Algae, Fungi, Lichens, Bryophyta

Algae (शैवाल), Fungi (कवक), Lichens (लाइकेन) और Bryophyta (ब्रायोफाइटा) 

भाग 1: शैवाल (Algae)

1. शैवालों के अध्ययन को क्या कहा जाता है?

(A) माइकोलॉजी

(B) फाइकोलॉजी

(C) डर्मेटोलॉजी

(D) टैक्सोनॉमी

सही उत्तर: (B) फाइकोलॉजी


विस्तृत व्याख्या:

शैवाल (Algae) क्लोरोफिल युक्त, सरल संरचना वाले स्वपोषी (Autotrophic) जीव होते हैं। इनके वैज्ञानिक अध्ययन को फाइकोलॉजी (Phycology) या ‘एल्गोलॉजी’ कहा जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) माइकोलॉजी (Mycology): यह विज्ञान की वह शाखा है जिसमें कवकों (Fungi) का अध्ययन किया जाता है। कवक और शैवाल में मुख्य अंतर यह है कि कवकों में क्लोरोफिल नहीं होता, जबकि शैवालों में होता है।

  2. (C) डर्मेटोलॉजी (Dermatology): यह चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) की एक शाखा है। इसमें त्वचा (Skin), नाखूनों, बालों और उनसे संबंधित रोगों का अध्ययन व उपचार किया जाता है। इसका वनस्पति विज्ञान से संबंध नहीं है।

  3. (D) टैक्सोनॉमी (Taxonomy): इसे ‘वर्गिकी’ भी कहते हैं। इसके अंतर्गत जीवों (पौधों और जंतुओं) की पहचान, नामकरण और वर्गीकरण के सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है। यह किसी विशेष जीव समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जीव जगत के वर्गीकरण का आधार है।

2. अंतरिक्ष यात्री भोजन के रूप में किस शैवाल का उपयोग करते हैं?

(A) स्पाइरोगैरा

(B) क्लोरेला

(C) लैमिनेरिया

(D) फ्यूकस

सही उत्तर: (B) क्लोरेला


विस्तृत व्याख्या:

क्लोरेला (Chlorella) एक कोशिकीय हरा शैवाल है जिसे ‘अंतरिक्ष भोजन’ (Space Food) भी कहा जाता है। अंतरिक्ष यात्री इसका उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से करते हैं:

  1. उच्च पोषक तत्व: इसमें प्रोटीन, विटामिन और खनिजों की प्रचुर मात्रा होती है।

  2. ऑक्सीजन आपूर्ति: यह प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से केबिन के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  • (A) स्पाइरोगैरा (Spirogyra): इसे ‘सिल्क ऑफ पॉन्ड’ कहा जाता है। यह मीठे पानी में पाया जाने वाला रेशेदार शैवाल है, लेकिन इसका उपयोग अंतरिक्ष भोजन के रूप में नहीं होता।

  • (C) लैमिनेरिया (Laminaria): यह एक भूरा शैवाल (Brown Algae) है। इसमें आयोडीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसका उपयोग भोजन और आयोडीन प्राप्त करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए प्राथमिक विकल्प नहीं है।

  • (D) फ्यूकस (Fucus): यह भी एक भूरा शैवाल है जिसे आमतौर पर ‘रॉकवीड’ कहा जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और पूरक आहार के रूप में किया जाता है, न कि अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा मुख्य भोजन के रूप में।

3. ‘अगर-अगर’ (Agar-Agar) किससे प्राप्त होता है?

(A) हरे शैवाल

(B) भूरे शैवाल

(C) लाल शैवाल (जिलीडियम)

(D) नीले-हरे शैवाल

सही उत्तर: (C) लाल शैवाल (जिलीडियम और ग्रेसिलेरिया)


विस्तृत व्याख्या:

अगर-अगर (Agar-Agar) एक जेली जैसा पदार्थ है जो मुख्य रूप से लाल शैवालों (Red Algae) की कुछ प्रजातियों जैसे जिलीडियम (Gelidium) और ग्रेसिलेरिया (Gracilaria) की कोशिका भित्ति से प्राप्त किया जाता है।

इसका महत्व:

  • इसका उपयोग प्रयोगशालाओं में सूक्ष्मजीवों (Microbes) के संवर्धन (Culture) के लिए माध्यम तैयार करने में किया जाता है।

  • खाद्य उद्योगों में इसका उपयोग आइसक्रीम और जेली को जमाने (Solidifying agent) के लिए किया जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) हरे शैवाल (Green Algae): इन्हें ‘क्लोरोफाइसी’ कहा जाता है। इनसे अगर-अगर प्राप्त नहीं होता। इनके उदाहरण ‘वॉल्वॉक्स’ और ‘यूलोथ्रिक्स’ हैं।

  2. (B) भूरे शैवाल (Brown Algae): इन्हें ‘फियोफाइसी’ कहा जाता है। इनसे ‘एल्जिन’ (Algin) प्राप्त होता है, जिसका उपयोग गोंद या जलरोधक कार्यों में होता है, अगर-अगर में नहीं। इसके मुख्य उदाहरण ‘सरगासम’ और ‘एक्टोकार्पस’ हैं।

  3. (D) नीले-हरे शैवाल (Blue-Green Algae): इन्हें ‘साइनोबैक्टीरिया’ कहा जाता है। ये वास्तव में बैक्टीरिया हैं, शैवाल नहीं। इनका मुख्य कार्य नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करना है, जैसे ‘एनाबीना’ और ‘नोस्टॉक’।

4. आयोडीन किस शैवाल से प्राप्त किया जाता है?

(A) लैमिनेरिया

(B) यूलोथ्रिक्स

(C) एक्टोकार्पस

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) लैमिनेरिया


विस्तृत व्याख्या:

आयोडीन मुख्य रूप से समुद्री भूरे शैवालों (Brown Algae) से प्राप्त किया जाता है, जिनमें लैमिनेरिया (Laminaria) सबसे प्रमुख है। इसे ‘केल्प’ (Kelp) के नाम से भी जाना जाता है।

महत्व:

  • लैमिनेरिया में समुद्री जल से आयोडीन को सोखने और संचित करने की अद्भुत क्षमता होती है।

  • आयोडीन हमारे शरीर में थायराइड ग्रंथि के समुचित कार्य के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी से ‘घेंघा’ (Goitre) रोग हो जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) यूलोथ्रिक्स (Ulothrix): यह एक रेशेदार हरा शैवाल (Green Algae) है जो ताजे पानी (नदियों और झीलों) में पाया जाता है। इसमें आयोडीन की मात्रा नगण्य होती है, इसलिए यह व्यावसायिक स्रोत नहीं है।

  2. (C) एक्टोकार्पस (Ectocarpus): यद्यपि यह भी एक भूरा शैवाल है, लेकिन इसका उपयोग आयोडीन निष्कर्षण के लिए नहीं किया जाता। यह मुख्य रूप से वैज्ञानिक शोध और समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।

  3. (D) इनमें से कोई नहीं: यह विकल्प गलत है क्योंकि ‘लैमिनेरिया’ आयोडीन का एक सुप्रसिद्ध और समृद्ध स्रोत है।

5. सबसे बड़ा शैवाल कौन सा है?

(A) माइक्रोसिस्टिस

(B) मैक्रोसिस्टिस (Kelp)

(C) वॉलवॉक्स

(D) क्लैमिडोमोनास

सही उत्तर: (B) मैक्रोसिस्टिस (Macrocystis / Giant Kelp)


विस्तृत व्याख्या:

मैक्रोसिस्टिस, जिसे जायंट केल्प (Giant Kelp) के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया का सबसे बड़ा शैवाल है। यह एक प्रकार का भूरा शैवाल (Brown Algae) है।

  • आकार: इसकी लंबाई 60 मीटर (लगभग 200 फीट) या उससे भी अधिक हो सकती है।

  • विकास: यह समुद्र में बहुत तेजी से बढ़ता है और घने “समुद्री जंगलों” का निर्माण करता है, जो समुद्री जीवों के लिए घर और भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं।

  • विशेषता: इसमें तैरने के लिए गैस से भरे छोटे गुब्बारे जैसी संरचनाएं (Gas bladders) होती हैं, जो इसे पानी की सतह की ओर सीधा खड़ा रहने में मदद करती हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) माइक्रोसिस्टिस (Microcystis): इसके नाम से ही स्पष्ट है (Micro = सूक्ष्म), यह एक बहुत ही छोटा नील-हरित शैवाल है। यह अक्सर जलाशयों में ‘वॉटर ब्लूम’ (Water Bloom) पैदा करता है जो पानी को जहरीला बना सकता है।

  2. (C) वॉलवॉक्स (Volvox): यह एक हरा शैवाल है जो कॉलोनी (Colony) बनाकर रहता है। यह आकार में बहुत छोटा होता है और गेंद जैसी गोल संरचना के रूप में दिखाई देता है।

  3. (D) क्लैमिडोमोनास (Chlamydomonas): यह एक एक-कोशिकीय (Unicellular) हरा शैवाल है। यह इतना छोटा होता है कि इसे केवल सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की सहायता से ही देखा जा सकता है।

6. किस शैवाल को ‘समुद्री सलाद’ कहा जाता है?

(A) सरगासम

(B) अल्वा (Ulva)

(C) कारा

(D) हाइड्रोडिक्टयॉन

सही उत्तर: (B) अल्वा (Ulva)


विस्तृत व्याख्या:

अल्वा (Ulva) एक हरा शैवाल (Green Algae) है जिसे आमतौर पर ‘समुद्री सलाद’ (Sea Lettuce) के नाम से जाना जाता है।

  • विशेषता: इसकी बनावट सलाद के पत्तों (Lettuce) के समान पतली और झिल्लीदार होती है।

  • उपयोग: यह खाने योग्य होता है और जापान सहित कई तटीय देशों में इसका उपयोग सलाद और सूप बनाने में किया जाता है। यह विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) सरगासम (Sargassum): यह एक भूरा शैवाल है। यह उत्तरी अटलांटिक महासागर में इतनी भारी मात्रा में तैरता है कि उस क्षेत्र का नाम ही इसके नाम पर ‘सरगासो सागर’ (Sargasso Sea) पड़ा है। इसे समुद्री सलाद नहीं कहा जाता।

  2. (C) कारा (Chara): इसे ‘स्टोनवॉर्ट’ (Stonewort) कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह पर कैल्शियम कार्बोनेट जमा हो जाता है, जिससे यह कठोर महसूस होता है। यह मुख्य रूप से ताजे पानी में पाया जाता है।

  3. (D) हाइड्रोडिक्टयॉन (Hydrodictyon): इसे ‘जल जाल’ (Water Net) कहा जाता है। यह एक हरा शैवाल है जिसकी कोशिकाएं आपस में जुड़कर एक जाल जैसी सुंदर संरचना बनाती हैं।

 

7. शैवालों की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है?

(A) काइटिन

(B) सेल्युलोज

(C) पेक्टिन

(D) (B) और (C) दोनों

सही उत्तर: (D) (B) और (C) दोनों


विस्तृत व्याख्या:

शैवालों (Algae) की कोशिका भित्ति (Cell Wall) एक जटिल संरचना होती है जो मुख्य रूप से सेल्युलोज और पेक्टिन से बनी होती है।

  • सेल्युलोज (Cellulose): यह एक पॉलीसैकेराइड है जो कोशिका को मजबूती और संरचनात्मक आधार प्रदान करता है।

  • पेक्टिन (Pectin): यह भित्ति को लचीलापन देता है। अधिकांश शैवालों की बाहरी परत पेक्टिन की बनी होती है जो पानी में फूलकर लसलसी हो जाती है।

  • अन्य पदार्थ: कुछ विशेष शैवालों में इसके अलावा हेमीसेल्युलोज, एल्गिन (भूरे शैवाल में) या कैल्शियम कार्बोनेट (कारा जैसे शैवालों में) भी पाया जाता है।


अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) काइटिन (Chitin): यह कवकों (Fungi) की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है। यह कीड़ों (Insects) के बाहरी कंकाल में भी पाया जाता है। शैवालों में प्राकृतिक रूप से काइटिन नहीं पाया जाता।

  2. (B) सेल्युलोज: यह उत्तर आंशिक रूप से सही है, लेकिन क्योंकि शैवालों में पेक्टिन भी एक अनिवार्य हिस्सा है, इसलिए विकल्प (D) सबसे सटीक है।

  3. (C) पेक्टिन: यह भी आंशिक रूप से सही है, लेकिन अकेले यह कोशिका भित्ति का निर्माण नहीं करता।

8. लाल सागर का लाल रंग किस शैवाल के कारण होता है?

(A) ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम

(B) क्लोरेला

(C) वॉलवॉक्स

(D) सरगासम

सही उत्तर: (A) ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम (Trichodesmium erythraeum)


विस्तृत व्याख्या:

लाल सागर (Red Sea) का नाम इसके पानी के विशिष्ट लाल रंग के कारण पड़ा है, जो वास्तव में ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम नामक एक नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) के कारण होता है।

  • प्रक्रिया: जब इस शैवाल की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है (जिसे ‘Algal Bloom’ कहा जाता है), तो इसमें मौजूद लाल रंग के वर्णक (Phycoerythrin) के कारण समुद्र की सतह का पानी लाल या भूरा दिखाई देने लगता है।

  • विशेषता: यह शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सोखने की क्षमता भी रखता है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को पोषण मिलता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) क्लोरेला (Chlorella): यह एक हरा शैवाल है। जैसा कि हमने पहले पढ़ा, इसका उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा भोजन के रूप में किया जाता है। यह पानी को हरा रंग दे सकता है, लाल नहीं।

  2. (C) वॉलवॉक्स (Volvox): यह भी एक हरा शैवाल है जो ताजे पानी (झील, तालाब) में गेंद जैसी कॉलोनी बनाकर रहता है। इसका समुद्री जल के लाल रंग से कोई संबंध नहीं है।

  3. (D) सरगासम (Sargassum): यह एक भूरा शैवाल है जो ‘सरगासो सागर’ में पाया जाता है। यद्यपि यह समुद्र में विशाल तैरते द्वीप बनाता है, लेकिन यह लाल रंग उत्पन्न नहीं करता।

 

9. ‘वॉटर सिल्क’ (Water Silk) किसे कहा जाता है?

(A) यूलोथ्रिक्स

(B) स्पाइरोगैरा

(C) ऑसिलेटोरिया

(D) कारा

सही उत्तर: (B) स्पाइरोगैरा (Spirogyra)


विस्तृत व्याख्या:

स्पाइरोगैरा एक हरा शैवाल है जिसे इसके रेशमी अहसास के कारण ‘वॉटर सिल्क’ (Water Silk) या ‘पॉन्ड सिल्क’ (Pond Silk) कहा जाता है।

  • विशेषता: इसके तंतु (Filaments) बहुत कोमल और चिकने होते हैं। जब आप इसे हाथ में लेते हैं, तो यह रेशम के धागे जैसा महसूस होता है।

  • क्लोरोप्लास्ट: इसमें सर्पिलाकार (Spiral) क्लोरोप्लास्ट पाया जाता है, जिसके कारण इसका नाम ‘स्पाइरोगैरा’ पड़ा है। यह अक्सर तालाबों और स्थिर मीठे पानी की सतह पर हरे रंग के गुच्छों के रूप में तैरता हुआ मिलता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) यूलोथ्रिक्स (Ulothrix): इसे अक्सर ‘वॉश क्लॉथ’ (Wash-cloth) कहा जाता है क्योंकि इसके तंतु स्पाइरोगैरा की तुलना में थोड़े खुरदरे होते हैं। यह भी ताजे पानी में पाया जाता है, लेकिन इसे ‘सिल्क’ नहीं कहा जाता।

  2. (C) ऑसिलेटोरिया (Oscillatoria): यह एक नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) है। इसका नाम इसकी ‘दोलन गति’ (Oscillatory movement) के कारण पड़ा है। यह धागे जैसा तो होता है, लेकिन इसमें रेशम जैसी चमक या बनावट नहीं होती।

  3. (D) कारा (Chara): जैसा कि हमने पहले चर्चा की, इसे ‘स्टोनवॉर्ट’ (Stonewort) कहा जाता है। कैल्शियम के जमाव के कारण यह कठोर होता है, इसलिए इसे सिल्क कहना संभव ही नहीं है।

 

10. प्रोटीन से भरपूर ‘स्पाइरुलिना’ क्या है?

(A) हरा शैवाल

(B) नीला-हरा शैवाल

(C) लाल शैवाल

(D) भूरा शैवाल

सही उत्तर: (B) नीला-हरा शैवाल (Blue-Green Algae / Cyanobacteria)


विस्तृत व्याख्या:

स्पाइरुलिना (Spirulina) एक सूक्ष्म नील-हरित शैवाल है जो खारे और ताजे दोनों प्रकार के पानी में पाया जाता है। इसे वर्तमान में ‘सुपरफूड’ माना जाता है।

  • प्रोटीन का भंडार: इसमें सूखे वजन का लगभग 60% से 70% तक प्रोटीन होता है, जो मांस या सोयाबीन की तुलना में कहीं अधिक है।

  • अन्य पोषक तत्व: यह विटामिन B12, आयरन और बीटा-कैरोटीन का भी उत्कृष्ट स्रोत है।

  • व्यावसायिक महत्व: राजस्थान में भी इसका उत्पादन स्वास्थ्य पूरक (Health Supplements) और कैप्सूल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) हरा शैवाल (Green Algae): हरे शैवालों में ‘क्लोरेला’ प्रोटीन से भरपूर होता है, लेकिन स्पाइरुलिना जैविक रूप से ‘साइनोबैक्टीरिया’ (नील-हरित शैवाल) की श्रेणी में आता है।

  2. (C) लाल शैवाल (Red Algae): लाल शैवाल (जैसे जिलीडियम) मुख्य रूप से ‘अगर-अगर’ प्राप्त करने के लिए जाने जाते हैं, न कि उच्च प्रोटीन सामग्री के लिए।

  3. (D) भूरा शैवाल (Brown Algae): भूरे शैवाल (जैसे लैमिनेरिया) आयोडीन और एल्जिन के मुख्य स्रोत हैं। इनकी संरचना स्पाइरुलिना से पूरी तरह भिन्न होती है।

भाग 2: कवक (Fungi)

11. कवकों की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है?

(A) सेल्युलोज

(B) काइटिन (Chitin)

(C) लिग्निन

(D) सुबेरिन

सही उत्तर: (B) काइटिन (Chitin)


विस्तृत व्याख्या:

कवकों (Fungi) की कोशिका भित्ति (Cell Wall) मुख्य रूप से काइटिन नामक एक जटिल शर्करा (Polysaccharide) से बनी होती है।

  • काइटिन की विशेषता: यह एक नाइट्रोजन युक्त पॉलीसैकेराइड है जो बहुत मजबूत और लचीला होता है। यह कवक को सुरक्षा प्रदान करता है और उसे सूखने से बचाता है।

  • रोचक तथ्य: काइटिन केवल कवकों में ही नहीं, बल्कि कीड़ों (Insects) और केकड़ों के बाहरी कंकाल (Exoskeleton) में भी पाया जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) सेल्युलोज (Cellulose): यह हरे पौधों और शैवालों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है। कवकों में (कुछ अपवादों को छोड़कर) सेल्युलोज नहीं पाया जाता।

  2. (C) लिग्निन (Lignin): यह काष्ठ ऊतकों (Woody tissues) में पाया जाने वाला एक जटिल कार्बनिक बहुलक है। यह पेड़ों की छाल और तने को मजबूती प्रदान करता है। कवकों की कोशिका भित्ति में यह नहीं होता।

  3. (D) सुबेरिन (Suberin): यह एक मोम जैसा जलरोधक पदार्थ है जो मुख्य रूप से कॉर्क (Cork) कोशिकाओं और पौधों की जड़ों की एंडोडर्मिस में पाया जाता है। यह पानी के नुकसान को रोकने का कार्य करता है।

 

12. कवकों में संचित भोजन किस रूप में होता है?

(A) स्टार्च

(B) ग्लाइकोजन और तेल

(C) सुक्रोज

(D) फ्रुक्टोज

सही उत्तर: (B) ग्लाइकोजन और तेल (Glycogen and Oil)


विस्तृत व्याख्या:

कवकों (Fungi) में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया नहीं होती है, इसलिए वे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे अपना भोजन ग्लाइकोजन और वसा (तेल की बूंदों) के रूप में संचित करते हैं।

  • ग्लाइकोजन: यह एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है। दिलचस्प बात यह है कि मनुष्यों और अन्य जानवरों में भी अतिरिक्त ऊर्जा इसी रूप में (यकृत और मांसपेशियों में) जमा होती है। यही कारण है कि कवक, पौधों की तुलना में जंतुओं के अधिक करीब माने जाते हैं।

  • तेल (Fat): कवक ऊर्जा के एक और संकेंद्रित स्रोत के रूप में लिपिड्स या तेल की बूंदों का उपयोग करते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) स्टार्च (Starch): यह हरे पौधों और शैवालों का मुख्य संचित भोजन है। स्टार्च केवल उन जीवों में पाया जाता है जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं।

  2. (C) सुक्रोज (Sucrose): इसे ‘टेबल शुगर’ या गन्ने की शर्करा भी कहते हैं। यह पौधों में भोजन के परिवहन (Transport) का मुख्य रूप है, लेकिन इसे लंबे समय तक संचित (Store) करके नहीं रखा जाता।

  3. (D) फ्रुक्टोज (Fructose): यह मुख्य रूप से फलों और फूलों में पाई जाने वाली शर्करा है। यह ऊर्जा का त्वरित स्रोत है, संचित भोजन का नहीं।

13. पेंसिलिन (Penicillin) की खोज किसने की थी?

(A) लुई पाश्चर

(B) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग

(C) रॉबर्ट कोच

(D) एडवर्ड जेनर

सही उत्तर: (B) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग


विस्तृत व्याख्या:

पेंसिलिन (Penicillin) दुनिया की पहली एंटीबायोटिक (Antibiotic) यानी ‘कवकनाशक/जीवाणुनाशक’ औषधि है। इसकी खोज 1928 में स्कॉटिश वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की थी।

  • स्रोत: इसकी खोज अचानक हुई थी जब फ्लेमिंग ने देखा कि ‘पेनिसिलियम नोटेटम’ (Penicillium notatum) नामक एक कवक (Mold) बैक्टीरिया की वृद्धि को रोक रहा है।

  • महत्व: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान घायल सैनिकों के इलाज में इसने क्रांतिकारी भूमिका निभाई, जिसके लिए 1945 में फ्लेमिंग को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) लुई पाश्चर (Louis Pasteur): इन्होंने रेबीज के टीके की खोज की और ‘पाश्चुरीकरण’ (Pasteurization) की तकनीक विकसित की। इन्हें ‘माइक्रोबायोलॉजी का जनक’ माना जाता है।

  2. (C) रॉबर्ट कोच (Robert Koch): इन्होंने टीबी (TB) और हैजा (Cholera) के जीवाणुओं की खोज की थी। इन्होंने सिद्ध किया था कि सूक्ष्मजीव बीमारियां फैलाते हैं।

  3. (D) एडवर्ड जेनर (Edward Jenner): इन्होंने दुनिया के पहले टीके (चेचक/Smallpox के टीके) की खोज की थी। इन्हें ‘इम्यूनोलॉजी का जनक’ कहा जाता है।

 

14. एककोशिकीय कवक का उदाहरण है:

(A) मशरूम

(B) खमीर (Yeast)

(C) राइजोपस

(D) एस्परजिलस

सही उत्तर: (B) खमीर (Yeast)


विस्तृत व्याख्या:

अधिकांश कवक बहुकोशिकीय (Multicellular) होते हैं, लेकिन खमीर (Yeast) एक महत्वपूर्ण अपवाद है जो एककोशिकीय (Unicellular) होता है।

  • विशेषता: खमीर एक सूक्ष्म कवक है जो ‘मुकुलन’ (Budding) की प्रक्रिया द्वारा प्रजनन करता है।

  • उपयोग: इसका उपयोग बेकरी उद्योग में ब्रेड को फुलाने और शराब (Alcohol) बनाने में किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया के लिए किया जाता है। यह विटामिन B का भी अच्छा स्रोत है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) मशरूम (Mushroom): यह एक बहुकोशिकीय कवक है जिसे ‘एगारिकस’ भी कहा जाता है। इसका शरीर तंतुओं (Hyphae) के जाल से बना होता है जिसे मायसेलियम कहते हैं।

  2. (C) राइजोपस (Rhizopus): इसे ‘ब्रेड मोल्ड’ भी कहा जाता है। यह भी एक बहुकोशिकीय कवक है जो अक्सर बासी ब्रेड या फलों पर रुई की तरह सफेद जाल के रूप में उगता है।

  3. (D) एस्परजिलस (Aspergillus): यह एक बहुकोशिकीय कवक है जिसका उपयोग साइट्रिक एसिड बनाने और प्रयोगशाला अनुसंधान में किया जाता है।

 

15. ब्रेड बनाने में किसका उपयोग किया जाता है?

(A) सैकरोमाइसीज़ सेरेविसी

(B) म्यूकर

(C) एगारिकस

(D) पक्सीनिया

सही उत्तर: (A) सैकरोमाइसीज़ सेरेविसी (Saccharomyces cerevisiae)


विस्तृत व्याख्या:

सैकरोमाइसीज़ सेरेविसी, जिसे सामान्य भाषा में ‘बेकर्स यीस्ट’ (Baker’s Yeast) कहा जाता है, ब्रेड बनाने में उपयोग होने वाला सबसे महत्वपूर्ण कवक है।

  • प्रक्रिया: जब यीस्ट को आटे में मिलाया जाता है, तो यह शर्करा का किण्वन (Fermentation) करता है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड  गैस निकलती है।

  • प्रभाव: कार्बन डाइऑक्साइड  के बुलबुलों के कारण आटा फूल जाता है और ब्रेड नरम व स्पंजी (छिद्रयुक्त) बनती है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) म्यूकर (Mucor): इसे ‘पिन मोल्ड’ कहा जाता है। यह अक्सर सड़ते हुए फलों और गीली रोटियों पर उगता है। यह ब्रेड बनाने के काम नहीं आता, बल्कि उसे खराब कर देता है।

  2. (C) एगारिकस (Agaricus): यह मशरूम का वैज्ञानिक नाम है। हालाँकि कुछ एगारिकस खाने योग्य होते हैं, लेकिन इनका उपयोग बेकिंग या किण्वन प्रक्रिया में नहीं किया जाता।

  3. (D) पक्सीनिया (Puccinia): यह एक हानिकारक परजीवी कवक है। यह गेहूं में ‘रस्ट रोग’ (Rust disease) पैदा करता है, जिससे फसल खराब हो जाती है। इसका उपयोग खाद्य निर्माण में नहीं होता।

 

16. ‘गेहूँ का काला किट्ट’ (Black Rust of Wheat) रोग कौन फैलाता है?

(A) अल्बुक़ो

(B) पक्सीनिया (Puccinia)

(C) अस्टिलागो

(D) राइजोपस

सही उत्तर: (B) पक्सीनिया (Puccinia)


विस्तृत व्याख्या:

पक्सीनिया ग्रैमिनिस ट्रिटिसाई (Puccinia graminis tritici) एक हानिकारक परजीवी कवक है जो गेहूँ की फसल में ‘काला किट्ट’ (Black Rust) रोग पैदा करता है।

  • लक्षण: इस रोग में गेहूँ के तने और पत्तों पर लंबे, भूरे या काले रंग के धब्बे (Pustules) बन जाते हैं, जो लोहे पर लगने वाली जंग (Rust) की तरह दिखते हैं।

  • प्रभाव: यह कवक पौधे के पोषक तत्वों को सोख लेता है, जिससे दाने छोटे और सिकुड़े हुए बनते हैं, और फसल की पैदावार भारी मात्रा में कम हो जाती है।

  • रोचक तथ्य: यह एक ‘विषमजातीय’ (Heteroecious) कवक है, जिसका अर्थ है कि इसे अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो अलग-अलग पौधों की आवश्यकता होती है—गेहूँ और बारबेरी (Barberry)।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) अल्बुक़ो (Albugo): यह कवक सरसों (Mustard) और मूली जैसे ‘क्रूसीफेरी’ कुल के पौधों में ‘सफेद किट्ट’ (White Rust) रोग पैदा करता है। इसमें पत्तियों पर सफेद रंग के छाले जैसे धब्बे दिखाई देते हैं।

  2. (C) अस्टिलागो (Ustilago): यह कवक अनाज में ‘कंडुआ रोग’ (Smut Disease) पैदा करता है। इसमें पौधे के दाने काले चूर्ण (Spore mass) में बदल जाते हैं।

  3. (D) राइजोपस (Rhizopus): इसे ‘ब्रेड मोल्ड’ कहा जाता है। यह मुख्य रूप से मृतोपजीवी (Saprophyte) है जो सड़ी-गली चीजों पर उगता है। यह फसलों में ‘किट्ट’ रोग नहीं फैलाता।

 

17. मशरूम क्या है?

(A) शैवाल

(B) कवक

(C) पौधा

(D) लाइकेन

सही उत्तर: (B) कवक (Fungi)


विस्तृत व्याख्या:

मशरूम, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एगारिकस (Agaricus) कहा जाता है, एक प्रकार का बहुकोशिकीय कवक (Fungi) है। यह अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता, इसलिए यह मृत कार्बनिक पदार्थों (जैसे सड़ी-गली पत्तियां या लकड़ी) से पोषण प्राप्त करता है।

 

  • प्रकृति: मशरूम में क्लोरोफिल नहीं पाया जाता, इसलिए यह ‘पौधों’ की श्रेणी में नहीं आता। यह एक मृतोपजीवी (Saprophyte) जीव है।

  • उपयोग: कई मशरूम खाने योग्य होते हैं और प्रोटीन, विटामिन D और फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत माने जाते हैं। हालांकि, कुछ जंगली मशरूम अत्यंत जहरीले (जैसे Amanita) भी होते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) शैवाल (Algae): शैवाल स्वपोषी होते हैं और उनमें क्लोरोफिल पाया जाता है। वे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण से बनाते हैं, जबकि मशरूम भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर है।

  2. (C) पौधा (Plant): पौधों में कोशिका भित्ति सेल्युलोज की होती है और वे प्रकाश संश्लेषण करते हैं। मशरूम की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है और इसमें प्रकाश संश्लेषण नहीं होता।

  3. (D) लाइकेन (Lichen): लाइकेन कोई अकेला जीव नहीं है, बल्कि यह कवक और शैवाल का सहजीवी (Symbiotic) संबंध है। मशरूम अपने आप में एक स्वतंत्र कवक है।

 

18. खाने योग्य कवक कौन सा है?

(A) एगारिकस बिस्पोरस

(B) एमैनिटा

(C) राइजोपस

(D) म्यूकर

सही उत्तर: (A) एगारिकस बिस्पोरस (Agaricus bisporus)


विस्तृत व्याख्या:

एगारिकस बिस्पोरस को सामान्यतः ‘बटन मशरूम’ (Button Mushroom) कहा जाता है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक खाया जाने वाला और व्यावसायिक रूप से उगाया जाने वाला मशरूम है।

  • पोषक तत्व: यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B और सेलेनियम जैसे खनिजों का एक उत्कृष्ट स्रोत है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बनाती है।

  • पहचान: इसका ऊपरी भाग (Cap) सफेद या हल्का भूरा होता है और यह मांसल (Meaty) बनावट का होता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) एमैनिटा (Amanita): यह कवक की एक अत्यंत जहरीली प्रजाति है। इसे ‘डेथ कैप’ (Death Cap) के नाम से भी जाना जाता है। इसे खाने से व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है, इसलिए यह खाने योग्य नहीं है।

  2. (C) राइजोपस (Rhizopus): इसे ‘ब्रेड मोल्ड’ कहा जाता है। यह सड़ी-गली चीजों और बासी ब्रेड पर काले जाल की तरह उगता है। यह खाद्य पदार्थों को खराब करता है और खाने योग्य नहीं होता।

  3. (D) म्यूकर (Mucor): यह भी एक प्रकार का मोल्ड है जो मिट्टी और सड़ते हुए कार्बनिक पदार्थों में पाया जाता है। इसका उपयोग भोजन के रूप में नहीं किया जाता, बल्कि यह भोजन को विषाक्त (Toxic) बना सकता है।

 

19. कवकों का अध्ययन क्या कहलाता है?

(A) फाइकोलॉजी

(B) माइकोलॉजी

(C) ऑन्कोलॉजी

(D) पोमोलॉजी

सही उत्तर: (B) माइकोलॉजी (Mycology)


विस्तृत व्याख्या:

कवकों (Fungi) के वैज्ञानिक अध्ययन को माइकोलॉजी कहा जाता है। ‘माइको’ (Myco) शब्द ग्रीक शब्द ‘Mykes’ से आया है जिसका अर्थ होता है ‘मशरूम’ या ‘कवक’।

  • क्षेत्र: इसके अंतर्गत कवकों की आनुवंशिकी, उनके जैव-रासायनिक गुणों, उनके वर्गीकरण और मनुष्यों के लिए उनके उपयोग (जैसे दवाएं) या हानिकारक प्रभावों (जैसे बीमारियाँ) का अध्ययन किया जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) फाइकोलॉजी (Phycology): जैसा कि हमने पहले पढ़ा, यह शैवालों (Algae) का अध्ययन है। अक्सर छात्र ‘माइकोलॉजी’ और ‘फाइकोलॉजी’ में भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए याद रखें: म से माइकोलॉजी – म से मशरूम (कवक)

  2. (C) ऑन्कोलॉजी (Oncology): यह चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो कैंसर (Cancer) और ट्यूमर के निदान, रोकथाम और उपचार से संबंधित है।

  3. (D) पोमोलॉजी (Pomology): यह बागवानी (Horticulture) की एक शाखा है जिसमें फलों (Fruits) और उनके उगाने की तकनीक का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।

 

20. सरसों का सफेद रोली (White Rust) रोग किसके कारण होता है?

(A) अल्ब्यूगो कैंडिडा

(B) पक्सीनिया

(C) फाइटोफ्थोरा

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) अल्ब्यूगो कैंडिडा (Albugo candida)


विस्तृत व्याख्या:

अल्ब्यूगो कैंडिडा एक परजीवी कवक है जो ‘क्रूसीफेरी’ कुल के पौधों (जैसे सरसों, मूली, फूलगोभी) में ‘सफेद रोली’ (White Rust) रोग पैदा करता है।

  • लक्षण: इस रोग में सरसों की पत्तियों की निचली सतह, तने और पुष्पक्रम (Flowers) पर सफेद या चमकीले क्रीम रंग के छाले जैसे उभरे हुए धब्बे (Pustules) बन जाते हैं।

  • प्रभाव: यह कवक पौधे की संरचना को विकृत कर देता है। गंभीर संक्रमण होने पर पुष्पक्रम फूलकर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है, जिससे बीज नहीं बन पाते और पैदावार में भारी कमी आती है।

  • राजस्थान के संदर्भ में: राजस्थान सरसों का प्रमुख उत्पादक राज्य है, इसलिए यहाँ की कृषि परीक्षाओं के लिए यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) पक्सीनिया (Puccinia): जैसा कि हमने पहले चर्चा की थी, पक्सीनिया मुख्य रूप से गेहूँ में काला किट्ट (Black Rust) रोग फैलाता है। यह सरसों को प्रभावित नहीं करता।

  2. (C) फाइटोफ्थोरा (Phytophthora): यह कवक आलू में ‘पछेती अंगमारी’ (Late Blight of Potato) रोग के लिए जिम्मेदार है। यह इतिहास के प्रसिद्ध ‘आयरिश अकाल’ (Irish Famine) का मुख्य कारण था।

  3. (D) इनमें से कोई नहीं: यह विकल्प गलत है क्योंकि ‘अल्ब्यूगो कैंडिडा’ ही इस रोग का सटीक कारण है।

भाग 3: लाइकेन (Lichens)

 

21. लाइकेन किन दो के बीच सहजीवी संबंध है?

(A) शैवाल और कवक

(B) शैवाल और जीवाणु

(C) कवक और उच्च पौधे

(D) कवक और जीवाणु

सही उत्तर: (A) शैवाल और कवक


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन (Lichen) कोई एक जीव नहीं है, बल्कि यह शैवाल (Algae) और कवक (Fungi) के बीच एक अत्यंत घनिष्ठ सहजीवी (Symbiotic) संबंध का परिणाम है। इस संबंध में दोनों एक-दूसरे की मदद करते हैं:

  • शैवाल का कार्य: शैवाल में क्लोरोफिल होता है, इसलिए यह प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है और कवक को उपलब्ध कराता है। (लाइकेन के शैवाल वाले भाग को ‘फाइकोब्योंट’ कहते हैं)।

  • कवक का कार्य: कवक शैवाल को आधार, सुरक्षा और जल व खनिज सोखकर प्रदान करता है। (लाइकेन के कवक वाले भाग को ‘माइकोब्योंट’ कहते हैं)।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) शैवाल और जीवाणु: कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर, शैवाल और जीवाणु (Bacteria) मिलकर लाइकेन जैसी स्थायी सहजीवी संरचना नहीं बनाते।

  2. (C) कवक और उच्च पौधे: कवक और उच्च पौधों की जड़ों के बीच के सहजीवी संबंध को ‘माइकोराइजा’ (Mycorrhiza) कहा जाता है, लाइकेन नहीं। यह पौधों को फास्फोरस सोखने में मदद करता है।

  3. (D) कवक और जीवाणु: कवक और जीवाणु आमतौर पर एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी होते हैं (जैसे एंटीबायोटिक्स का निर्माण), वे लाइकेन जैसा सहजीवन प्रदर्शित नहीं करते।


लाइकेन से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य:

लाइकेन वायु प्रदूषण (विशेषकर SO2) के सबसे अच्छे सूचक (Indicators) होते हैं। जहाँ प्रदूषण अधिक होता है, वहाँ लाइकेन नहीं उगते।

 

22. वायु प्रदूषण का सबसे अच्छा संकेतक (Indicator) क्या है?

(A) फर्न

(B) लाइकेन

(C) शैवाल

(D) नीम

सही उत्तर: (B) लाइकेन (Lichen)


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन को वायु प्रदूषण का प्राकृतिक सूचक (Natural Indicator) माना जाता है। ये पर्यावरण में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं।

  • प्रदूषण के प्रति संवेदनशीलता: लाइकेन विशेष रूप से वायु में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) की मात्रा के प्रति संवेदनशील होते हैं।

  • संकेत: जिस क्षेत्र में वायु प्रदूषण (विशेषकर उद्योगों या वाहनों का धुआँ) अधिक होता है, वहाँ लाइकेन धीरे-धीरे सूखकर नष्ट हो जाते हैं। शहरों में लाइकेन का न पाया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वहाँ की हवा प्रदूषित है।

  • अवशोषण: क्योंकि लाइकेन में कोई सुरक्षात्मक छिलका (Cuticle) नहीं होता, वे सीधे हवा से पोषक तत्व और प्रदूषक दोनों सोख लेते हैं, जिससे प्रदूषित हवा में वे जीवित नहीं रह पाते।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) फर्न (Fern): ये छायादार और नम स्थानों पर उगने वाले अपुष्पक पौधे (Pteridophytes) हैं। हालांकि ये पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं, लेकिन इन्हें ‘प्रदूषण संकेतक’ के रूप में मानक नहीं माना जाता।

  2. (C) शैवाल (Algae): शैवाल मुख्य रूप से जल प्रदूषण के सूचक हो सकते हैं (जैसे ‘अल्गल ब्लूम’ पानी में पोषक तत्वों की अधिकता को दर्शाता है), लेकिन वायु प्रदूषण मापने में इनका उपयोग नहीं होता।

  3. (D) नीम (Neem): नीम एक औषधीय पेड़ है जो प्रदूषण को कम करने (CO2 सोखने और ऑक्सीजन देने) में मदद करता है, लेकिन यह स्वयं प्रदूषण के प्रति इतना संवेदनशील नहीं है कि ‘संकेतक’ के रूप में उपयोग किया जा सके।

 

23. लिटमस पत्र (Litmus paper) किससे प्राप्त किया जाता है?

(A) रोसेला लाइकेन

(B) क्लेडोनिया

(C) ग्राफिस

(D) पारमेलिया

सही उत्तर: (A) रोसेला लाइकेन (Roccella Lichen)


विस्तृत व्याख्या:

लिटमस (Litmus) एक प्राकृतिक रंजक (Dye) है, जिसे मुख्य रूप से रोसेला टिनक्टोरिया (Roccella tinctoria) नामक लाइकेन से प्राप्त किया जाता है।

  • अम्ल-क्षार सूचक: इसका उपयोग रसायन विज्ञान में यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि कोई विलयन अम्लीय (Acidic) है या क्षारीय (Basic)।

  • रंग परिवर्तन: नीला लिटमस पत्र अम्ल के संपर्क में आने पर लाल हो जाता है, जबकि लाल लिटमस पत्र क्षार के संपर्क में आने पर नीला हो जाता है।

  • प्रकृति: लिटमस का प्राकृतिक रंग बैंगनी (Mauve) होता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) क्लेडोनिया (Cladonia): इसे ‘रेनडियर मॉस’ (Reindeer Moss) भी कहा जाता है। यह ठंडे प्रदेशों में पाया जाता है और रेनडियर जैसे जानवरों के भोजन के काम आता है। इससे लिटमस प्राप्त नहीं होता।

  2. (C) ग्राफिस (Graphis): इसे ‘लिपि लाइकेन’ (Script Lichen) कहा जाता है क्योंकि इसकी संरचना कागज पर लिखी किसी लिपि जैसी दिखाई देती है। इसका उपयोग लिटमस बनाने में नहीं किया जाता।

  3. (D) पारमेलिया (Parmelia): इसे ‘पत्थर का फूल’ या ‘चरिला’ भी कहते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से मसालों के रूप में और मिर्गी (Epilepsy) जैसी बीमारियों की औषधि बनाने में किया जाता है।

 

24. ‘रेन्डियर मॉस’ (Reindeer Moss) क्या है?

(A) ब्रायोफाइटा

(B) लाइकेन (Cladonia)

(C) कवक

(D) शैवाल

सही उत्तर: (B) लाइकेन


विस्तृत व्याख्या:

‘रेन्डियर मॉस’ (Reindeer Moss) वास्तव में कोई ‘मॉस’ (ब्रायोफाइटा) नहीं है, बल्कि यह क्लेडोनिया रेंगिफेरिना (Cladonia rangiferina) नामक एक लाइकेन है।

  • नाम का कारण: इसे ‘रेन्डियर मॉस’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों (Tundra regions) में रेन्डियर (Reindeer) और ‘कैरibou’ जैसे जानवरों का मुख्य शीतकालीन भोजन है।

  • संरचना: यह बहुत अधिक शाखित (Branched) होता है और दिखने में झाड़ी जैसा लगता है। इसकी वृद्धि बहुत धीमी होती है।

  • विशेषता: यह अत्यधिक ठंड बर्दाश्त कर सकता है और उन क्षेत्रों में उगता है जहाँ अन्य वनस्पतियाँ जीवित नहीं रह पातीं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) ब्रायोफाइटा (Bryophyta): वास्तविक ‘मॉस’ इसी समूह के अंतर्गत आते हैं। चूँकि क्लेडोनिया एक लाइकेन (शैवाल + कवक) है, इसलिए यह ब्रायोफाइटा नहीं है। ‘मॉस’ शब्द का प्रयोग इसके केवल दिखने के कारण किया जाता है।

  2. (C) कवक (Fungi): लाइकेन में कवक का हिस्सा होता है, लेकिन अकेले कवक को ‘रेन्डियर मॉस’ नहीं कहा जा सकता। लाइकेन एक सहजीवी संबंध है।

  3. (D) शैवाल (Algae): इसी तरह, शैवाल लाइकेन का केवल एक घटक है, पूर्ण संरचना नहीं।

 

25. मृदा निर्माण (Soil formation) में कौन सहायक है?

(A) केवल शैवाल

(B) लाइकेन

(C) केवल कवक

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (B) लाइकेन


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन को मृदा निर्माण (Soil formation) की प्रक्रिया में ‘अग्रणी जीव’ (Pioneer species) माना जाता है। यह नग्न चट्टानों पर उगकर उन्हें मिट्टी में बदलने की शुरुआत करता है।

  • प्रक्रिया: लाइकेन चट्टानों की सतह पर उगते समय कुछ खास तरह के कार्बनिक अम्ल (जैसे लाइकैनिक एसिड) छोड़ते हैं।

  • अपक्षय (Weathering): ये अम्ल धीरे-धीरे कठोर चट्टानों को गलाकर उन्हें छोटे-छोटे कणों में तोड़ देते हैं।

  • मिट्टी का बनना: जब ये लाइकेन मर जाते हैं, तो इनका कार्बनिक पदार्थ चट्टानों के महीन कणों के साथ मिल जाता है, जिससे प्रारंभिक पतली मिट्टी की परत बनती है। इसी मिट्टी पर बाद में काई (Moss) और छोटे पौधे उग पाते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) केवल शैवाल (Algae): अधिकांश शैवाल जलीय होते हैं या नम स्थानों पर पाए जाते हैं। वे चट्टानों को तोड़ने या मृदा निर्माण में सीधी और प्रमुख भूमिका नहीं निभाते।

  2. (C) केवल कवक (Fungi): कवक मृतोपजीवी होते हैं और सड़ी-गली चीजों पर उगते हैं। वे मिट्टी में मौजूद कार्बनिक पदार्थों का अपघटन तो करते हैं, लेकिन कठोर चट्टानों से मृदा निर्माण की शुरुआत अकेले नहीं कर सकते।

 

26. पेड़ों की छाल पर उगने वाले लाइकेन को क्या कहते हैं?

(A) कोर्टिकोल्स

(B) सेक्सीकोल्स

(C) टेरीकोल्स

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) कोर्टिकोल्स (Corticolous)


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन जिस आधार (Substratum) पर उगते हैं, उसके आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। पेड़ों की छाल (Bark) पर उगने वाले लाइकेन को कोर्टिकोल्स कहा जाता है।

  • विशेषता: ये लाइकेन पेड़ों के तनों और शाखाओं की बाहरी सतह से नमी और हवा से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। ये पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते, केवल उसे आधार के रूप में उपयोग करते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) सेक्सीकोल्स (Saxicolous): ये लाइकेन चट्टानों (Rocks) या पत्थरों पर उगते हैं। जैसा कि हमने पिछले प्रश्न में पढ़ा, ये चट्टानों के अपक्षय और मृदा निर्माण में सहायक होते हैं।

  2. (C) टेरीकोल्स (Terricolous): ये लाइकेन मिट्टी (Soil) पर उगते हैं। ये अक्सर खुले मैदानों या रेगिस्तानी इलाकों की ऊपरी सतह पर पाए जाते हैं।

  3. (D) इनमें से कोई नहीं: यह विकल्प गलत है क्योंकि ‘कोर्टिकोल्स’ छाल पर उगने वाले लाइकेन का सटीक वैज्ञानिक नाम है।

 

27. लाइकेन में प्रजनन अंग कौन सा है?

(A) सोरिडियम

(B) एपोथीसियम

(C) इसिडियम

(D) उपरोक्त सभी

सही उत्तर: (D) उपरोक्त सभी


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन एक सहजीवी जीव है, इसलिए इसमें प्रजनन की प्रक्रिया काफी विशिष्ट होती है। इसमें कायिक (Vegetative), अलैंगिक और लैंगिक तीनों प्रकार के प्रजनन अंग पाए जाते हैं:

  • (A) सोरिडियम (Soridium): यह लाइकेन में कायिक प्रवर्धन का सबसे सामान्य तरीका है। ये छोटे, धूल जैसे कण होते हैं जिनमें शैवाल की कुछ कोशिकाएं कवक के तंतुओं से घिरी रहती हैं। हवा या पानी के साथ बिखरने पर ये नया लाइकेन बना लेते हैं।

  • (B) एपोथीसियम (Apothecium): यह लाइकेन के कवक वाले भाग (Mycobiont) का लैंगिक प्रजनन अंग है। यह दिखने में प्याले या तश्तरी के आकार की संरचना होती है, जिसमें बीजाणु (Spores) बनते हैं।

  • (C) इसिडियम (Isidium): ये लाइकेन की ऊपरी सतह पर छोटी, बेलनाकार या डंठल जैसी संरचनाएं होती हैं। ये भी नए लाइकेन को जन्म देने में सहायक होती हैं और प्रकाश संश्लेषण की सतह को भी बढ़ाती हैं।


अन्य विकल्पों का महत्व:

चूँकि सोरिडियम, एपोथीसियम और इसिडियम तीनों ही लाइकेन के वंश विस्तार या प्रजनन की विभिन्न विधियों से जुड़े हैं, इसलिए विकल्प (D) सबसे सही उत्तर है।

 

28. ‘ओल्ड मैन्स बीयर्ड’ किसे कहा जाता है?

(A) असनिया (Usnea)

(B) लेकानोरा

(C) ग्राफिस

(D) पेल्टिगेरा

सही उत्तर: (A) असनिया (Usnea)


विस्तृत व्याख्या:

असनिया (Usnea) एक झाड़ीदार लाइकेन है, जिसे इसके विशिष्ट दिखावट के कारण ‘ओल्ड मैन्स बीयर्ड’ (Old Man’s Beard) या ‘बूढ़े आदमी की दाढ़ी’ कहा जाता है।

  • विशेषता: यह पेड़ों की शाखाओं से नीचे की ओर लटकता हुआ पाया जाता है। इसका रंग हल्का हरा या स्लेटी होता है और यह बारीक धागों या उलझी हुई दाढ़ी जैसा दिखता है।

  • औषधीय उपयोग: असनिया से ‘असनिक एसिड’ (Usnic Acid) प्राप्त किया जाता है, जो एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। इसका उपयोग घावों को भरने और संक्रमण रोकने वाली क्रीम बनाने में किया जाता है।

  • प्रदूषण सूचक: यह लाइकेन भी वायु प्रदूषण के प्रति बहुत संवेदनशील होता है और केवल शुद्ध हवा वाले क्षेत्रों (जैसे घने जंगलों या पहाड़ों) में ही पनपता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) लेकानोरा (Lecanora): इसे ‘डिस्क लाइकेन’ भी कहा जाता है। यह आमतौर पर चट्टानों या दीवारों पर चपटी परत के रूप में उगता है, लटकती हुई दाढ़ी की तरह नहीं।

  2. (C) ग्राफिस (Graphis): जैसा कि हमने पहले चर्चा की थी, इसे ‘लिपि लाइकेन’ कहते हैं क्योंकि यह सतह पर लिखावट जैसी आकृति बनाता है।

  3. (D) पेल्टिगेरा (Peltigera): इसे ‘डॉग लाइकेन’ (Dog Lichen) कहा जाता है। प्राचीन समय में इसका उपयोग कुत्ते के काटने (रेबीज) के इलाज में किया जाता था। यह जमीन पर पत्तों की तरह फैला रहता है।

 

29. मिर्गी की दवा बनाने में कौन सा लाइकेन काम आता है?

(A) पारमेलिया (Parmelia)

(B) रोसेला

(C) ग्राफिस

(D) असनिया

सही उत्तर: (A) पारमेलिया (Parmelia)


विस्तृत व्याख्या:

पारमेलिया, जिसे स्थानीय भाषा में ‘पत्थर का फूल’ या ‘चरिला’ भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण लाइकेन है जिसका उपयोग आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में सदियों से किया जा रहा है।

  • मिर्गी का उपचार: पारमेलिया की कुछ प्रजातियों (जैसे Parmelia perlata) का उपयोग मिर्गी (Epilepsy) के दौरों को नियंत्रित करने वाली औषधियां बनाने में किया जाता है।

  • मसाले के रूप में: क्या आप जानते हैं? राजस्थान और भारत के अन्य हिस्सों में इसे ‘ग्राम मसाला’ के एक मुख्य घटक के रूप में भी उपयोग किया जाता है। यह व्यंजनों को एक खास खुशबू और स्वाद प्रदान करता है।

  • अन्य उपयोग: इसका उपयोग घाव भरने, सूजन कम करने और श्वसन संबंधी समस्याओं के इलाज में भी किया जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) रोसेला (Roccella): जैसा कि हमने पहले पढ़ा, रोसेला का मुख्य उपयोग लिटमस पत्र (Litmus paper) बनाने के लिए प्राकृतिक रंजक (Dye) प्राप्त करने में होता है, न कि मिर्गी की दवा में।

  2. (C) ग्राफिस (Graphis): इसे ‘लिपि लाइकेन’ कहा जाता है। इसका कोई महत्वपूर्ण औषधीय उपयोग मिर्गी के संदर्भ में ज्ञात नहीं है।

  3. (D) असनिया (Usnea): इसे ‘ओल्ड मैन्स बीयर्ड’ कहते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से एंटीबायोटिक (असनिक एसिड) प्राप्त करने के लिए किया जाता है, न कि मिर्गी के उपचार के लिए।

 

30. लाइकेन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?

(A) थियोफ्रेस्टस

(B) अरस्तू

(C) लिनियस

(D) प्लिनी

सही उत्तर: (A) थियोफ्रेस्टस (Theophrastus)


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन (Lichen) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग यूनानी दार्शनिक और वनस्पतिशास्त्री थियोफ्रेस्टस ने किया था।

  • थियोफ्रेस्टस का योगदान: इन्हें ‘वनस्पति विज्ञान का जनक’ (Father of Botany) कहा जाता है। इन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Historia Plantarum’ में पौधों का विस्तृत वर्गीकरण किया और उसी दौरान इन विशिष्ट जीवों के लिए ‘लाइकेन’ शब्द का उपयोग किया।

  • अर्थ: मूल रूप से यह शब्द पेड़ों की छाल पर होने वाली सतही वृद्धि या उभार को दर्शाने के लिए प्रयोग किया गया था।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) अरस्तू (Aristotle): ये थियोफ्रेस्टस के गुरु थे और इन्हें ‘जीव विज्ञान का जनक’ (Father of Biology) कहा जाता है। इन्होंने जंतुओं के वर्गीकरण पर अधिक कार्य किया, लेकिन लाइकेन शब्द का श्रेय इन्हें नहीं जाता।

  2. (C) लिनियस (Carolus Linnaeus): इन्हें ‘वर्गिकी का जनक’ (Father of Taxonomy) कहा जाता है। इन्होंने द्वि-नाम पद्धति (Binomial Nomenclature) दी। इन्होंने लाइकेन को ‘शैवालों’ की श्रेणी में रखा था, लेकिन शब्द की खोज इन्होंने नहीं की थी।

  3. (D) प्लिनी (Pliny the Elder): ये एक प्रसिद्ध रोमन विद्वान थे जिन्होंने ‘Naturalis Historia’ लिखी थी। इन्होंने पौधों के औषधीय गुणों पर चर्चा की, लेकिन लाइकेन शब्द के प्रथम प्रयोक्ता ये नहीं थे।

 

भाग 4: ब्रायोफाइटा (Bryophyta)

31. पादप जगत का ‘उभयचर’ (Amphibians) किसे कहा जाता है?

(A) थैलोफाइटा

(B) ब्रायोफाइटा

(C) टेरिडोफाइटा

(D) जिम्नोस्पर्म

सही उत्तर: (B) ब्रायोफाइटा (Bryophyta)


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइटा वर्ग के पौधों को ‘पादप जगत का उभयचर’ कहा जाता है क्योंकि ये स्थल (जमीन) पर जीवित तो रह सकते हैं, लेकिन इन्हें अपने लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction) के लिए जल की अनिवार्य आवश्यकता होती है।

  • उभयचर क्यों? जैसे मेंढक (जंतु जगत का उभयचर) जमीन पर रहता है लेकिन अंडे देने के लिए पानी में जाता है, ठीक उसी तरह ब्रायोफाइटा के नर युग्मक (Antherozoids) तैरकर मादा युग्मक तक पहुँचने के लिए पानी का सहारा लेते हैं।

  • विशेषता: इनमें वास्तविक जड़, तना और पत्तियां नहीं होतीं, बल्कि उनके जैसी संरचनाएं (जैसे राइजोइड्स) पाई जाती हैं।

  • उदाहरण: मॉस (Moss), रिक्सिया (Riccia), और मार्चेंटिया (Marchantia)।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) थैलोफाइटा (Thallophyta): इस समूह में मुख्य रूप से शैवाल आते हैं जो पूरी तरह से जलीय होते हैं। इनका शरीर एक ‘थैलस’ जैसा होता है।

  2. (C) टेरिडोफाइटा (Pteridophyte): इन्हें ‘पादप जगत का सरीसृप’ (Reptiles of Plant Kingdom) कहा जाता है। ये पहले वास्तविक स्थलीय पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक (Xylem & Phloem) विकसित हुए।

  3. (D) जिम्नोस्पर्म (Gymnosperm): ये ‘नग्नबीजी’ पौधे होते हैं (जैसे चीड़, साइकस)। ये पूर्णतः विकसित स्थलीय पौधे हैं और प्रजनन के लिए जल पर निर्भर नहीं होते।

 

32. किस ब्रायोफाइट को ‘बोग मॉस’ (Bog Moss) या ‘पीट मॉस’ कहते हैं?

(A) रिक्सिया

(B) स्फैग्नम (Sphagnum)

(C) फ्युनेरिया

(D) मर्चेंटिया

सही उत्तर: (B) स्फैग्नम (Sphagnum)


विस्तृत व्याख्या:

स्फैग्नम एक बहुत ही महत्वपूर्ण ब्रायोफाइट (मॉस) है, जिसे इसके विशिष्ट गुणों के कारण ‘बोग मॉस’ (Bog Moss), ‘पीट मॉस’ (Peat Moss) या ‘कॉटन मॉस’ भी कहा जाता है।

  • पीट का निर्माण: यह कवक और जीवाणुओं की वृद्धि को रोकता है, जिससे यह दलदली इलाकों (Bogs) में मरकर जमा होता रहता है और हजारों वर्षों में कोयले की प्रारंभिक अवस्था ‘पीट’ (Peat) में बदल जाता है। इसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।

  • जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity): स्फैग्नम अपने वजन से 18 से 25 गुना अधिक पानी सोख सकता है।

  • उपयोग: * माली इसका उपयोग पौधों को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए उन्हें गीला रखने में करते हैं।

    • प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसका उपयोग ‘सर्जिकल कॉटन’ (रुई) के स्थान पर पट्टियों के रूप में किया गया था क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) रिक्सिया (Riccia): यह एक सरल लिवरवर्ट है जो नम दीवारों और मिट्टी पर उगता है। इसमें स्फैग्नम जैसी जल धारण क्षमता या पीट निर्माण के गुण नहीं होते।

  2. (C) फ्युनेरिया (Funaria): इसे ‘कोर्ड मॉस’ (Cord Moss) कहा जाता है। यह प्रयोगशालाओं में अध्ययन के लिए सबसे सामान्य मॉस है, लेकिन इसे ‘पीट मॉस’ नहीं कहते।

  3. (D) मर्चेंटिया (Marchantia): यह भी एक लिवरवर्ट है। इसका उपयोग प्राचीन काल में यकृत (Liver) की बीमारियों के इलाज में किया जाता था, इसलिए इसे ‘लिवरवर्ट’ कहते हैं।

 

33. ब्रायोफाइट्स में जड़ों के स्थान पर क्या पाया जाता है?

(A) मूलाभास (Rhizoids)

(B) संवहन ऊतक

(C) तना

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) मूलाभास (Rhizoids)


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) निम्न श्रेणी के पौधे होते हैं, जिनमें वास्तविक जड़ों (True Roots) का अभाव होता है। उनकी जगह पर धागे जैसी पतली संरचनाएं पाई जाती हैं जिन्हें मूलाभास या राइजोइड्स कहते हैं।

  • कार्य: राइजोइड्स का मुख्य कार्य पौधे को मिट्टी या आधार (Substratum) से चिपकाए रखना और मिट्टी से जल व खनिजों का अवशोषण करना है।

  • प्रकृति: ये एककोशिकीय (जैसे रिक्सिया में) या बहुकोशिकीय (जैसे मॉस में) हो सकते हैं।

  • अंतर: वास्तविक जड़ों में ‘संवहन ऊतक’ (जाइलम और फ्लोएम) होते हैं, जबकि राइजोइड्स में ये नहीं पाए जाते।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) संवहन ऊतक (Vascular Tissues): ब्रायोफाइट्स को ‘अ-संवहनी’ (Non-vascular) पादप कहा जाता है क्योंकि इनमें जाइलम और फ्लोएम पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं। संवहन ऊतक सबसे पहले टेरिडोफाइट्स (जैसे फर्न) में विकसित हुए थे।

  2. (C) तना (Stem): ब्रायोफाइट्स में वास्तविक तना नहीं होता। इनमें केवल ‘तने जैसी’ (Stem-like) संरचना होती है, जिसे विशेष रूप से मॉस में देखा जा सकता है।

 

34. सबसे छोटा ब्रायोफाइट कौन सा है?

(A) जूसोप्सिस (Zoopsis)

(B) डॉसोनिया

(C) रिक्सिया

(D) फ्युनेरिया

सही उत्तर: (A) जूसोप्सिस (Zoopsis)


विस्तृत व्याख्या:

जूसोप्सिस (Zoopsis) को पादप जगत के ब्रायोफाइटा समूह का सबसे छोटा पौधा माना जाता है।

  • आकार: यह इतना सूक्ष्म होता है कि इसे स्पष्ट रूप से देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है।

  • संरचना: इसकी संरचना अत्यंत सरल होती है और यह मुख्य रूप से नम और छायादार स्थानों पर पाया जाता है।

अन्य विकल्प और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. (B) डॉसोनिया (Dawsonia): यह जूसोप्सिस के बिल्कुल विपरीत है। डॉसोनिया सबसे बड़ा ब्रायोफाइट (मॉस) है। इसकी ऊँचाई लगभग 40 से 60 सेमी तक हो सकती है, जो कि ब्रायोफाइट्स के हिसाब से काफी अधिक है।

  2. (C) रिक्सिया (Riccia): यह एक सामान्य लिवरवर्ट है जो गीली मिट्टी और चट्टानों पर हरे रंग की गुलाब (Rosette) जैसी आकृति में उगता है। यह न तो सबसे छोटा है और न ही सबसे बड़ा।

  3. (D) फ्युनेरिया (Funaria): इसे ‘कोर्ड मॉस’ कहते हैं। यह एक सामान्य मॉस है जिसका उपयोग स्कूलों और कॉलेजों की प्रयोगशालाओं में ब्रायोफाइटा के अध्ययन के लिए सबसे अधिक किया जाता है।

 

35. ब्रायोफाइटा में मुख्य पादप शरीर कैसा होता है?

(A) युग्मकोद्भिद (Gametophyte)

(B) बीजाणुद्भिद (Sporophyte)

(C) द्विगुणित

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) युग्मकोद्भिद (Gametophyte)


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइटा के जीवन चक्र में युग्मकोद्भिद (Gametophyte) अवस्था मुख्य और स्वतंत्र होती है। यह इस समूह की सबसे बड़ी विशेषता है।

  • अगुणित (n): मुख्य पादप शरीर ‘अगुणित’ (Haploid) होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें गुणसूत्रों का केवल एक सेट होता है।

  • स्वतंत्र अस्तित्व: यह अवस्था हरी, प्रकाश-संश्लेषी (भोजन बनाने वाली) और स्वतंत्र होती है। यह आधार से ‘राइजोइड्स’ (मूलाभास) द्वारा जुड़ी रहती है।

  • प्रजनन: यही अवस्था नर अंग (एन्थेरिडियम) और मादा अंग (आर्कगोनियम) का निर्माण करती है, जिनसे युग्मक (Gametes) बनते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) बीजाणुद्भिद (Sporophyte): ब्रायोफाइटा में बीजाणुद्भिद अवस्था बहुत छोटी होती है और यह पूरी तरह से युग्मकोद्भिद पर निर्भर (Dependent) होती है। इसके विपरीत, उच्च पौधों (जैसे नीम, आम या फर्न) में ‘बीजाणुद्भिद’ मुख्य पादप शरीर होता है।

  2. (C) द्विगुणित (Diploid): ‘द्विगुणित’ शब्द का संबंध बीजाणुद्भिद (2n) अवस्था से है। चूँकि ब्रायोफाइटा का मुख्य शरीर अगुणित (n) होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।

 

36. किसमें संवहन ऊतक (Xylem & Phloem) अनुपस्थित होते हैं?

(A) टेरिडोफाइटा

(B) ब्रायोफाइटा

(C) जिम्नोस्पर्म

(D) एंजियोस्पर्म

सही उत्तर: (B) ब्रायोफाइटा


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइटा वर्ग के पौधों में जल और भोजन के परिवहन के लिए संवहन ऊतक (Vascular Tissues) यानी जाइलम और फ्लोएम पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं। इसी कारण इन्हें ‘अ-संवहनी पादप’ (Non-vascular plants) कहा जाता है।

  • परिवहन कैसे होता है? इनमें पानी और खनिजों का संवहन एक कोशिका से दूसरी कोशिका में ‘विसरण’ (Diffusion) या ‘परासरण’ (Osmosis) की सरल प्रक्रिया द्वारा होता है।

  • आकार का कारण: क्योंकि इनमें संवहन ऊतक नहीं होते, इसलिए ये पौधे बहुत अधिक ऊँचाई तक नहीं बढ़ पाते और जमीन के पास छोटे आकार में ही रहते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) टेरिडोफाइटा (Pteridophyta): ये पृथ्वी के प्रथम वास्तविक स्थलीय पौधे हैं जिनमें जाइलम और फ्लोएम विकसित हुए। इसलिए इन्हें ‘संवहनी अपुष्पोद्भिद’ (Vascular Cryptogams) भी कहा जाता है।

  2. (C) जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms): इनमें संवहन ऊतक पूर्णतः विकसित होते हैं। ये बड़े वृक्ष (जैसे चीड़, देवदार) होते हैं जिन्हें पानी ऊपर तक पहुँचाने के लिए मजबूत जाइलम की आवश्यकता होती है।

  3. (D) एंजियोस्पर्म (Angiosperms): ये सबसे आधुनिक ‘आवृतबीजी’ पौधे हैं (जैसे आम, नीम, सरसों)। इनमें संवहन ऊतक (Xylem Vessels और Phloem Companion Cells) अपने सबसे विकसित रूप में पाए जाते हैं।

 

37. मर्चेंटिया (Marchantia) किस समूह का सदस्य है?

(A) लिवरवर्ट (Liverwort)

(B) मॉस (Moss)

(C) शैवाल

(D) कवक

सही उत्तर: (A) लिवरवर्ट (Liverwort)


विस्तृत व्याख्या:

मर्चेंटिया (Marchantia) ब्रायोफाइटा समूह के अंतर्गत ‘हेपेटिकोप्सिडा’ (Hepaticopsida) वर्ग का सदस्य है, जिन्हें सामान्यतः लिवरवर्ट कहा जाता है।

  • नाम का कारण: प्राचीन काल में माना जाता था कि इनका आकार ‘यकृत’ (Liver) जैसा होता है और ये यकृत की बीमारियों के इलाज में सहायक होते हैं, इसलिए इन्हें ‘लिवरवर्ट’ नाम दिया गया।

  • विशेषता: मर्चेंटिया का पादप शरीर पृष्ठ-अधारी (Dorsiventral) और चपटा (Thalloid) होता है। इसकी ऊपरी सतह पर विशिष्ट ‘जेमा कप’ (Gemma Cups) पाए जाते हैं, जो अलैंगिक प्रजनन में मदद करते हैं।

  • प्रजनन अंग: इसमें नर जनन अंग को ‘एन्थेरिडियोफोर’ और मादा जनन अंग को ‘आर्कगोनियोफोर’ कहते हैं, जो छाते जैसी संरचनाओं के रूप में दिखाई देते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) मॉस (Moss): मॉस (जैसे फ्युनेरिया या स्फैग्नम) ब्रायोफाइटा के दूसरे वर्ग ‘ब्रायोप्सिडा’ में आते हैं। इनका शरीर मर्चेंटिया की तरह चपटा नहीं होता, बल्कि सीधा और पत्तीदार (Leafy) होता है।

  2. (C) शैवाल (Algae): मर्चेंटिया में बहुकोशिकीय जनन अंग और भ्रूण (Embryo) बनता है, जो शैवालों में नहीं होता।

  3. (D) कवक (Fungi): कवक अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, जबकि मर्चेंटिया हरा होता है और प्रकाश संश्लेषण करता है।

 

38. ब्रायोफाइटा के नर जननांग को क्या कहते हैं?

(A) एंथ्रीडियम (Antheridium)

(B) आर्कीगोनियम

(C) ऊगोनियम

(D) स्पोरेंजियम

सही उत्तर: (A) एंथ्रीडियम (Antheridium)


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइटा में जनन अंग बहुकोशिकीय होते हैं और उनके चारों ओर कोशिकाओं की एक सुरक्षात्मक परत (Jacket layer) पाई जाती है।

  • एंथ्रीडियम (Antheridium): यह ब्रायोफाइटा का नर जननांग है। यह गदा के आकार (Club-shaped) की संरचना होती है। इसके अंदर नर युग्मक बनते हैं जिन्हें ‘एंथ्रोजोइड्स’ (Antherozoids) कहा जाता है। ये युग्मक द्विकशाभिक (Biflagellated) होते हैं, यानी इनमें दो धागे जैसी पूंछ होती है जिससे ये पानी में तैर सकते हैं।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

  1. (B) आर्कीगोनियम (Archegonium): यह ब्रायोफाइटा का मादा जननांग है। यह सुराही के आकार (Flask-shaped) की संरचना होती है, जिसके निचले फूले हुए भाग (Venter) में एक ‘अण्ड’ (Egg) स्थित होता है।

  2. (C) ऊगोनियम (Oogonium): यह मुख्य रूप से शैवालों (Algae) और कुछ कवकों में पाया जाने वाला मादा जननांग है। ब्रायोफाइटा जैसे उच्च पादप समूहों में इसका उपयोग नहीं होता।

  3. (D) स्पोरेंजियम (Sporangium): इसे ‘बीजाणुधानी’ कहते हैं। यह वह संरचना है जिसमें बीजाणु (Spores) बनते हैं। यह जनन अंग नहीं है, बल्कि बीजाणुद्भिद (Sporophyte) का एक हिस्सा है जो अलैंगिक प्रजनन से संबंधित है।

 

39. मादा जननांग ‘आर्कीगोनियम’ का आकार कैसा होता है?

(A) सुराहीनुमा (Flask shaped)

(B) गोल

(C) चपटा

(D) लंबा

सही उत्तर: (A) सुराहीनुमा (Flask shaped)


विस्तृत व्याख्या:

ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा जैसे पादप समूहों में मादा जननांग को आर्कीगोनियम (Archegonium) कहा जाता है। इसकी संरचना एक विशिष्ट सुराही या फ्लास्क की तरह होती है।

  • संरचना के भाग: आर्कीगोनियम के मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:

    1. गर्दन (Neck): ऊपरी लंबा और संकरा भाग।

    2. अंडधा (Venter): निचला फूला हुआ भाग, जिसमें मादा युग्मक यानी ‘अण्ड’ (Egg) सुरक्षित रहता है।

  • कार्य: निषेचन के समय नर युग्मक (Antherozoids) तैरते हुए सुराही की गर्दन से होते हुए अंडधा तक पहुँचते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) गोल (Round): कुछ शैवालों के जननांग गोल हो सकते हैं, लेकिन आर्कीगोनियम अपनी विशिष्ट फ्लास्क जैसी आकृति के लिए जाना जाता है।

  2. (C) चपटा (Flat): ब्रायोफाइटा का मुख्य पादप शरीर (जैसे मर्चेंटिया) चपटा हो सकता है, लेकिन उसके जननांग चपटे नहीं होते।

  3. (D) लंबा (Long): हालाँकि आर्कीगोनियम की गर्दन लंबी होती है, लेकिन संपूर्ण अंग का आकार केवल ‘लंबा’ न होकर ‘सुराहीनुमा’ कहना अधिक सटीक है।

 

40. प्रथम स्थलीय पौधे (First Land Plants) माने जाते हैं?

(A) ब्रायोफाइट्स

(B) शैवाल

(C) कवक

(D) जीवाणु

सही उत्तर: (A) ब्रायोफाइट्स


विस्तृत व्याख्या:

विकासवादी क्रम (Evolutionary sequence) के अनुसार, ब्रायोफाइट्स को ही प्रथम स्थलीय पौधे (First Land Plants) माना जाता है।

  • जियोलॉजिकल टाइम: ये पौधे लगभग 470 मिलियन वर्ष पहले ‘पैलियोजोइक महाकल्प’ (Paleozoic Era) के दौरान पानी से निकलकर जमीन पर पहली बार स्थापित हुए थे।

  • अनुकूलन: जमीन पर जीवित रहने के लिए इनमें ‘क्यूटिकल’ (Cuticle) जैसी परत विकसित हुई जो पानी को वाष्पित होने से रोकती थी।

  • सीमा: हालाँकि ये जमीन पर आ गए थे, लेकिन इन्हें ‘अपूर्ण स्थलीय’ कहा जाता है क्योंकि प्रजनन के लिए ये अभी भी जल पर निर्भर थे। (पूर्णतः सफल स्थलीय पौधे टेरिडोफाइट्स को माना जाता है क्योंकि उनमें संवहन ऊतक विकसित हो गए थे)।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) शैवाल (Algae): ये मुख्य रूप से जलीय जीव हैं। यद्यपि ये प्रकाश संश्लेषी हैं, लेकिन ये स्थलीय आवास के अनुकूल नहीं होते।

  2. (C) कवक (Fungi): कवक पौधे नहीं हैं, बल्कि ये मृतोपजीवी जीव हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।

  3. (D) जीवाणु (Bacteria): ये एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं, जिन्हें ‘पौधों’ की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

 

भाग 5: मिश्रित प्रश्न (Mixed Questions)

41. शैवाल और कवक का सहजीवन क्या कहलाता है?

(A) हेलोटिज्म (Helotism)

(B) परजीविता

(C) मृतोपजीविता

(D) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) हेलोटिज्म (Helotism)


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन में शैवाल और कवक के बीच के विशिष्ट सहजीवी संबंध को वैज्ञानिक भाषा में ‘हेलोटिज्म’ (Helotism) कहा जाता है।

  • हेलोटिज्म का अर्थ: यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक साथी (कवक) दूसरे साथी (शैवाल) पर अधिकार रखता है, लेकिन उसे जीवित रखने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ भी प्रदान करता है। इसे ‘स्वामी और दास’ (Master and Slave) का संबंध भी कहा जाता है।

    • कवक (स्वामी): यह शैवाल को सुरक्षा, जल और खनिज देता है।

    • शैवाल (दास): यह बदले में प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाकर कवक को देता है।

  • महत्व: यह संबंध इतना घनिष्ठ होता है कि दोनों मिलकर एक बिल्कुल नए जीव ‘लाइकेन’ की तरह व्यवहार करते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) परजीविता (Parasitism): इसमें एक जीव को लाभ होता है और दूसरे को हानि। लेकिन लाइकेन में दोनों को लाभ होता है, इसलिए यह परजीविता नहीं है।

  2. (C) मृतोपजीविता (Saprophytism): इसमें जीव मृत और सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं। लाइकेन जीवित शैवाल और कवक का मेल है, इसलिए यह विकल्प गलत है।

 

42. एल.एस.डी. (LSD) किससे प्राप्त होता है?

(A) कवक 

(B) शैवाल

(C) लाइकेन

(D) जीवाणु

सही उत्तर: (A) कवक (Claviceps)


विस्तृत व्याख्या:

LSD का पूरा नाम लाइसर्जिक एसिड डाई-इथाइल-एमाइड (Lysergic Acid Diethylamide) है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली भ्रम पैदा करने वाली (Hallucinogenic) दवा है।

  • स्रोत: यह ‘क्लेविसेप्स परप्यूरिया’ (Claviceps purpurea) नामक कवक से प्राप्त होता है। यह कवक मुख्य रूप से रागी (Rye) के पौधों पर ‘अर्कोट’ (Ergot) रोग पैदा करता है।

  • प्रभाव: यह मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति को ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई देने लगती हैं जो वास्तव में वहां नहीं होतीं (Hallucinations)।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) शैवाल (Algae): शैवालों का उपयोग भोजन (जैसे स्पाइरुलिना) या अगर-अगर (Agar-agar) प्राप्त करने में किया जाता है, नशीले पदार्थों या LSD के निर्माण में नहीं।

  2. (C) लाइकेन (Lichen): लाइकेन से औषधियां (जैसे मिर्गी के लिए पारमेलिया) और रंग (लिटमस) तो मिलते हैं, लेकिन इनसे LSD जैसा मतिभ्रमकारी पदार्थ प्राप्त नहीं होता।

  3. (D) जीवाणु (Bacteria): जीवाणुओं का उपयोग मुख्य रूप से प्रतिजैविक (Antibiotics) और किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया में होता है।

 

43. प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए कौन सा शैवाल सर्वोत्तम है?

(A) स्पाइरुलिना

(B) फ्युनेरिया

(C) म्यूकर

(D) सरगासम

सही उत्तर: (A) स्पाइरुलिना (Spirulina)


विस्तृत व्याख्या:

स्पाइरुलिना एक नीला-हरा शैवाल (Blue-green algae) है, जिसे वर्तमान में ‘सुपरफूड’ माना जाता है। यह प्रोटीन का सबसे समृद्ध प्राकृतिक स्रोत है।

  • प्रोटीन की मात्रा: इसमें लगभग 60% से 70% तक प्रोटीन पाया जाता है, जो सोयाबीन या मांस की तुलना में बहुत अधिक है।

  • उपयोग: * इसका उपयोग कुपोषण को दूर करने के लिए खाद्य पूरक (Food Supplement) के रूप में किया जाता है।

    • अंतरिक्ष यात्री: अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री प्रोटीन और अन्य विटामिनों की पूर्ति के लिए इसी शैवाल का उपयोग करते हैं क्योंकि यह बहुत कम मात्रा में अधिक पोषण देता है।

  • अन्य तत्व: इसमें विटामिन $B_{12}$, आयरन और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) फ्युनेरिया (Funaria): यह एक ब्रायोफाइट (मॉस) है, शैवाल नहीं। इसका उपयोग प्रोटीन स्रोत के रूप में नहीं किया जाता।

  2. (C) म्यूकर (Mucor): यह एक कवक (Fungus) है, जो अक्सर सड़ी-गली चीजों या ब्रेड पर उगता है। यह खाने योग्य नहीं है।

  3. (D) सरगासम (Sargassum): यह एक भूरा शैवाल (Brown algae) है। यद्यपि इसमें खनिज (जैसे आयोडीन) पाए जाते हैं, लेकिन प्रोटीन की प्रचुरता के लिए स्पाइरुलिना ही सर्वोत्तम माना जाता है।

 

44. ‘हॉर्नवर्ट’ (Hornwort) किसे कहा जाता है?

(A) एंथोसेरोस (Anthoceros)

(B) रिक्सिया

(C) मर्चेंटिया

(D) स्फैग्नम

सही उत्तर: (A) एंथोसेरोस (Anthoceros)


विस्तृत व्याख्या:

एंथोसेरोस को सामान्यतः ‘हॉर्नवर्ट’ (Hornwort) के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसका बीजाणुद्भिद (Sporophyte) देखने में किसी जानवर के सींग (Horn) जैसा प्रतीत होता है।

  • नाम का कारण: एंथोसेरोस का स्पोरोफाइट सुई या सींग की तरह लंबा और सीधा होता है, जो इसके चपटे पादप शरीर (Thallus) से ऊपर की ओर निकलता है।

  • विशेषता: इसमें ‘इंटरकैलेरी मेरिस्टेम’ (Intercalary Meristem) पाया जाता है, जिसके कारण इसका स्पोरोफाइट लगातार बढ़ता रहता है। यह विशेषता इसे अन्य ब्रायोफाइट्स से अलग बनाती है।

  • सहजीवन: एंथोसेरोस के थैलस के अंदर नोस्टॉक (Nostoc) नामक नील-हरित शैवाल पाया जाता है, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) में मदद करता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) रिक्सिया (Riccia): इसे केवल ‘लिवरवर्ट’ कहा जाता है। इसका स्पोरोफाइट बहुत सरल होता है और सींग जैसी आकृति नहीं बनाता।

  2. (C) मर्चेंटिया (Marchantia): यह भी एक ‘लिवरवर्ट’ है। इसके जननांग छाते जैसे (Umbrella-shaped) होते हैं, जिन्हें आर्कीगोनियोफोर और एन्थेरिडियोफोर कहते हैं।

  3. (D) स्फैग्नम (Sphagnum): जैसा कि हमने पहले पढ़ा, इसे ‘पीट मॉस’ या ‘बोग मॉस’ कहा जाता है, हॉर्नवर्ट नहीं।

 

45. कवक और शैवाल के बीच की कड़ी किसे माना जाता है?

(A) लाइकेन

(B) जीवाणु

(C) विषाणु

(D) ब्रायोफाइटा

सही उत्तर: (A) लाइकेन (Lichen)


विस्तृत व्याख्या:

लाइकेन को कवक (Fungi) और शैवाल (Algae) के बीच की एक महत्वपूर्ण सहजीवी कड़ी माना जाता है। यह कोई एकल जीव नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग प्रजातियों के एक साथ रहने से बनी संरचना है।

  • कड़ी क्यों? लाइकेन में कवक और शैवाल दोनों के गुण मौजूद होते हैं। कवक इसे आधार और सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि शैवाल प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से भोजन बनाता है। इनके बीच का संबंध इतना घनिष्ठ होता है कि इन्हें अलग-अलग पहचानना मुश्किल होता है।

  • वैज्ञानिक नाम: लाइकेन में शैवाल वाले भाग को ‘फाइकोब्योंट’ (Phycobiont) और कवक वाले भाग को ‘माइकोब्योंट’ (Mycobiont) कहा जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) जीवाणु (Bacteria): जीवाणु एककोशकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं। इनका कवक और शैवाल के बीच की कड़ी के रूप में कोई संबंध नहीं है।

  2. (C) विषाणु (Virus): विषाणु को ‘सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी’ माना जाता है, न कि कवक और शैवाल के बीच की।

  3. (D) ब्रायोफाइटा (Bryophyta): ये पूर्ण विकसित बहुकोशकीय पौधे हैं। इन्हें ‘शैवाल और टेरिडोफाइटा’ के बीच की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि ये जल से थल की ओर विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

46. ‘पाइरेनॉइड’ (Pyrenoids) किसमें पाए जाते हैं?

(A) शैवाल की क्लोरोप्लास्ट में

(B) कवक में

(C) लाइकेन में

(D) मनुष्य में

सही उत्तर: (A) शैवाल की क्लोरोप्लास्ट में


विस्तृत व्याख्या:

पाइरेनॉइड (Pyrenoids) शैवालों (Algae) के क्लोरोप्लास्ट में पाई जाने वाली विशिष्ट सूक्ष्म संरचनाएं हैं, जो मुख्य रूप से भोजन के भंडारण से जुड़ी होती हैं।

  • संरचना: एक पाइरेनॉइड के केंद्र में प्रोटीन (Protein) का एक कोर होता है, जिसके चारों ओर स्टार्च (Starch) की परतें जमा होती हैं।

  • कार्य: इनका मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण के दौरान बनने वाले भोजन (कार्बोहाइड्रेट) को स्टार्च के रूप में संग्रहित करना है। यह अधिकांश हरे शैवालों (Chlorophyceae) की एक प्रमुख पहचान है।

  • स्थिति: ये क्लोरोप्लास्ट के भीतर स्थित होते हैं और इनकी संख्या एक या एक से अधिक हो सकती है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) कवक (Fungi): कवकों में क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए उनमें क्लोरोप्लास्ट भी अनुपस्थित होता है। अतः पाइरेनॉइड पाए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। कवकों में भोजन मुख्य रूप से ग्लाइकोजन (Glycogen) और तेल की बूंदों के रूप में संचित होता है।

  2. (C) लाइकेन (Lichen): यद्यपि लाइकेन में शैवाल वाला भाग होता है, लेकिन पाइरेनॉइड विशेष रूप से शैवाल की कोशिका के आंतरिक अंग (क्लोरोप्लास्ट) की संरचना है, न कि संपूर्ण लाइकेन की।

  3. (D) मनुष्य (Human): मनुष्य के शरीर में क्लोरोप्लास्ट नहीं होता। मनुष्य में संचित भोजन ग्लाइकोजन के रूप में यकृत (Liver) और मांसपेशियों में जमा होता है।

 

47. कौन सा कवक ‘अनाज का जहर’ (Ergotism) पैदा करता है?

(A) क्लेविसेप्स (Claviceps)

(B) एस्परजिलस

(C) राइजोपस

(D) खमीर

सही उत्तर: (A) क्लेविसेप्स (Claviceps)


विस्तृत व्याख्या:

अनाज का जहर (Ergotism) एक गंभीर बीमारी है जो मनुष्यों और पशुओं में संक्रमित अनाज खाने से होती है। इसका मुख्य कारक क्लेविसेप्स परप्यूरिया (Claviceps purpurea) नामक कवक है।

  • संक्रमण: यह कवक मुख्य रूप से रागी (Rye) और कभी-कभी गेहूँ या बाजरे के फूलों पर हमला करता है। यह अनाज के दानों की जगह काले या बैंगनी रंग की सख्त संरचनाएं बना देता है जिन्हें ‘अर्गोट’ (Ergot) कहते हैं।

  • प्रभाव: इन अर्गोट संरचनाओं में ‘लाइसर्जिक एसिड’ जैसे जहरीले उपक्षार (Alkaloids) होते हैं। जब इन्हें अनजाने में खा लिया जाता है, तो यह रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे अंगों में जलन (St. Anthony’s Fire) महसूस होती है और गंभीर स्थिति में अंग सड़कर अलग भी हो सकते हैं।

  • उपयोग: जैसा कि हमने पहले चर्चा की थी, इसी कवक से मतिभ्रमकारी दवा LSD भी तैयार की जाती है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) एस्परजिलस (Aspergillus): यह कवक मूंगफली या अनाज के भंडारण के दौरान ‘एफ्लाटॉक्सिन’ (Aflatoxin) नामक जहर पैदा करता है, जो कैंसरकारी हो सकता है, लेकिन यह ‘अर्कोटिज्म’ पैदा नहीं करता।

  2. (C) राइजोपस (Rhizopus): इसे सामान्यतः ‘ब्रेड मोल्ड’ कहा जाता है। यह बासी रोटी या ब्रेड पर कपास जैसी सफेदी के रूप में उगता है। यह अनाज का जहर (Ergotism) पैदा करने के लिए जिम्मेदार नहीं है।

  3. (D) खमीर (Yeast): यह एक लाभकारी एककोशिकीय कवक है जिसका उपयोग शराब उद्योग और बेकरी (ब्रेड बनाने) में किया जाता है। यह जहरीला नहीं होता।

 

48. ‘आइसलैंड मॉस’ क्या है?

(A) लाइकेन 

(B) शैवाल

(C) कवक

(D) ब्रायोफाइटा

सही उत्तर: (A) लाइकेन (Cetraria islandica)


विस्तृत व्याख्या:

‘आइसलैंड मॉस’ (Iceland Moss) वास्तव में एक लाइकेन है, न कि कोई मॉस (ब्रायोफाइटा)। इसका वैज्ञानिक नाम सेट्रारिया आइसलैंडिका (Cetraria islandica) है।

  • नाम का कारण: यह आइसलैंड के पहाड़ी और ठंडे क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। चूँकि यह दिखने में काई (Moss) जैसा लगता है, इसलिए ऐतिहासिक रूप से इसे ‘मॉस’ कहा जाने लगा।

  • उपयोग: * भोजन: इसमें ‘लाइकेनिन’ (Lichenin) नामक कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होता है, इसलिए इसे धोकर और पीसकर आटे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आइसलैंड और उत्तरी यूरोप के लोग इसे सूप और दलिया बनाने में उपयोग करते हैं।

    • औषधि: इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में गले की खराश, खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (B) शैवाल (Algae): यह अकेले शैवाल नहीं है, बल्कि कवक और शैवाल का सहजीवी मिश्रण (लाइकेन) है।

  2. (C) कवक (Fungi): कवक लाइकेन का केवल एक हिस्सा है।

  3. (D) ब्रायोफाइटा (Bryophyta): वास्तविक ‘मॉस’ इसी समूह में आते हैं। आइसलैंड मॉस केवल नाम के कारण भ्रम पैदा करता है, जबकि जैविक रूप से यह एक लाइकेन है।

 

49. पौधों में सबसे पहले ‘भ्रूण’ (Embryo) किसमें बना?

(A) शैवाल

(B) ब्रायोफाइटा

(C) कवक

(D) जीवाणु

सही उत्तर: (B) ब्रायोफाइटा


विस्तृत व्याख्या:

विकासवादी दृष्टि से ब्रायोफाइटा पहले ऐसे पादप समूह हैं जिनमें भ्रूण (Embryo) का निर्माण हुआ। इसी कारण ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म को सम्मिलित रूप से ‘एम्ब्रियोफाइटा’ (Embryophyta) कहा जाता है।

  • भ्रूण निर्माण की प्रक्रिया: निषेचन के बाद बना युग्मनज (Zygote) तुरंत विश्राम अवस्था में नहीं जाता, बल्कि समसूत्री विभाजन (Mitosis) द्वारा एक बहुकोशिकीय ‘भ्रूण’ में विकसित होता है। यह भ्रूण मादा जननांग (आर्कीगोनियम) के भीतर ही सुरक्षित रहता है और वहीं से पोषण प्राप्त करता है।

  • महत्व: स्थल पर जीवन जीने के लिए भ्रूण का निर्माण एक आवश्यक विकास था, क्योंकि यह अगली पीढ़ी के पौधे को प्रतिकूल परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान करता है।

अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?

  1. (A) शैवाल (Algae): अधिकांश शैवालों में निषेचन के बाद बना युग्मनज (Zygote) सीधे अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा बीजाणु बना लेता है। इनमें भ्रूण का निर्माण नहीं होता

  2. (C) कवक (Fungi): कवक पादप जगत का हिस्सा नहीं हैं और इनमें भ्रूण जैसी कोई संरचना नहीं पाई जाती। इनमें जनन बीजाणुओं (Spores) के माध्यम से होता है।

  3. (D) जीवाणु (Bacteria): ये एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं। इनमें लैंगिक प्रजनन की प्रक्रिया बहुत सरल होती है और भ्रूण बनने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

 

50. चट्टानों पर उगने वाले पौधों को क्या कहते हैं?

(A) लिथोफाइट्स

(B) हैलोफाइट्स

(C) हाइड्रोफाइट्स

(D) मेसोफाइट्स

सही उत्तर: (A) लिथोफाइट्स (Lithophytes)


विस्तृत व्याख्या:

वे पौधे जो मिट्टी के बजाय सीधे चट्टानों, पत्थरों या पथरीली सतहों पर उगते हैं, उन्हें लिथोफाइट्स (Lithophytes) कहा जाता है।

  • विशेषता: इन पौधों की जड़ें या मूलाभास (Rhizoids) चट्टानों की दरारों में घुसकर वहां जमा पोषक तत्वों और नमी को सोखते हैं।

  • उदाहरण: कई प्रकार के लाइकेन, मॉस (ब्रायोफाइट्स) और कुछ विशिष्ट फर्न या ऑर्किड लिथोफाइट्स की श्रेणी में आते हैं।

  • राजस्थान के संदर्भ में: राजस्थान के अरावली पर्वतीय क्षेत्रों (जैसे सिरोही, उदयपुर) की चट्टानों पर इस प्रकार की वनस्पति प्रचुर मात्रा में देखी जा सकती है।

अन्य विकल्प क्या दर्शाते हैं?

  1. (B) हैलोफाइट्स (Halophytes): ये लवणमृदोद्भिद पौधे होते हैं, जो अधिक नमक वाली मिट्टी (जैसे समुद्र तटीय दलदल या राजस्थान की सांभर झील के आसपास) में उगते हैं।

  2. (C) हाइड्रोफाइट्स (Hydrophytes): इन्हें जलोद्भिद कहते हैं। ये पूरी तरह या आंशिक रूप से जल में डूबे रहते हैं (जैसे कमल, जलकुंभी)।

  3. (D) मेसोफाइट्स (Mesophytes): इन्हें समोद्भिद कहते हैं। ये उन सामान्य स्थानों पर उगते हैं जहाँ न तो बहुत अधिक नमी हो और न ही बहुत अधिक सूखा (जैसे आम, नीम, सरसों)।

 

 

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