पादप आकारिकी
(Plant Morphology)
1. मूलांकुर (Radicle) से विकसित होने वाली जड़ों को क्या कहते हैं?
(A) अपस्थानिक जड़
(B) मूसला जड़ (Tap Root)
(C) झकड़ा जड़
(D) श्वसन मूल
सही उत्तर: (B) मूसला जड़ (Tap Root)
विस्तृत व्याख्या:
जब बीज अंकुरित होता है, तो उसके मूलांकुर (Radicle) से जो प्राथमिक जड़ निकलती है और सीधे नीचे की ओर बढ़कर मुख्य जड़ का रूप ले लेती है, उसे मूसला जड़ कहा जाता है।
संरचना: इसमें एक मुख्य जड़ होती है जिससे पार्श्व जड़ें (Secondary and Tertiary roots) निकलती हैं।
विशेषता: यह जड़ काफी गहराई तक जाती है और पौधे को मजबूती से जमीन में थामे रखती है।
उदाहरण: यह मुख्य रूप से द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों में पाई जाती है, जैसे— नीम, आम, चना, मटर, और सरसों।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) अपस्थानिक जड़ (Adventitious Root): जब जड़ मूलांकुर के बजाय पौधे के किसी अन्य भाग (जैसे तना या पत्तियों) से निकलती है, तो उसे अपस्थानिक जड़ कहते हैं। उदाहरण: बरगद की जटाएं।
(C) झकड़ा जड़ (Fibrous Root): इसमें मूलांकुर से निकलने वाली प्राथमिक जड़ अल्पजीवी होती है और उसकी जगह तने के आधार से बहुत सारी बारीक रेशेदार जड़ें निकल आती हैं। यह एकबीजपत्री (Monocot) पौधों (जैसे— गेहूँ, मक्का, घास) में पाई जाती है।
(D) श्वसन मूल (Pneumatophores): ये दलदली क्षेत्रों में उगने वाले पौधों (मैंग्रोव) में पाई जाती हैं। ये जड़ें जमीन से ऊपर की ओर निकल आती हैं ताकि हवा से ऑक्सीजन ले सकें।
2. बरगद के पेड़ से लटकने वाली संरचनाएं वास्तव में क्या हैं?
(A) वायवीय तना
(B) स्तंभ मूल (Prop Roots)
(C) अवस्तंभ मूल
(D) आरोही मूल
सही उत्तर: (B) स्तंभ मूल (Prop Roots)
विस्तृत व्याख्या:
बरगद के पेड़ (Ficus benghalensis) की शाखाओं से नीचे की ओर लटकने वाली लंबी, रस्सी जैसी संरचनाएं वास्तव में जड़ें होती हैं, जिन्हें स्तंभ मूल या प्रोप रूट्स कहा जाता है।
विकास: ये जड़ें शाखाओं से उत्पन्न होती हैं और हवा में लटकते हुए नीचे की ओर बढ़ती हैं।
कार्य: * जैसे ही ये जमीन को छूती हैं, ये मिट्टी के अंदर धंस जाती हैं और खंभों (Pillars) की तरह सख्त हो जाती हैं।
इनका मुख्य कार्य बरगद की विशाल और भारी शाखाओं को यांत्रिक सहारा (Mechanical Support) प्रदान करना है।
राजस्थान और भारत के अन्य हिस्सों में पाए जाने वाले पुराने बरगद के पेड़ों में ये जड़ें इतनी मोटी हो जाती हैं कि मुख्य तने और इनमें अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
प्रकार: चूँकि ये मूलांकुर (Radicle) से न निकलकर तने की शाखाओं से निकलती हैं, इसलिए ये अपस्थानिक जड़ों (Adventitious Roots) का एक रूपांतरण हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) वायवीय तना (Aerial Stem): ये संरचनाएं तना नहीं हैं क्योंकि इनमें पर्व (Nodes) और पर्वसंधियाँ (Internodes) नहीं पाई जातीं और ये धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती (जमीन की ओर बढ़ने वाली) होती हैं।
(C) अवस्तंभ मूल (Stilt Roots): ये भी सहारा देने वाली जड़ें हैं, लेकिन ये मुख्य तने के निचले हिस्से से तिरछी निकलकर जमीन में जाती हैं। उदाहरण: मक्का और गन्ना।
(D) आरोही मूल (Climbing Roots): ये जड़ें कमजोर तने वाले पौधों को किसी आधार पर चढ़ने में मदद करती हैं। उदाहरण: मनी प्लांट और काली मिर्च।
3. गाजर (Carrot) की जड़ का आकार कैसा होता है?
(A) कुंभीरूप (Napiform)
(B) शंकुरूप (Conical)
(C) तर्कुरूप (Fusiform)
(D) गांठदार
सही उत्तर: (B) शंकुरूप (Conical)
विस्तृत व्याख्या:
गाजर की जड़ मूसला जड़ (Tap root) का एक रूपांतरण है, जिसका आकार शंकु (Cone) जैसा होता है।
आकार की विशेषता: यह जड़ ऊपर (आधार) की ओर से काफी चौड़ी होती है और नीचे की ओर धीरे-धीरे पतली होती चली जाती है।
कार्य: इसका मुख्य कार्य भोजन का संचय करना है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
(A) कुंभीरूप (Napiform): इस प्रकार की जड़ ऊपर से बहुत अधिक फूली हुई और गोलाकार होती है, लेकिन नीचे से अचानक बहुत पतली हो जाती है।
उदाहरण: शलजम (Turnip) और चुकंदर (Beetroot)।
(C) तर्कुरूप (Fusiform): यह जड़ बीच में से फूली हुई होती है और दोनों सिरों (ऊपर और नीचे) की ओर पतली होती है।
उदाहरण: मूली (Radish)।
(D) गांठदार (Nodulated): इन जड़ों की शाखाओं पर छोटी-छोटी गांठें पाई जाती हैं जिनमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु (जैसे राइजोबियम) रहते हैं।
उदाहरण: चना, मटर और मूंगफली जैसे दलहनी पौधे।
4. राइजोफोरा (Rhizophora) में श्वसन जड़ें जमीन से ऊपर क्यों निकलती हैं?
(A) प्रकाश के लिए
(B) ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए
(C) सहारा देने के लिए
(D) जल अवशोषण के लिए
सही उत्तर: (B) ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए
विस्तृत व्याख्या:
राइजोफोरा जैसे पौधे दलदली और लवणीय क्षेत्रों (मैंग्रोव क्षेत्रों) में उगते हैं। इन स्थानों की मिट्टी में पानी की अधिकता के कारण ऑक्सीजन की कमी होती है, जिससे जड़ों को श्वसन करने में कठिनाई होती है।
श्वसन मूल (Pneumatophores): इस समस्या के समाधान के लिए, इन पौधों की कुछ जड़ें ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती (Negative Geotropic) होकर जमीन या पानी से ऊपर हवा में निकल आती हैं। इन्हें श्वसन मूल या न्यूमेटोफोर कहा जाता है।
वात रंध्र (Lenticels): इन बाहरी जड़ों की सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें ‘वात रंध्र’ कहते हैं। इन्हीं छिद्रों के माध्यम से पौधे वायुमंडल से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) प्रकाश के लिए: पौधों में प्रकाश का अवशोषण मुख्य रूप से पत्तियों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के लिए किया जाता है, जड़ों का प्रकाश के लिए ऊपर आना आवश्यक नहीं है।
(C) सहारा देने के लिए: सहारा देने वाली जड़ों को ‘स्तंभ मूल’ (जैसे बरगद) या ‘अवस्तंभ मूल’ (जैसे गन्ना) कहा जाता है। राइजोफोरा की श्वसन जड़ें बहुत नाजुक होती हैं और सहारा प्रदान नहीं करतीं।
(D) जल अवशोषण के लिए: जल का अवशोषण जमीन के नीचे स्थित सामान्य जड़ों द्वारा किया जाता है। ऊपर निकली हुई जड़ें केवल गैसों के विनिमय (Gas exchange) का कार्य करती हैं।
5. मक्का और गन्ना में तने की निचली गाँठों से निकलने वाली जड़ें कहलाती हैं :-
(A) प्रोप रूट
(B) स्टिल्ट रूट (Avstambh Mool)
(C) मूसला जड़
(D) प्राथमिक जड़
सही उत्तर: (B) स्टिल्ट रूट (Avstambh Mool / अवस्तंभ मूल)
विस्तृत व्याख्या:
मक्का (Maize) और गन्ना (Sugarcane) के तने लंबे और अपेक्षाकृत पतले होते हैं। इन्हें अतिरिक्त मजबूती प्रदान करने के लिए प्रकृति ने एक विशेष जड़ तंत्र विकसित किया है जिसे अवस्तंभ मूल (Stilt Roots) कहते हैं।
उद्गम: ये जड़ें तने की सबसे निचली पर्वसंधियों (Lower Nodes) से निकलती हैं।
कार्य: ये तिरछी होकर जमीन में धंस जाती हैं और एक ‘रस्सी’ या ‘सहारे’ की तरह काम करती हैं, जिससे तेज हवा या वजन के कारण पौधा गिरता नहीं है।
प्रकृति: चूँकि ये मूलांकुर (Radicle) से न निकलकर तने से निकलती हैं, इसलिए ये अपस्थानिक जड़ों का ही एक रूपांतरण हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) प्रोप रूट (Prop Root): ये भी सहारा देने वाली जड़ें हैं, लेकिन ये तने की निचली गांठों से नहीं बल्कि ऊपरी भारी शाखाओं से लटकती हैं। उदाहरण: बरगद का पेड़।
(C) मूसला जड़ (Tap Root): यह वह मुख्य जड़ है जो बीज के मूलांकुर से विकसित होकर गहराई तक जाती है। मक्का और गन्ना एकबीजपत्री (Monocot) होने के कारण इनमें मूसला जड़ तंत्र स्थायी नहीं होता।
(D) प्राथमिक जड़ (Primary Root): यह अंकुरण के समय निकलने वाली सबसे पहली जड़ होती है। मक्का में यह जल्दी ही नष्ट हो जाती है और उसकी जगह रेशेदार (Fibrous) जड़ें ले लेती हैं।
6. हल्दी (Turmeric) एक रूपांतरित ________ है।
(A) जड़
(B) तना (प्रकंद)
(C) फल
(D) पत्ती
सही उत्तर: (B) तना (प्रकंद)
विस्तृत व्याख्या:
हल्दी को वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से एक रूपांतरित भूमिगत तना माना जाता है, जिसे विशिष्ट रूप से ‘प्रकंद’ (Rhizome) कहा जाता है।
तना होने का प्रमाण: हल्दी में स्पष्ट रूप से पर्व (Nodes) और पर्वसंधियाँ (Internodes) पाई जाती हैं, जो तने की मुख्य विशेषता हैं। इसके अलावा, इस पर शल्क पत्र (Scaly leaves) और कक्षस्थ कलिकाएँ (Axillary buds) भी मिलती हैं।
भोजन का संचय: हल्दी का तना जमीन के अंदर क्षैतिज (Horizontal) दिशा में बढ़ता है और भोजन संग्रहित करके फूल जाता है।
औषधीय गुण: इसमें ‘कुरकुमिन’ (Curcumin) नामक तत्व पाया जाता है, जिसके कारण इसका रंग पीला होता है और यह कैंसर रोधी व एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होती है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) जड़ (Root): यद्यपि हल्दी जमीन के नीचे होती है, लेकिन इसमें जड़ों की तरह मूल गोप (Root cap) या मूल रोम (Root hairs) नहीं होते। गाजर और मूली जड़ें हैं, हल्दी नहीं।
(C) फल (Fruit): फल का निर्माण फूल के अंडाशय (Ovary) से होता है, जबकि हल्दी पौधे का कायिक (Vegetative) हिस्सा है।
(D) पत्ती (Leaf): हल्दी की पत्तियां जमीन के ऊपर लंबी और हरी होती हैं, जो प्रकाश संश्लेषण का कार्य करती हैं, जबकि हम जिस हल्दी का उपयोग करते हैं वह भूमिगत हिस्सा है।
7. नागफनी (Opuntia) में चपटा, हरा और मांसल तना क्या कहलाता है ?
(A) प्रतान
(B) पर्णकाय स्तंभ (Phylloclade)
(C) शल्क कंद
(D) घनकंद
सही उत्तर: (B) पर्णकाय स्तंभ (Phylloclade)
विस्तृत व्याख्या:
रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधों, जैसे नागफनी (Opuntia), में पानी की कमी से बचने के लिए तना एक विशिष्ट रूप में बदल जाता है, जिसे पर्णकाय स्तंभ (Phylloclade) कहते हैं।
रूपांतरण का कारण: मरुस्थलीय क्षेत्रों में पानी बचाने के लिए पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं। अब प्रकाश संश्लेषण (भोजन बनाने) का कार्य करने के लिए तना चपटा, हरा और मांसल हो जाता है।
कार्य: यह क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण प्रकाश संश्लेषण करता है।
मांसल होने के कारण यह जल का संचय (Water storage) करता है।
इसकी सतह पर ‘क्यूटिकल’ की मोटी परत होती है जो वाष्पोत्सर्जन को कम करती है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) प्रतान (Tendril): ये धागे जैसी कुंडलित संरचनाएं होती हैं जो कमजोर तने वाले पौधों (जैसे अंगूर या मटर) को ऊपर चढ़ने में सहारा देती हैं।
(C) शल्क कंद (Bulb): यह एक भूमिगत तना है जहाँ पत्तियां भोजन संचय करके मांसल हो जाती हैं। उदाहरण: प्याज और लहसुन।
(D) घनकंद (Corm): यह जमीन के अंदर ऊर्ध्वाधर (Vertical) दिशा में बढ़ने वाला मोटा और मांसल तना है। उदाहरण: अरबी और जिमीकंद।
8. निम्नलिखित में से कौन सा एक भूमिगत तना नहीं है ?
(A) आलू
(B) अदरक
(C) शकरकंद (Sweet Potato)
(D) लहसुन
सही उत्तर: (C) शकरकंद (Sweet Potato)
विस्तृत व्याख्या:
अक्सर लोग जमीन के नीचे उगने वाली सभी चीजों को जड़ या तना समझकर भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन वनस्पति विज्ञान (Botany) के अनुसार इनके लक्षण अलग होते हैं। शकरकंद एक रूपांतरित मूसला जड़ (Tap Root) है, न कि तना।
तर्क: शकरकंद में तने की तरह ‘पर्व’ (Nodes) और ‘पर्वसंधियाँ’ (Internodes) नहीं पाई जातीं। यह भोजन संचय के कारण फूल जाती है।
विशेषता: यह एक कंदिल जड़ (Tuberous Root) है।
अन्य विकल्प भूमिगत तने क्यों हैं?
(A) आलू (Potato): यह एक भूमिगत तना है जिसे ‘कंद’ (Tuber) कहते हैं। आलू पर पाई जाने वाली ‘आंखें’ (Eyes) वास्तव में इसकी कक्षस्थ कलिकाएँ होती हैं, जहाँ से नया पौधा निकल सकता है।
(B) अदरक (Ginger): यह एक ‘प्रकंद’ (Rhizome) है। इसमें स्पष्ट रूप से गांठें (Nodes) पाई जाती हैं, जो प्रमाणित करती हैं कि यह जड़ नहीं बल्कि तना है।
(D) लहसुन (Garlic): यह ‘शल्ककंद’ (Bulb) का उदाहरण है। इसमें तना एक छोटी डिस्क के रूप में होता है, और हम जो हिस्सा खाते हैं वह वास्तव में भोजन संचित करने वाली मांसल पत्तियां (Fleshy Scales) होती हैं।
एक नज़र में तुलना:
| नाम | श्रेणी | प्रकार |
| आलू | तना | कंद (Tuber) |
| अदरक/हल्दी | तना | प्रकंद (Rhizome) |
| लहसुन/प्याज | तना | शल्ककंद (Bulb) |
| गाजर/मूली | जड़ | मूसला जड़ |
| शकरकंद | जड़ | अपस्थानिक/कंदिल जड़ |
9. आलू की ‘आंखें’ (Eyes) क्या होती हैं ?
(A) पुष्प कलिका
(B) कक्षस्थ कलिका (Axillary Bud)
(C) जड़ के निशान
(D) गांठें
सही उत्तर: (B) कक्षस्थ कलिका (Axillary Bud)
विस्तृत व्याख्या:
आलू (Solanum tuberosum) एक भूमिगत रूपांतरित तना है जिसे ‘कंद’ (Tuber) कहा जाता है। आलू की सतह पर जो छोटे-छोटे गड्ढे या निशान दिखाई देते हैं, जिन्हें हम सामान्य भाषा में ‘आंखें’ कहते हैं, वे वास्तव में कक्षस्थ कलिकाएँ (Axillary Buds) होती हैं।
पहचान: इन ‘आँखों’ के पास एक छोटा सा निशान होता है जिसे शल्क पत्र (Scale leaf) का घाव कहा जाता है। तने की मुख्य विशेषता कलिकाओं का होना है, जो जड़ों में नहीं पाई जातीं।
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): जब हम आलू को बोते हैं, तो इन्हीं ‘आँखों’ या कलिकाओं से नए अंकुर (Sprouts) फूटते हैं और एक नया पौधा विकसित होता है। खेती के लिए किसान आलू के ऐसे टुकड़े काटते हैं जिनमें कम से कम एक ‘आंख’ मौजूद हो।
भोजन संचय: आलू का तना जमीन के नीचे भोजन (स्टार्च) जमा करने के कारण फूल जाता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) पुष्प कलिका (Flower Bud): ये कलिकाएँ पौधे के ऊपरी हिस्से में फूल बनाने के लिए विकसित होती हैं। आलू की आँखें जमीन के नीचे होती हैं और शाखाएँ बनाती हैं, फूल नहीं।
(C) जड़ के निशान: आलू एक तना है, इसलिए उसकी आँखें जड़ के निशान नहीं हो सकतीं। आलू के निचले हिस्से से जो बारीक धागे निकलते हैं, वे जड़ें होती हैं।
(D) गांठें (Nodes): हालाँकि आँखें ‘नोड्स’ वाले स्थान पर ही स्थित होती हैं, लेकिन सटीक रूप से वे वहाँ मौजूद कलिकाएँ हैं। विकल्प (B) अधिक वैज्ञानिक और सटीक उत्तर है।
10. तने का वह भाग जहाँ से पत्तियाँ निकलती हैं, क्या कहलाता है ?
(A) पर्व (Internode)
(B) पर्वसंधि (Node)
(C) शीर्ष
(D) कक्ष
सही उत्तर: (B) पर्वसंधि (Node)
विस्तृत व्याख्या:
किसी भी तने की सबसे प्रमुख पहचान उस पर पर्वसंधियों (Nodes) और पर्वों (Internodes) की उपस्थिति होती है।
पर्वसंधि (Node): तने का वह विशिष्ट बिंदु या गांठ जहाँ से पत्तियाँ, शाखाएँ या पुष्प कलिकाएँ बाहर निकलती हैं, पर्वसंधि कहलाती है। इस स्थान पर कोशिकाएँ बहुत सक्रिय होती हैं।
पर्व (Internode): दो क्रमिक पर्वसंधियों (दो गांठों) के बीच के खाली स्थान को पर्व कहा जाता है। पौधे की लंबाई मुख्य रूप से इसी भाग के बढ़ने से बढ़ती है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) पर्व (Internode): यह दो गांठों के बीच का हिस्सा है, यहाँ से पत्तियाँ नहीं निकलतीं।
(C) शीर्ष (Apex): यह तने का सबसे ऊपरी सिरा होता है जहाँ ‘शीर्षस्थ विभज्योतक’ (Apical Meristem) पाया जाता है। यह पौधे की ऊँचाई बढ़ाता है, लेकिन पत्तियों के निकलने के स्थान को विशेष रूप से ‘नोड’ ही कहा जाता है।
(D) कक्ष (Axil): पत्ती के डंठल और तने के बीच बनने वाले कोण को ‘कक्ष’ कहते हैं। यहाँ ‘कक्षस्थ कलिका’ (Axillary Bud) पाई जाती है, लेकिन वह स्थान जहाँ से पत्ती जुड़ी होती है, वह पर्वसंधि ही है।
11. मटर में ‘प्रतान’ (Tendrils) किसका रूपांतरण है ?
(A) तना
(B) पत्ती (Leaflets)
(C) जड़
(D) कलिका
सही उत्तर: (B) पत्ती (Leaflets)
विस्तृत व्याख्या:
मटर (Pisum sativum) का तना बहुत ही कमजोर और कोमल होता है, जिसके कारण वह बिना सहारे के सीधा खड़ा नहीं रह सकता। इस समस्या के समाधान के लिए मटर के पौधे में ‘प्रतान’ (Tendrils) विकसित होते हैं।
रूपांतरण: मटर में पूरी पत्ती या पत्ती का अगला हिस्सा (Leaflets) धागे जैसी कुंडलीनुमा संरचना में बदल जाता है। इसे पर्ण-प्रतान कहते हैं।
कार्य: ये प्रतान किसी भी पास के ठोस आधार (जैसे तार या लकड़ी) को चारों ओर से लपेट लेते हैं, जिससे पौधा ऊपर की ओर चढ़ पाता है।
भ्रम की स्थिति: अक्सर लोग इसे तने का रूपांतरण समझ लेते हैं क्योंकि अंगूर (Grapevine) में प्रतान तने से बनते हैं। लेकिन मटर के मामले में यह पत्ती का ही बदला हुआ रूप है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) तना: अंगूर और कद्दू वर्गीय पौधों (जैसे लौकी, तरोई) में प्रतान तने का रूपांतरण होते हैं, मटर में नहीं।
(C) जड़: जड़ें जमीन के नीचे होती हैं और सहारा देने के लिए ‘प्रॉप रूट्स’ या ‘स्टिल्ट रूट्स’ बनाती हैं, न कि प्रतान।
(D) कलिका: कुछ पौधों में कलिकाएँ कांटों या शाखाओं में बदलती हैं, लेकिन मटर में प्रतान विशेष रूप से पत्रकों (Leaflets) से बनते हैं।
12. द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में किस प्रकार का शिराविन्यास पाया जाता है ?
(A) समांतर (Parallel)
(B) जालिकावत (Reticulate)
(C) विसरित
(D) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (B) जालिकावत (Reticulate)
विस्तृत व्याख्या:
पत्तियों में शिराओं (Veins) और शिरिकाओं के व्यवस्थित होने के क्रम को शिराविन्यास (Venation) कहते हैं। द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों में यह मुख्य रूप से जालिकावत होता है।
जालिकावत शिराविन्यास: इसमें शिराएँ एक मुख्य मध्य शिरा (Midrib) से निकलकर बार-बार विभाजित होती हैं और पूरी पत्ती पर एक जाल (Network) जैसी संरचना बना लेती हैं।
उदाहरण: आम, नीम, पीपल, चना, और सरसों।
समानांतर शिराविन्यास (Parallel Venation): इसमें शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं और जाल नहीं बनातीं। यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री (Monocot) पौधों की पहचान है।
उदाहरण: गेहूँ, मक्का, बाजरा, और घास।
पहचान की एक आसान ट्रिक:
यदि आप किसी पौधे की जड़ को नहीं देख पा रहे हैं, तो उसकी पत्ती को देखकर बता सकते हैं कि वह बीज कैसा होगा:
जालिकावत पत्ती = मूसला जड़ = द्विबीजपत्री (जैसे: मटर)।
समानांतर पत्ती = झकड़ा जड़ = एकबीजपत्री (जैसे: बाजरा)।
13. कीटभक्षी पौधों (जैसे घटपर्णी) में घड़ा किसका रूपांतरण है?
(A) तना
(B) फलक (Lamina)
(C) पर्णवृंत
(D) जड़
सही उत्तर: (B) फलक (Lamina)
विस्तृत व्याख्या:
कीटभक्षी पौधे, जैसे घटपर्णी (Nepenthes/Pitcher Plant), अक्सर ऐसी मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन की भारी कमी होती है। अपनी नाइट्रोजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, इन पौधों की पत्तियाँ एक विशिष्ट संरचना में बदल जाती हैं।
रूपांतरण: घटपर्णी में पत्ती का चौड़ा भाग, जिसे पर्ण फलक (Leaf Lamina) कहते हैं, एक गहरे घड़े (Pitcher) के रूप में विकसित हो जाता है।
अन्य भाग: * पत्ती का अगला सिरा (Leaf Apex) घड़े के ढक्कन (Lid) के रूप में कार्य करता है।
पत्ती का डंठल (Petiole) अक्सर चपटा और हरा होकर प्रकाश संश्लेषण का कार्य करता है।
कार्य: घड़े के अंदर पाचक एंजाइम होते हैं। जैसे ही कोई कीट घड़े के अंदर गिरता है, ढक्कन बंद हो जाता है और एंजाइम कीट के प्रोटीन को पचाकर नाइट्रोजन सोख लेते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) तना: कीटभक्षी पौधों में तना आमतौर पर सामान्य होता है; घड़ा पूरी तरह से पत्ती की संरचना है।
(C) पर्णवृंत (Petiole): कुछ कीटभक्षी पौधों (जैसे वीनस फ्लाईट्रैप) में पर्णवृंत चपटा हो सकता है, लेकिन घटपर्णी में मुख्य घड़ा ‘फलक’ से ही बनता है।
(D) जड़: जड़ें केवल जल और खनिजों के अवशोषण का कार्य करती हैं, ये कभी भी घड़े जैसी जटिल कीट-पकड़ने वाली संरचना में नहीं बदलतीं।
14. पत्तियों के किनारों से पानी की बूंदों का निकलना (Guttation) किसके द्वारा होता है?
(A) रंध्र (Stomata)
(B) जलरंध्र (Hydathodes)
(C) वातरंध्र
(D) क्यूटिकल
सही उत्तर: (B) जलरंध्र (Hydathodes)
विस्तृत व्याख्या:
जब वातावरण में आर्द्रता (Humidity) अधिक होती है और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) की दर कम होती है, तो पौधों में बिंदुस्राव (Guttation) की क्रिया होती है।
प्रक्रिया: रात के समय या सुबह के शुरुआती घंटों में जब जड़ का दबाव (Root Pressure) अधिक होता है, तो पानी पत्तियों के किनारों पर स्थित विशेष छिद्रों से छोटी बूंदों के रूप में बाहर निकलता है।
जलरंध्र (Hydathodes): ये पत्तियों के सिरों या किनारों पर स्थित स्थायी खुले छिद्र होते हैं। रंध्रों (Stomata) के विपरीत, ये छिद्र बंद नहीं होते और सीधे ‘एपिथेम’ (Epithem) नामक ऊतक से जुड़े होते हैं।
पानी की प्रकृति: बिंदुस्राव से निकलने वाला पानी शुद्ध नहीं होता; इसमें खनिज लवण, शर्करा और कार्बनिक अम्ल घुले होते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) रंध्र (Stomata): इनके द्वारा पानी वाष्प (Vapour) के रूप में निकलता है (वाष्पोत्सर्जन), न कि बूंदों के रूप में। रंध्र पत्तियों की पूरी सतह पर फैले होते हैं।
(C) वातरंध्र (Lenticels): ये लकड़ी वाले तनों और फलों की छाल पर पाए जाते हैं। इनके द्वारा गैसों का विनिमय और बहुत कम मात्रा में वाष्पोत्सर्जन होता है।
(D) क्यूटिकल (Cuticle): यह पत्तियों की ऊपरी सतह पर एक मोमी परत है जो पानी के नुकसान को रोकती है। यद्यपि इससे बहुत कम वाष्पोत्सर्जन होता है, लेकिन बूंदों का निकलना इससे संभव नहीं है।
15. नीम की पत्ती किस प्रकार की होती है ?
(A) सरल पत्ती
(B) पिच्छाकार संयुक्त पत्ती (Pinnately Compound)
(C) हस्ताकार संयुक्त पत्ती
(D) शल्क पत्र
सही उत्तर: (B) पिच्छाकार संयुक्त पत्ती (Pinnately Compound)
विस्तृत व्याख्या:
नीम (Azadirachta indica) की पत्ती एक संयुक्त पत्ती (Compound Leaf) का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें एक मुख्य पत्ती कई छोटी-छोटी पत्तियों में बंटी होती है।
पिच्छाकार (Pinnately) का अर्थ: इसमें एक मुख्य अक्ष होता है जिसे ‘रैचिस’ (Rachis) कहते हैं। इस रैचिस के दोनों ओर छोटे-छोटे पत्रक (Leaflets) आमने-सामने या एकांतर क्रम में लगे होते हैं, जिससे यह संरचना पक्षी के पंख (Feather) जैसी दिखाई देती है।
पहचान: यदि आप नीम की एक “टहनी” जैसी दिखने वाली संरचना को ध्यान से देखें, तो उसके आधार पर कोई कलिका (Bud) नहीं होती, बल्कि वह पूरा हिस्सा एक ही पत्ती है जो छोटे टुकड़ों में विभाजित हो गया है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) सरल पत्ती (Simple Leaf): इसमें फलक (Lamina) पूरा होता है और कटा हुआ नहीं होता, या यदि कटा हो तो वह मध्य शिरा तक नहीं पहुँचता। उदाहरण: पीपल, आम, अमरूद।
(C) हस्ताकार संयुक्त पत्ती (Palmately Compound): इसमें सभी पत्रक एक ही बिंदु (पर्णवृंत के शीर्ष) से जुड़े होते हैं, जैसे हाथ की उंगलियाँ हथेली से जुड़ी होती हैं। उदाहरण: सेमल (Silk Cotton)।
(D) शल्क पत्र (Scaly Leaf): ये बहुत पतली, सूखी और झिल्लीदार पत्तियां होती हैं जो अक्सर कलिकाओं की रक्षा करती हैं या भूमिगत तनों पर पाई जाती हैं। उदाहरण: अदरक, प्याज।
16. पुष्प का नर जनन अंग कौन सा है ?
(A) जायांग
(B) पुमंग (Androecium)
(C) दलपुंज
(D) बाह्यदलपुंज
सही उत्तर: (B) पुमंग (Androecium)
विस्तृत व्याख्या:
पुष्प के विभिन्न भागों को चार चक्रों (Whorls) में बाँटा गया है। इनमें से पुमंग को पुष्प का नर जनन अंग माना जाता है।
इकाइयाँ: पुमंग की प्रत्येक इकाई को पुंकेसर (Stamen) कहते हैं।
संरचना: एक पुंकेसर के दो मुख्य भाग होते हैं:
परागकोष (Anther): यह ऊपरी फूला हुआ भाग है जिसमें परागकण (Pollen grains) बनते हैं। परागकण ही नर युग्मक (Male gametes) होते हैं।
पुंतंतु (Filament): यह एक लंबा डंठल है जो परागकोष को आधार प्रदान करता है।
कार्य: इसका मुख्य कार्य परागकणों का निर्माण करना है जो परागण (Pollination) की क्रिया द्वारा मादा भाग तक पहुँचते हैं।
अन्य विकल्प क्या हैं?
(A) जायांग (Gynoecium): यह पुष्प का मादा जनन अंग है। इसकी इकाई को ‘अंडप’ (Carpel) या ‘स्त्रीकेसर’ (Pistil) कहते हैं। इसके तीन भाग होते हैं: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय।
(C) दलपुंज (Corolla): यह रंगीन पंखुड़ियों का समूह है। इसका मुख्य कार्य कीटों को परागण के लिए आकर्षित करना है। यह एक सहायक चक्र है।
(D) बाह्यदलपुंज (Calyx): यह पुष्प का सबसे बाहरी हरा भाग है जो कली अवस्था में पुष्प की रक्षा करता है। यह भी एक सहायक चक्र है।
17. सूरजमुखी में किस प्रकार का पुष्पक्रम पाया जाता है?
(A) असीमाक्ष
(B) मुण्डक (Capitulum)
(C) साइथियम
(D) कूटचक्रक
सही उत्तर: (B) मुण्डक (Capitulum)
विस्तृत व्याख्या:
सूरजमुखी (Helianthus annuus) में पाया जाने वाला पुष्पक्रम ‘मुण्डक’ (Capitulum) या ‘शीर्षक’ कहलाता है। यह पुष्पक्रम का सबसे उन्नत और विकसित प्रकार माना जाता है।
विशेषता: इसमें पुष्पक्रम का मुख्य अक्ष (Peduncle) चपटा होकर एक ‘पुष्पासन’ (Receptacle) बना लेता है।
पुष्पक (Florets): इस पुष्पासन पर बहुत सारे छोटे-छोटे फूल लगे होते हैं, जिन्हें ‘पुष्पक’ कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
रश्मि पुष्पक (Ray Florets): ये किनारे पर स्थित पीले रंग की पंखुड़ियों जैसे होते हैं (आमतौर पर ये बंध्य या मादा होते हैं)।
बिम्ब पुष्पक (Disc Florets): ये केंद्र में स्थित होते हैं और उभयलिंगी व उर्वर (Fertile) होते हैं।
भ्रम की स्थिति: हम जिसे सूरजमुखी का एक ‘फूल’ समझते हैं, वह वास्तव में एक फूल नहीं बल्कि सैकड़ों फूलों का एक समूह (Inflorescence) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) असीमाक्ष (Racemose): इसमें मुख्य अक्ष लगातार बढ़ता रहता है और फूल पार्श्व में लगे होते हैं। उदाहरण: सरसों, मूली।
(C) साइथियम (Cyathium): यह एक विशेष प्रकार का पुष्पक्रम है जो एक प्याले जैसी संरचना में बंद होता है। उदाहरण: यूफोर्बिया।
(D) कूटचक्रक (Verticillaster): इसमें फूल तने की गांठों पर चक्र के रूप में लगे होते हैं। उदाहरण: तुलसी (Ocimum)।
18. ‘आभासी फल’ (False Fruit) का उदाहरण कौन सा है?
(A) आम
(B) सेब (Apple)
(C) अमरूद
(D) मटर
सही उत्तर: (B) सेब (Apple)
विस्तृत व्याख्या:
वनस्पति विज्ञान के अनुसार, फलों को उनके विकास के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है। सेब एक आभासी फल (False Fruit) या कूट फल का प्रमुख उदाहरण है।
आभासी फल क्या है?: सामान्यतः फल का निर्माण फूल के ‘अंडाशय’ (Ovary) से होता है। लेकिन जब फल के बनने में अंडाशय के साथ-साथ फूल के अन्य भाग (जैसे पुष्पासन – Thalamus, बाह्यदल आदि) भी भाग लेते हैं, तो उसे आभासी फल कहते हैं।
सेब का विकास: सेब में हम जो मांसल और मीठा भाग खाते हैं, वह वास्तव में उसका पुष्पासन (Thalamus) होता है, अंडाशय नहीं। वास्तविक फल तो इसके बीच का वह कड़क हिस्सा होता है जिसमें बीज होते हैं।
अन्य उदाहरण: नाशपाती (Pear), स्ट्रॉबेरी, काजू और शहतूत भी आभासी फलों की श्रेणी में आते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) आम (Mango): यह एक सत्य फल (True Fruit) है। इसका विकास केवल निषेचित अंडाशय से होता है। इसे ‘अष्ठिल फल’ (Drupe) भी कहते हैं।
(C) अमरूद (Guava): यह भी एक सत्य फल है जो फूल के अंडाशय से विकसित होता है।
(D) मटर (Pea): मटर एक सत्य फल है (तकनीकी रूप से एक फली या ‘Legume’), जिसका विकास अंडाशय से होता है और इसके अंदर के दाने बीज होते हैं।
19. टमाटर में किस प्रकार का बीजाण्डन्यास (Placentation) पाया जाता है?
(A) सीमान्त
(B) स्तंभीय (Axile)
(C) भित्तीय
(D) मुक्त स्तम्भीय
सही उत्तर: (B) स्तंभीय (Axile)
विस्तृत व्याख्या:
अंडाशय के भीतर बीजाण्डों (Ovules) के लगे होने के क्रम को बीजाण्डन्यास (Placentation) कहते हैं। टमाटर (Solanum lycopersicum) में स्तंभीय (Axile) बीजाण्डन्यास पाया जाता है।
विशेषता: इसमें अंडाशय बहुकोष्ठीय (Multilocular) होता है। बीजाण्ड केंद्र में स्थित एक केंद्रीय अक्ष (Central axis) से जुड़े होते हैं, जहाँ कोष्ठकों के बीच के पट (Septa) मिलते हैं।
पहचान: यदि आप टमाटर को बीच में से गोल काटें (Transverse section), तो आपको केंद्र में एक ठोस अक्ष दिखाई देगा जिससे बीज जुड़े होते हैं और आसपास दो या दो से अधिक खाने (Locules) बने होते हैं।
अन्य उदाहरण: नींबू, संतरा और गुड़हल (China Rose) में भी इसी प्रकार का बीजाण्डन्यास मिलता है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) सीमान्त (Marginal): बीजाण्ड अंडाशय की केवल एक ही सतह (Ventral suture) पर लगे होते हैं। उदाहरण: मटर, चना, सेम।
(C) भित्तीय (Parietal): बीजाण्ड अंडाशय की आंतरिक दीवार पर लगे होते हैं। इसमें अंडाशय अक्सर एक कोष्ठीय होता है। उदाहरण: सरसों, मूली, ककड़ी।
(D) मुक्त स्तम्भीय (Free Central): बीजाण्ड केंद्रीय अक्ष पर होते हैं, लेकिन कोष्ठकों के बीच कोई पट (Septa) नहीं होता। उदाहरण: प्रिमरोज (Primrose), डायन्थस।
20. चतुर्दीर्घी पुंकेसर (Tetradynamous) किस कुल की विशेषता है ?
(A) सोलेनेसी
(B) ब्रेसिकेसी (सरसों कुल)
(C) लिलीएसी
(D) मालवेसी
सही उत्तर: (B) ब्रेसिकेसी (Brassicaceae / सरसों कुल)
विस्तृत व्याख्या:
चतुर्दीर्घी (Tetradynamous) अवस्था पुंकेसरों के व्यवस्थित होने की एक विशेष स्थिति है जो मुख्य रूप से सरसों परिवार (Cruciferae या Brassicaceae) में पाई जाती है।
संरचना: इस कुल के पुष्पों में कुल 6 पुंकेसर होते हैं, जो दो चक्रों (Whorls) में व्यवस्थित होते हैं:
भीतरी चक्र: इसमें 4 लंबे पुंकेसर होते हैं।
बाहरी चक्र: इसमें 2 छोटे पुंकेसर होते हैं।
समीकरण: इसे वैज्ञानिक भाषा में $A_{2+4}$ के रूप में लिखा जाता है।
उदाहरण: सरसों, मूली, राई और गोभी।
अन्य विकल्पों की विशेषताएँ:
(A) सोलेनेसी (Solanaceae): इसमें पुंकेसर ‘दललग्न’ (Epipetalous) होते हैं, यानी वे पंखुड़ियों (Petals) से जुड़े होते हैं। उदाहरण: टमाटर, मिर्च, बैंगन।
(C) लिलीएसी (Liliaceae): इसमें पुंकेसर ‘परिदललग्न’ (Epiphyllous) होते हैं, यानी वे टेपल्स (Tepals) से जुड़े होते हैं। उदाहरण: प्याज, लहसुन, एलोवेरा।
(D) मालवेसी (Malvaceae): इसमें ‘एकसंघी’ (Monadelphous) पुंकेसर पाए जाते हैं। सभी पुंकेसर के तंतु आपस में जुड़कर एक नली बना लेते हैं। उदाहरण: गुड़हल, भिंडी, कपास।
21. एकबीजपत्री बीज में बीजपत्र (Cotyledon) को क्या कहते हैं?
(A) प्रांकुरचोल
(B) स्कुटेलम (Scutellum)
(C) एल्यूरॉन
(D) भ्रूणपोष
सही उत्तर: (B) स्कुटेलम (Scutellum)
विस्तृत व्याख्या:
एकबीजपत्री (Monocot) बीजों, जैसे— मक्का, गेहूँ और बाजरा, में केवल एक बीजपत्र पाया जाता है। इस विशिष्ट बीजपत्र को स्कुटेलम कहा जाता है।
आकार और स्थिति: यह ढाल (Shield) के आकार का होता है और भ्रूण के पार्श्व में स्थित होता है।
कार्य: स्कुटेलम का मुख्य कार्य भ्रूणपोष (Endosperm) से पोषक तत्वों को अवशोषित करना और उन्हें बढ़ते हुए भ्रूण (Embryo) तक पहुँचाना है। यह सीधे तौर पर भोजन का संचय नहीं करता, बल्कि एक माध्यम की तरह काम करता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) प्रांकुरचोल (Coleoptile): यह एक सुरक्षात्मक आवरण है जो एकबीजपत्री पौधों में युवा प्रांकुर (Plumule) को ढकता है। यह प्रकाश के प्रति संवेदनशील होता है और अंकुरण के समय मिट्टी से बाहर निकलने में मदद करता है।
(C) एल्यूरॉन (Aleurone): यह भ्रूणपोष के चारों ओर पाई जाने वाली एक प्रोटीन युक्त परत है। यह बीज के अंकुरण के दौरान एंजाइम मुक्त करने में मदद करती है।
(D) भ्रूणपोष (Endosperm): यह वह ऊतक है जहाँ भोजन संचित रहता है। एकबीजपत्री बीजों में यह काफी बड़ा होता है, लेकिन यह बीजपत्र (Cotyledon) नहीं है।
एकबीजपत्री बीज की संरचना:
| भाग | कार्य |
| स्कुटेलम | पोषक तत्वों का स्थानांतरण |
| भ्रूणपोष | भोजन (स्टार्च) का भंडारण |
| मूलांकुर चोल (Coleorhiza) | मूलांकुर (Radicle) की सुरक्षा करना |
| प्रांकुर चोल (Coleoptile) | प्रांकुर (Plumule) की सुरक्षा करना |
22. अरंडी (Castor) का बीज कैसा होता है ?
(A) अभ्रूणपोषी
(B) भ्रूणपोषी (Endospermic)
(C) बीज रहित
(D) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (B) भ्रूणपोषी (Endospermic)
विस्तृत व्याख्या:
अरंडी (Ricinus communis) का बीज एक द्विबीजपत्री (Dicot) बीज होने के बावजूद अपनी श्रेणी के अन्य बीजों (जैसे चना, मटर) से अलग होता है।
भ्रूणपोषी बीज: अधिकांश द्विबीजपत्री बीजों में भ्रूण के विकास के दौरान भ्रूणपोष (Endosperm) पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, लेकिन अरंडी में ऐसा नहीं होता। इसके परिपक्व बीज में भोजन संचय के लिए भ्रूणपोष बना रहता है।
तेल का संचय: अरंडी के भ्रूणपोष में भारी मात्रा में तेल (Castor oil) संचित रहता है, जिसका उपयोग औषधीय और औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
कैरंकल (Caruncle): अरंडी के बीज की एक और खास पहचान इसके बीजाण्डद्वार (Micropyle) के पास पाई जाने वाली सफेद, मांसल संरचना है जिसे ‘कैरंकल’ कहते हैं। यह नमी सोखने में मदद करता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) अभ्रूणपोषी (Non-endospermic): ये वे बीज हैं जिनमें भ्रूणपोष नहीं बचता और भोजन बीजपत्रों (Cotyledons) में जमा होता है। अधिकांश द्विबीजपत्री (जैसे— चना, मटर, मूंगफली) इसी श्रेणी में आते हैं।
(C) बीज रहित (Seedless): अरंडी एक उन्नत बीज वाला पौधा है। बीज रहित अवस्था आमतौर पर संकर फलों (जैसे बिना बीज के अंगूर या केला) में पाई जाती है।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य:
सामान्य नियम: एकबीजपत्री बीज = भ्रूणपोषी; द्विबीजपत्री बीज = अभ्रूणपोषी।
अपवाद (Exception): अरंडी एक ऐसा द्विबीजपत्री है जो भ्रूणपोषी है, और ऑर्किड एक ऐसा एकबीजपत्री है जो अभ्रूणपोषी है। परीक्षाओं में अक्सर ये अपवाद ही पूछे जाते हैं।
23. मक्का के दाने में प्रोटीन युक्त परत क्या कहलाती है ?
(A) बीजचोल
(B) एल्यूरॉन परत (Aleurone Layer)
(C) स्कुटेलम
(D) मूलांकुरचोल
सही उत्तर: (B) एल्यूरॉन परत (Aleurone Layer)
विस्तृत व्याख्या:
मक्का (Zea mays) एक एकबीजपत्री (Monocot) अनाज है। इसके दाने (जो तकनीकी रूप से एक फल है जिसे कैरियोप्सिस कहते हैं) में एक विशिष्ट प्रोटीन युक्त परत पाई जाती है।
स्थिति: यह परत भ्रूणपोष (Endosperm) के बाहरी हिस्से को घेरती है और उसे बीजचोल (Seed coat) से अलग करती है।
संरचना: एल्यूरॉन परत विशेष कोशिकाओं से बनी होती है जो प्रोटीन के कणों से भरपूर होती हैं।
कार्य: अंकुरण के समय, यह परत कुछ विशेष एंजाइम (जैसे— अल्फा एमाइलेज) का स्राव करती है जो भ्रूणपोष में जमा स्टार्च को शर्करा में तोड़कर बढ़ते हुए भ्रूण को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
अन्य विकल्पों का विवरण:
(A) बीजचोल (Seed Coat): यह बीज का सबसे बाहरी सुरक्षात्मक आवरण है। मक्का में, फल की भित्ति (Pericarp) और बीजचोल आपस में जुड़े रहते हैं।
(C) स्कुटेलम (Scutellum): यह मक्का के दाने का बीजपत्र (Cotyledon) है। यह भोजन का अवशोषण करने में मदद करता है, लेकिन यह प्रोटीन की “परत” नहीं है।
(D) मूलांकुरचोल (Coleorhiza): यह एक सुरक्षात्मक आवरण है जो नीचे की ओर स्थित मूलांकुर (Radicle) को ढकता है।
24. नारियल का खाने योग्य भाग कौन सा है ?
(A) फलभित्ति
(B) भ्रूणपोष (Endosperm)
(C) बीजचोल
(D) पुष्पासन
सही उत्तर: (B) भ्रूणपोष (Endosperm)
विस्तृत व्याख्या:
नारियल (Cocos nucifera) का फल वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से एक अष्ठिल फल (Drupe) है। इसमें हम जो सफेद हिस्सा (गिरी) खाते हैं और जो पानी पीते हैं, वे दोनों ही भ्रूणपोष के विभिन्न रूप हैं।
नारियल पानी (Liquid Endosperm): यह ‘मुक्त नाभिकीय भ्रूणपोष’ (Free nuclear endosperm) है। इसमें हजारों केंद्रक तरल रूप में तैरते रहते हैं। यह पोषण और खनिजों का बहुत समृद्ध स्रोत है।
सफेद गिरी (Solid Endosperm): जैसे-जैसे नारियल परिपक्व होता है, केंद्रकों के चारों ओर कोशिका भित्ति बनने लगती है और वे किनारे पर जमा होने लगते हैं। इसे ‘कोशिकीय भ्रूणपोष’ (Cellular endosperm) कहते हैं।
कार्य: भ्रूणपोष का मुख्य उद्देश्य विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करना है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) फलभित्ति (Pericarp): नारियल की बाहरी फलभित्ति (Epicarp) चिकनी होती है, मध्य फलभित्ति (Mesocarp) रेशेदार होती है (जिससे जटा/coir बनती है), और अंतः फलभित्ति (Endocarp) बहुत कठोर (कवर) होती है। इनमें से कोई भी खाने योग्य नहीं होता।
(C) बीजचोल (Seed Coat): यह सफेद गिरी के ऊपर चिपकी हुई पतली भूरी परत होती है, लेकिन मुख्य खाने योग्य भाग इसके अंदर का भ्रूणपोष है।
(D) पुष्पासन (Thalamus): पुष्पासन सेब या नाशपाती जैसे ‘आभासी फलों’ में खाया जाता है, नारियल में नहीं।
25. बिना निषेचन के फल बनने की क्रिया को क्या कहते हैं?
(A) अनिषेकजनन
(B) अनिषेकफलन (Parthenocarpy)
(C) बहुभ्रूणता
(D) असंगजनन
सही उत्तर: (B) अनिषेकफलन (Parthenocarpy)
विस्तृत व्याख्या:
सामान्यतः फल का निर्माण निषेचन (Fertilization) के बाद अंडाशय से होता है। लेकिन जब बिना निषेचन के ही अंडाशय फल में विकसित हो जाता है, तो इस प्रक्रिया को अनिषेकफलन कहते हैं।
बीज रहित फल: चूंकि इस प्रक्रिया में निषेचन नहीं होता, इसलिए इन फलों में बीज नहीं बनते या वे बहुत ही अल्पविकसित होते हैं।
प्राकृतिक उदाहरण: केला प्राकृतिक अनिषेकफलन का सबसे अच्छा उदाहरण है।
कृत्रिम उपयोग: आजकल हार्मोन (जैसे— ऑक्सिन और जिबरेलिन) के छिड़काव से अंगूर, संतरा, तरबूज और ककड़ी में कृत्रिम रूप से बीज रहित फल प्राप्त किए जा रहे हैं।
अन्य विकल्प क्या हैं?
(A) अनिषेकजनन (Parthenogenesis): जब बिना निषेचन के बीज या नया जीव विकसित होता है। यह मुख्य रूप से जंतुओं (जैसे मधुमक्खी) में देखा जाता है।
(C) बहुभ्रूणता (Polyembryony): जब एक ही बीज के अंदर एक से अधिक भ्रूण (Embryos) विकसित हो जाते हैं। यह नींबू और संतरे (साइट्रस फलों) में आम तौर पर पाया जाता है।
(D) असंगजनन (Apomixis): यह लैंगिक जनन का एक विकल्प है जहाँ बिना निषेचन के ही बीज का निर्माण हो जाता है। यह घास के कुल (Poaceae) और एस्टेरेसी कुल के पौधों में देखा जाता है।
एक नज़र में अंतर:
| प्रक्रिया | परिणाम |
| अनिषेकफलन | बीज रहित फल का बनना |
| असंगजनन | बिना निषेचन के बीज का बनना |
| बहुभ्रूणता | एक बीज में कई भ्रूण का होना |
26. तुलसी (Ocimum) में पाया जाने वाला विशेष प्रकार का पुष्पक्रम कौन सा है ?
(A) साइथियम
(B) कूटचक्रक (Verticillaster)
(C) हाइपेन्थोडियम
(D) मुण्डक
सही उत्तर: (B) कूटचक्रक (Verticillaster)
विस्तृत व्याख्या:
तुलसी (Ocimum sanctum), जो लेबिएटी (Lamiaceae) कुल का पौधा है, में एक अत्यंत विशिष्ट पुष्पक्रम पाया जाता है जिसे कूटचक्रक (Verticillaster) कहते हैं।
संरचना: इसमें फूल तने की पर्वसंधियों (Nodes) पर निकलते हैं। वास्तव में, यह दो आमने-सामने स्थित ‘ससीमाक्ष’ (Cymose) समूहों का मिश्रण होता है।
दिखावट: चूँकि ये फूल पर्वसंधि के चारों ओर बहुत सघनता से लगे होते हैं, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि वे तने के चारों ओर एक चक्र (Whorl) बना रहे हैं। इसीलिए इसे “कूट” (झूठा) चक्रक कहा जाता है क्योंकि यह वास्तविक चक्र नहीं बल्कि सघन समूहों का जोड़ है।
विशेषता: यह केवल तुलसी और पुदीने जैसे लेबिएटी कुल के पौधों की एक प्रमुख पहचान है।
अन्य विकल्प क्या हैं?
(A) साइथियम (Cyathium): यह एक प्यालेनुमा पुष्पक्रम है जिसमें एक मादा फूल बीच में और कई नर फूल किनारे पर होते हैं। उदाहरण: यूफोर्बिया (Euphorbia)।
(C) हाइपेन्थोडियम (Hypanthodium): इसमें पुष्पक्रम का मुख्य अक्ष एक मांसल बंद थैले (Receptacle) जैसा हो जाता है जिसके अंदर की ओर फूल होते हैं। उदाहरण: पीपल, बरगद और अंजीर।
(D) मुण्डक (Capitulum): इसमें मुख्य अक्ष चपटा होकर पुष्पासन बनाता है जिस पर बहुत सारे छोटे फूल लगे होते हैं। जैसा कि हमने पहले चर्चा की, यह सूरजमुखी में पाया जाता है।
27. पीपल और गूलर (Ficus) में पाया जाने वाला बंद, घड़ेनुमा पुष्पक्रम कहलाता है:
(A) उदुम्बरक (Hypanthodium)
(B) छत्रक
(C) असीमाक्ष
(D) समशिख
सही उत्तर: (A) उदुम्बरक (Hypanthodium)
विस्तृत व्याख्या:
पीपल, बरगद और गूलर (Ficus प्रजाति) में एक बहुत ही अनोखा और बंद प्रकार का पुष्पक्रम पाया जाता है, जिसे उदुम्बरक या हाइपेन्थोडियम (Hypanthodium) कहते हैं।
संरचना: इसमें पुष्पक्रम का मुख्य अक्ष (Peduncle) मांसल होकर एक घड़े या थैले जैसी बंद संरचना बना लेता है। इस घड़े के शीर्ष पर एक छोटा सा छिद्र होता है जिसे ओस्टियोल (Osteole) कहते हैं।
फूलों की स्थिति: इस बंद घड़े के अंदर की दीवार पर तीन प्रकार के छोटे-छोटे फूल लगे होते हैं:
नर फूल: छिद्र (ओस्टियोल) के पास स्थित होते हैं।
मादा फूल: घड़े के आधार (नीचे) की ओर स्थित होते हैं।
बंध्य मादा फूल (Gall Flowers): ये बीच में होते हैं और बीज नहीं बनाते।
परागण: चूंकि फूल अंदर बंद होते हैं, इसलिए इनका परागण एक विशेष कीट (Blastophaga ततैया) द्वारा होता है जो छिद्र के माध्यम से अंदर प्रवेश करता है।
अन्य विकल्प क्या हैं?
(B) छत्रक (Umbel): इसमें सभी फूलों के डंठल एक ही बिंदु से निकलते हैं और ऊपर जाकर छाते जैसी संरचना बनाते हैं। उदाहरण: धनिया, सौंफ और जीरा।
(C) असीमाक्ष (Racemose): इसमें मुख्य अक्ष लगातार बढ़ता रहता है और पुराने फूल नीचे व नए फूल ऊपर की ओर होते हैं। उदाहरण: सरसों।
(D) समशिख (Corymb): इसमें नीचे वाले फूलों के डंठल लंबे और ऊपर वाले के छोटे होते हैं, जिससे सभी फूल लगभग एक ही ऊंचाई पर आ जाते हैं। उदाहरण: चाँदनी (Candytuft)।
28. ‘सिप्सेला’ (Cypsela) फल किस कुल की मुख्य विशेषता है?
(A) सोलेनेसी
(B) एस्टेरेसी (सूरजमुखी कुल)
(C) लिलीएसी
(D) मालवेसी
सही उत्तर: (B) एस्टेरेसी (Asteraceae / सूरजमुखी कुल)
विस्तृत व्याख्या:
सिप्सेला (Cypsela) एक विशेष प्रकार का शुष्क, एक-बीजीय फल है जो मुख्य रूप से एस्टेरेसी (कंपोजिटी) कुल के पौधों में पाया जाता है।
संरचना: यह फल एक द्वि-अण्डपी (Bicarpellary) और अधोवर्ती (Inferior) अंडाशय से विकसित होता है।
विशेषता (पप्पस): इस फल की सबसे बड़ी पहचान इसके ऊपर पाया जाने वाला ‘पप्पस’ (Pappus) है। यह वास्तव में रूपांतरित बाह्यदल (Calyx) होते हैं जो बालों या रेशों जैसी संरचना बना लेते हैं।
प्रकीर्णन: ये रेशेदार संरचनाएं (पप्पस) एक ‘पैराशूट’ की तरह काम करती हैं, जिससे हवा के जरिए बीज बहुत दूर तक उड़कर फैल जाते हैं।
उदाहरण: सूरजमुखी, गेंदा और डहेलिया।
अन्य विकल्पों के फलों के प्रकार:
(A) सोलेनेसी (Solanaceae): इस कुल में फल आमतौर पर सरस (Berry) जैसे टमाटर, मिर्च या सम्पुट (Capsule) जैसे धतूरा होते हैं।
(C) लिलीएसी (Liliaceae): इसमें फल मुख्य रूप से सम्पुट (Capsule) या कभी-कभी सरस (Berry) होते हैं। उदाहरण: प्याज, एलोवेरा।
(D) मालवेसी (Malvaceae): इसमें फल सम्पुट (Capsule) या साइजोकार्प (Schizocarp) प्रकार के होते हैं। उदाहरण: भिंडी, कपास।
29. लीची का खाने योग्य भाग (Edible part) कौन सा है ?
(A) मध्य फलभित्ति
(B) मांसल एरिल (Aril)
(C) पुष्पासन
(D) बीजपत्र
सही उत्तर: (B) मांसल एरिल (Aril)
विस्तृत व्याख्या:
लीची (Litchi chinensis) का फल संरचनात्मक रूप से एक ‘नट’ (Nut) की श्रेणी में आता है, लेकिन इसका जो भाग हम खाते हैं, वह न तो फलभित्ति है और न ही बीज।
एरिल (Aril) क्या है?: यह बीज के चारों ओर विकसित होने वाली एक तीसरी सुरक्षात्मक परत या बाहरी आवरण (Outgrowth) है। यह सफेद, पारभासी (Translucent), रसीला और मीठा होता है।
विकास: यह बीज के आधार (Funicle) से विकसित होता है और जैसे-जैसे फल पकता है, यह पूरे बीज को ढक लेता है।
विशेषता: लीची की बाहरी लाल और कांटेदार परत इसकी फलभित्ति (Pericarp) है, जिसे हम छीलकर फेंक देते हैं। अंदर का कड़ा हिस्सा बीज है, और इन दोनों के बीच का मांसल हिस्सा एरिल है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) मध्य फलभित्ति (Mesocarp): यह आम और पपीते का मुख्य खाने योग्य भाग है।
(C) पुष्पासन (Thalamus): यह सेब और नाशपाती जैसे कूट फलों (False fruits) में खाया जाता है।
(D) बीजपत्र (Cotyledon): यह काजू, मूंगफली, और बादाम जैसे बीजों का मुख्य पोषक हिस्सा है।
30. निम्नलिखित में से कौन सा फल ‘सरस’ (Berry) का उदाहरण है?
(A) आम
(B) टमाटर
(C) नारियल
(D) मटर
सही उत्तर: (B) टमाटर
विस्तृत व्याख्या:
वनस्पति विज्ञान में ‘सरस फल’ (Berry) एक विशेष श्रेणी का मांसल फल है। इसकी मुख्य पहचान यह है कि इसमें फलभित्ति (Pericarp) के तीनों भाग—बाह्य, मध्य और अंतः फलभित्ति—पूरी तरह से गूदेदार या रसीले हो जाते हैं।
टमाटर: इसमें बीज सीधे तौर पर मांसल ऊतक (Placenta) में धंसे रहते हैं। फल पकने पर पूरा का पूरा फल खाने योग्य और कोमल हो जाता है।
अन्य उदाहरण: अंगूर, बैंगन, मिर्च, अमरूद और केला भी ‘सरस फल’ (Berry) की श्रेणी में ही आते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) आम (Mango): यह एक अष्ठिल फल (Drupe) है। इसकी विशेषता यह है कि इसकी ‘अंतः फलभित्ति’ (Endocarp) बहुत कठोर और पथरीली होती है जिसे हम ‘गुठली’ कहते हैं।
(C) नारियल (Coconut): यह भी एक अष्ठिल फल (Drupe) है। इसकी मध्य फलभित्ति रेशेदार होती है और अंतः फलभित्ति बहुत कठोर होती है।
(D) मटर (Pea): यह एक फली (Legume / Pod) है। यह शुष्क फल की श्रेणी में आता है जो पकने पर अपने आप फट जाता है।
सरस फल (Berry) vs अष्ठिल फल (Drupe) में अंतर:
| विशेषता | सरस फल (Berry) | अष्ठिल फल (Drupe) |
| अंतः फलभित्ति | कोमल और खाने योग्य | अत्यंत कठोर (गुठली) |
| बीज | कई बीज (अक्सर) | प्रायः एक बड़ा बीज |
| उदाहरण | टमाटर, अंगूर | आम, नारियल, बेर |
31. ‘आम’ के फल में हम कौन सा भाग खाते हैं ?
(A) बाह्य फलभित्ति
(B) मध्य फलभित्ति (Mesocarp)
(C) अन्तः फलभित्ति
(D) संपूर्ण फल
सही उत्तर: (B) मध्य फलभित्ति (Mesocarp)
विस्तृत व्याख्या:
आम (Mangifera indica) को अष्ठिल फल (Drupe) की श्रेणी में रखा जाता है। इसकी फलभित्ति (Pericarp) तीन स्पष्ट परतों में विभाजित होती है:
बाह्य फलभित्ति (Epicarp): यह आम का बाहरी छिलका होता है, जिसे आमतौर पर खाने से पहले उतार दिया जाता है।
मध्य फलभित्ति (Mesocarp): यह बीच वाला मांसल, रसीला और मीठा भाग है जिसे हम मुख्य रूप से खाते हैं।
अन्तः फलभित्ति (Endocarp): यह सबसे भीतरी भाग है जो बहुत कठोर और पथरीला हो जाता है (गुठली का बाहरी आवरण)। यह बीज की रक्षा करता है और खाने योग्य नहीं होता।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(A) बाह्य फलभित्ति: जैसा कि बताया गया, यह केवल छिलका है।
(C) अन्तः फलभित्ति: यह भाग बहुत कड़क होता है, इसलिए इसे खाया नहीं जा सकता।
(D) संपूर्ण फल: हम आम का पूरा फल नहीं खाते (छिलका और गुठली छोड़ देते हैं), जबकि अमरूद या अंगूर जैसे फलों में लगभग संपूर्ण फल खाया जाता है।
एक नज़र में तुलना:
| फल | खाने योग्य भाग |
| आम | मध्य फलभित्ति (Mesocarp) |
| नारियल | भ्रूणपोष (Endosperm) |
| लीची | एरिल (Aril) |
| सेब | पुष्पासन (Thalamus) |
32. ‘वेलामेन ऊतक’ (Velamen tissue) किन जड़ों में पाया जाता है ?
(A) मूसला जड़ों में
(B) अधिपादप जड़ों (Epiphytic roots) में
(C) श्वसन मूल में
(D) परजीवी जड़ों में
सही उत्तर: (B) अधिपादप जड़ों (Epiphytic roots) में
विस्तृत व्याख्या:
वेलामेन (Velamen) एक विशेष प्रकार का स्पंजी ऊतक है जो कुछ विशिष्ट पौधों की हवाई जड़ों (Aerial roots) में पाया जाता है।
अधिपादप (Epiphytes): ये वे पौधे होते हैं जो दूसरे पौधों पर केवल सहारे के लिए उगते हैं (भोजन के लिए नहीं)। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ऑर्किड (Orchid) है।
कार्य: चूँकि ये पौधे हवा में लटके होते हैं और इनकी जड़ें मिट्टी तक नहीं पहुँचतीं, इसलिए वेलामेन ऊतक हवा में मौजूद नमी (Atmospheric moisture) को सोखने का कार्य करता है। यह एक स्पंज की तरह काम करता है।
संरचना: यह मृत कोशिकाओं की कई परतों से बना होता है जो जड़ों के बाहरी हिस्से पर आवरण बनाती हैं।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) मूसला जड़ें (Tap roots): ये सामान्यतः जमीन के अंदर होती हैं और पानी का अवशोषण मिट्टी से करती हैं, इसलिए इनमें वेलामेन की आवश्यकता नहीं होती।
(C) श्वसन मूल (Pneumatophores): ये दलदली क्षेत्रों के पौधों (जैसे राइजोफोरा) में श्वसन के लिए जमीन से ऊपर निकलती हैं, लेकिन इनका मुख्य कार्य गैसों का विनिमय है, नमी सोखना नहीं।
(D) परजीवी जड़ें (Parasitic roots): ये जड़ें (जैसे अमरबेल/Cuscuta में) मेजबान पौधे के ऊतकों में घुसकर भोजन चुराती हैं, इन्हें ‘चुषकांग’ (Haustoria) कहते हैं।
33. ऑस्ट्रेलियन बबूल (Acacia) में प्रकाश संश्लेषण करने वाला चौड़ा पर्णवृंत कहलाता है :-
(A) फाइलोड (Phyllode)
(B) फाइलोक्लेड
(C) प्रतान
(D) शल्क
सही उत्तर: (A) फाइलोड (Phyllode)
विस्तृत व्याख्या:
ऑस्ट्रेलियन बबूल (Acacia auriculoformis) मरुस्थलीय परिस्थितियों में रहने के लिए एक विशेष प्रकार का अनुकूलन दिखाता है।
रूपांतरण: इसमें वास्तविक पत्तियाँ बहुत छोटी और अल्पकालिक (जल्दी गिरने वाली) होती हैं ताकि वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि को रोका जा सके।
फाइलोड (Phyllode): पत्तियों की कमी को पूरा करने के लिए, पत्ती का डंठल यानी पर्णवृंत (Petiole) चपटा, हरा और फैलकर पत्ती जैसा आकार ले लेता है। यही संरचना फाइलोड कहलाती है।
कार्य: यह फाइलोड ही पौधे के लिए प्रकाश संश्लेषण (भोजन बनाने) का मुख्य कार्य करता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(B) फाइलोक्लेड (Phylloclade): इसमें पूरा का पूरा तना (Stem) चपटा और हरा होकर पत्ती जैसा बन जाता है। उदाहरण: नागफनी (Opuntia)।
(C) प्रतान (Tendril): यह सहारा लेकर चढ़ने वाली संरचना है (जैसे मटर में)।
(D) शल्क (Scale): ये छोटी, सूखी पत्तियाँ होती हैं जो सुरक्षा का कार्य करती हैं।
34. द्विबीजपत्री बीजों में भोजन मुख्य रूप से कहाँ संचित होता है ?
(A) भ्रूणपोष में
(B) बीजपत्रों (Cotyledons) में
(C) बीजचोल में
(D) मूलांकुर में
सही उत्तर: (B) बीजपत्रों (Cotyledons) में
विस्तृत व्याख्या:
अधिकांश द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों के बीजों में भोजन संचय की प्रक्रिया एकबीजपत्री पौधों से भिन्न होती है।
संचय का स्थान: द्विबीजपत्री बीजों (जैसे— चना, मटर, मूंगफली, सेम) में विकास के दौरान भ्रूणपोष (Endosperm) पूरी तरह से बढ़ते हुए भ्रूण द्वारा उपभोग कर लिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप, भोजन बीजपत्रों (Cotyledons) में जमा हो जाता है, जिससे वे मांसल और मोटे हो जाते हैं।
अभ्रूणपोषी बीज: इसी कारण इन बीजों को ‘अभ्रूणपोषी’ (Non-endospermic) बीज भी कहा जाता है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) भ्रूणपोष में: यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री (Monocot) बीजों (जैसे— मक्का, गेहूँ, बाजरा) में भोजन संचय का स्थान है। (अपवाद: अरंडी एक द्विबीजपत्री है जिसमें भोजन भ्रूणपोष में होता है)।
(C) बीजचोल (Seed Coat): यह केवल बीज का बाहरी कठोर आवरण है जो सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें भोजन संचित नहीं होता।
(D) मूलांकुर (Radicle): यह भ्रूण का वह हिस्सा है जिससे भविष्य में जड़ का विकास होता है। यह स्वयं भोजन संचित नहीं करता बल्कि संचित भोजन का उपयोग करके वृद्धि करता है।
35. नारियल के कठोर छिलके (Endocarp) की प्रकृति कैसी होती है ?
(A) मृदूतकी
(B) दृढ़ोतक (Sclerenchymatous)
(C) स्थूलकोणोतक
(D) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (B) दृढ़ोतक (Sclerenchymatous)
विस्तृत व्याख्या:
नारियल का कठोर बाहरी आवरण (Endocarp), जिसे हम सामान्य भाषा में ‘काचली’ या कठोर छिलका कहते हैं, दृढ़ोतक (Sclerenchyma) कोशिकाओं से बना होता है।
कोशिका की प्रकृति: ये कोशिकाएं मृत होती हैं और इनकी कोशिका भित्ति अत्यंत मोटी होती है।
लिग्निन (Lignin): इनकी भित्तियों पर लिग्निन नामक रासायनिक पदार्थ का जमाव होता है, जो इसे पत्थर जैसी मजबूती (Stoniness) प्रदान करता है। इसी कारण नारियल का अंतः फलभित्ति वाला हिस्सा इतना कठोर होता है कि वह अंदर के बीज और भ्रूणपोष की सुरक्षा कर सके।
स्केलेराइड्स (Sclereids): विशेष रूप से, इसमें ‘अष्ठि कोशिकाएं’ (Stone cells) पाई जाती हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(A) मृदूतकी (Parenchymatous): ये कोशिकाएं जीवित, पतली और कोमल होती हैं। ये मुख्य रूप से फल के गूदे (जैसे आम का गूदा) में पाई जाती हैं।
(C) स्थूलकोणोतक (Collenchymatous): ये कोशिकाएं पौधों के लचीले अंगों (जैसे नई टहनी या पत्ती के डंठल) को यांत्रिक सहारा देती हैं। इनमें केवल कोनों पर सेल्यूलोज जमा होता है, ये नारियल जैसी कठोरता पैदा नहीं कर सकतीं।
36. पुष्प का वह भाग जो निषेचन के बाद ‘बीज’ (Seed) में बदल जाता है :
(A) अंडाशय
(B) बीजाण्ड (Ovule)
(C) परागकोश
(D) वर्तिकाग्र
सही उत्तर: (B) बीजाण्ड (Ovule)
विस्तृत व्याख्या:
निषेचन (Fertilization) की क्रिया के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, जो फल और बीज के निर्माण का आधार बनते हैं।
बीजाण्ड से बीज: निषेचन के पश्चात, अंडाशय के भीतर स्थित बीजाण्ड (Ovule) विकसित होकर बीज (Seed) में बदल जाता है। बीजाण्ड के बाहरी आवरण ‘बीजचोल’ (Seed coat) बन जाते हैं।
अंडाशय से फल: पूरा अंडाशय (Ovary) विकसित और परिपक्व होकर फल (Fruit) में बदल जाता है।
[Image showing transformation of Ovule into Seed and Ovary into Fruit]
अन्य विकल्पों में क्या परिवर्तन होते हैं?
(A) अंडाशय (Ovary): जैसा कि ऊपर बताया गया है, यह निषेचन के बाद फल बनाता है।
(C) परागकोश (Anther): निषेचन के बाद पुंकेसर (जिसमें परागकोश शामिल है) आमतौर पर सूखकर गिर जाते हैं।
(D) वर्तिकाग्र (Stigma): यह पुष्प का वह हिस्सा है जहाँ परागकण गिरते हैं। निषेचन के बाद इसका कार्य समाप्त हो जाता है और यह मुरझाकर गिर जाता है।
निषेचन के बाद होने वाले प्रमुख परिवर्तन:
| निषेचन से पहले | निषेचन के बाद |
| अंडाशय | फल |
| बीजाण्ड | बीज |
| अंडाशय की दीवार | फलभित्ति (Pericarp) |
| युग्मनज (Zygote) | भ्रूण (Embryo) |
| सहायक कोशिकाएं | नष्ट हो जाती हैं |
37. ‘बहुभ्रूणता’ (Polyembryony) सामान्यतः किसमें देखी जाती है ?
(A) केला
(B) नींबू/सिट्रस (Citrus)
(C) टमाटर
(D) गेहूँ
सही उत्तर: (B) नींबू/सिट्रस (Citrus)
विस्तृत व्याख्या:
जब एक ही बीज के अंदर एक से अधिक भ्रूण (Embryos) विकसित हो जाते हैं, तो इस अवस्था को बहुभ्रूणता (Polyembryony) कहा जाता है।
खोज: इसकी खोज सबसे पहले एन्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक (Antonie van Leeuwenhoek) ने 1719 में संतरे के बीजों में की थी।
सिट्रस फलों में: नींबू, संतरा और चकोतरा जैसे खट्टे फलों में यह बहुत सामान्य है। यहाँ मुख्य भ्रूण के अलावा, बीजाण्डकाय (Nucellus) या अन्य ऊतकों की कोशिकाएँ भी भ्रूण बनाना शुरू कर देती हैं।
महत्व: बागवानी और कृषि में इसका बड़ा महत्व है क्योंकि इससे प्राप्त होने वाले पौधे (न्युसेलर भ्रूण से बने) आनुवंशिक रूप से अपनी मातृ-पादप के बिल्कुल समान (Clones) होते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
(A) केला: इसमें ‘अनिषेकफलन’ (Parthenocarpy) पाया जाता है, जिसके कारण यह बीज रहित होता है।
(C) टमाटर: टमाटर एक सामान्य सरस फल है जिसमें आमतौर पर प्रति बीज एक ही भ्रूण होता है।
(D) गेहूँ: यह एकबीजपत्री अनाज है जिसमें सामान्यतः एक बीज में एक ही भ्रूण पाया जाता है।
38. पुमंग के स्वतंत्र पुंकेसर जब एक ही गुच्छे में जुड़े हों, तो उसे क्या कहते हैं ?
(A) द्विसंघी
(B) एकसंघी (Monadelphous)
(C) बहुसंघी
(D) युक्तकोशी
सही उत्तर: (B) एकसंघी (Monadelphous)
विस्तृत व्याख्या:
जब किसी पुष्प के सभी पुंकेसरों (Stamens) के तंतु (Filaments) आपस में जुड़कर एक ही गुच्छा या एक नली (Staminal tube) बना लेते हैं, लेकिन उनके परागकोष (Anthers) स्वतंत्र रहते हैं, तो इस स्थिति को एकसंघी कहा जाता है।
विशेषता: इसमें सभी पुंकेसर मिलकर एक संघ (Group) बनाते हैं जो प्रायः जायांग (Gynoecium) की वर्तिका के चारों ओर एक सुरक्षात्मक नली जैसी संरचना बना लेते हैं।
उदाहरण: यह मालवेसी (Malvaceae) कुल की प्रमुख विशेषता है, जैसे— गुड़हल (China Rose), भिंडी और कपास।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) द्विसंघी (Diadelphous): जब पुंकेसर जुड़कर दो समूह या गुच्छे बनाते हैं। उदाहरण: मटर ($9+1$ की व्यवस्था, जहाँ 9 पुंकेसर एक साथ और 1 अलग होता है)।
(C) बहुसंघी (Polyadelphous): जब पुंकेसर जुड़कर दो से अधिक (कई) गुच्छे बनाते हैं। उदाहरण: नींबू (Citrus) और सेमल।
(D) युक्तकोशी (Syngenesious): इसमें पुंकेसरों के परागकोष आपस में जुड़े होते हैं, लेकिन उनके तंतु स्वतंत्र रहते हैं। उदाहरण: सूरजमुखी।
39. मटर के फूल में सबसे बड़ा दल (Petal) क्या कहलाता है ?
(A) ध्वजक (Vexillum/Standard)
(B) विंग्स
(C) कील
(D) दलपुंज
सही उत्तर: (A) ध्वजक (Vexillum/Standard)
विस्तृत व्याख्या:
मटर (Pisum sativum) के फूल में एक विशेष प्रकार का दलविन्यास (Aestivation) पाया जाता है, जिसे ‘वैक्सिलरी’ (Vexillary) या पपिलीओनेसियस दलविन्यास कहते हैं। इसमें कुल 5 पंखुड़ियाँ (Petals) होती हैं जो आकार में असमान होती हैं।
ध्वजक (Vexillum/Standard): यह सबसे बाहरी और सबसे बड़ा दल होता है। यह पंख जैसी अन्य पंखुड़ियों को ढंकने का काम करता है।
पंख या विंग्स (Wings/Alae): ये दो पार्श्व (Side) की पंखुड़ियाँ होती हैं जो मध्यम आकार की होती हैं।
नौतल या कील (Keel/Carina): ये सबसे भीतर की दो छोटी पंखुड़ियाँ होती हैं जो आपस में जुड़ी होती हैं और जनन अंगों (पुंकेसर और अंडप) को घेरकर रखती हैं।
याद रखने के लिए संरचना (Formula):
मटर के दलपुंज को अक्सर 1 + 2 + (2) के रूप में दर्शाया जाता है:
1 = ध्वजक (सबसे बड़ा)
2 = विंग्स (पार्श्व)
(2) = कील (सबसे छोटे और जुड़े हुए)
40. सरसों (Mustard) में अंडाशय की स्थिति कैसी होती है ?
(A) ऊर्ध्ववर्ती (Superior)
(B) अधोवर्ती (Inferior)
(C) अर्ध-अधोवर्ती
(D) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (A) ऊर्ध्ववर्ती (Superior)
विस्तृत व्याख्या:
सरसों (Brassica campestris) के पुष्प में अंडाशय (Ovary) की स्थिति ऊर्ध्ववर्ती होती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘जायांगोपरिक’ (Hypogynous) पुष्प कहा जाता है।
ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय (Superior Ovary): इसमें अंडाशय पुष्पासन (Thalamus) के सबसे ऊपरी स्थान पर स्थित होता है। पुष्प के अन्य सभी भाग जैसे— बाह्यदल (Sepals), दल (Petals) और पुंकेसर (Stamens), अंडाशय के नीचे से निकलते हैं।
चिह्न: पुष्प सूत्र (Floral Formula) में इसे $G$ के नीचे एक रेखा खींचकर $(\underline{G})$ दर्शाया जाता है।
विशेषता: सरसों में अंडाशय शुरू में एक कोष्ठकीय (Unilocular) होता है, लेकिन बाद में एक कूट पट (False septum) जिसे ‘रेप्लम’ (Replum) कहते हैं, के बनने के कारण यह द्वि-कोष्ठकीय हो जाता है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(B) अधोवर्ती (Inferior): इसमें अंडाशय सबसे नीचे होता है और अन्य भाग ऊपर से निकलते हैं। उदाहरण: अमरूद, सूरजमुखी और लौकी। इसे $\overline{G}$ से दर्शाते हैं।
(C) अर्ध-अधोवर्ती (Half-inferior): इसमें अंडाशय बीच में होता है और अन्य भाग उसके चारों ओर से निकलते हैं। उदाहरण: गुलाब और प्लम। इसे $G-$ से दर्शाते हैं।
41. गेहूँ के दाने में भ्रूण के ढाल के आकार के बीजपत्र को कहते हैं :
(A) प्रांकुरचोल
(B) स्कुटेलम (Scutellum)
(C) एल्यूरॉन
(D) मूलांकुरचोल
सही उत्तर: (B) स्कुटेलम (Scutellum)
विस्तृत व्याख्या:
गेहूँ (Triticum aestivum) एक एकबीजपत्री (Monocot) अनाज है। एकबीजपत्री पौधों के बीजों में केवल एक ही बीजपत्र (Cotyledon) पाया जाता है, जिसे एक विशिष्ट नाम दिया गया है।
स्कुटेलम (Scutellum): गेहूँ या मक्का जैसे अनाजों में बीजपत्र ढाल (Shield) के आकार का होता है और भ्रूण के पार्श्व (side) में स्थित होता है। इसे ही ‘स्कुटेलम’ कहते हैं।
कार्य: इसका मुख्य कार्य भ्रूणपोष (Endosperm) से पोषक तत्वों को अवशोषित करना और विकासशील भ्रूण तक पहुँचाना है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
(A) प्रांकुरचोल (Coleoptile): यह एक सुरक्षात्मक आवरण है जो एकबीजपत्री पौधों में प्रांकुर (Plumule) को ढकता है। यह अंकुरण के दौरान मिट्टी से बाहर निकलने वाले पहले भाग की रक्षा करता है।
(C) एल्यूरॉन (Aleurone): यह भ्रूणपोष के चारों ओर पाई जाने वाली एक प्रोटीन युक्त परत है, बीजपत्र नहीं।
(D) मूलांकुरचोल (Coleorhiza): यह एक सुरक्षात्मक परत है जो मूलांकुर (Radicle) को घेरे रहती है।
42. बीजाण्ड का वह स्थान जहाँ बीजाण्डवृत्त (Funiculus) जुड़ा होता है:
(A) द्वार (Micropyle)
(B) नाभिका (Hilum)
(C) निभाग (Chalaza)
(D) भ्रूणकोष
सही उत्तर: (B) नाभिका (Hilum)
विस्तृत व्याख्या:
बीजाण्ड (Ovule) की संरचना में वह विशिष्ट बिंदु जहाँ वह अपने डंठल (बीजाण्डवृत्त) से जुड़ता है, नाभिका (Hilum) कहलाता है।
नाभिका (Hilum): यह बीजाण्ड के शरीर और बीजाण्डवृत्त (Funiculus) के बीच के संधि-स्थल (Junction) को दर्शाता है। एक परिपक्व बीज पर इसे एक छोटे से निशान (Scar) के रूप में देखा जा सकता है।
बीजाण्डवृत्त (Funiculus): यह वह डंठल है जो बीजाण्ड को अंडाशय की दीवार (Placenta) से जोड़कर रखता है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
(A) द्वार (Micropyle): बीजाण्ड के शीर्ष पर स्थित एक छोटा सा छिद्र जहाँ ‘अध्यावरण’ (Integuments) नहीं होते। यहाँ से पराग नलिका (Pollen tube) बीजाण्ड में प्रवेश करती है।
(C) निभाग (Chalaza): यह बीजाण्ड का आधारिय भाग (Basal part) होता है, जो बीजाण्डद्वार (Micropyle) के ठीक विपरीत दिशा में स्थित होता है। यहीं से अध्यावरणों की शुरुआत होती है।
(D) भ्रूणकोष (Embryo Sac): यह बीजाण्ड के भीतर स्थित मादा युग्मकोद्भिद (Female Gametophyte) है, जहाँ निषेचन की क्रिया संपन्न होती है।
43. किस फल में खाने योग्य भाग ‘पुष्पासन’ (Thalamus) होता है ?
(A) अमरूद
(B) सेब और नाशपाती
(C) आम
(D) अंगूर
सही उत्तर: (B) सेब और नाशपाती
विस्तृत व्याख्या:
सेब और नाशपाती को ‘आभासी फल’ (False Fruit) कहा जाता है क्योंकि इनका विकास केवल अंडाशय (Ovary) से न होकर पुष्प के अन्य भागों से होता है।
पुष्पासन (Thalamus): सेब और नाशपाती में निषेचन के बाद पुष्पासन मांसल, रसीला और बड़ा हो जाता है, जो बीज वाले वास्तविक फल (Core) को चारों ओर से घेर लेता है। हम इसी मांसल पुष्पासन को मुख्य रूप से खाते हैं।
आभासी फल क्यों?: सामान्यतः फल का निर्माण केवल अंडाशय से होता है, लेकिन जब पुष्प का कोई अन्य भाग (जैसे पुष्पासन) फल का मुख्य खाने योग्य हिस्सा बन जाए, तो उसे ‘आभासी फल’ (False Fruit/Pome) कहते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(A) अमरूद (Guava): इसमें संपूर्ण फल (Pericarp) और मांसल बीजाण्डासन (Placenta) खाया जाता है। यह एक ‘सरस फल’ (Berry) है।
(C) आम (Mango): जैसा कि हमने पहले चर्चा की थी, इसमें मध्य फलभित्ति (Mesocarp) खाई जाती है।
(D) अंगूर (Grape): इसमें फलभित्ति (Pericarp) और बीजाण्डासन (Placenta) दोनों खाए जाते हैं। यह भी एक ‘सरस फल’ (Berry) है।
प्रमुख फलों के खाने योग्य भाग:
| फल | खाने योग्य भाग |
| सेब, नाशपाती | पुष्पासन (Thalamus) |
| काजू | मांसल पुष्पवृंत और बीजपत्र |
| शहतूत | परिदलपुंज (Perianth) |
| लीची | मांसल एरिल (Aril) |
44. सजीवप्रजता (Vivipary) अंकुरण किसमें पाया जाता है ?
(A) मरुस्थलीय पौधों में
(B) दलदली पौधों (Mangroves) में
(C) जलीय पौधों में
(D) परजीवी पौधों में
सही उत्तर: (B) दलदली पौधों (Mangroves) में
विस्तृत व्याख्या:
सजीवप्रजता (Vivipary) अंकुरण की एक बहुत ही अनोखी और विशिष्ट अवस्था है, जो मुख्य रूप से लवणमृदोद्भिद (Halophytes) या मैंग्रोव वनस्पतियों में पाई जाती है।
प्रक्रिया: इसमें बीज का अंकुरण तब शुरू हो जाता है जब वह अभी भी मातृ पौधे (Parent Plant) से जुड़ा होता है। यानी फल के पेड़ पर लगे-लगे ही बीज से नन्हा पौधा (Seedling) बाहर निकल आता है।
कारण: दलदली या खारे पानी वाले क्षेत्रों (जैसे— सुंदरवन) में ऑक्सीजन की कमी होती है और लवणता अधिक होती है। अगर बीज सीधे दलदल में गिर जाए, तो वह सड़ सकता है या ऑक्सीजन की कमी से अंकुरित नहीं हो पाएगा।
लाभ: जब अंकुरित पौधा (जिसमें एक भारी मूलांकुर विकसित हो चुका होता है) मातृ पौधे से अलग होकर नीचे गिरता है, तो वह अपने वजन के कारण सीधे दलदल में गहराई तक धंस जाता है और तुरंत स्थापित हो जाता है।
उदाहरण: राइजोफोरा (Rhizophora), एविसेनिया (Avicennia)।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(A) मरुस्थलीय पौधे: इनमें पानी बचाने के लिए अनुकूलन होते हैं, लेकिन सजीवप्रजता नहीं पाई जाती।
(C) जलीय पौधे: इनमें बीज आमतौर पर पानी की सतह पर तैरते हैं या नीचे बैठ जाते हैं।
(D) परजीवी पौधे: ये अपने पोषण के लिए दूसरे पौधों पर निर्भर होते हैं (जैसे— अमरबेल)।
45. स्ट्रॉबेरी (Strawberry) किस प्रकार का फल है ?
(A) पुंज फल (Aggregate fruit)
(B) सरल फल
(C) संग्रथित फल
(D) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (A) पुंज फल (Aggregate fruit)
विस्तृत व्याख्या:
स्ट्रॉबेरी एक पुंज फल (Aggregate fruit) का उदाहरण है, जिसे वनस्पति विज्ञान की भाषा में ‘ऐटाएरियो ऑफ एकीन्स’ (Etaerio of achenes) कहा जाता है।
विकास: यह एक ऐसे पुष्प से विकसित होता है जिसमें बहुअण्डपी (Multicarpellary) और वियुक्ताण्डपी (Apocarpous) जायांग होता है। इसका मतलब है कि एक ही फूल में कई स्वतंत्र अंडाशय होते हैं।
संरचना: स्ट्रॉबेरी का प्रत्येक अंडाशय एक छोटे सूखे फल (एकीन) में बदल जाता है, जो हमें स्ट्रॉबेरी की सतह पर छोटे-छोटे दानों या बीजों के रूप में दिखाई देते हैं।
पुष्पासन (Thalamus): स्ट्रॉबेरी का लाल, मांसल और मीठा भाग जिसे हम खाते हैं, वह वास्तव में इसका बढ़ा हुआ पुष्पासन है, जिस पर ये छोटे-छोटे फल (पुंज) चिपके रहते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(B) सरल फल (Simple fruit): ये एक पुष्प के एक ही अंडाशय से विकसित होते हैं। उदाहरण: आम, टमाटर।
(C) संग्रथित फल (Composite fruit): ये पूरे के पूरे पुष्पक्रम (Inflorescence) से विकसित होते हैं। उदाहरण: कटहल, अनानास, शहतूत।
फलों के प्रकार की तुलना:
| फल का प्रकार | विकास | उदाहरण |
| सरल फल | एक फूल + एक अंडाशय | मटर, आम |
| पुंज फल | एक फूल + कई स्वतंत्र अंडाशय | स्ट्रॉबेरी, रसभरी |
| संग्रथित फल | पूरा पुष्पक्रम | कटहल, अंजीर |
46. परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया कहलाती है:
(A) निषेचन
(B) परागण (Pollination)
(C) विसरण
(D) अंकुरण
सही उत्तर: (B) परागण (Pollination)
विस्तृत व्याख्या:
पुष्पी पौधों में जनन प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण परागण है।
प्रक्रिया: जब पुष्प के नर भाग यानी परागकोश (Anther) से परागकण (Pollen grains) निकलकर उसी पुष्प या उसी जाति के दूसरे पुष्प के मादा भाग यानी वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचते हैं, तो इस क्रिया को परागण कहते हैं।
प्रकार: परागण मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
स्व-परागण (Self-pollination): जब परागकण उसी फूल या उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
पर-परागण (Cross-pollination): जब परागकण किसी माध्यम (हवा, पानी, कीट) द्वारा दूसरे पौधे पर स्थित फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
माध्यम: परागण के लिए वायु (Anemophily), जल (Hydrophily) और कीटों (Entomophily) की सहायता ली जाती है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
(A) निषेचन (Fertilization): परागण के बाद जब नर युग्मक और मादा युग्मक (अण्ड कोशिका) आपस में मिलते हैं, तो उसे निषेचन कहते हैं। इससे युग्मनज (Zygote) बनता है।
(C) विसरण (Diffusion): यह पदार्थों (गैस या तरल) के अणुओं की उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करने की एक भौतिक प्रक्रिया है।
(D) अंकुरण (Germination): जब एक बीज अनुकूल परिस्थितियों में नन्हे पौधे के रूप में विकसित होने लगता है, तो उसे अंकुरण कहते हैं।
47. ‘एल्यूरॉन परत’ (Aleurone layer) किसकी बाहरी सीमा बनाती है?
(A) भ्रूण
(B) भ्रूणपोष (Endosperm)
(C) बीजचोल
(D) नाभिका
सही उत्तर: (B) भ्रूणपोष (Endosperm)
विस्तृत व्याख्या:
मक्का और अन्य अनाजों के दानों में एल्यूरॉन परत एक बहुत ही महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सा है।
स्थिति: यह परत भ्रूणपोष (Endosperm) के सबसे बाहरी हिस्से को एक घेरे के रूप में ढंकती है। यह भ्रूणपोष को बीजचोल (Seed coat) से अलग करने का कार्य करती है।
प्रकृति: यह एक प्रोटीन युक्त परत है। इसमें ‘एल्यूरॉन कण’ पाए जाते हैं जो विकासशील भ्रूण के लिए पोषण का आधार बनते हैं।
कार्य: बीज के अंकुरण के समय, यह परत एमाइलेज (Amylase) जैसे एंजाइमों का स्राव करती है। ये एंजाइम भ्रूणपोष में संचित स्टार्च को शर्करा में बदल देते हैं, जिससे नन्हे पौधे को ऊर्जा मिलती है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(A) भ्रूण (Embryo): एल्यूरॉन परत भ्रूण के चारों ओर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से भ्रूणपोष के चारों ओर होती है, हालांकि यह भ्रूण को पोषण पहुंचाने में मदद जरूर करती है।
(C) बीजचोल (Seed coat): यह बीज का सबसे बाहरी सुरक्षात्मक आवरण है। एल्यूरॉन परत इसके अंदर की तरफ स्थित होती है।
(D) नाभिका (Hilum): यह बीज पर मौजूद वह निशान है जहाँ वह बीजाण्डवृत्त से जुड़ा था। इसका परत निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं है।
48. घटपर्णी (Pitcher plant) में घड़े के ऊपर स्थित ‘ढक्कन’ किसका रूपांतरण है?
(A) पत्ती का आधार
(B) पर्ण शिखर (Leaf apex)
(C) पर्णवृंत
(D) तना
सही उत्तर: (B) पर्ण शिखर (Leaf apex)
विस्तृत व्याख्या:
घटपर्णी या पिचर प्लांट (Nepenthes) एक कीटभक्षी पौधा है, जिसमें पत्तियाँ कीटों को पकड़ने के लिए एक विशेष ‘घड़े’ (Pitcher) के रूप में रूपांतरित हो जाती हैं।
रूपांतरण के भाग: इस पौधे की पत्ती के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग संरचनाएं बनाते हैं:
पर्ण शिखर (Leaf apex): पत्ती का सबसे अगला सिरा (Apex) ढक्कन (Lid) के रूप में बदल जाता है। इसका कार्य घड़े के मुख को ढकना होता है (विशेषकर बारिश के समय ताकि घड़ा पानी से न भर जाए)।
पर्ण फलक (Leaf blade): मुख्य पत्ती वाला भाग घड़े (Pitcher) में बदल जाता है, जिसमें पाचक एंजाइम भरे होते हैं।
पर्णवृंत (Petiole): पत्ती का डंठल अक्सर प्रतान (Tendril) की तरह मुड़ जाता है जो पौधे को सहारा देने का काम करता है।
पर्ण आधार (Leaf base): यह भाग अक्सर चपटा होकर प्रकाश संश्लेषण का कार्य करता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(A) पत्ती का आधार: यह भाग अक्सर फैला हुआ होता है, ढक्कन नहीं बनाता।
(C) पर्णवृंत: जैसा कि बताया गया, यह आमतौर पर कुंडलित प्रतान बनाता है।
(D) तना: घटपर्णी में घड़ा और ढक्कन पूरी तरह से पत्ती के रूपांतरण हैं, तने के नहीं।
49. अरंडी (Castor) के बीज के सिरे पर स्थित सफेद मांसल वृद्धि को क्या कहते हैं?
(A) एरिल
(B) कैरंकल (Caruncle)
(C) नाभिका
(D) विदर
सही उत्तर: (B) कैरंकल (Caruncle)
विस्तृत व्याख्या:
अरंडी (Ricinus communis) के बीज की संरचना काफी विशिष्ट होती है। इसके एक सिरे (बीजाण्डद्वार वाले हिस्से) पर जो सफेद, मांसल और स्पंजी वृद्धि दिखाई देती है, उसे कैरंकल कहा जाता है।
रूपांतरण: यह वास्तव में बीज के बाहरी आवरण (Integument) का एक रूपांतरण है।
कार्य: 1. नमी सोखना: यह स्पंज की तरह काम करता है और अंकुरण के समय पानी को सोखकर बीजाण्डद्वार (Micropyle) के माध्यम से अंदर भेजने में मदद करता है।
2. बीज प्रकीर्णन: यह वसा (Fat) से भरपूर होता है, जिससे चींटियाँ इसकी ओर आकर्षित होती हैं और बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं (इसे ‘Myrmecochory’ कहते हैं)।
अन्य विकल्प क्या हैं?
(A) एरिल (Aril): यह बीज के चारों ओर पाया जाने वाला मांसल आवरण है। जैसा कि हमने पहले चर्चा की, यह लीची में खाने योग्य भाग होता है।
(C) नाभिका (Hilum): यह बीज पर मौजूद वह निशान है जहाँ बीज अपने डंठल (Funiculus) से जुड़ा होता है।
(D) विदर (Fissure): यह सामान्यतः बीज की सतह पर पाई जाने वाली एक दरार या खांच होती है, यह कोई विशिष्ट मांसल वृद्धि नहीं है।
अरंडी के बीज से जुड़ी कुछ और खास बातें (REET विशेष):
अरंडी का बीज द्विबीजपत्री होने के बावजूद भ्रूणपोषी (Endospermic) होता है।
इसमें ‘एपिजियल’ (Epigeal) प्रकार का अंकुरण पाया जाता है, यानी अंकुरण के समय बीजपत्र मिट्टी से बाहर आ जाते हैं।
राजस्थान अरंडी के उत्पादन में भारत के प्रमुख राज्यों में से एक है, यहाँ विशेषकर जालौर और सिरोही जिलों में इसकी अच्छी खेती होती है।
50. प्याज और लहसुन की गंध किस तत्व के कारण होती है ?
(A) मैग्नीशियम
(B) सल्फर (Potassium Allyl Sulphide)
(C) कैल्शियम
(D) लोहा
सही उत्तर: (B) सल्फर
विस्तृत व्याख्या:
प्याज और लहसुन में आने वाली विशिष्ट और तीखी गंध मुख्य रूप से सल्फर (गंधक) के यौगिकों के कारण होती है।
लहसुन में: इसमें एलिसिन (Allicin) नामक सल्फर युक्त यौगिक पाया जाता है। जब लहसुन को काटा या कुचला जाता है, तब ‘एलिनेज’ एंजाइम सक्रिय होकर इसे तीखी गंध में बदल देता है।
प्याज में: प्याज में एलिल प्रोपाइल डाईसल्फाइड (Allyl Propyl Disulphide) नामक तत्व होता है। प्याज काटते समय आँखों से आँसू आने का कारण भी एक सल्फर युक्त गैस (Syn-propanethial-S-oxide) ही होती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(A) मैग्नीशियम: यह मुख्य रूप से क्लोरोफिल (पर्णहरित) के केंद्र में पाया जाता है। इसकी कमी से पत्तियों में पीलापन (Chlorosis) आ जाता है।
(C) कैल्शियम: यह पौधों की कोशिका भित्ति (Cell wall) के निर्माण और मजबूती के लिए आवश्यक है। यह कैल्शियम पेक्टेट के रूप में ‘मध्य पटलिका’ (Middle lamella) में पाया जाता है।
(D) लोहा (Iron): यह क्लोरोफिल के संश्लेषण के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है और श्वसन एंजाइमों का हिस्सा होता है।
महत्वपूर्ण जानकारी (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए):
प्याज का लाल रंग एंथोसायनिन (Anthocyanin) पिगमेंट के कारण होता है।
प्याज का पीला रंग क्वेरसिटिन (Quercetin) के कारण होता है।