घुलना
(द) भोजन का पाचन

सही उत्तर (स) जल में चीनी का घुलना है।

यहाँ सभी विकल्पों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:

भौतिक परिवर्तन का कारण :-

  • जल में चीनी का घुलना: जब चीनी को पानी में घोला जाता है, तो चीनी के अणु पानी के अणुओं के बीच व्यवस्थित हो जाते हैं। इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। यदि आप पानी को वाष्पित (evaporate) कर दें, तो चीनी को वापस प्राप्त किया जा सकता है। चूँकि यह प्रक्रिया उत्क्रमणीय है और इसमें पदार्थ की रासायनिक संरचना नहीं बदलती, इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन है।


अन्य विकल्पों का विश्लेषण (रासायनिक परिवर्तन):

  • (अ) रसोई गैस (LPG) का जलना: जलना (दहन) हमेशा एक रासायनिक परिवर्तन होता है। जब गैस जलती है, तो वह ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जलवाष्प (H2O) बनाती है।

  • (ब) दूध का फट जाना: दूध का फटना एक रासायनिक क्रिया है जिसमें दूध के प्रोटीन (केसीन) की संरचना बदल जाती है और लैक्टिक एसिड बनने के कारण नया पदार्थ (पनीर/छैना) बनता है। इसे वापस दूध में नहीं बदला जा सकता।

  • (द) भोजन का पाचन: पाचन के दौरान हमारे शरीर के एंजाइम भोजन के जटिल अणुओं को सरल अणुओं में तोड़ देते हैं। यह एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया है जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।


पहचानने का सरल तरीका

भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
कोई नया पदार्थ नहीं बनता। एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं।
यह अस्थाई और उत्क्रमणीय (Reversible) होता है। यह स्थाई और अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होता है।
उदाहरण: बर्फ का पिघलना, कांच का टूटना। उदाहरण: लोहे पर जंग लगना, लकड़ी का जलना।

 

 

14. जंग लगने से लोहे का भार ?

(अ) न घटता है न बढ़ता है।
(ब) कभी घटता है कभी बढ़ता है।
(स) घट जाता है।
(द) बढ़ जाता है।
 

सही उत्तर (द) बढ़ जाता है

भार बढ़ने का कारण:

जब लोहे पर जंग लगती है, तो लोहा वायुमंडल की ऑक्सीजन और नमी (नमी/जल) के साथ क्रिया करता है। इस प्रक्रिया में लोहा ऑक्सीकृत होकर आयरन ऑक्साइड (मुख्य रूप से Fe2O3 . xH2O) की एक परत बना लेता है।

$$4Fe + 3O_2 + 2xH_2O \rightarrow 2Fe_2O_3 \cdot xH_2O $$

चूँकि लोहे के मूल द्रव्यमान में ऑक्सीजन और जल के अणुओं का भार भी जुड़ जाता है, इसलिए लोहे की उस वस्तु का कुल भार बढ़ जाता है


कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

    • अस्थाई वृद्धि: शुरूआती अवस्था में भार बढ़ता है, लेकिन लंबे समय तक जंग लगने से लोहा “झड़ने” लगता है जिससे अंततः वस्तु कमजोर और हल्की हो सकती है।

    • बचाव के तरीके: लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर पेंट, ग्रीस या यशदलेपन (Galvanization) किया जाता है, जिसमें जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है।

 

 

15. निम्न में से सर्वाधिक क्रियाशील धातु है।

(a) जस्ता
(b) ताँबा
(c) लीथियम
(d) चाँदी
 

सही उत्तर (c) लीथियम है।

व्याख्या:

धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के अनुसार, लीथियम अत्यंत क्रियाशील धातु है। दिए गए विकल्पों में जस्ता (Zinc), ताँबा (Copper) और चाँदी (Silver) की तुलना में लीथियम सबसे ऊपर आता है, जिसके कारण यह सबसे अधिक सक्रिय है। जस्ता मध्यम क्रियाशील है, जबकि ताँबा और चाँदी बहुत कम क्रियाशील धातुएँ हैं।

 

 

16. निम्न रासायनिक समीकरण किस अभिक्रिया का उदाहरण है – 

4NH3(g) + 5O2 (g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
 
(अ) विस्थापन का
(ब) संयोजन का
(स) अपचयन का
(द) उदासीनीकरण का
 
(अ) अ तथा ब
(ब) ब तथा स
(स) अ तथा स
(द) स तथा द

सही उत्तर (स) अ तथा स है।

इस रासायनिक समीकरण का विश्लेषण नीचे दिया गया है:

1. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction):

इस अभिक्रिया में, अमोनिया (NH3) में से हाइड्रोजन को ऑक्सीजन द्वारा विस्थापित किया जा रहा है और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO) बन रहा है। चूँकि एक तत्व दूसरे को हटाकर उसका स्थान ले रहा है, इसलिए यह एक विस्थापन अभिक्रिया है।

2. अपचयन-उपचयन / रेडॉक्स (Redox/Reduction-Oxidation):

  • यहाँ NH3 से हाइड्रोजन निकल रही है और ऑक्सीजन जुड़ रही है, जिसका अर्थ है कि नाइट्रोजन का ऑक्सीकरण (Oxidation) हो रहा है।

  • वहीं दूसरी ओर, ऑक्सीजन (O2) के साथ हाइड्रोजन जुड़कर जल (H2O) बना रही है, जिसका अर्थ है कि ऑक्सीजन का अपचयन (Reduction) हो रहा है।

    चूँकि इसमें अपचयन की प्रक्रिया शामिल है, इसलिए यह विकल्प (स) के अंतर्गत आती है।


अन्य विकल्प क्यों नहीं हैं?

  • संयोजन (Combination): संयोजन में दो पदार्थ जुड़कर केवल एक उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ दो उत्पाद (NO और H2O) बन रहे हैं।

  • उदासीनीकरण (Neutralization): यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है जिससे लवण और जल बनता है। यह समीकरण उस श्रेणी में नहीं आता।

 

17. निम्न में से कौनसी प्रक्रिया अन्य से भिन्न है-

(अ) बर्फ पिघलना
(ब) लोहे को जंग लगना
(स) पानी का उबलना
(द) क्रिस्टलीकरण
 

सही उत्तर (ब) लोहे को जंग लगना है।

यहाँ इसका कारण और अन्य विकल्पों के साथ तुलना दी गई है:

अन्य विकल्पों से भिन्न क्यों है?

मुख्य अंतर परिवर्तन के प्रकार का है:

  • (ब) लोहे को जंग लगना: यह एक रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) है। इसमें लोहा, ऑक्सीजन और नमी के साथ क्रिया करके एक नया पदार्थ (आयरन ऑक्साइड) बनाता है। यह प्रक्रिया अनुत्क्रमणीय (Irreversible) है, यानी जंग से वापस शुद्ध लोहा प्राप्त करना आसान नहीं है।

  • अन्य तीनों (अ, स, द): ये सभी भौतिक परिवर्तन (Physical Change) हैं।

    • बर्फ पिघलना: केवल अवस्था बदलती है (ठोस से द्रव)।

    • पानी का उबलना: केवल अवस्था बदलती है (द्रव से गैस)।

    • क्रिस्टलीकरण (Crystallization): यह किसी विलयन से शुद्ध ठोस प्राप्त करने की एक भौतिक विधि है।


तुलनात्मक चार्ट

प्रक्रिया परिवर्तन का प्रकार नया पदार्थ
बर्फ पिघलना भौतिक नहीं
लोहे को जंग लगना रासायनिक हाँ (आयरन ऑक्साइड)
पानी का उबलना भौतिक नहीं
क्रिस्टलीकरण भौतिक नहीं

 

18. निम्न प्रतिक्रिया में कौनसा कथन सही है

ZnO + C → Zn + CO
 
(अ) ZnO का अपचयन हो रहा है।
(ब) कार्बन का उपचयन हो रहा है।
(स) कार्बन का अपचयन हो रहा है।
(द) ZnO का उपचयन हो रहा है।
 
(अ) अ व ब दोनों
(ब) केवल ब
(स) केवल स
(द) सभी सही है।
 

सही उत्तर (अ) अ व ब दोनों है।

इस रासायनिक अभिक्रिया का विश्लेषण करने पर हमें रेडॉक्स (Redox) प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दिखाई देती है:

$$ZnO + C \rightarrow Zn + CO$$

अभिक्रिया का विश्लेषण:

  1. ZnO (जिंक ऑक्साइड) का अपचयन (Reduction):

    जब किसी पदार्थ से ऑक्सीजन अलग होती है, तो उसे अपचयन कहते हैं। यहाँ ZnO से ऑक्सीजन निकल रही है और वह Zn (जिंक) में बदल रहा है। अतः ZnO का अपचयन हो रहा है। (कथन ‘अ’ सही है)

  2. C (कार्बन) का उपचयन/ऑक्सीकरण (Oxidation):

    जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन जुड़ती है, तो उसे उपचयन कहते हैं। यहाँ कार्बन (C) में ऑक्सीजन जुड़ रही है और वह CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) बना रहा है। अतः कार्बन का उपचयन हो रहा है। (कथन ‘ब’ सही है)


महत्वपूर्ण शब्दावली:

  • उपचायक (Oxidizing Agent): वह पदार्थ जो दूसरे का ऑक्सीकरण करता है और स्वयं अपचयित होता है (यहाँ ZnO)।

  • अपचायक (Reducing Agent): वह पदार्थ जो दूसरे का अपचयन करता है और स्वयं ऑक्सीकृत होता है (यहाँ C)।

19. संक्षारण प्रदर्शित करता है ?

(अ) एक उपचयन प्रतिक्रिया
(ब) एक अपचयन प्रतिक्रिया
(स) एक विस्थापन प्रतिक्रिया
(द) एक वियोजन प्रतिक्रिया
 

सही उत्तर (अ) एक उपचयन प्रतिक्रिया (Oxidation Reaction) है।

व्याख्या:

संक्षारण (Corrosion) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातुएं अपने आसपास के वातावरण (जैसे ऑक्सीजन, नमी या रसायनों) के साथ क्रिया करके अवांछित यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, सल्फाइड या कार्बोनेट) में बदल जाती हैं।

  • उपचयन (Oxidation) क्यों?

    संक्षारण के दौरान धातु के परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन खो देते हैं और ऑक्सीजन के साथ जुड़कर ऑक्साइड बनाते हैं। रासायनिक विज्ञान में ऑक्सीजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉनों का त्याग करना उपचयन (Oxidation) कहलाता है।

    उदाहरण: लोहे पर जंग लगना एक उपचयन प्रक्रिया है।

     4Fe + 3O2 → 2Fe2O3 

संक्षारण के मुख्य बिंदु:

  • प्रकृति: यह एक हानिकारक और धीमी प्रक्रिया है जो धातुओं को कमजोर कर देती है।

  • उदाहरण:

    • लोहे पर भूरे रंग की परत (जंग) जमना।

    • चाँदी का काला पड़ जाना (सल्फर के साथ क्रिया)।

    • ताँबे पर हरे रंग की परत चढ़ना (कॉपर कार्बोनेट का बनना)।


बचाव के उपाय:

संक्षारण को रोकने के लिए अक्सर यशदलेपन (Galvanization), पेंटिंग, या तेल/ग्रीस का उपयोग किया जाता है ताकि धातु का संपर्क हवा और नमी से कट जाए।

20. दहन एक-

(अ) भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया है।
(ब) जैविक प्रक्रिया है।
(स) भौतिक प्रतिक्रिया है।
(द) रासायनिक प्रक्रिया है।
 

सही उत्तर (द) रासायनिक प्रक्रिया है।

दहन (Combustion) रासायनिक प्रक्रिया क्यों है?

दहन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन (O2) के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा (Heat) और प्रकाश (Light) उत्पन्न करता है। इसे रासायनिक परिवर्तन मानने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • नया पदार्थ बनना: दहन के बाद मूल पदार्थ पूरी तरह बदल जाता है और नए पदार्थ (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और राख) बनते हैं।

  • अनुत्क्रमणीय (Irreversible): जलने के बाद बने उत्पादों से वापस मूल पदार्थ प्राप्त नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, लकड़ी जलने के बाद बनी राख से पुनः लकड़ी नहीं बनाई जा सकती।

  • ऊर्जा का उत्सर्जन: इसमें रासायनिक बंध टूटते हैं और नई ऊर्जा मुक्त होती है।


दहन के प्रमुख उदाहरण:

  • मैग्नीशियम रिबन का जलना।

  • एलपीजी (LPG) या सीएनजी (CNG) का जलना।

  • मोमबत्ती का जलना (नोट: मोमबत्ती का पिघलना भौतिक परिवर्तन है, लेकिन बत्ती का जलना रासायनिक है)।

महत्वपूर्ण समीकरण (जैसे कोयले का दहन):

$$C + O_2 \rightarrow CO_2 + Heat + Light $$
 

21 किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों का द्रव्यमान होता है?

(अ) परिवर्तनशील
(ब) अपरिवर्तनशील
(स) कुछ भी हो सकता है।
(द) नष्ट हो जाता है।
 

सही उत्तर (ब) अपरिवर्तनशील है।

द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass):

यह प्रश्न रसायन विज्ञान के एक मूलभूत सिद्धांत पर आधारित है। महान वैज्ञानिक एंटोनी लेवाइजर (Antoine Lavoisier) ने यह नियम दिया था। इस नियम के अनुसार:

  • “किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही उसे नष्ट किया जा सकता है।”

  • इसका अर्थ है कि अभिक्रिया से पहले के अभिकारकों (Reactants) का कुल द्रव्यमान, अभिक्रिया के बाद बने उत्पादों (Products) के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।


एक उदाहरण से समझें:

यदि हम 12 ग्राम कार्बन को 32 ग्राम ऑक्सीजन के साथ जलाते हैं, तो हमें हमेशा 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड ही प्राप्त होगी।

$$C (12g) + O_2 (32g) \rightarrow CO_2 (44g)$$

यहाँ कुल द्रव्यमान 12 + 32 = 44 ग्राम है, जो प्रक्रिया के दौरान अपरिवर्तनशील रहता है।


संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equations):

इसी नियम के कारण हम रासायनिक समीकरणों को संतुलित (Balance) करते हैं, ताकि दोनों तरफ परमाणुओं की संख्या समान रहे और द्रव्यमान संरक्षित रहे।

22. निम्न में से कौन सा प्रक्रम ऊष्माक्षेपी है ?

(अ) कपूर का ऊर्ध्वपातन
(ब) जल का क्वथनांक पर वाष्प का बनना
(स) बर्फ के गलनांक पर वाष्प का बनना
(द) द्रवित पेट्रोलियम गैस का दहन

सही उत्तर (द) द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) का दहन है।

यहाँ इसका कारण और अन्य विकल्पों का विश्लेषण दिया गया है:

ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) क्यों?

ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ वे होती हैं जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊर्जा (ऊष्मा) बाहर निकलती है

  • द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) का दहन: जब हम गैस जलाते हैं, तो ईंधन ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्सर्जित करता है। इसी ऊष्मा का उपयोग हम खाना पकाने के लिए करते हैं।


अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ऊष्माशोषी प्रक्रम):

बाकी तीनों विकल्प ऊष्माशोषी (Endothermic) प्रक्रम हैं, क्योंकि इनमें प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए बाहर से ऊष्मा देनी पड़ती है:

  • (अ) कपूर का ऊर्ध्वपातन (Sublimation): कपूर को ठोस से सीधे गैस में बदलने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

  • (ब) जल का वाष्पीकरण: पानी को भाप में बदलने के लिए हमें उसे ऊष्मा देनी पड़ती है।

  • (स) बर्फ का गलना: बर्फ पिघलकर पानी बनने के लिए अपने आसपास से ऊष्मा अवशोषित करती है।


एक नज़र में अंतर:

प्रक्रम ऊष्मा का क्या होता है? प्रकार
दहन (Combustion) बाहर निकलती है ऊष्माक्षेपी
पिघलना / उबलना अवशोषित होती है ऊष्माशोषी
श्वसन (Respiration) बाहर निकलती है ऊष्माक्षेपी

 

23. निम्न में से कौनसा प्रक्रम ऊष्माक्षेपी है ?

(अ) कपूर का ऊर्ध्वपातन
(ब) एक सान्द्र अम्ल का तनुकरण
(स) बिना बुझे चूने के साथ जल की अभिक्रिया
(द) जल का वाष्पीकरण
 
(A) अ व ब
(B) ब व स
(C) अ व द
(D) स व द

सही उत्तर (B) ब व स है।

यहाँ इसका विस्तृत कारण दिया गया है कि ये प्रक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी (Exothermic) क्यों हैं:

ऊष्माक्षेपी प्रक्रम का विश्लेषण:

  • (ब) एक सान्द्र अम्ल का तनुकरण (Dilution of concentrated acid): जब किसी सांद्र अम्ल (जैसे H2SO4) में जल मिलाया जाता है, तो यह प्रक्रिया अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करती है। यही कारण है कि हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाने की सलाह दी जाती है, न कि जल को अम्ल में।

  • (स) बिना बुझे चूने के साथ जल की अभिक्रिया: जब बिना बुझे चूने (Calcium Oxide – CaO) में पानी मिलाया जाता है, तो बुझा हुआ चूना (Calcium Hydroxide) बनता है और बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा निकलती है, जिससे पानी उबलने तक लगता है।

    $$CaO(s) + H_2O(l) \rightarrow Ca(OH)_2(aq) + Heat $$

अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ऊष्माशोषी प्रक्रम):

विकल्प (अ) और (द) ऊष्माशोषी (Endothermic) हैं क्योंकि इन्हें संपन्न होने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है:

    • (अ) कपूर का ऊर्ध्वपातन: ठोस कपूर को सीधे गैस में बदलने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है।

    • (द) जल का वाष्पीकरण: द्रव जल को वाष्प (भाप) में बदलने के लिए ऊष्मा अवशोषित करनी पड़ती है।

 

24. OF2 में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक है ?

(अ) -3
(ब) +1
(स) -1
(द) +2

सही उत्तर (द) +2 है।

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अपवाद है क्योंकि सामान्यतः ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक -2 होता है, लेकिन OF2 (ऑक्सीजन डिफ्लोराइड) में यह धनात्मक होता है।

इसका कारण:

ऑक्सीकरण अंक विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पर निर्भर करता है।

  • पूरे आवर्त सारणी में फ्लोरीन (F) सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।

  • ऑक्सीजन (O) दूसरा सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।

  • जब ऑक्सीजन फ्लोरीन के साथ जुड़ता है, तो फ्लोरीन इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींच लेता है, जिससे फ्लोरीन पर ऋणात्मक (-1) और ऑक्सीजन पर धनात्मक आवेश आ जाता है।

गणना (Calculation):

मान लीजिए OF2 में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक x है।

फ्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक हमेशा -1 होता है।

$$x + 2(-1) = 0$$
$$x – 2 = 0$$
$$x = +2$$

विशेष बिंदु:

  • सामान्य अवस्था: -2 (जैसे H2O, MgO में)

  • पेरॉक्साइड अवस्था: -1 (जैसे H2O2 में)

  • सुपरऑक्साइड अवस्था: -1/2 (जैसे KO2 में)

  • फ्लोरीन के साथ: +2 (केवल OF2 में) और +1 (O2F2 में)

 

 
 
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