Animal tissue जन्तु उत्तक प्रश्न

जन्तु ऊतक (Animal Tissue)

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर


1. जन्तुओं में मुख्य रूप से कितने प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं?

(A) 2

(B) 3

(C) 4

(D) 5

उत्तर: (C) 4

व्याख्या: जन्तु शरीर में चार मुख्य ऊतक होते हैं: उपकला (Epithelial), संयोजी (Connective), पेशीय (Muscular) और तंत्रिका (Nervous) ऊतक।

2. त्वचा की सबसे बाहरी परत किस ऊतक की बनी होती है?

(A) संयोजी ऊतक

(B) उपकला ऊतक

(C) पेशीय ऊतक

(D) तंत्रिका ऊतक

उत्तर: (B) उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

व्याख्या: उपकला ऊतक शरीर के बाहरी आवरण (त्वचा) और आंतरिक अंगों की परतों का निर्माण करता है।

3. रुधिर (Blood) किस प्रकार का ऊतक है?

(A) उपकला ऊतक

(B) तरल संयोजी ऊतक

(C) तंत्रिका ऊतक

(D) पेशीय ऊतक

उत्तर: (B) तरल संयोजी ऊतक

व्याख्या: रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है क्योंकि यह शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ता है और पोषक तत्वों का परिवहन करता है।

 

4. अस्थि (Bone) को मांसपेशियों (Muscle) से जोड़ने वाली संरचना क्या कहलाती है?

(A) लिगामेंट (Ligament)

(B) कंडरा (Tendon)

(C) उपास्थि (Cartilage)

(D) तंत्रिका

उत्तर: (B) कंडरा (Tendon)

व्याख्या: टेंडन पेशी को हड्डी से जोड़ता है, जबकि लिगामेंट हड्डी को हड्डी से जोड़ता है।

5. हमारे शरीर में वसा (Fat) का संचयन कौन सा ऊतक करता है?

(A) एरिओलर ऊतक

(B) एडिपोज (Adipose) ऊतक

(C) एपिथीलियल ऊतक

(D) संवहनी ऊतक

उत्तर: (B) एडिपोज (Adipose) ऊतक

व्याख्या: वसीय ऊतक (Adipose tissue) त्वचा के नीचे स्थित होता है और वसा के रूप में ऊर्जा संचित करता है।

6. हृदय पेशी (Cardiac Muscle) की विशेषता क्या है?

(A) ऐच्छिक और थकने वाली

(B) अनैच्छिक और कभी न थकने वाली

(C) ऐच्छिक और रेखित

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) अनैच्छिक और कभी न थकने वाली

व्याख्या: हृदय की पेशियाँ जीवन भर बिना रुके लयबद्ध तरीके से संकुचन और प्रसार करती हैं।

7. तंत्रिका ऊतक की इकाई क्या है?

(A) नेफ्रॉन

(B) न्यूरॉन

(C) ऊतक

(D) कोशिकांग

उत्तर: (B) न्यूरॉन (Neuron)

व्याख्या: तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन संदेशों के आदान-प्रदान के लिए उत्तरदायी होती है।

 

8. श्वसन नली में पाए जाने वाले सिलिया (Cilia) किस ऊतक का हिस्सा हैं?

(A) घनाकार उपकला

(B) पक्ष्माभी (Ciliated) उपकला

(C) स्तंभाकार उपकला

(D) शल्की उपकला

उत्तर: (B) पक्ष्माभी (Ciliated) उपकला

व्याख्या: ये सिलिया बलगम और अन्य कणों को बाहर धकेलने में मदद करते हैं।

9. उपास्थि (Cartilage) में कौन सी कोशिकाएं पाई जाती हैं?

(A) ओस्टियोसाइट्स

(B) कॉन्ड्रोसाइट्स (Chondrocytes)

(C) लिम्फोसाइट्स

(D) एरिथ्रोसाइट्स

उत्तर: (B) कॉन्ड्रोसाइट्स

व्याख्या: उपास्थि एक लचीला संयोजी ऊतक है जिसमें कॉन्ड्रोसाइट कोशिकाएं होती हैं।

10. लिगामेंट (Ligament) किसे जोड़ता है?

(A) पेशी को पेशी से

(B) अस्थि को अस्थि से

(C) अस्थि को पेशी से

(D) त्वचा को पेशी से

उत्तर: (B) अस्थि को अस्थि से (Bone to Bone)

व्याख्या:

  • लिगामेंट (Ligament): यह एक रेशेदार संयोजी ऊतक है जो बहुत लचीला और मजबूत होता है। इसका मुख्य कार्य एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ना है, जिससे जोड़ों (Joints) को स्थिरता मिलती है। इसमें बहुत कम ‘मैट्रिक्स’ होता है।

  • कंडरा (Tendon): अक्सर लोग इनमें भ्रमित हो जाते हैं। टेंडन वह ऊतक है जो पेशी को अस्थि (Muscle to Bone) से जोड़ता है। यह लिगामेंट की तुलना में कम लचीला लेकिन बहुत अधिक मजबूत होता है।

 

11. शल्की उपकला (Squamous Epithelium) कहाँ पाई जाती है?

(A) वृक्क नलिका

(B) फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में

(C) आंत में

(D) ग्रंथियों में

उत्तर: (B) फेफड़ों की कूपिकाओं में

व्याख्या: शल्की उपकला (Squamous Epithelium) की कोशिकाएं अत्यधिक पतली और चपटी होती हैं, जो एक नाजुक अस्तर (lining) का निर्माण करती हैं।

  • फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli): यहाँ गैसों (O₂ और CO₂) का आदान-प्रदान विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है। इस प्रक्रिया के लिए एक बहुत ही पतली झिल्ली की आवश्यकता होती है, जो शल्की उपकला प्रदान करती है।

  • अन्य स्थान: यह रक्त वाहिकाओं के अस्तर, मुँह की नली और ग्रासनली (Oesophagus) में भी पाई जाती है।

12. अनैच्छिक पेशियाँ (Involuntary Muscles) कहाँ पाई जाती हैं?

(A) आहार नाल में

(B) हाथों में

(C) पैरों में

(D) गर्दन में

उत्तर: (A) आहार नाल में

व्याख्या: अनैच्छिक पेशियाँ (Involuntary Muscles), जिन्हें चिकनी पेशियाँ (Smooth Muscles) भी कहा जाता है, वे होती हैं जिनकी गति हमारे नियंत्रण में नहीं होती।

  • आहार नाल (Alimentary Canal): भोजन का पाचन और उसका आगे बढ़ना (क्रमाकुंचन गति) स्वतः होता है। हम अपनी इच्छा से इसे रोक या शुरू नहीं कर सकते।

  • अन्य स्थान: ये पेशियाँ रक्त वाहिकाओं, मूत्रशय, आँख की पुतली और फेफड़ों की श्वसनी में भी पाई जाती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) हाथों, (C) पैरों और (D) गर्दन में: यहाँ ऐच्छिक पेशियाँ (Voluntary Muscles) या कंकाल पेशियाँ पाई जाती हैं। इन्हें हम अपनी इच्छा के अनुसार हिला-डुला सकते हैं।

13. एरिओलर (Areolar) ऊतक का कार्य क्या है?

(A) अंगों के बीच खाली जगह भरना

(B) वसा का संचय

(C) संदेश भेजना

(D) रक्त प्रवाह

उत्तर: (A) अंगों के बीच खाली जगह भरना

व्याख्या: एरिओलर ऊतक एक प्रकार का शिथिल संयोजी ऊतक (Loose Connective Tissue) है जो शरीर में सबसे व्यापक रूप से फैला हुआ है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  • अंगों को सहारा देना: यह त्वचा और मांसपेशियों के बीच, रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं के चारों ओर तथा अस्थि मज्जा में पाया जाता है। यह अंगों के भीतर की खाली जगह को भरता है और उन्हें उनके स्थान पर बनाए रखने में मदद करता है।

  • मरम्मत (Repair): यह ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) वसा का संचय: यह कार्य एडिपोज (Adipose) ऊतक का है।

  • (C) संदेश भेजना: यह तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) का मुख्य कार्य है।

  • (D) रक्त प्रवाह: यह तरल संयोजी ऊतक (रक्त) के माध्यम से होता है।

14. मास्टर कोशिकाएं (Mast Cells) किस ऊतक में पाई जाती हैं?

(A) पेशीय ऊतक

(B) तंत्रिका ऊतक

(C) संयोजी ऊतक

(D) उपकला ऊतक

उत्तर: (C) संयोजी ऊतक

व्याख्या: मास्टर कोशिकाएं (Mast Cells) मुख्य रूप से एरिओलर संयोजी ऊतक में पाई जाती हैं। ये कोशिकाएं हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

  • एलर्जी और सूजन: जब शरीर में कोई बाहरी हानिकारक तत्व प्रवेश करता है, तो ये कोशिकाएं हिस्टामाइन (Histamine), हेपरिन (Heparin) और सेरोटोनिन जैसे रसायनों का स्राव करती हैं।

  • सुरक्षा: हिस्टामाइन के कारण ही एलर्जी के समय शरीर में सूजन या खुजली महसूस होती है, जो शरीर को खतरे के प्रति सचेत करती है। हेपरिन रक्त को वाहिकाओं के अंदर जमने से रोकता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पेशीय ऊतक: यह शरीर की गति के लिए जिम्मेदार है (जैसे संकुचन और प्रसार)।

  • (B) तंत्रिका ऊतक: यह सूचनाओं और संवेदनाओं के आदान-प्रदान का कार्य करता है।

  • (D) उपकला ऊतक: यह अंगों की बाहरी और आंतरिक परतों का सुरक्षात्मक आवरण बनाता है।

15. ऊतकों का अध्ययन विज्ञान की किस शाखा में किया जाता है?

(A) साइटोलॉजी

(B) हिस्टोलॉजी (Histology)

(C) मॉर्फोलॉजी

(D) जेनेटिक्स

उत्तर: (B) हिस्टोलॉजी

व्याख्या: ऊतकों के सूक्ष्म अध्ययन को हिस्टोलॉजी (औतिकी) कहा जाता है। इसमें ऊतकों की संरचना, उनके कार्यों और कोशिकाओं के संगठन का सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की सहायता से अध्ययन किया जाता है।

  • जनक: बाइचैट (Bichat) को ‘हिस्टोलॉजी का जनक’ माना जाता है क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले ‘ऊतक’ शब्द का प्रयोग किया था।

  • संस्थापक: मारसेलो मैल्पीगी (Marcello Malpighi) को ‘सूक्ष्म औतिकी का संस्थापक’ कहा जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) साइटोलॉजी (Cytology): इसमें केवल कोशिकाओं (Cells) की संरचना और कार्यों का अध्ययन किया जाता है।

  • (C) मॉर्फोलॉजी (Morphology): इसे ‘आकारिकी’ कहते हैं, जिसमें जीवों की बाहरी संरचना और रूप का अध्ययन होता है।

  • (D) जेनेटिक्स (Genetics): इसमें आनुवंशिकता (Heredity) और जीनों का अध्ययन किया जाता है।

16. मूत्रशय की भीतरी दीवार किस ऊतक की बनी होती है?

(A) शल्की उपकला

(B) घनाकार उपकला

(C) संक्रमण उपकला (Transitional Epithelium)

(D) स्तंभाकार उपकला

उत्तर: (C) संक्रमण उपकला (Transitional Epithelium)

व्याख्या: संक्रमण उपकला एक विशेष प्रकार का उपकला ऊतक है जो मुख्य रूप से मूत्र प्रणाली के अंगों में पाया जाता है।

  • खिंचाव की क्षमता: इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी कोशिकाएं अपनी आकृति बदल सकती हैं। जब मूत्रशय (Urinary Bladder) मूत्र से भर जाता है, तो यह ऊतक खिंचकर पतला हो जाता है, जिससे मूत्रशय का आयतन बढ़ जाता है।

  • सुरक्षा: यह ऊतक मूत्र के हानिकारक पदार्थों को शरीर के अन्य हिस्सों में रिसने से भी रोकता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) शल्की उपकला (Squamous Epithelium): यह फेफड़ों की कूपिकाओं और रक्त वाहिकाओं में पाई जाती है जहाँ विसरण की आवश्यकता होती है।

  • (B) घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium): यह वृक्क नलिकाओं (Kidney tubules) और ग्रंथियों के अस्तर में पाई जाती है, जो अवशोषण और स्राव में मदद करती है।

  • (D) स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium): यह मुख्य रूप से पेट और आंत के भीतरी अस्तर में पाई जाती है।

17. लार ग्रंथियों में कौन सा ऊतक पाया जाता है?

(A) घनाकार उपकला (Cuboidal)

(B) स्तंभाकार उपकला

(C) रोमश उपकला

(D) सरल शल्की उपकला

उत्तर: (A) घनाकार उपकला (Cuboidal)

व्याख्या: घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium) की कोशिकाएं घन (Cube) के आकार की होती हैं और इनका केंद्रक गोल होता है।

  • कार्य: यह ऊतक मुख्य रूप से स्राव (Secretion) और अवशोषण (Absorption) का कार्य करता है। इसके साथ ही यह अंगों को यांत्रिक सहारा (Mechanical support) भी प्रदान करता है।

  • स्थान: यह लार ग्रंथियों (Salivary glands), स्वेद ग्रंथियों (Sweat glands) और वृक्क नलिकाओं (Kidney tubules) के अस्तर में पाया जाता है। लार ग्रंथियों में यह लार के स्राव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium): यह ऊतक आंत और आमाशय के भीतरी अस्तर में पाया जाता है जहाँ अवशोषण अधिक होता है।

  • (C) रोमश उपकला (Ciliated Epithelium): यह श्वास नली (Trachea) और डिंबवाहिनी (Fallopian tube) में पाया जाता है, जहाँ यह कणों या अंडों को एक दिशा में धकेलने का कार्य करता है।

  • (D) सरल शल्की उपकला (Simple Squamous): यह फेफड़ों की कूपिकाओं और रक्त वाहिकाओं में पाया जाता है।

18. रक्त प्लाज्मा में जल की मात्रा लगभग कितनी होती है?

(A) 50%

(B) 70%

(C) 90%

(D) 100%

उत्तर: (C) 90%

व्याख्या: रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो दो मुख्य भागों से बना होता है: प्लाज्मा (तरल भाग) और रक्त कणिकाएं (RBC, WBC, प्लेटलेट्स)।

  • प्लाज्मा की संरचना: रक्त के कुल आयतन का लगभग 55% भाग प्लाज्मा होता है। इस प्लाज्मा के भीतर 90% से 92% तक केवल जल पाया जाता है।

  • अन्य पदार्थ: शेष 8% से 10% भाग में कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ होते हैं, जैसे:

    • प्रोटीन: एल्ब्युमिन, ग्लोब्युलिन और फाइब्रिनोजेन (रक्त का थक्का जमाने के लिए)।

    • पोषक तत्व: ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और लिपिड।

    • अपशिष्ट और खनिज: यूरिया, सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम।

महत्वपूर्ण जानकारी: प्लाज्मा शरीर में पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों के परिवहन के साथ-साथ शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

19. शरीर का “सुरक्षात्मक कवच” किस ऊतक को कहा जाता है?

(A) पेशीय ऊतक

(B) संयोजी ऊतक

(C) उपकला ऊतक

(D) तंत्रिका ऊतक

उत्तर: (C) उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

व्याख्या: उपकला ऊतक को शरीर का “सुरक्षात्मक कवच” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह शरीर के अंगों के लिए पहली रक्षा पंक्ति का कार्य करता है।

  • बाहरी सुरक्षा: हमारी त्वचा उपकला ऊतक की बनी होती है, जो शरीर के आंतरिक अंगों को चोट, हानिकारक रसायनों और जीवाणुओं (Infections) से बचाती है।

  • आंतरिक सुरक्षा: यह शरीर के अंदर के अंगों (जैसे आहार नाल, रक्त वाहिकाएं और फेफड़े) के ऊपर एक सुरक्षात्मक अस्तर (Lining) बनाता है।

  • अवरोध का कार्य: यह विभिन्न शारीरिक अंगों के बीच एक सीमा निर्धारित करता है ताकि अंगों की सामग्री आपस में न मिलें और शरीर का आंतरिक वातावरण सुरक्षित रहे।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पेशीय ऊतक: इसका मुख्य कार्य शरीर को गति प्रदान करना और संकुचन करना है।

  • (B) संयोजी ऊतक: यह अंगों को आपस में जोड़ने, सहारा देने और परिवहन (जैसे रक्त) का कार्य करता है।

  • (D) तंत्रिका ऊतक: यह शरीर में संवेदनाओं और संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करता है।

20. रेखित पेशी (Striated Muscle) को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

(A) अनैच्छिक पेशी

(B) कंकाल पेशी (Skeletal Muscle)

(C) चिकनी पेशी

(D) हृदय पेशी

उत्तर: (B) कंकाल पेशी (Skeletal Muscle)

व्याख्या: रेखित पेशियों को कंकाल पेशी और ऐच्छिक पेशी के नाम से भी जाना जाता है।

  • कंकाल पेशी क्यों? क्योंकि ये पेशियाँ मुख्य रूप से हमारी हड्डियों (कंकाल) से जुड़ी होती हैं और हमें चलने-फिरने में मदद करती हैं।

  • रेखित क्यों? जब हम इन पेशियों को सूक्ष्मदर्शी (Microscope) से देखते हैं, तो इनमें हल्की और गहरी धारियाँ (Striations) दिखाई देती हैं, इसलिए इन्हें रेखित पेशी कहते हैं।

  • ऐच्छिक क्यों? इन पेशियों की गति हमारी इच्छा के अधीन होती है। उदाहरण के लिए, हाथ या पैर को हिलाना।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) अनैच्छिक पेशी और (C) चिकनी पेशी: ये दोनों एक ही हैं। ये पेशियाँ आंतरिक अंगों (जैसे पेट, रक्त वाहिका) में पाई जाती हैं और इनकी गति हमारे नियंत्रण में नहीं होती। इनमें धारियाँ नहीं होतीं।

  • (D) हृदय पेशी: यह केवल हृदय की दीवारों में पाई जाती है। यह रेखित तो होती है, लेकिन अनैच्छिक (Involuntary) कार्य करती है।

21. तंत्रिका कोशिका के किस भाग द्वारा सूचना प्राप्त की जाती है?

(A) एक्सॉन (Axon)

(B) डेंड्राइट (Dendrite)

(C) कोशिका काय (Cyton)

(D) तंत्रिकाक्ष

आपका उत्तर (B) डेंड्राइट (Dendrite) बिल्कुल सही है।

यहाँ इसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है:

उत्तर: (B) डेंड्राइट (Dendrite)

व्याख्या:

एक तंत्रिका कोशिका (Neuron) संदेशों को प्राप्त करने और भेजने के लिए एक विशेष संरचना रखती है। इसके मुख्य भाग इस प्रकार कार्य करते हैं:

  • डेंड्राइट (Dendrite): ये कोशिका काय से निकले हुए छोटे तंतु होते हैं। इनका मुख्य कार्य अन्य तंत्रिका कोशिकाओं या ज्ञानेंद्रियों से आने वाले रासायनिक संकेतों या सूचनाओं को प्राप्त करना और उन्हें विद्युत आवेग के रूप में कोशिका काय तक पहुँचाना है।

  • कोशिका काय (Cyton): यह न्यूरॉन का मुख्य भाग है जिसमें केंद्रक पाया जाता है। यह प्राप्त सूचनाओं को आगे भेजता है।

  • एक्सॉन (Axon): इसे तंत्रिकाक्ष भी कहते हैं। यह सूचनाओं को कोशिका काय से दूर ले जाकर अगले न्यूरॉन या पेशी तक पहुँचाने का कार्य करता है।

सूचना प्रवाह का क्रम:

सूचना सबसे पहले डेंड्राइट द्वारा ग्रहण की जाती है → फिर कोशिका काय में जाती है → अंत में एक्सॉन के माध्यम से बाहर निकलती है।

22. कौन सा ऊतक अंगों की मरम्मत में सबसे अधिक सहायक होता है?

(A) टेंडन

(B) लिगामेंट

(C) एरिओलर ऊतक (Areolar Tissue)

(D) तंत्रिका ऊतक

उत्तर: (C) एरिओलर ऊतक (Areolar Tissue)

व्याख्या: एरिओलर ऊतक शरीर में सबसे अधिक पाया जाने वाला संयोजी ऊतक है। इसे ‘पैकेजिंग ऊतक’ भी कहा जाता है क्योंकि:

  • मरम्मत का कार्य: जब भी शरीर के किसी आंतरिक अंग में चोट लगती है या ऊतक क्षतिग्रस्त होते हैं, तो एरिओलर ऊतक उस स्थान को भरने और उसकी मरम्मत (Repair) करने में प्राथमिक भूमिका निभाता है।

  • स्थान: यह त्वचा और मांसपेशियों के बीच, रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं के चारों ओर पाया जाता है।

  • अंगों को सहारा: यह अंगों के बीच के खाली स्थान को भरता है और आंतरिक अंगों को सहारा (Support) प्रदान करता है ताकि वे अपने स्थान पर सुरक्षित रहें।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) टेंडन: यह केवल मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने का कार्य करता है।

  • (B) लिगामेंट: यह एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ने का कार्य करता है।

  • (D) तंत्रिका ऊतक: इसका कार्य केवल संवेदनाओं और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है, यह भौतिक मरम्मत नहीं करता।

23. हृदय की दीवारों में पाए जाने वाला ऊतक है:

(A) रेखित पेशी

(B) अरेखित पेशी

(C) कार्डियक पेशी

(D) उपकला ऊतक

आपका उत्तर (C) कार्डियक पेशी बिल्कुल सही है।

यहाँ इसकी विस्तृत व्याख्या दी गई है:

उत्तर: (C) कार्डियक पेशी (Cardiac Muscle)

व्याख्या: हृदय पेशी या कार्डियक पेशी एक विशेष प्रकार का ऊतक है जो केवल हृदय में पाया जाता है। इसकी विशेषताएं इसे अन्य पेशियों से अलग बनाती हैं:

  • निरंतर कार्य: यह पेशी जीवन भर बिना थके लयबद्ध तरीके से संकुचन (Contraction) और प्रसार (Relaxation) करती रहती है।

  • संरचना: सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इसमें रेखित पेशी की तरह हल्की धारियाँ दिखाई देती हैं, लेकिन यह अरेखित पेशी की तरह अनैच्छिक होती है (यानी यह हमारी इच्छा से नहीं चलती)।

  • शाखायुक्त: इसकी कोशिकाएं बेलनाकार और शाखायुक्त (Branched) होती हैं और इनमें एक ही केंद्रक होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) रेखित पेशी: ये हमारी कंकाल तंत्र (हड्डियों) से जुड़ी होती हैं और ऐच्छिक होती हैं।

  • (B) अरेखित पेशी: ये आहार नाल और रक्त वाहिकाओं जैसे आंतरिक अंगों में पाई जाती हैं।

  • (D) उपकला ऊतक: यह अंगों की बाहरी और भीतरी सुरक्षात्मक परत बनाता है।

24. रुधिर की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) का जीवनकाल कितना होता है?

(A) 60 दिन

(B) 100 दिन

(C) 120 दिन

(D) 150 दिन

उत्तर: (C) 120 दिन

व्याख्या: लाल रक्त कणिकाएं (RBC), जिन्हें एरिथ्रोसाइट्स (Erythrocytes) भी कहा जाता है, हमारे रक्त की सबसे प्रमुख कोशिकाएं हैं।

  • जीवनकाल: एक स्वस्थ वयस्क मनुष्य के शरीर में RBC का औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है। इसके बाद ये पुरानी और कमजोर हो जाती हैं।

  • विनाश (Graveyard): 120 दिनों के बाद, पुरानी RBC मुख्य रूप से प्लीहा (Spleen) में जाकर नष्ट हो जाती हैं। इसीलिए प्लीहा को “RBC का कब्रिस्तान” भी कहा जाता है।

  • निर्माण: शरीर में नई लाल रक्त कणिकाओं का निरंतर निर्माण अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में होता रहता है।

  • मुख्य कार्य: इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन पाया जाता है, जो फेफड़ों से शरीर के सभी ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचाने का कार्य करता है।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

  • स्तनधारियों (Mammals) की परिपक्व RBC में केंद्रक (Nucleus) नहीं पाया जाता, ताकि हीमोग्लोबिन के लिए अधिक स्थान मिल सके।

  • ऊँट और लामा अपवाद हैं जिनकी RBC में केंद्रक होता है।

25. तंत्रिका तंत्र के चारों ओर पाया जाने वाला सुरक्षात्मक आवरण क्या कहलाता है?

(A) मायलिन शीथ (Myelin Sheath)

(B) प्लाज्मा झिल्ली

(C) ऊतक आवरण

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (A) मायलिन शीथ (Myelin Sheath)

व्याख्या: तंत्रिका तंत्र की मुख्य इकाई, न्यूरॉन के लंबे भाग (एक्सॉन) के चारों ओर वसायुक्त पदार्थों की एक सुरक्षात्मक परत पाई जाती है जिसे मायलिन शीथ कहते हैं।

  • कार्य: यह परत एक इंसुलेटर (विद्युत रोधी) की तरह कार्य करती है। यह न केवल तंत्रिका तंतुओं की सुरक्षा करती है, बल्कि विद्युत आवेगों (Nerve Impulses) की गति को भी काफी बढ़ा देती है।

  • निर्माण: परिधीय तंत्रिका तंत्र में इसका निर्माण ‘श्वान कोशिकाओं’ (Schwann cells) द्वारा किया जाता है।

  • रणवियर के नोड्स (Nodes of Ranvier): मायलिन शीथ एक्सॉन पर लगातार नहीं होती, बल्कि बीच-बीच में कुछ स्थान खाली होते हैं। इन खाली स्थानों को रणवियर के नोड्स कहते हैं, जहाँ से विद्युत संकेत कूदकर तेजी से आगे बढ़ते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) प्लाज्मा झिल्ली: यह प्रत्येक जीवित कोशिका की सबसे बाहरी परत होती है, यह केवल तंत्रिका तंत्र का विशिष्ट सुरक्षात्मक आवरण नहीं है।

  • (C) ऊतक आवरण: यह एक सामान्य शब्द है, तंत्रिका तंत्र के विशिष्ट सुरक्षात्मक आवरण के लिए इसका प्रयोग नहीं किया जाता।

 

26. कूपिकाओं और रक्त वाहिकाओं में गैसों का विनिमय किस ऊतक के माध्यम से होता है?

(A) सरल शल्की उपकला

(B) स्तरीकृत शल्की उपकला

(C) घनाकार उपकला

(D) ग्रंथि उपकला

उत्तर: (A) सरल शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium)

व्याख्या:

गैसों के विनिमय (Exchange of gases) के लिए शरीर को एक ऐसी सतह की आवश्यकता होती है जो बहुत ही महीन और पारगम्य हो।

  • संरचना: सरल शल्की उपकला की कोशिकाएं चपटी, पतली और एक ही परत में व्यवस्थित होती हैं। यह देखने में फर्श पर लगी टाइलों की तरह लगती हैं।

  • कार्य: इनकी अत्यधिक पतली संरचना के कारण ही ऑक्सीजन (O2) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) आसानी से विसरण (Diffusion) की प्रक्रिया द्वारा आर-पार जा सकती हैं।

  • स्थान: यह फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) और रक्त वाहिकाओं के आंतरिक स्तर (Endothelium) में प्रमुखता से पाया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) स्तरीकृत शल्की उपकला: इसमें कोशिकाओं की कई परतें होती हैं। यह सुरक्षा प्रदान करती है और उन अंगों में पाई जाती है जहाँ घर्षण अधिक होता है, जैसे कि हमारी त्वचा।

  • (C) घनाकार उपकला: यह अवशोषण और स्राव के लिए होती है, जैसे कि वृक्क नलिकाओं में।

  • (D) ग्रंथि उपकला: यह पदार्थों के स्राव (Secretion) के लिए विशेषीकृत होती है।

27. श्वेत रक्त कणिकाओं (WBC) का मुख्य कार्य क्या है?

(A) ऑक्सीजन का परिवहन

(B) रोगों से रक्षा करना

(C) रक्त का थक्का जमाना

(D) ऊर्जा प्रदान करना

उत्तर: (B) रोगों से रक्षा करना

व्याख्या: श्वेत रक्त कणिकाओं (WBC) को ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes) भी कहा जाता है। इन्हें हमारे शरीर का “सैनिक” (Soldiers of the body) माना जाता है।

    • कार्य: इनका मुख्य कार्य शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक जीवाणुओं, विषाणुओं (Viruses) और अन्य बाहरी कणों को पहचानना और उन्हें नष्ट करना है। यह हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का आधार हैं।

    • प्रकार: WBC कई प्रकार की होती हैं (जैसे न्यूट्रोफिल, लिम्फोसाइट, मोनोसाइट), जो अलग-अलग तरीकों से रोगों से लड़ती हैं। कुछ सीधे कीटाणुओं को खा जाती हैं, तो कुछ एंटीबॉडी (Antibody) बनाती हैं।

 

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) ऑक्सीजन का परिवहन: यह मुख्य रूप से लाल रक्त कणिकाओं (RBC) का कार्य है।

  • (C) रक्त का थक्का जमाना: यह कार्य प्लेटलेट्स (Platelets) द्वारा किया जाता है।

  • (D) ऊर्जा प्रदान करना: ऊर्जा मुख्य रूप से ग्लूकोज और वसा के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है, रक्त कणिकाओं का यह प्राथमिक कार्य नहीं है।

28. हिपेरिन (Heparin) का स्राव कौन सी कोशिकाएं करती हैं?

(A) मास्ट कोशिकाएं

(B) लाल रक्त कोशिकाएं

(C) श्वेत रक्त कोशिकाएं

(D) तंत्रिका कोशिकाएं

उत्तर: (A) मास्ट कोशिकाएं (Mast Cells)

व्याख्या: हिपेरिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण रसायन है जिसे ‘एंटी-कोएगुलेंट’ (Anti-coagulant) या प्रति-स्कंदक कहा जाता है।

  • मुख्य कार्य: हिपेरिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) के भीतर रक्त को जमने से रोकना है। यदि हमारे शरीर के अंदर रक्त जम जाए, तो यह घातक हो सकता है।

  • स्राव का स्रोत: यह मुख्य रूप से संयोजी ऊतक में पाई जाने वाली मास्ट कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है। इसके अलावा, श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार जिसे बेसोफिल (Basophil) कहते हैं, वह भी हिपेरिन का स्राव करता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) लाल रक्त कोशिकाएं (RBC): इनका कार्य केवल ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करना है।

  • (C) श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC): हालांकि बेसोफिल (WBC का एक प्रकार) हिपेरिन बनाता है, लेकिन प्रश्न के विकल्पों के अनुसार ‘मास्ट कोशिकाएं’ प्राथमिक और सटीक उत्तर हैं।

  • (D) तंत्रिका कोशिकाएं: ये केवल विद्युत आवेगों के माध्यम से सूचनाएं भेजने का कार्य करती हैं।

29. चिकनी पेशियाँ (Smooth Muscles) कहाँ पाई जाती हैं?

(A) फेफड़ों की श्वसनी में

(B) हाथ की मांसपेशियों में

(C) हृदय में

(D) जीभ में

उत्तर: (A) फेफड़ों की श्वसनी में

व्याख्या: चिकनी पेशियों (Smooth Muscles) को अरेखित और अनैच्छिक पेशियाँ भी कहा जाता है।

  • विशेषता: ये पेशियाँ उन अंगों में पाई जाती हैं जिनकी गति हमारे नियंत्रण में नहीं होती। इनकी कोशिकाएं तर्कुरूप (Spindle-shaped) होती हैं और इनमें धारियाँ नहीं पाई जातीं।

  • स्थान: फेफड़ों की श्वसनी (Bronchi) के अलावा ये आहार नाल (पाचन नली), रक्त वाहिकाओं, मूत्रशय और आँख की पुतली (Iris) में पाई जाती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) हाथ की मांसपेशियों और (D) जीभ में: यहाँ ऐच्छिक पेशियाँ (कंकाल पेशियाँ) पाई जाती हैं, जिन्हें हम अपनी मर्जी से हिला सकते हैं।

  • (C) हृदय में: यहाँ एक विशेष प्रकार की हृदय पेशी (Cardiac Muscle) पाई जाती है।

30. अस्थि (Bone) का मुख्य घटक क्या है?

(A) कैल्शियम और फास्फोरस

(B) लोहा और सोडियम

(C) मैग्नीशियम और सल्फर

(D) पोटेशियम और क्लोरीन

उत्तर: (A) कैल्शियम और फास्फोरस

व्याख्या: अस्थि (Bone) एक बहुत ही कठोर और मजबूत संयोजी ऊतक है। इसकी कठोरता इसके विशेष ‘मैट्रिक्स’ के कारण होती है।

  • मुख्य खनिज: हड्डियों का मैट्रिक्स मुख्य रूप से कैल्शियम और फास्फोरस के यौगिकों (जैसे कैल्शियम फास्फेट) से बना होता है। यही खनिज हड्डियों को उनकी मजबूती और कठोरता प्रदान करते हैं।

  • प्रोटीन: खनिज के साथ-साथ इसमें ओसीन (Ossein) नामक प्रोटीन भी पाया जाता है।

  • कोशिकाएं: हड्डियों में पाई जाने वाली जीवित कोशिकाओं को ओस्टियोसाइट्स (Osteocytes) कहा जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) लोहा: यह मुख्य रूप से हमारे रक्त के हीमोग्लोबिन में पाया जाता है, हड्डियों में नहीं।

  • (C) मैग्नीशियम और सल्फर: ये शरीर के लिए आवश्यक तो हैं, लेकिन ये हड्डियों के मुख्य संरचनात्मक घटक नहीं हैं।

 

31. वह ऊतक जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है:

(A) तंत्रिका ऊतक

(B) संयोजी ऊतक

(C) उपकला ऊतक

(D) वसीय ऊतक (Adipose)

उत्तर: (D) वसीय ऊतक (Adipose Tissue)

व्याख्या: वसीय ऊतक (Adipose Tissue) एक प्रकार का विशिष्ट संयोजी ऊतक है जो त्वचा के ठीक नीचे और आंतरिक अंगों के बीच पाया जाता है।

  • तापमान नियंत्रण (Insulation): इस ऊतक की कोशिकाएं वसा (Fat) की बूंदों से भरी होती हैं। वसा ऊष्मा का कुचालक (Bad conductor) होती है, इसलिए यह शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकती है। यह एक इंसुलेटर की तरह कार्य करता है जो शरीर के तापमान को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।

  • ऊर्जा का भंडार: यह ऊतक अतिरिक्त ऊर्जा को वसा के रूप में संचित करता है, जिसका उपयोग शरीर आवश्यकता पड़ने पर (जैसे उपवास के दौरान) करता है।

  • सुरक्षा: यह आंतरिक अंगों के चारों ओर एक गद्दी (Cushion) की तरह कार्य करता है, जिससे अंग बाहरी झटकों या चोट से सुरक्षित रहते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) तंत्रिका ऊतक: इसका कार्य सूचनाओं और संवेदनाओं का आदान-प्रदान करना है।

  • (B) संयोजी ऊतक: हालांकि वसीय ऊतक इसी का एक प्रकार है, लेकिन तापमान नियंत्रण का विशिष्ट कार्य ‘वसीय ऊतक’ का ही है।

  • (C) उपकला ऊतक: यह अंगों की सुरक्षात्मक परत बनाता है।

32. सिनैप्स (Synapse) क्या है?

(A) दो मांसपेशियों का जोड़

(B) दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच का स्थान

(C) हड्डी और मांस का जोड़

(D) मस्तिष्क का एक हिस्सा

उत्तर: (B) दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच का स्थान

व्याख्या: सिनैप्स (Synapse) वह महत्वपूर्ण बिंदु है जहाँ एक न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) दूसरे न्यूरॉन से मिलता है।

  • संचार का माध्यम: दो तंत्रिका कोशिकाएं आपस में भौतिक रूप से पूरी तरह जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि उनके बीच एक बहुत ही सूक्ष्म खाली स्थान होता है। इसे ही ‘सिनैप्स’ या ‘युग्मानुबंधन’ कहते हैं।

  • संकेतों का स्थानांतरण: जब विद्युत आवेग (Electric Impulse) एक न्यूरॉन के अंतिम सिरे (Axon terminal) पर पहुँचता है, तो वहाँ से कुछ विशेष रसायन निकलते हैं जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitters) कहा जाता है।

  • ये रसायन सिनैप्स को पार करके अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट्स में फिर से विद्युत आवेग उत्पन्न कर देते हैं। इस प्रकार सूचना एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक पहुँचती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

    • (A) और (C): मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ को टेंडन या लिगामेंट जैसे संयोजी ऊतकों द्वारा जोड़ा जाता है।

    • (D) मस्तिष्क का हिस्सा: सिनैप्स मस्तिष्क का कोई अंग नहीं, बल्कि तंत्रिका कोशिकाओं के बीच की एक कार्यात्मक संधि है।

33. उपास्थि (Cartilage) शरीर में कहाँ पाई जाती है?

(A) नाक की नोक पर

(B) हृदय में

(C) यकृत में

(D) वृक्क में

उत्तर: (A) नाक की नोक पर

व्याख्या: उपास्थि (Cartilage) एक लचीला और मजबूत संयोजी ऊतक है। यह अस्थि (Bone) की तरह कठोर नहीं होता क्योंकि इसके मैट्रिक्स में कैल्शियम के बजाय प्रोटीन और शर्करा (Sugar) की प्रधानता होती है।

  • लचीलापन: इसकी ठोस सतह लचीली होती है, जिससे इसे मोड़ा जा सकता है।

  • प्रमुख स्थान: यह हमारे शरीर के उन हिस्सों में पाया जाता है जिन्हें मजबूती के साथ लचीलेपन की भी जरूरत होती है, जैसे:

    • नाक की नोक (Tip of the nose)

    • बाहरी कान (Pinna)

    • श्वासनली (Trachea)

    • कंठ (Larynx)

    • हड्डियों के जोड़ (ताकि वे आपस में रगड़ न खाएं)

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) हृदय, (C) यकृत और (D) वृक्क: ये हमारे कोमल आंतरिक अंग हैं। हृदय मुख्य रूप से पेशीय ऊतक का बना होता है, जबकि यकृत और वृक्क में उपकला और विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतक पाए जाते हैं, लेकिन इनमें उपास्थि (Cartilage) नहीं होती।

34. रक्त का थक्का (Clotting) जमाने में कौन सहायक है?

(A) एरिथ्रोसाइट्स

(B) ल्यूकोसाइट्स

(C) प्लेटलेट्स (Thrombocytes)

(D) न्यूरॉन्स

उत्तर: (C) प्लेटलेट्स (Thrombocytes)

व्याख्या: रक्त प्लेटलेट्स या थ्रोम्बोसाइट्स रक्त में पाई जाने वाली छोटी, रंगहीन कोशिकाएं होती हैं।

  • रक्त का थक्का जमना: जब हमें चोट लगती है और रक्त बहने लगता है, तो प्लेटलेट्स उस स्थान पर जमा होकर एक जाल जैसा थक्का (Clot) बना देती हैं। इससे रक्त का बहना रुक जाता है।

  • प्रक्रिया: प्लेटलेट्स वायु के संपर्क में आने पर एक विशेष रसायन (थ्रोम्बोप्लास्टिन) छोड़ती हैं, जो रक्त में मौजूद प्रोटीन (फाइब्रिनोजेन) के साथ मिलकर धागे जैसी संरचना बनाता है।

  • महत्व: यदि शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाए (जैसा कि डेंगू जैसी बीमारियों में होता है), तो मामूली चोट लगने पर भी बहुत अधिक रक्त बह सकता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) एरिथ्रोसाइट्स (RBC): इनका मुख्य कार्य ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करना है।

  • (B) ल्यूकोसाइट्स (WBC): ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं और रोगों से लड़ने में मदद करती हैं।

  • (D) न्यूरॉन्स: ये तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं हैं जो सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं।

एक और महत्वपूर्ण जानकारी: रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में विटामिन ‘K’ और कैल्शियम आयन भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

35. लिम्फ (Lymph) में किसकी कमी होती है?

(A) WBC

(B) RBC और प्लाज्मा प्रोटीन

(C) जल

(D) पोषक तत्व

उत्तर: (B) RBC और प्लाज्मा प्रोटीन

व्याख्या: लिम्फ (Lymph) या लसिका एक रंगहीन तरल ऊतक है जो रक्त के समान ही होता है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं:

    • रंगहीन तरल: चूँकि लिम्फ में लाल रक्त कणिकाएं (RBC) और हीमोग्लोबिन नहीं होता, इसलिए यह रक्त की तरह लाल न होकर रंगहीन या हल्का पीला होता है।

    • प्रोटीन की कमी: रक्त प्लाज्मा की तुलना में लिम्फ में बड़े आकार के प्लाज्मा प्रोटीन बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं।

    • WBC की अधिकता: लिम्फ में श्वेत रक्त कणिकाएं (विशेषकर लिम्फोसाइट्स) प्रचुर मात्रा में होती हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं।

लिम्फ का निर्माण और कार्य: जब रक्त केशिकाओं (Capillaries) से गुजरता है, तो कुछ तरल भाग छनकर ऊतकों के बीच के स्थान में आ जाता है, जिसे ‘ऊतक तरल’ या ‘लिम्फ’ कहते हैं।

  • यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा है।

  • यह पचे हुए वसा (Fats) का परिवहन करता है।

  • यह ऊतकों से अतिरिक्त तरल को वापस रक्त में पहुँचाता है।

 

36. हिस्टामाइन (Histamine) का संबंध किस प्रक्रिया से है?

(A) पाचन

(B) श्वसन

(C) सूजन और एलर्जी (Inflammation)

(D) उत्सर्जन

उत्तर: (C) सूजन और एलर्जी (Inflammation)

व्याख्या: हिस्टामाइन एक महत्वपूर्ण रासायनिक पदार्थ है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का हिस्सा है।

  • उत्पत्ति: इसका स्राव मुख्य रूप से संयोजी ऊतक में पाई जाने वाली मास्ट कोशिकाओं (Mast Cells) और रक्त में मौजूद बेसोफिल्स (Basophils) द्वारा किया जाता है।

  • प्रक्रिया: जब शरीर किसी हानिकारक तत्व (जैसे परागकण, धूल या डंक) के संपर्क में आता है, तो मास्ट कोशिकाएं हिस्टामाइन छोड़ती हैं।

  • प्रभाव: हिस्टामाइन के कारण रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे प्रभावित स्थान पर लालिमा, सूजन और खुजली होती है। यह शरीर की एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया है ताकि संक्रमण वाली जगह पर अधिक श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC) पहुँच सकें।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पाचन: पाचन के लिए विभिन्न एंजाइम (जैसे पेप्सिन, एमाइलेज) जिम्मेदार होते हैं।

  • (B) श्वसन: यह प्रक्रिया गैसों के विनिमय से संबंधित है। हालांकि, एलर्जी के दौरान हिस्टामाइन श्वसन नलियों को सिकोड़ सकता है (जैसे अस्थमा में)।

  • (D) उत्सर्जन: यह शरीर से अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया आदि) को बाहर निकालने की प्रक्रिया है।

37. बहुकेन्द्रीय (Multinucleated) कोशिकाएं किस ऊतक में पाई जाती हैं?

(A) रेखित पेशी

(B) अरेखित पेशी

(C) तंत्रिका ऊतक

(D) शल्की उपकला

उत्तर: (A) रेखित पेशी (Striated/Skeletal Muscle)

व्याख्या: बहुकेन्द्रीय (Multinucleated) होने का अर्थ है एक ही कोशिका के भीतर एक से अधिक केंद्रकों (Nuclei) का उपस्थित होना।

  • विशेषता: रेखित पेशी की कोशिकाएं लंबी और बेलनाकार होती हैं। इन कोशिकाओं के निर्माण के दौरान कई छोटी कोशिकाएं (Myoblasts) आपस में जुड़ जाती हैं, जिससे एक लंबी कोशिका बनती है जिसमें कई केंद्रक होते हैं।

  • केंद्रक की स्थिति: इसमें केंद्रक कोशिका के बीच में न होकर परिधि (Periphery) यानी किनारों की ओर स्थित होते हैं।

  • कार्य: अधिक केंद्रक होने से मांसपेशियों को प्रोटीन संश्लेषण और ऊर्जा प्रबंधन में मदद मिलती है, जो भारी शारीरिक कार्यों के लिए आवश्यक है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) अरेखित पेशी: ये ‘एककेन्द्रीय’ (Uninucleated) होती हैं, यानी इनमें केवल एक केंद्रक होता है जो कोशिका के केंद्र में स्थित होता है।

  • (C) तंत्रिका ऊतक: एक न्यूरॉन में केवल एक ही केंद्रक होता है जो उसके ‘साइटोन’ (कोशिका काय) में पाया जाता है।

  • (D) शल्की उपकला: ये चपटी कोशिकाएं होती हैं और प्रत्येक कोशिका में केवल एक केंद्रक होता है।

38. सार्कोलेमा (Sarcolemma) क्या है?

(A) तंत्रिका कोशिका की झिल्ली

(B) पेशी कोशिका की झिल्ली

(C) हड्डी की बाहरी परत

(D) हृदय का आवरण

उत्तर: (B) पेशी कोशिका की झिल्ली

व्याख्या: सार्कोलेमा (Sarcolemma) वह विशेष झिल्ली है जो मांसपेशियों के रेशों (Muscle Fibers) को चारों ओर से घेरती है।

  • संरचना: यह कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) और उसके ऊपर स्थित एक पतली परत (Polysaccharide layer) से बनी होती है। यह मांसपेशियों के भीतर तरल पदार्थ को सुरक्षित रखती है।

  • कार्य: सार्कोलेमा का मुख्य कार्य तंत्रिका तंत्र से आने वाले विद्युत संकेतों (Impulses) को प्राप्त करना और उन्हें पूरी मांसपेशी में फैलाना है, जिससे मांसपेशी संकुचित (Contract) हो सके।

  • सार्कोप्लाज्म: सार्कोलेमा के भीतर मौजूद कोशिका द्रव्य को सार्कोप्लाज्म (Sarcoplasm) कहा जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) तंत्रिका कोशिका की झिल्ली: इसे ‘न्यूरोलेमा’ (Neurolemma) या ‘एक्सोलेमा’ (Axolemma) कहा जाता है।

  • (C) हड्डी की बाहरी परत: इसे ‘पेरिऑस्टियम’ (Periosteum) कहा जाता है।

  • (D) हृदय का आवरण: इसे ‘पेरिकार्डियम’ (Pericardium) कहा जाता है।

39. ऊतक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?

(A) रॉबर्ट हुक

(B) बाइचैट (Bichat)

(C) श्वान

(D) ल्यूवेनहॉक

उत्तर: (B) बाइचैट (Bichat)

व्याख्या: ऊतक (Tissue) शब्द का इतिहास और इससे संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:

  • सर्वप्रथम प्रयोग: फ्रांसीसी शरीर विज्ञानी मैरी फ्रेंकोइस जेवियर बाइचैट (Marie François Xavier Bichat) ने 18वीं शताब्दी के अंत में सबसे पहले ‘ऊतक’ शब्द का प्रयोग किया था।

  • ऊतक विज्ञान के जनक: बाइचैट को ‘जंतु ऊतक विज्ञान का जनक’ (Father of Histology) भी कहा जाता है। उन्होंने बिना सूक्ष्मदर्शी के अंगों का विश्लेषण किया और पाया कि शरीर विभिन्न प्रकार की झिल्लियों और परतों से बना है।

  • ऊतक की परिभाषा: समान उत्पत्ति, समान संरचना और समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहा जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) रॉबर्ट हुक: इन्होंने 1665 में सबसे पहले ‘कोशिका’ (Cell) की खोज की थी।

  • (C) श्वान (Schwann): इन्होंने ‘कोशिका सिद्धांत’ (Cell Theory) प्रतिपादित किया था।

  • (D) ल्यूवेनहॉक: इन्होंने सबसे पहले जीवित कोशिका (जैसे जीवाणु) को देखा और उसका वर्णन किया था।

महत्वपूर्ण जानकारी: ऊतकों के अध्ययन को औतकी या ऊतक विज्ञान (Histology) कहा जाता है। ‘हिस्टोलॉजी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग मेयर (Mayer) नामक वैज्ञानिक ने किया था।

40. लिगामेंट का अधिक खिंच जाना क्या कहलाता है?

(A) मोच (Sprain)

(B) फ्रैक्चर

(C) लकवा

(D) सूजन

उत्तर: (A) मोच (Sprain)

व्याख्या: लिगामेंट (स्नायु) एक रेशेदार संयोजी ऊतक है जो दो हड्डियों को आपस में जोड़ता है।

  • मोच (Sprain): जब अचानक गिरने, मुड़ने या किसी झटके के कारण लिगामेंट अपनी क्षमता से अधिक खिंच जाता है या फट जाता है, तो उस स्थिति को मोच (Sprain) कहते हैं। यह आमतौर पर टखने (Ankle), घुटने या कलाई में होती है।

  • लक्षण: मोच आने पर प्रभावित जोड़ में तेज दर्द, सूजन और नीला पड़ना (Bruising) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) फ्रैक्चर: इसका अर्थ हड्डी का टूटना या उसमें दरार आना होता है, जो लिगामेंट की चोट से अलग है।

  • (C) लकवा (Paralysis): यह तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्या है, जिसमें मांसपेशियां कार्य करना बंद कर देती हैं।

  • (D) सूजन (Inflammation/Swelling): यह मोच का एक लक्षण हो सकता है, लेकिन लिगामेंट के खिंचाव की प्रक्रिया को ‘मोच’ ही कहा जाता है।

 

41. आहार नाल में भोजन का आगे बढ़ना किस ऊतक के कारण होता है?

(A) कंकाल पेशी

(B) चिकनी पेशी (Smooth Muscle)

(C) तंत्रिका ऊतक

(D) ग्रंथि ऊतक

उत्तर: (B) चिकनी पेशी (Smooth Muscle)

व्याख्या: आहार नाल (Alimentary Canal) में भोजन का आगे बढ़ना एक विशेष प्रकार की गति के कारण होता है, जिसे क्रमाकुंचन (Peristalsis) कहते हैं।

  • अनैच्छिक गति: चूँकि हम अपनी इच्छा से भोजन को पेट के अंदर नहीं धकेल सकते, इसलिए यहाँ अनैच्छिक (Involuntary) पेशियाँ कार्य करती हैं, जिन्हें चिकनी पेशी कहा जाता है।

  • प्रक्रिया: चिकनी पेशियाँ आहार नाल की दीवारों में स्थित होती हैं। ये बारी-बारी से संकुचित और शिथिल (Contract and Relax) होती हैं, जिससे एक लहर जैसी गति उत्पन्न होती है और भोजन ग्रासनली से आमाशय और फिर आँतों तक पहुँचता है।

  • संरचना: ये कोशिकाएं लंबी और दोनों सिरों से नुकीली (Spindle-shaped) होती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) कंकाल पेशी: ये हमारी इच्छा के अधीन होती हैं और हड्डियों से जुड़ी होती हैं। ये केवल निगलने की शुरुआत (मुंह और ऊपरी गले) में मदद करती हैं, पूरी आहार नाल में नहीं।

  • (C) तंत्रिका ऊतक: ये पेशियों को गति करने के लिए केवल संकेत भेजते हैं, लेकिन भोजन को भौतिक रूप से आगे नहीं धकेलते।

  • (D) ग्रंथि ऊतक: इनका कार्य पाचक रसों और एंजाइमों का स्राव करना होता है।

42. एक्सॉन (Axon) का अंतिम सिरा क्या कहलाता है?

(A) डेंड्राइट

(B) तंत्रिका सिरा (Nerve Ending)

(C) केंद्रक

(D) कोशिका काय

उत्तर: तंत्रिका सिरा / एक्सॉन टर्मिनल

व्याख्या :-

एक तंत्रिका कोशिका (Neuron) का सबसे लंबा भाग एक्सॉन होता है, और इसके अंतिम छोर पर कई छोटी-छोटी शाखाएं निकली होती हैं।

    • संरचना: इन शाखाओं के सिरों पर फूल जैसी संरचनाएं होती हैं जिन्हें सिनैप्टिक नोब (Synaptic Knob) कहा जाता है।

    • कार्य: जब विद्युत आवेग (Electric Impulse) एक्सॉन के माध्यम से इस अंतिम सिरे तक पहुँचता है, तो ये सिरे विशेष रासायनिक पदार्थ छोड़ते हैं जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है।

    • संपर्क: ये सिरे या तो दूसरी तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइट्स से जुड़े होते हैं या फिर किसी मांसपेशी या ग्रंथि से, जहाँ ये संदेश को स्थानांतरित करते हैं।

सूचना प्रवाह का पूरा मार्ग:

डेंड्राइट (सूचना प्राप्त करना) → कोशिका काय → एक्सॉन → एक्सॉन टर्मिनल (सूचना आगे भेजना)

43. स्तरीकृत शल्की उपकला (Stratified Squamous) कहाँ पाई जाती है?

(A) त्वचा

(B) आंत

(C) वृक्क

(D) फेफड़े

उत्तर: (A) त्वचा (Skin)

व्याख्या: स्तरीकृत शल्की उपकला (Stratified Squamous Epithelium) सरल शल्की उपकला का ही एक बहुपरतीय रूप है।

  • संरचना: इसमें चपटी कोशिकाओं की कई परतें एक के ऊपर एक व्यवस्थित होती हैं। परतों की यह अधिक संख्या इसे मजबूती प्रदान करती है।

  • कार्य: इसका मुख्य कार्य शरीर के अंगों को घर्षण (Abrasion), कटने-फटने और टूट-फूट से बचाना है। चूँकि हमारी त्वचा बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में रहती है और इसमें रगड़ लगने की संभावना अधिक होती है, इसलिए प्रकृति ने इसे परतों वाली (स्तरीकृत) बनाया है ताकि निचली जीवित कोशिकाएं सुरक्षित रहें।

  • विशेषता: त्वचा की बाहरी परत में किरेटिन (Keratin) नामक प्रोटीन पाया जाता है, जो इसे जलरोधी (Waterproof) और अधिक कठोर बनाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) आंत: यहाँ स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium) पाई जाती है, जो अवशोषण में सहायक होती है।

  • (C) वृक्क: यहाँ घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium) पाई जाती है।

  • (D) फेफड़े: यहाँ सरल शल्की उपकला (Simple Squamous) पाई जाती है ताकि गैसों का विनिमय आसानी से हो सके।

44. रुधिर एक प्रकार का संयोजी ऊतक है क्योंकि:

(A) यह अंगों को जोड़ता है

(B) इसकी उत्पत्ति मेसोडर्म से होती है

(C) इसमें इंटरसेलुलर मैट्रिक्स तरल होता है

(D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

व्याख्या:

रुधिर (Blood) को एक तरल संयोजी ऊतक (Fluid Connective Tissue) माना जाता है, और इसके पीछे निम्नलिखित वैज्ञानिक कारण हैं:

  • अंगों को जोड़ना: रक्त पूरे शरीर में प्रवाहित होता है और विभिन्न अंगों के बीच पोषक तत्वों, गैसों ($O_2, CO_2$) और हार्मोन का परिवहन करके उन्हें क्रियात्मक रूप से एक-दूसरे से जोड़ता है।

  • मेसोडर्मल उत्पत्ति: भ्रूणीय विकास (Embryonic development) के दौरान, रक्त और अन्य संयोजी ऊतकों (जैसे हड्डी, कार्टिलेज) की उत्पत्ति भ्रूण की मेसोडर्म (Mesoderm) परत से होती है।

  • तरल मैट्रिक्स: अन्य संयोजी ऊतकों (जैसे अस्थि) का मैट्रिक्स ठोस होता है, लेकिन रक्त का इंटरसेलुलर मैट्रिक्स (प्लाज्मा) तरल अवस्था में होता है, जिसमें रक्त कोशिकाएं स्वतंत्र रूप से तैरती रहती हैं।

45. अस्थि मज्जा (Bone Marrow) का कार्य क्या है?

(A) ऊर्जा संचय

(B) रक्त कोशिकाओं का निर्माण

(C) हार्मोन्स का स्राव

(D) हड्डियों को जोड़ना

उत्तर: (B) रक्त कोशिकाओं का निर्माण

व्याख्या: अस्थि मज्जा (Bone Marrow) बड़ी हड्डियों के खोखले आंतरिक भाग में पाया जाने वाला एक नरम, स्पंजी ऊतक है। इसे शरीर का “रक्त कारखाना” भी कहा जाता है।

  • हेमेटोपोइसिस (Hematopoiesis): यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अस्थि मज्जा में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।

  • लाल अस्थि मज्जा (Red Bone Marrow): यह मुख्य रूप से लाल रक्त कणिकाओं (RBC), श्वेत रक्त कणिकाओं (WBC) और प्लेटलेट्स का निर्माण करता है।

  • पीला अस्थि मज्जा (Yellow Bone Marrow): इसमें मुख्य रूप से वसा (Fat) संचित रहती है, लेकिन आपातकालीन स्थिति में यह भी रक्त निर्माण में मदद कर सकता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) ऊर्जा संचय: यह कार्य मुख्य रूप से वसीय ऊतक (Adipose tissue) का है, हालांकि पीला अस्थि मज्जा भी कुछ वसा संचित करता है।

  • (C) हार्मोन्स का स्राव: यह अंतःस्रावी ग्रंथियों (जैसे पीयूष ग्रंथि, थायराइड) का मुख्य कार्य है।

  • (D) हड्डियों को जोड़ना: यह कार्य लिगामेंट (Ligament) नामक संयोजी ऊतक द्वारा किया जाता है।

46. माइक्रोकॉन्ड्रिया की संख्या किस ऊतक में सर्वाधिक होती है?

(A) हृदय पेशी

(B) उपकला ऊतक

(C) संयोजी ऊतक

(D) तंत्रिका ऊतक

उत्तर: (A) हृदय पेशी (Cardiac Muscle)

व्याख्या:

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ‘शक्ति गृह’ (Powerhouse of the cell) कहा जाता है क्योंकि यह एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट ($ATP$) के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करता है।

  • सर्वाधिक संख्या का कारण: हृदय पेशियाँ जीवन भर बिना रुके, बिना थके निरंतर धड़कती रहती हैं। इस निरंतर कार्य के लिए अत्यधिक और निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि हृदय की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या शरीर के किसी भी अन्य ऊतक की तुलना में सबसे अधिक (लगभग 5,000 प्रति कोशिका तक) होती है।

  • तुलना: कंकाल पेशियों (Skeletal muscles) में भी माइटोकॉन्ड्रिया अधिक होते हैं, लेकिन वे आराम करने पर थक जाती हैं, जबकि हृदय पेशियाँ अपनी उच्च माइटोकॉन्ड्रियल घनत्व के कारण कभी नहीं थकतीं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) उपकला ऊतक: इनका कार्य मुख्य रूप से सुरक्षा और स्राव है, जिसके लिए हृदय की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

  • (C) संयोजी ऊतक: रक्त या अस्थि जैसे ऊतकों की चयापचय दर (Metabolic rate) पेशियों की तुलना में कम होती है।

  • (D) तंत्रिका ऊतक: इनमें भी माइटोकॉन्ड्रिया काफी मात्रा में होते हैं क्योंकि संकेतों को भेजने में ऊर्जा लगती है, लेकिन यह हृदय पेशी की निरंतर यांत्रिक ऊर्जा की मांग से कम होती है।

47. कौन सा ऊतक संदेशों को विद्युत आवेग के रूप में ले जाता है?

(A) पेशीय ऊतक

(B) तंत्रिका ऊतक

(C) संयोजी ऊतक

(D) उपकला ऊतक

उत्तर: (B) तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

व्याख्या: तंत्रिका ऊतक शरीर का वह विशेष ऊतक है जो पर्यावरण से उद्दीपनों (Stimuli) को ग्रहण करता है और उन्हें पूरे शरीर में संचारित करता है।

  • विद्युत आवेग (Electrical Impulse): जब हमारी ज्ञानेंद्रियाँ (जैसे आँख, कान, त्वचा) किसी सूचना को प्राप्त करती हैं, तो तंत्रिका ऊतक उसे एक विद्युत संकेत में बदल देता है। इसे ही तंत्रिका आवेग कहते हैं। यह संकेत बहुत तीव्र गति से मस्तिष्क तक पहुँचता है।

  • कोशिका: इसकी मुख्य इकाई न्यूरॉन (Neuron) या तंत्रिका कोशिका होती है। एक न्यूरॉन में सूचना डेंड्राइट से प्रवेश करती है और एक्सॉन के माध्यम से आगे बढ़ती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पेशीय ऊतक: इसका कार्य शरीर में गति और संकुचन उत्पन्न करना है। यह तंत्रिका आवेगों के मिलने पर प्रतिक्रिया करता है।

  • (C) संयोजी ऊतक: यह विभिन्न अंगों को सहारा देता है और उन्हें आपस में जोड़ता है (जैसे रक्त, हड्डी)।

  • (D) उपकला ऊतक: यह शरीर के अंगों की बाहरी और आंतरिक परतों का निर्माण करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।

 

48. टेंडन (Tendon) की प्रकृति कैसी होती है?

(A) लचीला और कमजोर

(B) मजबूत और कम लचीला (Inelastic)

(C) तरल और पारदर्शी

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) मजबूत और कम लचीला (Inelastic)

व्याख्या: टेंडन (कंडरा) एक बहुत ही मजबूत और रेशेदार संयोजी ऊतक है।

  • मुख्य कार्य: यह मांसपेशियों (Muscles) को हड्डियों (Bones) से जोड़ने का काम करता है। जब मांसपेशियां संकुचित होती हैं, तो टेंडन ही उस बल को हड्डियों तक पहुँचाता है, जिससे शरीर में गति संभव हो पाती है।

  • संरचना: यह सफेद रेशेदार ऊतक (White Fibrous Tissue) का बना होता है, जिसमें मुख्य रूप से कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के रेशे पाए जाते हैं।

  • कम लचीलापन: इसकी मजबूती बहुत अधिक होती है, लेकिन यह लिगामेंट (Ligament) की तुलना में बहुत कम लचीला होता है। इसकी यही प्रकृति इसे हड्डियों को मजबूती से पकड़ने और खिंचाव सहने के काबिल बनाती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) लचीला: लिगामेंट (Ligament) अधिक लचीले होते हैं क्योंकि वे पीत प्रत्यास्थ रेशों (Yellow Elastic Fibers) से बने होते हैं।

  • (C) तरल: रक्त और लिम्फ तरल ऊतक होते हैं, टेंडन ठोस और रेशेदार होता है।

49. कौन सा संयोजी ऊतक अंगों के भीतर मरम्मत में सहायता करता है?

(A) एरिओलर

(B) एडिपोज

(C) अस्थि

(D) उपास्थि

उत्तर: (A) एरिओलर (Areolar Tissue)

व्याख्या: एरिओलर ऊतक शरीर में सबसे व्यापक रूप से पाया जाने वाला संयोजी ऊतक है। इसे अक्सर शरीर का ‘पैकिंग ऊतक’ भी कहा जाता है।

  • स्थान: यह त्वचा और मांसपेशियों के बीच, रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं के चारों ओर तथा अंगों के भीतर पाया जाता है।

  • मरम्मत में सहायता: अंगों के भीतर जो खाली स्थान होता है, यह उसे भरता है और आंतरिक अंगों को सहारा देता है। जब भी किसी ऊतक में चोट लगती है या क्षति होती है, तो एरिओलर ऊतक ही वहाँ कोशिकाओं के विभाजन और कोलेजन रेशों के निर्माण के माध्यम से मरम्मत (Tissue Repair) में मुख्य भूमिका निभाता है।

  • संरचना: इसमें तंतु (Fibers) और कोशिकाएं एक ढीले मैट्रिक्स में बिखरी होती हैं, जिससे यह लचीला और सहायक दोनों होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) एडिपोज (वसीय ऊतक): इसका मुख्य कार्य वसा का संचय करना और तापमान नियंत्रित करना है।

  • (C) अस्थि और (D) उपास्थि: ये कंकाल तंत्र के भाग हैं जो शरीर को ढांचा और मजबूती प्रदान करते हैं, लेकिन अंगों के भीतर सूक्ष्म मरम्मत का कार्य इनका नहीं है।

50. औतिकी (Histology) के संस्थापक कौन थे?

(A) मारसेलो मैल्पीगी

(B) बाइचैट

(C) हक्सले

(D) डार्विन

उत्तर: (A) मारसेलो मैल्पीगी (Marcello Malpighi)

व्याख्या: औतिकी (Histology) का इतिहास थोड़ा पेचीदा है क्योंकि इसमें दो अलग-अलग वैज्ञानिकों का बड़ा योगदान है:

  • संस्थापक (Founder): इतालवी चिकित्सक मारसेलो मैल्पीगी को औतिकी का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने सबसे पहले सूक्ष्मदर्शी (Microscope) का उपयोग करके जंतु ऊतकों और अंगों की आंतरिक संरचना का विस्तृत अध्ययन किया था।

  • जनक (Father): जैसा कि हमने पिछले प्रश्न में चर्चा की थी, बाइचैट (Bichat) को ‘औतिकी का जनक’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ऊतकों को वर्गीकृत किया था, हालांकि उन्होंने सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग नहीं किया था।

  • अध्ययन: औतिकी जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत ऊतकों की सूक्ष्म संरचना (Microscopic Anatomy) का अध्ययन किया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) बाइचैट: इन्होंने ‘ऊतक’ (Tissue) शब्द दिया और आधुनिक औतिकी की नींव रखी।

  • (C) हक्सले: इन्होंने जीवद्रव्य (Protoplasm) को ‘जीवन का भौतिक आधार’ कहा था।

  • (D) डार्विन: ये ‘विकासवाद के सिद्धांत’ (Theory of Evolution) के लिए जाने जाते हैं।

 

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