Plant Tissue पादप उत्तक प्रश्न

पादप ऊतक (Plant Tissue) 

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. पादप ऊतकों को मुख्य रूप से किन दो समूहों में विभाजित किया जाता है?

(A) सरल और जटिल

(B) विभाज्योतक (Meristematic) और स्थायी (Permanent)

(C) जाइलम और फ्लोएम

(D) मृदूतक और स्थूलकोण ऊतक

उत्तर: (B) विभाज्योतक और स्थायी ऊतक

व्याख्या: पादप ऊतकों (Plant Tissues) को उनकी विभाजन क्षमता के आधार पर मुख्य रूप से दो बड़े समूहों में बाँटा गया है:

  • 1. विभाज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue): ये वे ऊतक हैं जिनकी कोशिकाएं जीवन भर सक्रिय रूप से विभाजित होती रहती हैं। ये पौधों की वृद्धि (जैसे लंबाई और मोटाई) के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनके तीन प्रकार होते हैं: शीर्षस्थ, अंतर्वेशी और पार्श्व विभाज्योतक।

  • 2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue): जब विभाज्योतक ऊतक की कोशिकाएं विभाजित होने की शक्ति खो देती हैं और एक विशिष्ट कार्य करने के लिए स्थाई रूप ले लेती हैं, तो उन्हें स्थायी ऊतक कहते हैं। ये आगे दो प्रकार के होते हैं: सरल स्थायी ऊतक (जैसे पैरेन्काइमा) और जटिल स्थायी ऊतक (जैसे जाइलम और फ्लोएम)।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) सरल और जटिल: ये ‘स्थायी ऊतक’ के उप-प्रकार हैं, न कि पादप ऊतकों का मुख्य विभाजन।

  • (C) जाइलम और फ्लोएम: ये ‘जटिल स्थायी ऊतक’ के उदाहरण हैं, जो संवहन (Transport) का कार्य करते हैं।

  • (D) मृदूतक (Parenchyma) और स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma): ये ‘सरल स्थायी ऊतक’ के उदाहरण हैं।

2. पौधों की लंबाई में वृद्धि किस ऊतक के कारण होती है?

(A) पार्श्व विभाज्योतक

(B) शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem)

(C) अंतर्वेशी विभाज्योतक

(D) जाइलम

उत्तर: (B) शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem)

व्याख्या: विभाज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) कोशिकाओं का वह समूह है जिसमें विभाजन की अपार क्षमता होती है। स्थिति के आधार पर इसे तीन भागों में बाँटा गया है, जिनमें से लंबाई के लिए शीर्षस्थ विभाज्योतक उत्तरदायी है।

  • स्थान: यह ऊतक पौधों के जड़ (Root) और तने (Shoot) के शीर्ष भाग (Apex) पर पाया जाता है।

  • कार्य: इसके सक्रिय विभाजन से नई कोशिकाएं बनती हैं, जिससे जड़ और तना लंबाई में बढ़ते हैं। इसे प्राथमिक वृद्धि (Primary Growth) भी कहा जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem): यह तने और जड़ की परिधि (Girth) में पाया जाता है और उनकी मोटाई या चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता है। इसे द्वितीयक वृद्धि कहते हैं।

  • (C) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या टहनियों के पर्व (Internodes) के पास पाया जाता है। यह घास जैसे पौधों में कटे हुए हिस्सों को दोबारा बढ़ाने में मदद करता है।

  • (D) जाइलम (Xylem): यह एक जटिल स्थायी ऊतक है जिसका मुख्य कार्य जल और खनिजों का संवहन करना है, न कि वृद्धि करना।

3. तने की परिधि या मोटाई में वृद्धि किसके कारण होती है?

(A) शीर्षस्थ विभाज्योतक

(B) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem)

(C) अंतर्वेशी विभाज्योतक

(D) पैरेंकाइमा

उत्तर: (B) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem)

व्याख्या: पौधों में मोटाई या घेरे (Girth) में होने वाली वृद्धि को द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) कहा जाता है, और इसके लिए पार्श्व विभाज्योतक जिम्मेदार होता है।

  • स्थान: यह तने और जड़ के पार्श्व भाग में, यानी छाल के नीचे स्थित होता है। इसे कैम्बियम (Cambium) भी कहा जाता है।

  • कार्य: इसकी कोशिकाएं तने के समानांतर विभाजित होती हैं, जिससे तने और जड़ की चौड़ाई या मोटाई बढ़ती है। जो पौधे लकड़ीदार होते हैं, उनमें वार्षिक वलय (Annual Rings) का निर्माण भी इसी ऊतक की सक्रियता के कारण होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) शीर्षस्थ विभाज्योतक: यह केवल जड़ और तने की लंबाई बढ़ाता है।

  • (B) अंतर्वेशी विभाज्योतक: यह टहनियों के पर्व (Internodes) की लंबाई बढ़ाने और घास जैसे पौधों में कटे हुए अंगों को पुनर्जीवित करने में मदद करता है।

  • (D) पैरेंकाइमा: यह एक सरल स्थायी ऊतक है जिसका मुख्य कार्य भोजन का संचय करना है, न कि सक्रिय रूप से विभाजन करके मोटाई बढ़ाना।

4. घास के तनों के बीच में कौन सा ऊतक पाया जाता है जो उसे कटने के बाद फिर से बढ़ने में मदद करता है?

(A) पार्श्व विभाज्योतक

(B) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem)

(C) जाइलम

(D) फ्लोएम

उत्तर: (B) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem)

व्याख्या: अंतर्वेशी विभाज्योतक वास्तव में शीर्षस्थ विभाज्योतक का ही एक हिस्सा है, जो स्थाई ऊतकों के बीच में छूट जाता है।

  • स्थान: यह ऊतक पत्तियों के आधार (Base of leaves) या टहनियों के पर्व (Internodes) के दोनों ओर पाया जाता है। यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों, जैसे घास, बाँस और पुदीने में सक्रिय होता है।

  • कार्य: जब घास खाने वाले जंतु (जैसे गाय या बकरी) घास के ऊपरी हिस्से (शीर्ष) को खा जाते हैं, तो यह ऊतक ही उस कटे हुए भाग को तेजी से फिर से उगाने और तने की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पार्श्व विभाज्योतक: यह तने और जड़ की मोटाई (चौड़ाई) बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है।

  • (C) जाइलम: यह जड़ से पत्तियों तक जल और खनिजों का संवहन करता है।

  • (D) फ्लोएम: यह पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।

5. सबसे साधारण स्थायी ऊतक कौन सा है?

(A) पैरेंकाइमा (Parenchyma)

(B) कोलेनकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) फ्लोएम

उत्तर: (A) पैरेंकाइमा (Parenchyma) या मृदूतक

व्याख्या: पैरेंकाइमा पौधों में पाया जाने वाला सबसे मौलिक और साधारण स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue) है।

  • संरचना: इसकी कोशिकाएं जीवित होती हैं और इनकी कोशिका भित्ति (Cell Wall) बहुत पतली होती है, जो मुख्य रूप से सेल्युलोज की बनी होती है। कोशिकाओं के बीच में काफी खाली स्थान (Intercellular space) पाया जाता है।

  • मुख्य कार्य: इसका प्राथमिक कार्य भोजन का भंडारण (Food Storage) करना है। यह पौधों के कोमल भागों (जैसे फल का गूदा, पत्तियों का भराव) में पाया जाता है।

  • विशेष प्रकार: * क्लोरेनकाइमा: जब पैरेंकाइमा में क्लोरोफिल पाया जाता है, तो यह प्रकाश संश्लेषण करता है।

    • ऐरेनकाइमा: जलीय पौधों में यह कोशिकाओं के बीच हवा के बड़े स्थान बनाकर उन्हें तैरने (Buoyancy) में मदद करता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) कोलेनकाइमा (स्थूलकोण ऊतक): यह जीवित ऊतक है लेकिन इसके कोनों पर सेल्युलोज और पेक्टिन का जमाव होता है, जो पौधों को लचीलापन प्रदान करता है।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ोतक): यह एक मृत ऊतक है जिसकी कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण बहुत मोटी होती है। यह पौधों को मजबूती प्रदान करता है (जैसे नारियल के रेशे)।

  • (D) फ्लोएम: यह एक जटिल स्थायी ऊतक है, साधारण नहीं।

6. ‘क्लोरेनकाइमा’ (Chlorenchyma) किसका रूपांतरित रूप है?

(A) कोलेनकाइमा

(B) पैरेंकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) जाइलम

उत्तर: (B) पैरेंकाइमा (Parenchyma)

व्याख्या: पैरेंकाइमा ऊतक जब विशिष्ट परिस्थितियों में बदलता है, तो उसे क्लोरेनकाइमा कहा जाता है।

  • विशेषता: जब पैरेंकाइमा ऊतक की कोशिकाओं में क्लोरोफिल (Chlorophyll) पाया जाता है, तो उसे ‘क्लोरेनकाइमा’ या ‘हरित मृदूतक’ कहते हैं।

  • कार्य: क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण ये कोशिकाएं प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा पौधे के लिए भोजन का निर्माण करती हैं।

  • स्थान: यह मुख्य रूप से पौधों की हरी पत्तियों और कोमल हरे तनों के मेसोफिल (Mesophyll) भाग में पाया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) कोलेनकाइमा: यह पौधों को यांत्रिक सहायता और लचीलापन देता है। हालांकि इसमें कभी-कभी क्लोरोफिल हो सकता है, लेकिन ‘क्लोरेनकाइमा’ मुख्य रूप से पैरेंकाइमा का ही रूपांतरण है।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: यह मृत ऊतक है जो पौधों को मजबूती देता है। इसमें क्लोरोफिल नहीं होता।

  • (D) जाइलम: यह जल संवहन करने वाला एक जटिल ऊतक है।

7. जलीय पौधों को तैरने के लिए उत्प्लावन बल (Buoyancy) प्रदान करने वाला ऊतक है:

(A) क्लोरेनकाइमा

(B) एरेनकाइमा (Aerenchyma)

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) फ्लोएम

उत्तर: (B) एरेनकाइमा (Aerenchyma) या वायुतक

व्याख्या: एरेनकाइमा भी पैरेंकाइमा (मृदूतक) का ही एक विशेष रूपांतरित रूप है जो जलीय पौधों (Hydrophytes) में पाया जाता है।

  • संरचना: इस ऊतक की कोशिकाओं के बीच हवा से भरी बड़ी गुहिकाएं या स्थान (Large air cavities) होते हैं।

  • कार्य: इन वायु कोष्ठों में हवा भरी होने के कारण पौधा हल्का हो जाता है। यही हवा पौधों को उत्प्लावन बल (Buoyancy) प्रदान करती है, जिससे जलीय पौधे (जैसे कमल, जलकुंभी) पानी की सतह पर आसानी से तैर पाते हैं।

  • गैसीय विनिमय: यह ऊतक पौधों के आंतरिक भागों में ऑक्सीजन के संचार में भी मदद करता है, जो पानी के अंदर श्वसन के लिए आवश्यक है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) क्लोरेनकाइमा: यह प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: यह मृत और कठोर ऊतक है जो पौधों को मजबूती देता है (जैसे नारियल का छिलका)। यह तैरने में मदद नहीं करता।

  • (D) फ्लोएम: यह एक जटिल ऊतक है जो पत्तियों से भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।

8. पौधों को लचीलापन प्रदान करने वाला ऊतक कौन सा है ?

(A) पैरेंकाइमा

(B) कोलेनकाइमा (Collenchyma)

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) जाइलम

उत्तर: (B) कोलेनकाइमा (Collenchyma) या स्थूलकोण ऊतक

व्याख्या: कोलेनकाइमा पौधों में लचीलापन और यांत्रिक सहायता प्रदान करने वाला एक जीवित स्थायी ऊतक है।

  • विशेषता: इसकी कोशिकाएं लंबी होती हैं और इनके कोनों पर सेल्युलोज और पेक्टिन का जमाव होने के कारण ये किनारे से मोटी होती हैं। कोशिकाओं के बीच बहुत कम स्थान होता है।

  • कार्य: यह पौधों के विभिन्न भागों (जैसे पत्ती का डंठल और तना) को बिना टूटे लचीलापन प्रदान करता है। इसी ऊतक के कारण तेज़ हवा चलने पर भी पौधों की टहनियाँ और पत्तियाँ लचीलेपन के साथ मुड़ जाती हैं और टूटती नहीं हैं।

  • स्थान: यह मुख्य रूप से द्विबीजपत्री पौधों की एपिडर्मिस (बाहरी परत) के ठीक नीचे पाया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पैरेंकाइमा: यह मुख्य रूप से भोजन का संचय करता है और पौधों को कोमलता प्रदान करता है, लचीलापन नहीं।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: यह पौधों को कठोरता और मजबूती प्रदान करता है। यह मृत ऊतक होता है।

  • (D) जाइलम: यह एक जटिल ऊतक है जो जल का संवहन करता है।

9. नारियल के रेशेयुक्त छिलके किस ऊतक के बने होते हैं?

(A) कोलेनकाइमा

(B) पैरेंकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma)

(D) फ्लोएम

उत्तर: (C) स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma) या दृढ़ोतक

व्याख्या: स्क्लेरेनकाइमा पौधों को कठोरता और मजबूती प्रदान करने वाला मुख्य ऊतक है।

  • प्रकृति: यह एक मृत ऊतक है। परिपक्व होने पर इसकी कोशिकाओं में जीवद्रव्य (Protoplasm) खत्म हो जाता है।

  • कोशिका भित्ति: इसकी कोशिका भित्ति बहुत मोटी होती है क्योंकि इस पर लिग्निन (Lignin) नामक रासायनिक पदार्थ का जमाव होता है। लिग्निन एक प्रकार का ‘सीमेंट’ है जो कोशिकाओं को बहुत कठोर बना देता है।

  • नारियल का छिलका: नारियल का जो रेशेयुक्त बाहरी हिस्सा (Husk) होता है, वह स्क्लेरेनकाइमा तंतुओं का ही बना होता है। यही कारण है कि यह इतना सख्त और मजबूत होता है।

  • अन्य उदाहरण: बीजों और फलों के कठोर छिलके (जैसे बादाम, अखरोट) और जूट के रेशों में भी यही ऊतक पाया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) कोलेनकाइमा: यह लचीलापन देता है (जैसे कोमल टहनियों में)।

  • (B) पैरेंकाइमा: यह भोजन संचय करता है और कोमल भागों में होता है।

  • (D) फ्लोएम: यह एक संवहन ऊतक है जो भोजन का परिवहन करता है।

10. कोशिकाओं की दीवार पर ‘लिग्निन’ का जमाव किस ऊतक की विशेषता है?

(A) मृदूतक

(B) स्थूलकोण ऊतक

(C) दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma)

(D) विभाज्योतक

उत्तर: (C) दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma)

व्याख्या: लिग्निन (Lignin) एक जटिल बहुलक है जो पौधों की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है।

  • लिग्निन का कार्य: यह एक प्रकार के प्राकृतिक ‘सीमेंट’ की तरह कार्य करता है, जो कोशिका भित्ति को अत्यधिक कठोर और जलरोधी बना देता है।

  • विशेषता: दृढ़ ऊतक की कोशिकाओं में लिग्निन का जमाव इतना अधिक होता है कि कोशिका की दीवारें बहुत मोटी हो जाती हैं और कोशिका के अंदर का खाली स्थान (Lumen) लगभग समाप्त हो जाता है।

  • परिणाम: इस जमाव के कारण कोशिका के अंदर पदार्थों का आदान-प्रदान रुक जाता है, जिससे कोशिकाएं मृत हो जाती हैं। यही कारण है कि दृढ़ ऊतक पौधों को केवल यांत्रिक सहारा और मजबूती प्रदान करते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) मृदूतक (Parenchyma): इनकी दीवारें पतली होती हैं और मुख्य रूप से सेल्युलोज की बनी होती हैं।

  • (B) स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma): इनकी दीवारों के कोनों पर सेल्युलोज और पेक्टिन का जमाव होता है, लिग्निन का नहीं।

  • (D) विभाज्योतक (Meristematic): इनकी कोशिकाएं बहुत सक्रिय होती हैं और उनकी भित्ति बहुत पतली होती है ताकि विभाजन आसानी से हो सके।

11. पादपों में जल और खनिजों का संवहन कौन करता है?

(A) फ्लोएम

(B) जाइलम (Xylem)

(C) कैम्बियम

(D) कोर्टेक्स

उत्तर: (B) जाइलम (Xylem)

व्याख्या: जाइलम पौधों में पाया जाने वाला एक जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue) है, जिसे ‘जल संवहन ऊतक’ भी कहा जाता है।

  • कार्य: इसका मुख्य कार्य जड़ों द्वारा मृदा से अवशोषित जल और खनिज लवणों को पौधे के ऊपरी भागों (तने और पत्तियों) तक पहुँचाना है।

  • दिशामार्ग: जाइलम में पदार्थों का परिवहन हमेशा एकदिशीय (Unidirectional) होता है, यानी नीचे से ऊपर की ओर।

  • घटक: जाइलम चार प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है:

    1. ट्रैकीड्स (Tracheids)

    2. वाहिकाएं (Vessels)

    3. जाइलम पैरेंकाइमा (यह एकमात्र जीवित घटक है)

    4. जाइलम फाइबर (Sclerenchyma)

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) फ्लोएम: यह पत्तियों द्वारा तैयार भोजन (शर्करा) को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है। इसका परिवहन द्विदिशीय होता है।

  • (C) कैम्बियम: यह पार्श्व विभाज्योतक है जो तने की मोटाई (द्वितीयक वृद्धि) बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

  • (D) कोर्टेक्स: यह बाह्य त्वचा (Epidermis) और संवहन बंडल के बीच का हिस्सा है जो मुख्य रूप से भोजन संचय और सुरक्षा का कार्य करता है।

12. पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाने का कार्य किसका है?

(A) जाइलम

(B) फ्लोएम (Phloem)

(C) एपिडर्मिस

(D) कोलेनकाइमा

उत्तर: (B) फ्लोएम (Phloem)

व्याख्या: फ्लोएम पौधों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण जटिल स्थायी ऊतक है, जिसे ‘भोजन संवहन ऊतक’ या ‘बास्ट’ (Bast) भी कहा जाता है।

  • कार्य: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के दौरान पत्तियों में जो शर्करा (भोजन) बनता है, उसे पौधे के संचय अंगों (जड़ों, फलों) और वृद्धि वाले भागों तक पहुँचाना फ्लोएम का कार्य है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं।

  • दिशामार्ग: जाइलम के विपरीत, फ्लोएम में भोजन का परिवहन द्विदिशीय (Bidirectional) होता है। भोजन पत्तियों से नीचे जड़ों की ओर भी जा सकता है और वसंत ऋतु में जड़ों से नई कलियों की ओर ऊपर भी आ सकता है।

  • घटक: फ्लोएम भी चार प्रकार के तत्वों से बना होता है:

    1. चालनी नलिकाएं (Sieve tubes): मुख्य परिवहन मार्ग।

    2. साथी कोशिकाएं (Companion cells): चालनी नलिकाओं की गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं।

    3. फ्लोएम पैरेंकाइमा: भोजन संचय में सहायक।

    4. फ्लोएम रेशे (Phloem fibres): यह एकमात्र मृत भाग है, बाकी तीनों जीवित होते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) जाइलम: यह केवल जल और खनिजों का परिवहन करता है।

  • (C) एपिडर्मिस: यह पौधे की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत है।

  • (D) कोलेनकाइमा: यह एक सरल ऊतक है जो लचीलापन प्रदान करता है।

13. जाइलम का कौन सा घटक जीवित होता है?

(A) वाहिनिकाएँ (Tracheids)

(B) वाहिकाएँ (Vessels)

(C) जाइलम पैरेंकाइमा

(D) जाइलम फाइबर

उत्तर: (C) जाइलम पैरेंकाइमा

व्याख्या:

जाइलम एक जटिल ऊतक है जो चार अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। जाइलम की एक मुख्य विशेषता यह है कि इसका अधिकांश हिस्सा मृत होता है, लेकिन एक घटक जीवित रहता है:

  • जाइलम पैरेंकाइमा: यह जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है। इसकी कोशिका भित्ति पतली होती है और सेल्युलोज की बनी होती है। इसका मुख्य कार्य भोजन (स्टार्च) का संचय करना और पानी के पार्श्व संवहन (Sideways conduction) में मदद करना है।

  • मृत घटक: जाइलम के अन्य तीनों घटक—वाहिनिकाएँ (Tracheids), वाहिकाएँ (Vessels) और जाइलम फाइबर—परिपक्व होने पर मृत हो जाते हैं। लिग्निन के जमाव के कारण ये कठोर हो जाते हैं ताकि जल का संवहन बिना पिचके आसानी से हो सके।

जाइलम के घटकों की तुलना:

घटक प्रकृति मुख्य कार्य
वाहिनिकाएँ (Tracheids) मृत जल संवहन और यांत्रिक सहारा
वाहिकाएँ (Vessels) मृत मुख्य जल संवहन मार्ग (मुख्यतः एंजियोस्पर्म में)
जाइलम पैरेंकाइमा जीवित भोजन संचय और पार्श्व जल संवहन
जाइलम फाइबर मृत केवल यांत्रिक सहारा प्रदान करना

14. फ्लोएम में कौन सी कोशिकाएं केंद्रक विहीन होती हैं?

(A) सहचर कोशिकाएं

(B) चालनी नलिका (Sieve Tubes)

(C) फ्लोएम पैरेंकाइमा

(D) फ्लोएम फाइबर

उत्तर: (B) चालनी नलिका (Sieve Tubes)

व्याख्या:

चालनी नलिकाएं फ्लोएम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनकी संरचना बहुत ही अनोखी होती है।

  • केंद्रक विहीन (Enucleated): परिपक्व होने पर चालनी नलिका की कोशिकाओं में केंद्रक (Nucleus) नष्ट हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि भोजन (शर्करा) के प्रवाह के लिए कोशिका के भीतर अधिक स्थान मिल सके।

  • नियंत्रण: केंद्रक न होने के बावजूद ये कोशिकाएं जीवित रहती हैं। इनके कार्यों का नियंत्रण इनके बगल में स्थित सहचर कोशिकाओं (Companion cells) के केंद्रक द्वारा किया जाता है।

  • संरचना: इनकी दीवारों में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें ‘चालनी पट्टिका’ (Sieve plate) कहते हैं, जिससे भोजन एक कोशिका से दूसरी कोशिका में छनकर जाता है।

फ्लोएम के घटकों की प्रकृति:

घटक प्रकृति विशेषता
चालनी नलिका जीवित केंद्रक नहीं होता, भोजन का संवहन करती है।
सहचर कोशिकाएं जीवित केंद्रक युक्त, चालनी नलिका की मदद करती हैं।
फ्लोएम पैरेंकाइमा जीवित भोजन और अन्य पदार्थों का संचय करती है।
फ्लोएम फाइबर मृत यह एकमात्र मृत घटक है, मजबूती प्रदान करता है।

15. रंध्र (Stomata) के खुलने और बंद होने को कौन नियंत्रित करता है?

(A) एपिडर्मिस

(B) रक्षी कोशिकाएं (Guard Cells)

(C) पैरेंकाइमा

(D) मृदूतक

उत्तर: (B) रक्षी कोशिकाएं (Guard Cells)

व्याख्या: रंध्र (Stomata) पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जो गैसों के विनिमय और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) का कार्य करते हैं।

    • संरचना: प्रत्येक रंध्र दो सेम के बीज (Bean shape) के आकार की कोशिकाओं से घिरा होता है, जिन्हें रक्षी कोशिकाएं कहते हैं।

    • नियंत्रण की प्रक्रिया: * खुलना: जब इन रक्षी कोशिकाओं के भीतर पानी अंदर जाता है, तो वे फूल (Turgid) जाती हैं और बाहर की ओर खिंचती हैं, जिससे बीच का छिद्र यानी रंध्र खुल जाता है।

      • बंद होना: जब रक्षी कोशिकाओं से पानी बाहर निकल जाता है, तो वे सिकुड़ (Flaccid) जाती हैं, जिससे रंध्र बंद हो जाता है।

    • महत्व: यह प्रक्रिया पौधे को आवश्यकता से अधिक पानी के नुकसान से बचाने में मदद करती है, विशेष रूप से रात के समय या सूखे की स्थिति में।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) एपिडर्मिस: यह पौधे की सबसे बाहरी त्वचा है, रंध्र इसी परत में धंसे होते हैं।

  • (C) पैरेंकाइमा व (D) मृदूतक: ये भोजन संचय और आंतरिक भराव का कार्य करते हैं (नोट: मृदूतक, पैरेंकाइमा का ही हिंदी नाम है)।

16. मरुस्थलीय पौधों की सतह पर पाए जाने वाले जलरोधी पदार्थ को क्या कहते हैं?

(A) लिग्निन

(B) क्यूटिन (Cutin)

(C) सुबेरिन

(D) सेल्युलोज

उत्तर: (B) क्यूटिन (Cutin)

व्याख्या: मरुस्थलीय पौधों (Xerophytes) को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनमें पानी के नुकसान को रोकने के लिए विशेष अनुकूलन होते हैं।

  • क्यूटिन: यह एक मोम जैसा, जलरोधी रासायनिक पदार्थ (Waxy, waterproof substance) है।

  • क्यूटिकल: मरुस्थलीय पौधों की बाहरी त्वचा (Epidermis) पर इस क्यूटिन की एक मोटी परत जमा हो जाती है जिसे ‘क्यूटिकल’ कहते हैं।

  • कार्य: यह परत वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की दर को बहुत कम कर देती है, जिससे भीषण गर्मी में भी पौधे के अंदर का पानी सुरक्षित रहता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) लिग्निन: यह दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma) की दीवारों पर पाया जाता है जो मजबूती देता है।

  • (C) सुबेरिन: यह पुराने पेड़ों की छाल (Cork) में पाया जाता है, जो इसे हवा और पानी के लिए अभेद्य (Impervious) बनाता है।

  • (D) सेल्युलोज: यह लगभग सभी पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, लेकिन यह विशेष रूप से जलरोधी नहीं होता।

17. पुराने पेड़ों की छाल (Cork) में कौन सा रसायन पाया जाता है जो उसे गैसों और पानी के लिए अभेद्य बनाता है?

(A) सेल्युलोज

(B) सुबेरिन (Suberin)

(C) पेक्टिन

(D) स्टार्च

उत्तर: (B) सुबेरिन (Suberin)

व्याख्या: जैसे-जैसे पेड़ पुराने होते जाते हैं, उनके बाहरी सुरक्षात्मक ऊतकों में बदलाव आता है और वे छाल (Cork/Bark) का रूप ले लेते हैं।

  • सुबेरिन का कार्य: छाल की कोशिकाओं की भित्ति पर सुबेरिन नामक रासायनिक पदार्थ जमा हो जाता है। यह एक कार्बनिक पदार्थ है जो अत्यधिक जलरोधी और वायुरोधी होता है।

  • अभेद्यता: इस रसायन की उपस्थिति के कारण ही छाल गैसों और पानी के लिए अभेद्य (Impervious) हो जाती है। यह न तो पानी को बाहर निकलने देती है और न ही बाहरी संक्रमण या नमी को अंदर जाने देती है।

  • कोशिका की प्रकृति: सुबेरिन के अत्यधिक जमाव के कारण छाल की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं और बिना किसी अंतर-कोशिकीय स्थान के आपस में मजबूती से सटी रहती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) सेल्युलोज: यह पादप कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, लेकिन यह जलरोधी नहीं होता।

  • (C) पेक्टिन: यह कोलेनकाइमा (स्थूलकोण ऊतक) के कोनों पर पाया जाता है जो लचीलापन और मजबूती प्रदान करता है।

  • (D) स्टार्च: यह पौधों में संचित भोजन का एक रूप है।

18. जाइलम और फ्लोएम किस प्रकार के ऊतक के उदाहरण हैं?

(A) सरल स्थायी ऊतक

(B) जटिल स्थायी ऊतक (Complex Tissue)

(C) विभाज्योतक

(D) सुरक्षात्मक ऊतक

उत्तर: (B) जटिल स्थायी ऊतक (Complex Tissue)

व्याख्या: स्थायी ऊतकों को उनकी संरचना के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है: सरल और जटिल। जाइलम और फ्लोएम को ‘जटिल’ श्रेणी में रखा जाता है।

    • जटिल ऊतक क्यों?: सरल ऊतक (जैसे पैरेंकाइमा) एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं, लेकिन जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। ये सभी अलग-अलग कोशिकाएं मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करती हैं और एक विशिष्ट कार्य (संवहन) को पूरा करती हैं।

    • संवहन ऊतक (Vascular Tissue): इन्हें संवहन ऊतक भी कहा जाता है क्योंकि ये जल और भोजन के परिवहन का काम करते हैं। जाइलम और फ्लोएम मिलकर संवहन बंडल (Vascular Bundle) का निर्माण करते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) सरल स्थायी ऊतक: इनमें केवल एक ही प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जैसे पैरेंकाइमा, कोलेनकाइमा और स्क्लेरेनकाइमा।

  • (C) विभाज्योतक: ये सक्रिय रूप से विभाजित होने वाले ऊतक हैं जो पौधों की वृद्धि करते हैं।

  • (D) सुरक्षात्मक ऊतक: इनमें एपिडर्मिस और कॉर्क (छाल) शामिल हैं, जो पौधों को बाहरी सुरक्षा देते हैं।

19. वाहिनिकाएँ (Tracheids) किसमें पाई जाती हैं?

(A) केवल जाइलम में

(B) केवल फ्लोएम में

(C) पेशियों में

(D) त्वचा में

उत्तर: (A) केवल जाइलम में

व्याख्या: वाहिनिकाएँ (Tracheids) जाइलम ऊतक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्जीव घटक हैं।

  • संरचना: ये लंबी, नली के आकार की कोशिकाएं होती हैं जिनके सिरे नुकीले होते हैं। इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण बहुत मोटी होती है।

  • कार्य: इनका मुख्य कार्य जल और खनिजों का ऊर्ध्वाधर (Vertical) संवहन करना है। इसके साथ ही, अपनी कठोर संरचना के कारण ये पौधे को यांत्रिक सहारा (Mechanical support) भी प्रदान करती हैं।

  • उपस्थिति: ये आदिम संवहनी पौधों (जैसे फ़र्न और जिम्नोस्पर्म) में जल संवहन का मुख्य माध्यम होती हैं, जबकि आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में इनके साथ ‘वाहिकाएं’ (Vessels) भी पाई जाती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) केवल फ्लोएम में: फ्लोएम में चालनी नलिकाएं और सहचर कोशिकाएं पाई जाती हैं, वाहिनिकाएँ नहीं।

  • (C) पेशियों में: यहाँ पेशी तंतु (Muscle fibers) पाए जाते हैं जो संकुचन का कार्य करते हैं।

  • (D) त्वचा में: यहाँ उपकला ऊतक (Epithelial tissue) पाया जाता है।

20. सहचर कोशिकाएं (Companion Cells) किस ऊतक का हिस्सा हैं?

(A) जाइलम

(B) फ्लोएम

(C) मृदूतक

(D) दृढ़ ऊतक

उत्तर: (B) फ्लोएम (Phloem)

व्याख्या: सहचर कोशिकाएं (Companion Cells) फ्लोएम ऊतक का एक विशिष्ट और जीवित हिस्सा हैं, जो केवल आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में पाई जाती हैं।

  • संरचना: ये कोशिकाएं पतली भित्ति वाली होती हैं और इनमें एक बड़ा और स्पष्ट केंद्रक (Nucleus) पाया जाता है। ये कोशिकाएं हमेशा चालनी नलिकाओं (Sieve Tubes) के बगल में स्थित होती हैं।

  • कार्य: चूंकि चालनी नलिकाओं में परिपक्व होने पर केंद्रक नहीं रहता, इसलिए सहचर कोशिकाएं ही उनके कार्यों और दाब प्रवणता (Pressure gradient) को नियंत्रित करती हैं। ये भोजन (सुक्रोज) को चालनी नलिकाओं में लोड करने में मदद करती हैं।

  • संबंध: सहचर कोशिकाएं और चालनी नलिकाएं आपस में ‘प्लाज्मोडेस्मेटा’ के माध्यम से जुड़ी रहती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) जाइलम: इसमें वाहिनिकाएँ, वाहिकाएं, जाइलम पैरेंकाइमा और जाइलम फाइबर होते हैं।

  • (C) मृदूतक (Parenchyma): यह एक सरल स्थायी ऊतक है, जो स्वतंत्र रूप से भी होता है और जटिल ऊतकों के घटक के रूप में भी।

  • (D) दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma): यह मृत और कठोर ऊतक है जो पौधों को मजबूती देता है।

21. एक बीजपत्री पौधों के संवहन बंडल में क्या नहीं पाया जाता?

(A) जाइलम

(B) फ्लोएम

(C) कैम्बियम

(D) फाइबर

उत्तर: (C) कैम्बियम (Cambium)

व्याख्या: संवहन बंडल (Vascular Bundles) में जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर उन्हें दो भागों में बाँटा जाता है:

  • एकबीजपत्री (Monocots): इनके संवहन बंडल में कैम्बियम नहीं पाया जाता। इसी कारण इन्हें ‘बंद संवहन बंडल’ (Closed Vascular Bundles) कहते हैं। कैम्बियम न होने की वजह से इन पौधों में द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) नहीं होती, यानी इनका तना बहुत मोटा या लकड़ीदार नहीं होता (जैसे: मक्का, गेहूँ, घास)।

  • द्विबीजपत्री (Dicots): इनके जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम पाया जाता है। इन्हें ‘खुले संवहन बंडल’ (Open Vascular Bundles) कहते हैं। कैम्बियम की उपस्थिति के कारण ये पौधे मोटाई में वृद्धि करते हैं (जैसे: आम, नीम, बरगद)।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) जाइलम और (B) फ्लोएम: ये दोनों एकबीजपत्री पौधों के संवहन बंडल के अनिवार्य अंग हैं, क्योंकि बिना इनके जल और भोजन का संवहन संभव नहीं है।

  • (D) फाइबर: जाइलम और फ्लोएम दोनों में फाइबर (दृढ़ ऊतक) पाए जा सकते हैं, जो उन्हें यांत्रिक सहारा प्रदान करते हैं।

22. ‘फ्लोएम फाइबर’ की प्रकृति कैसी होती है?

(A) जीवित

(B) मृत

(C) लचीली

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) मृत (Dead)

व्याख्या:

फ्लोएम ऊतक चार प्रकार के घटकों से बना होता है, जिनमें से फ्लोएम फाइबर (Phloem Fibres) ही एकमात्र ऐसा घटक है जो निर्जीव या मृत होता है।

  • प्रकृति: ये फाइबर स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma) कोशिकाओं के बने होते हैं। परिपक्व होने पर ये अपना जीवद्रव्य (Protoplasm) खो देते हैं और मृत हो जाते हैं। इनकी कोशिका भित्ति बहुत मोटी और लिग्निन युक्त होती है।

  • कार्य: इनका मुख्य कार्य संवहन नहीं, बल्कि पौधे को यांत्रिक सहायता (Mechanical Support) और मजबूती प्रदान करना है।

  • व्यावसायिक महत्व: कई पौधों के फ्लोएम फाइबर का उपयोग आर्थिक रूप से किया जाता है। उदाहरण के लिए— जूट, सन (Flax) और भांग (Hemp) के रेशे वास्तव में उनके फ्लोएम फाइबर ही होते हैं।

फ्लोएम के घटकों की प्रकृति का सारांश:

फ्लोएम घटक जीवित/मृत
चालनी नलिका (Sieve Tubes) जीवित
सहचर कोशिकाएं (Companion Cells) जीवित
फ्लोएम पैरेंकाइमा जीवित
फ्लोएम फाइबर मृत

23. पौधों की बाहरी परत (Epidermis) का कार्य क्या है?

(A) वाष्पोत्सर्जन रोकना

(B) परजीवियों से रक्षा

(C) यांत्रिक चोट से बचाव

(D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

व्याख्या: एपिडर्मिस (Epidermis) पौधों के सभी अंगों (जड़, तना, पत्ती, फूल) की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत होती है। यह आमतौर पर कोशिकाओं की एक एकल परत से बनी होती है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  • सुरक्षा (Protection): यह पौधे के आंतरिक ऊतकों को यांत्रिक चोट (Mechanical Injury) और प्रतिकूल वातावरण से बचाती है।

  • परजीवियों से रक्षा: एपिडर्मिस कवक (Fungi) और अन्य हानिकारक जीवाणुओं के प्रवेश को रोककर पौधे की रक्षा करती है।

  • वाष्पोत्सर्जन पर नियंत्रण: पत्तियों की एपिडर्मिस पर ‘क्यूटिन’ की परत और रंध्र (Stomata) पाए जाते हैं, जो वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की दर को नियंत्रित करते हैं और अनावश्यक पानी की हानि को रोकते हैं। [Image showing cuticle layer over epidermis]

  • जड़ों में अवशोषण: जड़ों की एपिडर्मिस कोशिकाएं (Root hairs) मिट्टी से पानी और खनिज लवणों को अवशोषित करने में मदद करती हैं।

अन्य मुख्य बिंदु:

  1. मरुस्थलीय पौधों में यह परत अधिक मोटी और मोमी (Waxy) होती है।

  2. इसकी कोशिकाएं बिना किसी अंतर्कोशिकीय स्थान (Intercellular space) के एक निरंतर परत बनाती हैं।

24. फलों और बीजों के कठोर आवरण में कौन सा ऊतक होता है?

(A) स्क्लेराइड्स (Sclereids)

(B) पैरेंकाइमा

(C) कोलेनकाइमा

(D) जाइलम

उत्तर: (A) स्क्लेराइड्स (Sclereids)

व्याख्या: स्क्लेराइड्स वास्तव में स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ ऊतक) का ही एक विशेष प्रकार हैं। इन्हें ‘स्टोन सेल्स’ (Stone Cells) भी कहा जाता है।

  • संरचना: ये कोशिकाएं बहुत छोटी, गोल या अनियमित आकार की होती हैं। इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमाव के कारण बहुत अधिक मोटी और सख्त होती है, जिससे कोशिका के अंदर का स्थान (Lumen) लगभग खत्म हो जाता है।

  • कार्य: इनका मुख्य कार्य पौधों के अंगों को अत्यधिक कठोरता और यांत्रिक मजबूती प्रदान करना है।

  • उपस्थिति: ये मुख्य रूप से फलों के कठोर आवरण (जैसे अखरोट, बादाम और नारियल का खोल) तथा बीजों के सख्त छिलकों में पाए जाते हैं। नाशपाती (Pear) जैसे फलों को खाने पर जो किरकिराहट महसूस होती है, वह भी इन्हीं स्क्लेराइड्स के कारण होती है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) पैरेंकाइमा: यह कोमल होता है और भोजन संचय करता है।

  • (C) कोलेनकाइमा: यह लचीलापन प्रदान करता है, कठोरता नहीं।

  • (D) जाइलम: यह जल का संवहन करता है।

25. वह ऊतक जो पत्तियों के किनारों पर पाया जाता है और लचीलापन देता है:

(A) कोलेनकाइमा

(B) पैरेंकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) विभाज्योतक

उत्तर: (A) कोलेनकाइमा (Collenchyma) या स्थूलकोण ऊतक

व्याख्या: कोलेनकाइमा पौधों के उन हिस्सों में पाया जाता है जहाँ लचीलेपन के साथ-साथ मजबूती की आवश्यकता होती है।

  • स्थान: यह मुख्य रूप से पत्तियों के डंठल (Petiole), पत्तियों के किनारों और नए हरे तनों के एपिडर्मिस के नीचे पाया जाता है।

  • लचीलापन (Flexibility): यह ऊतक पौधों के अंगों को टूटने से बचाता है और उन्हें आसानी से मुड़ने (Bending) की सुविधा देता है। जब तेज़ हवा चलती है, तो पत्तियाँ और पतली टहनियाँ इसी ऊतक के कारण बिना टूटे झूल सकती हैं।

  • संरचनात्मक विशेषता: इसकी कोशिकाएं जीवित होती हैं और इनके कोनों पर पेक्टिन और सेल्युलोज का भारी जमाव होता है, जो इन्हें यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) पैरेंकाइमा: यह कोमल अंगों में भराव और भोजन संचय का कार्य करता है।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: यह मृत ऊतक है जो कठोरता देता है, लचीलापन नहीं।

  • (D) विभाज्योतक: यह केवल कोशिका विभाजन के द्वारा वृद्धि के लिए उत्तरदायी है।

26. विभाज्योतक कोशिकाओं में क्या अनुपस्थित होता है?

(A) कोशिका द्रव्य

(B) रसधानी (Vacuole)

(C) केंद्रक

(D) कोशिका भित्ति

उत्तर: (B) रसधानी (Vacuole)

व्याख्या: विभाज्योतक (Meristematic tissue) की कोशिकाएं बहुत अधिक सक्रिय होती हैं और लगातार विभाजित होती रहती हैं। उनकी संरचना सामान्य पादप कोशिकाओं से थोड़ी भिन्न होती है:

  • रसधानी की अनुपस्थिति: सामान्य परिपक्व पादप कोशिकाओं में एक बड़ी रसधानी होती है जो भोजन संचय और कोशिका को मजबूती (Turgidity) देने का काम करती है। लेकिन विभाज्योतक कोशिकाओं को भोजन संचय करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि उनका पूरा ध्यान केवल कोशिका विभाजन पर होता है। बड़ी रसधानियाँ विभाजन की प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं, इसलिए इनमें रसधानियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं या बहुत छोटी होती हैं।

  • कोशिका द्रव्य (Cytoplasm): इनमें बहुत सघन (Dense) कोशिका द्रव्य पाया जाता है ताकि चयापचय (Metabolism) की क्रियाएँ तेज़ हो सकें।

  • केंद्रक (Nucleus): विभाजन को नियंत्रित करने के लिए इनमें एक बड़ा और स्पष्ट केंद्रक होता है।

  • कोशिका भित्ति: इनकी कोशिका भित्ति बहुत पतली और सेल्युलोज की बनी होती है ताकि कोशिका का विस्तार और विभाजन आसानी से हो सके।

विभाज्योतक की मुख्य विशेषताएं:

  1. कोशिकाएं जीवित और सक्रिय होती हैं।

  2. अंतर्कोशिकीय स्थान (Intercellular space) नहीं पाया जाता।

  3. ये पौधे के वृद्धि वाले भागों (जैसे जड़ और तने के शीर्ष) में पाई जाती हैं।

27. विभेदीकरण (Differentiation) की प्रक्रिया से क्या बनता है?

(A) विभाज्योतक

(B) स्थायी ऊतक

(C) कोशिका विभाजन

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)

व्याख्या: विभेदीकरण (Differentiation) वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा विभाज्योतक (Meristematic) कोशिकाएं अपनी विभाजित होने की क्षमता को धीरे-धीरे खो देती हैं और एक विशिष्ट कार्य करने के लिए एक निश्चित रूप, आकार और मोटाई प्राप्त कर लेती हैं।

  • प्रक्रिया: जब विभाज्योतक कोशिकाएं (जो लगातार विभाजित होती हैं) परिपक्व हो जाती हैं, तो वे अलग-अलग प्रकार के कार्यों (जैसे प्रकाश संश्लेषण, संवहन या सुरक्षा) के लिए विशिष्ट हो जाती हैं।

  • परिणाम: इस प्रक्रिया के अंत में स्थायी ऊतकों (जैसे पैरेंकाइमा, जाइलम, फ्लोएम आदि) का निर्माण होता है।

मुख्य बिंदु:

  • विभाज्योतक: ये वे कोशिकाएं हैं जो अभी ‘विभेदित’ नहीं हुई हैं और केवल विभाजन का कार्य करती हैं।

  • कोशिका विभाजन: यह वह क्रिया है जिससे कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है, जबकि विभेदीकरण से कोशिकाओं के कार्यों और प्रकारों में विविधता आती है।

28. लकड़ी (Wood) मुख्य रूप से क्या है?

(A) प्राथमिक फ्लोएम

(B) द्वितीयक जाइलम (Secondary Xylem)

(C) प्राथमिक जाइलम

(D) कोर्टेक्स

उत्तर: (B) द्वितीयक जाइलम (Secondary Xylem)

व्याख्या: जब हम किसी पेड़ की ‘लकड़ी’ की बात करते हैं, तो वनस्पति विज्ञान (Botany) की दृष्टि से वह वास्तव में द्वितीयक जाइलम ही होता है।

  • निर्माण प्रक्रिया: द्विबीजपत्री पौधों (Dicots) और जिम्नोस्पर्म में ‘कैम्बियम’ (Cambium) नामक ऊतक पाया जाता है। जब पेड़ पुराना होता है, तो यह कैम्बियम सक्रिय होकर अंदर की ओर नई कोशिकाएं बनाना शुरू कर देता है। अंदर की ओर बनने वाले इस नए ऊतक को ही द्वितीयक जाइलम कहते हैं।

  • लकड़ी का बनना: जैसे-जैसे समय बीतता है, पुराने जाइलम की कोशिकाएं मृत हो जाती हैं और उनमें लिग्निन, रेजिन और टैनिन जैसे पदार्थ जमा हो जाते हैं। यही जमाव इसे कठोर और मजबूत बना देता है, जिसे हम लकड़ी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

  • वार्षिक वलय (Annual Rings): पेड़ के तने को काटने पर जो घेरे दिखाई देते हैं, वे भी द्वितीयक जाइलम की अलग-अलग मौसमों में हुई वृद्धि को दर्शाते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) प्राथमिक फ्लोएम: यह पौधे की शुरुआती वृद्धि के दौरान बनता है और तने के बाहरी हिस्से की ओर धकेल दिया जाता है।

  • (C) प्राथमिक जाइलम: यह पौधे के बिल्कुल केंद्र (Pith) के पास होता है और बहुत कम मात्रा में होता है।

  • (D) कोर्टेक्स: यह तने की बाहरी परत (एपिडर्मिस) और संवहन ऊतकों के बीच का हिस्सा है, जो लकड़ी नहीं बनाता।

29. फ्लोएम का कौन सा घटक भोजन का भंडारण करता है?

(A) चालनी नलिका

(B) सहचर कोशिका

(C) फ्लोएम पैरेंकाइमा

(D) फ्लोएम फाइबर

उत्तर: (C) फ्लोएम पैरेंकाइमा (Phloem Parenchyma)

व्याख्या: फ्लोएम पैरेंकाइमा, फ्लोएम का एक जीवित और महत्वपूर्ण घटक है, जिसका मुख्य कार्य भंडारण से संबंधित है।

  • भोजन का भंडारण: यह ऊतक मुख्य रूप से स्टार्च, वसा (Fats) और अन्य कार्बनिक पदार्थों (जैसे रेजिन और लैटेक्स) को संचित या स्टोर करने का कार्य करता है।

  • पार्श्व संवहन: यह भोजन के पार्श्व संवहन (Lateral conduction) में भी मदद करता है, यानी भोजन को तने या जड़ की चौड़ाई में पहुँचाने का कार्य करता है।

  • उपस्थिति: यह एकबीजपत्री (Monocots) पौधों के फ्लोएम में सामान्यतः अनुपस्थित होता है, जबकि द्विबीजपत्री पौधों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) चालनी नलिका (Sieve Tube): इसका मुख्य कार्य भोजन का परिवहन (Transport) करना है, भंडारण नहीं।

  • (B) सहचर कोशिका (Companion Cell): यह चालनी नलिकाओं के कामकाज और उनके भीतर दाब (Pressure) को नियंत्रित करती है।

  • (D) फ्लोएम फाइबर: यह एक मृत ऊतक है जो केवल यांत्रिक मजबूती प्रदान करता है।

30. तने के कोनों पर सेल्युलोज और पेक्टिन का जमाव किसमें होता है?

(A) कोलेनकाइमा

(B) पैरेंकाइमा

(C) जाइलम

(D) फ्लोएम

उत्तर: (A) कोलेनकाइमा (Collenchyma) या स्थूलकोण ऊतक

व्याख्या: कोलेनकाइमा ऊतक की सबसे बड़ी पहचान ही इसके कोनों पर होने वाला जमाव है।

  • जमाव (Deposition): इस ऊतक की कोशिकाओं के कोनों पर सेल्युलोज (Cellulose) और पेक्टिन (Pectin) का अनियमित रूप से भारी जमाव होता है। पेक्टिन एक ऐसा पदार्थ है जो कोशिकाओं को आपस में जोड़ने वाले ‘गोंद’ की तरह काम करता है।

  • परिणाम: इस जमाव के कारण कोशिकाओं के बीच का खाली स्थान (Intercellular space) बहुत कम या खत्म हो जाता है। यही जमाव पौधे के कोमल अंगों (जैसे पत्तियों के डंठल और नए तने) को मजबूती के साथ-साथ लचीलापन (Flexibility) भी प्रदान करता है।

  • जीवित प्रकृति: कोलेनकाइमा कोशिकाएं जीवित होती हैं और इनमें क्लोरोप्लास्ट भी हो सकता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) पैरेंकाइमा: इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है और केवल सेल्युलोज की बनी होती है, कोनों पर कोई अतिरिक्त जमाव नहीं होता।

  • (C) जाइलम और (D) फ्लोएम: ये जटिल ऊतक हैं। जाइलम में मुख्य रूप से लिग्निन का जमाव होता है, पेक्टिन का नहीं।

31. चालनी नलिकाओं में भोजन का परिवहन किस दिशा में होता है?

(A) केवल नीचे की ओर

(B) केवल ऊपर की ओर

(C) दोनों दिशाओं में (Bi-directional)

(D) केवल एक दिशा में

उत्तर: (C) दोनों दिशाओं में (Bi-directional)

व्याख्या: फ्लोएम (Phloem) की चालनी नलिकाओं में भोजन (मुख्य रूप से सुक्रोज) का परिवहन द्विदिशीय होता है, जिसे ‘स्थानांतरण’ (Translocation) कहा जाता है।

  • बहुदिशीय प्रवाह: पौधे में भोजन उस स्थान से चलता है जहाँ वह बनता है (Source – जैसे पत्तियाँ) और उस स्थान की ओर जाता है जहाँ उसकी आवश्यकता होती है (Sink – जैसे जड़ें, फल या नई कलियाँ)।

  • ऊपर और नीचे:

    • नीचे की ओर: सामान्यतः गर्मियों और वर्षा ऋतु में पत्तियों में बना भोजन नीचे की ओर जड़ों और भंडारण अंगों (जैसे आलू) की ओर जाता है।

    • ऊपर की ओर: वसंत ऋतु में, जब नई कलियाँ खिल रही होती हैं, तब जड़ों में जमा भोजन ऊपर की ओर नई शाखाओं और कलियों की ओर भेजा जाता है।

जाइलम के साथ तुलना: इसके विपरीत, जाइलम में पानी और खनिजों का परिवहन हमेशा एकदिशीय (Unidirectional) होता है—केवल जड़ों से ऊपर की ओर।

32. पौधों में भोजन का संचय सामान्यतः किस रूप में होता है?

(A) ग्लूकोज

(B) ग्लाइकोजन

(C) स्टार्च (Manda)

(D) वसा

उत्तर: (C) स्टार्च (Manda) या मंड

व्याख्या: पौधों में भोजन के बनने, परिवहन और संचय की प्रक्रिया अलग-अलग रूपों में होती है:

  • निर्माण (Production): प्रकाश संश्लेषण के दौरान पौधे सबसे पहले ग्लूकोज (सरल शर्करा) बनाते हैं।

  • परिवहन (Transport): पौधे के एक भाग से दूसरे भाग (फ्लोएम द्वारा) तक भोजन सुक्रोज के रूप में यात्रा करता है।

  • संचय (Storage): जब भोजन को भविष्य के लिए जमा करना होता है, तो ग्लूकोज की कई इकाइयाँ मिलकर एक जटिल कार्बोहाइड्रेट बनाती हैं जिसे स्टार्च कहते हैं। पौधे मुख्य रूप से अपनी जड़ों (जैसे गाजर), तनों (जैसे आलू) और बीजों (जैसे चावल, गेहूँ) में इसी रूप में भोजन संचित करते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) ग्लूकोज: यह ऊर्जा का तत्काल स्रोत है, लेकिन संचय के लिए उपयुक्त नहीं क्योंकि यह पानी में बहुत जल्दी घुल जाता है।

  • (B) ग्लाइकोजन: यह जंतुओं (Humans & Animals) में भोजन संचय का रूप है, जो हमारे यकृत (Liver) और मांसपेशियों में जमा होता है।

  • (D) वसा: कुछ बीजों (जैसे मूंगफली, सरसों) में ऊर्जा वसा के रूप में भी संचित होती है, लेकिन अधिकांश पादप जगत में ‘स्टार्च’ ही मुख्य संचित भोजन है।

33. पौधों में गैसों का विनिमय (Exchange) किसके द्वारा होता है?

(A) क्यूटिकल

(B) रंध्र (Stomata)

(C) जाइलम

(D) फ्लोएम

उत्तर: (B) रंध्र (Stomata)

व्याख्या:

पौधों में गैसों का विनिमय मुख्य रूप से पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों द्वारा होता है, जिन्हें ‘रंध्र’ या ‘स्टोमेटा’ कहते हैं।

  • गैसों का आदान-प्रदान: प्रकाश संश्लेषण के दौरान पौधे इन रंध्रों के माध्यम से वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड  अंदर लेते हैं और ऑक्सीजन  बाहर छोड़ते हैं। श्वसन (Respiration) के दौरान यह प्रक्रिया इसके विपरीत होती है।

  • वाष्पोत्सर्जन: गैसों के विनिमय के साथ-साथ, रंध्रों के माध्यम से ही अतिरिक्त जल वाष्प बनकर बाहर निकलता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहते हैं।

  • वात-रंध्र (Lenticels): ध्यान रहे कि बड़े काष्ठीय पेड़ों के तनों में गैसों का विनिमय वात-रंध्रों (Lenticels) के माध्यम से होता है, लेकिन अधिकांश विनिमय पत्तियों के रंध्रों द्वारा ही संपन्न होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) क्यूटिकल: यह जलरोधी परत है जो पानी के नुकसान को कम करती है, यह गैसों के विनिमय में बाधा डालती है।

  • (C) जाइलम: यह जल का संवहन करता है।

  • (D) फ्लोएम: यह भोजन का संवहन करता है।

34. वार्षिक वलय (Annual Rings) को गिनकर किसकी गणना की जा सकती है?

(A) पौधे की लंबाई

(B) पौधे की आयु

(C) पौधे का वजन

(D) पत्तियों की संख्या

उत्तर: (B) पौधे की आयु (Age of the plant)

व्याख्या: पुराने पेड़ों के तने के क्रॉस-सेक्शन (कटे हुए हिस्से) में संकेंद्रित वृत्त या घेरे दिखाई देते हैं, जिन्हें वार्षिक वलय (Annual Rings) कहा जाता है।

  • निर्माण: ये वलय द्वितीयक जाइलम के कारण बनते हैं। एक वर्ष में पेड़ दो प्रकार की लकड़ी बनाता है:

    1. वसंत काष्ठ (Spring wood): वसंत ऋतु में कैम्बियम अधिक सक्रिय होता है और चौड़ी वाहिकाओं वाली हल्की लकड़ी बनाता है।

    2. शरद काष्ठ (Autumn wood): सर्दियों/पतझड़ में कैम्बियम कम सक्रिय होता है और संकरी वाहिकाओं वाली गहरी और सघन लकड़ी बनाता है।

  • गणना: इन दोनों परतों (हल्की और गहरी) को मिलाकर एक ‘वार्षिक वलय’ बनता है। जितने वलय होते हैं, पेड़ की आयु उतने ही वर्ष मानी जाती है।

  • विज्ञान: वार्षिक वलयों को गिनकर वृक्षों की आयु ज्ञात करने के विज्ञान को डेन्ड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology) कहते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पौधे की लंबाई: इसे वलयों से नहीं मापा जा सकता।

  • (C) पौधे का वजन: यह उसकी सघनता और नमी पर निर्भर करता है।

  • (D) पत्तियों की संख्या: यह हर मौसम में बदलती रहती है और इसका तने के घेरों से सीधा संबंध नहीं होता।

35. कौन सा ऊतक मृत कोशिकाओं से बना है?

(A) पैरेंकाइमा

(B) कोलेनकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) एरेनकाइमा

उत्तर: (C) स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma) या दृढ़ ऊतक

व्याख्या: पादप ऊतकों में स्क्लेरेनकाइमा ही वह मुख्य स्थायी ऊतक है जिसकी कोशिकाएं परिपक्व होने पर मृत हो जाती हैं।

  • मृत होने का कारण: इन कोशिकाओं की दीवारों पर लिग्निन (Lignin) नामक पदार्थ का बहुत मोटा जमाव होता है। यह जमाव इतना सघन होता है कि कोशिका के भीतर जीवद्रव्य (Protoplasm) खत्म हो जाता है और कोशिका के अंदर कोई खाली जगह नहीं बचती।

  • विशेषता: चूंकि ये कोशिकाएं मृत होती हैं, इसलिए इनमें केंद्रक या कोशिका द्रव्य नहीं पाया जाता। इनका पूरा ढांचा केवल पौधे को यांत्रिक मजबूती (Mechanical Strength) प्रदान करने के लिए होता है।

  • उदाहरण: नारियल का रेशा, फलों के कठोर छिलके और जूट के रेशे इसी ऊतक के बने होते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पैरेंकाइमा: यह एक जीवित ऊतक है जिसकी कोशिका भित्ति पतली होती है।

  • (B) कोलेनकाइमा: यह भी एक जीवित ऊतक है जो लचीलापन देता है।

  • (D) एरेनकाइमा: यह पैरेंकाइमा का ही एक रूप है जिसमें हवा के कोष्ठ होते हैं, यह भी जीवित होता है।

36. जाइलम की वाहिकाएँ (Vessels) किसमें पाई जाती हैं?

(A) केवल आवृतबीजी (Angiosperms) में

(B) अनावृतबीजी (Gymnosperms) में

(C) टेरिडोफाइटा में

(D) शैवाल में

उत्तर: (A) केवल आवृतबीजी (Angiosperms) में

व्याख्या: जाइलम वाहिकाएं (Vessels) जाइलम ऊतक का सबसे उन्नत और कुशल जल-संवहन घटक हैं।

  • मुख्य विशेषता: वाहिकाएं लंबी, बेलनाकार और नली जैसी संरचनाएं होती हैं जो एक के ऊपर एक जुड़कर एक निरंतर पाइपलाइन की तरह काम करती हैं।

  • उपस्थिति: ये आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों (फूलों वाले पौधों) की मुख्य विशेषता हैं। अधिकांश अनावृतबीजी (Gymnosperms जैसे – चीड़, देवदार) और टेरिडोफाइटा (जैसे – फर्न) में वाहिकाएं नहीं पाई जाती हैं; उनमें जल संवहन केवल वाहिनिकाओं (Tracheids) द्वारा होता है।

  • अपवाद: कुछ उन्नत अनावृतबीजी पौधों (जैसे Gnetum) में वाहिकाएं पाई जाती हैं, लेकिन सामान्यतः यह आवृतबीजी पौधों का ही लक्षण माना जाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) अनावृतबीजी (Gymnosperms): इनमें जाइलम में वाहिकाओं का अभाव होता है (केवल वाहिनिकाएँ होती हैं)।

  • (C) टेरिडोफाइटा: इनमें भी वाहिकाएं नहीं पाई जातीं, ये शुरुआती संवहनी पौधे हैं।

  • (D) शैवाल (Algae): इनमें तो जाइलम और फ्लोएम (संवहन ऊतक) होते ही नहीं हैं।

37. पौधों में लचीलापन देने वाला पेक्टिन जमाव कहाँ पाया जाता है?

(A) पैरेंकाइमा की भित्ति पर

(B) कोलेनकाइमा के कोनों पर

(C) स्क्लेरेनकाइमा के बीच

(D) जाइलम में

उत्तर: (B) कोलेनकाइमा के कोनों पर

व्याख्या: कोलेनकाइमा (स्थूलकोण ऊतक) की सबसे मुख्य पहचान ही इसकी कोशिका भित्ति पर होने वाला विशिष्ट जमाव है।

  • जमाव का स्थान: इस ऊतक की कोशिकाओं के कोनों (Corners) पर सेल्युलोज और पेक्टिन (Pectin) का भारी जमाव पाया जाता है।

  • लचीलापन और सहारा: पेक्टिन एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो कोशिका भित्ति को मजबूती तो देता ही है, साथ ही उसे लचीला (Flexible) भी बनाए रखता है। इसी कारण पौधे की टहनियाँ और पत्तियाँ तेज़ हवा में बिना टूटे आसानी से मुड़ सकती हैं।

  • कोशिका की प्रकृति: ये कोशिकाएं जीवित होती हैं और अक्सर लंबी होती हैं। इनके कोनों पर जमाव के कारण अंतर-कोशिकीय स्थान (Intercellular space) बहुत कम या नहीं के बराबर होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पैरेंकाइमा: इसकी भित्ति बहुत पतली होती है और केवल सेल्युलोज की बनी होती है। इसमें पेक्टिन का जमाव नहीं होता।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: इसमें पेक्टिन के बजाय लिग्निन का जमाव होता है, जो इसे कठोर बनाता है, लचीला नहीं।

  • (D) जाइलम: यह एक जटिल ऊतक है जिसकी वाहिकाओं में भी लिग्निन पाया जाता है।

38. बास्ट फाइबर (Bast Fibers) किसे कहते हैं?

(A) जाइलम फाइबर

(B) फ्लोएम फाइबर

(C) कोलेनकाइमा

(D) पैरेंकाइमा

उत्तर: (B) फ्लोएम फाइबर (Phloem Fibres)

व्याख्या: फ्लोएम फाइबर को ही व्यावसायिक और वैज्ञानिक शब्दावली में ‘बास्ट फाइबर’ (Bast Fibres) कहा जाता है।

  • प्रकृति: ये फाइबर स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma) कोशिकाओं के बने होते हैं। परिपक्व होने पर ये मृत हो जाते हैं और इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण बहुत मजबूत हो जाती है।

  • व्यावसायिक महत्व: बास्ट फाइबर का उपयोग कपड़ा उद्योग और रस्सी बनाने में बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है।

    • उदाहरण: जूट (Jute), सन (Flax), और भांग (Hemp) के जो रेशे हम देखते हैं, वे वास्तव में उन पौधों के ‘फ्लोएम फाइबर’ या ‘बास्ट फाइबर’ ही होते हैं।

  • कार्य: पौधे में इनका मुख्य कार्य तने को यांत्रिक सहारा देना और बाहरी दबाव से बचाना है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) जाइलम फाइबर: इन्हें ‘काष्ठ फाइबर’ (Wood Fibres) कहा जाता है, बास्ट फाइबर नहीं।

  • (C) कोलेनकाइमा: यह जीवित ऊतक है जो लचीलापन देता है, इससे औद्योगिक रेशे प्राप्त नहीं होते।

  • (D) पैरेंकाइमा: यह कोमल ऊतक है जो मुख्य रूप से भोजन संचय का कार्य करता है।

39. रक्षी कोशिकाओं का कार्य है ? 

(A) स्टोमेटा को खोलना 

(B) स्टोमेटा की सुरक्षा करना 

(C) स्टोमेटा का निर्माण करना 

(D) उपरोक्त सभी 

उत्तर: (A) स्टोमेटा को खोलना

व्याख्या: रक्षी कोशिकाएं (Guard Cells) विशेष प्रकार की एपिडर्मल कोशिकाएं होती हैं जो प्रत्येक रंध्र (Stoma) को घेरे रहती हैं। इनका मुख्य कार्य रंध्रों के खुलने और बंद होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है।

    • कार्यविधि: जब रक्षी कोशिकाओं में पानी अंदर जाता है, तो वे फूल जाती हैं और मुड़ जाती हैं, जिससे बीच का छिद्र (स्टोमेटा) खुल जाता है। इसके विपरीत, जब वे पानी खो देती हैं, तो वे सिकुड़ जाती हैं और छिद्र बंद हो जाता है।

  • आकार: द्विबीजपत्री पौधों में इनका आकार सेम के बीज (Bean shaped) जैसा होता है, जबकि घास या एकबीजपत्री पौधों में ये डंबल (Dumbbell) के आकार की होती हैं।

  • विशेषता: अन्य एपिडर्मल कोशिकाओं के विपरीत, रक्षी कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है, जो उन्हें प्रकाश संश्लेषण करने में सक्षम बनाता है।

विकल्प (B) और (C) क्यों नहीं?

  • यद्यपि ये रंध्र को घेरे रहती हैं, लेकिन इनका जैविक ‘कार्य’ सुरक्षा करना नहीं बल्कि गैसों के विनिमय के लिए द्वार का काम करना है।

  • स्टोमेटा का ‘निर्माण’ कोशिका विभाजन के दौरान प्रारंभिक ऊतकों द्वारा होता है, रक्षी कोशिकाएं स्वयं स्टोमेटा को नहीं बनातीं, बल्कि उसका हिस्सा होती हैं।

40. शीर्षस्थ विभाज्योतक कहाँ पाया जाता है?

(A) जड़ों के सिरों पर

(B) तने के अग्र भाग पर

(C) कलिकाओं में

(D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

व्याख्या: शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem) पौधे के उन भागों में पाया जाता है जहाँ वृद्धि सबसे अधिक और निरंतर होती है। इसे ‘शीर्षस्थ’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अंगों के शीर्ष या अग्र भाग (Apex) पर स्थित होता है।

  • जड़ों के सिरों पर (Root Apex): यह जड़ों की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है, जिससे जड़ें जमीन की गहराई में जा सकें।

  • तने के अग्र भाग पर (Shoot Apex): यह मुख्य तने और शाखाओं की लंबाई बढ़ाता है, जिससे पौधा ऊँचाई प्राप्त करता है।

  • कलिकाओं में (Buds): यह नई पत्तियों और शाखाओं के विकास के लिए जिम्मेदार होता है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. प्राथमिक वृद्धि: शीर्षस्थ विभाज्योतक के कारण होने वाली वृद्धि को ‘प्राथमिक वृद्धि’ कहते हैं। इससे पौधे की लंबाई बढ़ती है।

  2. कोशिका विभाजन: यहाँ की कोशिकाएं अत्यधिक सक्रिय होती हैं और जीवनभर विभाजित होती रहती हैं।

41. मृदूतक (Parenchyma) की कोशिका भित्ति बनी होती है:

(A) लिग्निन की

(B) सुबेरिन की

(C) सेल्युलोज की

(D) काइटिन की

उत्तर: (C) सेल्युलोज की

व्याख्या: मृदूतक (Parenchyma) पौधों में पाया जाने वाला सबसे सरल और सबसे अधिक मात्रा में मिलने वाला स्थायी ऊतक है।

  • कोशिका भित्ति: इसकी कोशिका भित्ति बहुत पतली होती है और मुख्य रूप से सेल्युलोज की बनी होती है। इसमें लिग्निन या सुबेरिन जैसे कठोर पदार्थों का जमाव नहीं होता।

  • कोशिका की प्रकृति: ये कोशिकाएं हमेशा जीवित होती हैं। इनमें एक बड़ा केंद्रक और सघन कोशिका द्रव्य पाया जाता है।

  • संरचना: इन कोशिकाओं के बीच काफी अंतर्कोशिकीय स्थान (Intercellular space) पाया जाता है, जिससे गैसों का आदान-प्रदान और पदार्थों का संचय आसानी से हो सके।

  • कार्य: इनका मुख्य कार्य भोजन का संचय (Storage) करना और पौधे के कोमल अंगों को आधार प्रदान करना है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) लिग्निन की: यह स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ ऊतक) और जाइलम में पाया जाता है, जो कोशिकाओं को मृत और कठोर बनाता है।

  • (B) सुबेरिन की: यह कॉर्क (छाल) की कोशिकाओं में पाया जाता है, जो उन्हें जलरोधी बनाता है।

  • (D) काइटिन की: यह कवकों (Fungi) की कोशिका भित्ति और कीटों के बाहरी कंकाल में पाया जाता है, पौधों में नहीं।

42. कॉर्क कैम्बियम (Cork Cambium) किस प्रकार का ऊतक है ?

(A) प्राथमिक विभाज्योतक

(B) द्वितीयक विभाज्योतक

(C) स्थायी ऊतक

(D) जटिल ऊतक

उत्तर: (B) द्वितीयक विभाज्योतक (Secondary Meristem)

व्याख्या: कॉर्क कैम्बियम (जिसे ‘फेलोजन’ भी कहा जाता है) एक विशिष्ट प्रकार का विभाज्योतक ऊतक है जो पौधे के जीवन में बाद के चरणों में विकसित होता है।

  • द्वितीयक विभाज्योतक क्यों?: प्राथमिक विभाज्योतक (जैसे शीर्षस्थ विभाज्योतक) पौधे की शुरुआत से मौजूद होते हैं और लंबाई बढ़ाते हैं। इसके विपरीत, कॉर्क कैम्बियम स्थायी ऊतकों से विकसित होता है जब पौधे को मोटाई में बढ़ने (द्वितीयक वृद्धि) की आवश्यकता होती है।

  • पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem): यह पार्श्व दिशा में स्थित होता है और तने एवं जड़ की चौड़ाई या घेरा (Girth) बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

  • कार्य: कॉर्क कैम्बियम बाहर की ओर ‘कॉर्क’ (छाल) का निर्माण करता है और अंदर की ओर ‘द्वितीयक कोर्टेक्स’ बनाता है। यह पौधे के आंतरिक ऊतकों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षात्मक परत तैयार करता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) प्राथमिक विभाज्योतक: ये भ्रूण अवस्था से मौजूद होते हैं (जैसे प्रोमेरिस्टेम)।

  • (C) स्थायी ऊतक: इनकी कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खो चुकी होती हैं, जबकि कॉर्क कैम्बियम सक्रिय रूप से विभाजित होता है।

  • (D) जटिल ऊतक: इसमें जाइलम और फ्लोएम आते हैं जो संवहन का कार्य करते हैं।

43. आलू के कंद में प्रचुर मात्रा में कौन सा ऊतक होता है?

(A) स्क्लेरेनकाइमा

(B) पैरेंकाइमा (भोजन संचय के लिए)

(C) जाइलम

(D) कोलेनकाइमा

उत्तर: (B) पैरेंकाइमा (Parenchyma)

व्याख्या: आलू का कंद (Tuber) वास्तव में एक रूपांतरित भूमिगत तना है, जिसका मुख्य कार्य पौधे के लिए भोजन सुरक्षित रखना है।

  • भोजन का संचय: आलू के कंद का अधिकांश हिस्सा पैरेंकाइमा कोशिकाओं से बना होता है। इन कोशिकाओं में बड़ी मात्रा में ल्यूकोप्लास्ट (Amyloplasts) पाए जाते हैं, जो ग्लूकोज को स्टार्च के रूप में संचित करते हैं।

  • कोशिका की प्रकृति: ये कोशिकाएं जीवित होती हैं और इनकी भित्ति पतली (सेल्युलोज की बनी) होती है। इनमें बहुत अधिक अंतर्कोशिकीय स्थान नहीं होता क्योंकि ये पूरी तरह से स्टार्च के दानों से भरी होती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) स्क्लेरेनकाइमा: यह मृत और कठोर होता है। यदि आलू में यह अधिक होता, तो आलू पत्थर की तरह सख्त होता और खाने योग्य नहीं रहता।

  • (C) जाइलम: जाइलम केवल संवहन बंडलों में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है, यह मुख्य भराव ऊतक नहीं है।

  • (D) कोलेनकाइमा: यह लचीलापन देता है और अक्सर तने के बाहरी हिस्सों (एपिडर्मिस के नीचे) में होता है, भंडारण अंगों के मुख्य भाग में नहीं।

44. चालनी पट्टिका (Sieve Plate) कहाँ पाई जाती है?

(A) जाइलम में

(B) फ्लोएम में (दो चालनी नलिकाओं के बीच)

(C) एपिडर्मिस में

(D) जड़ों में

उत्तर: (B) फ्लोएम में (दो चालनी नलिकाओं के बीच)

व्याख्या: चालनी पट्टिका (Sieve Plate) फ्लोएम ऊतक के सबसे महत्वपूर्ण घटक, ‘चालनी नलिका’ (Sieve Tube), की एक विशिष्ट विशेषता है।

  • संरचना: चालनी नलिकाएं लंबी, नली जैसी कोशिकाएं होती हैं जो एक के ऊपर एक रखी होती हैं। दो नलिकाओं के बीच की अनुप्रस्थ दीवार (Transverse wall) पूरी तरह ठोस नहीं होती, बल्कि उसमें छोटे-छोटे छेद होते हैं। इसी छिद्रित दीवार को चालनी पट्टिका कहते हैं।

  • कार्य: ये छिद्र एक छलनी की तरह काम करते हैं, जो एक कोशिका से दूसरी कोशिका में भोजन (सुक्रोज) के घोल को आसानी से बहने देते हैं।

  • विशेषता: चालनी पट्टिका के कारण ही फ्लोएम के भीतर साइटोप्लाज्मिक स्ट्रैंड्स (Cytoplasmic strands) निरंतर बने रहते हैं, जिससे भोजन का परिवहन सुचारू रूप से होता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) जाइलम में: जाइलम की वाहिकाएं (Vessels) पूरी तरह से खुली होती हैं या उनकी दीवारों पर गड्ढे (Pits) होते हैं, लेकिन उनमें चालनी जैसी पट्टिका नहीं होती।

  • (C) एपिडर्मिस में: यह सुरक्षात्मक परत है, जिसमें रंध्र (Stomata) तो होते हैं पर चालनी पट्टिका नहीं।

  • (D) जड़ों में: यद्यपि जड़ों में फ्लोएम होता है, लेकिन चालनी पट्टिका विशेष रूप से ‘फ्लोएम’ ऊतक का हिस्सा है, केवल जड़ों का नहीं।

45. विसरण (Diffusion) द्वारा गैसों का आदान-प्रदान किस ऊतक की विशेषता है?

(A) पैरेंकाइमा

(B) कोलेनकाइमा

(C) स्क्लेरेनकाइमा

(D) जाइलम

उत्तर: (A) पैरेंकाइमा (Parenchyma)

व्याख्या:

पैरेंकाइमा पौधों का सबसे मौलिक जीवित ऊतक है और गैसों के विनिमय (विसरण) में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • अंतर्कोशिकीय स्थान (Intercellular Spaces): पैरेंकाइमा कोशिकाओं के बीच काफी खाली स्थान पाया जाता है। यह हवा से भरा स्थान गैसों (CO2 और O2) के सुगम आवागमन के लिए मार्ग प्रदान करता है।

  • क्लोरेनकाइमा: जब पैरेंकाइमा कोशिकाओं में क्लोरोफिल होता है (जैसे पत्तियों की मेसोफिल कोशिकाओं में), तो वे प्रकाश संश्लेषण करती हैं। इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक गैसों का विसरण इन्हीं कोशिकाओं के माध्यम से होता है।

  • एरेनकाइमा: जलीय पौधों में पैरेंकाइमा के बीच बड़े वायु कोष्ठ (Air cavities) बन जाते हैं, जो न केवल गैसों के विनिमय में मदद करते हैं बल्कि पौधे को तैरने (Buoyancy) में भी सहायता करते हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) कोलेनकाइमा: इनके कोनों पर पेक्टिन का जमाव होता है, जिससे अंतर्कोशिकीय स्थान लगभग खत्म हो जाता है, अतः ये विसरण के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

  • (C) स्क्लेरेनकाइमा: यह मृत ऊतक है जिसकी दीवारें बहुत मोटी और लिग्निन युक्त होती हैं, जो गैसों के लिए अभेद्य होती हैं।

  • (D) जाइलम: इसका मुख्य कार्य जल का संवहन है, गैसों का विनिमय नहीं।

46. संवहन पूल (Vascular Bundle) का हिस्सा नहीं है:

(A) जाइलम

(B) फ्लोएम

(C) पिथ (Pith)

(D) कैम्बियम

उत्तर: (C) पिथ (Pith) या मज्जा

व्याख्या: संवहन पूल (Vascular Bundle) पौधे के परिवहन तंत्र की एक इकाई है। इसमें मुख्य रूप से वे ऊतक शामिल होते हैं जो पदार्थों के आवागमन और नई कोशिकाओं के निर्माण में सीधे भाग लेते हैं।

  • जाइलम (Xylem): यह संवहन पूल का वह हिस्सा है जो जल और खनिजों का परिवहन करता है।

  • फ्लोएम (Phloem): यह संवहन पूल का वह हिस्सा है जो पत्तियों से तैयार भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।

  • कैम्बियम (Cambium): द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों के संवहन पूल में जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम की एक परत होती है, जो ‘द्वितीयक वृद्धि’ के लिए जिम्मेदार है। इसे ‘Open’ (खुला) संवहन पूल कहते हैं।

अन्य जानकारी:

  • एकबीजपत्री (Monocots): इनके संवहन पूल में कैम्बियम नहीं पाया जाता, इसलिए इन्हें ‘Closed’ (बंद) संवहन पूल कहते हैं।

47. पादप शरीर का मुख्य सुरक्षात्मक ऊतक है:

(A) एपिडर्मिस और कॉर्क

(B) जाइलम और फ्लोएम

(C) पैरेंकाइमा

(D) कोलेनकाइमा

उत्तर: (A) एपिडर्मिस और कॉर्क

व्याख्या: पादप शरीर में सुरक्षा का कार्य मुख्य रूप से दो ऊतकों द्वारा किया जाता है, जो पौधे की आयु के अनुसार अलग-अलग होते हैं:

  • एपिडर्मिस (Epidermis): यह कोमल और युवा पौधों की सबसे बाहरी परत है। यह आमतौर पर एक कोशिका मोटी होती है और इसके ऊपर ‘क्यूटिकल’ (Cuticle) नामक जलरोधी परत होती है। यह पौधे को संक्रमण, परजीवियों और अत्यधिक पानी की हानि से बचाती है।

  • कॉर्क (Cork): जैसे-जैसे पौधा पुराना होकर काष्ठीय (Woody) पेड़ बनता है, एपिडर्मिस फट जाती है और उसकी जगह ‘कॉर्क’ ले लेता है। कॉर्क की कोशिकाएं मृत होती हैं और इनमें ‘सुबेरिन’ (Suberin) नामक पदार्थ जमा होता है, जो इसे हवा और पानी के लिए अभेद्य (Impervious) बनाता है। यह पेड़ के आंतरिक हिस्सों को चोट और तापमान के उतार-चढ़ाव से बचाता है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (B) जाइलम और फ्लोएम: ये ‘संवहन ऊतक’ हैं, जिनका कार्य पानी और भोजन का परिवहन करना है, सुरक्षा नहीं।

  • (C) पैरेंकाइमा: यह मुख्य रूप से भोजन संचय और भराव का कार्य करता है।

  • (D) कोलेनकाइमा: यह पौधे को लचीलापन और यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।

48. जिम्नोस्पर्म के जाइलम में क्या नहीं होता?

(A) वाहिनिकाएँ

(B) वाहिकाएँ (Vessels)

(C) जाइलम पैरेंकाइमा

(D) जाइलम फाइबर

उत्तर: (B) वाहिकाएँ (Vessels)

व्याख्या: जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) जैसे कि चीड़ (Pine) और देवदार (Cedar) के संवहन तंत्र की यह सबसे प्रमुख विशेषता है कि उनके जाइलम में वाहिकाएँ (Vessels) अनुपस्थित होती हैं।

  • मुख्य जल संवाहक: जिम्नोस्पर्म में जल और खनिजों के संवहन का पूरा कार्य वाहिनिकाओं (Tracheids) द्वारा किया जाता है। वाहिनिकाएँ लंबी, संकरी और दोनों सिरों से नुकीली कोशिकाएँ होती हैं।

  • विकासवादी अंतर: वाहिकाएँ (Vessels) अधिक विकसित संवहन नलिकाएँ हैं जो केवल आवृतबीजी (Angiosperms) या फूलों वाले पौधों में पाई जाती हैं। ये पानी को अधिक कुशलता और तेज़ी से पहुँचाने में सक्षम होती हैं।

  • अपवाद: जिम्नोस्पर्म के ‘नीटोफाइटा’ (Gnetophyta) समूह (जैसे Gnetum, Ephedra) में वाहिकाएँ पाई जाती हैं, लेकिन सामान्यतः जिम्नोस्पर्म के लिए वाहिकाओं की अनुपस्थिति ही मानक उत्तर है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) वाहिनिकाएँ: ये जिम्नोस्पर्म के जाइलम का मुख्य हिस्सा हैं।

  • (C) जाइलम पैरेंकाइमा: यह जाइलम का एकमात्र जीवित हिस्सा है और जिम्नोस्पर्म में भोजन संचय के लिए मौजूद होता है।

  • (D) जाइलम फाइबर: ये यांत्रिक मजबूती प्रदान करने के लिए जिम्नोस्पर्म में पाए जाते हैं।

49. पौधों में कोशिका विभाजन की क्षमता किस ऊतक तक सीमित है?

(A) स्थायी ऊतक

(B) विभाज्योतक

(C) जटिल ऊतक

(D) सुरक्षात्मक ऊतक

उत्तर: (B) विभाज्योतक (Meristematic Tissue)

व्याख्या: पादप शरीर में कोशिका विभाजन की क्षमता असीमित नहीं होती, बल्कि यह कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित होती है जिन्हें ‘विभाज्योतक’ कहते हैं।

  • निरंतर विभाजन: विभाज्योतक की कोशिकाएं बहुत सक्रिय होती हैं और जीवन भर विभाजित होती रहती हैं। इन्हीं के कारण पौधों में नई कोशिकाएं बनती हैं और उनकी लंबाई व मोटाई बढ़ती है।

  • अविभेदित अवस्था: ये कोशिकाएं अपरिपक्व होती हैं और इनका कोई निश्चित कार्य नहीं होता, सिवाय विभाजन के। जब ये कोशिकाएं विभाजित होना बंद कर देती हैं, तब ये ‘स्थायी ऊतक’ बन जाती हैं।

  • विशेषताएं: इन कोशिकाओं में सघन कोशिका द्रव्य, बड़ा केंद्रक और पतली सेल्युलोज की भित्ति होती है, जो तेज़ विभाजन में सहायक है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) स्थायी ऊतक: ये विभाज्योतक से ही बनते हैं, लेकिन इनमें विभाजन की शक्ति खत्म हो चुकी होती है। ये विशिष्ट कार्य (जैसे भोजन बनाना या सहारा देना) करते हैं।

  • (C) जटिल ऊतक: जाइलम और फ्लोएम जैसे ऊतक जटिल स्थायी ऊतक हैं, जिनमें विभाजन नहीं होता।

  • (D) सुरक्षात्मक ऊतक: एपिडर्मिस और कॉर्क जैसे ऊतक भी स्थायी होते हैं और विभाजन नहीं करते।

50. नाशपाती (Pear) फल खाने पर होने वाली किरकिराहट किस ऊतक के कारण होती है?

(A) पैरेंकाइमा

(B) कोलेनकाइमा

(C) स्टोन कोशिकाएं (Sclereids)

(D) जाइलम

उत्तर: (C) स्टोन कोशिकाएं (Sclereids)

व्याख्या: जब हम नाशपाती या चीकू जैसे फल खाते हैं, तो जो दानेदार या किरकिराहट वाला अनुभव होता है, वह स्क्लेरेइड्स (Sclereids) के कारण होता है।

  • प्रकृति: ये स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ ऊतक) का ही एक प्रकार हैं। इन्हें ‘स्टोन सेल्स’ या ‘ग्रिट सेल्स’ भी कहा जाता है।

  • संरचना: ये कोशिकाएं बहुत छोटी, गोल या अंडाकार होती हैं। इनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के अत्यधिक जमाव के कारण बहुत मोटी और कठोर हो जाती है, जिससे कोशिका के अंदर की जगह (Lumen) लगभग खत्म हो जाती है।

  • उपस्थिति: ये नाशपाती के गूदे, बीजों के कठोर आवरण (जैसे बादाम या अखरोट का छिलका) और चाय की पत्तियों में पाई जाती हैं।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण:

  • (A) पैरेंकाइमा: यह कोमल होता है और फल के गूदे का मुख्य हिस्सा बनाता है, लेकिन किरकिराहट पैदा नहीं करता।

  • (B) कोलेनकाइमा: यह लचीलापन देता है और आमतौर पर डंठल में होता है।

  • (D) जाइलम: यह जल का संवहन करता है और फल के गूदे में इस रूप में नहीं पाया जाता।

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