पादप शारीरिकी
(Plant Anatomy)
1. पौधों में सक्रिय कोशिका विभाजन वाले क्षेत्र क्या कहलाते हैं?
(A) स्थायी ऊतक
(B) विभाज्योतक (Meristem)
(C) संवहन ऊतक
(D) दृढ़ ऊतक
सही उत्तर: (B) विभाज्योतक (Meristem)
विस्तृत व्याख्या:
पादपों में वृद्धि कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित होती है। इन क्षेत्रों में ऐसी कोशिकाएं पाई जाती हैं जिनमें निरंतर सक्रिय कोशिका विभाजन की क्षमता होती है। इन ऊतकों को विभाज्योतक (Meristematic tissue) कहा जाता है।
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विशेषताएँ:
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इनकी कोशिकाएं बहुत सक्रिय होती हैं और जीवनभर विभाजित होती रहती हैं।
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कोशिकाओं में सघन कोशिकाद्रव्य (Dense cytoplasm) और स्पष्ट केंद्रक होता है।
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इनमें रिक्तिकाएं (Vacuoles) या तो अनुपस्थित होती हैं या बहुत छोटी होती हैं।
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प्रकार:
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शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ और तने के शीर्ष पर होता है और लंबाई बढ़ाता है।
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पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem): यह तने और जड़ की मोटाई (Girth) बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है।
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अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या टहनियों के पर्व (Internodes) के पास होता है।
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अन्य विकल्प क्या हैं?
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(A) स्थायी ऊतक (Permanent Tissue): ये वे ऊतक हैं जो विभाजन की क्षमता खो चुके होते हैं और एक विशिष्ट कार्य (जैसे भोजन संचय या सहारा देना) करने लगते हैं।
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(C) संवहन ऊतक (Vascular Tissue): इनमें जाइलम और फ्लोएम शामिल हैं, जो पानी और भोजन के परिवहन का कार्य करते हैं।
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(D) दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma): यह एक मृत स्थायी ऊतक है जो पौधे को मजबूती प्रदान करता है (जैसे नारियल का कठोर छिलका)।
2. घास के कटे हुए शीर्ष भाग को फिर से उगाने के लिए कौन सा ऊतक जिम्मेदार है ?
(A) शीर्षस्थ विभाज्योतक
(B) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem)
(C) पार्श्व विभाज्योतक
(D) द्वितीयक विभाज्योतक
सही उत्तर: (B) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem)
विस्तृत व्याख्या:
घास और कई अन्य एकबीजपत्री पौधों में एक विशेष प्रकार का ऊतक पाया जाता है जो उन्हें शाकाहारी जानवरों (जैसे गाय, बकरी) द्वारा चराए जाने या काटे जाने के बाद भी दोबारा बढ़ने में मदद करता है।
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अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem): यह वास्तव में शीर्षस्थ विभाज्योतक का ही वह भाग है जो स्थायी ऊतकों के बीच में छूट जाता है। यह मुख्य रूप से पत्तियों के आधार पर या टहनियों की गाँठों (Internodes) के पास स्थित होता है।
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कार्य: जब घास का ऊपरी हिस्सा (शीर्ष) काट दिया जाता है, तो यह ऊतक सक्रिय होकर उस भाग की लम्बाई को फिर से बढ़ा देता है। यही कारण है कि घास काटने के बाद भी बहुत जल्दी फिर से बड़ी हो जाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
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(A) शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ और तने के बिल्कुल ऊपरी सिरों पर होता है। यदि घास का शीर्ष भाग कट जाए, तो यह हिस्सा भी हट जाता है, इसलिए पुनर्जन्म के लिए यह जिम्मेदार नहीं हो सकता।
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(C) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem): इसका मुख्य कार्य पौधे की चौड़ाई या मोटाई (Girth) बढ़ाना होता है, लम्बाई नहीं।
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(D) द्वितीयक विभाज्योतक (Secondary Meristem): यह पौधे के जीवन के बाद के चरणों में बनता है और काष्ठीय पौधों में मोटाई बढ़ाने (जैसे कैम्बियम) का कार्य करता है।
3. कोलनकाइमा (स्थूलकोण ऊतक) की कोशिका भित्ति के कोनों पर किसका जमाव होता है?
(A) केवल सेल्युलोज
(B) लिग्निन
(C) सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज और पेक्टिन
(D) सुबेरिन
सही उत्तर: (C) सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज और पेक्टिन
विस्तृत व्याख्या:
स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma) एक जीवित यांत्रिक ऊतक है जो पौधों के लचीले भागों को सहारा प्रदान करता है।
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विशेषता: इसकी कोशिकाओं की भित्ति (Cell wall) समान रूप से मोटी नहीं होती। इसके बजाय, कोशिकाओं के कोनों पर सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज और विशेष रूप से पेक्टिन (Pectin) का अत्यधिक जमाव हो जाता है।
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कार्य: पेक्टिन के जमाव के कारण ही यह ऊतक पौधों को यांत्रिक शक्ति (Mechanical strength) के साथ-साथ लचीलापन (Flexibility) भी प्रदान करता है। इसी वजह से तेज हवा चलने पर भी पौधों की टहनियां टूटती नहीं बल्कि झुक जाती हैं।
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स्थिति: यह आमतौर पर द्विबीजपत्री तनों की बाह्यत्वचा (Epidermis) के ठीक नीचे (Hypodermis) और पर्णवृंत (Petiole) में पाया जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
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(B) लिग्निन (Lignin): यह दृढ़ोतक (Sclerenchyma) की कोशिका भित्ति में पाया जाता है, जो इसे पत्थर जैसी मजबूती देता है और कोशिका को मृत बना देता है।
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(D) सुबेरिन (Suberin): यह कॉर्क (Cork) कोशिकाओं और अंतस्त्वचा (Endodermis) की कैस्पेरियन पट्टियों में पाया जाता है, जो इन्हें पानी के लिए अभेद्य (Impermeable) बनाता है।
4. नारियल का रेशेदार छिलका किस ऊतक का बना होता है ?
(A) पैरेंकाइमा
(B) कोलेनकाइमा
(C) स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ ऊतक)
(D) एरेनकाइमा
सही उत्तर: (C) स्क्लेरेनकाइमा (दृढ़ ऊतक)
विस्तृत व्याख्या:
नारियल का रेशेदार बाहरी छिलका (Husk) स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma) ऊतक का बना होता है। यह पौधों में पाया जाने वाला एक निर्जीव (Dead) स्थायी ऊतक है।
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विशेषता: स्क्लेरेनकाइमा की कोशिकाएं लंबी, संकरी और मृत होती हैं। इनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन (Lignin) नामक पदार्थ का मोटा जमाव होता है, जो एक प्राकृतिक सीमेंट की तरह कार्य करता है।
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कार्य: यह ऊतक पौधे के अंगों को अत्यधिक मजबूती, कठोरता और यांत्रिक सहारा प्रदान करता है। नारियल के रेशों (Coir) की मजबूती इसी लिग्निन युक्त दृढ़ ऊतक के कारण होती है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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(A) पैरेंकाइमा (Parenchyma): यह जीवित ऊतक है जो मुख्य रूप से भोजन संचय और फोटोसिंथेसिस का कार्य करता है। यह कोमल अंगों में पाया जाता है।
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(B) कोलेनकाइमा (Collenchyma): यह जीवित यांत्रिक ऊतक है जो पौधों को लचीलापन प्रदान करता है (जैसे टहनियों में)।
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(D) एरेनकाइमा (Aerenchyma): यह पैरेंकाइमा का ही एक प्रकार है जिसमें बड़ी वायु गुहिकाएं (Air cavities) होती हैं। यह जलीय पौधों को पानी पर तैरने में मदद करता है।
5. जाइलम का वह एकमात्र घटक जो जीवित होता है :
(A) वाहिनिकाएँ
(B) वाहिकाएँ
(C) जाइलम पैरेंकाइमा
(D) जाइलम फाइबर
सही उत्तर: (C) जाइलम पैरेंकाइमा
विस्तृत व्याख्या:
जाइलम (Xylem) एक जटिल स्थायी ऊतक है जो पौधों में जल और खनिजों के संवहन का कार्य करता है। यह चार अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, जिनमें से तीन मृत होती हैं और केवल एक जीवित।
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जाइलम पैरेंकाइमा (Xylem Parenchyma): यह जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है। इसकी कोशिकाएं पतली भित्ति वाली होती हैं और सेल्युलोज की बनी होती हैं। इनका मुख्य कार्य भोजन (स्टार्च/वसा) का संचय करना और पानी के पार्श्व संवहन (Lateral conduction) में मदद करना है।
अन्य विकल्प (मृत कोशिकाएं):
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(A) वाहिनिकाएँ (Tracheids): ये लंबी, नली जैसी मृत कोशिकाएं हैं जिनके सिरे नुकीले होते हैं। ये मुख्य रूप से पानी के परिवहन का कार्य करती हैं।
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(B) वाहिकाएँ (Vessels): ये एक के ऊपर एक रखी बेलनाकार मृत कोशिकाएं होती हैं, जो एक लंबी नली जैसी संरचना बनाती हैं। ये आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में जल संवहन का मुख्य साधन हैं।
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(D) जाइलम फाइबर (Xylem Fibres): ये भी मृत कोशिकाएं हैं जिनकी भित्ति बहुत मोटी होती है। इनका कार्य केवल पौधे को यांत्रिक सहारा (Mechanical support) देना है।
जाइलम और फ्लोएम में अंतर (एक नज़र में):
| विशेषता | जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) |
| कार्य | जल एवं खनिज का संवहन | भोजन (शर्करा) का संवहन |
| जीवित घटक | केवल जाइलम पैरेंकाइमा | चालनी नलिका, सहचर कोशिका, फ्लोएम पैरेंकाइमा |
| मृत घटक | वाहिनिका, वाहिका, जाइलम फाइबर | केवल फ्लोएम फाइबर |
6. चालनी नलिका (Sieve tube) के कार्यों को कौन नियंत्रित करता है ?
(A) जाइलम पैरेंकाइमा
(B) सहचर कोशिकाएँ (Companion cells)
(C) फ्लोएम फाइबर
(D) रक्षी कोशिकाएँ ‘
सही उत्तर: (B) सहचर कोशिकाएँ (Companion cells)
विस्तृत व्याख्या:
फ्लोएम ऊतक में चालनी नलिका (Sieve tube) भोजन के परिवहन के लिए जिम्मेदार मुख्य नली होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि परिपक्व होने पर इसमें केन्द्रक (Nucleus) अनुपस्थित होता है।
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नियंत्रण की प्रक्रिया: चूँकि चालनी नलिका के पास अपना केंद्रक नहीं होता, इसलिए इसके सभी जैविक कार्यों और दाब प्रवणता (Pressure gradient) को इसके साथ सटी हुई सहचर कोशिका (Companion cell) का केंद्रक नियंत्रित करता है।
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जुड़ाव: ये दोनों कोशिकाएं एक-दूसरे से प्लाज्मोडेस्मेटा (Plasmodesmata) के माध्यम से जुड़ी रहती हैं, जिससे संकेतों और पोषक तत्वों का आदान-प्रदान सुचारू रूप से होता रहता है।
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विशेष तथ्य: चालनी नलिका और सहचर कोशिका को ‘सहोदर कोशिकाएं’ (Sister cells) भी कहा जाता है क्योंकि ये दोनों एक ही मातृ कोशिका (Mother cell) के विभाजन से बनती हैं।
अन्य विकल्प क्या हैं?
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(A) जाइलम पैरेंकाइमा: यह जाइलम का हिस्सा है और इसका कार्य भोजन संचय करना है, फ्लोएम के कार्यों से इसका सीधा संबंध नहीं है।
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(C) फ्लोएम फाइबर: ये मृत कोशिकाएं होती हैं जो केवल रेशे के रूप में यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं (जैसे पटसन या जूट के रेशे)।
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(D) रक्षी कोशिकाएँ (Guard cells): ये पत्तियों के रंध्रों (Stomata) के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं, न कि भोजन के संवहन को।
7. रंध्र (Stomata) के खुलने और बंद होने का नियंत्रण कौन करता है ?
(A) सहायक कोशिकाएँ
(B) एपिडर्मल कोशिकाएँ
(C) रक्षी कोशिकाएँ (Guard cells)
(D) संवहन ऊतक
सही उत्तर: (C) रक्षी कोशिकाएँ (Guard cells)
विस्तृत व्याख्या:
पौधों की पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले छोटे छिद्रों को रंध्र (Stomata) कहा जाता है। इनके खुलने और बंद होने की पूरी प्रक्रिया रक्षी कोशिकाओं (Guard cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करती है।
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खुलने की प्रक्रिया: जब रक्षी कोशिकाओं में पानी अंदर प्रवेश करता है, तो वे फूल (Turgid) जाती हैं। इनकी बाहरी भित्ति पतली और लचीली होती है, जबकि आंतरिक भित्ति मोटी होती है। फूलने के कारण ये बाहर की ओर खिंचती हैं, जिससे बीच का रंध्र छिद्र खुल जाता है।
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बंद होने की प्रक्रिया: जब रक्षी कोशिकाओं से पानी बाहर निकल जाता है, तो वे पिचक (Flaccid) जाती हैं। इससे आंतरिक भित्तियां वापस अपनी स्थिति में आ जाती हैं और रंध्र छिद्र बंद हो जाता है।
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नियंत्रण: यह प्रक्रिया मुख्य रूप से प्रकाश, CO2 की सांद्रता और पोटेशियम आयनों (K+) के आवागमन द्वारा नियंत्रित होती है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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(A) सहायक कोशिकाएँ (Subsidiary cells): ये रक्षी कोशिकाओं के चारों ओर स्थित होती हैं और रक्षी कोशिकाओं के हिलने-डुलने में मदद करती हैं, लेकिन छिद्र को सीधे नियंत्रित नहीं करतीं।
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(B) एपिडर्मल कोशिकाएँ: ये पत्ती की बाहरी त्वचा बनाती हैं। रक्षी कोशिकाएं भी इन्हीं का एक विशिष्ट रूपांतरण हैं।
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(D) संवहन ऊतक: इनमें जाइलम और फ्लोएम आते हैं, जिनका कार्य जल और भोजन का परिवहन करना है।
8. द्विबीजपत्री तने में संवहन बंडल (Vascular Bundles) कैसे होते हैं ?
(A) बंद (Closed)
(B) खुले (Open)
(C) रेडियल
(D) संकेंद्रित
सही उत्तर: (B) खुले (Open)
विस्तृत व्याख्या:
द्विबीजपत्री (Dicot) तने में संवहन बंडल की सबसे बड़ी विशेषता उनका ‘खुला’ (Open) होना है।
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खुला संवहन बंडल (Open Vascular Bundle): इसका अर्थ है कि जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) के बीच में कैम्बियम (Cambium) की एक पट्टी पाई जाती है।
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कैम्बियम का कार्य: यह कैम्बियम एक विभाज्योतक ऊतक है जो आगे चलकर द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) के लिए जिम्मेदार होता है। इसी कैम्बियम के कारण द्विबीजपत्री तने मोटाई में बढ़ पाते हैं और काष्ठ (Wood) का निर्माण करते हैं।
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विन्यास: द्विबीजपत्री तने में ये बंडल एक घेरे (Ring) के रूप में व्यवस्थित होते हैं, जिसे ‘यूस्टील’ (Eustele) कहा जाता है।
अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?
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(A) बंद (Closed): जब जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम अनुपस्थित होता है। यह एकबीजपत्री (Monocot) तने (जैसे मक्का, गेहूँ) की विशेषता है। इनमें द्वितीयक वृद्धि नहीं होती।
[Image comparison of Open and Closed vascular bundles]
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(C) रेडियल (Radial): इसमें जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्याओं (Radius) पर एकांतर क्रम में होते हैं। यह जड़ों (Roots) की मुख्य विशेषता है।
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(D) संकेंद्रित (Concentric): इसमें एक ऊतक (जाइलम या फ्लोएम) दूसरे को पूरी तरह से घेरे रहता है (जैसे फर्न में)।
9. एकबीजपत्री जड़ों में संवहन बंडल की संख्या सामान्यतः कितनी होती है ?
(A) 2 से 4
(B) 6 से अधिक (Polyarch)
(C) केवल 1
(D) अनुपस्थित
सही उत्तर: (B) 6 से अधिक (Polyarch)
विस्तृत व्याख्या:
एकबीजपत्री (Monocot) और द्विबीजपत्री (Dicot) जड़ों के बीच मुख्य अंतर उनके संवहन बंडलों (Vascular Bundles) की संख्या और विन्यास में होता है।
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बहुआदिदारुक (Polyarch): एकबीजपत्री जड़ों में जाइलम और फ्लोएम के बंडलों की संख्या बहुत अधिक होती है, जो सामान्यतः 6 से भी ज्यादा होती है। इस स्थिति को ‘पॉलीआर्क’ कहा जाता है।
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मज्जा (Pith): एकबीजपत्री जड़ों में केंद्र में स्थित मज्जा (Pith) बड़ी और सुविकसित होती है।
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विन्यास: जड़ों में संवहन बंडल हमेशा अरिय (Radial) होते हैं, यानी जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्याओं पर होते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
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(A) 2 से 4: यह द्विबीजपत्री (Dicot) जड़ों की विशेषता है। इनमें जाइलम बंडल की संख्या कम (प्रायः 2 से 6 के बीच) होती है। इसे ‘डायरक’ (Diarch) से ‘हेक्सार्क’ (Hexarch) तक कहा जा सकता है।
[Image comparison of Dicot and Monocot root cross sections]
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(C) केवल 1: किसी भी जड़ में केवल एक संवहन बंडल नहीं होता, क्योंकि जल और भोजन के परिवहन के लिए एक तंत्र की आवश्यकता होती है।
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(D) अनुपस्थित: संवहन बंडल के बिना पौधे का जीवित रहना और ऊँचाई प्राप्त करना असंभव है।
10. ‘कैस्पेरियन पट्टियाँ’ (Casparian Strips) कहाँ पाई जाती हैं ?
(A) एपिडर्मिस में
(B) पेरीसाइकिल में
(C) एंडोडर्मिस (अंतस्त्वचा) में
(D) कोर्टेक्स में
सही उत्तर: (C) एंडोडर्मिस (अंतस्त्वचा) में
विस्तृत व्याख्या:
कैस्पेरियन पट्टियाँ जड़ों की आंतरिक संरचना में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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स्थिति और संरचना: ये जड़ की एंडोडर्मिस (Endodermis) कोशिकाओं की अरीय (Radial) और स्पर्शरेखीय (Tangential) भित्तियों पर पाई जाती हैं।
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पदार्थ: ये पट्टियाँ सुबेरिन (Suberin) नामक मोम जैसे जल-अभेद्य पदार्थ के जमाव से बनती हैं।
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कार्य (Check Post): सुबेरिन के कारण पानी इन पट्टियों के आर-पार नहीं जा सकता। यह जड़ों में पानी और खनिजों के प्रवाह के लिए एक ‘चेक पोस्ट’ की तरह कार्य करती हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि पानी केवल कोशिका झिल्ली के माध्यम से (Symplast pathway) ही जाइलम तक पहुँचे।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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(A) एपिडर्मिस (Epidermis): यह जड़ की सबसे बाहरी परत है। जड़ों में इसे अक्सर ‘एपीब्लेमा’ कहा जाता है।
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(B) पेरीसाइकिल (Pericycle): यह एंडोडर्मिस के ठीक नीचे वाली परत है, जहाँ से पार्श्व जड़ें (Lateral roots) निकलती हैं।
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(D) कोर्टेक्स (Cortex): यह एपिडर्मिस और एंडोडर्मिस के बीच का बहुपरतीय क्षेत्र है, जो मुख्य रूप से भोजन संचय का कार्य करता है।
11. पौधों की चौड़ाई (Girth) बढ़ाने के लिए कौन सा ऊतक जिम्मेदार है ?
(A) शीर्षस्थ विभाज्योतक
(B) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem)
(C) अंतर्वेशी विभाज्योतक
(D) स्थायी ऊतक
सही उत्तर: (B) पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem)
विस्तृत व्याख्या:
पौधों में वृद्धि दो प्रकार की होती है—एक लंबाई में और दूसरी चौड़ाई (मोटाई) में। तने और जड़ की चौड़ाई या घेरे (Girth) को बढ़ाने का कार्य पार्श्व विभाज्योतक द्वारा किया जाता है।
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प्रक्रिया: इसे द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) भी कहते हैं। यह ऊतक मुख्य रूप से द्विबीजपत्री पौधों और जिम्नोस्पर्म में पाया जाता है।
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उदाहरण: संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) और कॉर्क कैम्बियम (Cork Cambium) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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कार्य: संवहन कैम्बियम अंदर की ओर द्वितीयक जाइलम (काष्ठ) और बाहर की ओर द्वितीयक फ्लोएम बनाता है, जिससे तना मोटा होता जाता है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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(A) शीर्षस्थ विभाज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ और तने के शीर्ष पर पाया जाता है और पौधे की लंबाई बढ़ाने (प्राथमिक वृद्धि) के लिए जिम्मेदार है।
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(C) अंतर्वेशी विभाज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या पर्वसंधियों (Nodes) के पास होता है और कटे हुए हिस्सों की दोबारा वृद्धि या घास की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।
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(D) स्थायी ऊतक (Permanent Tissue): ये वे ऊतक हैं जिनकी कोशिकाएं विभाजित होने की क्षमता खो चुकी होती हैं और विशिष्ट कार्य (जैसे भोजन संचय या संवहन) करती हैं।
12. ‘इंट्राफेसीकुलर कैम्बियम’ (Intrafascicular Cambium) कहाँ स्थित होता है ?
(A) दो संवहन बंडलों के बीच
(B) जाइलम और फ्लोएम के बीच
(C) पेरीसाइकिल में
(D) मज्जा (Pith) में
सही उत्तर है:
(B) जाइलम और फ्लोएम के बीच
स्पष्टीकरण:
द्विबीजपत्री तनों (Dicot stems) में, प्राथमिक जाइलम और प्राथमिक फ्लोएम के बीच स्थित कैम्बियम की परत को इंट्राफेसीकुलर कैम्बियम (Intrafascicular Cambium) कहा जाता है।
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यह एक प्राथमिक मेरिस्टेम (Primary Meristem) है क्योंकि यह शुरुआत से ही संवहन बंडल (Vascular Bundle) के भीतर मौजूद रहता है।
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बाद में, जब दो संवहन बंडलों के बीच की कोशिकाएं (Medullary rays) मेरिस्टेमेटिक हो जाती हैं, तो वे इंटरफेसीकुलर कैम्बियम (Interfascicular Cambium) बनाती हैं।
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ये दोनों मिलकर एक पूर्ण कैम्बियम रिंग का निर्माण करते हैं, जो द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के लिए जिम्मेदार होती है।
13. वसंत काष्ठ (Spring Wood) की क्या विशेषता है ?
(A) संकरी वाहिकाएँ
(B) गहरे रंग का होना
(C) चौड़ी वाहिकाएँ और कम घनत्व
(D) अधिक घनत्व
सही उत्तर है:
(C) चौड़ी वाहिकाएँ और कम घनत्व
विशेषताएँ:
वसंत ऋतु (Spring season) के दौरान, कैम्बियम (Cambium) बहुत अधिक सक्रिय होता है और बड़ी संख्या में जाइलम तत्वों का निर्माण करता है। वसंत काष्ठ की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
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वाहिकाएँ (Vessels): इसमें बनने वाली जाइलम वाहिकाओं का व्यास अधिक होता है (अर्थात वे चौड़ी होती हैं)।
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घनत्व (Density): यह काष्ठ कम घनत्व वाली होती है।
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रंग: इसका रंग तुलनात्मक रूप से हल्का होता है।
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अन्य नाम: इसे ‘अग्र दारु’ (Early Wood) भी कहा जाता है।
इसके विपरीत, शरद ऋतु में बनने वाली ‘शरद काष्ठ’ (Autumn Wood) में वाहिकाएँ संकरी होती हैं और उसका घनत्व अधिक होता है।
14. वार्षिक वलय (Annual Rings) किसकी सक्रियता से बनते हैं ?
(A) कॉर्क कैम्बियम
(B) संवहन कैम्बियम
(C) शीर्षस्थ विभाज्योतक
(D) पेरीसाइकिल
सही उत्तर है:
(B) संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium)
स्पष्टीकरण:
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संवहन कैम्बियम की भूमिका: द्विबीजपत्री वृक्षों में संवहन कैम्बियम की सक्रियता साल भर एक समान नहीं रहती। यह मौसमी परिवर्तनों के अनुसार बदलती रहती है।
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वसंत और शरद काष्ठ: वसंत ऋतु में कैम्बियम अधिक सक्रिय होकर चौड़ी वाहिकाओं वाली वसंत काष्ठ (Spring Wood) बनाता है, जबकि शरद ऋतु में यह कम सक्रिय होकर संकरी वाहिकाओं वाली शरद काष्ठ (Autumn Wood) बनाता है।
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वलय का निर्माण: एक वर्ष में बनने वाली इन दोनों प्रकार की लकड़ियों (वसंत और शरद काष्ठ) की स्पष्ट परतों को मिलाकर एक वार्षिक वलय (Annual Ring) बनता है।
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आयु गणना: इन वलयों को गिनकर वृक्ष की आयु का अनुमान लगाया जा सकता है, जिसे डेंड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology) कहते हैं।
15. ‘हार्टवुड’ (Heartwood/दुरूमेन) के बारे में क्या सत्य है ?
(A) यह जल का संवहन करती है
(B) यह मृत, गहरे रंग की और टिकाऊ होती है
(C) यह तने के बाहरी भाग में होती है
(D) यह जीवित होती है
सही उत्तर है:
(B) यह मृत, गहरे रंग की और टिकाऊ होती है
हार्टवुड (Heartwood) की मुख्य विशेषताएँ:
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मृत और कठोर: यह पुराने पेड़ों के तने के केन्द्रीय (Central) भाग में स्थित होती है और पूरी तरह से मृत कोशिकाओं से बनी होती है।
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गहरा रंग: इसमें टैनिन, रेजि़न, तेल और गोंद जैसे कार्बनिक यौगिक जमा हो जाते हैं, जिसके कारण इसका रंग गहरा भूरा या काला हो जाता है।
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टिकाऊपन: इन रसायनों की उपस्थिति के कारण हार्टवुड सूक्ष्मजीवों और कीटों (जैसे दीमक) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी और टिकाऊ होती है।
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कार्य: यह जल का संवहन नहीं करती है। इसका मुख्य कार्य तने को यांत्रिक सहायता (Mechanical Support) प्रदान करना है।
सैपवुड (Sapwood) से तुलना:
इसके विपरीत, तने के बाहरी घेरे वाले भाग को सैपवुड (Sapwood/एल्बर्नम) कहते हैं, जो हल्के रंग की होती है और जल तथा खनिजों के संवहन का कार्य करती है।
16. ‘छाल’ (Bark) शब्द तकनीकी रूप से किन ऊतकों के समूह को संदर्भित करता है ?
(A) केवल कॉर्क
(B) संवहन कैम्बियम के बाहर के सभी ऊतक
(C) केवल द्वितीयक फ्लोएम
(D) पेरीडर्म और जाइलम
सही उत्तर है:
(B) संवहन कैम्बियम के बाहर के सभी ऊतक
‘छाल’ (Bark) का तकनीकी अर्थ:
वनस्पति विज्ञान (Botany) में, ‘छाल’ एक गैर-तकनीकी शब्द है जिसका उपयोग संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) के बाहर स्थित सभी ऊतकों के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित ऊतक शामिल होते हैं:
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द्वितीयक फ्लोएम (Secondary Phloem): यह संवहन कैम्बियम के ठीक बाहर की परत होती है।
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पेरीडर्म (Periderm): इसमें कॉर्क (Phellem), कॉर्क कैम्बियम (Phellogen) और द्वितीयक कॉर्टेक्स (Phelloderm) शामिल हैं।
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कॉर्टेक्स (Cortex) और पेरीसाइकिल: यदि ये अभी भी तने में मौजूद हैं।
वर्गीकरण:
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कोमल छाल (Soft/Early Bark): जो मौसम के शुरुआत में बनती है।
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कठोर छाल (Hard/Late Bark): जो मौसम के अंत में बनती है।
17. कॉर्क कोशिकाओं की भित्ति पर जमा होने वाला वह पदार्थ जो उन्हें जल के लिए अभेद्य बनाता है :
(A) सेल्युलोज
(B) लिग्निन
(C) सुबेरिन (Suberin)
(D) पेक्टिन
सही उत्तर है:
(C) सुबेरिन (Suberin)
स्पष्टीकरण:
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अभेद्यता (Impermeability): कॉर्क कोशिकाओं की कोशिका भित्ति पर सुबेरिन नामक वसायुक्त पदार्थ का जमाव हो जाता है। यह पदार्थ जल और गैसों के लिए पूरी तरह से अभेद्य होता है, जिससे पानी का वाष्पीकरण रुक जाता है।
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मृत कोशिकाएँ: सुबेरिन के जमाव के कारण ही कॉर्क कोशिकाएँ परिपक्व होने पर मृत हो जाती हैं और हवा से भर जाती हैं।
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सुरक्षा: यह परत आंतरिक जीवित ऊतकों को चोट, संक्रमण और अत्यधिक तापमान से सुरक्षा प्रदान करती है।
अन्य पदार्थों की भूमिका:
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सेल्युलोज: सभी पादप कोशिकाओं की प्राथमिक भित्ति का मुख्य घटक है।
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लिग्निन: यह जाइलम वाहिकाओं और स्क्लेरेन्काइमा में पाया जाता है, जो उन्हें कठोरता और मजबूती प्रदान करता है।
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पेक्टिन: यह मध्य पटलिका (Middle lamella) में पाया जाता है और कोशिकाओं को आपस में जोड़ने का कार्य करता है।
18. काष्ठीय तनों में गैसों के विनिमय के लिए एपिडर्मिस के फटने से बनी छिद्रयुक्त संरचना क्या कहलाती है ?
(A) रंध्र (Stomata)
(B) वातरंध्र (Lenticels)
(C) जलरंध्र
(D) पूरक कोशिकाएं
सही उत्तर है:
(B) वातरंध्र (Lenticels)
स्पष्टीकरण:
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निर्माण: जैसे-जैसे काष्ठीय (Woody) तनों में द्वितीयक वृद्धि होती है, बाहरी एपिडर्मिस फट जाती है। कॉर्क कैम्बियम (Phellogen) वहां ढीली व्यवस्थित पैरेन्काइमा कोशिकाओं का निर्माण करता है, जिन्हें पूरक कोशिकाएं (Complementary cells) कहते हैं। ये कोशिकाएं एपिडर्मिस को फाड़कर बाहर निकल आती हैं और लेंस (Lens) के आकार के छिद्र बनाती हैं।
-
कार्य: इनका मुख्य कार्य वायुमंडल और तने के आंतरिक ऊतकों के बीच गैसों का आदान-प्रदान (Gas Exchange) करना है।
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स्थिति: ये अधिकांश काष्ठीय वृक्षों की छाल (Bark) पर स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
अन्य विकल्पों से अंतर:
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रंध्र (Stomata): ये मुख्य रूप से पत्तियों की एपिडर्मिस पर पाए जाते हैं।
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जलरंध्र (Hydathodes): ये पत्तियों के किनारों पर स्थित होते हैं और ‘बिंदुस्त्राव’ (Guttation) द्वारा तरल जल की बूंदों का उत्सर्जन करते हैं।
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पूरक कोशिकाएं: ये वातरंध्र के भीतर पाई जाने वाली कोशिकाएं हैं, न कि स्वयं छिद्रयुक्त संरचना।
19. द्विबीजपत्री जड़ (Dicot Root) में संवहन कैम्बियम की उत्पत्ति कैसी होती है ?
(A) पूरी तरह प्राथमिक
(B) पूरी तरह द्वितीयक (Secondary)
(C) आंशिक प्राथमिक और आंशिक द्वितीयक
(D) भ्रूणीय अवस्था से
सही उत्तर है:
(B) पूरी तरह द्वितीयक (Secondary)
स्पष्टीकरण:
द्विबीजपत्री तने (Dicot Stem) के विपरीत, द्विबीजपत्री जड़ में संवहन कैम्बियम शुरुआत में मौजूद नहीं होता है। इसकी उत्पत्ति बाद में होती है:
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उत्पत्ति (Origin): यह फ्लोएम बंडलों के ठीक नीचे स्थित ऊतकों और पेरीसाइकिल (Pericycle) कोशिकाओं के मेरिस्टेमेटिक होने से बनता है।
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प्रकृति: चूंकि यह ऊतक जीवन के बाद के चरण में विभेदन (Differentiation) के माध्यम से बनता है, इसलिए इसे पूरी तरह द्वितीयक (Completely Secondary) माना जाता है।
-
आकार: प्रारंभ में यह लहरदार (Wavy) आकार का होता है, लेकिन बाद में यह एक पूर्ण वृत्ताकार रिंग (Circular Ring) में बदल जाता है।
तुलना:
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द्विबीजपत्री तना: यहाँ कैम्बियम ‘आंशिक प्राथमिक’ (Intrafascicular) और ‘आंशिक द्वितीयक’ (Interfascicular) होता है।
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द्विबीजपत्री जड़: यहाँ यह ‘पूर्णतः द्वितीयक’ होता है।
20. हार्टवुड (Heartwood) की वाहिकाओं में गुब्बारे जैसी वृद्धि जो जल संवहन रोक देती है, क्या कहलाती है ?
(A) कैल्सिफिकेशन
(B) टाइलोसिस (Tyloses)
(C) रेजिन नलिकाएं
(D) संवहन किरणें
सही उत्तर है:
(B) टाइलोसिस (Tyloses)
टाइलोसिस (Tyloses) की विस्तृत जानकारी:
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निर्माण: हार्टवुड (Heartwood) में, जाइलम पैरेन्काइमा (Xylem Parenchyma) की कोशिकाएं जाइलम वाहिकाओं (Vessels) के गर्तों (Pits) के माध्यम से अंदर की ओर गुब्बारे की तरह फूल जाती हैं। इन फुला हुआ संरचनाओं को टाइलोसिस कहा जाता है।
-
कार्य: ये वाहिकाओं के गुहा (Lumen) को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे जल का संवहन (Water conduction) रुक जाता है।
-
सुरक्षा: टाइलोसिस में रेजिन, गोंद और टैनिन जैसे पदार्थ भर जाते हैं, जो लकड़ी को कठोर बनाते हैं और उसे कवक (Fungi) तथा बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाते हैं।
अन्य विकल्पों का अर्थ:
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कैल्सिफिकेशन: ऊतकों में कैल्शियम लवणों का जमाव।
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रेजिन नलिकाएं: ये पाइन (Pinus) जैसे पौधों में पाई जाती हैं जो रेजिन का स्राव करती हैं।
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संवहन किरणें (Vascular Rays): ये भोजन और जल के रेडियल (Radial) संवहन में मदद करती हैं।
21. संवहन कैम्बियम की वे कोशिकाएं जो जाइलम और फ्लोएम की लंबी कोशिकाओं को जन्म देती हैं :
(A) रे-इनिशियल
(B) फ्यूजीफॉर्म इनिशियल (Fusiform initials)
(C) कॉर्क कैम्बियम
(D) शीर्षस्थ कोशिकाएं
सही उत्तर है:
(B) फ्यूजीफॉर्म इनिशियल (Fusiform initials)
संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) की कोशिकाएं:
संवहन कैम्बियम में मुख्य रूप से दो प्रकार की मेरिस्टेमेटिक कोशिकाएं होती हैं:
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फ्यूजीफॉर्म इनिशियल (Fusiform initials):
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ये कोशिकाएं लंबी, संकरी और सिरों पर नुकीली (Spindle-shaped) होती हैं।
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ये विभाजन के बाद अक्षीय तंत्र (Axial system) बनाती हैं, जिसमें लंबी कोशिकाएं जैसे जाइलम वाहिकाएं (Vessels), ट्रैकियड्स (Tracheids) और फ्लोएम की चालनी नलिकाएं (Sieve tubes) शामिल हैं।
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-
रे-इनिशियल (Ray initials):
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ये कोशिकाएं छोटी और लगभग गोलाकार होती हैं।
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ये संवहन किरणों (Vascular Rays) का निर्माण करती हैं, जो जल और भोजन के अरीय संवहन (Radial conduction) में मदद करती हैं।
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अन्य विकल्पों का अर्थ:
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कॉर्क कैम्बियम: यह तने की मोटाई बढ़ने पर बाहरी सुरक्षात्मक परत (छाल) बनाने के लिए उत्तरदायी है।
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शीर्षस्थ कोशिकाएं (Apical cells): ये जड़ और तने के शीर्ष पर स्थित होती हैं और लंबाई बढ़ाने में सहायक होती हैं।
22. द्वितीयक फ्लोएम (Secondary Phloem) का निर्माण किसके विभाजन से होता है ?
(A) फेलोजन
(B) संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium)
(C) प्रोटोडर्म
(D) पेरीसाइकिल
सही उत्तर है:
(B) संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium)
स्पष्टीकरण:
संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) एक मेरिस्टेमेटिक परत है जो द्विबीजपत्री पौधों में द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के लिए जिम्मेदार होती है। इसके विभाजन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
-
विभाजन का प्रकार: संवहन कैम्बियम की कोशिकाएं परिणतिक (Periclinal) रूप से विभाजित होती हैं।
-
बाहर की ओर: कैम्बियम जब बाहर की ओर नई कोशिकाएं बनाता है, तो वे द्वितीयक फ्लोएम (Secondary Phloem) में विकसित होती हैं।
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अंदर की ओर: जब यह अंदर की ओर (केंद्र की ओर) कोशिकाएं बनाता है, तो वे द्वितीयक जाइलम (Secondary Xylem) का निर्माण करती हैं।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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फेलोजन (Phellogen): इसे कॉर्क कैम्बियम भी कहते हैं। यह बाहर की ओर कॉर्क (Phellem) और अंदर की ओर द्वितीयक कॉर्टेक्स (Phelloderm) बनाता है।
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प्रोटोडर्म (Protoderm): यह प्राथमिक मेरिस्टेमेटिक ऊतक है जो एपिडर्मिस (बाहरी त्वचा) का निर्माण करता है।
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पेरीसाइकिल (Pericycle): यह संवहन बंडल के बाहर स्थित परत है, जो जड़ों में पार्श्व जड़ों (Lateral roots) के निर्माण में सहायक होती है।
23. एकबीजपत्री (Monocot) तनों में सामान्यतः द्वितीयक वृद्धि क्यों नहीं होती ?
(A) क्योंकि उनमें जाइलम नहीं होता है
(B) क्योंकि उनमें कैम्बियम अनुपस्थित (Closed bundles) होता है
(C) क्योंकि उनमें फ्लोएम बाहर होता है
(D) क्योंकि उनमें एपिडर्मिस मोटी होती है
सही उत्तर है:
(B) क्योंकि उनमें कैम्बियम अनुपस्थित (Closed bundles) होता है
मुख्य कारण:
द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के लिए पादप ऊतकों में पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristem) यानी कैम्बियम का होना अनिवार्य है। एकबीजपत्री (Monocot) तनों में इसकी स्थिति निम्नलिखित होती है:
-
बंद संवहन बंडल (Closed Vascular Bundles): एकबीजपत्री पौधों के संवहन बंडलों में जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम नहीं पाया जाता है। इसी कारण इन्हें ‘बंद’ (Closed) बंडल कहा जाता है।
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मेरिस्टेमेटिक क्षमता का अभाव: कैम्बियम की अनुपस्थिति के कारण नए द्वितीयक जाइलम और द्वितीयक फ्लोएम का निर्माण नहीं हो पाता, जिससे तने की मोटाई (Diameter) में वृद्धि नहीं होती।
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अपवाद: कुछ एकबीजपत्री पौधे जैसे ड्रेसीना (Dracaena) और युक्का (Yucca) में असामान्य द्वितीयक वृद्धि देखी जाती है, लेकिन यह सामान्य कैम्बियम द्वारा नहीं होती।
तुलना:
| विशेषता | एकबीजपत्री तना (Monocot) | द्विबीजपत्री तना (Dicot) |
| कैम्बियम | अनुपस्थित | उपस्थित |
| बंडल का प्रकार | बंद (Closed) | खुला (Open) |
| द्वितीयक वृद्धि | नहीं होती | होती है |
24. तने का बाहरी हल्का हिस्सा जो सक्रिय रूप से जल संवहन करता है, क्या कहलाता है ?
(A) हार्टवुड
(B) सैपवुड (Sapwood/Alburnum)
(C) पेरीडर्म
(D) छाल
सही उत्तर (B) सैपवुड (Sapwood/Alburnum) है।
सैपवुड की मुख्य विशेषताएँ:
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सक्रिय संवहन: यह द्वितीयक जाइलम का बाहरी, क्रियात्मक भाग है जो जड़ से पत्तियों तक जल और खनिजों (Sap) के परिवहन का कार्य सक्रिय रूप से करता है।
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हल्का रंग: इसमें टैनिन या रेजिन जैसे पदार्थों का जमाव नहीं होता, इसलिए यह हार्टवुड की तुलना में हल्के रंग की होती है।
-
जीवित कोशिकाएं: इसमें जाइलम पैरेन्काइमा जैसी जीवित कोशिकाएं मौजूद होती हैं।
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नरम प्रकृति: हार्टवुड की तुलना में यह कम टिकाऊ और नरम होती है, इसलिए सूक्ष्मजीवों का हमला इस पर जल्दी हो सकता है।
हार्टवुड और सैपवुड में अंतर:
| विशेषता | सैपवुड (Sapwood) | हार्टवुड (Heartwood) |
| कार्य | जल एवं खनिजों का संवहन | केवल यांत्रिक सहायता |
| रंग | हल्का | गहरा (टैनिन/रेजिन के कारण) |
| स्थिति | परिधीय (बाहरी) भाग | केन्द्रीय (भीतरी) भाग |
| टिकाऊपन | कम | अधिक (कीटरोधी) |
25. वार्षिक वलयों (Annual Rings) की गणना करके पेड़ की आयु ज्ञात करने का विज्ञान क्या है ?
(A) माइकोलॉजी
(B) डेंड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology)
(C) पेलिनोलॉजी
(D) पोमोलॉजी
सही उत्तर है:
(B) डेंड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology)
प्रमुख शब्दावलियाँ:
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डेंड्रोक्रोनोलॉजी (Dendrochronology): यह विज्ञान की वह शाखा है जिसमें वार्षिक वलयों (Annual Rings) की संख्या और उनकी विशेषताओं का अध्ययन करके पेड़ों की सटीक आयु और अतीत की जलवायु स्थितियों का पता लगाया जाता है।
-
डेंड्रो (Dendro) = वृक्ष
-
क्रोनो (Chrono) = समय
-
लॉजी (Logy) = अध्ययन
-
-
वार्षिक वलय कैसे बनते हैं? एक वर्ष में बनने वाली वसंत काष्ठ (Spring wood) और शरद काष्ठ (Autumn wood) मिलकर एक स्पष्ट वलय बनाती हैं। अनुकूल जलवायु में ये वलय चौड़े होते हैं, जबकि सूखे के समय ये संकरे रह जाते हैं।
अन्य विकल्पों का अर्थ:
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माइकोलॉजी (Mycology): कवकों (Fungi) का अध्ययन।
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पेलिनोलॉजी (Palynology): परागकणों (Pollen grains) और बीजाणुओं का अध्ययन।
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पोमोलॉजी (Pomology): फलों और उनके उत्पादन का अध्ययन।
26. कॉर्क कैम्बियम (Cork Cambium) को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
(A) फेलम
(B) फेलोजन (Phellogen)
(C) फेलोडर्म
(D) पेरीडर्म
सही उत्तर है:
(B) फेलोजन (Phellogen)
पेरीडर्म (Periderm) की तीन परतें:
द्वितीयक वृद्धि के दौरान, एपिडर्मिस के नीचे की कोशिकाएं मेरिस्टेमेटिक होकर कॉर्क कैम्बियम का निर्माण करती हैं। इसे तकनीकी रूप से फेलोजन कहा जाता है। यह तीन परतों के समूह का हिस्सा है जिन्हें सामूहिक रूप से ‘पेरीडर्म’ कहते हैं:
-
फेलोजन (Phellogen): यह स्वयं कॉर्क कैम्बियम है, जो विभाजन करता है।
-
फेलम (Phellem): यह फेलोजन द्वारा बाहर की ओर बनाई गई कोशिकाएं हैं, जिन्हें साधारण भाषा में ‘कॉर्क’ कहते हैं। ये सुबेरिन के जमाव के कारण मृत होती हैं।
-
फेलोडर्म (Phelloderm): यह फेलोजन द्वारा अंदर की ओर बनाई गई कोशिकाएं हैं, जिन्हें ‘द्वितीयक कॉर्टेक्स’ (Secondary Cortex) भी कहा जाता है। ये जीवित पैरेन्काइमा कोशिकाएं होती हैं।
याद रखने के लिए सूत्र:
-
Phellem = Cork (Outer)
-
Phellogen = Cork Cambium (Middle/Generator)
-
Phelloderm = Secondary Cortex (Inner)
27. ‘पेरीडर्म’ (Periderm) में कौन-कौन से ऊतक शामिल होते हैं ?
(A) केवल कॉर्क
(B) फेलम, फेलोजन और फेलोडर्म
(C) केवल द्वितीयक जाइलम
(D) एपिडर्मिस और कोर्टेक्स
सही उत्तर है:
(B) फेलम, फेलोजन और फेलोडर्म
पेरीडर्म (Periderm) का संगठन:
पेरीडर्म एक सुरक्षात्मक ऊतक समूह है जो द्वितीयक वृद्धि के दौरान पुरानी एपिडर्मिस के फटने पर उसका स्थान लेता है। इसमें निम्नलिखित तीन घटक शामिल होते हैं:
-
फेलोजन (Phellogen): इसे कॉर्क कैम्बियम भी कहते हैं। यह मेरिस्टेमेटिक परत है जो नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
-
फेलम (Phellem): इसे सामान्यतः कॉर्क कहा जाता है। फेलोजन बाहर की ओर इन कोशिकाओं को बनाता है, जिनकी भित्ति पर सुबेरिन जमा होता है।
-
फेलोडर्म (Phelloderm): इसे द्वितीयक कॉर्टेक्स भी कहते हैं। फेलोजन अंदर की ओर जीवित पैरेन्काइमा कोशिकाओं का निर्माण करता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
-
पेरीडर्म = फेलम + फेलोजन + फेलोडर्म
-
यह संरचना बाहरी आघातों और जल की हानि से पौधे की रक्षा करती है।
28. परिपक्व कॉर्क (Cork) को वानस्पतिक शब्दावली में क्या कहते हैं ?
(A) फेलम (Phellem)
(B) फेलोडर्म
(C) फेलोजन
(D) एंडोडर्मिस
सही उत्तर है:
(A) फेलम (Phellem)
स्पष्टीकरण:
-
फेलम (Phellem): यह परिपक्व कॉर्क का वानस्पतिक नाम है। जब कॉर्क कैम्बियम (फेलोजन) बाहर की ओर विभाजन करता है, तो जो कोशिकाएं बनती हैं वे फेलम कहलाती हैं।
-
विशेषता: इन कोशिकाओं की भित्ति पर सुबेरिन का भारी जमाव होता है, जिससे ये मृत हो जाती हैं और पानी व गैसों के लिए अभेद्य बन जाती हैं।
-
उपयोग: व्यावसायिक रूप से प्राप्त ‘कॉर्क’ (जैसे बोतलों के ढक्कन में उपयोग होने वाला) वास्तव में ‘क्वेरकस सुबेर’ (Quercus suber) नामक पेड़ का फेलम ही होता है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
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फेलोजन: कॉर्क कैम्बियम (जो फेलम को बनाता है)।
-
फेलोडर्म: द्वितीयक कॉर्टेक्स (जो अंदर की ओर बनता है)।
-
एंडोडर्मिस: संवहन ऊतकों के ठीक बाहर स्थित परत (जो प्राथमिक वृद्धि में पाई जाती है)।
29. अंतःकाष्ठ (Heartwood) जल संवहन के लिए अयोग्य क्यों हो जाती है ?
(A) क्योंकि कोशिकाएं जीवित हो जाती हैं
(B) वाहिकाओं में टाइलोसिस और कार्बनिक पदार्थों के जमाव के कारण
(C) क्योंकि इसमें जाइलम नहीं होता
(D) अत्यधिक पानी के कारण
सही उत्तर है:
(B) वाहिकाओं में टाइलोसिस और कार्बनिक पदार्थों के जमाव के कारण
विस्तृत कारण:
अंतःकाष्ठ (Heartwood) तने के मध्य में स्थित होती है और यह निम्नलिखित कारणों से जल संवहन (Water conduction) का कार्य बंद कर देती है:
-
टाइलोसिस (Tyloses): जाइलम पैरेन्काइमा की कोशिकाएं गुब्बारे की तरह फूलकर जाइलम वाहिकाओं (Vessels) के भीतर घुस जाती हैं और उनके मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध (Block) कर देती हैं।
-
अपशिष्ट पदार्थों का जमाव: इसमें टैनिन, रेजि़न, तेल, गोंद और सुगंधित पदार्थों जैसे कार्बनिक यौगिक जमा हो जाते हैं। ये पदार्थ वाहिकाओं को ठोस और अभेद्य बना देते हैं।
-
मृत संरचना: ये सभी परिवर्तन कोशिकाओं को मृत बना देते हैं, जिससे वे भौतिक रूप से जल ले जाने में असमर्थ हो जाती हैं।
महत्व:
भले ही यह जल संवहन नहीं करती, लेकिन कार्बनिक पदार्थों के कारण यह अत्यंत कठोर और टिकाऊ हो जाती है, जो पेड़ को संरचनात्मक मजबूती प्रदान करती है और उसे सड़ने से बचाती है।
30. शरद काष्ठ (Autumn wood) के बारे में क्या सही है ?
(A) यह वसंत काष्ठ से हल्की होती है
(B) इसकी वाहिकाएं संकरी और घनत्व अधिक होता है
(C) इसमें वाहिकाएं बहुत चौड़ी होती हैं
(D) यह बहुत कम मात्रा में बनती है
सही उत्तर है:
(B) इसकी वाहिकाएं संकरी और घनत्व अधिक होता है
शरद काष्ठ (Autumn Wood) की विशेषताएँ:
सर्दियों या शरद ऋतु के दौरान, पौधे की सक्रियता कम हो जाती है, जिसके कारण संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) कम सक्रिय होता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
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वाहिकाएँ (Vessels): कैम्बियम कम सक्रिय होने के कारण कम संख्या में जाइलम तत्व बनाता है और ये वाहिकाएँ संकरी (Narrow) होती हैं।
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घनत्व (Density): संकरी कोशिकाओं और संकुचित संरचना के कारण इसका घनत्व अधिक होता है।
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रंग: यह वसंत काष्ठ की तुलना में गहरे रंग की दिखाई देती है।
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अन्य नाम: इसे ‘पश्च दारु’ (Late Wood) भी कहा जाता है।
वसंत काष्ठ और शरद काष्ठ में अंतर:
| विशेषता | वसंत काष्ठ (Spring Wood) | शरद काष्ठ (Autumn Wood) |
| कैम्बियम सक्रियता | बहुत अधिक | बहुत कम |
| वाहिका का व्यास | चौड़ी (Wide) | संकरी (Narrow) |
| काष्ठ का रंग | हल्का (Light) | गहरा (Dark) |
| घनत्व | कम (Low) | अधिक (High) |
31. जाइलम और फ्लोएम के बीच स्थित मृदूतक कोशिकाएं जो जड़ों में पाई जाती हैं :
(A) पूरक कोशिकाएं
(B) संयोजी ऊतक (Conjunctive tissue)
(C) बुलीफॉर्म कोशिकाएं
(D) मज्जा किरणें
सही उत्तर है:
(B) संयोजी ऊतक (Conjunctive tissue)
स्पष्टीकरण:
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स्थिति: जड़ों (Roots) में संवहन बंडल अरीय (Radial) होते हैं, जिसका अर्थ है कि जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग त्रिज्याओं पर स्थित होते हैं। इन जाइलम और फ्लोएम बंडलों के बीच में जो मृदूतक (Parenchyma) कोशिकाएं पाई जाती हैं, उन्हें संयोजी ऊतक कहा जाता है।
-
कार्य: द्विबीजपत्री जड़ों में, यही संयोजी ऊतक बाद में मेरिस्टेमेटिक होकर संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) के एक भाग का निर्माण करते हैं।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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पूरक कोशिकाएं (Complementary cells): ये वातरंध्र (Lenticels) के नीचे पाई जाती हैं और गैसों के विनिमय में मदद करती हैं।
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बुलीफॉर्म कोशिकाएं (Bulliform cells): ये कुछ एकबीजपत्री घासों की पत्तियों की ऊपरी एपिडर्मिस पर पाई जाती हैं जो पत्तियों के मुड़ने (Rolling) में मदद करती हैं।
-
मज्जा किरणें (Medullary rays): ये तने में दो संवहन बंडलों के बीच स्थित होती हैं।
32. द्विबीजपत्री तने के केंद्र में स्थित विकसित पैरेंकाइमा भाग क्या है ?
(A) कोर्टेक्स
(B) मज्जा (Pith)
(C) पेरीसाइकिल
(D) जाइलम
सही उत्तर है:
(B) मज्जा (Pith)
मज्जा (Pith) की विशेषताएँ:
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स्थिति: यह द्विबीजपत्री तने (Dicot Stem) के बिल्कुल केंद्र (Central core) में स्थित होता है।
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संरचना: यह बड़ी, पतली भित्ति वाली पैरेन्काइमा (Parenchyma) कोशिकाओं से बना होता है, जिनके बीच पर्याप्त अंतरकोशिकीय स्थान (Intercellular spaces) होते हैं।
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विकास: द्विबीजपत्री तने में यह अत्यधिक विकसित और स्पष्ट होता है, जबकि द्विबीजपत्री जड़ों में यह या तो बहुत छोटा होता है या अनुपस्थित होता है।
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कार्य: इसका मुख्य कार्य भोजन और पानी का संग्रह (Storage) करना है।
अन्य विकल्पों का अर्थ:
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कोर्टेक्स (Cortex): यह एपिडर्मिस और पेरीसाइकिल के बीच का भाग है।
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पेरीसाइकिल (Pericycle): यह एंडोडर्मिस के नीचे और संवहन बंडल के ऊपर की परत है।
-
जाइलम (Xylem): यह जल संवहन के लिए उत्तरदायी जटिल ऊतक है, जो मज्जा के चारों ओर संवहन बंडलों में व्यवस्थित होता है।
33. द्विबीजपत्री पत्तियों में रंध्र (Stomata) मुख्य रूप से कहाँ स्थित होते हैं ?
(A) केवल ऊपरी सतह पर
(B) केवल निचली सतह पर (Abaxial surface)
(C) दोनों सतहों पर समान रूप से
(D) किनारों पर
सही उत्तर है:
(B) केवल निचली सतह पर (Abaxial surface)
द्विबीजपत्री पत्ती (Dicot Leaf) में रंध्रों की स्थिति:
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पृष्ठाधारी संरचना (Dorsiventral Leaf): द्विबीजपत्री पत्तियों को पृष्ठाधारी पत्ती कहा जाता है क्योंकि इनकी ऊपरी और निचली सतह की संरचना अलग होती है।
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रंध्रों का वितरण: जल की हानि (वाष्पोत्सर्जन) को कम करने के लिए प्रकृति ने इन पत्तियों में रंध्रों की संख्या निचली सतह (Abaxial surface) पर अधिक रखी है। ऊपरी सतह (Adaxial surface) पर रंध्र या तो बहुत कम होते हैं या पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।
-
कार्य: निचली सतह पर होने से रंध्र सीधे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में नहीं आते, जिससे तीव्र गर्मी में भी पौधा अपने जल स्तर को बेहतर ढंग से बनाए रख पाता है।
तुलना:
-
एकबीजपत्री पत्ती (Monocot Leaf): इन्हें ‘समद्विपाश्विक’ (Isobilateral) पत्तियाँ कहते हैं। इनमें रंध्र ऊपरी और निचली, दोनों सतहों पर लगभग समान संख्या में पाए जाते हैं।
34. द्विबीजपत्री जड़ों में ‘प्रोटो जाइलम’ (Proto-xylem) की स्थिति कैसी होती है ?
(A) केंद्र की ओर (Endarch)
(B) परिधि की ओर (Exarch)
(C) बीच में
(D) बिखरी हुई
सही उत्तर है:
(B) परिधि की ओर (Exarch)
स्पष्टीकरण:
जड़ों (Roots) में जाइलम की व्यवस्था तने से बिल्कुल अलग होती है। इसे ‘Exarch’ (बाह्य आदिदारुक) स्थिति कहा जाता है:
-
प्रोटो जाइलम (Protoxylem): यह सबसे पहले बनने वाला जाइलम है। जड़ों में यह परिधि (Periphery) या बाहर की ओर स्थित होता है।
-
मेटा जाइलम (Metaxylem): यह बाद में बनने वाला जाइलम है। यह केंद्र (Center) या मज्जा की ओर स्थित होता है।
-
तुलना (Stem vs Root): इसके विपरीत, तने (Stem) में प्रोटो जाइलम केंद्र की ओर होता है, जिसे ‘Endarch’ (अंतःआदिदारुक) स्थिति कहते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
-
जड़: Exarch (प्रोटो जाइलम बाहर)
-
तना: Endarch (प्रोटो जाइलम अंदर)
35. तने में जाइलम का विन्यास कैसा होता है ?
(A) बाह्य आदिदारुक (Exarch)
(B) अंतः आदिदारुक (Endarch)
(C) रेडियल
(D) संकेंद्रित
सही उत्तर है:
(B) अंतः आदिदारुक (Endarch)
तने में जाइलम का विन्यास (Endarch Condition):
तने (Stem) में जाइलम के विकास और स्थिति को ‘Endarch’ कहा जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
-
प्रोटो जाइलम (Protoxylem): सबसे पहले बनने वाला प्राथमिक जाइलम केंद्र या मज्जा (Pith) की ओर स्थित होता है।
-
मेटा जाइलम (Metaxylem): बाद में बनने वाला जाइलम परिधि या बाहर की ओर स्थित होता है।
-
यह विन्यास द्विबीजपत्री (Dicot) और एकबीजपत्री (Monocot) दोनों प्रकार के तनों की विशेषता है।
36. घासों (Grasses) की पत्तियों में मुड़ने और खुलने में मदद करने वाली बड़ी कोशिकाएं :-
(A) रक्षी कोशिकाएं
(B) बुलीफॉर्म कोशिकाएं (Bulliform cells)
(C) सहायक कोशिकाएं
(D) मेसोफिल
सही उत्तर है:
(B) बुलीफॉर्म कोशिकाएं (Bulliform cells)
बुलीफॉर्म कोशिकाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
-
स्थिति: ये कोशिकाएं मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों, जैसे घास (Grasses) की पत्तियों की ऊपरी सतह (Adaxial epidermis) पर पाई जाती हैं। ये आकार में बड़ी, खाली और रंगहीन होती हैं।
-
कार्य (मुड़ना और खुलना): * जब पानी पर्याप्त हो: ये कोशिकाएं पानी सोखकर फूल (Turgid) जाती हैं, जिससे पत्ती की सतह खुल जाती है और वह सीधी रहती है।
-
जब पानी की कमी हो: शुष्क मौसम में पानी की कमी होने पर ये कोशिकाएं पिचक (Flaccid) जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप पत्तियां अंदर की ओर मुड़ (Roll) जाती हैं, ताकि वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा होने वाली जल की हानि को कम किया जा सके।
-
-
अनुकूलन: यह घासों में जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन (Adaptation) है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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रक्षी कोशिकाएं (Guard Cells): ये रंध्रों (Stomata) के चारों ओर होती हैं और रंध्रों के खुलने व बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
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सहायक कोशिकाएं (Subsidiary Cells): ये रक्षी कोशिकाओं के पास स्थित विशेष एपिडर्मल कोशिकाएं होती हैं।
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मेसोफिल (Mesophyll): यह पत्ती का आंतरिक ऊतक है जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) का कार्य करता है।
37. संवहन बंडलों के चारों ओर पाई जाने वाली एक कोशिकीय मोटी परत :-
(A) एपिडर्मिस
(B) बंडल शीथ (Bundle sheath)
(C) पेरीसाइकिल
(D) एंडोडर्मिस
सही उत्तर है:
(B) बंडल शीथ (Bundle sheath)
स्पष्टीकरण:
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परिभाषा: संवहन बंडलों (जाइलम और फ्लोएम) के चारों ओर मौजूद कोशिकाओं की एक सुरक्षात्मक परत को बंडल शीथ कहा जाता है।
-
एकबीजपत्री तने में: यहाँ बंडल शीथ दृढ़ोतक (Sclerenchyma) कोशिकाओं की बनी होती है, जो संवहन बंडल को मजबूती प्रदान करती है।
-
एकबीजपत्री पत्तियों में: सी4 (C4) पौधों (जैसे मक्का और गन्ना) की पत्तियों में ये कोशिकाएं बहुत विकसित होती हैं और इनमें बड़े क्लोरोप्लास्ट पाए जाते हैं। इसे ‘क्रैन्ज शारीरिक’ (Kranz Anatomy) कहा जाता है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
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एपिडर्मिस: यह पौधे का सबसे बाहरी सुरक्षात्मक आवरण है।
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पेरीसाइकिल: यह एंडोडर्मिस के नीचे की परत है जो संवहन बंडल के ठीक ऊपर होती है, लेकिन उसे पूरी तरह से घेरती नहीं है।
-
एंडोडर्मिस: यह कॉर्टेक्स की सबसे आंतरिक परत है, जो संवहन बेलन (Stele) को घेरे रहती है।
38. द्विबीजपत्री तने की एंडोडर्मिस में प्रचुर मात्रा में क्या पाया जाता है ?
(A) लिग्निन
(B) स्टार्च (Starch sheath)
(C) सुबेरिन
(D) वसा
सही उत्तर है:
(B) स्टार्च (Starch sheath)
स्पष्टीकरण:
-
स्टार्च शीथ: द्विबीजपत्री तने (Dicot Stem) में, कॉर्टेक्स की सबसे आंतरिक परत को एंडोडर्मिस कहा जाता है। इन कोशिकाओं में स्टार्च के कण (Starch grains) बहुत अधिक मात्रा में संचित होते हैं, जिसके कारण इस परत को ‘स्टार्च शीथ’ (Starch sheath) के नाम से भी जाना जाता है।
-
कार्य: यह मुख्य रूप से भोजन (कार्बोहाइड्रेट) के भंडारण का कार्य करती है।
-
अंतर: ध्यान दें कि जड़ों (Roots) की एंडोडर्मिस में स्टार्च के बजाय सुबेरिन का जमाव (कैस्पेरियन पट्टियाँ) पाया जाता है, जो जल के मार्ग को नियंत्रित करता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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लिग्निन: यह जाइलम वाहिकाओं और दृढ़ोतक (Sclerenchyma) में मजबूती के लिए पाया जाता है।
-
सुबेरिन: यह जड़ों की एंडोडर्मिस (Casparian strips) और कॉर्क में पाया जाता है।
-
वसा: यह मुख्य रूप से बीजों और कुछ विशिष्ट ऊतकों में संचित होता है।
39. मज्जा किरणें (Medullary rays) किससे विकसित होती हैं ?
(A) फ्यूजीफॉर्म इनिशियल
(B) रे-इनिशियल (Ray initials)
(C) कॉर्क कैम्बियम
(D) जाइलम फाइबर
सही उत्तर है:
(B) रे-इनिशियल (Ray initials)
स्पष्टीकरण:
संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) में दो प्रकार की मेरिस्टेमेटिक कोशिकाएं होती हैं, जो द्वितीयक वृद्धि के दौरान अलग-अलग ऊतकों का निर्माण करती हैं:
-
रे-इनिशियल (Ray initials): ये छोटी और लगभग गोलाकार कोशिकाएं होती हैं। इनके विभाजन से मज्जा किरणों (Medullary rays) या संवहन किरणों (Vascular rays) का निर्माण होता है। ये किरणें पैरेन्काइमा कोशिकाओं से बनी होती हैं।
-
कार्य: ये किरणें तने के केंद्र (मज्जा) से परिधि (छाल) की ओर अरीय संवहन (Radial conduction) करती हैं, जिससे पानी और भोजन का पार्श्व दिशा में परिवहन संभव हो पाता है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
-
फ्यूजीफॉर्म इनिशियल: ये लंबी कोशिकाएं होती हैं जो द्वितीयक जाइलम (जालिकाएं, वाहिकाएं) और द्वितीयक फ्लोएम (चालनी नलिकाएं) बनाती हैं।
-
कॉर्क कैम्बियम (Phellogen): यह तने के बाहरी भाग में पेरीडर्म (छाल का हिस्सा) बनाने के लिए उत्तरदायी है।
-
जाइलम फाइबर: ये जाइलम के घटक हैं जो पौधे को केवल यांत्रिक मजबूती प्रदान करते हैं।
40. द्वितीयक वृद्धि के दौरान सबसे पुराना ‘द्वितीयक जाइलम’ कहाँ पाया जाता है ?
(A) संवहन कैम्बियम के ठीक बाहर
(B) संवहन कैम्बियम के ठीक अंदर
(C) केंद्र (मज्जा) के सबसे पास
(D) फ्लोएम के पास
सही उत्तर है:
(C) केंद्र (मज्जा) के सबसे पास
स्पष्टीकरण:
द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के दौरान संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) की सक्रियता को समझना आवश्यक है:
-
कैम्बियम का विभाजन: संवहन कैम्बियम अंदर की ओर द्वितीयक जाइलम और बाहर की ओर द्वितीयक फ्लोएम बनाता है।
-
परतों का क्रम: जैसे-जैसे कैम्बियम नया जाइलम बनाता है, वह पुराने जाइलम को केंद्र (Pith) की ओर धकेलता जाता है।
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नया बनाम पुराना: * सबसे नया (Youngest) द्वितीयक जाइलम: यह संवहन कैम्बियम के ठीक अंदर स्थित होता है।
-
सबसे पुराना (Oldest) द्वितीयक जाइलम: यह केंद्र या मज्जा (Pith) के सबसे करीब स्थित होता है।
-
41. द्वितीयक वृद्धि शुरू होने पर सबसे पहले कौन सा सुरक्षात्मक ऊतक नष्ट होता है ?
(A) एंडोडर्मिस
(B) एपिडर्मिस
(C) पेरीसाइकिल
(D) फ्लोएम
सही उत्तर है:
(B) एपिडर्मिस
स्पष्टीकरण:
द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के दौरान जब संवहन कैम्बियम सक्रिय होता है, तो वह बड़ी मात्रा में द्वितीयक जाइलम का निर्माण करता है। इससे तने की मोटाई (Diameter) तेजी से बढ़ती है। इस प्रक्रिया का परिणाम इस प्रकार होता है:
-
दबाव (Pressure): आंतरिक ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) के बढ़ने से बाहरी ऊतकों पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है।
-
फटना (Rupturing): इस निरंतर बढ़ते दबाव के कारण सबसे पहले एपिडर्मिस (बाहरी त्वचा) खिंचकर फट जाती है और नष्ट हो जाती है।
-
प्रतिस्थापन (Replacement): नष्ट हुई एपिडर्मिस की जगह लेने और आंतरिक कोमल ऊतकों की सुरक्षा के लिए कॉर्क कैम्बियम (Phellogen) विकसित होता है, जो ‘पेरीडर्म’ (छाल का हिस्सा) बनाता है।
अन्य ऊतकों की स्थिति:
-
एंडोडर्मिस और कॉर्टेक्स: एपिडर्मिस के फटने के बाद, धीरे-धीरे कॉर्टेक्स की बाहरी कोशिकाएं भी नष्ट होने लगती हैं।
-
पेरीसाइकिल: यह गहराई में स्थित होता है और तने में यह अक्सर बना रहता है या छाल का हिस्सा बन जाता है।
-
फ्लोएम: प्राथमिक फ्लोएम कुचल जाता है (Crushed), लेकिन सुरक्षात्मक स्तर पर सबसे पहले क्षति एपिडर्मिस को ही पहुँचती है।
42. वातरंध्रों (Lenticels) के ठीक नीचे स्थित ढीली मृदूतक कोशिकाएं क्या कहलाती हैं ?
(A) मज्जा किरणें
(B) पूरक कोशिकाएं (Complementary cells)
(C) बुलीफॉर्म कोशिकाएं
(D) रक्षी कोशिकाएं
सही उत्तर है:
(B) पूरक कोशिकाएं (Complementary cells)
पूरक कोशिकाओं (Complementary cells) की विशेषताएँ:
-
निर्माण: जब कॉर्क कैम्बियम (Phellogen) वातरंध्रों वाले क्षेत्र में सक्रिय होता है, तो वह बाहर की ओर कॉर्क कोशिकाओं के बजाय रंगहीन, पतली भित्ति वाली और ढीली मृदूतक (Parenchyma) कोशिकाओं का निर्माण करता है।
-
व्यवस्था: इन कोशिकाओं के बीच में बड़े अंतरकोशिकीय स्थान (Intercellular spaces) होते हैं, जिससे गैसों का आवागमन आसानी से हो सके।
-
वातरंध्र का फटना: जैसे-जैसे इन पूरक कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है, ये बाहर की एपिडर्मिस पर दबाव डालती हैं, जिससे एपिडर्मिस फट जाती है और लेंस के आकार का वातरंध्र (Lenticel) बन जाता है।
अन्य विकल्पों का पुनरावलोकन:
-
मज्जा किरणें: ये तने के केंद्र से परिधि की ओर भोजन/जल का संवहन करती हैं।
-
बुलीफॉर्म कोशिकाएं: ये घासों की पत्तियों में पानी की कमी होने पर उन्हें मोड़ने (Rolling) का कार्य करती हैं।
-
रक्षी कोशिकाएं: ये पत्तियों के रंध्रों (Stomata) के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
43. ‘द्वितीयक कोर्टेक्स’ का वैज्ञानिक नाम क्या है ?
(A) फेलोजन
(B) फेलोडर्म (Phelloderm)
(C) फेलम
(D) पेरीसाइकिल
सही उत्तर है:
(B) फेलोडर्म (Phelloderm)
स्पष्टीकरण:
जब तने में द्वितीयक वृद्धि होती है, तो कॉर्क कैम्बियम (फेलोजन) विभाजित होकर दो तरफ नई परतें बनाता है:
-
बाहर की ओर: यह ‘फेलम’ (कॉर्क) बनाता है।
-
अंदर की ओर: यह ‘फेलोडर्म’ का निर्माण करता है, जिसे सामान्य भाषा में द्वितीयक कोर्टेक्स (Secondary Cortex) कहा जाता है।
फेलोडर्म की विशेषताएं:
-
कोशिका प्रकार: यह जीवित मृदूतक (Parenchyma) कोशिकाओं से बना होता है।
-
क्लोरोप्लास्ट: कुछ पौधों में इन कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है, जिससे ये प्रकाश संश्लेषण भी कर सकती हैं।
-
कार्य: यह मुख्य रूप से भोजन के संचय (Storage) का कार्य करता है।
अन्य विकल्पों का सारांश:
-
फेलोजन: यह ‘कॉर्क कैम्बियम’ है जो फेलोडर्म को पैदा करता है।
-
फेलम: यह बाहरी ‘कॉर्क’ परत है।
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पेरीसाइकिल: यह एंडोडर्मिस के नीचे स्थित परत है, जो जड़ों में पार्श्व जड़ों के निर्माण में सहायक होती है।
44. निम्नलिखित में से कौन सा पादप अंग कभी भी द्वितीयक वृद्धि नहीं दिखाता ?
(A) जड़
(B) तना
(C) पत्ती (Leaf)
(D) छाल
सही उत्तर है:
(C) पत्ती (Leaf)
स्पष्टीकरण:
द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) का मुख्य उद्देश्य पौधे की चौड़ाई या मोटाई (Girth) बढ़ाना होता है, जिसके लिए पार्श्व विभाज्योतक (Lateral Meristems) जैसे संवहन कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम की आवश्यकता होती है।
-
पत्तियाँ: पत्तियों में संवहन बंडल बंद (Closed) प्रकार के होते हैं, जिसका अर्थ है कि इनमें कैम्बियम नहीं पाया जाता। पत्तियाँ एक निश्चित आकार तक बढ़ने के बाद वृद्धि रोक देती हैं (Limited growth), इसलिए इनमें कभी भी द्वितीयक वृद्धि नहीं होती।
-
जड़ और तना: द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों की जड़ों और तनों में कैम्बियम की उपस्थिति के कारण द्वितीयक वृद्धि पाई जाती है।
-
छाल: छाल स्वयं द्वितीयक वृद्धि का ही एक परिणाम है, जो तने की मोटाई बढ़ने के साथ विकसित होती है।
45. मरुस्थलीय पौधों (Xerophytes) में जल हानि रोकने के लिए एपिडर्मिस पर क्या होता है?
(A) रंध्रों की अधिकता
(B) मोटी क्यूटिकल (Thick Cuticle)
(C) पतली भित्ति
(D) अंतर्कोशिकीय स्थान
सही उत्तर है:
(B) मोटी क्यूटिकल (Thick Cuticle)
मरुस्थलीय पौधों (Xerophytes) के अनुकूलन:
मरुस्थलीय पौधों को अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी वाले वातावरण में जीवित रहना पड़ता है। जल हानि (वाष्पोत्सर्जन) को कम करने के लिए उनकी एपिडर्मिस में निम्नलिखित बदलाव होते हैं:
-
मोटी क्यूटिकल: एपिडर्मिस के ऊपर क्यूटिन (Cutin) नामक मोमी पदार्थ की एक मोटी परत जमा हो जाती है, जिसे क्यूटिकल कहते हैं। यह परत पानी के वाष्पीकरण के लिए एक अभेद्य बाधा (Barrier) का कार्य करती है।
-
धँसे हुए रंध्र (Sunken Stomata): इन पौधों में रंध्र एपिडर्मिस की सतह पर होने के बजाय गहरे गड्ढों में धँसे होते हैं, ताकि हवा के सीधे संपर्क में न आएँ और जल हानि कम हो।
-
रोम (Hairs): एपिडर्मिस पर अक्सर बारीक रोम पाए जाते हैं जो नमी को रोक कर रखते हैं और तापमान कम बनाए रखते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
रंध्रों की अधिकता: यह वाष्पोत्सर्जन को बढ़ा देगा, जो मरुस्थलीय पौधों के लिए हानिकारक है। इनमें रंध्रों की संख्या अक्सर कम होती है।
-
पतली भित्ति: पतली भित्ति वाली कोशिकाएं पानी को रोकने में अक्षम होती हैं।
-
अंतर्कोशिकीय स्थान: मरुस्थलीय पौधों की एपिडर्मिस की कोशिकाएं एक-दूसरे से सटी होती हैं ताकि पानी के नुकसान की कोई गुंजाइश न रहे।
46. जाइलम फाइबर (Xylem Fibers) का मुख्य कार्य क्या है ?
(A) जल संवहन
(B) यांत्रिक मजबूती (Mechanical Support)
(C) भोजन संचय
(D) प्रकाश संश्लेषण
सही उत्तर है:
(B) यांत्रिक मजबूती (Mechanical Support)
जाइलम फाइबर की विशेषताएं और कार्य:
जाइलम ऊतक चार प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, जिनमें से जाइलम फाइबर (Xylem Fibers) की भूमिका सबसे अलग होती है:
-
संरचना: ये कोशिकाएं बहुत लंबी, संकरी और दोनों सिरों से नुकीली होती हैं। इनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन (Lignin) का अत्यधिक जमाव होता है, जिससे ये बहुत मोटी और कठोर हो जाती हैं।
-
मृत ऊतक: लिग्निफिकेशन के कारण इनका प्रोटोप्लाज्म नष्ट हो जाता है, इसलिए ये मृत कोशिकाएं होती हैं।
-
मुख्य कार्य: इनका प्राथमिक कार्य पौधे के अंगों (तने और जड़ों) को यांत्रिक सहारा (Mechanical Support) और मजबूती प्रदान करना है ताकि वे हवा या तनाव के विरुद्ध सीधे खड़े रह सकें।
-
संवहन में भूमिका: ये जल संवहन में सीधे भाग नहीं लेते, लेकिन जाइलम के अन्य तत्वों (वाहिकाओं और वाहिनिकाओं) को सहारा देते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
-
जल संवहन: यह मुख्य रूप से जाइलम वाहिकाओं (Vessels) और वाहिनिकाओं (Tracheids) द्वारा किया जाता है।
-
भोजन संचय: यह जाइलम पैरेन्काइमा का कार्य है, जो जाइलम का एकमात्र जीवित घटक है।
-
प्रकाश संश्लेषण: यह मुख्य रूप से पत्तियों के मेसोफिल (Mesophyll) ऊतक का कार्य है।
47. फ्लोएम पैरेंकाइमा (Phloem Parenchyma) किस पादप समूह में सामान्यतः अनुपस्थित होता है ?
(A) द्विबीजपत्री
(B) एकबीजपत्री (Monocots)
(C) जिम्नोस्पर्म
(D) टेरिडोफाइटा
सही उत्तर है:
(B) एकबीजपत्री (Monocots)
स्पष्टीकरण:
फ्लोएम ऊतक चार घटकों से मिलकर बना होता है: चालनी नलिकाएं, सहचर कोशिकाएं, फ्लोएम फाइबर और फ्लोएम पैरेंकाइमा।
-
एकबीजपत्री पौधों में: अधिकांश एकबीजपत्री (Monocots) पौधों के तनों में फ्लोएम पैरेंकाइमा अनुपस्थित होता है। यह इन पौधों की एक महत्वपूर्ण पहचान है।
-
द्विबीजपत्री और अन्य समूह: द्विबीजपत्री (Dicot) पौधों, जिम्नोस्पर्म और टेरिडोफाइट्स में फ्लोएम पैरेंकाइमा सामान्यतः पाया जाता है।
फ्लोएम पैरेंकाइमा के मुख्य कार्य:
-
भोजन का संचय: यह स्टार्च, वसा और अन्य पदार्थों (जैसे रेजि़न, लेटेक्स) को जमा करता है।
-
पार्श्व संवहन: यह भोजन के पार्श्व (Lateral) परिवहन में सहायता करता है।
अन्य विकल्पों का सारांश:
-
द्विबीजपत्री (Dicot): इनमें फ्लोएम पैरेंकाइमा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
-
जिम्नोस्पर्म: इनमें ‘एल्बूमिनस कोशिकाएं’ पाई जाती हैं और पैरेंकाइमा भी उपस्थित होता है।
48. जिम्नोस्पर्म के फ्लोएम में चालनी नलिकाओं के स्थान पर क्या पाया जाता है ?
(A) सहचर कोशिकाएं
(B) चालनी कोशिकाएं (Sieve cells)
(C) वाहिकाएं
(D) वाहिनिकाएं
सही उत्तर है:
(B) चालनी कोशिकाएं (Sieve cells)
स्पष्टीकरण:
जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) का फ्लोएम एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी) की तुलना में सरल होता है। इनमें दो मुख्य अंतर पाए जाते हैं:
-
चालनी कोशिकाएं (Sieve Cells): एंजियोस्पर्म में ‘चालनी नलिकाएं’ (Sieve Tubes) पाई जाती हैं जो एक के ऊपर एक व्यवस्थित होकर एक लंबी पाइप जैसी संरचना बनाती हैं। इसके विपरीत, जिम्नोस्पर्म में केवल चालनी कोशिकाएं होती हैं, जो लंबी होती हैं और उनकी पार्श्व भित्तियों पर चालनी क्षेत्र (Sieve areas) पाए जाते हैं।
-
एल्बूमिनस कोशिकाएं (Albuminous cells): जिम्नोस्पर्म में सहचर कोशिकाओं (Companion cells) का अभाव होता है। उनकी जगह एल्बूमिनस कोशिकाएं (जिन्हें ‘स्ट्रासबर्गर कोशिकाएं’ भी कहते हैं) पाई जाती हैं, जो चालनी कोशिकाओं की गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं।
अन्य विकल्पों का विवरण:
-
सहचर कोशिकाएं: ये केवल एंजियोस्पर्म में चालनी नलिकाओं के साथ पाई जाती हैं।
-
वाहिकाएं और वाहिनिकाएं: ये जाइलम के घटक हैं, फ्लोएम के नहीं। (जिम्नोस्पर्म के जाइलम में भी वाहिकाओं का अभाव होता है, केवल वाहिनिकाएं पाई जाती हैं)।
49. संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) की सक्रियता किस ओर अधिक होती है ?
(A) बाहर (फ्लोएम) की ओर
(B) अंदर (जाइलम) की ओर
(C) दोनों ओर समान
(D) केवल कोनों पर
सही उत्तर है:
(B) अंदर (जाइलम) की ओर
स्पष्टीकरण:
संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) की सक्रियता दोनों दिशाओं में एक जैसी नहीं होती:
-
अधिक सक्रियता: कैम्बियम बाहरी हिस्से (फ्लोएम) की तुलना में अंदर (जाइलम) की ओर कहीं अधिक सक्रिय होता है।
-
परिणाम: इसी कारण पौधे में द्वितीयक जाइलम (Secondary Xylem) का निर्माण बहुत अधिक मात्रा में होता है, जो अंततः ‘लकड़ी’ (Wood) का रूप ले लेता है। इसके विपरीत, द्वितीयक फ्लोएम का निर्माण काफी कम मात्रा में होता है।
-
दबाव: अधिक मात्रा में जाइलम बनने के कारण ही बाहर की ओर स्थित प्राथमिक और पुराना द्वितीयक फ्लोएम धीरे-धीरे कुचल (Crush) जाता है।
प्रमुख बिंदु:
-
अंदर की ओर: द्वितीयक जाइलम (अधिक मात्रा में)।
-
बाहर की ओर: द्वितीयक फ्लोएम (कम मात्रा में)।
50. पादप के संपूर्ण बाहरी हिस्से को ढंकने वाला ऊतक तंत्र क्या है ?
(A) संवहन ऊतक तंत्र
(B) बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र (Epidermal tissue system)
(C) भरण ऊतक तंत्र
(D) मज्जा तंत्र
सही उत्तर है:
(B) बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र (Epidermal tissue system)
स्पष्टीकरण:
यह ऊतक तंत्र पादप शरीर का सबसे बाहरी आवरण बनाता है और पर्यावरण के सीधे संपर्क में रहता है। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
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बाह्यत्वचा (Epidermis): यह कोशिकाओं की सबसे बाहरी परत है, जो आमतौर पर एक कोशिकीय मोटी होती है।
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क्यूटिकल (Cuticle): मरुस्थलीय पौधों और तनों पर एपिडर्मिस के ऊपर मोम जैसी परत होती है जो जल की हानि रोकती है।
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रंध्र (Stomata): गैसों के विनिमय और वाष्पोत्सर्जन के लिए एपिडर्मिस में छोटे छिद्र होते हैं।
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त्वचीय उपांग (Epidermal Appendages): इसमें मूल रोम (Root hairs) और तने पर पाए जाने वाले रोम (Trichomes) शामिल हैं।
अन्य ऊतक तंत्रों का संक्षिप्त परिचय:
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संवहन ऊतक तंत्र (Vascular): इसमें जाइलम और फ्लोएम शामिल हैं, जो जल और भोजन के परिवहन का कार्य करते हैं।
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भरण ऊतक तंत्र (Ground): एपिडर्मिस और संवहन बंडलों के बीच का सारा हिस्सा (जैसे कोर्टेक्स, मज्जा) इसी के अंतर्गत आता है।